Friday, July 3, 2026
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CBSE OSM में गड़बड़ी पर बोले धर्मेंद्र प्रधान, ‘जिम्मेदारी मेरी, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई’

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया में आई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी लेते हुए छात्रों को समाधान का भरोसा दिया। IIT कानपुर और IIT मद्रास के विशेषज्ञ जांच में मदद करेंगे।नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) मूल्यांकन प्रक्रिया में सामने आई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी लेते हुए छात्रों को भरोसा दिलाया कि किसी भी शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई व्यक्ति जानबूझकर गड़बड़ी का दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। धर्मेंद्र प्रधान ने CBSE मुख्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर 12वीं की कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन प्रक्रिया में छात्रों को आ रही तकनीकी और भुगतान संबंधी समस्याओं की समीक्षा की।
‘एक भी शिकायत अनसुनी या अनसुलझी नहीं रहेगी’
बैठक के बाद उन्होंने कहा, ‘गड़बड़ियों की जिम्मेदारी मैं लेता हूं। इन समस्याओं को ठीक किया जाएगा और जरूरी कदम उठाए जाएंगे। मैं छात्रों को भरोसा दिलाता हूं कि उनकी एक भी शिकायत अनसुनी या अनसुलझी नहीं रहेगी। इस साल करीब 17 लाख छात्रों ने सीबीएसई की परीक्षा दी। छात्रों की कुल 98 लाख उत्तर पुस्तिकाएं सुरक्षित रखी गई हैं। प्रत्येक कॉपी में औसतन 40 पन्ने हैं, यानी लगभग 40 करोड़ स्कैन किए गए पन्नों का पहली बार OSM प्रक्रिया के जरिए मूल्यांकन किया गया।’

‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली एक मान्य प्रक्रिया’
प्रधान ने कहा, ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली एक छात्र हितैषी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ाना है। हालांकि पहली बार इसे लागू करने के कारण कुछ तकनीकी गड़बड़ियां सामने आई हैं। यह पहली बार था जब सीबीएसई ने इस प्रणाली का इस्तेमाल किया और कुछ विसंगतियां सामने आई हैं। मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं और भरोसा दिलाता हूं कि समाधान निकाला जाएगा। हम लगातार इस पर काम कर रहे हैं।’

IIT कानपुर, IIT मद्रास के विशेषज्ञ करेंगे मदद
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि सॉफ्टवेयर और तकनीकी समस्याओं की जांच और समाधान के लिए IIT कानपुर और IIT मद्रास के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। ये विशेषज्ञ CBSE की तकनीकी टीम के साथ मिलकर पूरे सिस्टम की समीक्षा करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि छात्रों को भुगतान संबंधी परेशानी न हो, इसके लिए वित्त मंत्रालय से चर्चा के बाद 4 सरकारी बैंकों स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के पेमेंट गेटवे को सीबीएसई पोर्टल से जोड़ा गया है।

‘गड़बड़ी का दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा’
शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘छात्रों को जो भी परेशानी हुई है, उसकी जिम्मेदारी हम लेते हैं और इसके लिए खेद भी जताते हैं। मैं भरोसा दिलाता हूं कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर इन गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार पाया गया, तो चाहे वह CBSE के अंदर हो या बाहर, उसे बख्शा नहीं जाएगा।’ उन्होंने राजनीतिक दलों से इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की अपील भी की। प्रधान ने कहा कि सबसे बड़ी प्राथमिकता छात्रों का मानसिक तनाव कम करना होना चाहिए।

प्रधान ने राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा सीबीएसई परिणामों में ‘बड़ी छेड़छाड़’ के आरोप लगाए जाने पर धर्मेंद्र प्रधान ने जवाब देते हुए कहा कि CBSE ने इस मामले में जिम्मेदारी से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, ‘अगर कोई अनियमितता पाई जाती है तो किसी को नहीं छोड़ा जाएगा। लेकिन राहुल गांधी लगातार चुनाव हारने के कारण अलग मानसिक स्थिति में नजर आते हैं। उन्होंने पहले राफेल, ईवीएम और डिजिटल इंडिया का भी विरोध किया था। ऐसा लगता है कि वे भारत की वैज्ञानिक प्रगति के खिलाफ हैं।’ प्रधान ने कहा कि सरकार ने खुद गड़बड़ियों की जिम्मेदारी ली है, इसलिए इस समय राजनीति करने के बजाय छात्रों के हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।

