Monday, July 6, 2026
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डूंगरपुर में सामाजिक न्याय की गुहार: तीन साल से भटक रहा युवक, पंचों से मांगी सुनवाई

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डूंगरपुर जिले के आसपुर क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां वाडा घोडिया गांव निवासी धनजी मीणा ने वागड़ चौखला भील समाज के 12 गांवों के पंचों के समक्ष न्याय की गुहार लगाई है। धनजी ने लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया है कि पारिवारिक और जमीन विवाद के चलते सामाजिक फैसले में उसे गलत तरीके से दोषी ठहरा दिया गया, जबकि वास्तविक दोषी आज भी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं।

पीड़ित धनजी का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से वह सामाजिक और पारिवारिक विवादों के कारण गांव से दूर रहने को मजबूर है। उसने आरोप लगाया कि उसके ही परिवार और कुछ रिश्तेदारों ने मिलकर उसके घर को तीन बार तुड़वाया, उसके माता-पिता के साथ अत्याचार किया और समाज में उसकी छवि खराब करने की कोशिश की।

आवेदन में धनजी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने एक महिला को उसके घर लाकर विवाद खड़ा किया और रिश्तों के नाम पर गलत जानकारी फैलाकर उसे बदनाम किया। इतना ही नहीं, गांव के कुछ लोगों ने भी बाद में माना कि उसके साथ अन्याय हुआ है और उसे साजिश के तहत फंसाया गया।

धनजी का कहना है कि जिन लोगों ने गलत किया, उनके खिलाफ अब तक कोई सामाजिक फैसला नहीं हुआ और वे खुलेआम गांव में रह रहे हैं, जबकि उसे बेवजह दोषी मानकर समाज से अलग रखा गया।

पीड़ित ने समाज के पंचों से मांग की है कि 12 गांवों की पंचायत बुलाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और उसे न्याय दिलाया जाए। उसने यह भी आग्रह किया है कि समाज के वरिष्ठ पंचों की मौजूदगी में सभी पक्षों को बुलाकर सच्चाई सामने लाई जाए।

इस मामले ने क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना दिया है। अब देखना यह होगा कि समाज के पंच इस गंभीर मामले में क्या फैसला लेते हैं और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की याचिका खारिज की, कपिल सिब्बल ने रखी दलील लेकिन नहीं मिल पाई राहत

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सुप्रीम कोर्ट में तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान टीएमसी का पक्ष सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने रखा।नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। कपिल सिब्बल ने टीएमसी का पक्ष कोर्ट में रखा लेकिन टीएमसी को राहत नहीं मिल सकी और टीएमसी की याचिका खारिज कर दी गई। कपिल सिब्बल ने कहा, “इलेक्शन कमीशन एकतरफा फैसले नहीं ले सकता।” उन्होंने कहा, “हमें आशंका है कि ACEO के आदेश से काउंटिंग में गड़बड़ी होगी।”TMC ने क्या कहा?
टीएमसी ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइजर के तौर पर राज्य कर्मचारियों की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही है? संविधान के अनुच्छेद 324 की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। चुनाव आयोग मनमानी कर रहा है। चुनाव आयोग राज्य के कर्मचारियों की नीयत पर सवाल खड़े कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप ऐसे आरोप नहीं लगा सकते। राज्य के कर्मचारी हो या केंद्र के, सभी चुनाव आयोग के तहत काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं कि वहां सिर्फ काउंटिंग सुपरवाइजर होंगे। इसके अलावा प्रत्याशियों के प्रतिनिधि होंगे। अन्य अधिकारी होंगें। किसी तरह की आशंका का कोई आधार नहीं बनता।

टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका
टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने एडिशनल सीईओ के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने कहा कि एक कर्मचारी राज्य सरकार का भी होगा। आयोग के जवाब को सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया। आयोग के सर्कुलर पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई दखल नहीं दिया।

TMC को राहत नहीं
TMC को राहत नहीं मिली है और उसकी याचिका खारिज कर दी गई है।

4 मई को सामने आने हैं चुनाव के नतीजे
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 2 चरणों में विधानसभा चुनाव हुए थे। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। चुनाव के नतीजे 4 मई 2026 को सामने आएंगे।

प्रेम प्रसंग में उलझा पति पत्नी को छोड़कर फरार, जेवर और नकदी लेकर गायब; बच्चों के साथ दर-दर भटक रही महिला

