Friday, July 3, 2026
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मदद की गुहार: “मुझे गरिमा मैम से मिलना है”, 21वर्षीय लड़की ने बार-बार लगाई सहायता की अपील

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असम की रहने वाली एक युवती ने लगातार कई संदेश भेजकर मदद की गुहार लगाई है। युवती ने कहा कि उसके घर में गंभीर समस्याएं चल रही हैं और वह “गरिमा मैम” से मिलना चाहती है। संदेशों में उसने बार-बार अनुरोध करते हुए लिखा, “Please meri help kijiye” और “I really need your help”।

मामला उस समय सामने आया जब युवती की ओर से व्हाट्सएप पर लगातार सहायता संबंधी संदेश भेजे गए। संदेशों के अनुसार, वह अपने पारिवारिक हालात से परेशान है और किसी भरोसेमंद व्यक्ति या संस्था से मदद चाहती है। युवती ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सीधे “गरिमा मैम” से मिलना चाहती है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह किसी सामाजिक कार्यकर्ता, अधिकारी या भरोसेमंद संपर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार युवती का नाम पोमी शिल बताया जा रहा है। आधार कार्ड में उसका पता असम के कामरूप मेट्रो जिले के धिरेनपारा क्षेत्र का दर्ज है। दस्तावेज के अनुसार उसकी जन्मतिथि 2 जनवरी 2005 है। हालांकि, परिवार की समस्या क्या है और वह किस प्रकार की सहायता चाहती है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
संपर्क होने के बाद इस नंबर पर फोन करना है
+91 93953 27758

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सहरसा में ढाई साल के मासूम की मौत के बाद इंसाफ की मांग तेज, आरोपी अब तक फरार

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सहरसा। बिहार के सहरसा जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां ढाई साल के मासूम आशीष कुमार की मौत के बाद पूरा परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। घटना को लगभग एक माह बीत जाने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मोटरसाइकिल जब्त तो कर ली, लेकिन मुख्य आरोपी अब तक कानून की गिरफ्त से बाहर है।

मृतक आशीष कुमार, पिता संतोष साह, ग्राम समानी वार्ड संख्या 7, थाना जलई, जिला सहरसा का निवासी था। परिजनों के अनुसार 9 मई को आशीष अपने घर के सामने अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रही एक मोटरसाइकिल ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भयावह था कि मासूम की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

परिवार का आरोप है कि मोटरसाइकिल चला रहा युवक संदीप सदा नशे की हालत में था और दुर्घटना के तुरंत बाद घटनास्थल से फरार हो गया। ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह भागने में सफल रहा। बाद में मामले की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर लिया और मामला दर्ज किया।

हालांकि घटना के कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते सख्त कार्रवाई करती तो आरोपी अब तक गिरफ्तार हो चुका होता। उनका आरोप है कि मामले में कार्रवाई की गति बेहद धीमी है, जिससे न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है।

मृतक के नाना ने भावुक होकर कहा कि यह केवल सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक परिवार की दुनिया उजड़ जाने का मामला है। उन्होंने कहा कि ढाई साल के मासूम की मौत ने पूरे परिवार को अंदर से तोड़ दिया है। जब तक आरोपी को गिरफ्तार कर कानून के अनुसार सजा नहीं दी जाती, तब तक परिवार को न्याय नहीं मिल सकता।

परिजनों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक सहायता और सरकारी मुआवजे की भी मांग की है, ताकि बच्चे को खोने के बाद गहरे सदमे में डूबे परिवार को कुछ राहत मिल सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई नहीं होती तो अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं और आम जनता का कानून पर भरोसा कमजोर पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार किया जाए।

अब पूरा परिवार और गांव प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। लोगों का कहना है कि मासूम आशीष को तो वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन दोषी को सजा दिलाकर उसके परिवार को न्याय जरूर दिलाया जा सकता है। सहरसा का यह मामला अब केवल एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय, जवाबदेही और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का बड़ा सवाल बन चुका है।

जमीन उसी की, फिर कब्जा दिलाने की जल्दबाजी क्यों? पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

