Monday, July 6, 2026
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बहराइच में दलित महिला से अभद्रता का आरोप: पैसे के विवाद में दबंगों ने दी धमकी, धक्का लगने से गिरी और बेहोश हुई; समझौते के लिए दबाव का आरोप

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बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रूपईडीहा थाना क्षेत्र के नव्वा गांव में एक दलित महिला के साथ कथित अभद्रता और धमकी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पैसे के लेन-देन के विवाद में गांव के ही दो दबंगों ने बाजार जा रही महिला को रोककर जातिसूचक गालियां दीं, धक्का देकर गिरा दिया और उसके बेटे को जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद महिला की हालत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अब मामले को दबाने और समझौता कराने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

पीड़िता रामकली, जो चमारन पुरवा नव्वा गांव की रहने वाली हैं, ने मुख्यमंत्री को भेजे गए प्रार्थना पत्र में बताया कि 9 अप्रैल 2026 की शाम करीब साढ़े चार बजे वह गांव के बाजार जा रही थीं। उनके साथ उनके दो छोटे बच्चे अजीत कुमार (11 वर्ष) और प्रियंका (8 वर्ष) भी मौजूद थे। आरोप है कि देवरा शराब भट्ठी के पास गांव के ही लोकनाथ यादव उर्फ लाला और लक्ष्मी नारायण ने उन्हें रोक लिया और गाली-गलौज शुरू कर दी।

पीड़िता के मुताबिक दोनों आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें अपमानित किया और कहा कि उनके बेटे रामनरेश ने जो पैसा उधार लिया है उसका ब्याज तुरंत दिलवाया जाए। आरोप है कि दबंगों ने यह भी धमकी दी कि अगर पैसा नहीं मिला तो वे रामनरेश को मारकर चौराहे पर लटका देंगे। इसी दौरान आरोपियों ने महिला को धक्का दे दिया, जिससे वह सड़क पर गिर पड़ीं।

घटना को देख महिला के दोनों बच्चे घबरा गए और रोने लगे। बताया जा रहा है कि गिरने के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ गया, जिससे वह बेहोश हो गईं। बच्चों द्वारा पानी डालने और शोर मचाने के बाद कुछ देर में उन्हें होश आया, लेकिन तब तक आरोपी मौके से फरार हो चुके थे।

पीड़ित परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद उन्होंने न्याय की मांग को लेकर अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच पैसे के लेन-देन को लेकर पंचायत में बातचीत भी हुई। बताया गया कि रामकली के बेटे रामनरेश ने कुछ महीने पहले लगभग 20 हजार रुपये उधार लिए थे पीढ़ी राम नरेश ने 1 साल पहले ही 20000 के 27 000 वापस कर चुके हैं लेकिन उसके बाद भी विपक्षी लोग थाने का सहारा लेकर और घुस के बल पर बोल रहे हैं कि तुमने हमें पैसे वापस नहीं किए हैं और दोबारा पैसे इतना चाह रहे हैं जिससे पीड़ित परिवार की महिलाएं घर से बाहर जहां कहीं भी जाती है तो उनसे छेड़छाड़ कर अभद्र भाषा का प्रयोग कर धमकी दी जाती है और इसी लेन-देन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। पंचायत में यह तय किया गया कि आगे से लोकनाथ यादव और लक्ष्मी नारायण रामकली और उसके परिवार को न तो धमकी देंगे और न ही किसी प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग करेंगे।

लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे अपने दिए गए प्रार्थना पत्र को वापस ले लें और मामले को पूरी तरह से सुलझा हुआ घोषित कर दें। परिवार का कहना है कि गांव के प्रभावशाली लोग और विपक्षी पक्ष पैसा खर्च कर मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि गरीब होने की वजह से उनकी कहीं भी ठीक से सुनवाई नहीं हो रही है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि यह मामला सोशल मीडिया के माध्यम से भी उठाया जा रहा है ताकि प्रशासन तक उनकी आवाज पहुंच सके और उन्हें सुरक्षा व न्याय मिल सके।

