Wednesday, December 10, 2025
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गढ़ा कालोनी में बढ़ा तनाव: पड़ोसी विवाद ने लिया खतरनाक रूप—महिला को गालियां, परिवार को धमकियां,

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गढ़ा कालोनी में बढ़ा तनाव: पड़ोसी विवाद ने लिया खतरनाक रूप—महिला को गालियां, परिवार को धमकियां, देर रात घर में घुसकर मारपीट की कोशिश; पीड़ित बोला—“कभी भी जान जा सकती है”

गढ़ा कालोनी | दोानीका सिटी थाना क्षेत्र

गढ़ा कालोनी, नसीब विहार इलायचीपुर क्षेत्र में रहने वाले कृष्णा पुत्र डॉ. पिता अजय पाल पुत्र श्री किसन ने गंभीर आरोप लगाते हुए थाना दोनीका सिटी में शिकायत दी है। पीड़ित परिवार का कहना है कि मामूली बात से शुरू हुआ पड़ोसी विवाद अब जानलेवा धमकियों और घर में घुसकर मारपीट तक पहुंच गया है। पीड़ित ने बताया कि इन घटनाओं के पीछे पड़ोसी अमित और उसके साथ आने वाले कई अज्ञात लोग शामिल हैं।

पीड़ित श्री किसन के अनुसार घटना की शुरुआत तब हुई जब पड़ोसी अमित की बेटी ने लहंगा पहना हुआ था। उसी दौरान कृष्णा की बेटी रितु भी शादी समारोह में जा रही थी। रितु ने पड़ोस की लड़की के लहंगे की तारीफ करते हुए कहा कि “बरखा को यह लहंगा बहुत अच्छा लग रहा है।” बस इसी साधारण टिप्पणी पर अमित की पत्नी ने नाराजगी जताते हुए रितु से झगड़ा शुरू कर दिया और कथित रूप से पूरे परिवार को गालियां देने लगीं। पीड़ित परिवार का कहना है कि महिला ने कहा—“आज के बाद दिखाई मत देना”, साथ ही कई आपत्तिजनक बातें कहीं।

श्री किसन ने बताया कि इस विवाद के बाद अगले ही दिन, दिनांक 23 नवंबर 2025 की रात करीब 12 बजे तीन लोग अचानक उनके घर के पास आए और गेट पीटने लगे। जब कृष्णा ने गेट खोला तो आरोपियों ने कथित रूप से तमंचा और ओर धारे धार हथियार निकालने की कोशिश की। पीड़ित ने तत्काल गेट बंद कर 100 नंबर पर फोन किया, लेकिन घटना की सूचना देने के बाद भी पुलिस लगभग 2–3 घंटे देर से पहुंची।

पीड़ित का आरोप है कि देर रात लगभग साढ़े 12 बजे आरोपी फिर लौटे और गालियां देते हुए घर में घुसने की कोशिश करते रहे। परिवार ने पूरी रात भय में गुजारी। श्री किसन का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है—लगभग एक साल पहले सितंबर माह में बच्चों के बीच हुए मामूली झगड़े के बाद से ही विपक्षी लगातार रंजिश रखते आ रहे हैं। तब से अब तक यह दूसरी बड़ी जानलेवा धमकी और हमला है।

श्री किसन और उनके परिवार का कहना है कि विपक्षी खुलेआम धमकी देते हैं कि “अगर अकेले में मिले तो जान से मार देंगे… जितना आवेदन करना है कर लो, पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।” इस तरह की धमकियों से चार बच्चों वाला यह परिवार भय और दहशत में जी रहा है। उनका कहना है कि घर से निकलना भी मुश्किल बना दिया गया है।

पीड़ित परिवार ने बताया कि उन्होंने थाने से लेकर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों तक लिखित आवेदन दिए, लेकिन अभी तक किसी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आरोप है कि पुलिस मौके पर पहुंचने के बाद भी वीडियो बनाने वाले युवक को आरोपी डराने लगे—“वीडियो बंद कर, नहीं तो तुझे भी मार देंगे।”

श्री किसन का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो “किसी की जान भी जा सकती है।” परिवार ने मीडिया के माध्यम से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई बड़ी घटना न हो सके।

पीड़ित परिवार का कहना है कि हमारी खबर योगी आदित्यनाथ तक पहुंचे और हमें इंसाफ मिले अगर समय रहते कोई कार्यवाही नहीं हुई तो हमारे घर में किसी की जान भी जा सकती है

पता: गढ़ा कालोनी, नसीब विहार
मोबाइल: 9540643811

लखनऊ से लापता गर्भवती चांदनी का सुराग नहीं: दवा लेने निकली थी, मोबाइल बंद… तीन दिन से बेखबर

