Friday, July 3, 2026
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अयोध्या में जमीन विवाद ने लिया खतरनाक मोड़, महिला से मारपीट और अभद्रता के आरोप, पीड़ित परिवार ने लगाई सुरक्षा की गुहार

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अयोध्या।

जनपद अयोध्या के हैदरगंज थाना क्षेत्र के सराय मनोहर गांव में वर्षों पुराने जमीन विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। आवासीय पट्टे की जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच चल रहे विवाद में एक महिला के साथ मारपीट, अभद्र व्यवहार और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पीड़ित परिवार ने पुलिस से सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मामले में पीड़िता शिवकुमारी पत्नी राजेश कुमार निषाद की शिकायत पर वर्ष 2022 में थाना हैदरगंज में मुकदमा संख्या 160/2022 दर्ज किया गया था। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354(ख), 452, 323, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज किया था। एफआईआर तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक कुमार यादव द्वारा दर्ज की गई थी।

पीड़ित राजेश कुमार निषाद ने बताया कि उन्हें गाटा संख्या 589 की भूमि पर आवासीय पट्टा मिला हुआ है और वह लंबे समय से अपने परिवार के साथ वहां निवास कर रहे हैं। आरोप है कि जब उन्होंने खाली पड़ी जमीन पर बाउंड्री निर्माण का प्रयास किया तो उनके पट्टीदार बुधीराम निषाद और परिवार के अन्य सदस्य इसका विरोध करने लगे और जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करने लगे।

राजेश कुमार का आरोप है कि विरोध करने पर विपक्षी पक्ष द्वारा लगातार गाली-गलौज की जाती रही और कई बार उनकी पत्नी शिवकुमारी को अकेला पाकर उनके साथ मारपीट की गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि एक घटना में आरोपित घर में घुस आए और महिला के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए हमला कर दिया, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई।

परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार आपसी समझौते का प्रयास किया और यहां तक प्रस्ताव दिया कि यदि किसी प्रकार का हिस्सा बनता है तो राजस्व विभाग और लेखपाल की मौजूदगी में पैमाइश कराकर उसका निर्धारण कर लिया जाए, लेकिन इसके बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ और उत्पीड़न का सिलसिला जारी है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि विवादित भूमि की निष्पक्ष पैमाइश कराकर उन्हें वैधानिक कब्जा दिलाया जाए, आरोपितों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए तथा पूरे परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

उधर, शिकायत के बावजूद वर्तमान में पुलिस और राजस्व विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई है, इसकी स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। गांव में इस प्रकरण को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और लोग प्रशासन के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं।

पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ी घटना भी हो सकती है। फिलहाल पूरे मामले ने इलाके में सनसनी फैला दी है।

रास्ता बंद कर दबंगों का कब्जे का खेल! जेसीबी से खोद डाला आवागमन का मार्ग, विरोध करने पर जान से मारने और मकान गिराने की धमकी का आरोप

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गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र में भूमि विवाद ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। भिमखाड़ गांव निवासी अशोक सिंह ने आरोप लगाया है कि खाता संख्या-01, प्लॉट संख्या-22, रकबा 50 डिसमिल से जुड़े भूमि विवाद को लेकर गांव के कुछ लोगों ने न केवल उनके साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया, बल्कि जेसीबी मशीन लगवाकर उनके घर आने-जाने का रास्ता भी पूरी तरह बंद कर दिया। पीड़ित का कहना है कि अब उनका परिवार घर में कैद होकर रह गया है और किसी भी समय बड़ी घटना होने की आशंका बनी हुई है।

अशोक सिंह ने उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी एवं दंडाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि चन्दीका सिंह, मुन्द्रीका सिंह, योगेन्द्र सिंह, शंकर सिंह, हरदेव सिंह तथा सुदेशी सिंह सहित अन्य लोगों ने विवादित भूमि को लेकर उनके साथ गाली-गलौज, लाठी-डंडे से मारपीट और जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं, आरोप है कि दबंगों ने उनके मकान को गिराने की धमकी देते हुए जेसीबी मशीन से पूरे रास्ते की खुदाई करवा दी, जिससे परिवार का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया।

पीड़ित का कहना है कि रास्ता बंद होने के कारण उनके परिवार को रोजमर्रा की आवश्यक गतिविधियों में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने पर लगातार धमकियां दी जा रही हैं, जिससे पूरा परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है।

अशोक सिंह ने प्रशासन से अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने, रास्ता तत्काल बहाल कराने तथा आरोपियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो कभी भी कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है।

हालांकि, समाचार में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता अशोक सिंह द्वारा प्रशासन को दिए गए आवेदन पर आधारित हैं। समाचार लिखे जाने तक प्रशासन या पुलिस की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अथवा किसी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई थी।

