Monday, July 6, 2026
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10 साल का प्रेम, मुंबई में शादी और अब धमकियों का साया: पुलिस की चेतावनी के बाद प्रेमिका घर लौटी, परिवार ने बाहर निकलने पर लगाया रोक

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वाराणसी। जिले के लमही क्षेत्र से प्रेम संबंध को लेकर एक चर्चित मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने अपनी प्रेमिका के परिवार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित काजू जायसवाल का कहना है कि वह और अंजली पटेल पिछले करीब 10 वर्षों से एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और साथ में जीवन बिताना चाहते हैं, लेकिन परिवार के विरोध और कथित धमकियों के कारण दोनों की जिंदगी संकट में पड़ गई है।

जानकारी के अनुसार अंजली पटेल, जो विनोद कुमार पटेल की पुत्री है और आदमपुर, लमही, वाराणसी की रहने वाली है, उसका घर काजू जायसवाल के घर से करीब दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर है। दोनों की बातचीत करीब एक दशक पहले शुरू हुई थी और समय के साथ यह रिश्ता गहरे प्रेम में बदल गया। युवक का दावा है कि जनवरी 2026 में अंजली खुद उसके पास आई और कहा कि वह उसके साथ रहना चाहती है। इसके बाद दोनों मुंबई चले गए।

पीड़ित के मुताबिक मुंबई पहुंचने के बाद दोनों ने शादी कर ली और किराए के कमरे में रहने लगे। कुछ समय बाद काजू जायसवाल के बड़े पापा का निधन हो गया, जिसके चलते वह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अकेले अपने घर लौट आया, जबकि अंजली मुंबई में ही रही। बाद में अंजली के कहने पर युवक दोबारा मुंबई गया और उसे लेकर वापस बनारस आ गया। बनारस में युवक ऑटो चलाकर अपना गुजारा करता था और दोनों किराए के कमरे में करीब चार महीने तक साथ रहे।

युवक का आरोप है कि इसी दौरान पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया और उसे सख्त चेतावनी दी कि अगर उसने लड़की से संपर्क किया या उसे अपने साथ रखा तो उसे जेल भेज दिया जाएगा। और पीढ़ी काजू जायसवाल के पास से लड़का लड़की दोनों के फोटो वीडियो डिलीट कर दिए और पुलिस के सामने लड़की ने खुद बयान दिया था कि वह लड़के के साथ रहना चाहती है जिसका वीडियो पुलिस के पास मौजूद भी है फिर भी पुलिस ने अंजलि का बयान नजरअंदाज करते हुए उसे धमकी दी कि अगर लड़के को नहीं छोड़ोगी तो लड़के को जेल कर दी जाएगी
काजू जायसवाल का कहना है कि इसी डर के कारण अंजली को मजबूर होकर अपने घर लौटना पड़ा। युवक का आरोप है कि घर पहुंचने के बाद से ही अंजली को उसके परिवार वाले घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं और उस पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

पीड़ित का यह भी आरोप है कि अंजली के पिता लगातार उसे धमकी दे रहे हैं कि यदि उसने इस मामले में कोई कार्रवाई की या दोबारा लड़की से मिलने कीउ कोशिश की तो उसे जान से मार दिया जाएगा। युवक का कहना है कि दोनों एक-दूसरे से बेहद प्रेम करते हैं और पति-पत्नी की तरह आगे की जिंदगी बिताना चाहते हैं, लेकिन परिवार वाले इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

काजू जायसवाल ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोनों को सुरक्षा प्रदान की जाए, काजू जायसवाल को लगातार जान का खतरा मंडरा रहा है और वह डर के साए में जीने को मजबूर है और अब प्रशासन से चाहते हैं की वे बिना किसी डर और दबाव के अपनी जिंदगी का फैसला खुद कर सकें।
काजू जायसवाल का कहना है कि अंजलि पटेल और काजू जायसवाल को कुछ भी होता है तो अंजलि पटेल के घर वालों की जिम्मेदारी होगी विनोद कुमार जो कि अंजलि पटेल के पिताजी है पिंटू पटेल और समजीत कुमार पटेल
फिलहाल यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

जमीन से नीचे बने मकानों के लिए राहत: बिना तोड़े लैन्टर ऊंचा करने की तकनीक से लोगों को मिल रहा समाधान