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लखनऊ | विशेष रिपोर्ट

लखनऊ में एक बेहद गंभीर और रहस्यमय मामला सामने आया है। सीतापुर जिले के ग्राम भिटौरा, थाना मछरेहटा की रहने वाली 20 वर्षीय चांदनी, जो कि लखनऊ में किराए के मकान में रहती थी, पिछले तीन दिनों से लापता है। परिजन लगातार खोजबीन कर रहे हैं, लेकिन युवती का अब तक कहीं कोई सुराग नहीं मिला है।

4 अक्टूबर को तबीयत खराब होने पर गई थी अस्पताल—फिर अचानक फोन हुआ स्विच ऑफ

परिजनों के अनुसार दिनांक 4.10.2025, दोपहर 12:30 बजे, चांदनी ने अपनी मां गंगा देवी को फोन कर बताया कि तबीयत खराब है और वह बलरामपुर हॉस्पिटल दवा लेने जा रही है।

कुछ ही देर बाद जब घर वालों ने फोन किया तो चांदनी बोली—
“अस्पताल में बहुत भीड़ है, मैं 4 बजे तक वापस आ जाऊंगी।”

लेकिन शाम 4 बजे जब दोबारा कॉल किया गया तो पहले घंटी गई और फिर मोबाइल पूरी तरह बंद हो गया। इसके बाद परिवार का उससे कोई संपर्क नहीं हो सका।

मां नारायणपुर मॉल से लखनऊ घर पहुंचीं—लेकिन बेटी गायब

चांदनी की मां उस समय अपने मायके नारायणपुर मॉल, लखनऊ में थीं। बेटी से संपर्क टूटने पर वे तुरंत लखनऊ वाले घर पहुँचीं, लेकिन चांदनी वहां नहीं थी।

रिश्तेदारों, अस्पतालों और परिचितों में कई घंटे तलाशने के बावजूद लड़की कहीं नहीं मिली।

पति सूरज कुमार का बयान—“न कोई झगड़ा, न कोई कलह… 2 महीने से गर्भवती है, कुछ भी हो सकता है”

सूरज कुमार (उम्र 22), जो कि ग्राम बिटोरा, सीतापुर के निवासी हैं, ने बताया कि पत्नी से उनका कोई झगड़ा नहीं था।
“हमारी अरेंज मैरिज को 1 साल 3 महीने हुए हैं। न कोई विवाद, न तनाव। मेरी पत्नी 2 महीने से प्रेग्नेंट है… उसकी हालत को जानते हुए उसे अकेला बाहर होना ही हमारे लिए बड़ा खतरा है।”

उन्होंने कहा—
“उसने दवा लेने जाने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद से वह कहीं दिखाई नहीं दी। फोन लगातार बंद है। मैंने हर जगह खोजबीन की है—लेकिन कोई सुराग नहीं। मैं टूट चुका हूं, अब मेरे पास हिम्मत नहीं बची कि अकेले अपनी गर्भवती पत्नी को ढूंढ़ सकूं।”

थाने में गुमशुदगी की शिकायत—लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं

घटना के बाद चांदनी की मां गंगा देवी ने थाना भटिंडा, लखनऊ में तहरीर दी।
सूरज ने भी 7.10.2025 को पूरी घटना की सूचना थाने में दी, लेकिन आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

चांदनी का हुलिया

नाम: चांदनी

उम्र: 20 वर्ष

लंबाई: 5 फुट 1 इंच

रंग: गोरा

पहनावा: साड़ी

मानसिक स्थिति: सामान्य

मोबाइल: लगातार स्विच ऑफ

गर्भावस्था: 2 माह

परिवार की भावुक अपील

सूरज कुमार का कहना है—
“मैं मीडिया से हाथ जोड़कर विनती करता हूं… मेरी गर्भवती पत्नी को ढूंढ़ने में मदद करें।
जिस किसी को भी मेरी पत्नी चांदनी के बारे में जानकारी मिले, तुरंत संपर्क करे।
सिर्फ मैं नहीं—दोनों परिवार बुरी तरह टूट चुके हैं।”

जरूरी संपर्क नंबर

सूरज कुमार (पति): 9580535637
मां गंगा देवी: 8840776554

अमृतसर के सफाईकर्मी दंपत्ति की नौकरी संकट में, बेटी बोली— “मम्मी-पापा अनपढ़ थे… उनकी मजबूरी का फायदा उठाया गया”

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14 साल की निष्ठा… और सिस्टम की नाइंसाफी!

