Monday, July 6, 2026
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बक्सर में गरीब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: पत्नी की गंभीर बीमारी, फिर पति-बेटे का सड़क हादसा; इलाज के लिए 6 लाख रुपये की मदद की अपील

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बक्सर (बिहार)। बक्सर जिले में एक गरीब परिवार पर एक के बाद एक मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। पहले पत्नी की गंभीर बीमारी और महंगे इलाज ने परिवार को आर्थिक रूप से तोड़ दिया, वहीं इसी बीच पति और बेटे का सड़क हादसा हो जाने से परिवार पूरी तरह संकट में आ गया है। अब पीड़ित परिवार ने समाज और प्रशासन से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार जिले के रहने वाले प्रदेशी चौधरी की पत्नी पालनी देवी की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। शुरुआत में उनके पैर में गंभीर चोट लगने के बाद हालत बिगड़ती चली गई। इलाज के लिए पहले उन्हें दिनारा और फिर बक्सर के अस्पताल में दिखाया गया, लेकिन स्थिति गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें आगे इलाज के लिए बनारस रेफर कर दिया।

बनारस में जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि पालनी देवी की आंत में छेद हो गया है और तुरंत ऑपरेशन करना पड़ेगा। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए करीब 5 लाख रुपये का खर्च बताया और खून की भी जरूरत बताई। परिवार और रिश्तेदारों ने किसी तरह छह यूनिट खून की व्यवस्था की, लेकिन ऑपरेशन के बाद भी उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। करीब तीन महीने बाद डॉक्टरों को दूसरा ऑपरेशन करना पड़ा, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया।

इसी बीच एक और बड़ा हादसा हो गया। इलाज के दौरान ही प्रदेशी चौधरी और उनके बेटे का सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो जाना परिवार के लिए नई मुसीबत बन गया। दोनों को पहले मालिया बाग स्थित नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत नाजुक होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें सासाराम रेफर कर दिया। सासाराम में भी स्थिति में सुधार न होने पर डॉक्टरों ने उन्हें बनारस भेज दिया।

बनारस में जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि प्रदेशी चौधरी के सिर में गंभीर चोट लगी है और दिमाग पर असर पड़ा है। इलाज के लिए भारी रकम की जरूरत बताई गई। परिवार ने अब तक अपनी जमा-पूंजी और उधार लेकर इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन लगातार इलाज और हादसों के कारण करीब 6 लाख रुपये से अधिक का खर्च हो चुका है और अब आगे इलाज के लिए पैसे जुटा पाना मुश्किल हो गया है।

परिवार के लोगों का कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण अब इलाज कराना बेहद मुश्किल हो गया है। ऐसे में उन्होंने समाजसेवियों, प्रशासन और आम लोगों से मदद की अपील की है, ताकि परिवार के घायलों का इलाज जारी रह सके और उनकी जान बचाई जा सके।

दिल्ली में आर्य समाज मंदिर में प्रेम विवाह, एक महीने बाद युवती को परिजनों ने ले जाकर दी जान से मारने की धमकी

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छपरा जिले के थाना मसरख क्षेत्र से जुड़े एक युवक-युवती के प्रेम विवाह का मामला अब गंभीर विवाद का रूप लेता जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नीरज कुमार, जो कि पिता समजीत मांझी के निवासी हैं, ने 28 फरवरी 2026 को दिल्ली स्थित एक आर्य समाज मंदिर में रानी कुमारी (19 वर्ष), पिता राजू मांझी, ग्राम पद्ममोल, जिला छपरा के साथ अपनी मर्जी से शादी की थी। बताया जा रहा है कि दोनों पिछले तीन वर्षों से एक-दूसरे को जानते थे और आपसी सहमति से विवाह किया था।

शादी के बाद दोनों करीब एक महीने तक हरियाणा में साथ रह रहे थे। इसी दौरान एक दिन जब नीरज कुमार ड्यूटी पर गए हुए थे, तभी रानी कुमारी के चाचा धनंजय कुमार कुछ पुलिसकर्मियों के साथ वहां पहुंचे और कथित रूप से युवती को जबरदस्ती अपने साथ लेकर चले गए। इस घटना के बाद से नीरज और रानी के बीच कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।