वायरल लिंक को लेकर CBSE की सफाई
इस बीच CBSE ने भी स्पष्ट किया कि OSM मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल किया गया वास्तविक पोर्टल पूरी तरह सुरक्षित है और उसमें कोई सेंध नहीं लगी है। बोर्ड ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो यूआरएल वायरल हो रहा है, वह केवल एक टेस्टिंग साइट थी, जिसमें सैंपल डेटा मौजूद था और उसका लाइव मूल्यांकन प्रणाली से कोई संबंध नहीं था।

न कार, न घर, न टीवी! सालाना 3 करोड़ कमाने वाले इंजीनियर ने बताया जल्दी रिटायर होने का अनोखा फॉर्मूला

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आज की दुनिया में जहां लोग ज्यादा कमाई के साथ लग्जरी लाइफस्टाइल अपनाने का सपना देखते हैं, वहीं 24 साल के एक इंजीनियर ने अपनी सादगी भरी जिंदगी से सबको हैरान कर दिया है। सालाना करीब 3 करोड़ रुपये कमाने के बाद भी उनके पास न कार है, न घर और न ही टीवी।आज के समय में जहां लोग बड़ी सैलरी मिलते ही महंगी कार, आलीशान घर और लग्जरी लाइफस्टाइल पर पैसा खर्च करना शुरू कर देते हैं, वहीं Meta में काम करने वाले एक युवा इंजीनियर ने अपनी सोच से सबको हैरान कर दिया है। 24 साल के रेमंड जेंग सालाना करीब 3 करोड़ रुपये कमाते हैं, लेकिन उनकी जिंदगी बेहद साधारण है। न उनके पास कार है, न टीवी और न ही उन्होंने घर खरीदा है। इसके पीछे उनका एक बड़ा लक्ष्य है 30 साल की उम्र से पहले रिटायर होना।

रेमंड जेंग अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में रहते हैं। उन्होंने बताया कि टैक्स और रिटायरमेंट फंड कटने के बाद भी उनकी अच्छी कमाई बच जाती है। वे हर महीने लाखों रुपये बचाकर निवेश करते हैं। बोनस और कंपनी के शेयरों की मदद से उनकी इनकम और बढ़ जाती है। कुछ महीनों में उनकी बचत 15 से 19 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।

क्यों नहीं खरीदते लग्जरी सामान?
रेमंड का कहना है कि उनका सादा जीवन कोई मजबूरी नहीं बल्कि सोच-समझकर लिया गया फैसला है। वे मानते हैं कि जरूरत से ज्यादा सामान जिंदगी को बेहतर नहीं बनाता। उनके मुताबिक वे अपना पैसा ऐसी चीजों पर खर्च करना पसंद करते हैं जो लंबे समय में फायदा दें, जैसे निवेश, यात्रा और अपने पसंदीदा शौक। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ दिखावे के लिए खर्च नहीं करना चाहते। यही वजह है कि उन्होंने कार, महंगा फर्नीचर और टीवी जैसी चीजों से दूरी बना रखी है।

30 साल की उम्र में रिटायर होने का लक्ष्य
रेमंड आर्थिक स्वतंत्रता, जल्दी रिटायर मॉडल को फॉलो करते हैं। इसका मतलब है कम उम्र में इतना पैसा जमा करना कि नौकरी की जरूरत न पड़े। इसके लिए वे अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शेयर बाजार और रिटायरमेंट फंड में निवेश करते हैं। उनका दावा है कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चलता रहा तो 30 साल की उम्र तक उनके पास करीब 19 करोड़ रुपये का निवेश हो सकता है। वहीं 40 की उम्र तक यह रकम 60 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच सकती है।

हर खर्च का रखते हैं हिसाब
रेमंड अपने खर्चों पर बहुत बारीकी से नजर रखते हैं। इसके लिए उन्होंने खुद एक स्प्रेडशीट तैयार की है, जिसमें वे हर महीने की कमाई और खर्च का रिकॉर्ड रखते हैं। वे किसी तैयार ऐप या टेम्पलेट का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि जरूरत के हिसाब से अपनी फाइल अपडेट करते रहते हैं।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा, ‘अक्टूबर 2026 तक भलस्वा डंपसाइट का होगा सफाया’

