Monday, July 6, 2026
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125 से अधिक प्रमाणपत्रों वाले ठेकेदार रमेशचंद्र चारपोटा ने बांसवाड़ा में काम का अवसर मांगा

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बांसवाड़ा। आनंदपुरी थाना क्षेत्र बागीदौरा के रतनपुरा निवासी रमेशचंद्र चारपोटा ने बांसवाड़ा जिले में निर्माण कार्यों में अवसर दिए जाने की मांग की है। रमेशचंद्र वर्तमान में राजकोट गुजरात में कंस्ट्रक्शन कार्य से जुड़े हुए हैं और ब्रिज, पुलिया, सड़क, नहर, ग्राउटिंग तथा अन्य निर्माण कार्यों का अनुभव रखते हैं।

रमेशचंद्र चारपोटा के पास ऑल इंडिया ए ग्रेड कॉन्ट्रैक्टर का लाइसेंस (पंजीकरण संख्या 20726019000037) है। उन्होंने बताया कि उनके पास कारखानों, ब्रिज, पुलिया और महानगर पालिका, कॉलेज, स्कूल से जुड़े निर्माण कार्यों के 125 से अधिक प्रमाणपत्र हैं। इसके अलावा पुलियों की जांच और तकनीकी निरीक्षण से संबंधित प्रमाणपत्र भी उनके पास मौजूद हैं।

रमेशचंद्र का कहना है कि यदि उन्हें बांसवाड़ा जिले में ठेकेदारी का अवसर मिलता है तो वे पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ विकास कार्य करना चाहते हैं। उनका उद्देश्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करना और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए सकारात्मक प्रयास करना है। उन्होंने संबंधित विभागों से योग्य और अनुभवी लोगों को अवसर देने की अपील की है।

श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के 100 साल, रजत शर्मा बोले– SRCC ने मुझे अरुण जेटली जैसा दोस्त दिया

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श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के 100वें वार्षिक दिवस समारोह में इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने अपने कॉलेज के दिनों को याद किया। इस दौरान उन्होंने अरुण जेटली के साथ बिताए दोस्ती के पलों को भी शेयर किया।इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर इन चीफ रजत शर्मा श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के 100वें वार्षिक दिवस समारोह में शामिल हुए जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। इस दौरान रजत शर्मा ने अपने कॉलेज के दिनों को याद किया। साथ ही श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में एडमिशन के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात और उनके साथ बिताए दोस्ती के पलों को शेयर किया।

‘मैं आज जो कुछ भी हूं, वो SRCC की वजह से हूं’
इस मौके पर इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ रजत शर्मा ने कहा, ”मैं आज जो कुछ भी हूं श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की वजह से ही हूं। इस 100 साल के सफर मे मेरा रिश्ता 53 साल का है। इसी ऑडिटोरियम मे कितनी बार कम्पटीशन मे भाग लिया, अवॉर्ड भी जीते।”

रजत शर्मा की कुछ यूं हुई थी अरुण जेटली से पहली मुलाकात
अरुण जेटली के साथ हुई अपनी मुलाकात को याद करते हुए रजत शर्मा ने कहा, मुझे आज भी याद है जब कॉलेज मे मेरा पहला दिन था। मैं गरीब परिवार से था, एक-एक रुपये गिनकर फीस दे रहा था। 3 रुपये कम पड़ गए फिर पीछे से एक लड़का व्हाइट शर्ट व्हाइट पैंट पहने हुए आगे आया। अपनी जेब से 5 रुपये निकले और मेरी फीस भर दी, वो अरुण जेटली थे। फिर उन्होंने मुझे चाय पिलाई और मेरे बारे में पूछा। SRCC ने अरुण जेटली से मुझे मिलवाया।

आगे उन्होंने कहा, ”आज हमारे चीफ गेस्ट तरणजीत सिंह संधू जी यहां आये हैं, ये हमारा सौभाग्य है। आज भी अमेरिका में डिप्लोमेसी का नाम तरनजीत संधू जी है। संधू जी से भी अरुण जी के जरिए ही हम मिले। न्यूयॉर्क में जब अरुण जी की तबीयत खराब थी तब हम वहां इलाज के दौरान मिले थे। SRCC हमारे दिल में है। मेरी तबीयत ठीक नहीं थी लेकिन मुझे आना था तो मैं डॉक्टप से बात करके आया हूं, अभी मेरी तबीयत ठीक है। SRCC के स्टूडेंटस जहां जाएंगे, अच्छा करेंगे। वहा कोई जरूर होगा जो अरुण जेटली की तरह आपके कंधे पर हाथ रखेगा।”

