Friday, July 3, 2026
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विदेश नौकरी दिलाने के नाम पर 70 हजार रुपये की ठगी का आरोप, सात माह से बेरोजगार पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार

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मोहाली। विदेश में नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर एक युवक से 70 हजार रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि पंजाब के मोहाली स्थित एक कंसल्टेंसी कार्यालय ने उसे विदेश में आकर्षक नौकरी और मोटे वेतन का झांसा देकर बड़ी रकम वसूल ली, लेकिन न तो नौकरी मिली और न ही उसकी जमा राशि वापस की गई। अब पीड़ित आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहा है तथा न्याय की गुहार लगा रहा है।

पीड़ित के अनुसार उसने विदेश में रोजगार पाने की उम्मीद में मोहाली स्थित क्राउन रूट कंसल्टेंसी से संपर्क किया था। कंसल्टेंसी के प्रतिनिधियों ने उसे अजरबैजान में रिटेल मैनेजर की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया…
[6:14 pm, 04/06/2026] Samachar Bharti: विदेश भेजने के नाम पर 70 हजार की ठगी का आरोप, नौकरी का सपना दिखाकर महीनों तक दौड़ाते रहे एजेंट

फेसबुक से शुरू हुआ संपर्क, मेडिकल, वीजा और जॉब प्लेसमेंट के नाम पर वसूली, पीड़ित ने डीजीपी पंजाब से लगाई न्याय की गुहार

पुणे। विदेश में नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर एक युवक से 70 हजार रुपये वसूलने और बाद में उसे महीनों तक गुमराह करने का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के पुणे निवासी संदीप नंदकुमार यादव ने पंजाब पुलिस के डीजीपी को शिकायत भेजकर मोहाली स्थित एक कंसल्टेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि उसे ब्रिटेन, अमेरिका, यूरोप, कुवैत और अजरबैजान में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन लाखों सपने दिखाने के बाद उसे केवल आश्वासनों के सहारे छोड़ दिया गया।

शिकायत के अनुसार संदीप यादव का संपर्क 15 दिसंबर 2025 को फेसबुक के माध्यम से कंसल्टेंसी की प्रतिनिधि रिया ठाकुर से हुआ था। बातचीत के दौरान विदेश में आकर्षक नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाया गया। रिया ने दावा किया कि पहले वीजा जारी होगा और उसके बाद प्रक्रिया पूरी करने के लिए 70 हजार रुपये जमा कराने होंगे।

पीड़ित ने भरोसा करते हुए 16 दिसंबर को अपना पासपोर्ट, अनुभव प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए। इसके बाद उसे मेडिकल जांच कराने के निर्देश दिए गए। पुणे निवासी होने के बावजूद उसे मुंबई में मेडिकल की व्यवस्था होने की जानकारी दी गई। 18 दिसंबर 2025 को उसने मुंबई के केके डायग्नोस्टिक सेंटर में मेडिकल परीक्षण कराया और इसके लिए 7 हजार रुपये खर्च किए।

मामला यहीं नहीं रुका। शिकायत में बताया गया है कि 7 जनवरी 2026 को उसे अपने ससुर के साथ चंडीगढ़ बुलाया गया। वहां उसकी मुलाकात तुषार नामक व्यक्ति से हुई, जिसने तत्काल 70 हजार रुपये जमा करने का दबाव बनाया। आरोप है कि 15 दिनों के भीतर नौकरी की पुष्टि और औपचारिक अनुबंध देने का भरोसा देकर पूरी राशि ले ली गई।

पीड़ित का कहना है कि भुगतान के बाद उसे केवल तीन महीने की वैधता वाला वीजा दिया गया। बाद में इसे अजरबैजान का प्रारंभिक एंट्री वीजा बताते हुए दो साल के लिए टीआरसी कार्ड मिलने का आश्वासन दिया गया। लेकिन समय बीतने के बावजूद न तो नौकरी मिली और न ही कोई ठोस प्रक्रिया आगे बढ़ी।

संदीप यादव ने आरोप लगाया है कि पुणे लौटने के बाद कंसल्टेंसी के अधिकारियों का रवैया पूरी तरह बदल गया। फोन कॉल्स का जवाब देना बंद कर दिया गया और जब कभी संपर्क हुआ तो केवल टालमटोल और नए बहाने सुनने को मिले। बार-बार पूछताछ करने पर कंपनी के मालिक हैरी ने होली तक इंतजार करने या फिर रिफंड लेने का विकल्प बताया।