 

झांसी के पेटी कॉन्ट्रैक्टर का आरोप: रेलवे ठेकेदार ने 2.40 लाख रुपये दबाए, कर्ज लेकर मजदूरों को चुकाया मेहनताना

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झांसी/दिल्ली। मेहनत की कमाई के लिए दर-दर भटकने को मजबूर एक पेटी कॉन्ट्रैक्टर की कहानी सामने आई है, जिसने सिस्टम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मऊरानीपुर क्षेत्र के खरखोरा निवासी राममिलन ने आरोप लगाया है कि सिविल से जुड़े एक ठेकेदार ने उनका 2 लाख 40 हजार रुपये का भुगतान पिछले तीन साल से रोक रखा है।

पीड़ित राममिलन के अनुसार, वे दिल्ली मोती सात नंबर में सिविल ठेकेदारी का काम करते हैं और वर्ष 2020 में उन्होंने सिविल से संबंधित एक प्रोजेक्ट में पेटी कॉन्ट्रैक्टर के रूप में कार्य किया था। यह काम उन्होंने ठेकेदार जितेंद्र बमबानी कॉन्टैक्टर के अधीन किया था। काम पूरा 2022 होने के बाद उनका 2.40 लाख रुपये का बिल बकाया रह गया, जिसे आज तक नहीं चुकाया गया है। 2022 में राममिलन और कॉन्टैक्टर के बीच हिसाब हुआ और कांटेक्ट करने बोला था कि 2 महीने बाद तुम्हें पैसा मिल जाएगा लेकिन आज तक पैसा नहीं मिला

राममिलन ने बताया कि काम के दौरान उन्होंने अपनी लेबर को समय पर भुगतान करने के लिए कर्ज तक लिया, ताकि मजदूरों की मजदूरी न रुके। लेकिन जब खुद के मेहनताने की बारी आई, तो ठेकेदार ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया।

पीड़ित का कहना है कि उन्होंने इस मामले में स्थानीय थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार तीन वर्षों से वे अपने ही पैसे के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।

इस पूरे मामले ने न केवल ठेकेदारी सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि छोटे कॉन्ट्रैक्टर और मजदूर किस तरह बड़े ठेकेदारों के सामने बेबस हो जाते हैं।

राममिलन ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा है कि उनकी मेहनत की कमाई उन्हें दिलाई जाए और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है या फिर एक और मेहनतकश यूं ही अपने हक के लिए भटकता रहेगा।

गुरुग्राम से सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक पिता अपनी 17 वर्षीय

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नाबालिग बेटी मुस्कान के कई दिनों से लापता होने के बाद दर-दर भटकने को मजबूर है। परिवार का आरोप है कि बेटी बीते 28 मार्च 2026 की शाम करीब 8:30 बजे बिना बताए घर से चली गई थी, जिसके बाद से उसका अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है। लगातार बीतते दिनों के साथ परिवार की चिंता और डर बढ़ता जा रहा है।

पीड़ित पिता महेश पुत्र श्री झबुले, निवासी गांव गढ़ी, रेलवे स्टेशन के पास, पार्ट-2, गली नंबर 3, सादराणा की ढाणी, गुरुग्राम ने बताया कि उनकी बेटी मुस्कान नाबालिग है और उसके अचानक घर से गायब होने के पीछे किसी साजिश की आशंका है। महेश का कहना है कि उन्हें शक है कि किसी ने उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है।

महेश ने अपनी शिकायत में बताया कि बेटी के सामान की तलाशी लेने पर उसके कपड़ों में से तीन मोबाइल नंबर 7375037616, 8810428794 और 8920497343 मिले हैं। इन नंबरों के मालिकों के नाम अभी तक सामने नहीं आए हैं, लेकिन परिवार को गहरा संदेह है कि इन्हीं लोगों का इस पूरे मामले में हाथ हो सकता है। पिता ने आशंका जताई है कि उनकी बेटी के साथ कोई अनहोनी भी हो सकती है।