दिल्ली के LG तरणजीत सिंह संधू ने क्या कहा?
कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने भी शिरकत की। उन्होंने अपने ऑफिशियल X हैंडल पर एक पोस्ट डाला, जिसमें लिखा है, ”श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (SRCC) के 100वें वार्षिक दिवस समारोह का हिस्सा बनकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। शताब्दी एक असाधारण पड़ाव है, जो निरंतरता, जुझारूपन और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाता है। सर श्री राम द्वारा 1926 में स्थापित इस प्रतिष्ठित संस्थान ने नेताओं, नीति-निर्माताओं, उद्यमियों और पेशेवरों की कई पीढ़ियों को तैयार किया है, जिन्होंने भारत और दिल्ली के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। SRCC परिसर में दोबारा आना और अपनी पिछली यात्राओं -एक छात्र के तौर पर और फिर 2016 में- को याद करना मेरे लिए विशेष रूप से सार्थक अनुभव रहा।”

गोरखपुर में दो घटनाओं से हड़कंप: महिला घायल, घर में घुसकर हमला और तोड़फोड़ का आरोप

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गोरखपुर। जिले के खजनी क्षेत्र में बीते दिनों दो अलग-अलग घटनाओं ने इलाके में सनसनी फैला दी। एक ओर तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, वहीं दूसरी ओर एक परिवार के घर में घुसकर मारपीट और तोड़फोड़ करने का मामला सामने आया है। दोनों मामलों में पीड़ितों ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। पहली घटना 13 अप्रैल 2026 की बताई जा रही है। ग्राम गौरापार निवासी प्रियंका प्रजापति सुबह करीब 7 बजे अपने काम से जा रही थीं, तभी रास्ते में तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में उनका हाथ टूट गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। पीड़िता का आरोप है कि वाहन चालक ने इलाज का खर्च उठाने का वादा किया था, लेकिन अब वह मुकर गया है। इलाज में अब तक काफी खर्च हो चुका है और आगे भी खर्च होने की संभावना है। दूसरी घटना 16 अप्रैल 2026 की रात करीब 8 बजे की है। रामकरन बेलदार, निवासी ग्राम गौरापार (पोस्ट सरया तिवारी, ब्लॉक खजनी), ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोगों ने आपसी रंजिश के चलते उनके घर पर हमला कर दिया। आरोप है कि हमलावरों ने घर में घुसकर पत्थरों से हमला किया, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इस दौरान परिवार के कई सदस्य घायल हो गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि हमलावरों ने घर में जमकर तोड़फोड़ की और मोबाइल फोन समेत अन्य सामान भी नुकसान पहुंचाया, साथ ही कुछ सामान लेकर फरार हो गए। किसी तरह परिवार के लोगों ने अपनी जान बचाई, लेकिन घटना के बाद से पूरे परिवार में दहशत का माहौल बना हुआ है। दोनों ही मामलों में पीड़ितों ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, पीड़ितों को आर्थिक सहायता दी जाए और परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के सितारगंज क्षेत्र के मलपुरी गांव में रहने वाले गज्जन सिंह की जिंदगी इन दिनों बेहद कठिन दौर से गुजर रही है

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करीब 55 वर्षीय गज्जन सिंह अविवाहित हैं और लंबे समय से अकेले ही अपना जीवन यापन कर रहे हैं। उनका अपना कोई स्थायी घर नहीं है, इसलिए जहां उन्हें मजदूरी मिलती है, वहीं रहकर गुजारा करते हैं।