पीड़ित के अनुसार तमाम आश्वासनों के बावजूद उसे केवल 17 अप्रैल 2026 की एक नियुक्ति पत्र की प्रति भेजी गई, लेकिन वास्तविक नौकरी, वर्क परमिट या विदेश भेजने की कोई प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इससे उसे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा।

अब पीड़ित ने पंजाब पुलिस के डीजीपी को लिखित शिकायत भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जमा कराई गई 70 हजार रुपये की राशि वापस दिलाने की मांग की है। शिकायत में मोहाली स्थित कंसल्टेंसी कार्यालय का पता और संबंधित कर्मचारियों के मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराए गए हैं।

इस मामले ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे कथित फर्जीवाड़े और बेरोजगार युवाओं के सपनों से खिलवाड़ करने वाले नेटवर्क पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला अंतरराज्यीय स्तर पर रोजगार के नाम पर धोखाधड़ी का बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है

गुरदासपुर में महिला को बीच सड़क घेरकर पीटने का दावा, कपड़े फाड़ने और बच्चों को चोट पहुंचाने का आरोप; शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने की बात

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गुरदासपुर। पंजाब के गुरदासपुर जिले के गांव खुंडी में एक महिला के साथ कथित मारपीट और अभद्रता का मामला सामने आया है। पीड़िता अमरजीत कौर ने आरोप लगाया है कि पड़ोस में रहने वाली कुछ महिलाओं ने उन्हें रास्ते में रोककर मारपीट की, उनके कपड़े फाड़ दिए और सार्वजनिक रूप से बेइज्जत किया। महिला का कहना है कि पुलिस को शिकायत देने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

अमरजीत कौर के अनुसार, 3 जून 2026 को वह अपने बच्चों को पोलियो के टीके लगवाने के लिए घर से निकली थीं। उनका कहना है कि रास्ते में पड़ोस में रहने वाली मंजीत, सीमार कौर और मनदीप कौर ने उन्हें रोक लिया। इसी दौरान पुरानी रंजिश को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। पीड़िता के मुताबिक, विवाद का कारण यह था कि वह आरोपी पक्ष के कथित तौर पर उनके घर आने-जाने का विरोध करती थीं।

महिला का दावा है कि विवाद बढ़ने पर तीनों ने उन्हें पकड़ लिया, बाल खींचे, सड़क पर गिरा दिया और चप्पलों से मारपीट की। अमरजीत कौर का आरोप है कि इस दौरान उनके कपड़े भी फाड़ दिए गए, जिससे उन्हें सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बच्चों शुभदीप और नूर को भी चोटें आई हैं। घटना में उन्हें कई शारीरिक चोटें लगने की बात कही गई है।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि घटना के समय कुछ अन्य लोग भी मौके पर मौजूद थे, जिन्होंने कथित रूप से आरोपी पक्ष का समर्थन किया और उन्हें अपमानित करने वाली बातें कहीं। उनके अनुसार, पूरी घटना वहां मौजूद कुछ लोगों ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड भी की है और वीडियो उनके पास सुरक्षित है।

अमरजीत कौर का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने संबंधित थाना पुलिस को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, कई दिन बीत जाने के बावजूद आरोपितों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। इससे उनके परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

पीड़िता ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और स्थानीय लोगों की निगाहें पुलिस एवं जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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पार्लर जाने की बात कहकर घर से निकली थी 18 वर्षीय सिमरन, कई दिनों बाद भी नहीं लगा सुराग

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बीकानेर। शहर के जेएनवी कॉलोनी थाना क्षेत्र में एक 18 वर्षीय युवती के रहस्यमय ढंग से लापता हो जाने का मामला सामने आया है। युवती के अचानक गायब होने से परिवार गहरे सदमे में है और परिजन लगातार उसकी तलाश में जुटे हुए हैं। काफी खोजबीन के बावजूद जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार हरिजन बस्ती शिवबाड़ी निवासी हेमराज पुत्र दौलत राम ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी पुत्री सिमरन 21 मई 2026 की सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच घर से पार्लर जाने की बात कहकर निकली थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह कुछ समय बाद वापस लौट आएगी, लेकिन देर शाम तक घर नहीं पहुंची। इसके बाद परिजनों ने रिश्तेदारों, परिचितों और संभावित स्थानों पर उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।

परिजनों के अनुसार सिमरन का स्वभाव बेहद सरल और भोला है। साथ ही वह मानसिक रूप से भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं है। परिवार ने बताया कि इससे पहले भी वह एक-दो बार घर से चली गई थी, लेकिन कुछ समय बाद स्वयं वापस लौट आई थी। इस बार कई दिन बीत जाने के बाद भी उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है, जिससे परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