परिवार का आरोप है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत पहले भी 1 अप्रैल 2026 को हयातपुर पुलिस चौकी में दी थी, लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पिता का कहना है कि पुलिस की ढीली कार्यशैली के कारण अब तक उनकी बेटी का कोई पता नहीं चल सका है, जिससे पूरा परिवार सदमे और भय में जी रहा है।

महेश ने भावुक अपील करते हुए कहा कि उनकी बेटी को जल्द से जल्द सुरक्षित ढूंढा जाए। उन्होंने हाथ जोड़कर प्रशासन से गुहार लगाई है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच तेज की जाए और जिन मोबाइल नंबरों पर शक है, उनकी कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच की जाए।

कई दिनों से बेटी के लापता रहने के कारण परिवार की हालत बेहद खराब है। घर में मातम जैसा माहौल है और परिजन हर पल किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं। पिता का कहना है कि जब प्रशासन से मदद नहीं मिली तो मजबूरी में उन्हें मीडिया का सहारा लेना पड़ा, ताकि मामला सार्वजनिक हो और बेटी की तलाश में तेजी आए।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि नाबालिग लड़की के इतने दिनों तक लापता रहने के बावजूद कार्रवाई में सुस्ती बेहद चिंताजनक है। अब परिवार और क्षेत्र के लोग प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर एक नाबालिग बच्ची की सुरक्षा को लेकर इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है।

पुरानी रंजिश ने लिया खौफनाक मोड़, मारपीट के बाद महिला की संदिग्ध मौत, गांव में सनसनी

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जगतपुर (रायबरेली)। थाना क्षेत्र के धोबहा गांव में पुरानी रंजिश ने एक बार फिर खौफनाक रूप ले लिया, जहां एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई है और परिजनों ने इसे हत्या कर आत्महत्या का रूप देने का गंभीर आरोप लगाया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार धर्मदासपुर निवासी महेश चमार ने थाना प्रभारी को दिए अपने शिकायती आवेदन में बताया कि 14 तारीख की रात करीब 10 बजे वह धोबहा गांव में मौजूद थे। इसी दौरान गांव के ही आशीष पासी, सुंदरलाल, नीलू, मीनाक्षी समेत अन्य लोगों ने पुरानी रंजिश के चलते गाली-गलौज करते हुए उनकी पत्नी मंजू के साथ मारपीट शुरू कर दी।

पीड़ित के अनुसार आरोपियों ने लाठी-डंडों से उनकी पत्नी को बेरहमी से पीटा। उस समय उनकी पुत्री और अन्य परिजन भी मौके पर मौजूद थे, जिन्होंने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने किसी की नहीं सुनी और मारपीट कर मौके से फरार हो गए।

परिजनों का आरोप है कि मारपीट के बाद देर रात अज्ञात समय पर आरोपी दोबारा आए और उनकी पत्नी की हत्या कर शव को छत से लटका दिया, ताकि इसे आत्महत्या का रूप दिया जा सके। सुबह जब बेटी ने अपनी मां का शव लटकता देखा तो चीख-पुकार मच गई, जिसके बाद गांव के लोग मौके पर पहुंचे।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। वहीं पीड़ित परिवार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इस दिल दहला देने वाली घटना ने क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

 

बच्चा चोर समझकर मानसिक रूप से बीमार महिला की बेरहमी से पिटाई: सिर और आंख पर गंभीर चोट, घटना के बाद से लापता; पति ने जताई हत्या की आशंका