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जम्मू। बारिश के मौसम में घरों में पानी भरने की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए अब एक अनोखी तकनीक राहत बनकर सामने आ रही है। शहर के कुंजवानी बायपास क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से मकानों को बिना तोड़े उनकी ऊंचाई बढ़ाने का काम किया जा रहा है। इस तकनीक के जरिए उन मकानों को ऊपर उठाया जाता है जो जमीन के स्तर से नीचे बने होते हैं और बरसात में उनमें पानी भरने लगता है। दावा किया जा रहा है कि इस प्रक्रिया में मकान को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाए बिना उसे नई ऊंचाई दी जाती है।

इस काम से जुड़े ठेकेदार एम.डी. अजाम का कहना है कि वह मूल रूप से बिहार के अररिया जिले के रहने वाले हैं और पिछले करीब 15 वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार कई पुराने मकान ऐसे होते हैं जो समय के साथ सड़क या आसपास की जमीन ऊंची हो जाने के कारण नीचे हो जाते हैं। ऐसे मकानों में बारिश के दौरान पानी भर जाता है और लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए वह मकान को नींव से ऊपर उठाने की विशेष तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।

ठेकेदार का दावा है कि इस प्रक्रिया में मकान के लैन्टर को बिना तोड़े और बिना क्षति पहुंचाए उसे ऊंचा किया जाता है। खास मशीनों और तकनीकी उपायों की मदद से पूरे मकान को सावधानीपूर्वक ऊपर उठाकर नई नींव पर स्थापित किया जाता है। इससे न केवल घर की ऊंचाई बढ़ जाती है, बल्कि बरसात के समय पानी भरने की समस्या से भी काफी हद तक राहत मिलती है।

एम.डी. अजाम के अनुसार इस तकनीक से मकान मालिकों को नए निर्माण की तुलना में काफी कम खर्च करना पड़ता है और समय की भी बचत होती है। उन्होंने बताया कि कई लोग पुराने मकान को तोड़कर दोबारा बनाने के बजाय इसी तकनीक के जरिए अपने घर को सुरक्षित और ऊंचा बनवा रहे हैं। उनका कहना है कि काम को पूरी सावधानी और गारंटी के साथ किया जाता है ताकि मकान की मजबूती पर कोई असर न पड़े।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर और आसपास के इलाकों में इस तरह की सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि कई पुराने मकान बारिश के दौरान पानी भरने की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में मकान को बिना तोड़े ऊंचा करने की यह तकनीक लोगों के लिए एक व्यावहारिक और किफायती विकल्प बनती जा रही है।

जिस किसी को भी जरूरत हो तो इस नंबर पर संपर्क करें 84938 80377

 

मुंबई में लापता हुए रोहतास के मजदूर: 17 अप्रैल से नहीं मिला सुराग,बेटा और परिवार रो-रोकर बेहाल

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रोहतास (बिहार)/मुंबई। रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई गए बिहार के रोहतास जिले के एक मजदूर के अचानक लापता हो जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। करीब 17 अप्रैल सुबह करीब 10:00 बजे के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे लगातार प्रशासन तथा लोगों से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार रोहतास जिले के थाना दावध क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ईटवा पोस्ट कोआथ निवासी केदार पासी, पिता स्व. मुन्ती पासी, मजदूरी करने के लिए मुंबई गए हुए थे। बताया जा रहा है कि वह मुंबई के टाटा पावर कल्याणपुर क्षेत्र के आसपास रहकर मजदूरी का काम करते थे। उनके साथ गांव के ही चार-पांच लोग भी काम के सिलसिले में मुंबई गए थे और सभी एक ही कमरे में रहते थे।

परिजनों के मुताबिक 17 अप्रैल 2026 को सुबह करीब 10 बजे केदार पासी काम से लौटकर अपने कमरे की ओर दुकान से राशन लेकर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में वह भटक गए और उसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया। साथियों ने पहले आसपास के इलाकों में काफी तलाश की, लेकिन उनका कहीं कोई सुराग नहीं मिला। बताया जा रहा है कि केदार पासी की मानसिक स्थिति सामान्य है, लेकिन वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते, जिसके कारण उनसे संपर्क करना और भी मुश्किल हो गया है।

केदार पासी के बेटे सरोज कुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि उनके पिता गांव के लोगों के साथ मजदूरी करने के लिए मुंबई गए थे। अचानक उनके लापता हो जाने से पूरा परिवार बेहद परेशान है। परिवार वालों ने आसपास के कई इलाकों में तलाश की, लेकिन अब तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

