Monday, July 6, 2026
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क्या पिनराई विजयन ने पहले ही मान ली हार? सोशल मीडिया बायो बदलने से मची खलबली, हटाया मुख्यमंत्री का टैग

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इधर UDF ने केरल विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में भारी बढ़त बनाई, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सोशल मीडिया से CM का टैग हटा दिया है। आखिर माजरा क्या है, इसकी चर्चा सोशल मीडिया पर होने लगी है।केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों की आधिकारिक घोषणा से पहले ही राज्य की राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने सबका ध्यान खींच लिया है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किए गए एक छोटे से बदलाव ने बड़े राजनीतिक संकेत देने शुरू कर दिए हैं। सोमवार सुबह होने वाली मतगणना से ठीक पहले विजयन ने अपने आधिकारिक प्रोफाइल से मुख्यमंत्री शब्द हटा दिया है। अब उनके परिचय में केवल माकपा (CPI-M) के पोलित ब्यूरो सदस्य होने का उल्लेख है। इस कदम ने विपक्षी खेमे और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है कि क्या वामपंथी किले में दरार पड़ चुकी है।
विजयन के कदम के मायने
विजयन के इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में दो तरह की राय उभर रही हैं। एक वर्ग का मानना है कि हालिया एग्जिट पोल्स में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) की संभावित बढ़त को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी हार स्वीकार करने का संकेत दिया है। वहीं दूसरी ओर उनके समर्थकों का तर्क है कि यह केवल एक नैतिक और संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उनके अनुसार वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने और नए जनादेश के आने से पहले पद का मोह छोड़ना एक स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा है। हालांकि जिस समय यह बदलाव किया गया है, उसने संशय की स्थिति पैदा कर दी है।धर्माडम सीट पर साख की लड़ाई और चुनावी समीकरण
पिनराई विजयन खुद अपनी पारंपरिक सीट धर्माडम से चुनावी मैदान में हैं, जहां इस बार मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि 2021 में उन्होंने यहाँ से रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार यूडीएफ के वीपी अब्दुल रशीद और भाजपा के के रंजीत ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर विजयन की राह मुश्किल करने की कोशिश की है। राज्य में 9 अप्रैल को हुई 78.27% की भारी वोटिंग को भी सत्ता विरोधी लहर के रूप में देखा जा रहा है।

वामपंथ के लिए अस्तित्व का संकट
2021 में इतिहास रचने वाली एलडीएफ सरकार के लिए इस बार की जंग अस्तित्व की लड़ाई बन गई है। यदि रुझान परिणामों में बदलते हैं तो केरल में दशकों पुरानी सत्ता परिवर्तन की परंपरा फिर से लौट आएगी। इसके साथ ही यह राष्ट्रीय स्तर पर वामपंथी राजनीति के लिए भी एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि केरल वर्तमान में उनका एकमात्र गढ़ है। अब सभी की निगाहें 4 मई के अंतिम नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि विजयन का यह सोशल मीडिया अपडेट एक औपचारिक प्रक्रिया थी या सत्ता से विदाई की शुरुआती घोषणा। इसके साथ ही पड़ोसी राज्य तमिलनाडु और पुडुचेरी के परिणाम भी दक्षिण भारत की राजनीति की नई दिशा तय करेंगे।

नोएडा में दो सगी बहनें रहस्यमयी ढंग से लापता, परिजनों में मचा हड़कंप, पुलिस तलाश में जुटी

उत्तर प्रदेश के Noida क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां दो सगी बहनों के अचानक लापता हो जाने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। घटना 1 मई की बताई जा रही है। परिजनों के मुताबिक दोनों बच्चियां घर से किराना सामान लेने निकली थीं, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटीं, जिसके बाद परिवार की चिंता बढ़ गई।

जानकारी के अनुसार बड़ी बहन काजल 18 वर्ष, छोटी बहन निशु उम्र 13 वर्ष, दोपहर करीब 2 बजकर 30 मिनट पर घर से निकली थीं। परिवार का कहना है कि दोनों आवश्यक घरेलू सामान लेने के लिए गई थीं। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब दोनों घर नहीं पहुंचीं तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की।