नीरज कुमार का आरोप है कि लड़की के परिजन उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। उनका कहना है कि “जहां मिलोगे, वहीं खत्म कर देंगे” जैसी धमकियां दी जा रही हैं, जिसके कारण वह अपने घर लौटने से भी डर रहे हैं। नीरज का दावा है कि उनके पास शादी से जुड़े सभी प्रमाण मौजूद हैं, जिनमें फोटो और वीडियो शामिल हैं, जो यह साबित करते हैं कि यह विवाह दोनों की सहमति से हुआ था।

नीरज कुमार ने यह भी कहा कि दोनों बालिग हैं और उन्होंने अपनी इच्छा से विवाह किया है, लेकिन लड़की के परिजन इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और जबरदस्ती अलग करने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल इस पूरे मामले ने कानून-व्यवस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या दोनों को न्याय मिल पाता है।

दुबई भेजने के नाम पर बेटे से धोखा, चार महीने से विदेश की जेल में बंद: बेबस पिता ने लगाई मदद की गुहार

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मुंबई/24 परगना। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बसंती थाना क्षेत्र के होगलदुरी गांव से एक बेहद मार्मिक मामला सामने आया है, जहां एक गरीब और असहाय पिता ने अपने बेटे को बेहतर भविष्य देने के लिए विदेश भेजा, लेकिन अब वही बेटा पिछले चार महीनों से दुबई की जेल में बंद है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और पिता ने मदद की गुहार लगाई है।

पीड़ित हलीम सरदार ने बताया कि उनका पुत्र अ.स. रकीब कुरान का हाफ़िज़ है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण बेटी की शादी के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया था। इसी मजबूरी में उन्होंने बेटे को नौकरी के लिए दुबई भेजने का फैसला किया।

हलीम सरदार के अनुसार, बरुईपुर निवासी एक एजेंट हाफिजुर रहमान ने उनके बेटे को दुबई में अच्छी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। एजेंट ने सुनहरे भविष्य के सपने दिखाकर परिवार से संपर्क किया और विदेश भेजने की पूरी व्यवस्था करने का दावा किया। लेकिन दुबई पहुंचने के बाद बेटे को वह नौकरी नहीं मिली, जिसका वादा किया गया था।

पिता का आरोप है कि बेटे को वहां प्रताड़ित किया गया और जब उसने कई बार भारत लौटने की इच्छा जताई तो कंपनी ने उसे वापस आने की अनुमति नहीं दी। इतना ही नहीं, कंपनी की मालकिन ने फोन पर धमकी दी कि यदि वह वापस कंपनी में काम करने नहीं लौटा, तो उसके खिलाफ ऐसा मामला दर्ज कराया जाएगा कि वह कभी भारत नहीं लौट सकेगा।

बताया जा रहा है कि कंपनी से परेशान होकर रकीब ने कहीं और काम करना शुरू कर दिया ताकि वह घर लौटने के लिए पैसे जुटा सके। इसी बीच एयरपोर्ट पर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। तब से लगभग चार महीने बीत चुके हैं और वह जेल में बंद है।

परिवार का कहना है कि उन्हें यह भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही कि बेटे पर किस मामले में कार्रवाई की गई है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे कानूनी सहायता लेने में भी असमर्थ हैं। गांव में परिवार के लोग लगातार रो रहे हैं और बेटे की सलामती को लेकर गहरी चिंता में हैं।

हलीम सरदार ने भावुक अपील करते हुए कहा कि वह पूरी तरह टूट चुके हैं और उन्हें अपने बेटे को छुड़ाने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा। उन्होंने समाजसेवियों, प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मदद की मांग की है ताकि उनका बेटा सकुशल भारत लौट सके।

यह मामला एक बार फिर विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर एजेंटों द्वारा किए जा रहे कथित धोखाधड़ी के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े करता है। गरीब परिवार बेहतर रोजगार की उम्मीद में अपने बच्चों को विदेश भेजते हैं, लेकिन कई बार वे ठगी और शोषण का शिकार हो जाते हैं।

परिवार ने संबंधित दस्तावेज और कागजात भी उपलब्ध कराए हैं तथा मामले की निष्पक्ष जांच और बेटे की रिहाई की मांग की है।

पति की हैवानियत से दहली महिला की जिंदगी: लव मैरिज के बाद लगातार अत्याचार, गर्भवती पत्नी ने लगाई न्याय की गुहार

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गौतम बुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश)। प्रेम विवाह के सपने दिखाकर साथ ले जाने वाला पति अब एक महिला के लिए दर्द और अत्याचार का कारण बन गया है। रानी श्रीवास्तव नाम की महिला ने अपने पति राज पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता के अनुसार, साल 2017 में दोनों ने परिवार की मर्जी के खिलाफ लव मैरिज की थी, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उसके जीवन में अत्याचार का सिलसिला शुरू हो गया।