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जौनपुर जिले के मड़ियाऊ तहसील मेवडिया थाना होरैया, ग्राम पोस्ट रामनगर – 222103 में चल रहे भूमि विवाद ने अब गांव और आसपास के इलाके में बड़ा चर्चा का विषय बना लिया है। जिस जमीन और आवादी पर पीड़ित परिवार वर्षों से रह रहा है, उसी जमीन पर कथित तौर पर दूसरे पक्ष को कब्जा दिलाने की कोशिश को लेकर प्रशासन और पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन पर पहले से परिवार का कब्जा और निवास है, तो बिना किसी अंतिम न्यायिक आदेश के उन्हें हटाने या दूसरे पक्ष को कब्जा दिलाने की जल्दबाजी आखिर क्यों दिखाई जा रही है? यही सवाल अब गांव की चौपाल से लेकर स्थानीय प्रशासन तक गूंज रहा है।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यह केवल सामान्य राजस्व विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसमें निजी हित और प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी चर्चा हो रही है। गांव के लोगों के बीच यह बात तेजी से फैल रही है कि आखिर किस दबाव या किस नियत से पुलिस और कुछ राजस्व कर्मचारी एक पक्ष के समर्थन में दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राजस्व विवाद का निपटारा तहसील और न्यायालय के माध्यम से होना चाहिए, लेकिन यदि पुलिस सीधे मौके पर पहुंचकर दबाव का माहौल बनाती है तो इससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। यही कारण है कि अब गांव में यह चर्चा आम हो गई है कि कहीं न कहीं इस पूरे मामले में मिलीभगत या निजी स्वार्थ तो काम नहीं कर रहा।

पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर धमकी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। ऐसे में परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। गांव के कई लोग खुलकर यह कह रहे हैं कि यदि गरीब और कमजोर व्यक्ति की जमीन भी सुरक्षित नहीं रहेगी, तो प्रशासन पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा।

मामले ने अब सामाजिक और प्रशासनिक संवेदनशीलता का रूप ले लिया है। लोग मांग कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाए और जब तक कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट न हो, तब तक किसी भी पक्ष को जबरन कब्जा दिलाने की कार्रवाई रोकी जाए।

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सरकारी जमीन पर कब्जे से बंद हुआ स्कूल और मंदिर का रास्ता, ग्रामीणों में आक्रोश

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सतना। जिले की उचेहरा तहसील अंतर्गत ग्राम कोनी में शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। गांव निवासी बसंत कुमार गुप्ता ने प्रशासन से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि सरकारी भूमि पर किए गए कब्जे के कारण गांव के लोगों, स्कूली बच्चों और मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मामले को लेकर ग्रामीणों में भी नाराजगी व्याप्त है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम अमदरी निवासी बसंत कुमार गुप्ता ने प्रशासन को दिए आवेदन में बताया है कि मौजा कोनी की आराजी क्रमांक 277, रकबा 0.057 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर गांव के ही श्यामसुन्दर तोमर द्वारा कथित रूप से जबरन कब्जा कर लिया गया है। आरोप है कि उक्त भूमि से होकर गांव का सार्वजनिक मार्ग तथा स्कूल और मंदिर तक पहुंचने का रास्ता था, जिसे बंद कर दिया गया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि रास्ता बंद होने से बच्चों को स्कूल पहुंचने में कठिनाई हो रही है, वहीं ग्रामीणों को भी आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। इतना ही नहीं, उनकी पुश्तैनी पट्टे की भूमि पर स्थित मंदिर तक श्रद्धालुओं का पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।

बसंत कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि मामले को लेकर कई बार पुलिस थाना, राजस्व विभाग और न्यायालय तक शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका दावा है कि संबंधित भूमि से कब्जा हटाने के लिए प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया जा चुका है तथा जुर्माना भी लगाया गया था, इसके बावजूद कथित अतिक्रमण नहीं हटाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही रास्ता बहाल नहीं कराया गया तो बच्चों की शिक्षा और धार्मिक गतिविधियां प्रभावित होती रहेंगी। लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

उधर, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शिकायत प्राप्त होने पर राजस्व अभिलेखों और स्थल की स्थिति की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और ग्रामीण प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।

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गोण्डा में आबादी की जमीन पर कब्जे का विवाद गरमाया, महिला ने जताई जान-माल के खतरे की आशंका; पुलिस से लगाई गुहार