परिजनों ने पहले आसपास के इलाकों में खोजबीन की, रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क किया, लेकिन दोनों का कहीं कोई पता नहीं चला। हर गुजरते घंटे के साथ परिवार की बेचैनी बढ़ती गई। आखिरकार परिजनों ने स्थानीय थाने में पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई और पुलिस से मदद की गुहार लगाई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और बच्चियों की तलाश के लिए संभावित स्थानों पर टीमें भेजी गई हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही कोई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।

इस घटना के बाद इलाके में भय और चिंता का माहौल है। स्थानीय लोग भी बच्चियों की सुरक्षित बरामदगी की मांग कर रहे हैं। परिजन लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि यदि किसी को भी निशु कुमारी और काजल के बारे में कोई जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस या दिए गए नंबरों पर संपर्क करें।

संपर्क नंबर
7838827700
8470808800
7838821755
8800871297

प्रतापगढ़ में खूनी संघर्ष, गंभीर घायल परिवार ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

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प्रतापगढ़ जिले के आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र से मारपीट और जानलेवा हमले का एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव मझगवां निवासी रामलाल ने जिला धिकारी और पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि पुरानी आबादी विवाद और आपसी रंजिश के चलते विपक्षी पक्ष ने उन पर और उनके परिवार पर सुनियोजित हमला किया।

पीड़ित के अनुसार घटना 28 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 7 बजे की है, जब राजेन्द्र, सिकन्दर, अंकित, अमित, देवराज, वंशराज सहित कई लोग एकजुट होकर लाठी डंडा, फस्सा और कुल्हाड़ी लेकर उनके घर पहुंच गए। आरोप है कि हमलावरों ने गाली गलौज करते हुए परिवार पर हमला बोल दिया और बेरहमी से मारपीट की।

पीड़ित का कहना है कि शोर सुनकर उनकी पत्नी शीला देवी और बेटे आशीष व आकाश बीच बचाव के लिए पहुंचे, लेकिन हमलावरों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा और बुरी तरह पीटा। हमले में परिवार के कई सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण कुछ लोग मौके पर ही बेहोश हो गए।

घायल पक्ष का आरोप है कि हमलावर उनका मोबाइल फोन भी छीन ले गए। घटना के बाद गांव के लोग मौके पर पहुंचे और बीच बचाव कर किसी तरह उनकी जान बचाई।

पीड़ित परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने बिना उनकी तहरीर लिए अपनी मर्जी से दोनों पक्षों की रिपोर्ट दर्ज कर ली, जबकि घायल पक्ष के बयान तक नहीं लिए गए। वर्तमान में पीड़ित परिवार जिला अस्पताल में भर्ती है और गंभीर हालत में उपचाराधीन है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा हुआ है। परिवार का कहना है कि आरोपी लगातार धमकी दे रहे हैं और खुलेआम कह रहे हैं कि पुलिस उनके प्रभाव में है और उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

पीड़ित रामलाल ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्यमंत्री को प्रेषित शिकायत में मांग की है कि दर्ज मुकदमे में संशोधन कर गंभीर धाराएं जोड़ी जाएं, आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी हो और छीना गया मोबाइल वापस दिलाया जाए।
रामलाल जी का मेडिकल नहीं करवा रहे हैं पुलिस वाले रोक रहे हैं वहां अपना मेडिकल कराकर साबित करना चाहते हैं कि उनको कितनी चोट आई है

अब इस मामले में प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

चन्दौली में गली विवाद ने लिया गंभीर रूप, दबंगई और धमकी से दहशत में परिवार

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चन्दौली जनपद के कन्दवा थाना क्षेत्र के मुद्धा गांव में पुरानी गली विवाद को लेकर एक परिवार लगातार उत्पीड़न का आरोप लगा रहा है। पीड़ित राजवंश पाल पुत्र सीताराम ने पुलिस अधीक्षक चन्दौली को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि गांव की रहने वाली लीलावती देवी पत्नी लालजी पाल पुरानी 10 फीट गली के विवाद को लेकर लंबे समय से रंजिश रखती हैं और इसी रंजिश के चलते वर्ष 2023 में फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराकर उनके खिलाफ मारपीट और छेड़छाड़ सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