रानी श्रीवास्तव का कहना है कि 2019 में उनकी एक बेटी हुई, लेकिन इसके बावजूद पति का व्यवहार नहीं बदला। वह आए दिन मारपीट करता रहा। हालात इतने बिगड़ गए कि एक बार उसे इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसके मुंह से खून आने लगा। पीड़िता ने नजदीकी पुलिस चौकी में शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन वहां समझौता करवा दिया गया और आरोपी से माफी मंगवाकर मामला दबा दिया गया।

अब स्थिति और भी गंभीर हो गई है। महिला इस समय गर्भवती है और उसके पेट में पल रहा बच्चा भी उसी पति का बताया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा। पीड़िता का आरोप है कि उसका पति न सिर्फ उसे प्रताड़ित कर रहा है, बल्कि कई अन्य लड़कियों की जिंदगी भी बर्बाद कर चुका है। उसने दावा किया कि करीब 30 से ज्यादा लड़कियों को वह अपने झांसे में ले चुका है और अब एक नई लड़की रिया को भी फंसा लिया है।

पीड़िता ने प्रशासन, समाज और पुलिस से गुहार लगाई है कि आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उसे और अन्य महिलाओं को न्याय मिल सके। मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी आक्रोश बढ़ता नजर आ रहा है और लोग दोषी के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक महिलाएं घरेलू हिंसा और अत्याचार का शिकार होती रहेंगी और उन्हें न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।

 

जमीन विवाद में महिला और 11 साल के बेटे पर जानलेवा हमला, गरासे और चाकू से किया हमला; आरोपियों पर केस दर्ज

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पूर्वी चंपारण। पूर्वी चंपारण जिले के हरसिद्धि थाना क्षेत्र में जमीन विवाद को लेकर एक महिला और उसके नाबालिग बेटे पर जानलेवा हमले का मामला सामने आया है। आरोप है कि पड़ोसियों ने गरासे, चाकू, लोहे की रॉड और लाठी से लैस होकर महिला के घर पर हमला कर दिया, जिसमें महिला और उसका 11 वर्षीय बेटा गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के बाद भी उन्हें न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़‌ रहा है ।

पीड़िता मनदेया देवी (उम्र करीब 21 वर्ष), पति मंटू यादव, निवासी ग्राम कृतपुर मठिया वार्ड नंबर 9, थाना हरसिद्धि ने आरोप लगाया है कि 14 अप्रैल 2026 की शाम करीब 7:30 बजे वह अपने बच्चों के साथ घर के दरवाजे पर बैठी थी। इसी दौरान गांव के ही सिकंदर कुमार, मोहन यादव, जयपति देवी, टुनटुन यादव और संगीता देवी हथियारों से लैस होकर उनके दरवाजे पर पहुंचे और गाली-गलौज करने लगे।

पीड़िता के अनुसार जब उन्होंने गाली देने का विरोध किया तो आरोपियों ने कहा कि वे उनकी जमीन पर दीवार खड़ी कर रहे हैं और उन्हें रोकने का अधिकार नहीं है। जब मनदेया देवी ने जमीन को अपना बताते हुए विरोध किया तो सभी आरोपियों ने मिलकर उन पर हमला कर दिया। आरोप है कि मोहन यादव के कहने पर सिकंदर कुमार ने चाकू से उनके सिर पर वार कर दिया, जिससे उनका सिर फट गया और खून खून नाखून हो गई

महिला का आरोप है कि जब वह घायल होकर गिर गई तो टुनटुन यादव ने उसके बाल पकड़कर घसीटा, जिससे कमर और पीठ में गंभीर चोट आई और उसके कपड़े भी फट गए। इसी दौरान जयपति देवी ने लाठी से मारपीट की और अन्य आरोपियों ने भी लात-घूंसे से हमला किया।

घटना के दौरान जब महिला का 11 वर्षीय बेटा अंजेश कुमार अपनी मां को बचाने के लिए आया तो आरोप है कि टुनटुन यादव ने चाकू से उस पर हमला कर दिया, जिससे उसके दाहिने आंख के ऊपर गहरा जख्म हो गया और वह खून बहने के कारण बेहोश होकर गिर पड़ा। इसके बाद भी आरोपियों ने उसे लात-घूंसे से मारपीट कर घायल कर दिया।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान जयपति देवी ने उसके गले से करीब 50 हजार रुपये कीमत का सोने का मंगलसूत्र भी नोच लिया। शोर-शराबा सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह बीच-बचाव कर महिला और उसके बेटे को बचाया। दोनों को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरसिद्धि ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें सदर अस्पताल मोतिहारी रेफर कर दिया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

