मथुरा जिले के जमुनापार थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश को लेकर एक ही परिवार ने कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी लंबे समय से उन्हें निशाना बना रहे हैं और अब मामला बच्चे के अपहरण की कोशिश, घर में घुसकर लूटपाट, महिला से अश्लील हरकत, मारपीट और जान से मारने की धमकियों तक पहुंच गया है। घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है।
शिव नगर कॉलोनी तैयापुर निवासी शिवकुमार पुत्र लीलाधर ने पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि कुछ समय पहले आरोपी हरीश और उसके साथियों पर उनके घर से चांदी की तोड़ियां और सोने के आभूषण चोरी करने का आरोप लगा था। उस समय पंचायत और पुलिस की मौजूदगी में समझौता कराया गया था, लेकिन तभी से आरोपी परिवार से रंजिश रखने लगे।
पीड़ित के मुताबिक, आरोपी हरीश लगातार घर के आसपास आकर विवाद करता और परिवार को धमकाता रहा। शिवकुमार ने बताया कि 23 अप्रैल 2026 को उनका पुत्र हिंदू प्राइमरी स्कूल तैयापुर से घर लौट रहा था। आरोप है कि रास्ते में चौबे जी के बाड़े के पास हरीश और उसके चार साथियों ने बच्चे का अपहरण करने की कोशिश की। बच्चे के शोर मचाने पर आरोपी मौके से फरार हो गए। परिवार ने इसकी शिकायत थाना जमुनापार में दी, लेकिन कार्रवाई न होने का आरोप लगाया है।
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि 26 अप्रैल को जब वह घर पर नहीं थे, तब आरोपी हरीश उनके घर पहुंचा और गाली गलौज करने लगा। विरोध करने पर उसने कथित रूप से महिला के सामने कपड़े उतार दिए और अश्लील हरकतें करने लगा। इसी दौरान शिवकुमार के घर पहुंचने पर आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गया।
प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि 1 मई 2026 को आरोपी हरीश और उसके साथी नंदकिशोर व शब्बू कथित रूप से शिवकुमार की हत्या की साजिश बनाते दिखाई दिए। पीड़ित का दावा है कि राजेश और हरिगोविंद गवाह है और मौजूद लोगों ने बातचीत सुनी और मोबाइल से फोटो भी लिए हैं।
इसी मामले में जमुनापार निवासी राधा देवी ने भी थाना प्रभारी को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि 15 फरवरी 2025 की रात आरोपी हरीश, मोता, राहुल, राकेश, इन्दोह और अन्य साथियों ने उनके घर में घुसकर मारपीट और लूटपाट की। पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने तमंचा सिर पर रखकर घर में रखे जेवर और नकदी लूट ली। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी हरीश ने उसके पति के सामने कपड़े उतारने और इज्जत लूटने की धमकी भी दी।
राधा देवी का कहना है कि घटना के दौरान घर का पालतू कुत्ता खुल गया, जिसके बाद आरोपी भागने लगे। भागते समय आरोपी हरीश का मोबाइल, जूता और टोपी मौके पर छूट गई, जिससे उसकी पहचान हुई। पीड़िता ने बताया कि बाद में पंचायत के जरिए समझौते की कोशिश हुई, जिसमें आरोपी पक्ष ने रकम लौटाने की बात स्वीकार की थी, लेकिन बाद में मुकर गए।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी पक्ष लगातार गाली गलौज कर रहा है और पुलिस को पैसे देकर मामला दबाने तथा पूरे परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दे रहा है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि आरोपी घर में पेट्रोल डालकर आग लगाने और पूरे परिवार को खत्म करने की धमकियां दे रहे हैं।
पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से आरोपी हरीश, सत्यावती, नंदकिशोर, राहुल,अर्जुन राकेश सहित पांच अन्य लोगों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस को शिकायत पत्र सौंप दिया गया है और मामले की जांच की मांग की जा रही है। इलाके में घटना को लेकर दहशत और तनाव का माहौल बना हुआ है।
मथुरा में सनसनीखेज मामला: अपहरण की कोशिश, लूट, महिला से अश्लील हरकत और हत्या की साजिश के आरोप