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केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिल्ली के भलस्वा डंपिंग साइट का दौरा कर कहा कि अक्टूबर 2026 तक इसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त दिल्ली के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है।नई दिल्ली: केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार को दिल्ली स्थित भलस्वा डंपिंग साइट का दौरा कर वहां चल रहे सफाई और कूड़े की प्रोसेसिंग से जुड़े कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2026 तक भलस्वा डंपिंग साइट को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया है और इस दिशा में युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। मनोहर लाल खट्टर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘आज भलस्वा डंपिंग साइट पर चल रहे सफाई एवं वेस्ट प्रोसेसिंग कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया। पिछले वर्ष मैंने यह संकल्प लिया था कि अक्टूबर 2026 तक इस डंपसाइट को पूर्णतः समाप्त कर दिया जाएगा, और उसी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु युद्धस्तर पर कार्य जारी है।’

‘सभी आवश्यक कदम तेजी से उठाए जा रहे’
खट्टर ने आगे लिखा, ‘कूड़े के इस विशाल पहाड़ को समाप्त करने के लिए वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से लेगेसी वेस्ट की प्रोसेसिंग तथा वैज्ञानिक वेस्ट डिस्पोजल की प्रक्रिया को तेज़ किया गया है। साथ ही, पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा एवं नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत मिशन के विजन को साकार करते हुए केंद्र सरकार दिल्लीवासियों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और इसी दिशा में निर्धारित समयसीमा के भीतर भलस्वा डंपिंग साइट का समापन सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं।’

70 एकड़ से ज्यादा में फैला है भलस्वा लैंडफिल
भलस्वा लैंडफिल दिल्ली के सबसे बड़े कूड़ा स्थलों में से एक है। यह 70 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है और वर्ष 1994 से लगातार बड़ी समस्या बना हुआ है। एक समय यहां कूड़े का पहाड़ करीब 60 मीटर ऊंचाई तक पहुंच गया था। अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली नगर निगमअब बायो-माइनिंग तकनीक के जरिए यहां जमा पुराने कचरे को हटाने का काम कर रहा है। इस तकनीक के माध्यम से कूड़े को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर निपटाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि भलस्वा लैंडफिल पर बायो-माइनिंग का काम तेजी से चल रहा है और जमीन पर इसका असर भी साफ दिखाई दे रहा है। काम की निगरानी के लिए रोजाना ड्रोन सर्वे कराया जा रहा है, ताकि प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।

पुश्तैनी मकान की दीवार गिरने से परिवार बेघर, प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

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गांव में पुश्तैनी मकान को लेकर चल रहे विवाद ने एक परिवार को खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर कर दिया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि विपक्षी पक्ष द्वारा लगातार विवाद और दबाव बनाया जा रहा है, जिसके चलते अब उनके रहने का सहारा भी टूट गया है।

मिली जानकारी के अनुसार रामेश सिंह और उनका परिवार वर्षों से अपने पुश्तैनी मकान में निवास कर रहा था। परिवार का कहना है कि मकान में सभी हिस्सेदारों का अलग-अलग हिस्सा है और सभी लोग लंबे समय से वहीं रह रहे थे। बीते 13 मई 2026 को मकान की दीवार अचानक गिर गई, जिससे घर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद परिवार के सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि गांव के ही लाखनलाल, उनके बेटे और रामकृपाल शेखर राजू परिवार के अन्य लोग लगातार विवाद कर रहे हैं और उन्हें वहां रहने नहीं देना चाहते। परिवार का कहना है कि मकान जर्जर होने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की सहायता या रहने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं मिल सकी है। अब परिवार खुले में रहने को मजबूर है।

राकेश सिंह ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और परिवार को सुरक्षा व रहने की उचित व्यवस्था दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो पूरा परिवार बड़ी परेशानी में आ जाएगा।

ग्रामीणों के अनुसार मामला पुश्तैनी संपत्ति के बंटवारे और कब्जे से जुड़ा बताया जा रहा है। वहीं पीड़ित परिवार ने प्रशासन से अपील की है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर न्याय दिलाया जाए ताकि परिवार सुरक्षित रूप से अपने हिस्से में रह सके।