पीड़िता का आरोप है कि जब वह घटना की शिकायत लेकर थाने पहुंची तो शुरुआत में उनकी बात नहीं सुनी गई। बाद में उच्च अधिकारियों को आवेदन देने के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। फिलहाल पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है लेकिन विपक्षी लोगों ने थाने में पैसे और दरभंगा के बल पर पीड़ित परिवार की नहीं सुनवाई हो रही है पीड़ित परिवार का कहना है कि हाफ मर्डर हुआ है जिसकी धारा लगती चाहिए लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं हो रही है वह चाहते हैं उनके इस मामले में प्रशासन कार्यवाही में मदद करें ताकि समय रहते न्याय मिल सके और मामले की छानबीन की जा रही है।

सिक्योरिटी गार्ड से 12-12 घंटे काम, फिर भी 17,500 रुपये हड़पे जाने का आरोप

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नारायण सिंह सर्किल स्थित मंगलम बिल्डिंग से मजदूर शोषण का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्य कर रहे राम नारायण को उनकी मेहनत का पूरा पैसा नहीं मिलने का आरोप लगा है। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने लगातार कई महीनों तक दिन-रात 12-12 घंटे ड्यूटी की, लेकिन इसके बावजूद उनका लगभग 17,500 रुपये का वेतन अब तक बकाया है।

जानकारी के अनुसार, राम नारायण को यह कार्य ठेकेदार राजकुमार कुमावत के माध्यम से मिला था, जो शास्त्री नगर क्षेत्र से सिक्योरिटी सेवाएं संचालित करता है। आरोप है कि जनवरी से मार्च तक का पूरा वेतन और अप्रैल के शुरुआती 9 दिनों का भुगतान अब तक नहीं किया गया है।

पीड़ित ने बताया कि शुरुआत में ही आधा वेतन देकर बाकी राशि को टाल-मटोल किया जाता है। बार-बार मांग करने के बावजूद उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा है। आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वे इस नौकरी में टिके रहे, लेकिन अब उनकी स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।

इस मामले ने एक बार फिर सिक्योरिटी गार्ड जैसे असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कुछ ठेकेदार मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनका शोषण कर रहे हैं और उनका मेहनताना दबा रहे हैं।

पीड़ित राम नारायण ने प्रशासन, पुलिस और श्रम विभाग से गुहार लगाई है कि उनके बकाया वेतन का तत्काल भुगतान कराया जाए और दोषी ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो वे उच्च अधिकारियों तक अपनी आवाज पहुंचाने को मजबूर होंगे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक मामला नहीं है, बल्कि ऐसे कई मजदूर हैं जो इसी तरह के शोषण का शिकार हो रहे हैं, लेकिन डर या मजबूरी के कारण सामने नहीं आ पाते। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित को कब तक न्याय मिल पाता है।

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उत्तम नगर से 12 वर्षीय मंदबुद्धि बालक रहस्यमयी ढंग से लापता, पड़ोसियों पर अपहरण का आरोप; 15 दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ

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नई दिल्ली (द्वारका)। राजधानी के उत्तम नगर इलाके से एक 12 वर्षीय मंदबुद्धि बालक के रहस्यमयी ढंग से लापता होने का मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। परिजनों ने पड़ोस में रहने वाले दंपति पर अपहरण का गंभीर आरोप लगाया है, जबकि घटना के 15 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिव विहार जे.जे. कॉलोनी निवासी राम स्वरूप का सबसे छोटा बेटा गोविंद (12) 4 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 1 बजे घर से अचानक लापता हो गया। परिजनों का कहना है कि गोविंद मानसिक रूप से कमजोर है और बिना बताए कहीं नहीं जाता था। घटना के बाद परिवार ने अपने स्तर पर काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।

पीड़ित पिता ने बताया कि एक दिन पहले यानी 3 अप्रैल को पड़ोस में रहने वाली मीनाक्षी जोधावत और उसके पति ने उनके साथ झगड़ा किया था और बेटे पर चोरी का झूठा आरोप लगाया था। आरोप है कि उस दौरान दंपति ने धमकी दी थी कि अगर उनका सामान नहीं मिला तो वे गोविंद को गायब करवा देंगे। परिवार का दावा है कि धमकी के अगले ही दिन बच्चा अचानक लापता हो गया।