अमृतसर | संवाददाता
अमृतसर के एक्टानगर, धापई इलाके का एक मेहनतकश परिवार पिछले 14 साल से शहर की सड़कों को साफ रखता आ रहा है। तड़के 4 बजे ड्यूटी पर जाने वाले इस दंपत्ति ने बरसों तक बिना छुट्टी, बिना हंगामा किए अपना काम निभाया। लेकिन अब—इन्हीं की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है।
परिवार का आरोप है कि विभाग (सेंटर/सेंट्री) ने उनके अनपढ़ होने का फायदा उठाकर कागजात में ऐसी गड़बड़ियां कीं, जिनके कारण उन्हें बार-बार परेशान किया जा रहा है और नौकरी भी खतरे में पड़ गई।

“हम आज भी ड्यूटी कर रहे हैं… फिर भी सुनवाई नहीं”

पीड़ित परिवार की बेटी का कहना है कि उसके माता-पिता आज भी सफाई की ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन विभाग न कोई जवाब दे रहा है, न जांच कर रहा है।
वह कहती है—
“मेरे मम्मी-पापा 14 साल से काम कर रहे हैं। लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं। हमें बस हक चाहिए… नौकरी चाहिए।”

दस्तावेज जमा, फोटो जमा… फिर भी फाइलें धूल खा रही हैं

बलदेव सिंह और सुखदेव सिंह के नाम से जुड़े इस परिवार ने नौकरी से संबंधित हर दस्तावेज, रिकार्ड और फोटो समय पर जमा किए।
लेकिन विभाग ने न जांच की, न जवाब दिया। उल्टा, परिवार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया।

“अगर शक था तो सुबह 4 बजे जाकर चेक करते!”

परिवार का आरोप है कि अधिकारी किसी प्रकार की फील्ड जांच को तैयार नहीं।
“हम हर रोज सुबह 4 बजे ड्यूटी पर रहते हैं। अगर किसी को विश्वास नहीं, तो आकर देख लेता। पर किसी ने जांच ही नहीं की।”

“सिर्फ इसलिए कि वो अनपढ़ थे… नौकरी छीन ली?”

परिवार की बेटी ने भावुक होकर कहा—
“मेरे मम्मी-पापा अनपढ़ थे… इसी का फायदा उठाकर कागजी गलतियां की गईं। अब कहते हैं कि नौकरी खतरे में है। ये हमारी मेहनत की बेइज्जती है।”

स्थानीय लोग भी नाराज़: “सिस्टम ईमानदार की मेहनत का मज़ाक बना रहा”

इस मामले को लेकर इलाके में भी आक्रोश है। लोग कहते हैं कि 14 साल तक शहर को साफ रखने वालों की अनदेखी सिस्टम की नाकामी है।

परिवार की मांग
• नौकरी तुरंत बहाल/सही तरीके से दर्ज की जाए
• निष्पक्ष विभागीय जांच
• 14 साल की सेवा को मान्यता मिले
• अधिकारी बताएं—कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

सरकार पर भी उठे सवाल

जब सरकार सफाईकर्मियों को फ्रंटलाइन वॉरियर बताती है, तो फिर अमृतसर के इस मेहनतकश परिवार के साथ ऐसी अनदेखी क्यों?

परिवार की अंतिम अपील—
“हमें सिर्फ हमारी नौकरी वापस चाहिए। हम इंसाफ चाहते हैं… बस इतना ही।”

स्थानीय संवाददाता ई खबर मीडिया की रिपोर्ट

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देवरिया में दो सनसनीखेज मामले: किसान से मारपीट, वृद्ध दंपति की जमीन पर दबंगों की नजर—परिवारों ने सुरक्षा व न्याय की लगाई गुहार

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देवरिया। जनपद के सुरौली थाना क्षेत्र और रुद्रपुर तहसील से दो गंभीर और चिंताजनक मामले सामने आए हैं, जिनसे ग्रामीणों में रोष और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है। एक तरफ खेत में काम कर रहे किसान पर दबंगों ने हमला कर दिया, वहीं दूसरी ओर समाधान दिवस में पहुंचे वृद्ध दंपति ने अपनी जमीन पर अवैध कब्जे और जान से मारने की धमकियों का आरोप लगाया।

पहला मामला: गेहूं बो रहे किसान पर दबंगों का हमला, जान से मारने की धमकी

सुरौली थाना क्षेत्र के तिवई गांव निवासी श्याम जी पुत्र रामचन्द्र साहनी 21 नवंबर 2025 को अपने खेत में गेहूं की बोवाई कर रहे थे। इसी दौरान गांव के ही विकास और बिहारी साहनी ने उन्हें काम करने से रोक दिया। किसान के विरोध करने पर आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडों से उन पर बेरहमी से हमला कर दिया।

हमले में श्याम जी की दोनों बाहों पर गंभीर चोटें आई हैं। उनका कहना है कि आसपास के आठ किसानों ने पहले ही बोवाई कर ली थी, लेकिन निशाना सिर्फ उन्हें बनाया गया।