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गोण्डा। उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले के करनैलगंज क्षेत्र से जमीन कब्जाने के प्रयास और धमकी देने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित महिला ने थाना करनैलगंज में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि कुछ लोग उसकी पुश्तैनी आबादी की भूमि पर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। महिला ने पुलिस से तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य रुकवाने और सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, करनैलगंज क्षेत्र के मेहंदीहाता गांव निवासी गायत्री पत्नी रामफेरे ने शिकायत में बताया है कि उनके पूर्वजों के समय से आबादी की भूमि पर उनका कब्जा चला आ रहा है। उक्त भूमि पर उनके परिवार का सहन, पेड़-पौधे, कोठरी और छप्पर भी मौजूद हैं। महिला का कहना है कि वह वर्षों से उक्त जमीन का उपयोग करती आ रही हैं।

शिकायत में कहा गया है कि गांव के शिवराम मौर्या ही कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। महिला का आरोप गप्पू शर्मा ने आबादी जमीन बताकर विपक्षी शिवराम मौर्या को बेच दि है कि आरोपित पक्ष जेसीबी मशीन से निर्माण कराने की तैयारी में है और इसके लिए आवश्यक सामग्री भी मौके पर एकत्र कर ली गई है।

पीड़िता ने यह भी दावा किया है कि विरोध करने पर उसे और उसके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। महिला के अनुसार, कई लोग एकजुट होकर उसके घर पहुंचे और जमीन के पास आने पर जान से मारने तक की चेतावनी दी। इससे परिवार में भय का माहौल बना हुआ है।

महिला ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं, जिसके कारण लगातार तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो किसी भी समय बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।

पीड़िता ने थाना करनैलगंज पुलिस से मांग की है कि विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रोका जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

अब इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर क्षेत्रीय लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो भूमि विवाद और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

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लखनऊ में सूदखोरों के कथित आतंक से परिवार टूटा, 13 शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं; पीड़ित ने मुख्यमंत्री से लगाई जीवन बचाने की गुहार

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से आर्थिक शोषण, कथित सूदखोरी और प्रशासनिक उदासीनता का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि वर्षों से कुछ लोगों द्वारा अत्यधिक ब्याज वसूला जा रहा है, लाखों रुपये लौटाने के बावजूद मूल धन कम नहीं हो रहा है और लगातार धमकियां देकर मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि परिवार ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में खुद को आत्महत्या के लिए मजबूर बताया है। इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और सूदखोरी के कथित नेटवर्क पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

लखनऊ के एलडीए कॉलोनी कानपुर रोड निवासी रावेन्द्र कुमार गुप्ता ने मुख्यमंत्री को भेजे प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि पिछले कई वर्षों से वह कथित सूदखोरों के आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न का शिकार हैं। उनका कहना है कि व्यवसाय और पारिवारिक जरूरतों के चलते उन्होंने अलग-अलग लोगों से धन उधार लिया था, लेकिन समय के साथ ब्याज की रकम इतनी बढ़ती गई कि लाखों रुपये चुकाने के बावजूद कर्ज खत्म नहीं हुआ।

पीड़ित के अनुसार, वर्ष 2021 में उन्होंने सत्यम शुक्ला नामक व्यक्ति से पांच लाख रुपये उधार लिए थे। उनका दावा है कि अब तक करीब तीस लाख रुपये से अधिक चुका चुके हैं, लेकिन फिर भी कर्ज समाप्त नहीं हुआ। इसी तरह अन्य लोगों से लिए गए ऋण पर भी भारी ब्याज वसूले जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि लगातार ब्याज चुकाने के बावजूद मूल रकम जस की तस बनी हुई है, जिससे परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है।