चित्रकूट और आसपास के क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने पति पर धोखे, संबंध छिपाने और नकदी-जेवर लेकर फरार होने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता शिवदुलारी, जो राजापुर महेवा घाट क्षेत्र की निवासी हैं, ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि पति ने उन्हें बहला-फुसलाकर अपने साथ लाया और बाद में दूसरी महिला के साथ फरार हो गया।

पीड़िता के अनुसार, उनके पति सम्पतलाल केवट उन्हें चित्रकूट घुमाने के बहाने लेकर आए थे। शिवदुलारी का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनके पति का पहले से किसी अन्य महिला के साथ संबंध है। उन्होंने बताया कि पति की पहली पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था और उसी दौरान उनके पुराने संबंधों की जानकारी उनसे छिपाई गई। आरोप है कि पति ने मौका पाकर करीब 25 हजार रुपये नकद और जेवरात लेकर उन्हें छोड़ दिया।मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। शिकायत में बताया गया है कि सम्पतलाल का पिछले दो वर्षों से एक महिला के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिससे घर में लगातार विवाद होता था। 15-16 अप्रैल 2026 की रात वह घर से निकला और फिर वापस नहीं लौटा। पीड़िता का आरोप है कि वह उसी महिला के साथ कहीं चला गया है। इस पूरे घटनाक्रम में पड़ोस के एक व्यक्ति पर भी संदेह जताया गया है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उसे पूरे मामले की जानकारी हो सकती है।

शिवदुलारी ने बताया कि उनके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं और अब उनके सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया है। वह पिछले कई वर्षों से मेहनत-मजदूरी कर परिवार चला रही थीं, लेकिन पति के इस कदम ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ दिया है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि उनके पति का जल्द पता लगाया जाए और उनके साथ न्याय किया जाए।

स्थानीय पुलिस को इस मामले की सूचना दे दी गई है और जांच की मांग की गई है। यह घटना न केवल पारिवारिक विश्वास के टूटने का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस तरह से महिलाओं को धोखे और शोषण का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और पीड़िता को कब तक राहत मिलती है।

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दिल्ली में बकरी चोरी कांड: लाखों की चोरी के बाद भी नहीं मिला इंसाफ, पुलिस पर समझौते का दबाव डालने के आरोप

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नई दिल्ली। राजधानी के आउटर नॉर्थ जिले के शाहबाद डेयरी थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बकरी चोरी की घटना में न सिर्फ लाखों का नुकसान हुआ, बल्कि पीड़ित को अब तक न्याय भी नहीं मिल सका। उल्टा, पुलिस पर ही समझौते का दबाव बनाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, साईं राम कॉलोनी, शाहबाद दौलतपुर निवासी अनिल ने 4 दिसंबर 2025 को अपने घर से 13 बकरियों की चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी। चोरी की यह वारदात रात 1 बजे से सुबह 4 बजे के बीच हुई, जिसमें 7 नर और 6 मादा बकरियां अज्ञात चोर उठा ले गए। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

हालांकि घटना को कई महीने बीत जाने के बावजूद न तो चोरों की गिरफ्तारी हो सकी है और न ही पीड़ित को कोई मुआवजा मिला है। इससे भी ज्यादा गंभीर आरोप यह है कि पुलिस ने फरियादी पर ₹30,000 लेकर समझौता करने का दबाव बनाया। जबकि पीड़ित का कहना है कि चोरी की कुल कीमत लाखों में है।

पीड़ित अनिल का आरोप है कि मामले में पर्याप्त सबूत और संदिग्धों की जानकारी होने के बावजूद पुलिस कार्रवाई करने में लगातार लापरवाही बरत रही है। उन्होंने कहा कि “मैं इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। पुलिस खुद समझौता करने को कह रही है, जो बेहद निराशाजनक है।”

स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतने समय बीतने के बाद भी जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो चोरों को पकड़ा जा सकता था।

इस पूरे मामले ने कानून व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब पीड़ित और स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और संबंधित पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हो।

यह मामला न केवल चोरी की एक घटना है, बल्कि न्याय व्यवस्था में भरोसे की परीक्षा भी बनता जा रहा है। अगर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।

बस्ती में गरीब परिवार के आवासीय पट्टे पर कब्जे का आरोप, न्याय के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित