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मधुबनी। जिले के एक गांव में बच्चा चोर की अफवाह ने एक महिला की जिंदगी को संकट में डाल दिया। मानसिक रूप से अस्वस्थ बताई जा रही एक महिला को कुछ लोगों ने बच्चा चोर समझकर बेरहमी से पीट दिया। घटना के बाद से महिला लापता है और उसके पति ने अनहोनी की आशंका जताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की गुहार लगाई है।

पीड़ित पति ने बताया कि वह वार्ड नंबर 10 का स्थायी निवासी है। उसकी पत्नी रंगालादेवी लंबे समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ रहती है। 1 मई 2026 की सुबह करीब 10 बजे वह घर से चुपके से निकल गई थी। दोपहर करीब 1 बजे गांव के आसपास के लोगों ने उसे देखा, जिसके बाद कुछ लोगों ने उसे बच्चा चोर समझ लिया। आरोप है कि आकाश कुमार समेत कई लोगों ने मिलकर महिला को घेर लिया और लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

पीड़ित का कहना है कि हमले के दौरान उसकी पत्नी के सिर और आंख पर गंभीर चोटें आईं और वह खून से लथपथ हो गई। मारपीट के बाद महिला वहां से गायब हो गई और तब से उसका कोई पता नहीं चल पाया है। पति ने आरोप लगाया है कि इस घटना में आकाश कुमार समेत चार अन्य अज्ञात लोग शामिल थे, जिन्होंने मिलकर उसकी पत्नी के साथ बर्बरता की।

पति ने बताया कि उसने अपने स्तर पर काफी खोजबीन की, लेकिन अब तक पत्नी का कोई सुराग नहीं मिला है। इस कारण उसे आशंका है कि कहीं आरोपियों ने उसकी पत्नी की हत्या तो नहीं कर दी। पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उसकी पत्नी का जल्द से जल्द पता लगाया जाए।

वहीं पीड़ित परिवार का कहना है कि वे लगातार थाने और प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। परिवार ने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो एक निर्दोष महिला के साथ हुई यह अमानवीय घटना न्याय के बिना ही दबकर रह जाएगी।

परिजनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

लखनऊ की महिला से शादी का झांसा देकर लाखों की ठगी, शिक्षक पर गंभीर आरोप

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लखनऊ के विकास नगर क्षेत्र की रहने वाली रिंकी मिश्रा के साथ प्रेम, शादी और भरोसे के नाम पर धोखाधड़ी और शोषण का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि बलरामपुर में प्राथमिक विद्यालय में तैनात एक प्रिंसिपल ने खुद को तलाकशुदा बताकर महिला को अपने प्रेमजाल में फंसाया और लाखों रुपये के जेवरात व नकदी हड़प ली।

पीड़िता के अनुसार, करीब 30 महीने पहले वर्ष 2023 में वह एक पार्लर में काम करती थी, जहां उसकी मुलाकात विवेक सिंह नाम के व्यक्ति से हुई। बातचीत के दौरान विवेक ने खुद को तलाकशुदा बताते हुए शादी का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में रिंकी ने इनकार किया, लेकिन लगातार संपर्क और भरोसा दिलाने के बाद वह उसके करीब आ गई।

बताया जा रहा है कि विवेक सिंह ने शादी का भरोसा देकर रिंकी मिश्रा से उसके पास मौजूद लगभग 2 किलो चांदी और 8 तोला सोना अपने पास रखवा लिया, जिसकी कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई जा रही है। इतना ही नहीं, वह हर महीने जरूरत के नाम पर रिंकी की मेहनत की कमाई भी लेता रहा।

मामले ने उस समय गंभीर मोड़ ले लिया जब रिंकी को पता चला कि विवेक सिंह पहले से शादीशुदा है और अपनी पत्नी के साथ रह रहा है। आरोप है कि सरकारी नौकरी में रहते हुए उसने दूसरी महिला को शादी का झांसा देकर न सिर्फ आर्थिक शोषण किया, बल्कि उसके साथ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न भी किया।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि जब-जब वह गर्भवती हुई, आरोपी ने उसे दवाइयां देकर गर्भपात करवा दिया। इस पूरे घटनाक्रम से आहत रिंकी मिश्रा अब न्याय की मांग कर रही है।