गज्जन सिंह स्वाभिमानी व्यक्ति हैं और कभी किसी से भीख नहीं मांगते। अपनी मेहनत की कमाई से ही उन्होंने हमेशा अपना जीवन चलाया। लेकिन पिछले दो से तीन महीनों से उनकी स्थिति पूरी तरह बदल गई है। मजदूरी के दौरान उनके हाथ और पैर में गंभीर चोट लग गई, जिससे वे चलने फिरने और काम करने में असमर्थ हो गए हैं।

 

इलाज के लिए डॉक्टरों ने उनके हाथ के फ्रैक्चर का खर्च लगभग एक लाख रुपये बताया है, जो उनके लिए जुटा पाना असंभव है। आर्थिक तंगी के चलते उनका इलाज अधूरा पड़ा हुआ है और अब उनके सामने रोजमर्रा के खर्चों का संकट भी खड़ा हो गया है।

गज्जन सिंह की यह स्थिति न केवल उनकी व्यक्तिगत परेशानी को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जरूरत के समय एक मेहनतकश व्यक्ति किस तरह असहाय हो सकता है। उन्होंने सरकार और समाज से अपील की है कि उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि उनका इलाज हो सके और वे फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गज्जन सिंह जैसे स्वाभिमानी और मेहनती व्यक्ति की मदद के लिए प्रशासन और समाज दोनों को आगे आना चाहिए, ताकि उनकी जिंदगी फिर से पटरी पर लौट सके।

सेकेंड हैंड ट्रक दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप: 6.44 लाख रुपये और दो खाली चेक लेने के बाद गायब, पीड़ित ने थाने में लगाई गुहार

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पटना/बिहटा। बिहार के पटना जिले के बिहटा थाना क्षेत्र से सेकेंड हैंड ट्रक खरीदने के नाम पर लाखों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। पश्चिम चम्पारण जिले के निवासी एक ट्रक चालक ने आरोप लगाया है कि ट्रक दिलाने का झांसा देकर उससे 6 लाख 44 हजार रुपये और दो खाली चेक ले लिए गए, लेकिन न तो ट्रक दिया गया और न ही पैसे वापस किए गए। मामले को लेकर पीड़ित ने थाना बिहटा में शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

पीड़ित कृष्ण मोहन साह, उम्र लगभग 37 वर्ष, पिता स्वर्गीय रामानंद साह, निवासी रेखा सुन्दर पट्टी टोला मुरतीया, वार्ड नंबर 06, थाना नौतन, जिला पश्चिम चम्पारण के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि वह पेशे से ट्रक चालक हैं और मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। बेहतर रोज़गार की उम्मीद में उन्होंने सेकेंड हैंड ट्रक खरीदने का फैसला किया था ताकि खुद की गाड़ी चलाकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकें।

पीड़ित के अनुसार 23 जनवरी 2025 को वह पटना जिले के बिहटा में स्थित गीतांजली एसोसिएट नामक स्थान पर ट्रक खरीदने पहुंचे थे। वहां उनकी मुलाकात विकास कुमार सिंह नामक व्यक्ति से हुई, जिसने खुद को ट्रक का डीलर बताते हुए कई गाड़ियों का सौदा कराने का भरोसा दिलाया। बातचीत के दौरान विकास कुमार सिंह ने बताया कि एक बारह चक्का ट्रक की कुल कीमत 12 लाख 90 हजार रुपये है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर तुरंत आधी रकम जमा कर दी जाए और दो खाली चेक दे दिए जाएं तो गाड़ी के सारे कागजात तैयार कराकर उसे खरीदार के नाम ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

कृष्ण मोहन साह का आरोप है कि विकास कुमार सिंह की बातों पर भरोसा कर उन्होंने अपने साथ आए गांव के लोगों की मौजूदगी में अपने मोबाइल नंबर से ऑनलाइन माध्यम से 6 लाख 44 हजार रुपये विकास कुमार सिंह के मोबाइल नंबर पर ट्रांसफर कर दिए। साथ ही दो खाली चेक भी उन्हें दे दिए। इसके बाद विकास कुमार सिंह उन्हें अलग-अलग जगहों पर ट्रक दिखाने के लिए ले जाने लगे।