रावेन्द्र कुमार का आरोप है कि कथित सूदखोरों ने दबाव बनाकर उनसे खाली चेक भी ले लिए थे। बाद में उन्हीं चेकों के आधार पर बड़े-बड़े मामलों में कानूनी दबाव बनाया गया। पीड़ित का कहना है कि उनके खिलाफ लाखों रुपये के चेक बाउंस के मामले खड़े किए गए, जबकि उनके पूरे परिवार की कुल संपत्ति भी उन रकमों के बराबर नहीं है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने न्याय पाने के लिए हर संभव प्रयास किया। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076, जनता दरबार, पुलिस आयुक्त कार्यालय, जिलाधिकारी कार्यालय, उप मुख्यमंत्री कार्यालय, मानवाधिकार आयोग और न्यायालय तक गुहार लगाई गई। शिकायत में दावा किया गया है कि अब तक 13 से अधिक शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर उन्हें संतोषजनक राहत नहीं मिली। इससे परिवार का भरोसा व्यवस्था से उठता जा रहा है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि 28 मई 2026 को कथित रूप से एक व्यक्ति अपने साथियों के साथ उनकी दुकान पर पहुंचा और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित ने तत्काल पुलिस सहायता नंबर 112 पर कॉल किया, लेकिन आरोप है कि पुलिस के पहुंचने से पहले आरोपी वहां से चले गए। घटना के बाद से पूरा परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहा है।

रावेन्द्र कुमार ने बताया कि उनके परिवार में कुल 14 सदस्य हैं, जिनमें वृद्ध माता-पिता भी शामिल हैं। परिवार किराये के मकान में रहता है और किराये की दुकान से ही किसी तरह गुजर-बसर हो रही है। आर्थिक तंगी इस हद तक पहुंच चुकी है कि कई बार परिवार के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। उनका कहना है कि न तो किसी सरकारी योजना का लाभ मिला और न ही शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई हुई।

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में पीड़ित ने इसे अपनी “अंतिम शिकायत” बताते हुए कहा है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो पूरा परिवार कोई बड़ा कदम उठाने को मजबूर हो सकता है। उन्होंने शासन और प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने, कथित सूदखोरी की जांच, धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई तथा परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।

फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल कथित सूदखोरी के गंभीर नेटवर्क की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्याय की तलाश में भटक रहे एक परिवार की पीड़ा किस हद तक पहुंच चुकी है। अब सभी की निगाहें शासन और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।#LucknowNews #SoodkhoriCase #BreakingNewsHindi #UPNews #JusticeForFamily #EconomicExploitation #CrimeNewsUP #LoanHarassment #CMYogi #ThreatCase #HumanRightsIssue #GroundReport #HindiNewsToday #FamilyInCrisis #LatestHindiNews #InvestigationDemand #PublicGrievance #UttarPradeshNews #EKhabarNews #ViralNewsHindi

आर्थिक तंगी भी नहीं रोक सकी आस्था का जुनून! युवक ने अपनी मेहनत की कमाई से संवारा जंगल में स्थित शिव मंदिर, बना मिसाल

उन्नाव। आज के दौर में जहां अधिकांश लोग अपनी निजी जरूरतों और सुविधाओं तक सीमित हो चुके हैं, वहीं उन्नाव जिले के एक युवक ने अपनी आस्था, मेहनत और सामाजिक सोच से ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसकी क्षेत्रभर में चर्चा हो रही है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद युवक ने जंगल के बीच स्थित वर्षों पुराने और उपेक्षा का शिकार हो चुके शिव मंदिर का कायाकल्प कर दिया। अब यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

उन्नाव जिले के हिलोली क्षेत्र अंतर्गत चंडी बक्स खेड़ा, लौवासिंगन खेड़ा निवासी अरुण कुमार ने अपने गांव और आसपास के लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़े एक पुराने शिव मंदिर को नया जीवन देने का संकल्प लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर जंगल के बीच स्थित होने के कारण वर्षों से उपेक्षित था। मंदिर परिसर में न तो नियमित साफ-सफाई होती थी और न ही रंगाई-पुताई या मरम्मत का कोई कार्य कराया गया था। समय के साथ मंदिर के कई हिस्से जर्जर हो चुके थे और आसपास का वातावरण भी उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा था।

ग्रामीणों का कहना है कि अरुण कुमार ने जब मंदिर की बदहाल स्थिति देखी तो उन्होंने इसे सुधारने का निर्णय लिया। आर्थिक रूप से मजबूत न होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत की कमाई तथा बचत के पैसों से मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कराया।