पीड़ित ने बताया कि मारपीट के बाद आरोपियों ने जान से मारने की धमकी भी दी, जिससे उनका परिवार दहशत में है।
उन्होंने सुरौली थाने में लिखित शिकायत देकर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

दूसरा मामला: समाधान दिवस में गूंजा जमीन विवाद—वृद्ध दंपति बोला, “कमजोर हैं, दबंग घर तोड़ने पर आमादा”

रुद्रपुर तहसील के सम्पूर्ण समाधान दिवस में ग्राम बङ्गपुर निवासी भूलन पुल मिठाई उर्फ मिकई लाल ने अधिकारियों के सामने एक गंभीर शिकायत रखी।

पीड़ित बुजुर्ग ने बताया—

वे 20 वर्षों से खसरा संख्या 358/0829 वाली भूमि पर रह रहे हैं।

विवाद से बचने के लिए उन्होंने अपनी 2 फुट जमीन छोड़कर बाउंड्रीवाल बनाई थी।

इसके बावजूद खजांची, लालू, सहदेव, बिहारी पुल समेत कुछ लोग बाउंड्रीवाल तोड़कर अंदर रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

वृद्ध दंपति ने कहा कि विरोध करने पर उन्हें गालियां दी जाती हैं और जान से मारने की धमकियां भी मिलती हैं। बुजुर्ग होने के कारण वे प्रतिरोध नहीं कर पा रहे हैं।

अधिकारियों ने राजस्व अभिलेखों की जांच कराने और मौके पर सत्यापन कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन पीड़ित परिवार निरंतर भय में जी रहा है।

कार्यवाही न होने का आरोप—मंटू साहनी का बयान

मीडिया से बात करते हुए मंटू साहनी ने बताया—

पीड़ितों ने कई बार थाने में लिखित आवेदन दिया, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं हुई।

जब उन्होंने डायल 112 पर कॉल करने की कोशिश की तो उन्हें कॉल करने से रोक दिया गया।

पीड़ित बुलंन साहनी, जिनकी उम्र 62 वर्ष है, ने कहा कि वे न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है, ताकि उन्हें उनकी जमीन वापस दिलाई जा सके।

मंटू साहनी ने आरोप लगाया कि यदि भविष्य में उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसके लिए विकास, करण, मन्नू, लालू और लाल के लड़के जिम्मेदार होंगे।

ग्रामीणों की मांग

दोनों पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है—

दबंगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए

पीड़ितों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए

राजस्व व पुलिस विभाग तुरंत स्थिति की जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई करे

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो गांव में तनाव और बढ़ सकता है।

उन्नाव से बड़ा खुलासा | “26 साल साथ निभाया… पति के मरते ही जिन बच्चों को पाला, उन्होंने ही हमारी जमीन हड़प ली”

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उन्नाव से बड़ा खुलासा | “26 साल साथ निभाया… पति के मरते ही जिन बच्चों को पाला, उन्होंने ही हमारी जमीन हड़प ली”—नेहा सिंह का आरोप
कम पढ़ी-लिखी महिला बोली: डेढ़ लाख वकील को दे चुकी, कर्ज़ में डूब गई… पर न्याय कहीं नहीं

उन्नाव | थाना हसनगंज | विशेष रिपोर्ट

उन्नाव के सैरपुर गांव से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 26 साल तक पति के साथ जीवन बिताने वाली नेहा सिंह आज अपने ही घर–जमीन के लिए भटक रही हैं। पति अवधेश सिंह, जो ट्रक चलाते थे, उनके निधन को डेढ़ साल हो चुके हैं। लेकिन इन्हीं डेढ़ सालों में नेहा का पूरा जीवन उलट गया है—न जमीन बची, न पैसा, न ही सहारा।

नेहा का आरोप है कि जिन तीन भतीजों को उन्होंने और उनके पति ने अपने बच्चे समझकर पाला–पोसा, आज वही बच्चे उनकी और उनके दिवंगत पति की जमीन पर कब्जा कर बैठे हैं।

मंदिर में हुई थी शादी, प्रधान ने भी प्रमाणित किया—फिर भी अधिकारों की अनदेखी

नेहा बताती हैं कि उनकी और अवधेश सिंह की शादी मंदिर में हुई थी।
गांव के प्रधान ने भी वैवाहिक संबंध का प्रमाण दिया है।
पारिवारिक रजिस्टर और आधार कार्ड में भी दोनों का पति-पत्नी के नाम दर्ज हैं।

इसके बावजूद, जमीन को लेकर नेहा के अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