पीड़ित का कहना है कि पहले उन्हें शेरघाटी ले जाकर एक ट्रक दिखाया गया, लेकिन बाद में खुद ही कहा गया कि यह गाड़ी ठीक नहीं है। इसके बाद उन्हें पटना के विक्रम इलाके में ले जाया गया जहां एक अन्य ट्रक दिखाया गया, लेकिन वह चौथे मालिक की गाड़ी थी और उस पर फाइनेंस भी नहीं हुआ था, इसलिए वह सौदा भी नहीं हो पाया। इसके बाद फिर से उन्हें बिहटा लाकर तीसरी गाड़ी दिखाई गई जो उन्हें ठीक लगी। जब उन्होंने उस गाड़ी के कागजात तैयार करने को कहा तो कुछ कागजी प्रक्रिया कराई गई, लेकिन बाद में उन्हें टालमटोल कर दिया गया।

पीड़ित का आरोप है कि समय बीतने के बावजूद न तो ट्रक उनके नाम ट्रांसफर किया गया और न ही उनके पैसे वापस किए गए। अब जब वह पैसे या गाड़ी की मांग करते हैं तो उन्हें बहाने बनाकर टाल दिया जाता है। इससे वह आर्थिक रूप से काफी परेशान हो गए हैं और खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

कृष्ण मोहन साह ने थाना बिहटा में आवेदन देकर पूरे मामले की जांच करने और आरोपी के खिलाफ हेराफेरी और धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी मेहनत की कमाई इस तरह से चली गई है और यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेकेंड हैंड वाहनों की खरीद-फरोख्त में कई बार दलाल और एजेंट भोले-भाले लोगों को झांसा देकर ठगी कर लेते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है ताकि भविष्य में किसी और के साथ इस तरह की घटना न हो।

ट्रेन में चोरी के बाद कोच अटेंडेंट पर उतारा गुस्सा; नरसिंहपुर के युवक से मारपीट का आरोप, यात्रियों ने किया समर्थन

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नरसिंहपुर। ट्रेन में हुई चोरी की घटना के बाद एक कोच अटेंडेंट के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के रहने वाले विकास कुमार ने आरोप लगाया है कि ट्रेन में चोरी की घटना के बाद कुछ अधिकारियों ने बिना पूछताछ किए ही उनके साथ मारपीट कर दी। घटना 20 अप्रैल की रात करीब 2 से 3 बजे के बीच की बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार विकास कुमार ट्रेन नंबर 07019 में कोच अटेंडेंट के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें दो कोचों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी दौरान रात में ट्रेन में किसी यात्री के सामान चोरी होने की घटना सामने आई। विकास का आरोप है कि चोरी की सूचना मिलने के बाद कुछ अधिकारी मौके पर पहुंचे और बिना पूरी बात जाने उनसे सवाल-जवाब करने लगे।

विकास का कहना है कि जब उन्होंने बताया कि कोच अटेंडेंट का काम यात्रियों की सुविधा देखना होता है, चोरी की जांच करना उनकी जिम्मेदारी में नहीं आता, तब कथित तौर पर अधिकारियों ने उन्हें थप्पड़ और लात मारकर प्रताड़ित किया। इस दौरान उनका मोबाइल फोन भी गिर गया।

घटना के दौरान ट्रेन में मौजूद कुछ यात्रियों ने भी विकास के समर्थन में आवाज उठाई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बिना जांच के किसी कर्मचारी के साथ इस तरह का व्यवहार करना गलत है। यात्रियों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

विकास कुमार का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत भी की है, लेकिन अभी तक कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। उनके समर्थन में एक वकील भी सामने आए हैं, जो इस पूरे मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई की बात कर रहे हैं।

मामले को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या चोरी की घटना के बाद दबाव में आकर एक कर्मचारी को निशाना बनाया गया। फिलहाल इस घटना की जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

कुचामन सिटी: सैनिक परिवार पर पुलिसिया अत्याचार, अवैध कब्जे और मारपीट के गंभीर आरोप

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डीडवाना-कुचामन।

कुचामन सिटी में भारतीय सेना के सेवारत सैनिक हरिओम कुमावत और उनके परिवार पर अवैध कब्जा, अतिक्रमण और पुलिसिया उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। हरिओम कुमावत ने जिला मजिस्ट्रेट पुखराज सेन (IAS) को शिकायत पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