परिजनों ने प्रशासन और मुंबई में रहने वाले लोगों से अपील की है कि अगर किसी को केदार पासी के बारे में कोई जानकारी मिले तो तुरंत परिवार को सूचित करें। 8591705322 या नजदीकी खाने में सूचना दें उनका कहना है कि किसी तरह उनके पिता मिल जाएं, यही उनकी सबसे बड़ी उम्मीद और प्रार्थना है।

इस घटना के बाद से गांव में भी चिंता का माहौल है। परिजन लगातार उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही केदार पासी का कोई सुराग मिलेगा और वह सुरक्षित अपने परिवार के पास लौट आएंगे।

पश्चिम चम्पारण में सनसनी: नहर किनारे युवक पर हमला, 5 हजार की लूट, जान से मारने की धमकी

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पश्चिम चम्पारण। जिले के चौतरवा थाना क्षेत्र में बुधवार रात उस वक्त सनसनी फैल गई जब एक युवक को नहर किनारे रोककर दो लोगों ने लाठी-डंडों से बेरहमी से पीट दिया और उसके पास से नकद रुपये छीन लिए। पीड़ित ने इस मामले में थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

जानकारी के अनुसार, चौतरवा थाना क्षेत्र के बांके पट्टी मझौआ वार्ड नंबर 09 निवासी 31 वर्षीय मनीष गिरी 16 अप्रैल 2026 की रात करीब 7 बजे अपने मोटरसाइकिल से मझौआ नहर के पास पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि वह सड़क किनारे एक दुकान पर खड़े होकर पेय पदार्थ पी रहे थे, तभी अचानक गांव के ही दो व्यक्ति वहां पहुंचे और बिना किसी कारण गाली-गलौज शुरू कर दी।

पीड़ित के अनुसार, आरोपियों की पहचान सत्यपाल यादव (35) और राजहरन यादव (36) के रूप में हुई है। दोनों ने पहले मोटरसाइकिल की मांग की और जब मनीष ने इंकार किया तो वे आक्रामक हो गए। आरोप है कि दोनों ने लाठी से हमला कर दिया, जिससे मनीष के चेहरे और बाएं हाथ पर गंभीर चोटें आईं। मारपीट के दौरान आरोपियों ने उसके जेब से करीब 5 हजार रुपये भी छीन लिए।

इतना ही नहीं, जाते-जाते आरोपियों ने युवक को जान से मारने की धमकी भी दी, जिससे पीड़ित और उसका परिवार दहशत में है। घटना के बाद आसपास के लोगों में भी भय का माहौल है।

पीड़ित मनीष गिरी ने चौतरवा थाना में आवेदन देकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जिससे आम लोगों में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई कर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाती है।

अररिया जिले के मिरजापुर वार्ड नंबर 15 से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है

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जहां रोशन कुमार नामक युवक के साथ मारपीट की घटना हुई है। जानकारी के अनुसार महानंद करोरी निवासी रोशन कुमार के साथ कुछ लोगों ने अचानक हमला कर दिया। इस दौरान न केवल उसके साथ मारपीट की गई बल्कि उसके सहारा में रखे सामान जैसे अटल और चाय के गिलास आदि को भी तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया गया।

घटना के बाद पीड़ित रोशन कुमार स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचा लेकिन वहां उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस व्यक्ति या लोगों ने यह घटना की है उनका नाम भी अब तक सामने नहीं आ पाया है।

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है और वे प्रशासन से जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में कदम नहीं उठाया गया तो इलाके में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

लोनी में 6 साल पुराना जमीन विवाद फिर भड़का, महिला ने लगाया ठगी और प्रताड़ना का आरोप

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गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र से एक बार फिर जमीन विवाद का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसे पिछले 6 वर्षों से लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। पीड़िता ने थाना लोनी में शिकायत दर्ज कराते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, साल्दा नगर लोनी निवासी प्रार्थीनी गुड़िया अरसद ने बताया कि करीब 6 वर्ष पूर्व उसने दिलदार उर्फ बाबू नामक व्यक्ति को लगभग 50 वर्ग गज का प्लॉट बेचा था। आरोप है कि सौदे के दौरान तय की गई रकम में से करीब 55 हजार रुपये अभी तक नहीं दिए गए हैं। इतना ही नहीं, महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी ने सोने-चांदी के कुछ आभूषण भी अपने पास रख लिए, जिन्हें वापस नहीं किया जा रहा है।