पीड़ित का कहना है कि उन्होंने भी घटना की शिकायत थाना कन्दवा में की थी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि लीलावती देवी लगातार उनके परिवार को गाली-गलौज कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करती रही हैं। इसी विवाद और मुकदमेबाजी के तनाव के कारण उनके 83 वर्षीय पिता सीताराम गहरे सदमे में चले गए, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। परिवार का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की क्षति हुई है।

पीड़ित ने अपने आवेदन में बताया कि 20 अप्रैल 2026 को उनकी पुत्री के साथ भी गंभीर घटना हुई। आरोप है कि विपक्षी महिला ने उनकी बेटी का गला दबाकर जान से मारने का प्रयास किया। बेटी के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब जाकर उसकी जान बच सकी। इस घटना के बाद परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

राजवंश पाल का आरोप है कि लीलावती देवी और उनका परिवार लगातार उन्हें गांव छोड़ने की धमकी दे रहा है। आरोप है कि लीलावती देवी अक्सर यह कहकर दबाव बनाती हैं कि उनका बेटा कृष्णकांत पाल का बेटा अग्निवीर पुलिस में भर्ती हो चुका है और उसके प्रभाव के दम पर लीलाऊती देवी फर्जी मुकदमे में फंसा सकती हैं। इतना ही नहीं, परिवार का आरोप है कि कृष्णकांत पाल जो भी खुलेआम धमकी देता है कि अगर उन्होंने गांव नहीं छोड़ा तो उन्हें झूठे मामलों में फंसा दिया जाएगा और उनका जीवन बर्बाद कर दिया जाएगा।

पीड़ित परिवार का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों और गाली-गलौज के कारण पूरा परिवार डरा और सहमा हुआ है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें सुरक्षा और न्याय मिल सके।

अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को कब तक राहत मिलती है। फिलहाल गांव में इस मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और स्थानीय लोग भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

बस्ती में पट्टा जमीन पर कब्जे का संगीन आरोप, पीड़ित बोला—आदेशों के बाद भी नहीं मिला न्याय, जान से मारने की धमकी

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बस्ती। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के हरैया तहसील क्षेत्र स्थित पूरे हेमराज गांव में आवासीय पट्टा जमीन को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। पीड़ित कमरूज्जमा ने आरोप लगाया है कि वर्ष 1985 में उनके पिता के नाम आवंटित पट्टा भूमि पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है और पिछले कई वर्षों से उन्हें जमीन से बेदखल कर लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। पीड़ित का कहना है कि कई बार उच्च अधिकारियों के आदेश के बावजूद न तो कब्जा दिलाया गया और न ही आरोपियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई।

पीड़ित के अनुसार, गाटा संख्या 148क में लगभग 8 बिस्वा जमीन उनके पिता स्व. कासिम के नाम आवासीय पट्टा के रूप में दर्ज है, जिस पर वह वर्षों से झोपड़ी बनाकर जीवन यापन कर रहे थे। लेकिन वर्ष 2008 में गांव के ही कुछ दबंग लोगों—रमेश सिंह, प्रवीण सिंह और उनके परिजनों—ने कथित रूप से उनका आशियाना उजाड़ दिया और जमीन पर कब्जा कर लिया। इसके बाद से पीड़ित परिवार दर-दर भटकने को मजबूर है।

कमरूज्जमा का आरोप है कि उन्होंने थाना से लेकर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, चकबंदी अधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय और यहां तक कि अल्पसंख्यक आयोग व मानवाधिकार आयोग तक शिकायत की, लेकिन न्याय नहीं मिला। उन्होंने बताया कि 8 फरवरी 2024 को चकबंदी आयुक्त द्वारा कब्जा दिलाने का आदेश भी जारी किया गया, वहीं जून और अगस्त 2024 में जिलाधिकारी स्तर से भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन इन आदेशों का जमीन पर कोई असर नहीं दिखा।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उन पर समझौते का दबाव बनाया गया। एक मामले में उपजिलाधिकारी स्तर पर बुलाकर कथित रूप से उनसे जमीन छोड़ने और दूसरी जगह लेने की बात कही गई, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। इसके बाद उन्हें और अधिक परेशान किया जाने लगा। इतना ही नहीं, आरोप है कि लेखपाल द्वारा जांच के नाम पर पक्षपात किया गया और विपक्षी के घर जाकर उनसे मिलकर लौट गए, जबकि पीड़ित दिनभर इंतजार करता रहा।

मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है कि पहले राजस्व अभिलेखों में पट्टा वैध बताया गया, लेकिन बाद में उसे अवैध करार देने की कोशिश की गई। पीड़ित का कहना है कि खतौनी में उनके नाम पर कट का निशान लगाकर रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारी विपक्षियों से मिलकर साजिश के तहत उनकी जमीन छीनने का प्रयास कर रहे हैं।

कमरूज्जमा ने यह भी बताया कि उनकी जमीन पर लगे पेड़ों को भी विपक्षियों द्वारा कटवा दिया गया और कई बार उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने इस संबंध में फोन कॉल और घटनाओं के वीडियो भी होने का दावा किया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। इसके बावजूद पुलिस द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां उच्च स्तर से आदेश जारी हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं हो रहा है। पीड़ित ने प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की मांग करते हुए कहा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वह अपने परिवार के साथ बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा।

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करौली में नाबालिग बेटी की तलाश के लिए कोर्ट का वारंट, मां का आरोप—पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई

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करौली। जिले के टोडाभीम क्षेत्र में नाबालिग बेटी के लापता होने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। कोर्ट द्वारा तलाशी वारंट जारी होने के बावजूद बच्ची का अब तक पता नहीं चलने से पीड़ित मां ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मां का कहना है कि उसने कई बार गुहार लगाई, लेकिन पुलिस जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रही है।

जानकारी के अनुसार, सपना नाम की महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पूर्व पति की मृत्यु के बाद उसने विधिवत पुनर्विवाह किया था। इसी दौरान उसकी नाबालिग बेटी भावना को ससुराल पक्ष के कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से पैसों के लेनदेन के बाद कहीं गायब कर दिया गया। पीड़िता का कहना है कि उसकी बेटी को गलत मंशा से छिपाया गया है और अब तक उसे वापस नहीं किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उपखंड मजिस्ट्रेट टोडाभीम द्वारा 23 फरवरी 2026 को धारा 101 बीएनएसएस के तहत तलाशी वारंट जारी किया गया। वारंट में संबंधित आरोपियों के ठिकानों पर तलाशी लेकर नाबालिग को न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक करौली को दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि उसने कई बार स्थानीय थाना स्तर पर संपर्क किया, लेकिन उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। उसका आरोप है कि पुलिस पर दबाव होने के कारण उसकी बेटी की तलाश में ढिलाई बरती जा रही है।

मां ने प्रशासन से मांग की है कि उसकी नाबालिग बेटी को जल्द से जल्द तलाश कर उसे उसकी कस्टडी में सौंपा जाए। उसने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से वह मानसिक रूप से टूट चुकी है और अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित है।

स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि जब अदालत का आदेश होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में कब सक्रियता दिखाता है और नाबालिग को कब बरामद किया जाता है।

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उन्नाव में बुजुर्ग महिला की जमीन पर कब्जे का आरोप, विरोध करने पर मारपीट और छेड़छाड़, परिवार को जान से मारने की धमकी

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उन्नाव। जिले के मौरावां थाना क्षेत्र के एक गांव में बुजुर्ग महिला की पुस्तैनी जमीन पर अवैध कब्जे और उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता रामदुलारी ने गांव के ही कुछ लोगों पर जमीन हड़पने, मारपीट करने और छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि लगातार धमकियों के कारण उनका परिवार दहशत में है और उन्होंने पुलिस अधीक्षक से सुरक्षा की गुहार लगाई है।

पीड़िता के अनुसार, उनका पुस्तैनी मकान जर्जर स्थिति में है, जिसमें वह किसी तरह छप्पर डालकर रह रही हैं। आरोप है कि गांव के ही कुछ लोग—सुंदर, दुल्लन और सुरेश—उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर रहे हैं। ये लोग वहां मवेशी बांध रहे हैं, कंडे पाथ रहे हैं, यहां तक कि धार्मिक प्रतीक स्थापित कर जमीन पर स्थायी कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। महिला का कहना है कि इन गतिविधियों के कारण वह अपने ही घर में सुरक्षित नहीं रह पा रही हैं।