पड़ोसियों ने घर की जमीन पर किया अवैध कब्जा

हरिओम कुमावत के अनुसार, उनके पड़ोसी भैरूलाल, कैलाश चंद, सुरेश, गोपाल, चंदा देवी, संगीता, सुनिता, दुर्गा, संतोष और सुमन ने मिलकर उनके मकान के 165 वर्ग फीट क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर लिया। आरोपियों ने जबरन एक कमरा, बालकनी, दरवाजा और जगला बना लिया। इतना ही नहीं, सार्वजनिक रास्ते को भी अवरुद्ध कर सीसीटीवी कैमरे तक लगा दिए, जिससे सैनिक परिवार की निजता और सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

नगर परिषद और पुलिस पर मिलीभगत के आरोप

सैनिक ने आरोप लगाया कि नगर परिषद के कुछ अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज और पट्टे बनवाकर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करवा दिया। जब परिवार ने विरोध किया, तो कुचामन सिटी पुलिस ने अतिक्रमणकारियों का साथ दिया और सैनिक परिवार को ही प्रताड़ित करने लगी।

पुलिस ने घर में घुसकर किया हमला, बुजुर्गों और बच्चों पर अत्याचार

हरिओम कुमावत का आरोप है कि थानाधिकारी सुरेश कुमार चौधरी, पुलिसकर्मी बनवारी लाल, लाल सिंह, बजरंग सिंह, छोटूराम खिचड़ (FC No. 877) ने उनके घर में घुसकर मारपीट की।

महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को बेरहमी से पीटा गया।

संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।

हरिओम और उनके पिता को अवैध रूप से हिरासत में लेकर 41 घंटे तक टॉर्चर किया गया।

सीसीटीवी कैमरों के कनेक्शन काट दिए गए ताकि पुलिसिया ज्यादती के सबूत मिटाए जा सकें।

झूठे मुकदमों की साजिश, बलात्कार जैसे संगीन आरोपों में फंसाने की धमकी

हरिओम कुमावत का कहना है कि जब भी वे न्याय के लिए आवाज उठाते हैं, तो पुलिस उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर देती है। यहां तक कि पड़ोसी उन पर सामूहिक बलात्कार जैसे झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।

2020 में हुआ था अतिक्रमण हटाने का आदेश, अब तक नहीं हुई कार्रवाई

एसडीएम कुचामन सिटी ने 6 नवंबर 2020 को अवैध कब्जा हटाने का आदेश दिया था। नगर परिषद ने केवल 10% कब्जा हटाया, लेकिन 90% अतिक्रमण अब भी बरकरार है।

न्याय की गुहार, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग

हरिओम कुमावत ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, मानवाधिकार आयोग, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, डीजीपी, आईजी, बार काउंसिल और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायतें भेजी हैं। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने और अवैध कब्जा हटाने की मांग की है।

“एक सैनिक देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देता है, लेकिन जब वह और उसका परिवार ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो यह पूरे देश के लिए शर्मनाक बात है।” – हरिओम कुमावत

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

चार साल पहले हुई शादी, छह महीने बाद मायके गई पत्नी; अब दूसरे युवक के साथ रहने का आरोप, पति ने पुलिस से लगाई गुहार

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बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में वैवाहिक विवाद का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दादरा एंड नगर हवेली निवासी एक युवक ने अपनी पत्नी पर उसे छोड़कर दूसरे युवक के साथ रहने का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की है। युवक का कहना है कि शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी उसे छोड़कर चली गई और अब बैतूल जिले के एक गांव में दूसरे व्यक्ति के साथ रह रही है।

जानकारी के अनुसार आवेदक राजीव विश्वास ने थाना कोतवाली क्षेत्र की पुलिस चौकी में आवेदन देकर बताया कि वह दादरा एंड नगर हवेली में किराने की दुकान चलाता है। करीब चार साल पहले उसकी शादी रीमा विश्वास नाम की युवती से हुई थी। शादी के बाद रीमा लगभग छह महीने तक उसके साथ रही, लेकिन बाद में अपने मायके पश्चिम बंगाल चली गई।