मामले में थाना उत्तम नगर में 8 अप्रैल 2026 को मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, परिजनों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। आसपास लगे CCTV कैमरों की जांच तक नहीं की गई और संदिग्धों से सख्ती से पूछताछ भी नहीं हुई।

राम स्वरूप ने बताया कि उन्होंने थाना, कोतवाली से लेकर उच्च अधिकारियों और पुलिस आयुक्त तक गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने अपने बेटे को ढूंढने वाले को 21,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा भी की है।

गुमशुदा गोविंद का कद करीब 5 फीट 1 इंच, रंग सावला, शरीर पतला और आंखें काली हैं। घटना के समय उसने नीले रंग का स्वेटर और पैंट पहन रखा था तथा पैरों में चप्पल भी नहीं थी।

परिवार की मांग है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच तेज की जाए, CCTV फुटेज खंगाले जाएं और संदिग्ध दंपति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश है और उन्होंने जल्द से जल्द बच्चे की बरामदगी की मांग की है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और हर पहलू से जांच की जा रही है। हालांकि, अब तक बच्चे का कोई सुराग नहीं लग पाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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जर्जर चहारदीवार से घिरा स्कूल बना आवारा पशुओं का अड्डा, बच्चों की पढ़ाई पर मंडरा रहा खतरा

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प्रयागराज जिले के माण्डा विकास खंड अंतर्गत ग्राम ऊंचडीह स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। लगभग आठ वर्ष पूर्व बनाई गई विद्यालय की पक्की चहारदीवार अब पूरी तरह से जर्जर होकर टूट चुकी है, जिससे स्कूल परिसर खुले मैदान में तब्दील हो गया है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार चहारदीवार गिरने के कारण आवारा पशु लगातार विद्यालय परिसर में घुस रहे हैं। ये पशु न केवल विद्यालय में लगाए गए पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि पूरे परिसर में गंदगी भी फैला रहे हैं। इससे न सिर्फ स्कूल का वातावरण दूषित हो रहा है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।

गांव के निवासी मनीष सिंह ने इस संबंध में बेसिक शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश को प्रार्थना पत्र देकर स्कूल की चहारदीवार के पुनर्निर्माण की मांग की है। उन्होंने बताया कि कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

मामले को लेकर संदीप ने मीडिया को बताया कि “काफी समय से स्कूल की बाउंड्री टूटी हुई है, जिससे बच्चों को असुरक्षित माहौल में पढ़ाई करनी पड़ रही है। आवारा पशुओं के कारण स्कूल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।”

ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही चहारदीवार का निर्माण नहीं कराया गया तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। अभिभावकों ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कब तक नजरअंदाज करता है या फिर कोई ठोस कदम उठाकर विद्यालय को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराता है।

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लोहे की रॉड से हमला, जिंदा जलाने की कोशिश: बेटे पर जानलेवा हमले के बाद न्याय के लिए दर-दर भटक रहा परिवार

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सारण। जिले के पहलेजा थाना क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर मामला सामने आया है, जहां कुछ दबंगों द्वारा एक युवक पर कथित तौर पर बर्बर हमला कर उसे जिंदा जलाने की कोशिश किए जाने का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार का दावा है कि घटना के बाद से वे लगातार पुलिस और प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। परिवार का आरोप है कि आरोपियों ने पैसे और दबाव के दम पर पूरे मामले को दबा दिया है।

मामले में शिकायतकर्ता बबन सिंह, पिता स्वर्गीय भरत सिंह, निवासी ग्राम गरीब परी, थाना पहले, जिला सारण ने बताया कि उनका लगभग 30 वर्षीय बेटा नीरज सिंह 1 अप्रैल 2026 की रात करीब साढ़े नौ बजे पढ़ाई कर दोपहिया वाहन से घर लौट रहा था। इसी दौरान गांव के ही कुछ आरोपी विक्की पिता रमधीर राय, संतोष पिता कृष्णा राय, दशरथ पिता सुरेंद्र राय, मनोज पिता ओकील राय, वरजेश कुमार पिता स्वर्गीय राजेंद्र सिंह, ओकील राय पिता स्वर्गीय भरथड़ी , अमेरिकन राय पिता सुदामा राय, राजा राय पिता सुदामा राय और अन्य लोगो ने उसे रास्ते में रोक लिया और जातिसूचक व अपमानजनक बातें करते हुए विवाद शुरू कर दिया। जब नीरज ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उसे जबरन पकड़कर पास के एक सुनसान स्थान पर ले गए