रामदुलारी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उनके और उनके पति के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की। इतना ही नहीं, उनके साथ अभद्रता और छेड़छाड़ भी की गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई हैं। पीड़िता का कहना है कि इस घटना के बाद से वह मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद परेशान हैं।

महिला ने यह भी बताया कि आरोपी लगातार उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं, जिससे उनके बच्चों और पति की सुरक्षा को लेकर भय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ी घटना हो सकती है।

पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक उन्नाव को प्रार्थना पत्र देकर मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, उनकी जमीन को कब्जामुक्त कराया जाए और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।

स्थानीय स्तर पर इस घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक बुजुर्ग महिला अपनी ही जमीन पर सुरक्षित नहीं है, तो यह कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस संवेदनशील मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

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देवरिया में दलित परिवार की जमीन पर कब्जे का आरोप, रास्ता बंद कर दी जान से मारने की धमकी

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देवरिया। जिले के भाटपाररानी तहसील क्षेत्र में एक दलित परिवार की पट्टे की जमीन पर अवैध कब्जे और रास्ता बंद करने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने गांव के ही कुछ लोगों पर दबंगई के बल पर जमीन हड़पने और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर पीड़ितों ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का दावा किया गया है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम डेमुसा निवासी सुधन प्रसाद ने बताया कि उनके पिता को आराजी नंबर 114 में आवासीय पट्टा मिला था, जिस पर परिवार वर्षों से काबिज है। आरोप है कि गांव के ही कुछ लोग—सुदर्शन, जवाहीर, जगदीश और अन्य—दबंगई के बल पर उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए मारपीट पर उतारू हो गए।

वहीं, इसी गांव की निवासी किशनावती देवी ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके ही पट्टीदारों द्वारा उनके घर तक जाने का रास्ता बंद किया जा रहा है, जिससे उन्हें और उनके बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीड़िता के अनुसार, आरोपी न सिर्फ रास्ता रोक रहे हैं बल्कि लगातार जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह एक गरीब महिला हैं और आधे हिस्से की जमीन पर रहती हैं, ऐसे में रास्ता बंद होने से उनका जीवन संकट में पड़ गया है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजकर पुलिस बल की मौजूदगी में जमीन की पैमाइश कराई जाए और उन्हें उनका वैध कब्जा दिलाया जाए। साथ ही, रास्ता खुलवाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।

ग्रामीणों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो विवाद बढ़ सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन पीड़ित परिवार को कब तक न्याय दिला पाता है और दबंगों पर क्या कार्रवाई होती है।

दुर्ग में अतिक्रमण नोटिस पर बवाल, बिना जांच कार्रवाई का आरोप; अधिवक्ता ने पंचायत को दी कानूनी चेतावनी

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दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम चंगोरी में अतिक्रमण को लेकर जारी नोटिस ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। ग्राम पंचायत द्वारा एक बुजुर्ग निवासी को अवैध कब्जा हटाने का नोटिस दिए जाने के बाद अब मामला कानूनी मोड़ ले चुका है। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने पंचायत की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए विधिक नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई रोकने की चेतावनी दी है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम चंगोरी निवासी 60 वर्षीय शिवप्रसाद निषाद को 24 अप्रैल 2026 को ग्राम पंचायत की ओर से नोटिस जारी कर 30 अप्रैल तक कथित अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया था कि यदि तय समय सीमा तक कब्जा नहीं हटाया गया तो 2 मई 2026 को प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए निर्माण को तोड़ दिया जाएगा। पंचायत ने इसे अंतिम नोटिस बताते हुए पहले भी तीन बार सूचना दिए जाने का दावा किया है।

वहीं, शिवप्रसाद निषाद की ओर से अधिवक्ता कमल देशमुख ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा है कि नोटिस में न तो भूमि का स्पष्ट विवरण दिया गया है और न ही क्षेत्रफल का उल्लेख है। अधिवक्ता का आरोप है कि बिना किसी जांच-पड़ताल और प्रमाण के इस प्रकार की कार्रवाई विधिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि इस तरह दबाव बनाकर उनके पक्षकार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