बताया जा रहा है कि कड़कड़ाती धूप में स्वयं मौके पर मौजूद रहकर उन्होंने मंदिर के कार्यों में योगदान दिया। मंदिर की दीवारों की पुताई करवाई गई, जर्जर हिस्सों की मरम्मत कर प्लास्टर कराया गया और पूरे परिसर को साफ-सुथरा बनाया गया। मंदिर की ऊंचाई अधिक होने के कारण पुताई का कार्य आसान नहीं था, लेकिन इसके बावजूद इसे पूरा कराया गया।

मंदिर परिसर में स्थापित भगवान शंकर और नंदी बाबा की प्रतिमाओं के आसपास भी विशेष रूप से सौंदर्यीकरण कराया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर के सामने एक चबूतरा भी तैयार करवाया गया, जहां आने वाले लोग बैठकर पूजा-पाठ और विश्राम कर सकें। मंदिर का नया स्वरूप अब दूर-दूर से आने वाले लोगों को आकर्षित कर रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक मंदिर की मरम्मत नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है। जिस स्थान पर पहले बहुत कम लोग पहुंचते थे, अब वहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है और लोग मंदिर की बदली हुई तस्वीर की सराहना कर रहे हैं।

अरुण कुमार का कहना है कि उनके पास संसाधन सीमित थे, लेकिन भगवान के प्रति श्रद्धा असीम थी। इसी भावना के साथ उन्होंने मंदिर को संवारने का प्रयास किया। उनका मानना है कि यदि समाज का हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार धार्मिक और सामाजिक स्थलों के संरक्षण में योगदान दे, तो कई उपेक्षित धरोहरों को नया जीवन मिल सकता है।

ग्रामीणों ने बताया कि अरुण कुमार सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं और अपने कार्यों की जानकारी साझा करते रहते हैं। उनकी फेसबुक आईडी “अरुण कुमार” नाम से संचालित है, जहां वह अपने सामाजिक, धार्मिक और जनहित से जुड़े कार्यों के फोटो और वीडियो साझा करते हैं। मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े वीडियो और तस्वीरें भी लोगों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

क्षेत्र के लोगों का मानना है कि आज जब अधिकांश लोग अपने व्यक्तिगत जीवन में व्यस्त हैं, ऐसे समय में एक युवक द्वारा अपनी मेहनत की कमाई और समय लगाकर धार्मिक धरोहर को नया स्वरूप देना समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश है। लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे युवा पीढ़ी के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बताया है।

अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि भविष्य में भी मंदिर के विकास कार्य जारी रहेंगे और यह स्थान क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित होगा।#UnnaoNews #ArunKumar #ShivMandir #TempleRenovation #MahadevTemple #SanatanDharma #VillageHero #InspiringStory #ReligiousFaith #MandirVikas #UPNews #GroundReport #HeritageRevival #SocialWorkIndia #NandiBaba #BhaktiNews #PositiveNewsIndia #YouthInspiration #CommunityDevelopment #ViralHindiNews

उधारी के पैसे मांगना पड़ा भारी! किराना दुकानदार पर दो बार हमला, हाथ टूटने का आरोप; शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, न्याय की गुहार

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आगरा। आगरा के थाना एकता क्षेत्र के खेरा पंचगाई गांव में उधारी के पैसे मांगने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर कानून-व्यवस्था के मुद्दे का रूप लेता दिखाई दे रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि न केवल उनके साथ घर में घुसकर मारपीट की गई, बल्कि शिकायत देने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। परिवार का कहना है कि आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे लगातार धमकियां दे रहे हैं, जिससे किसी बड़ी घटना की आशंका बनी हुई है।

खेरा पंचगाई निवासी नरेन्द्र पुत्र बुद्धाराम, जो एक छोटी किराना दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, ने आरोप लगाया है कि गांव निवासी प्रमोद पुत्र होरीलाल लंबे समय से उनकी दुकान से उधार सामान लेता था। करीब एक वर्ष से बकाया रकम मांगने पर टालमटोल की जा रही थी। जब 30 मई 2026 को वह अपने रुपये मांगने गया तो विवाद बढ़ गया।