।पीड़ित परिवार के अनुसार वहां आरोपियों ने युवक के साथ बेहद क्रूरता की। आरोप है कि नीरज के शरीर को गर्म चीजों से जलाया गया और लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटा गया, जिससे उसके शरीर पर गंभीर चोटें आईं। हमलावरों ने उसकी जेब से लगभग आठ हजार रुपये भी छीन लिए। घटना के बाद आरोपियों ने उसे सड़क किनारे और खेत के पास फेंक दिया तथा उसकी मोटरसाइकिल को भी सड़क किनारे खड़ा कर दिया।

बताया जाता है कि कुछ देर बाद आसपास के लोगों की नजर घायल युवक पर पड़ी तो उन्होंने परिवार को सूचना दी। परिजन मौके पर पहुंचे और गंभीर हालत में उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका उपचार चल रहा है। परिजनों का कहना है कि युवक की हालत काफी गंभीर रही और उसे गहरी चोटें आई हैं।

पीड़ित पिता बबन सिंह का आरोप है कि उन्होंने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत पहलेजा थाना में दी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि आरोपियों ने प्रभाव और पैसे के दम पर मामले को दबाने की कोशिश की है, और आरोपी पक्ष लगातार जान से मारने की धमकी भी दे रहे जिससे पीड़ित परिवार डर के साए में जीने को मजबूर है जिसके कारण परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

परिवार ने प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

30–35 साल पुराने जमीन विवाद ने फिर पकड़ा तूल: घर बनाने पहुंचे युवक को रोका, मारपीट और कब्जे का आरोप

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दरभंगा। जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र से जमीन विवाद का एक पुराना मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। शिकायतकर्ता मनोज राम ने आरोप लगाया है कि करीब 30 से 35 वर्षों से चल रहा जमीन का विवाद अब फिर से गंभीर रूप ले चुका है। उनका कहना है कि जिस जमीन पर उनका हक है, उस पर कुछ लोग जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं और घर बनाने से भी रोक रहे हैं। पीड़ित ने प्रशासन से न्याय दिलाने और कब्जा हटवाने की गुहार लगाई है।

मनोज राम, पिता जगदीश राम, निवासी थाना अलीनगर, जिला दरभंगा का कहना है कि यह जमीन उनके परिवार को सरकार की ओर से दी गई थी। इस जमीन की रसीद उनके दादा बहुर मोछि के नाम से कटी हुई है। पीड़ित का दावा है कि उनके पास जमीन से जुड़े जरूरी कागजात भी मौजूद हैं। इसके बावजूद गांव के कुछ लोग इस जमीन पर अपना दावा कर रहे हैं और खुद को इसका मालिक बता रहे हैं।

पीड़ित के अनुसार सनी राम, दिनेश राम, सुरेश राम, महेश राम, गणेश राम और जोगिंदर समेत कुछ लोग यह कहकर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने यह जमीन जमींदार मालिक से खरीद ली है। जबकि मनोज राम का कहना है कि यह जमीन सीलिंग की जमीन है, जिसे सरकार ने गरीब परिवारों को आवंटित किया था और उसी के तहत उनके परिवार को यह जमीन मिली थी।

मनोज राम ने बताया कि वह नोएडा में रहकर मजदूरी करते हैं। हाल ही में वह अपने गांव लौटे थे ताकि अपनी जमीन पर घर का निर्माण शुरू कर सकें। लेकिन जैसे ही उन्होंने निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश की, आरोपियों ने वहां पहुंचकर काम रुकवा दिया और विरोध करने लगे। पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने अपने हक की बात की तो आरोपी मारपीट और झगड़े पर उतारू हो गए।

पीड़ित परिवार का कहना है कि विवाद के कारण उनके माता-पिता भी लगातार मानसिक दबाव में हैं पूरा परिवार जिसमें बच्चे और महिलाएं सभी लोग घर के बाहर सोनी को मजबूर है ‌ और लगातार डर बना रहता है कि कहीं कोई अनहोनी ना हो जाए और गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। मनोज राम ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उन्हें उनकी जमीन पर कब्जा दिलाया जाए, ताकि वह अपने परिवार के लिए घर बना सकें।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से चल रहे इस विवाद का समाधान नहीं होने से गांव में तनाव बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।