लापता युवती के पिता हेमराज का कहना है कि बेटी की सुरक्षा को लेकर पूरा परिवार बेहद परेशान है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द उनकी बेटी की तलाश कर उसे सकुशल घर पहुंचाने में मदद की जाए।

जेएनवी कॉलोनी थाना पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस युवती की तलाश के लिए विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है तथा आसपास के क्षेत्रों में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

परिवार ने आमजन से भी अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को सिमरन के बारे में कोई जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस अथवा उसके परिजनों को सूचित करें, ताकि युवती को जल्द से जल्द खोजा जा सके।

शाहजहांपुर में 16 वर्षीय किशोरी के लापता होने का मामला गरमाया, परिवार बोला- 10 दिन से थाने में बैठाया गया, आरोपियों पर कार्रवाई नहीं

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शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के सिंधौली थाना क्षेत्र के दौलतपुर गांव से लापता हुई 16 वर्षीय किशोरी नेहा का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। परिजनों का आरोप है कि घटना को कई दिन बीत जाने के बावजूद न तो किशोरी की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जा रही है और न ही उन लोगों पर कोई प्रभावी कार्रवाई की जा रही है, जिन पर उसे बहला-फुसलाकर ले जाने का संदेह जताया गया है।

परिवार के अनुसार, नेहा पुत्री स्वर्गीय इंद्रपाल सिंह के माता-पिता का करीब सात-आठ वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। इसके बाद से नेहा और उसके दो भाई अपने मामा सूरज के संरक्षण में रह रहे थे। परिजनों का कहना है कि 22 मई 2026 की रात करीब दो बजे नेहा अचानक घर से गायब हो गई। जब सुबह परिवार के लोगों की नींद खुली तो वह घर में नहीं मिली, जिसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई।

परिजनों का दावा है कि किशोरी अपने साथ करीब 54 हजार रुपये नकद, लगभग 15 हजार रुपये कीमत का मोबाइल फोन तथा कुछ सोने-चांदी के आभूषण भी लेकर गई है। परिवार का कहना है कि घर में शादी के लिए रखी गई नकदी और अन्य सामान भी गायब मिला, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई।

परिवार ने गांव के ही रहने वाले पिंकू पुत्र दयाराम तथा उसके कुछ परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि किशोरी को बहला-फुसलाकर घर से ले जाया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मामले में सबसे बड़ा विवाद अब पुलिस कार्रवाई को लेकर सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि किशोरी के मिलने के बाद भी उसे पिछले करीब 10 दिनों से थाने में रखा गया है, जबकि जिन लोगों पर संदेह जताया गया था, वे खुलेआम घूम रहे हैं। परिवार का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

परिजनों ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि मामले में सुनवाई कराने के लिए उनसे धनराशि ली गई, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का यह भी आरोप है कि दूसरी तरफ से भी प्रभाव का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि वे लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती तो मामला इतना नहीं बढ़ता। परिवार ने उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

वहीं, मामले में पुलिस और आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किशोरी के लापता होने, बरामदगी और बाद की परिस्थितियों के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं।

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13 से 19 जून तक भोपाल में श्रीमद्भागवत कथा, 4 जून को महापौर करेंगी भूमि पूजन

भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित रियल एस्टेट समूह शालिग्राम डेवलपर्स द्वारा अधिक मास के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल में 13 से 19 जून 2026 तक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कथा आयोजन रुद्राक्ष किंगस्टन परिसर, अपोलो हॉस्पिटल के समीप बावड़िया कला स्थित स्थल पर होगा, जहां देश के प्रसिद्ध कथावाचक परम पूज्य शांति दूत ‘धर्मरत्न’ श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज श्रद्धालुओं को कथा रसपान कराएंगे।

इस धार्मिक आयोजन की शुरुआत भूमि पूजन कार्यक्रम से होगी, जो 4 जून 2026 गुरुवार को प्रातः 11:30 बजे आयोजित किया जाएगा। भूमि पूजन कार्यक्रम में भोपाल महापौर मालती राय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर विधि-विधान से भूमि पूजन करेंगी।

आयोजकों के अनुसार यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का भी माध्यम बनेगा। कथा आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