फिलहाल इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल आपराधिक धोखाधड़ी का है, बल्कि एक सरकारी कर्मचारी के आचरण पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रशासन से पीड़िता को न्याय दिलाने और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

बंगाल चुनाव: BJP-TMC का अनोखा प्रचार, मछली को पहनाई ज्वेलरी, दोनों हाथों में टांग ली मछली, देखें वीडियो

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में अब कुछ ही दिन शेष हैं, इसे लेकर चुनाव प्रचार जोरों पर है। आज भाजपा और टीएमसी के प्रत्याशियों ने अनोखे तरीके से चुनाव प्रचार किया। देखें वीडियो…कोलकाता: बंगाली नववर्ष पर हाथ में मछली लेकर बीजेपी उम्मीदवार का अनोखा चुनाव प्रचार देखकर हर कोई आश्चर्यचकित था। इस तरह के अनोखे तरीके से चुनाव प्रचार की वजह ये थी कि विपक्ष का कहना है कि अगर पश्चिम बंगाल में बीजेपी सत्ता में आई, तो बंगालियों का मछली खाना बंद कर देंगे! यह बात तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी लगभग हर पब्लिक मीटिंग में कह रही हैं। इसी के बाद बीजेपी का ये जवाबी चुनावी प्रचार है जो दिखा रहा है कि बंगालियों को मछली खाने से कोई नहीं रोक सकता।
बंगालियों और मछली को लेकर ममता बनर्जी के बयान को झूठा साबित करने के लिए कोलकाता पोर्ट विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार राकेश सिंह ने आज एक अनोखे तरीके से चुनाव प्रचार किया। बंगाली नए साल की सुबह, राकेश सिंह ने बंगालियों का पारंपरिक धोती कुर्ता पहनकर, दोनों हाथ में मछली लेकर चुनाव प्रचार किया। उन्होंने पोर्ट इलाके के लोगों को यह मैसेज दिया कि अगर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई, तो मछली और मीट खाना बिल्कुल भी बंद नहीं होगा।
बता दें कि कोलकाता पोर्ट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी राकेश सिंह के खिलाफ फिरहाद हकीम को तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है। राकेश सिंह ने फिरहाद हकीम के बारे में कहा कि उन्होंने पिछले 15 सालों में इलाके के लिए कोई काम नहीं किया है। उन्होंने युवाओं को नौकरी नहीं दी है और ना ही कोई काम किया। इसलिए इस बार कोलकाता पोर्ट इलाके के लोग बीजेपी के साथ हैं। वहीं इस चुनाव प्रचार को देखकर कोलकाता पोर्ट एरिया के वोटर्स का कहना है कि बंगालियों को मछली और मीट खाने से कोई नहीं रोक पाएगा।
भाजपा को टीएमसी ने भी दिया जवाब

एक तरफ जहां पोर्ट विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार राकेश सिंह हाथ में मछली लेकर चुनाव प्रचार में जुटे हैं। उसी समय, टॉलीगंज विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार अरूप बिस्वास भी पीछे नहीं हैं। तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार अरूप बिस्वास ने नए साल के दिन दोनों हाथों में मछली लेकर चुनाव प्रचार किया। हाथों पर मछली लेकर टीएमसी नेता अरूप बिस्वास ने एक बार फिर वोटरों को यह संदेश देने की कोशिश किया कि अगर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई तो बंगालियों का मछली और मांस खाना बंद कर देंगे।

आंधी-तूफान ने उजाड़ा गरीब परिवार का आशियाना: कच्चा मकान हुआ पूरी तरह क्षतिग्रस्त,

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एक हफ्ते से खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवार; आवास योजना की मांग