आईपीएल में नहीं मिला एक भी मौका, जाते ही ठोक दी धमाकेदार सेंचुरी

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न्यूजीलैंड बनाम आयरलैंड टेस्ट मैच में रचिन रवींद्र और टॉम टॉम ब्लंडेल ने शतक लगा दिया है। रचिन आईपीएल में केकेआर का हिस्सा ​थे, लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला।आईपीएल में जिस खिलाड़ी को टीम ने पूरे सीजन बिठाए रखा और एक भी मैच खेलने का मौका नहीं दिया, उसे यहां से जाते ही इंटरनेशनल क्रिकेट में धमाकेदार शतक ठोक दिया है। इसके अलावा टीम की ओर से एक और शतक आया। ये दोनों शतक टेस्ट क्रिकेट में आए हैं। दोनों बल्लेबाजों ने न्यूजीलैंड की ओर से खेलते हुए आयरलैंड के खिलाफ ये पारियां खेली।
न्यूजीलैंड और आयरलैंड के बीच खेला जा रहा है टेस्ट मुकाबला
न्यूजीलैंड और आयरलैंड के बीच टेस्ट मुकाबला शुरू हो चुका है। मैच के पहले ही दिन न्यूजीलैंड ने जबरदस्त बल्लेबाजी की, इसमें दो बल्लेबाजों के शतक भी आए। जब टीम की बल्लेबाजी के लिए उतरी तो सलामी बल्लेबाज और कप्तान टॉम लैथम शून्य पर आउट होकर वापस चले गए। दूसरे ओपनर ड्वोन कॉन्वे भी चार रन बनाकर आउट हो गए। पूर्व कप्तान केन विलियमसन भी ज्यादा देर तक रुक नहीं पाए और 36 रन बनाकर चलते बने। इसके बाद रचिन रवींद्र और टॉम ब्लंडेल ने कमान संभाली।

रचिन रवींद्र ने लगाया आयरलैंड के खिलाफ शतक
रचिन रवींद्र ने 194 बॉल पर 121 रनों की पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 11 चौके और 4 छक्के ठोके। रचिन रवींद्र इस साल के आईपीएल में केकेआर यानी कोलकाता नाइट राइडर्स के हिस्सा थे। टीम की हालत लगातार पतली रही, लेकिन इसके बाद भी रचिन रवींद्र को टीम ने एक भी मैच की प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं दिया। जबकि उन्हें टीम ने दो करोड़ रुपये खर्च कर अपने पाले में किया था। इससे पहले वे सीएसके के लिए आईपीएल खेल रहे थे।

टॉम ब्लंडेल के बैट से भी आई सेंचुरी
उनके अलावा नंबर छह पर बल्लेबाजी के लिए उतरे टॉम ब्लंडेल ने भी अपना सैकड़ा पूरा किया। टॉम ब्लंडेल ने 233 बॉल पर 142 रनों की पारी खेली। इसमें 18 चौके और दो छक्के शामिल रहे। अभी वे नाबाद बने हुए हैं। जब पहले दिन का खेल खत्म हुआ, तब न्यूजीलैंड ने पांच विकेट के नुकसान पर 361 रन बना लिए थे। इस तरह से टीम ने मैच पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली थी।

आईसीसी रैंकिंग में जुड़ेगा खिलाड़ियों का प्रदर्शन
ये टेस्ट मैच विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा नहीं है। वैसे तो इस वक्त सभी टेस्ट डब्ल्यूटीसी का हिस्सा होते हैं, लेकिन आयरलैंड की टीम इससे बाहर है, इसलिए ये मैच उसका हिस्सा नहीं है। हालांकि इस मैच के प्रदर्शन के अंक आईसीसी रैंकिंग में जोड़े जाएंगे। जब अगले साल रैंकिंग आएगी तो उसमें इस मैच का असर देखने के लिए मिलेगा।

‘देखा है तेरी आंखों को’ का क्यूट चॉकलेटी हीरो याद है? 25 साल बाद हो गया और भी हैंडसम, TV की वैंप को बनाया लेडी लक