जेठ माना सिंह के तीन बच्चों को पालने के लिए नेहा से कराई गई शादी

नेहा बताती हैं कि उनके जेठ माना सिंह की मौत के बाद उनके तीन छोटे बच्चे अनाथ हो गए थे।
अवधेश सिंह और नेहा ने ही उन्हें अपने बच्चों की तरह पाला।

नेहा कहती हैं—
“बच्चे छोटे थे… हमने मां-बाप बनकर संभाला। कभी फर्क नहीं किया कि वे भतीजे हैं।
पर उन्हीं बच्चों ने हमारी जिंदगी तबाह कर दी।”

नेहा ये भी स्पष्ट करती हैं कि उन्होंने बच्चों को गोद नहीं लिया था—बस मानवता के नाते पाला था।

मृत जेठ की जमीन का पैसा भी बच्चे ले रहे थे—अब हमारी जमीन भी उनके नाम

नेहा का बड़ा आरोप है कि जेठ माना सिंह के नाम की जमीन से जो पैसा आता था, उसे उनके बच्चे ही रखते थे।
फिर धीरे-धीरे चालाकी से उन्होंने अवधेश सिंह की जमीन तेजा गांव में और कुछ जमीन सैरपुर के पास, दोनों अपने नाम करवा लीं।

नेहा के शब्दों में—
“हमें नहीं पता था कागज कैसे बनते हैं। हम कम पढ़े-लिखे लोग हैं।
उन्होंने भरोसे का फायदा उठाकर हमारी पूरी जमीन अपने नाम करा ली।”

सबसे चौंकाने वाली बात—अब चाचा को ‘पिता’ बताकर जमीन पर दावा

नेहा बताती हैं कि माना सिंह के बच्चे अब यह दावा कर रहे हैं कि अवधेश उनके ‘पिता’ थे, जबकि असलियत में वे उनके चाचा थे।
इस तरह वे परिवारिक भूमि पर उत्तराधिकार का हक जताने की कोशिश कर रहे हैं।

वकील पर गंभीर आरोप—डेढ़ लाख लुटवाकर अब बोल रहा: ‘विवादित जमीन है इसमें हम कुछ नहीं कर सकते

नेहा के मुताबिक जब विवादित जमीन है तो वह किसी के नाम कैसे हो सकती है मेरे जेठ के बच्चों ने पैसे देकर सब कुछ अपने नाम करवा लिया और हम पैसे देकर भी कम पढ़े-लिखे होने के कारण कुछ नहीं कर पाए

नेहा का तंज—
“अगर जमीन नाम नहीं हो सकती थी, तो पैसे क्यों लेते गए?
हम गरीब लोग कर्ज में डूब गए, फिर भी न्याय नहीं मिला।”

नेहा बताती हैं कि मुकदमे के चलते घर पर कर्ज भी हो गया है, और अब परिवार आर्थिक संकट में है।

हेल्पलाइन पर शिकायत… पर कार्रवाई का नाम नहीं, नेहा बोलीं—अब योगी-मोदी सरकार से उम्मीद

नेहा सिंह ने हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज करा दी है, मगर डेढ़ साल से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

नेहा का दर्द—
“हमने जिन बच्चों को सीने से लगाकर पाला, उन्होंने ही हमें लूट लिया।
अब बस सरकार से उम्मीद है कि हमारी जमीन वापस दिलाई जाए।
हम गरीब हैं, पढ़े-लिखे नहीं… कोई हमारी बात नहीं सुन रहा।”

नेहा कहती हैं कि अगर प्रशासन ने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो वे पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी।

दरभंगा बिहार बिरौल‌ से बड़ी लापरवाही उजागर | “घर के ऊपर लटक रहा मौत का 11 हजार वोल्ट का तार…

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दरभंगा बिहार बिरौल‌ से बड़ी लापरवाही उजागर | “घर के ऊपर लटक रहा मौत का 11 हजार वोल्ट का तार… पहले भी लगी थी आग, फिर भी नहीं हटाया”—पीड़ित योग जमाद की गुहार
परिवार बोला: रोज मौत के साये में जी रहे हैं, किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो जाएगी

दरभंगा | बिहार बिरौल‌विशेष रिपोर्ट

दरभंगा बिहार जिला बिरौल‌ के चाना गांव से एक गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक परिवार पिछले कई महीनों से 11,000 वोल्ट के हाईटेंशन बिजली तार और पोल से परेशान है। पीड़ित मोहम्मद जमशेद ने बताया कि उनके नए बने घर की छत के ठीक ऊपर से यह खतरनाक लाइन गुजर रही है, जिससे कभी भी जानलेवा दुर्घटना हो सकती है।