पीड़ित के अनुसार रुपये मांगने पर गाली-गलौज शुरू हो गई और देखते ही देखते प्रमोद, उसकी पत्नी चन्दा तथा अन्य परिजन लाठी-डंडे लेकर बाहर निकल आए। आरोप है कि पहले उनके साथ आरोपियों के घर के बाहर मारपीट की गई और बाद में उनका पीछा करते हुए घर तक पहुंचकर दोबारा हमला किया गया।

नरेन्द्र का कहना है कि हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनका दाहिना हाथ टूट गया। उन्हें बचाने आई पत्नी विमलेश और भाभी मुन्नी देवी को भी नहीं बख्शा गया। परिवार का आरोप है कि मारपीट के दौरान मुन्नी देवी के हाथ पर काटकर घायल कर दिया गया। घटना के बाद पूरे परिवार में भय और दहशत का माहौल है।

पीड़ित परिवार का यह भी आरोप है कि उसी दिन शाम को 8 से 10 बाहरी लोगों को बुलाकर दोबारा उनके घर पर हमला किया गया। इस दौरान मारपीट, लूटपाट और जान से मारने की धमकियां दी गईं। परिवार का कहना है कि उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की भी धमकी दी जा रही है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि शिकायत और प्रार्थना पत्र दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने पुलिस और प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी, लेकिन अभी तक उन्हें न्याय की उम्मीद के अनुरूप सहायता नहीं मिली है। लगातार मिल रही धमकियों के कारण परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ी और अप्रिय घटना घट सकती है। परिवार ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।

गांव में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई से ही पीड़ित परिवार का भरोसा बहाल हो सकेगा। अब सभी की निगाहें प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं

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पुत्र की संदिग्ध मौत के बाद न्याय के लिए दर-दर भटक रहा BSF जवान, पिता का आरोप

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सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत जिले में एक BSF जवान अपने बेटे की संदिग्ध मौत के मामले में न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक चुका है। मृतक के पिता ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि हत्या के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की गई और बाद में बिना किसी स्पष्ट जानकारी के केस बंद कर दिया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला है, जबकि वे लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।

सबौली निवासी शमशेर सिंह, जो सीमा सुरक्षा बल (BSF) में कार्यरत हैं, ने आरोप लगाया है कि उनके पुत्र पीयूष की 29 दिसंबर 2024 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। उस समय उन्हें फोन के माध्यम से घटना की जानकारी मिली थी। सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे, जहां उनका बेटा मृत अवस्था में मिला।

पिता का कहना है कि घटना के दिन वह मानसिक रूप से बेहद आहत थे और उसी स्थिति में पुलिस ने उनका बयान दर्ज कर लिया। बाद में जब उन्होंने स्वयं स्तर पर जानकारी जुटाई तो उन्हें संदेह हुआ कि उनके पुत्र की मौत कोई दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गोविंद, मनप्रीत और राकेश ने मिलकर उनके बेटे को 13वीं मंजिल फ्लैट नंबर 1303 की खिड़की से से नीचे फेंका, जिससे उसकी मौत हो गई।

शमशेर सिंह का दावा है कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों को हत्या की आशंका से अवगत कराया था। उनका आरोप है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया कि बेटे का अंतिम संस्कार करने के बाद वे थाने आएं, जहां मुकदमा दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जब वे दोबारा थाना पहुंचे तो कथित तौर पर उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि पहले हत्या के सबूत प्रस्तुत करें।

पीड़ित पिता का कहना है कि वह लगातार पुलिस अधिकारियों और थाने के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। बाद में उनकी शिकायत के आधार पर मामला दर्ज तो किया गया, लेकिन जांच की गति को लेकर परिवार लगातार सवाल उठाता रहा।

अब इस मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़ित परिवार को मोबाइल पर ऐसे संदेश मिलने लगे, जिनसे उन्हें पता चला कि उनका मामला बंद कर दिया गया है। परिवार का आरोप है कि उन्हें केस बंद किए जाने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई। दूसरी ओर जांच अधिकारियों की ओर से यह कहा जा रहा है कि मामले में जांच और पूछताछ की प्रक्रिया जारी है।