पीड़िता का कहना है कि जब भी वह अपने पैसे और सामान की मांग करती है, तो आरोपी उसे टाल देता है और बार-बार झूठे आश्वासन देता रहता है। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि अब आरोपी उसके साथ दुर्व्यवहार कर रहा है और उसे लगातार परेशान किया जा रहा है। यहां तक कि उसकी बात तक सुनने को तैयार नहीं है।

महिला का आरोप है कि पिछले 6 सालों से वह इस मामले को लेकर भटक रही है, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल पाया है। अब उसने थाने में लिखित शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले में पुलिस का कहना है कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर जमीन सौदों में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय रहते सख्त कार्रवाई न होने से पीड़ितों को लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

थानाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल महिला ने एसपी कार्यालय पहुंचकर लगाए गंभीर आरोप

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जखनिया गाजीपुर। दुल्लहपुर थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। क्षेत्र की एक पीड़ित महिला ने स्थानीय थानाध्यक्ष के रवैये से परेशान होकर सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। महिला का आरोप है कि उसकी शिकायत पर थाना स्तर पर न तो कोई प्रभावी कार्रवाई की गई और न ही उसे न्याय दिलाने का प्रयास हुआ। उल्टा कार्रवाई के नाम पर उसका ही चालान कर दिया गया जबकि विपक्षी पक्ष खुलेआम जान से मारने की धमकी दे रहा है।

पीड़िता का यह भी आरोप है कि घटना की सूचना देने के बावजूद पुलिस मौके पर पहुंचने के बजाय विपक्षी पक्ष के घर में बैठी रही। इससे आहत होकर महिला ने एसपी को दिए शिकायती पत्र में थानाध्यक्ष पर विपक्षियों से पैसे लेकर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया है। उसने कहा कि इस पूरे मामले से वह मानसिक रूप से बेहद परेशान है और उसे अपनी जान का खतरा भी महसूस हो रहा है।

मामले की जड़ में धार्मिक आस्था से जुड़ा विवाद बताया जा रहा है। पीड़िता शशि पांडे का कहना है कि वह पिछले लगभग पैंतीस वर्षों से दुर्गा देवी की पूजा करती आ रही हैं। इस दौरान गांव के ही कुछ लोगों रुदल पांडे उनके पिता स्वर्गीय केशव पांडे राजेश पांडे उनकी पत्नी अंजू देवी गुड़िया देवी उनके पति मुकेश तिवारी मंगल पांडे और भानु देवी द्वारा लगातार विवाद खड़ा किया जा रहा है। आरोप है कि ये लोग हवन कुंड तक नहीं बनने दे रहे हैं और बार बार लाठी डंडे से हमला कर माहौल खराब कर रहे हैं।

पीड़िता ने बताया कि नवरात्रि के दौरान भी विपक्षी पक्ष ने हद पार करते हुए कलश तक फेंक दिया जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। इस घटना की सूचना 25 मार्च को थाना प्रभारी को दी गई थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर पीड़िता ने अब प्रशासन से सीधी गुहार लगाई है कि उसे न्याय दिलाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल पुलिस की छवि को धूमिल करेगा बल्कि आम जनता के विश्वास को भी कमजोर करेगा। ऐसे में उच्च अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई अत्यंत आवश्यक हो गई है। अब सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और पीड़ित महिला को न्याय मिल पाता है या नहीं।

रेवाड़ी में जमीन विवाद ने लिया उग्र रूप: विधवा महिला के घर पर हमला, कपड़े फाड़ने और पत्थर-डंडों से मारपीट का आरोप; पुलिस पर भी अनसुनी करने का आरोप

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रेवाड़ी। हरियाणा के रेवाड़ी जिले के सदर थाना क्षेत्र से पारिवारिक जमीन विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित महिला आशा देवी ने अपने ही परिवार के कुछ लोगों जब पीड़ित परिवार सोए रहते हैं तब सुबह के समय 6:00 यह लोग पर घर में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज और घुटे से बंधे भैंसों को भी छोड़ देते हैं और सामान तोड़ा फोड़ करते हैं जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि 24 मार्च 2026 को आरोपियों ने उनके घर पर पहुंचकर जमकर हंगामा किया और उन्हें व उनके बेटे को बुरी तरह पीटा। घटना के बाद से परिवार दहशत में है और न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