पश्चिम चम्पारण में आधार सुधार के नाम पर 19 हजार की ठगी, पीड़ित की नहीं सुनीपश्चिम पुलिस, कार्रवाई के लिए भटक रहा युवक
सुगौली। पश्चिम चम्पारण जिले के सुगौली थाना क्षेत्र में आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधार कराने के नाम पर कथित ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक ने आरोप लगाया है कि आधार सुधार कराने का झांसा देकर उससे 19 हजार रुपये वसूल लिए गए, लेकिन न तो आधार कार्ड में कोई सुधार हुआ और न ही अब तक रुपये वापस मिले। इतना ही नहीं, पीड़ित का आरोप है कि थाना पुलिस ने उसकी तहरीर तक लेने से इनकार कर दिया और अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार सुगौली थाना क्षेत्र के श्रीपुर भटवलिया वार्ड नंबर 8 निवासी अर्जुन कुमार ने बताया कि आधार कार्ड में जन्मतिथि कम कराने के नाम पर राकेश कुमार पासवान नामक युवक ने उससे संपर्क किया था। आरोपी ने भरोसा दिलाया कि वह आसानी से आधार में सुधार करा देगा। इसके एवज में पहले 10 हजार रुपये नकद और बाद में 9 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से लिए गए। कुल 19 हजार रुपये लेने के बाद आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा।
पीड़ित के अनुसार रुपये लेने के बाद न तो आधार कार्ड में कोई बदलाव हुआ और न ही आरोपी ने पैसे लौटाए। जब भी वह फोन करता है तो आरोपी फोन नहीं उठाता। पीड़ित ने बताया कि आरोपी राकेश कुमार पासवान पश्चिम चम्पारण के जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र बेतिया में बैठता है। कई बार मिलने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार बहाने बनाकर टाल दिया गया।
अर्जुन कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी के साथ उसका भांजा भी इस पूरे नेटवर्क में शामिल है, जो लोगों को अलग-अलग जगहों पर बुलाकर मिलवाता है। पीड़ित का कहना है कि कई बार रुपये वापस करने का झांसा दिया गया, लेकिन अब तक कोई पैसा वापस नहीं मिला।
सबसे गंभीर बात यह है कि पीड़ित जब अपनी शिकायत लेकर सुगौली थाना पहुंचा तो उसकी तहरीर तक नहीं ली गई। पीड़ित का आरोप है कि थाना स्तर पर उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं सुना गया और अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इससे पीड़ित खुद को ठगा और असहाय महसूस कर रहा है।
पीड़ित ने अब मामले की शिकायत ऑनलाइन माध्यम से भी की है और उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आधार सुधार और सरकारी दस्तावेजों के नाम पर चल रहे ठगी के नेटवर्क और सक्रिय हो सकते हैं।
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प्रयागराज के दारागंज थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने ही रिश्तेदार आकाश नाम है
प्रयागराज के दारागंज थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने ही रिश्तेदार आकाश नाम है उम्र 26 वर्ष है यहां नाव चलाता है पर जबरदस्ती और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
पीड़िता के अनुसार घटना 23 अप्रैल 2026 की दोपहर करीब 2 बजकर 30 मिनट की है। महिला का कहना है कि वह घर से बाहर निकली थी, तभी रास्ते में आकाश ने उसे रोक लिया और कथित तौर पर जबरन पकड़कर कमरे के अंदर ले गया। पीड़िता का आरोप है कि वहां उसके साथ जबरदस्ती की गई। और जब यहां हरकत उसने कि उस समय वहां नशे में था
महिला ने बताया कि घटना के दौरान उसने शोर मचाने और विरोध करने की कोशिश की, लेकिन आकाश ने उसे धमकाते हुए कहा कि अगर उसने अपने पति या परिवार को इस बारे में बताया तो उसे और उसके परिवार को गंभीर नुकसान पहुंचाया जाएगा।
पीड़िता का आरोप है कि आरोपी रिश्तेदारी का फायदा उठाकर लगातार दबाव बना रहा था। घटना के बाद महिला मानसिक रूप से बेहद परेशान बताई जा रही है।