बुलंदशहर। जिले के कुचेसर क्षेत्र के नगला उरासैन गांव में बीते दिनों आए तेज आंधी-तूफान ने एक गरीब परिवार की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दी। गांव निवासी पुनीत राजकुमार, जो स्वर्गीय बिजेंद्र सिंह के पुत्र हैं, का कच्चा मकान तूफान की चपेट में आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि तेज हवाओं और बारिश के कारण उनके घर की छत और दीवारें टूटकर गिर गईं, जिससे पूरा मकान रहने लायक नहीं बचा।

पीड़ित पुनीत राजकुमार का कहना है कि इस घटना को अब करीब एक सप्ताह हो चुका है, लेकिन अभी तक किसी भी सरकारी विभाग या स्थानीय प्रशासन की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिली है। उनका परिवार बेहद गरीब स्थिति में जीवन गुजार रहा है और मकान पूरी तरह कच्चा होने के कारण तूफान में सबसे पहले वही प्रभावित हुआ। घर के टूट जाने से परिवार को अब काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पुनीत राजकुमार ने बताया कि उनके घर में दो छोटे बच्चे हैं और लगातार बारिश के कारण मकान में पानी भर जाता है। टूटी हुई दीवारों और छत के कारण परिवार को सुरक्षित रहने के लिए कोई पक्का सहारा नहीं बचा है। मजबूरी में उन्हें अस्थायी तरीके से किसी तरह गुजर-बसर करनी पड़ रही है। गांव के लोगों का कहना है कि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और कम पढ़ा-लिखा होने के कारण सरकारी योजनाओं की जानकारी और प्रक्रियाओं तक भी उनकी पहुंच नहीं बन पा रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार यदि समय रहते प्रशासन की ओर से मदद नहीं मिली तो यह परिवार और गंभीर संकट में फंस सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार की स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल राहत दी जाए और सरकारी आवास योजना के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराया जाए, ताकि परिवार सुरक्षित जीवन जी सके।

पीड़ित पुनीत राजकुमार ने भी जिला प्रशासन से अपील की है कि उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य किसी सरकारी योजना के तहत आवास दिलाया जाए। उनका कहना है कि यदि उन्हें एक पक्का घर मिल जाए तो उनके परिवार को इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से राहत मिल सकेगी और उनके बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित हो पाएगा।

लक्ष्मीपुर कोलिया में मंदिर के पास ट्रॉली घुमाने को लेकर विवाद: परिवार पर लाठी-

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डंडों से हमला, बेटी का मंगलसूत्र छीनने का आरोप; पीड़ित ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का लगाया आरोप

देवरिया। जिले के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर कोलिया गांव से मारपीट और लूट का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामूली विवाद के बाद गांव के कुछ लोगों ने मिलकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की और बीच-बचाव करने आई बेटी का मंगलसूत्र भी छीन लिया। घटना के बाद घायल अवस्था में पीड़ित परिवार थाने पहुंचा, लेकिन आरोप है कि अभी तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

जानकारी के अनुसार, लक्ष्मीपुर कोलिया गांव निवासी मुकेश भारती के पिता सोहन 13 तारीख की शाम करीब 6 बजे घर के पास भूसा भरने का काम कर रहे थे। उसी दौरान पास में एक ट्रॉली घूम रही थी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि पास में देवस्थान और मंदिर है, इसलिए ट्रॉली संभालकर चलाएं ताकि मंदिर को नुकसान न पहुंचे। इसी बात को लेकर आरोपियों से कहासुनी हो गई।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर गांव के ही अजय, मोहन, पीयूष, सुनीला देवी, रजीता देवी, सोनम, गुड़िया देवी और सुगंधा देवी सहित अन्य लोगों ने अचानक हमला कर दिया। आरोप है कि सभी ने मिलकर लाठी-डंडों से मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान परिवार की महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया और उन्हें भी पीटा गया।