‘देखा है तेरी आंखों को’ 90 के दशक का सुपरहिट पॉप सॉन्ग था। इस गाने में एक हैंडसम हंक नजर आया था, जिसकी क्यूटनेस पर लड़कियां मर मिटी थीं। अब वो कहां है और क्या कर रहा है, जानें।नब्बे के दशक के आखिरी सालों और साल 2000 की शुरुआत का वो दौर इंडी-पॉप म्यूजिक वीडियोज का गोल्डन पीरियड था। उस दौर में कुछ गानों और उनके चेहरों ने युवाओं के दिलों में एक खास जगह बना ली थी। एक ऐसा ही बेहद रोमांटिक गाना आया था, जिसके बोल सुनते ही आज भी जेहन में एक मासूम और चॉकलेटी चेहरे वाले हीरो की तस्वीर उभर आती है। लड़कियां उसकी एक मुस्कान पर जान छिड़कती थीं। वक्त का पहिया घूमा और करीब 25 साल बीत गए, लेकिन यह क्यूट हीरो आज भी उतना ही फिट और पहले से कहीं ज्यादा हैंडसम नजर आता है। दिलचस्प बात यह है कि इस चॉकलेटी बॉय ने असल जिंदगी में किसी और को नहीं, बल्कि टीवी स्क्रीन पर अपनी एक्टिंग से दर्शकों के पसीने छुड़ाने वाली एक मशहूर ‘वैंप’ को अपना लेडी लक बनाया। आइए जानते हैं लाखों दिलों की धड़कन रहे इस अभिनेता के सफर, उनकी निजी जिंदगी और उस आइकॉनिक गाने के बारे में जिसने रातों-रात उनकी किस्मत बदल दी थी।
देखा है तेरी आंखों में’ और करियर का वो टर्निंग पॉइंट
हम बात कर रहे हैं बेहद हैंडसम अभिनेता शैलेश गुलाबानी की। साल 2001 में मशहूर बैंड आर्यन्स का एक म्यूजिक वीडियो रिलीज हुआ था ‘देखा है तेरी आंखों को’। इस गाने में शैलेश गुलाबानी और एक्ट्रेस नंदिनी सिंह मुख्य भूमिका में थे। कॉलेज रोमांस पर आधारित यह गाना और इसका वीडियो उस दौर में इस कदर हिट हुआ कि हर म्यूजिक चैनल पर चौबीसों घंटे यही छाया रहता था। शैलेश के मासूम चेहरे, चॉकलेटी लुक्स और बेहतरीन अभिनय ने उन्हें देश का नया क्रश बना दिया था। इस गाने ने शैलेश के करियर को एक ऐसी उड़ान दी जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। मॉडलिंग की दुनिया से निकलकर वह सीधे अभिनय के मुख्य मंच पर आ गए। इस एक गाने की सफलता के बाद उनके लिए एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के दरवाजे हमेशा के लिए खुल गए और उन्हें कई बड़े प्रोजेक्ट्स मिलने शुरू हो गए।

टीवी की मशहूर ‘वैंप’ से शादी और खूबसूरत लव स्टोरी
शैलेश गुलाबानी की निजी जिंदगी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। उन्होंने टीवी जगत की जानी-मानी अभिनेत्री आशिता धवन को अपना हमसफर बनाया। आशिता धवन को स्टार प्लस के मशहूर सीरियल ‘सपना बाबुल का…बिदाई’ में ‘मालती भाभी’ के अपने नेगेटिव और वैंप किरदार से जबरदस्त लोकप्रियता मिली थी। जहां स्क्रीन पर आशिता अपने तीखे तेवरों के लिए जानी जाती थीं, वहीं असल जिंदगी में वह शैलेश के लिए लेडी लक साबित हुईं। दोनों की मुलाकात एक्टिंग के शुरुआती दिनों में हुई थी, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। लगभग 4 साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद इस कपल ने साल 2010 में बेहद धूमधाम से शादी कर ली। आज उनकी शादी को डेढ़ दशक से ज्यादा का समय हो चुका है और वे टीवी इंडस्ट्री के सबसे प्यारे और आदर्श कपल्स में से एक माने जाते हैं।शैलेश का परिवार और खुशहाल गृहस्थी
शैलेश और आशिता की जिंदगी उनके बच्चों के आने के बाद और भी खूबसूरत हो गई। साल 2012 में इस कपल के घर जुड़वां बच्चों एक बेटा और एक बेटी की किलकारियां गूंजीं। उनके बेटे का नाम अराश गुलाबानी और बेटी का नाम अमाइरा गुलाबानी है। शैलेश एक बेहद जिम्मेदार और फैमिली-मैन हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि काम से वक्त मिलते ही वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताना पसंद करते हैं। आशिता के साथ उनका रिश्ता आज भी उतना ही ताजा और मजबूत है और शैलेश अक्सर अपनी कामयाबी का श्रेय अपनी पत्नी के सपोर्ट को देते हैं।