मामले की शिकायत थाना दारागंज में दी गई है, जहां पुलिस ने प्रार्थना पत्र के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने इलाके में रिश्तों की मर्यादा और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
हरियाणा में बिजली कनेक्शन का सपना टूटा, आवेदन रद्द होने से परिवार परेशान
अंबाला जिले के चौरमस्तपुर क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीण बिजली व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव मस्तपुर निवासी राज कौर ने अपने घर के लिए उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड में नया घरेलू बिजली कनेक्शन लेने के लिए आवेदन किया था, लेकिन महीनों इंतजार के बाद विभाग ने आवेदन रद्द कर दिया।
जानकारी के अनुसार राज कौर ने 26 सितंबर 2024 को सौभाग्य योजना के तहत नया बिजली कनेक्शन लेने के लिए आवेदन किया था। आवेदन संख्या A34 924 188 के तहत विभाग में ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की गई और 236 रुपये शुल्क भी जमा कराया गया। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही घर में बिजली पहुंचेगी और रोजमर्रा की परेशानियां खत्म होंगी।
आवेदन में घरेलू उपयोग के लिए एक किलोवाट लोड की मांग की गई थी। आवेदक ने आधार कार्ड समेत जरूरी दस्तावेज भी जमा किए थे। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार लगातार विभागीय कार्रवाई का इंतजार करता रहा।
लेकिन करीब डेढ़ साल बाद विभाग की ओर से आवेदन की स्थिति में बड़ा बदलाव सामने आया। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार कनेक्शन आवेदन को रद्द कर दिया गया। रद्द करने का कारण बताया गया कि आवेदक के घर के ऊपर से हाई टेंशन लाइन गुजर रही है और क्षेत्र प्रभारी की रिपोर्ट के आधार पर सर्विस कनेक्शन आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
विभाग ने स्पष्ट किया कि हाई टेंशन लाइन की मौजूदगी सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा हो सकती है, इसलिए फाइल को निरस्त कर दिया गया। हालांकि जमा की गई राशि वापस कर दी गई है।
इस फैसले के बाद परिवार में नाराजगी और चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि क्षेत्र में पहले से हाई टेंशन लाइन थी तो आवेदन स्वीकार करने और शुल्क जमा कराने से पहले ही स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए थी। लंबा इंतजार कराने के बाद आवेदन रद्द करना आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के लिए लोगों को बार बार विभागीय चक्कर काटने पड़ते हैं। अब परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर घर तक बिजली कैसे पहुंचेगी और क्या विभाग कोई वैकल्पिक समाधान देगा।
मामले ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और तकनीकी जांच प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस परिवार को राहत देने के लिए कोई नया रास्ता निकालते हैं या नहीं।
पत्नी युवक के साथ फिर हुई लापता, 3 साल के मासूम के साथ अकेला रह गया पति; मोबाइल भी बंद, पुलिस में दर्ज हुई मिसिंग रिपोर्ट
Virar। महाराष्ट्र के विरार क्षेत्र से एक परिवार के टूटने और पत्नी के लापता होने का मामला सामने आया है। विरार पुलिस थाने में दर्ज मिसिंग रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता पति ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी 29 अप्रैल 2026 को धोखे से घर छोड़कर चली गई। पीड़ित पति का दावा है कि पत्नी को अजय यादव पिता दशरथ यादव नाम का युवक अपने साथ लेकर गया है। घटना के बाद से महिला का मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है, जिससे परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक विरार पुलिस थाने में मनुष्य मिसिंग क्रमांक 110/2026 दर्ज किया गया है। मामले की जांच सहायक पुलिस उप निरीक्षक नरेंद्र गायकवाड़ को सौंपी गई है। शिकायतकर्ता पति ने बताया कि जिस युवक पर उनकी पत्नी को भगाने का आरोप है उसका नाम अजय यादव है, जो Alibag क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। अजय यादव के पिता का नाम दशरथ यादव बताया गया है।
