सहरसा। बिहार के सहरसा जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां ढाई साल के मासूम आशीष कुमार की मौत के बाद पूरा परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। घटना को लगभग एक माह बीत जाने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मोटरसाइकिल जब्त तो कर ली, लेकिन मुख्य आरोपी अब तक कानून की गिरफ्त से बाहर है।
मृतक आशीष कुमार, पिता संतोष साह, ग्राम समानी वार्ड संख्या 7, थाना जलई, जिला सहरसा का निवासी था। परिजनों के अनुसार 9 मई को आशीष अपने घर के सामने अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रही एक मोटरसाइकिल ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भयावह था कि मासूम की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

परिवार का आरोप है कि मोटरसाइकिल चला रहा युवक संदीप सदा नशे की हालत में था और दुर्घटना के तुरंत बाद घटनास्थल से फरार हो गया। ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह भागने में सफल रहा। बाद में मामले की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर लिया और मामला दर्ज किया।
हालांकि घटना के कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते सख्त कार्रवाई करती तो आरोपी अब तक गिरफ्तार हो चुका होता। उनका आरोप है कि मामले में कार्रवाई की गति बेहद धीमी है, जिससे न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है।
मृतक के नाना ने भावुक होकर कहा कि यह केवल सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक परिवार की दुनिया उजड़ जाने का मामला है। उन्होंने कहा कि ढाई साल के मासूम की मौत ने पूरे परिवार को अंदर से तोड़ दिया है। जब तक आरोपी को गिरफ्तार कर कानून के अनुसार सजा नहीं दी जाती, तब तक परिवार को न्याय नहीं मिल सकता।
परिजनों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक सहायता और सरकारी मुआवजे की भी मांग की है, ताकि बच्चे को खोने के बाद गहरे सदमे में डूबे परिवार को कुछ राहत मिल सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई नहीं होती तो अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं और आम जनता का कानून पर भरोसा कमजोर पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार किया जाए।
अब पूरा परिवार और गांव प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। लोगों का कहना है कि मासूम आशीष को तो वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन दोषी को सजा दिलाकर उसके परिवार को न्याय जरूर दिलाया जा सकता है। सहरसा का यह मामला अब केवल एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय, जवाबदेही और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का बड़ा सवाल बन चुका है।