शालिग्राम डेवलपर्स के CMD देवेन्द्र चौकसे ने बताया कि अधिक मास के अवसर पर आयोजित होने वाली यह श्रीमद्भागवत कथा शहरवासियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और संस्कारों का संदेश लेकर आएगी। वहीं कार्यक्रम समन्वयक सुशील अग्रवाल ने मीडिया प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।

भूमि पूजन कार्यक्रम में मीडिया प्रतिनिधियों, संवाददाताओं और कैमरामैन को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है ताकि आयोजन की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

कार्यक्रम विवरण

• कार्यक्रम : भूमि पूजन
• दिनांक : 4 जून 2026 (गुरुवार)
• समय : प्रातः 11:30 बजे
• स्थान : रुद्राक्ष किंगस्टन, अपोलो हॉस्पिटल के पास, बावड़िया कला, भोपाल

13 से 19 जून तक आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा को लेकर श्रद्धालुओं में अभी से उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

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23 साल की शादी, 10 साल से कोर्ट के चक्कर, पति की दूसरी शादी के बाद न्याय के लिए भटक रही महिला

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गाजियाबाद। जनपद गाजियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र और तहसील मोदीनगर से एक महिला की दर्दभरी कहानी सामने आई है, जो पिछले करीब 10 वर्षों से अपने अधिकार और न्याय के लिए अदालतों व सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। महिला का आरोप है कि विवाह के 23 वर्ष बीत जाने के बाद भी उसे न तो पति का साथ मिला और न ही वैधानिक अधिकार।

पीड़िता के अनुसार उसकी शादी करीब 23 वर्ष पहले हुई थी। शादी के बाद एक पुत्र का जन्म हुआ, लेकिन कुछ वर्षों बाद पति ने उसे छोड़ दिया। महिला का कहना है कि उसके पति की यह दूसरी शादी थी और बाद में उसने एक और विवाह कर लिया। पति द्वारा साथ छोड़ दिए जाने के बाद वह आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रही है।

महिला का आरोप है कि उसके ससुराल पक्ष के पास लगभग 32 एकड़ कृषि भूमि और अन्य संपत्तियां हैं, जिनमें मकान और अन्य अचल संपत्तियां भी शामिल हैं। इसके बावजूद उसे उसके हिस्से का अधिकार नहीं दिया जा रहा है। पीड़िता का कहना है कि वह अपने और अपने बेटे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संपत्ति में वैधानिक अधिकार तथा भरण-पोषण की मांग कर रही है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि महिला का मामला पिछले लगभग 10 वर्षों से न्यायालय में लंबित बताया जा रहा है। लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के कारण वह मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रही है। उसका कहना है कि लगातार तारीख पर तारीख मिलने से न्याय की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसने प्रशासनिक अधिकारियों, महिला सहायता केंद्रों तथा अन्य संबंधित विभागों को कई बार प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन अब तक उसे कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी है। महिला का कहना है कि जीवन-यापन करना बेहद कठिन हो गया है और आर्थिक संसाधनों के अभाव में वह अपने बेटे का भविष्य भी सुरक्षित नहीं कर पा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि महिला के दावों में सच्चाई है तो प्रशासन और संबंधित विभागों को मामले की गंभीरता से जांच कर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। उनका मानना है कि वर्षों से लंबित विवादों के निस्तारण के लिए विशेष पहल की आवश्यकता है, ताकि पीड़ित पक्ष को समय पर न्याय मिल सके।

अब पीड़िता ने एक बार फिर प्रशासन, महिला आयोग और न्यायिक अधिकारियों से गुहार लगाई है कि उसके मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, उसे भरण-पोषण की उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तथा संपत्ति में उसके वैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए। महिला का कहना है कि उसे केवल न्याय चाहिए, ताकि वह सम्मानपूर्वक अपना और अपने बेटे का जीवन चला सके।

मोबाइल छीनने की शिकायत लेकर पहुंचे परिवार से पुलिसकर्मियों ने की बदसलूकी! महिला को धक्का देने का आरोप, अस्पताल में कराना पड़ा भर्ती

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फरीदाबाद। शहर में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मोबाइल स्नैचिंग का शिकार हुए एक परिवार ने पुलिस चौकी पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि शिकायत दर्ज करने के बजाय चौकी में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौज की और महिला को धक्का देकर बाहर निकाल दिया। घटना के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

मिली जानकारी के अनुसार संजय कॉलोनी सेक्टर-23 बल्लभगढ़ निवासी मनोहरी लाल ने एसीपी फरीदाबाद को दिए शिकायत पत्र में बताया है कि उनका पुत्र हेमंत 31 मई 2026 को गौछी क्षेत्र में अपना काम निपटाकर घर लौट रहा था। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो अज्ञात युवक उसका मोबाइल फोन छीनकर फरार हो गए।