पीड़ित पति का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, बल्कि आरोपी युवक पहले भी उनकी पत्नी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जा चुका है। इस बार भी अचानक पत्नी घर से गायब हो गई और अपना मोबाइल फोन साथ ले गई, जिसके बाद से नंबर लगातार बंद आ रहा है। पति का कहना है कि पत्नी के अचानक चले जाने से परिवार पूरी तरह टूट गया है।
सबसे ज्यादा परेशानी तीन साल के मासूम बच्चे को लेकर हो रही है। पति के अनुसार अब बच्चे की पूरी जिम्मेदारी अकेले उन्हीं पर आ गई है। वह बच्चे की देखभाल में इतने व्यस्त रहते हैं कि काम पर भी नहीं जा पा रहे हैं। आर्थिक स्थिति खराब होने लगी है और परिवार पर संकट गहराता जा रहा है। पति का कहना है कि वह मानसिक रूप से भी बेहद परेशान हैं और लगातार पत्नी की तलाश कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के मामलों में छोटे बच्चों का भविष्य सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। वहीं परिवार ने पुलिस प्रशासन से महिला को जल्द खोजने और मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। पुलिस फिलहाल मोबाइल लोकेशन और अन्य पहलुओं के आधार पर जांच में जुटी हुई है।
पीड़ित पति को उम्मीद है कि पुलिस जल्द उनकी पत्नी का पता लगाएगी ताकि उनका परिवार दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौट सके।
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पति छोड़कर फरार, फैक्ट्री में काम करते वक्त कटी महिला की उंगली; तीन बच्चों के साथ दर-दर भटक रही पूनम ने मांगी मदद
लुधियाना। पंजाब के लुधियाना शहर से एक महिला की दर्दभरी कहानी सामने आई है, जहां तीन बच्चों की मां पूनम अपने पति द्वारा छोड़ दिए जाने और आर्थिक तंगी से जूझ रही है। मूल रूप से बिहार के हाजीपुर की रहने वाली पूनम का आरोप है कि उनके पति प्रदीप उर्फ शत्रु पिछले करीब तीन महीनों से उन्हें और बच्चों को छोड़कर फरार हैं। महिला का कहना है कि अब वह गंभीर आर्थिक संकट में हैं और बच्चों का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
पूनम ने बताया कि उनके माता-पिता नहीं हैं और वह लंबे समय से अपनी बहन के साथ लुधियाना में सब्जी मंडी के पास रह रही थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात सीतापुर निवासी प्रदीप उर्फ शत्रु से हुई। दोनों के बीच प्रेम संबंध बने और बाद में शादी हो गई। शादी के बाद उनके तीन बच्चे हुए, जिनमें दो बेटियां और एक बेटा शामिल हैं। शुरुआत में सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन धीरे-धीरे पारिवारिक हालात बिगड़ते गए।
महिला का आरोप है कि प्रदीप उर्फ शत्रु करीब तीन महीने पहले उन्हें बच्चों समेत छोड़कर चला गया। पूनम के अनुसार वह एक कंपनी में काम करके जैसे-तैसे घर चला रही थीं, लेकिन कुछ समय पहले फैक्ट्री में प्रेस मशीन पर काम करते दौरान उनकी एक उंगली कट गई। हादसे के बाद वह काम करने में असमर्थ हो गईं और परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह टूट गई।
पूनम का कहना है कि जब वह दूसरे लोगों के मोबाइल नंबर से अपने पति से संपर्क करती हैं तो वह बेहद बेरुखी से जवाब देता है। महिला के मुताबिक प्रदीप ने यहां तक कह दिया कि “चाहे मरो या जियो, हमें कोई मतलब नहीं।” इस व्यवहार से पूनम मानसिक रूप से भी टूट चुकी हैं। उनका कहना है कि बच्चों की जिम्मेदारी सिर्फ मां की नहीं, बल्कि पिता की भी होती है और प्रदीप अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।