पीड़िता आशा देवी, जो कि स्वर्गीय विजय सिंह की पत्नी हैं, ने बताया कि उनके परिवार में पहले ही संपत्ति का बंटवारा हो चुका है और गांव में मौजूद घर में भी सभी को उनका हिस्सा दिया जा चुका है। इसके बावजूद अब उनके जेठ और जेठानी सहित अन्य रिश्तेदार उनके हिस्से की जमीन पर भी कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। महिला के मुताबिक, जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपी भड़क गए और घर पर आकर लगातार झगड़ा करने लगे।

आशा देवी ने आरोप लगाया कि आरोपी राजवीर, ओमवती, रामकुमार, गौरव, नमित और एकता अक्सर उनके घर के बाहर आकर गाली-गलौज करते हैं और झगड़ा करने की कोशिश करते हैं। पीड़िता के अनुसार 24 मार्च को स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब आरोपियों ने घर में घुसकर पत्थरबाजी की और लकड़ी के डंडों से हमला कर दिया। इस दौरान ओमवती ने कथित तौर पर आशा देवी के कपड़े भी फाड़ दिए और उन्हें बुरी तरह पीटा। आशा देवी ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि राजवीर जो की सरकारी रोडवेल ड्राइवर है जो जान से मारने की धमकी देता है और धमकी देता है की जेल में बंद करवा देंगे रोज हमले करने की तैयारी में रहता है

हमले के दौरान आशा देवी के बेटे बिट्टू यादव को भी नहीं बख्शा गया। पीड़िता का कहना है कि आरोपियों ने उसे भी पत्थरों और डंडों से मारकर घायल कर दिया। घटना के बाद परिवार ने किसी तरह अपनी जान बचाई और पुलिस से मदद की गुहार लगाई।

पीड़ित महिला ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह शिकायत लेकर थाने पहुंचीं तो वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। उनका कहना है कि पुलिसकर्मी उनसे जबरन एक लिखित बयान देने का दबाव बना रहे हैं, जिसमें उनसे यह लिखवाया जा रहा है कि उनका इस घर से कोई संबंध नहीं है और उन्हें घर खाली कर देना चाहिए। महिला का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आशा देवी की फाइल को बंद कर दिया पीड़ित आशा देवी ने बताया कि विपक्षी लोगों के कहने पर खाने वाले ने आशा देवी और उनके परिवार पर गलत धाराएं लगा दिए है

आशा देवी का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों और हमलों के कारण उनका परिवार भय के माहौल में जी रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मामले में निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और उनका परिवार सुरक्षित रह सके।

 

बहराइच में दलित महिला से अभद्रता का आरोप: पैसे के विवाद में दबंगों ने दी धमकी, धक्का लगने से गिरी और बेहोश हुई; समझौते के लिए दबाव का आरोप

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बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रूपईडीहा थाना क्षेत्र के नव्वा गांव में एक दलित महिला के साथ कथित अभद्रता और धमकी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पैसे के लेन-देन के विवाद में गांव के ही दो दबंगों ने बाजार जा रही महिला को रोककर जातिसूचक गालियां दीं, धक्का देकर गिरा दिया और उसके बेटे को जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद महिला की हालत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अब मामले को दबाने और समझौता कराने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

पीड़िता रामकली, जो चमारन पुरवा नव्वा गांव की रहने वाली हैं, ने मुख्यमंत्री को भेजे गए प्रार्थना पत्र में बताया कि 9 अप्रैल 2026 की शाम करीब साढ़े चार बजे वह गांव के बाजार जा रही थीं। उनके साथ उनके दो छोटे बच्चे अजीत कुमार (11 वर्ष) और प्रियंका (8 वर्ष) भी मौजूद थे। आरोप है कि देवरा शराब भट्ठी के पास गांव के ही लोकनाथ यादव उर्फ लाला और लक्ष्मी नारायण ने उन्हें रोक लिया और गाली-गलौज शुरू कर दी।

पीड़िता के मुताबिक दोनों आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें अपमानित किया और कहा कि उनके बेटे रामनरेश ने जो पैसा उधार लिया है उसका ब्याज तुरंत दिलवाया जाए। आरोप है कि दबंगों ने यह भी धमकी दी कि अगर पैसा नहीं मिला तो वे रामनरेश को मारकर चौराहे पर लटका देंगे। इसी दौरान आरोपियों ने महिला को धक्का दे दिया, जिससे वह सड़क पर गिर पड़ीं।