म्यूजिक वीडियो से टीवी स्क्रीन तक
‘देखा है तेरी आंखों को’ गाने की जबरदस्त कामयाबी के बाद शैलेश गुलाबानी ने छोटे पर्दे यानी टेलीविजन इंडस्ट्री की ओर रुख किया। उन्होंने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए। शैलेश ने ‘छूना है आसमान’, ‘दिल की नजर से खूबसूरत’, ‘कसम तेरे प्यार की’, ‘आप के आ जाने से’ और ‘दुर्गा माता की छाया’ जैसे कई लोकप्रिय टीवी सीरियल्स में काम किया। उन्होंने केवल रोमांटिक या पॉजिटिव रोल ही नहीं किए, बल्कि कुछ शोज़ में ग्रे-शेड्स और नेगेटिव किरदार निभाकर भी अपनी वर्सेटाइल एक्टिंग का लोहा मनवाया। हालांकि उन्हें टीवी पर वह स्टारडम नहीं मिल सका जो उनके पहले म्यूज़िक वीडियो से मिला था, लेकिन वह लगातार इंडस्ट्री में एक भरोसेमंद अभिनेता के रूप में टिके रहे।अब कहां हैं और क्या कर रहे हैं शैलेश गुलाबानी?
आज 25 साल बाद भी शैलेश गुलाबानी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में पूरी तरह सक्रिय हैं। उम्र के इस पड़ाव पर आकर वह और भी ज्यादा रिफाइंड, मैच्योर और हैंडसम दिखाई देते हैं। उन्होंने अपनी फिटनेस पर बहुत काम किया है, जिसे देखकर उनकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। वर्तमान समय में वह टीवी शोज, वेब सीरीज और कमर्शियल विज्ञापनों में लगातार काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं, जहां वह अपनी रील्स, फैमिली वेकेशन्स की तस्वीरें और फिटनेस रूटीन फैंस के साथ शेयर करते हैं।

अररिया के तमगंज में रास्ता विवाद, 45 साल पुराने आने-जाने के मार्ग पर कब्जे का आरोप

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पीड़ित परिवार ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार, सुनवाई नहीं होने पर मीडिया से मांगी मदद

अररिया, बिहार के तमगंज क्षेत्र में एक रास्ता विवाद को लेकर स्थानीय निवासी टुराय मुखिया ने न्याय की मांग की है। टुराय मुखिया, पिता दुखन मुखिया, वार्ड संख्या 10, बिबिगंज, तमगंज निवासी हैं। उनका आरोप है कि उनके घर के सामने से वर्षों से इस्तेमाल हो रहे रास्ते को गांव के ही विजेंद्र मुखिया और महेंद्र मुखिया द्वारा अवरुद्ध कर कब्जा कर लिया गया है, जिससे उनके परिवार को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पीड़ित टुराय मुखिया का कहना है कि करीब 40 से 45 वर्षों से उनका परिवार इसी रास्ते से आवागमन करता आ रहा था। यह रास्ता उनके घर तक पहुंचने का मुख्य मार्ग था, लेकिन अब आरोपियों ने रास्ते को चारों ओर से घेरकर बंद कर दिया है। रास्ता बंद होने के कारण परिवार को रोजमर्रा के कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घर से बाहर निकलने तक में परेशानी हो रही है और परिवार खुद को घिरा हुआ महसूस कर रहा है।

टुराय मुखिया ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार शिकायतों के बावजूद सुनवाई नहीं होने से परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने उचित कदम नहीं उठाया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि रास्ता बंद होने से उनके जीवन यापन पर सीधा असर पड़ रहा है। घर तक जरूरी सामान पहुंचाने, बीमार होने पर अस्पताल जाने और अन्य दैनिक कार्यों में बड़ी कठिनाई हो रही है। परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पुराने रास्ते को पुनः खुलवाया जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।

टुराय मुखिया ने मीडिया के माध्यम से अपनी पीड़ा सामने रखते हुए कहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो मीडिया मौके पर आकर उनकी स्थिति देखे कि आखिर एक परिवार किस तरह रास्ता बंद होने की वजह से परेशानियों में जीवन गुजारने को मजबूर है। अब पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

कर्नाटक में आज नहीं हैं राज्यपाल, तो फिर CM सिद्धारमैया कैसे देंगे इस्तीफा?