पीड़िता ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाते हुए कहा है कि उनके बच्चों के future को देखते हुए प्रदीप उर्फ शत्रु पर आर्थिक सहायता देने का दबाव बनाया जाए। पूनम चाहती हैं कि उन्हें और उनके बच्चों को न्याय मिले ताकि वह सम्मान के साथ जीवन जी सकें। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह परिवार छोड़कर भाग जाने के मामलों में प्रशासन और सामाजिक संगठनों को आगे आकर पीड़ित महिलाओं की मदद करनी चाहिए।
फिलहाल पूनम अपने बच्चों के साथ बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रही हैं और प्रशासन से सहायता की उम्मीद लगाए बैठी हैं।
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सुलतानपुर में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, ग्राम प्रधान और पुलिस पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप
सुलतानपुर। जिले के कूरेभार थाना क्षेत्र के कौड़ियावा गांव में जमीन विवाद अब प्रशासनिक और पुलिस कार्यवाही पर गंभीर सवाल खड़े करने लगा है। एक दिव्यांग युवक ने ग्राम प्रधान, पुलिस कर्मियों और राजस्व कर्मचारियों पर मिलीभगत, प्रताड़ना, मारपीट और फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देने जैसे सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस महानिरीक्षक तक शिकायत भेजकर जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाई है।
कौड़ियावा निवासी केश कुमार यादव ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनके भाई अजय कुमार यादव ने अपनी हिस्से की जमीन का बैनामा ग्राम उमरी निवासी बबिता पत्नी चन्दन राणा के नाम किया था, लेकिन बैनामे में गलत चौहद्दी दर्शाकर दूसरे भाई की जमीन को शामिल कर लिया गया। पीड़ित का दावा है कि परिवार के बीच पैतृक संपत्ति का बंटवारा पहले ही हो चुका था, बावजूद इसके अब उनकी जमीन पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है।

पीड़ित ने ग्राम प्रधान चन्दन राणा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह अपने राजनीतिक प्रभाव और दबंगई के दम पर जमीन कब्जाने का प्रयास कर रहा है। शिकायत में चन्दन राणा को “अपराधिक भूमाफिया” बताते हुए आरोप लगाया गया है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग कर भारी अचल संपत्ति अर्जित की है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। केश कुमार का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उनके साथ कोई बड़ी घटना हो सकती है।
मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि थाना कूरेभार के तत्कालीन एसआई राजेश कुमार यादव और अन्य पुलिसकर्मियों ने विपक्षी पक्ष से मिलकर उन्हें लगातार प्रताड़ित किया। आरोप है कि 11 दिसंबर 2025 को उन्हें थाने बुलाकर दीवान और सिपाही के साथ मिलकर बुरी तरह पीटा गया। इतना ही नहीं, मेडिकल जांच के दौरान एक्स-रे रेफर पर्ची तक पुलिसकर्मी अपने साथ ले गए और शिकायत वापस न लेने पर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
केश कुमार यादव, जो खुद को 45 प्रतिशत दिव्यांग बताते हैं, ने कहा कि वह छोटी मैकेनिक की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनका आरोप है कि बार-बार थाने बुलाकर एकपक्षीय कार्रवाई की गई और BNS की धाराओं में चालान कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पीड़ित ने दावा किया कि उनके पास फोन कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें समझौते का दबाव बनाया जा रहा था।
वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक जांच में मामले को प्रथम दृष्टया सिविल प्रकृति का बताया गया है। जांच आख्या में कहा गया कि भूमि विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच चौहद्दी और कब्जेदारी का विवाद है तथा पीड़ित को न्यायालय में वाद दाखिल कर कानूनी राहत लेने की सलाह दी गई है। पुलिस की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि विपक्षी पक्ष की शिकायत पर केश कुमार और उनके भाई के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