पीड़ित का कहना है कि बार-बार आवेदन देने के बावजूद विभाग आंखें मूंदे बैठा है।

“पहले भी आग लग चुकी है… बच्चे और परिवार जैसे-तैसे जान बचाकर भागे”

मोहम्मद जमशेद ने बताया कि इसी हाईटेंशन लाइन की वजह से कुछ माह पहले उनके घर में आग लग गई थी।
उस हादसे में कई सामान जलकर नष्ट हो गए।

मोहम्मद जमशेद का दर्द—
“हम लोग किसी तरह भागकर जान बचाए… आज भी डर में जी रहे हैं कि कब फिर चिंगारी गिरे और सब खत्म हो जाए।”

11 हजार वोल्ट का तार घर के बिलकुल ऊपर—नई इमारत का काम रुक गया

उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी जमीन पर नया मकान बनवाना शुरू किया, लेकिन बिजली विभाग की लापरवाही के चलते निर्माण आधा ही हो पाया।
तार इतना नीचे है कि मजदूर भी काम करने से डरते हैं।

मोहम्मद जमशेद कहते हैं—
“हाईटेंशन लाइन अगर छू जाए तो मौके पर मौत तय है।
हम रोज मौत के साये में जी रहे हैं।”

कई बार आवेदन… पर कोई सुनवाई नहीं—कनीय सुरक्षा अभियंता तक गुहार पहुंचाई

पीड़ित ने कनीय सुरक्षा अभियंता, दरभंगा को भी लिखित आवेदन दिया है।
साफ लिखा है कि—
“कृपया पोल और तार को हटाया जाए, क्योंकि इस वजह से मकान निर्माण बाधित है और जान का खतरा बना हुआ है।”

लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मोहम्मद जमशेद का कहना है—
“हर जगह आवेदन दिया, मगर कोई अधिकारी मौके पर तक नहीं आया।
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?”

पीड़ित परिवार का सरकार से सवाल—‘क्या हमारी जान की कोई कीमत नहीं?’

परिवार का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद विभाग सिर्फ आश्वासन देता है।

पीड़ित परिवार पूरे डर और चिंता में है—
“अगर आज नहीं हटाया तो कल कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
हमारी जान चली गई तो जिम्मेदार कौन होगा?”

परिवार अब मीडिया और प्रशासन से मांग कर रहा है कि तुरंत हाईटेंशन पोल और तार को हटाकर सुरक्षित मार्ग से स्थानांतरित किया जाए।

नाबालिग उम्र, दो-दो शादियां और 3 महीने का गर्भ… मां बोली– “मेरे बेटे को फंसाया गया, मैं बच्चे को अपनाने को तैयार हूं”

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होशंगाबाद/पिपरिया।
पुरानी बस्ती गांधीवाड़ा इलाके में एक ऐसा पारिवारिक विवाद सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। 35 वर्षीय राजकुमारी अमोले ने आरोप लगाया है कि उनकी 20 वर्ष की बताई जाने वाली बहु मोनिका की उम्र आधार कार्ड में सिर्फ 15 वर्ष दर्ज है, और उसी दौरान उससे नाबालिग बताते हुए दो-दो शादियां करा दी गईं। अब मोनिका 3 महीने की गर्भवती है, और परिवार में घमासान मचा हुआ है।

पहली शादी—4 मई 2025 को हारी जागीर गांव में

मोनिका की पहली शादी सज्जन नाम के युवक से विश्वकर्मा भवन में 4 मई 2025 को हुई थी। मोहल्ले व रिश्तेदारों ने भी यही शादी मानकर मोनिका को विदा कराया।

दूसरी शादी—मंदिर में विजय के साथ

राजकुमारी का आरोप है कि शादी के बाद मोनिका और उनका बेटा विजय (19) एक मंदिर में हरिज्योति के समय पहुंचे और वहां दूसरी शादी कर ली। बाद में विजय ने खुद बताया कि उसने मोनिका को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया है।
इसी दौरान मोनिका गर्भवती हो गई और अब तीन महीने का गर्भ ठहर चुका है।

लड़की का पिता अजय और मां अर्चना रोर्या पर गंभीर आरोप

राजकुमारी ने मोनिका के पिता अजय और उसकी पत्नी अर्चना पर बड़ा आरोप लगाया है। उनका कहना है—
“मेरी बेटे को झूठे मामले में फँसा दिया गया। अजय और अर्चना चाहते हैं कि मोनिका का बच्चा गिरा दिया जाए। वो मेरी बहु पर गलत बयान और कारवाही के लिए दबाव बना रहे हैं।”

राजकुमारी का दावा है कि मोनिका बच्चा जन्म देना चाहती है और वे खुद भी उस बच्चे को अपनाने को तैयार हैं।