पीड़ित परिवार का कहना है कि मोबाइल छिनैती की शिकायत दर्ज कराने के लिए मनोहरी लाल, उनका पुत्र हेमंत और पत्नी सुदेशवती गौछी पुलिस चौकी पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी शिकायत लेने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, कथित तौर पर परिवार से कहा गया कि पहले चौकी में झाड़ू लगाओ, उसके बाद शिकायत सुनी जाएगी।

विरोध करने पर महिला को धक्का देने का आरोप

शिकायत के अनुसार जब मनोहरी लाल की पत्नी सुदेशवती ने इस बात का विरोध करते हुए कहा कि वे शिकायत दर्ज कराने आए हैं, सफाई करने नहीं, तो एक पुलिसकर्मी कथित रूप से भड़क गया। आरोप है कि पुलिसकर्मी ने महिला को धक्का दे दिया, जिससे वह जमीन पर गिर गई। परिवार का यह भी आरोप है कि उन्हें अपशब्द कहे गए और चौकी से भगा दिया गया।

हाल ही में हुआ था महिला का ऑपरेशन

परिवार के मुताबिक सुदेशवती का कुछ समय पहले पथरी का ऑपरेशन हुआ था। धक्का लगने और तनाव के कारण उनकी हालत बिगड़ गई। दर्द बढ़ने पर परिजन उन्हें तत्काल सरकारी अस्पताल बल्लभगढ़ लेकर पहुंचे, जहां से उन्हें बी.के. अस्पताल रेफर कर दिया गया। बाद में बी.के. अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कर उनका उपचार कराया गया।

“गरीब हैं, लेकिन सम्मान हमारा भी है”

मनोहरी लाल ने अपनी शिकायत में कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने का मतलब यह नहीं कि उनके सम्मान और अधिकारों की अनदेखी की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों के व्यवहार से पूरा परिवार मानसिक रूप से आहत है और उन्हें न्याय की उम्मीद अब उच्च अधिकारियों से है।

एसीपी से जांच और कार्रवाई की मांग

पीड़ित ने एसीपी सेक्टर-21सी फरीदाबाद को दिए प्रार्थना पत्र में गौछी पुलिस चौकी में तैनात संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही मोबाइल छिनैती की रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की भी मांग की गई है।

मोबाइल फोन की जानकारी भी सौंपी

पीड़ित परिवार ने शिकायत में बताया कि छीना गया मोबाइल Samsung Galaxy F17 5G है। परिवार ने मोबाइल का बिल, आईएमईआई नंबर और अन्य दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराने की बात कही है, ताकि मोबाइल की बरामदगी और अपराधियों की पहचान हो सके।

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मदद की गुहार: “मुझे गरिमा मैम से मिलना है”, 21वर्षीय लड़की ने बार-बार लगाई सहायता की अपील

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असम की रहने वाली एक युवती ने लगातार कई संदेश भेजकर मदद की गुहार लगाई है। युवती ने कहा कि उसके घर में गंभीर समस्याएं चल रही हैं और वह “गरिमा मैम” से मिलना चाहती है। संदेशों में उसने बार-बार अनुरोध करते हुए लिखा, “Please meri help kijiye” और “I really need your help”।

मामला उस समय सामने आया जब युवती की ओर से व्हाट्सएप पर लगातार सहायता संबंधी संदेश भेजे गए। संदेशों के अनुसार, वह अपने पारिवारिक हालात से परेशान है और किसी भरोसेमंद व्यक्ति या संस्था से मदद चाहती है। युवती ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सीधे “गरिमा मैम” से मिलना चाहती है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह किसी सामाजिक कार्यकर्ता, अधिकारी या भरोसेमंद संपर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार युवती का नाम पोमी शिल बताया जा रहा है। आधार कार्ड में उसका पता असम के कामरूप मेट्रो जिले के धिरेनपारा क्षेत्र का दर्ज है। दस्तावेज के अनुसार उसकी जन्मतिथि 2 जनवरी 2005 है। हालांकि, परिवार की समस्या क्या है और वह किस प्रकार की सहायता चाहती है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
संपर्क होने के बाद इस नंबर पर फोन करना है
+91 93953 27758

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सहरसा में ढाई साल के मासूम की मौत के बाद इंसाफ की मांग तेज, आरोपी अब तक फरार