हालांकि पीड़ित परिवार प्रशासनिक जांच से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो रही और प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई की जा रही है। परिवार ने मुख्यमंत्री, पुलिस अधीक्षक, डीआईजी और आईजी से मांग की है कि मामले की जांच किसी दूसरे जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से कराई जाए ताकि निष्पक्ष न्याय मिल सके।
गांव और आसपास के इलाके में यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव के कारण और अधिक उलझता जा रहा है। पीड़ित परिवार लगातार सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
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मजदूरी करने वाले पति की पत्नी बनी सोशल मीडिया स्टार बनने की दावेदार, 5 महीनों से अकेले बना रही वीडियो; बच्चों के भविष्य के लिए वायरल होने का सपना
पूर्वी चम्पारण। बिहार के अरेराज क्षेत्र के सलहा गांव की रहने वाली बेबी देवी इन दिनों अपने संघर्ष और हौसले को लेकर चर्चा में हैं। सीमित संसाधनों और पारिवारिक चुनौतियों के बीच बेबी देवी पिछले करीब पांच महीनों से लगातार भोजपुरी, हिंदी और अन्य भाषाओं में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। उनका सपना है कि उनकी मेहनत लोगों तक पहुंचे, उनके वीडियो वायरल हों और यूट्यूब से होने वाली कमाई के जरिए वह अपने बच्चों का भविष्य बेहतर बना सकें।
बेबी देवी का कहना है कि वह अपने निजी मोबाइल फोन से अकेले ही वीडियो शूट करती हैं। न तो उनके पास कोई टीम है और न ही महंगे उपकरण। गांव के साधारण माहौल में रहकर वह रोज नए कंटेंट पर काम करती हैं। उनका यूट्यूब चैनल “अंकुश राज” नाम से संचालित हो रहा है, जिस पर वह लगातार वीडियो अपलोड कर रही हैं। हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक बेबी देवी के पति अच्छे लाल सहनी मेहनत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है। बेबी देवी का आरोप है कि उनके पति उन्हें वीडियो बनाने में कोई विशेष सहयोग नहीं करते, जबकि उन्हें यह पूरी जानकारी है कि वह सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। इसके बावजूद बेबी देवी ने हार नहीं मानी और अपने दम पर आगे बढ़ने का फैसला किया।
ग्रामीण परिवेश से निकलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहचान बनाने की कोशिश कर रही बेबी देवी अब चाहती हैं कि लोग उनके वीडियो को ज्यादा से ज्यादा देखें, लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें। उनका कहना है कि अगर उनका कंटेंट लोगों तक पहुंचा और चैनल से आमदनी शुरू हुई तो वह अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को बेहतर बना पाएंगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव की महिलाओं के लिए इस तरह सोशल मीडिया पर सक्रिय होना अब भी आसान नहीं माना जाता। ऐसे माहौल में बेबी देवी का अकेले वीडियो बनाना और लगातार मेहनत करना कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है। सोशल मीडिया के दौर में अब गांव की महिलाएं भी अपने हुनर और आवाज को दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।
रास्ते के विवाद में पड़ोसी पर मारपीट का आरोप, मां-बेटे घायल, थाने में शिकायत
उन्नाव जिले के सोहरामऊ थाना क्षेत्र में रास्ते के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। मामूली कहासुनी के बाद पड़ोसियों द्वारा मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित चन्दनलाल निवासी सोहरामऊ ने आरोप लगाया कि पड़ोसी राजू और उसके साथियों द्वारा लंबे समय से रास्ते को लेकर विवाद किया जा रहा था। पीड़ित का कहना है कि घटना के दिन शाम के समय वह अपने घर के पास मौजूद था, तभी रास्ते से हटने को लेकर कहासुनी शुरू हो गई।
देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोप है कि पड़ोसी पक्ष ने चन्दनलाल के साथ मारपीट शुरू कर दी। शोर सुनकर जब परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव करने की कोशिश की, तब आरोपियों ने उनकी मां को भी नहीं बख्शा और उनके साथ भी मारपीट की गई।
घटना के बाद घायल हालत में पीड़ित और उसकी मां घर पहुंचे, जिसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें लगातार धमकियां भी मिल रही हैं, जिससे परिवार में दहशत का माहौल बना हुआ है।
प्राप्त जानकारी से यह भी पता चला है कि यहां चरस गांजे का काम करते हैं और इन लोगों की दुकान है चरस गांजे की
इस घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रास्ते के छोटे विवाद ने बड़ा रूप ले लिया और समय रहते प्रशासन हस्तक्षेप नहीं करता तो मामला और गंभीर हो सकता था।
फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। पीड़ित परिवार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फरीदाबाद की शिरोही झील में संदिग्ध हालात में युवक की मौत, परिवार ने दोस्तों पर लगाए गंभीर आरोप
फरीदाबाद से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके के रहने वाले एक युवक को उसके पांच दोस्त ,(सत्यम कुमार, अमित शर्मा ,मोहित, सोम, बबलू कुमार यह पांच दोस्त) घर से अपने साथ ले गए और बाद में संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत की खबर सामने आई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
मृतक की पहचान रामा शंकर राय के रूप में हुई है, जो अपने परिवार में सबसे छोटे थे। परिवार में दो बड़े भाई बहन है रामाशंकर के पिताजी को गुजरे हुए 7 वर्ष हो गए हैं और उनकी माता के साथ रहते हैं दिल्ली के भाटी माइंस स्थित संजय कॉलोनी, फतेहपुर बेरी इलाके में रहते थे।
परिवार का आरोप है कि 2 मई 2026 को सुबह करीब 11 बजे रामा शंकर के पांच दोस्त उन्हें घर से अपने साथ लेकर गए। इन दोस्तों के नाम सत्यम, अमित शर्मा, सोम, मोहित और बबलू कुमार बताए जा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि ये सभी युवक इससे तीन दिन पहले भी शिरोही झील गए थे और चौथे दिन रामा शंकर को भी अपने साथ ले गए।
परिवार के मुताबिक रामा शंकर शुरू में जाने के लिए तैयार नहीं थे और उन्होंने साफ तौर पर मना भी किया था। उन्होंने कहा था कि उनका मन नहीं है और वह नहीं जाना चाहते, लेकिन दोस्तों ने दबाव बनाकर उन्हें साथ ले लिया।
बताया जा रहा है कि युवक को फरीदाबाद के धौज थाना क्षेत्र अंतर्गत शिरोही झील ले जाया गया। परिजनों का दावा है कि मुख्य रास्ते की बजाय पीछे के रास्ते से झील तक पहुंचाया गया, जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार आगे के रास्ते से आवाजाही पर रोक रहती है। इस बात ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
घटना के बाद परिवार का रो रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने दोस्तों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आखिर रामा शंकर को जबरन क्यों ले जाया गया और झील तक पीछे के रास्ते से क्यों पहुंचाया गया। परिवार ने पुलिस प्रशासन से मामले की गहराई से जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल धौज थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना हादसा थी या इसके पीछे कोई साजिश है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दोस्तों से पूछताछ के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।
इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है और लोग भी सच सामने आने का इंतजार कर रहे हैं। परिवार को उम्मीद है कि जांच के बाद रामा शंकर को न्याय मिलेगा।