मोनिका की उम्र पर सवाल

आधार कार्ड में मोनिका की उम्र 15 वर्ष दर्ज है, जबकि वह खुद को 20 वर्ष बताती है। इसी पर उलझन और गहराई से बढ़ गई है, क्योंकि नाबालिग होने पर शादी और गर्भ दोनों ही गंभीर कानूनी मामले बन जाते हैं।

गांव में चर्चा—दो परिवार आमने-सामने

पूरे गांधीवाड़ा और पिपरिया क्षेत्र में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ मां राजकुमारी बेटी और होने वाले बच्चे को बचाना चाहती है, वहीं दूसरी ओर पिता अजय और अर्चना गर्भपात पर जोर दे रहे हैं।

स्थानीय लोग कह रहे हैं कि मामला गंभीर है और दोनों पक्ष पुलिस से लेकर प्रशासन तक जाने की तैयारी में हैं।

मोनिका की जिद—“मैं बच्चे को जन्म दूंगी”

राजकुमारी बताती हैं—
“मोनिका खुद कह रही है कि वह किसी भी हालत में बच्चे को जन्म देना चाहती है। उसे कोई दबाव न दे। और अपनी सास के साथ रहना चाहती है”

यह मामला अब परिवार के भीतर के विवाद से निकलकर गांव की बड़ी बहस बन चुका है।

 

दिल्ली से ट्रेन पकड़कर निकले थे पटना के अजय पासवान, छह दिन से गायब

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दिल्ली से ट्रेन पकड़कर निकले थे पटना के अजय पासवान, छह दिन से गायब — अनपढ़ होने और मोबाइल न होने से बढ़ी चिंता; परिवार रो-रोकर लगा रहा गुहार, सूचना देने वाले को 5000 रुपये इनाम

पटना | विशेष रिपोर्ट

पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिकंदरा के रहने वाले 38 वर्षीय अजय पासवान पिछले छह दिनों से रहस्यमय तरीके से लापता हैं। जानकारी के अनुसार, अजय दिल्ली में पिछले 10 वर्षों से ‘गत्ते लाइन’ (कागज तैयार करने वाले गोदाम) में मजदूरी करते थे और हर बार छुट्टी पर गांव आने के लिए ट्रेन से ही सफर करते रहे हैं। लेकिन इस बार वह दिल्ली से निकले, पर घर नहीं पहुंचे।

दिल्ली से रवाना हुए, लेकिन बिहार नहीं पहुंचे

परिवार के लोगों ने बताया कि अजय पासवान छह दिन पहले दिल्ली से पटना आने के लिए ट्रेन पर सवार हुए थे, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
उनकी पत्नी प्रियंका देवी और रिश्तेदारों ने बताया कि वह अनपढ़ हैं, मोबाइल फोन भी नहीं रखते, ऐसे में उनसे संपर्क करना बिल्कुल असंभव हो गया है।

ठेकेदार ने कहा—“दिल्ली से निकल चुके हैं”

अजय के साले राजीव ने मीडिया को बताया कि उन्होंने मजदूरी के ठेकेदार सत्येंद्र यादव से बात की। ठेकेदार ने पुष्टि की कि अजय दिल्ली से घर के लिए निकल चुके थे, लेकिन उसके बाद वह कहां गए, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
पत्नी प्रियंका का कहना है कि अब हालत ऐसी हो गई है कि उन्हें किसी अनहोनी का डर सताने लगा है। चार बच्चों की जिम्मेदारी निभा रहे थे जिसमें एक बेटी और तीन बेटे हैं

हर बार आते थे सुरक्षित, इस बार गुम हो गए

रिश्तेदारों के अनुसार, अजय अक्सर घर आते–जाते रहते थे और कभी कोई समस्या नहीं हुई। लेकिन इस बार न पहुंचना बेहद असामान्य है। गांव और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर लगातार तलाश जारी है, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिला।

खोज में जुटा परिवार, सूचना देने वाले को 5000 रुपये इनाम

परिवार ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को अजय पासवान कहीं भी दिखाई दें या उनसे जुड़ी कोई भी जानकारी मिले, तो सूचना देने वाले को ₹5000 का इनाम दिया जाएगा।

संपर्क नंबर (परिवार द्वारा जारी):

9104877006
9934403525
6280219419

यदि अजय कहीं भी दिखाई दें तो तुरंत फोन करें, ताकि उनकी सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जा सके।

स्थानीय संवाददाता ई खबर मीडिया की रिपोर्ट

 