परिवार का कहना है कि आरोपियों ने सोहन को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट लग गई और सिर फट गया। मारपीट इतनी गंभीर थी कि सोहन मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े। उनके शरीर के अन्य हिस्सों में भी कई जगह चोटें आई हैं, जिससे उनकी हालत काफी बिगड़ गई।

बताया जा रहा है कि जब सोहन की बेटी सुमन अपने पिता को बचाने के लिए बीच-बचाव करने पहुंची तो आरोपियों ने उसके साथ भी हाथापाई की और उसका मंगलसूत्र छीन लिया। घटना के दौरान इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के लोगों के जुटने पर आरोपी मौके से फरार हो गए।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद वे रुद्रपुर थाने पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत की, लेकिन अब तक उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। परिवार का कहना है कि आरोपी लगातार उन्हें धमकियां दे रहे हैं और जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं। इससे पूरा परिवार दहशत में है।

पीड़ितों ने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो उनके साथ कोई भी बड़ी घटना हो सकती है।

अमिलियाकला में सड़क निर्माण का मामला ठंडे बस्ते में, मौका पंचनामा और किसानों की सहमति के बाद भी नहीं हुई सुनवाई

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मैहर जिले के ग्राम पंचायत अमिलियाकला में अमिलिया से गोंदहा मार्ग तक प्रस्तावित सड़क निर्माण का मामला अब ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई महीनों पहले मौका पंचनामा तैयार किया गया, किसानों की सहमति ली गई, निजी भूमि स्वामियों ने सड़क निर्माण के लिए अपनी जमीन का आंशिक हिस्सा देने की अनुमति भी दे दी, इसके बावजूद आज तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार 29 मार्च 2025 और 23 मई 2025 को ग्राम अमिलियाकला में मौके पर निरीक्षण किया गया था। पंचों और किसानों की उपस्थिति में यह पुष्टि की गई कि अमिलिया से गोंदहा मार्ग तक सड़क निर्माण के लिए चिन्हित भूमि में कुछ हिस्सा शासकीय और कुछ निजी भूमि है। कई निजी भूस्वामियों ने बिना किसी आपत्ति के अपनी आराजी का हिस्सा सड़क निर्माण के लिए देने की सहमति दी थी।

दस्तावेज में हेलराम, शिवकुमार, गयाप्रसाद, रामचन्द्र, रामभाई, कामला प्रसाद, रमाशंकर, बद्री प्रसाद और लक्ष्मी नारायण सहित कई किसानों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने सड़क निर्माण के लिए अपनी भूमि देने की अनुमति प्रदान की। ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन देने को किसान तैयार हैं और मौका पंचनामा भी हो चुका है, तो फिर सड़क निर्माण कार्य अब तक शुरू क्यों नहीं हुआ।

जनपद पंचायत मैहर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को पत्र भेजकर आगे की कार्रवाई हेतु निर्देशित करने का अनुरोध भी किया गया था। पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि सड़क निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भू राजस्व संहिता के अनुसार शासन के नाम की जानी है, ताकि आगे निर्माण कार्य शुरू किया जा सके। इसके बावजूद मामला फाइलों में अटका हुआ दिखाई दे रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क के अभाव में गांव के लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में यह मार्ग और भी बदहाल हो जाता है, जिससे स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजों को आने जाने में कठिनाई होती है। लोगों का आरोप है कि कई बार आवेदन और शिकायत देने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

गांव के लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है कि कलेक्टर कार्यालय तक आवेदन पहुंचने और अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किए जाने के बाद भी सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द भूमि हस्तांतरण और निर्माण प्रक्रिया पूरी कर सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ कराए।

यह मामला अब प्रशासनिक उदासीनता और ग्रामीण विकास कार्यों में देरी का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। सवाल यह है कि जब सभी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं, तो आखिर सड़क निर्माण में देरी किस कारण हो रही है।