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बस्ती जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक गरीब और अल्पसंख्यक परिवार ने अपने आवासीय पट्टे की जमीन पर अवैध कब्जे, प्रशासनिक लापरवाही और जान से मारने की धमकियों का आरोप लगाया है। पीड़ित कमरूज्जमा पुत्र स्वर्गीय कासिम, निवासी ग्राम पूरेहेमराज थाना छावनी, ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।

पीड़ित के अनुसार उनके पिता स्वर्गीय कासिम के नाम गाटा संख्या 148क में 8 बिस्वा भूमि का आवासीय पट्टा आवंटित हुआ था। इसी जमीन पर परिवार वर्षों से मड़हा, घारी, चरन और झोपड़ी रखकर जीवन यापन कर रहा था। आरोप है कि वर्ष 2008 में गांव के ही कुछ दबंग लोगों ने उन्हें जबरन पट्टे की जमीन से बेदखल कर दिया और तब से लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है।

कमरूज्जमा का कहना है कि गांव के रमेश सिंह, प्रवीण सिंह और अन्य लोगों ने कब्जा कर रखा है और विरोध करने पर लगातार जान-माल की धमकी दी जाती है। पीड़ित का आरोप है कि मामले में गांव के पूर्व प्रधान समेत कुछ अन्य प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं, जिसके कारण प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो पा रही।

पीड़ित ने बताया कि इस मामले में उन्होंने थाना, तहसील, जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय, अल्पसंख्यक आयोग, चकबंदी अधिकारी और उपजिलाधिकारी सहित तमाम उच्च अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक जमीन पर कब्जा नहीं दिलाया गया।

बताया जा रहा है कि चकबंदी आयुक्त द्वारा 8 फरवरी 2024 को कब्जा दिलाने का आदेश जारी किया गया था। इसके बाद राजस्व परिषद लखनऊ और जिलाधिकारी स्तर से भी कई आदेश जारी हुए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़ित का आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में भी हेराफेरी की जा रही है। तहसील में हस्तलिखित खतौनी तैयार करने वाले एक कर्मचारी पर भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने खतौनी में कट का निशान लगाकर रिकॉर्ड में बदलाव की कोशिश की। विरोध करने पर हत्या तक की धमकी मिलने की बात सामने आई है।

इतना ही नहीं, विवादित भूमि पर लगे बरगद और पाकड़ के पेड़ भी कथित तौर पर विपक्षियों द्वारा कटवा दिए गए। पीड़ित का कहना है कि इस पूरे मामले के तीन वीडियो भी सामने आए हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

कमरूज्जमा ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी विपक्षियों से मिलीभगत कर पट्टे की जमीन उनके नाम कराने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि तत्काल जांच कराकर आवासीय पट्टे की भूमि से अवैध कब्जा हटवाया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे इस परिवार को कब राहत मिलती है।

शादी के कुछ महीनों बाद ही पत्नी को घर से निकाला, दूसरी शादी की कोशिश; पीड़िता ने पुलिस से लगाई गुहार

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मधेपुरा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी के महज कुछ महीनों बाद ही एक नवविवाहिता को ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया गया। पीड़िता अंजली देवी ने आरोप लगाया है कि उसके पति ने न सिर्फ उसके साथ मारपीट की, बल्कि दूसरी शादी करने की भी कोशिश की। मामले को लेकर पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

पीड़िता के अनुसार, उसकी शादी 25 अप्रैल 2025 को हिंदू रीति-रिवाज से खापुर निवासी युवक छोटू कुमार के साथ हुई थी। शादी के दौरान उसके पिता ने अपनी हैसियत के अनुसार करीब 51 हजार रुपये और अन्य उपहार भी दिए थे। शादी के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन जल्द ही ससुराल में विवाद शुरू हो गया। अंजली का आरोप है कि पति और परिवार के अन्य सदस्य उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने लगे।

अंजली देवी ने बताया कि विवाद बढ़ने के बाद उसके साथ मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया गया। इसके बाद वह कुछ समय तक अपनी ननद के यहां रही। इसी बीच 19 फरवरी 2026 को उसे जानकारी मिली कि उसका पति दूसरी शादी करने जा रहा है। उसने तत्काल 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी, लेकिन बावजूद इसके शादी को रोका नहीं जा सका।

पीड़िता का आरोप है कि जब उसने इस मामले का विरोध किया तो उसे धमकियां भी दी गईं। वह वर्तमान में मायके में रह रही है और न्याय के लिए दर-दर भटक रही है। अंजली ने प्रशासन से मांग की है कि उसके पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा उसे न्याय दिलाया जाए।