प्रयागराज से चेन्नई जाते समय युवक रहस्यमय ढंग से लापता, परिवार में मचा कोहराम

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प्रयागराज के एक युवक के अचानक लापता हो जाने से परिजनों में भारी चिंता और इलाके में सनसनी फैल गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुनील सोनकर उर्फ बुला उम्र लगभग 32 वर्ष निवासी प्रयागराज दिनांक 16 नवंबर 2025 को इलाहाबाद से चेन्नई जाने के लिए घर से रवाना हुए थे। बताया जा रहा है कि वह यात्रा के दौरान बीच रास्ते में रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए, जिसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल सका है।

परिजनों के अनुसार सुनील सोनकर नीले रंग का लोवर तथा सफेद और हरे रंग का स्वेटर पहने हुए थे। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी उनका कोई संपर्क नहीं हो सका तो परिवार ने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां तलाश शुरू की, लेकिन कहीं से कोई जानकारी नहीं मिल पाई।

युवक के लापता होने की सूचना संबंधित थाने को दी गई है। थाना प्रभारी द्वारा भी मामले को गंभीरता से लेते हुए छानबीन शुरू कर दी गई है, लेकिन अब तक कोई सुराग हाथ नहीं लग सका है। बेटे के सुरक्षित वापस लौटने की आस में परिवार का रो रोकर बुरा हाल है।

परिजनों ने आम जनता से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी व्यक्ति को सुनील सोनकर उर्फ बुला के बारे में कोई भी जानकारी देता है तो उसे 30000 का इनाम घोषित किया जाएगा और किसी को जानकारी या सूचना मिलती है तो वह तुरंत थाना प्रभारी के मोबाइल नंबर 9305664804 या परिवार के मोबाइल नंबर 7678839697, 9044949524, 8858998330 पर संपर्क करे।

सुपौल से बड़ी खबर: 35 साल पुराने भूमि विवाद में शनिचरा मुखिया को न्याय की दरकार, प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग तेज

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सुपौल (बिहार), थाना–सोनाली:
जिला सुपौल के सोनाली थाना क्षेत्र के रहने वाले शनिचरा मुखिया (26 वर्ष) और उनके पिता प्रसादी मुखिया पिछले कई महीनों से अपनी पैतृक जमीन वापस पाने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आरोप है कि उसी गांव के निवासी बमोरी यादव ने उनकी जमीन पर पिछले करीब 35 वर्षों से कब्ज़ा कर रखा है, जबकि यह जमीन शनिचरा मुखिया के दादा द्वारा खानापूर्ति के तौर पर अस्थायी रूप से उन्हें उपयोग करने के लिए दी गई थी।

क्या है पूरा मामला?

परिवार का कहना है कि 6 अप्रैल को हुए विवाद के बाद मामला और गंभीर हो गया। शनिचरा मुखिया के दादा ने वर्षों पहले किसानों की मदद के उद्देश्य से यह जमीन खाने–खेत करने (अस्थायी उपयोग) के लिए बमोरी यादव को दी थी। लेकिन बीते दशकों में यह अस्थायी उपयोग विवाद का रूप ले बैठा।

परिजनों के अनुसार, साल 2025 में हुए हालिया सर्वे में बमोरी यादव ने कथित रूप से अपनी पकड़ का इस्तेमाल करते हुए इस जमीन को अपने नाम दाखिल–खारिज करवा लिया, जबकि जमीन असली कागज़ात में शनिचरा मुखिया के परिवार की बताई जा रही है।

पीड़ित परिवार की आपबीती

शनिचरा मुखिया का कहना है:

“हमारी पुश्तैनी जमीन हमें वापस दिलाई जाए। यह जमीन केवल खेती के लिए कुछ समय के लिए दी गई थी, लेकिन आज उस पर कब्जा कर लिया गया है। प्रशासन से कई बार गुहार लगाने के बाद भी हमारी सुनवाई नहीं हुई।”

परिवार का आरोप है कि उन्होंने स्थानीय थाना, अंचल कार्यालय और संबंधित विभागों में कई बार आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

न्याय की उम्मीद में मीडिया का सहारा

न्याय की आस लगाए शनिचरा मुखिया अब मीडिया और जनप्रतिनिधियों से मदद की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि—

“यदि मीडिया हमारी आवाज़ उठाए तो शायद प्रशासन हरकत में आए और हमें हमारी जमीन वापस मिल सके।”

अभी स्थिति क्या है?

जमीन पर अब भी बमोरी यादव का कब्ज़ा बताया जा रहा है।

मूल परिवार ने भूमि सर्वे, खतियान और पुराने कागजात के आधार पर अपनी दावेदारी दोहराई है।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतज़ार किया जा रहा है।

परिवार की मांग

जमीन का सही तरीके से पुनः सत्यापन करवा कर

न्यायसंगत कार्रवाई करते हुए

पैतृक जमीन को उन्हें वापस दिलाया जाए