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सहरसा। बिहार के सहरसा जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां ढाई साल के मासूम आशीष कुमार की मौत के बाद पूरा परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। घटना को लगभग एक माह बीत जाने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मोटरसाइकिल जब्त तो कर ली, लेकिन मुख्य आरोपी अब तक कानून की गिरफ्त से बाहर है।

मृतक आशीष कुमार, पिता संतोष साह, ग्राम समानी वार्ड संख्या 7, थाना जलई, जिला सहरसा का निवासी था। परिजनों के अनुसार 9 मई को आशीष अपने घर के सामने अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रही एक मोटरसाइकिल ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भयावह था कि मासूम की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

परिवार का आरोप है कि मोटरसाइकिल चला रहा युवक संदीप सदा नशे की हालत में था और दुर्घटना के तुरंत बाद घटनास्थल से फरार हो गया। ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह भागने में सफल रहा। बाद में मामले की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर लिया और मामला दर्ज किया।

हालांकि घटना के कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते सख्त कार्रवाई करती तो आरोपी अब तक गिरफ्तार हो चुका होता। उनका आरोप है कि मामले में कार्रवाई की गति बेहद धीमी है, जिससे न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है।

मृतक के नाना ने भावुक होकर कहा कि यह केवल सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक परिवार की दुनिया उजड़ जाने का मामला है। उन्होंने कहा कि ढाई साल के मासूम की मौत ने पूरे परिवार को अंदर से तोड़ दिया है। जब तक आरोपी को गिरफ्तार कर कानून के अनुसार सजा नहीं दी जाती, तब तक परिवार को न्याय नहीं मिल सकता।

परिजनों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक सहायता और सरकारी मुआवजे की भी मांग की है, ताकि बच्चे को खोने के बाद गहरे सदमे में डूबे परिवार को कुछ राहत मिल सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई नहीं होती तो अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं और आम जनता का कानून पर भरोसा कमजोर पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार किया जाए।

अब पूरा परिवार और गांव प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। लोगों का कहना है कि मासूम आशीष को तो वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन दोषी को सजा दिलाकर उसके परिवार को न्याय जरूर दिलाया जा सकता है। सहरसा का यह मामला अब केवल एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय, जवाबदेही और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का बड़ा सवाल बन चुका है।

जमीन उसी की, फिर कब्जा दिलाने की जल्दबाजी क्यों? पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

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जौनपुर जिले के मड़ियाऊ तहसील मेवडिया थाना होरैया, ग्राम पोस्ट रामनगर – 222103 में चल रहे भूमि विवाद ने अब गांव और आसपास के इलाके में बड़ा चर्चा का विषय बना लिया है। जिस जमीन और आवादी पर पीड़ित परिवार वर्षों से रह रहा है, उसी जमीन पर कथित तौर पर दूसरे पक्ष को कब्जा दिलाने की कोशिश को लेकर प्रशासन और पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन पर पहले से परिवार का कब्जा और निवास है, तो बिना किसी अंतिम न्यायिक आदेश के उन्हें हटाने या दूसरे पक्ष को कब्जा दिलाने की जल्दबाजी आखिर क्यों दिखाई जा रही है? यही सवाल अब गांव की चौपाल से लेकर स्थानीय प्रशासन तक गूंज रहा है।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यह केवल सामान्य राजस्व विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसमें निजी हित और प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी चर्चा हो रही है। गांव के लोगों के बीच यह बात तेजी से फैल रही है कि आखिर किस दबाव या किस नियत से पुलिस और कुछ राजस्व कर्मचारी एक पक्ष के समर्थन में दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राजस्व विवाद का निपटारा तहसील और न्यायालय के माध्यम से होना चाहिए, लेकिन यदि पुलिस सीधे मौके पर पहुंचकर दबाव का माहौल बनाती है तो इससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। यही कारण है कि अब गांव में यह चर्चा आम हो गई है कि कहीं न कहीं इस पूरे मामले में मिलीभगत या निजी स्वार्थ तो काम नहीं कर रहा।

पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर धमकी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। ऐसे में परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। गांव के कई लोग खुलकर यह कह रहे हैं कि यदि गरीब और कमजोर व्यक्ति की जमीन भी सुरक्षित नहीं रहेगी, तो प्रशासन पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा।

मामले ने अब सामाजिक और प्रशासनिक संवेदनशीलता का रूप ले लिया है। लोग मांग कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाए और जब तक कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट न हो, तब तक किसी भी पक्ष को जबरन कब्जा दिलाने की कार्रवाई रोकी जाए।

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