मामले को लेकर स्थानीय पुलिस का कहना है कि शिकायत प्राप्त हुई है और जांच की जा रही है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर से दहेज, घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर कर दिया है।

कानपुर के स्कूल में शिक्षिका के सामने अभिभावक से अभद्रता, टीचर पर गंभीर आरोप; डीसीपी से शिकायत

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कानपुर के रतन लाल नगर स्थित एक निजी स्कूल में शिक्षक द्वारा अभिभावक के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। पीड़िता स्वेता अवस्थी ने आरोप लगाया है कि जब वह अपने बच्चे को लेने स्कूल पहुंचीं, तो वहां मौजूद शिक्षक ने उनके साथ अपशब्दों का प्रयोग किया और उन्हें अपमानित करते हुए स्कूल परिसर से बाहर जाने को कहा। इस घटना के बाद पीड़िता ने मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वेता अवस्थी का बच्चा राधा कृष्णा मेमोरियल एजुकेशन सेंटर में कक्षा 8 का छात्र है। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चे से जुड़ी कुछ शिकायतें स्कूल की प्रिंसिपल के सामने रखी थीं, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि जब वह दोबारा स्कूल पहुंचीं और मामले को उठाया, तो शिक्षक विकास मिश्रा ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें अपमानित किया।

पीड़िता के अनुसार, शिक्षक ने उन्हें यह तक कह दिया कि वह अपने बच्चे को घर में गलत चीजें दिखाती हैं और उन्हें तुरंत वहां से निकल जाने को कहा। इस व्यवहार से आहत होकर उन्होंने तुरंत 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को समझने की कोशिश की, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया और उन्हें उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी गई।
MD ने बोला था कि थाने जाना है थाने जाओ कोर्ट जो कोर्ट की तारीख लेकर आओ

घटना से आक्रोशित पीड़िता ने अब डीसीपी कानपुर से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यदि एक शिक्षक अभिभावकों के साथ इस तरह का व्यवहार कर सकता है, तो बच्चों के साथ उसका रवैया कैसा होगा, यह चिंता का विषय है। उन्होंने स्कूल प्रबंधन और संबंधित शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले ने एक बार फिर निजी स्कूलों में अनुशासन और शिक्षकों के व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और पीड़िता को न्याय कब तक मिल पाता है।

कैमूर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र में सड़क विवाद ने स्थानीय ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है।

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मामला जसीम अंसारी और आसपास के रहवासियों से जुड़ा है, जो पिछले एक वर्ष से सड़क की समस्या को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की पूरब से पश्चिम दिशा तक जाने वाली मुख्य सड़क के बीचोबीच खेत में एक मकान बना दिया गया है, जिसके कारण रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया है और लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह रास्ता गांव के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसी मार्ग से ग्रामीण अपने खेतों, बाजार और जरूरी कामों के लिए आवाजाही करते हैं। लेकिन सड़क के बीच निर्माण हो जाने से लोगों को लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ता है, जिससे समय और परेशानी दोनों बढ़ रही है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को इस रास्ते की समस्या से ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

जसीम अंसारी ने बताया कि यह सड़क गांव के लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह है, लेकिन बीच रास्ते में मकान बन जाने से आम जनजीवन प्रभावित हो गया है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

गांव के रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, ताकि लोगों का आवागमन सुचारू रूप से शुरू हो सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेकर ग्रामीणों को राहत देता है।

जबलपुर हादसे में सामने आई बड़ी चूक! तेज आंधी के अलर्ट के बावजूद पानी में उतारा गया क्रूज, बढ़कर 9 हुई मृतकों की संख्या