राजीव का आरोप है कि पत्नी के अचानक चले जाने के बाद उसने अपने नजदीकी थाने में उसके गुम होने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। कुछ समय बाद उसे सूचना मिली कि उसकी पत्नी ने किसी सागर विश्वास नाम के युवक के साथ शादी कर ली है और वह मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के ग्राम भडूस में उसके साथ रह रही है।

आरोप के अनुसार इस जानकारी के बाद राजीव बैतूल पहुंचा और ग्राम भडूस में उस स्थान पर गया, जहां उसकी पत्नी रह रही थी। वहां उसने पत्नी से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर पत्नी ने उससे बदतमीजी से बात की और साफ तौर पर कहा कि वह अब सागर विश्वास के साथ ही रह रही है।

राजीव का कहना है कि जब उसने पत्नी से पूछा कि वह दूसरे व्यक्ति के साथ क्यों रह रही है, तो रीमा ने जवाब दिया कि वही उसका पति है और वह अब कहीं नहीं जा सकती क्योंकि वह गर्भवती है। इसके बाद राजीव ने डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश दी।

पीड़ित का कहना है कि वह इस पूरे मामले में न्याय चाहता है और पुलिस से उचित कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस को दी गई शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।

आवास योजना से बना घर, लेकिन नहीं मिली बुनियादी सुविधाएं: रास्ता बंद कर बिजली-पानी भी रोका, पीड़िता ने लगाई न्याय की गुहार

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मुंगेर (बिहार)। जिले के जमालपुर थाना क्षेत्र के छोटी केशोपुर वार्ड संख्या 32 से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक अनुसूचित जनजाति परिवार ने आरोप लगाया है कि दबंग पड़ोसियों द्वारा उनके घर तक आने-जाने का रास्ता बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं, बिजली, पानी और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी परिवार को वंचित कर दिया गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनका घर सरकार की आवास योजना के तहत बना है, लेकिन रास्ता बंद होने के कारण वे किसी भी सरकारी सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

पीड़िता संगीता देवी के अनुसार उनके परिवार की जमीन वर्षों पहले उनके दादा-दादी द्वारा खरीदी गई थी, जिसका विवरण सर्वे शीट संख्या 113, प्लॉट नंबर 12770, तौजी 416, थाना 22, मौजा केशोपुर में दर्ज है। इसी जमीन पर उनका घर बना हुआ है। वर्ष 2016 में नगर परिषद के माध्यम से आवास योजना के तहत उनके परिवार को घर निर्माण की स्वीकृति भी मिली थी और उसी आधार पर उन्होंने अपना घर बनवाया। लेकिन घर बनने के बावजूद आज तक बिजली, पानी, सड़क और नाली जैसी सुविधाएं उनके दरवाजे तक नहीं पहुंच सकीं।

पीड़िता का आरोप है कि वर्ष 2015 से ही कुछ दबंग पड़ोसियों ने उनके घर तक आने वाले दोनों रास्तों पर अतिक्रमण कर दिया। उनके घर के पश्चिम की ओर नगर पालिका की गली थी, जबकि पूर्व और दक्षिण दिशा में वर्षों से एक पैदल रास्ता था जो मुख्य सड़क तक जाता था। आरोप है कि पड़ोसियों ने पहले सहमति से तीन-तीन फीट रास्ता छोड़ने की बात कही थी, लेकिन बाद में दोनों रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया। इसके कारण परिवार का घर चारों तरफ से घिर गया है और किसी भी प्रकार की सरकारी सुविधा वहां तक नहीं पहुंच पा रही है।

महिला ने आरोप लगाया कि पड़ोसी विरेन्द्र तांती, जो कि पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त दरोगा हैं, और ललन तांती ने मिलकर रास्ते को पूरी तरह से अतिक्रमित कर दिया है। पीड़िता का कहना है कि इन लोगों की स्थानीय स्तर पर पकड़ और प्रभाव होने के कारण उनके द्वारा दिए गए कई आवेदन के बावजूद अब तक प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

पीड़िता के अनुसार हाल ही में ललन तांती द्वारा अंचल कार्यालय में जमीन की नापी के लिए आवेदन दिया गया है, जिसके आधार पर उन्हें 21 अप्रैल 2026 को नोटिस भी मिला है। महिला का आरोप है कि नापी के नाम पर अतिक्रमित रास्ते को स्थायी रूप से बंद करने की कोशिश की जा रही है, जिससे उनका परिवार पूरी तरह से घर में कैद हो जाएगा।