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज अपने पद से इस्तीफा देंगे। इस बीच, जानकारी सामने आई है कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत आज बेंगलुरु में नहीं हैं। किसी जरूरी काम से वह मुंबई गए हैं।कर्नाटक के सियासी गलियारों से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के आज अपने पद से इस्तीफा देने की चर्चा है। इस बीच, जानकारी सामने आई है कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत आज बेंगलुरु में नहीं हैं। राजभवन सूत्रों के मुताबिक, किसी जरूरी काम से उन्हें मुंबई जाना पड़ गया है।

राज्यपाल की गैर-मौजूदगी के बाद यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि अगर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस्तीफा देना चाहें, तो वह किसे और कैसे सौंपेंगे? इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने स्थिति साफ कर दी है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि हम राज्यपाल कार्यालय को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। यदि राज्यपाल उपलब्ध नहीं हैं, तो भी हम अपना काम जारी रखेंगे। राज्यपाल की अनुपस्थिति के कारण योजना में कोई बदलाव नहीं होगा।

क्या कहता है नियम?
संवैधानिक नियमों के मुताबिक, अगर राज्यपाल राज्य या शहर से बाहर हों, तो मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा राजभवन के सचिव या नामित अधिकारी को सौंप सकते हैं। इसे कानूनी तौर पर वैध माना जाता है और राज्यपाल के वापस लौटते ही या उनकी सहमति मिलते ही इसे स्वीकार कर लिया जाता है।

बनाए जा सकते हैं 3 डिप्टी सीएम
गौरतलब है कि सिद्धारमैया आज यानी गुरुवार सुबह 10.30 बजे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। अब डीके शिवकुमार का सीएम बनना तय है। डीके शिवकुमार कर्नाटक के नए सीएम के तौर पर 30 मई को शपथ लेंगे। वहीं, कर्नाटक में तीन डिप्टी सीएम बनाए जाने की भी चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, ये 3 डिप्टी सीएम अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिला वर्ग से बनाए जा सकते हैं। कांग्रेस पार्टी द्वारा जो लोग संभावित उपमुख्यमंत्रियों की दौड़ में शामिल हैं, उनमें दलित कोटा से परमेश्वर/प्रियांक खरगे, अन्य पिछड़ा वर्ग से यतींद्र और लिंगायत से एमबी पाटिल/ईश्वर खंड्रे और अल्पसंख्यक से केजे जॉर्ज/यूटी खादर/जमीर का नाम शामिल है।

पति समझाता रहा, पत्नी तलाक की जिद पर अड़ी रही: आरा कोर्ट पहुंचा तीन बच्चों वाला परिवार, मायके वालों पर भड़काने का आरोप

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बिहार के भोजपुर जिले से एक ऐसा पारिवारिक मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर रिश्तों में बढ़ती दूरियों और टूटते परिवारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मजदूरी कर परिवार चलाने वाले महेश चौधरी का आरोप है कि छोटी-छोटी बातों को लेकर उनकी पत्नी सरिता देवी बार-बार विवाद करती हैं और अब तलाक लेने की जिद पर अड़ गई हैं। मामला आरा कोर्ट तक पहुंच चुका है।

जानकारी के अनुसार महेश चौधरी भोजपुर जिले के तेघरा इलाके के रहने वाले हैं। वह शाहपुर इलाके में नॉनवेज होटल चलाकर और मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनकी शादी वर्ष 2016 में सरिता देवी से हुई थी। सरिता देवी के पिता का नाम भगवान चौधरी और मां का नाम लीलावती बताया जा रहा है। मायका पक्ष आरा के कायम नगर इलाके का रहने वाला है।