Jabalpur Boat Accident: जबलपुर क्रूज हादसे से एक दिन पहले ही मौसम विभाग ने 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी का अलर्ट जारी किया था, इसके बावजूद क्रूज को बरगी डैम के पानी में उतरने की इजाजत कैसे मिली?मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम क्रूज हादसे को लेकर बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। दरअसल, मौसम विभाग ने हादसे के ठीक एक दिन पहले 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज आंधी चलने को लेकर अलर्ट जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद गुरुवार की शाम लगभग 4:30 बजे क्रूज को बरगी डैम के पानी में उतार दिया गया। इसी दौरान, तेज हवा चली और क्रूज पलट गया।9 लोगों की मौत और 9 लोग अब भी लापता
शुरुआती जानकारी के अनुसार, जबलपुर क्रूज हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 9 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 15 लोगों को अब तक सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। वहीं, 9 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी खोज के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। बताया जा रहा है कि क्रूज करीब 20 मीटर नीचे डैम के गहरे पानी में फंसा है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में मुश्किलें आ रही हैं।
डैम के किनारे से 300 मीटर दूर पानी में हुआ हादसा
यह दुर्घटना बरगी डैम के किनारे से लगभग 300 मीटर दूर पानी में हुई। लोकल प्रशासन, NDRF और गोताखोरों की टीम मौके पर है और लापता लोगों की खोज में जुटी हुई है। सुबह होते ही जबलपुर में राहत एवं बचाव कार्य को और तेज कर दिया गया। घटनास्थल से आई तस्वीरों में रेस्क्यू टीमों को लगातार पानी में खोजी अभियान चलाते देखा गया।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
इस हादसे ने सुरक्षा मानकों और प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब जांच के आदेश दिए जा सकते हैं, ताकि यह मालूम चल सके कि मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद क्रूज को संचालन की अनुमति कैसे मिली। गौरतलब है कि बीते गुरुवार को आंधी-तूफान के कारण बरगी डैम में 29 यात्रियों को ले जा रही क्रूज बोट पलट गई थी। एक अधिकारी ने बताया कि इस हादसे में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई और 15 अन्य को बचा लिया गया है। बाकी लोगों की तलाश जारी है।

सऊदी में ‘हवाला ठगी’ का बड़ा खेल: गोपालगंज का युवक 21 मजदूरों की कमाई लेकर भारत फरार, 49 हजार रियाल से अधिक की ठगी उजागर

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गोपालगंज/रियाद। सऊदी अरब में काम कर रहे भारतीय मजदूरों की मेहनत की कमाई हड़पने का एक बड़ा मामला सामने आया है। बिहार के गोपालगंज जिले के गाँव सिसवा,पोस्ट सिसही, थाना भोरे के एक युवक पंकज उपाध्याय पिता मनीष उपाध्याय पर आरोप है कि उसने भारत पैसा भेजने के नाम पर 21 लोगों से रकम इकट्ठा की और फिर देश वापस भाग गया।

पीड़ितों द्वारा दी गई सूची के अनुसार अब तक 10 लोगों के नाम और रकम सामने आई है, जिनसे कुल 49,000 सऊदी रियाल वसूले गए। मौजूदा विनिमय दर के अनुसार यह रकम करीब 11 लाख रुपए से अधिक बैठती है।

पीड़ितों का विवरण इस प्रकार है — नाहिद आलम से 7000 रियाल, अर्जुन पंडित से 2000 रियाल, वीर बहादुर से 4000 रियाल, जयस्राम प्रजापति से 2000 रियाल, सुनील कुमार से 3000 रियाल, श्रद्धा प्रसाद से 2500 रियाल, मो. सुल्तान से 4500 रियाल, संदीप कुमार से 11000 रियाल, मुन्नीलाल से 11000 रियाल और राजू शर्मा से 2000 रियाल लिए गए।

बताया जा रहा है कि यह रकम नौकरी परिजनों को भारत पैसे भेजने के लिए ली गई थी। सऊदी में कई मजदूरों को 2-3 महीने से वेतन नहीं मिला था, ऐसे में जब उन्हें एक साथ पैसा तो परिजनों को भेजने के लिए ज्यादा रकम दी उन्होंने भरोसे के चलते आरोपी को पैसा दिया ताकि वह इसे भारत में उनके परिवारों तक पहुंचा सके।

आरोप है कि आरोपी ने इस भरोसे का फायदा उठाया और पूरी रकम लेकर भारत फरार हो गया। पीड़ितों का कहना है कि यह उनकी खून-पसीने की कमाई थी, जिसे सुनियोजित तरीके से हड़प लिया गया।

मामले में पीड़ितों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच कर उनकी रकम वापस दिलाई जाए।

इस घटना ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय मजदूरों के बीच चिंता बढ़ा दी है, जहां वे अपने ही लोगों पर भरोसा कर ठगी का शिकार हो रहे हैं।

अब देखना होगा कि बिहार पुलिस और यहां का प्रशासन इस 420 के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है

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