इस पूरे विवाद के बीच पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि अतीत में वार्ड पार्षद और उनके सहयोगियों द्वारा उनके परिवार के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार की घटनाएं भी हो चुकी हैं। उनका कहना है कि पहले भी उनके घर में घुसकर मारपीट की गई थी और इसकी शिकायत जमालपुर थाने में दर्ज कराई गई थी, लेकिन प्रभावशाली लोगों के कारण मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।

संगीता देवी का कहना है कि उनका घर सरकारी आवास योजना के तहत बना होने के बावजूद आज तक वहां बिजली का मीटर नहीं लग पाया, पानी की पाइपलाइन नहीं पहुंची और न ही नाली या सड़क की सुविधा मिल सकी। उनका परिवार रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी भारी कठिनाइयों का सामना कर रहा है।

पीड़िता ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पहले उनके घर तक आने-जाने का रास्ता खुलवाया जाए, ताकि बिजली, पानी और अन्य सरकारी सुविधाएं उनके घर तक पहुंच सकें। साथ ही उन्होंने अतिक्रमण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी अपील की है।

बक्सर में गरीब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: पत्नी की गंभीर बीमारी, फिर पति-बेटे का सड़क हादसा; इलाज के लिए 6 लाख रुपये की मदद की अपील

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बक्सर (बिहार)। बक्सर जिले में एक गरीब परिवार पर एक के बाद एक मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। पहले पत्नी की गंभीर बीमारी और महंगे इलाज ने परिवार को आर्थिक रूप से तोड़ दिया, वहीं इसी बीच पति और बेटे का सड़क हादसा हो जाने से परिवार पूरी तरह संकट में आ गया है। अब पीड़ित परिवार ने समाज और प्रशासन से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार जिले के रहने वाले प्रदेशी चौधरी की पत्नी पालनी देवी की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। शुरुआत में उनके पैर में गंभीर चोट लगने के बाद हालत बिगड़ती चली गई। इलाज के लिए पहले उन्हें दिनारा और फिर बक्सर के अस्पताल में दिखाया गया, लेकिन स्थिति गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें आगे इलाज के लिए बनारस रेफर कर दिया।

बनारस में जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि पालनी देवी की आंत में छेद हो गया है और तुरंत ऑपरेशन करना पड़ेगा। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए करीब 5 लाख रुपये का खर्च बताया और खून की भी जरूरत बताई। परिवार और रिश्तेदारों ने किसी तरह छह यूनिट खून की व्यवस्था की, लेकिन ऑपरेशन के बाद भी उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। करीब तीन महीने बाद डॉक्टरों को दूसरा ऑपरेशन करना पड़ा, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया।

इसी बीच एक और बड़ा हादसा हो गया। इलाज के दौरान ही प्रदेशी चौधरी और उनके बेटे का सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो जाना परिवार के लिए नई मुसीबत बन गया। दोनों को पहले मालिया बाग स्थित नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत नाजुक होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें सासाराम रेफर कर दिया। सासाराम में भी स्थिति में सुधार न होने पर डॉक्टरों ने उन्हें बनारस भेज दिया।

बनारस में जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि प्रदेशी चौधरी के सिर में गंभीर चोट लगी है और दिमाग पर असर पड़ा है। इलाज के लिए भारी रकम की जरूरत बताई गई। परिवार ने अब तक अपनी जमा-पूंजी और उधार लेकर इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन लगातार इलाज और हादसों के कारण करीब 6 लाख रुपये से अधिक का खर्च हो चुका है और अब आगे इलाज के लिए पैसे जुटा पाना मुश्किल हो गया है।

परिवार के लोगों का कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण अब इलाज कराना बेहद मुश्किल हो गया है। ऐसे में उन्होंने समाजसेवियों, प्रशासन और आम लोगों से मदद की अपील की है, ताकि परिवार के घायलों का इलाज जारी रह सके और उनकी जान बचाई जा सके।