घटना को देख महिला के दोनों बच्चे घबरा गए और रोने लगे। बताया जा रहा है कि गिरने के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ गया, जिससे वह बेहोश हो गईं। बच्चों द्वारा पानी डालने और शोर मचाने के बाद कुछ देर में उन्हें होश आया, लेकिन तब तक आरोपी मौके से फरार हो चुके थे।

पीड़ित परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद उन्होंने न्याय की मांग को लेकर अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच पैसे के लेन-देन को लेकर पंचायत में बातचीत भी हुई। बताया गया कि रामकली के बेटे रामनरेश ने कुछ महीने पहले लगभग 20 हजार रुपये उधार लिए थे पीढ़ी राम नरेश ने 1 साल पहले ही 20000 के 27 000 वापस कर चुके हैं लेकिन उसके बाद भी विपक्षी लोग थाने का सहारा लेकर और घुस के बल पर बोल रहे हैं कि तुमने हमें पैसे वापस नहीं किए हैं और दोबारा पैसे इतना चाह रहे हैं जिससे पीड़ित परिवार की महिलाएं घर से बाहर जहां कहीं भी जाती है तो उनसे छेड़छाड़ कर अभद्र भाषा का प्रयोग कर धमकी दी जाती है और इसी लेन-देन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। पंचायत में यह तय किया गया कि आगे से लोकनाथ यादव और लक्ष्मी नारायण रामकली और उसके परिवार को न तो धमकी देंगे और न ही किसी प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग करेंगे।

लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे अपने दिए गए प्रार्थना पत्र को वापस ले लें और मामले को पूरी तरह से सुलझा हुआ घोषित कर दें। परिवार का कहना है कि गांव के प्रभावशाली लोग और विपक्षी पक्ष पैसा खर्च कर मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि गरीब होने की वजह से उनकी कहीं भी ठीक से सुनवाई नहीं हो रही है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि यह मामला सोशल मीडिया के माध्यम से भी उठाया जा रहा है ताकि प्रशासन तक उनकी आवाज पहुंच सके और उन्हें सुरक्षा व न्याय मिल सके।

 

झांसी के पेटी कॉन्ट्रैक्टर का आरोप: रेलवे ठेकेदार ने 2.40 लाख रुपये दबाए, कर्ज लेकर मजदूरों को चुकाया मेहनताना

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झांसी/दिल्ली। मेहनत की कमाई के लिए दर-दर भटकने को मजबूर एक पेटी कॉन्ट्रैक्टर की कहानी सामने आई है, जिसने सिस्टम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मऊरानीपुर क्षेत्र के खरखोरा निवासी राममिलन ने आरोप लगाया है कि सिविल से जुड़े एक ठेकेदार ने उनका 2 लाख 40 हजार रुपये का भुगतान पिछले तीन साल से रोक रखा है।

पीड़ित राममिलन के अनुसार, वे दिल्ली मोती सात नंबर में सिविल ठेकेदारी का काम करते हैं और वर्ष 2020 में उन्होंने सिविल से संबंधित एक प्रोजेक्ट में पेटी कॉन्ट्रैक्टर के रूप में कार्य किया था। यह काम उन्होंने ठेकेदार जितेंद्र बमबानी कॉन्टैक्टर के अधीन किया था। काम पूरा 2022 होने के बाद उनका 2.40 लाख रुपये का बिल बकाया रह गया, जिसे आज तक नहीं चुकाया गया है। 2022 में राममिलन और कॉन्टैक्टर के बीच हिसाब हुआ और कांटेक्ट करने बोला था कि 2 महीने बाद तुम्हें पैसा मिल जाएगा लेकिन आज तक पैसा नहीं मिला

राममिलन ने बताया कि काम के दौरान उन्होंने अपनी लेबर को समय पर भुगतान करने के लिए कर्ज तक लिया, ताकि मजदूरों की मजदूरी न रुके। लेकिन जब खुद के मेहनताने की बारी आई, तो ठेकेदार ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया।

पीड़ित का कहना है कि उन्होंने इस मामले में स्थानीय थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार तीन वर्षों से वे अपने ही पैसे के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।

इस पूरे मामले ने न केवल ठेकेदारी सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि छोटे कॉन्ट्रैक्टर और मजदूर किस तरह बड़े ठेकेदारों के सामने बेबस हो जाते हैं।

राममिलन ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा है कि उनकी मेहनत की कमाई उन्हें दिलाई जाए और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है या फिर एक और मेहनतकश यूं ही अपने हक के लिए भटकता रहेगा।