अधिवक्ता ने पंचायत को भेजे गए विधिक नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए आगे कोई कार्रवाई की गई तो उनके पक्षकार को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में होने वाले समस्त न्यायालयीन खर्च और हर्जाने की जिम्मेदारी संबंधित पंचायत कार्यालय की होगी।

दूसरी ओर, ग्राम पंचायत का पक्ष है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा पूर्व में भी अतिक्रमण किया गया है और कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया। पंचायत का कहना है कि प्रशासनिक नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना उनकी जिम्मेदारी है।

इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और गांव में भी इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ पंचायत अपने अधिकारों की बात कर रही है, तो दूसरी ओर पीड़ित पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का हवाला देकर कार्रवाई को गलत ठहरा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस विवाद को किस तरह सुलझाता है या मामला अदालत तक पहुंचता है।

AAP से BJP में आए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक की मुश्किलें बढ़ीं! पंजाब में 2 FIR दर्ज; मंडराया गिरफ्तारी का खतरा

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संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब में गैर-जमानती धाराओं में 2 FIR दर्ज की गई हैं और अब उनके ऊपर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है। जानें हाल में AAP से BJP में राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने इसको लेकर क्या रिएक्शन दिया।हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक पर पंजाब में 2 FIR दर्ज हुई हैं। संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब के 2 अलग-अलग जिलों में FIR रजिस्टर की गई हैं। दोनों ही FIR गैर-जमानती धाराओं में उनके खिलाफ दर्ज हुई हैं। बता दें कि अब संदीप पाठक पर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है। इस बीच, संदीप पाठक अपने दिल्ली के घर से जल्दबाजी में निकलते नजर आए। राघव चड्ढा के साथ AAP से बागवत कर संदीप पाठक, बीजेपी में आए हैं।
संदीप पाठक ने कही FIR की जानकारी नहीं होने की बात
इस दौरान, संदीप पाठक का पहला रिएक्शन भी सामने आया है। संदीप पाठक ने कहा कि मुझे ऐसी किसी एफआईआर की कोई जानकारी नहीं है, न ही किसी पुलिस अफसर ने मुझको इस बारे में सूचित किया है। मैंने अपनी पूरी जिंदगी ईमानदारी और निष्ठा के साथ देश की सेवा में बिताई है। भारत, किसी भी पार्टी से बड़ा है। मैं कभी भी अपने देश के साथ धोखेबाजी नहीं करूंगा, न ही किसी और को ऐसा करने दूंगा।

मेरे खिलाफ कार्रवाई में दिख रही उनकी दहशत- पाठक
उन्होंने आगे कहा कि यदि मेरे जैसे किसी शख्स के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू की गई है, तो यह सिर्फ उनकी दहशत को दर्शाता है। मैं इसको लेकर और कुछ नहीं कहना चाहता।

अपने आवास के पीछे के दरवाजे से निकले संदीप पाठक
जान लें कि आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और राज्यसभा सांसद संदीप पाठक के घर दिल्ली पुलिस की टीम पहुंची। तिलक मार्ग थाने के SHO और उनके साथ कुछ पुलिसकर्मी संदीप पाठक के घर के बाहर मौजूद नजर आए। इसके बाद, संदीप पाठक अपने सरकारी आवास के पीछे के दरवाजे से गाड़ी में बैठकर तेजी से निकल गए।

संदीप पाठक हाथ में सूटकेस लिए हुए जल्दबाजी में दिखे
आवास के जिस दरवाजे से संदीप पाठक बाहर निकले, उसके बाहर घास जमी हुई है। इससे साफ प्रतीत होता है कि इस दरवाजे का इस्तेमाल आमतौर पर आने-जाने के लिए नहीं किया जाता है। घर से निकलते वक्त वह काफी जल्दबाजी में दिखाई दिए। इस दौरान, उनके हाथ में एक सूटकेस भी नजर आया।

संदीप पाठक समेत AAP के ये 7 सांसद BJP में हुए शामिल
गौरतलब है कि बीते 24 अप्रैल को राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों ने BJP का झंडा थामा था। इनमें अन्य सांसदों के नाम हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी हैं।