महेश चौधरी का कहना है कि शादी के शुरुआती वर्षों में सब कुछ सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे परिवार में विवाद बढ़ने लगे। पति का आरोप है कि पत्नी मायके वालों की बातों में आकर अक्सर झगड़ा करती हैं। उन्होंने दावा किया कि जब भी वह काम से लौटते हैं, घर में तनाव का माहौल बन जाता है और हर एक-दो महीने में बड़ा विवाद खड़ा हो जाता है।

तीन बच्चों का भविष्य अधर में

इस परिवार में तीन बच्चे हैं। एक बेटी रुचि और दो बेटे राजाराम तथा सबसे छोटी बेटी ऋषि हैं। महेश का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और भविष्य को लेकर वह लगातार मेहनत कर रहे हैं, लेकिन अब परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गया है। उनका आरोप है कि पत्नी बच्चों को पिता के खिलाफ भड़काने की कोशिश करती हैं और घर का माहौल लगातार खराब होता जा रहा है।

ईद की छुट्टी में भी कोर्ट पहुंचा मामला

बताया जा रहा है कि ईद के कारण अदालतों में अवकाश का माहौल रहने के बावजूद दोनों पक्ष आरा कोर्ट पहुंचे। पति-पत्नी के बीच तलाक को लेकर चल रही तनातनी अब कानूनी लड़ाई में बदलती दिखाई दे रही है। हालांकि अभी तलाक नहीं हुआ है, लेकिन परिवार पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच चुका है।

पति ने बचाने की लगाई गुहार

महेश चौधरी का कहना है कि वह परिवार को टूटने से बचाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी नाराजगी और गुस्से के कारण अगर रिश्ता खत्म हो गया तो सबसे ज्यादा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन अब मामला कोर्ट तक पहुंच गया है।

स्थानीय लोगों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे बदलते पारिवारिक रिश्तों और बढ़ते वैवाहिक तनाव से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना बनी हुई है, लेकिन कोर्ट में चल रही प्रक्रिया के कारण पूरे परिवार पर मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

सागर ट्रैक्टर नामांतरण मामले में किसान की मांग, बोले- लक्ष्मण ट्रैक्टर खरीदी के सभी दस्तावेज कोर्ट में पेश करे

सागर जिले के रहली तहसील अंतर्गत ग्राम मेनाई निवासी 50 वर्षीय किसान अमूल सिंह लोधी ने ट्रैक्टर नामांतरण विवाद में आरोपी पक्ष पर गंभीर सवाल उठाते हुए मांग की है कि लक्ष्मण लोधी द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेज सिविल कोर्ट में पेश किए जाएं। किसान का कहना है कि ट्रैक्टर खरीदी और नामांतरण से जुड़े असली दस्तावेज सामने आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई उजागर हो सकेगी।
अमूल सिंह लोधी के अनुसार, उन्होंने कभी भी अपना ट्रैक्टर नहीं बेचा और ना ही किसी प्रकार का विक्रय अनुबंध किया। उनका आरोप है कि बिना उनकी सहमति, हस्ताक्षर, अंगूठा निशान, आधार कार्ड और फोटो के ट्रैक्टर का नामांतरण कर दिया गया।
पीड़ित किसान ने कहा कि यदि लक्ष्मण लोधी वास्तव में ट्रैक्टर का वैध खरीदार है तो उसे ट्रैक्टर खरीदी से संबंधित सभी दस्तावेज सिविल कोर्ट में प्रस्तुत करने चाहिए। किसान ने मांग की है कि विक्रय पत्र, स्टाम्प पेपर, गवाह, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, फोटो, आधार कार्ड और नामांतरण प्रक्रिया से जुड़े समस्त कागजात न्यायालय के समक्ष रखे जाएं।
किसान का आरोप है कि अब तक जो दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं, वे संदिग्ध और फर्जी प्रतीत होते हैं। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच होना बेहद जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ट्रैक्टर का नामांतरण किन आधारों पर किया गया।
अमूल सिंह लोधी ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और न्यायालय से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि ट्रैक्टर खरीदी से जुड़े वैध दस्तावेज मौजूद हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से कोर्ट में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में कार्रवाई की मांग भी की है।

ट्रैक्टर मॉडल एचएमटी जिसका रजिस्ट्रेशन क्रमांक है MP 15 L 2565

यह मामला अब केवल ट्रैक्टर नामांतरण विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी दस्तावेजों की सत्यता और प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।