इसी विरोधाभास ने पीड़ित परिवार की चिंता और बढ़ा दी है। पिता का कहना है कि यदि जांच जारी है तो फिर केस बंद होने के संदेश क्यों भेजे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही और उन्हें लगातार अंधेरे में रखा जा रहा है।

परिवार का आरोप है कि नामजद आरोपी मनप्रीत, गोविंद, राकेश तथा अन्य संबंधित लोग प्रभावशाली हैं, जिसके कारण मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच स्थानीय स्तर से हटाकर क्राइम ब्रांच या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

पीड़ित पिता ने कहा कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि न्याय व्यवस्था पर भरोसा कायम रहेगा और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने हरियाणा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।

फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। परिवार का कहना है कि जब तक उन्हें अपने बेटे की मौत की सच्चाई और न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।#SonipatNews #HaryanaPolice #JusticeForPiyush #BSFJawan #MurderCase #CrimeInvestigation #JusticeDelayed #BreakingNews #SonipatCrime #FamilySeeksJustice #CrimeBranchInquiry #HaryanaUpdate #PoliceInvestigation #TruthMustPrevail #PiyushCase #LegalActionNow #VictimFamily #CrimeNewsIndia #JusticeSystem #HindiNewsUpdate

प्रेमिका संग बाइक यात्रा पर निकला पति, दो मासूम बच्चों के साथ हुआ हादसा; पत्नी बोली- बच्चों को मारने और मुझे खत्म करने की दे रहा धमकी

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अलीगढ़/नोएडा। पारिवारिक विवाद, कथित प्रेम प्रसंग और दो मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर सामने आया एक मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पीड़ित महिला ने अपने पति पर न सिर्फ दूसरी महिला के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया है, बल्कि बच्चों को जबरन अपने पास रखने, उन्हें जान से मारने की धमकी देने और स्वयं उसकी हत्या की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और पीड़िता ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा एवं न्याय की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार, अलीगढ़ जनपद के तेजपुर क्षेत्र निवासी संदीप कुमार पुत्र शिशुपाल सिंह पर उसकी पत्नी शिवानी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिवानी का कहना है कि उसके पति का पिछले लगभग दो वर्षों से एक अन्य महिला के साथ प्रेम संबंध चल रहा है। आरोप है कि उक्त महिला मूल रूप से बनारस की रहने वाली है। इसी संबंध को लेकर पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई थी।

पीड़िता के अनुसार, हाल ही में संदीप कुमार अपने दोनों मासूम बच्चों को साथ लेकर करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर चला गया। आरोप है कि इस दौरान उसकी कथित प्रेमिका भी उसके साथ मोटरसाइकिल पर मौजूद थी। यात्रा के दौरान अचानक बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे दोनों बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।

शिवानी का आरोप है कि दुर्घटना के बाद भी संदीप का व्यवहार नहीं बदला। उसका कहना है कि पति ने फोन पर धमकी देते हुए साफ कहा कि वह बच्चों को कभी मां के पास नहीं जाने देगा। महिला का आरोप है कि संदीप ने कहा कि वह बच्चों को अपने पास ही रखेगा और जरूरत पड़ी तो उन्हें जान से भी मार सकता है, लेकिन पत्नी को नहीं सौंपेगा।

पीड़िता ने यह भी दावा किया है कि संदीप का यह व्यवहार नया नहीं है। उसके अनुसार, संदीप की पहले भी एक शादी हो चुकी थी और पहली पत्नी के साथ भी उसने कथित रूप से मारपीट, प्रताड़ना और दुर्व्यवहार किया था। महिला का आरोप है कि पहली पत्नी को भी प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया गया था। इसके बाद संदीप ने शिवानी से विवाह किया, लेकिन अब उसके साथ भी वही व्यवहार दोहराया जा रहा है।

शिवानी का कहना है कि उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। वह अपने और अपने बच्चों के जीवन को लेकर भयभीत है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, पीड़िता द्वारा पुलिस और संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी दी गई है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। यदि महिला द्वारा लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित न रहकर बच्चों की सुरक्षा, घरेलू हिंसा, आपराधिक धमकी और महिला उत्पीड़न से जुड़े गंभीर कानूनी पहलुओं का रूप ले सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, ताकि सच सामने आ सके और बच्चों तथा पीड़ित महिला की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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