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दुर्ग में शबनम कोसरे का आरोप: 30 फीट रास्ते पर कब्जा, गंदगी और उत्पीड़न से परिवार परेशान

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दुर्ग। पोटियाकला क्षेत्र की निवासी शबनम कोसरे ने कलेक्टर दुर्ग को शिकायत सौंपकर पड़ोसी पर 30 फीट चौड़े सार्वजनिक रास्ते पर कथित कब्जा करने, गंदगी फैलाने और परिवार को परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शबनम कोसले ने मामले की निष्पक्ष जांच कर रास्ता बहाल कराने तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार शबनम कोसरे का मकान पोटियाकला स्थित खसरा नंबर 326/86 पर है। उनका आरोप है कि मकान के पूर्व दिशा में निकाले गए 30 फीट चौड़े रास्ते पर पड़ोसी पीरन बी. ने अपनी जमीन बताते हुए निर्माण कर लिया है, जिससे आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है।


शबनम कोसरे का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पहले भी प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन कथित रूप से उचित जांच किए बिना 12 जून 2026 को उनके मकान का हिस्सा तोड़ दिया गया, जबकि पीरन बी. के निर्माण की जांच नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि रास्ते पर कब्जे के कारण परिवार को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पीरन बी. और उनके परिवार द्वारा बकरी और मुर्गी पालन किया जा रहा है तथा कचरा, पशुओं की बीट और अन्य गंदगी घर के सामने फेंकी जाती है। नालियों में मांस के अवशेष, शराब की बोतलें और डिस्पोजल सामग्री डालने से क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।
शबनम कोसरे ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनके साथ अभद्रता, गाली-गलौज और मारपीट की जाती है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
शबनम कोसरे ने कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कर कथित अतिक्रमण हटाने, गंदगी की समस्या का समाधान करने और रास्ते का अधिकार दिलाने की मांग की है।

जम्मू-कश्मीर के लेह-लद्दाख क्षेत्र से से महिला और मासूम बेटी रहस्यमय ढंग से लापता, 18 मई से नहीं मिला कोई सुराग, नेपाल में काम कर रहे पति की बढ़ी चिंता

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जम्मू-कश्मीर के गांव ठकशासी से एक महिला और उसकी चार वर्षीय बेटी के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला सामने आया है। घटना के बाद से परिवार गहरे सदमे में है और पिछले कई दिनों से दोनों की तलाश की जा रही है, लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। मामले की सूचना स्थानीय थाने में भी दी जा चुकी है, इसके बावजूद परिवार को अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है।

जानकारी के अनुसार, 31 वर्षीय निर्मला घरती 18 मई की सुबह लगभग 9:30 बजे अपने घर से यह कहकर निकली थीं कि वह अपनी चार साल की बेटी दीपिका को लेकर अस्पताल जा रही हैं। परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि वह इलाज करवाकर कुछ समय बाद वापस लौट आएंगी, लेकिन देर शाम तक जब मां-बेटी घर नहीं पहुंचीं तो परिजनों की चिंता बढ़ गई।

परिवार ने अपने स्तर पर काफी खोजबीन की, रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क किया, लेकिन कहीं से भी दोनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई और थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस द्वारा तलाश की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन अभी तक दोनों का कोई पता नहीं चल सका है।

लापता महिला के पति रमेश खटका मूल रूप से नेपाल के रहने वाले हैं और रोजगार के सिलसिले में बाहर काम कर रहे हैं। पत्नी और बेटी के अचानक गायब होने की खबर मिलने के बाद वह बेहद परेशान हैं। परिवार का कहना है कि दोनों के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी न मिलने से चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

परिजनों ने प्रशासन और आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को निर्मला देवी और उनकी बेटी दीपिका के संबंध में कोई जानकारी मिले तो तत्काल नजदीकी पुलिस स्टेशन या परिवार को सूचित करें, ताकि मां-बेटी को सुरक्षित खोजा जा सके।
जो भी व्यक्ति उनके बारे में सही जानकारी और हमें इनका पता बताता है उसे 8000 का इनाम दिया जाएगा

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर दोनों की तलाश जारी है। घटना के बाद इलाके में भी चिंता और चर्चा का माहौल बना हुआ है।
जिस किसी व्यक्ति को उनके बारे में सूचना मिले तो वहां इस नंबर पर संपर्क करें 7051012038

दहेज की मांग ने ली विवाहिता की जान! पांच साल की शादी का दर्दनाक अंत, गला दबाकर हत्या का आरोप

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गोण्डा।

उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले में ग्राम वेसिया चैन पड़ता है दहेज उत्पीड़न का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गला दबाकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बहराइच जनपद के विशेश्वरगंज थाना क्षेत्र स्थित रोहनी भारी गांव वेसिया चैन निवासी कोतवाली देहात गोण्डा में तहरीर देकर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी पुत्री राधा देवी की शादी लगभग पांच वर्ष पूर्व हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार कोतवाली देहात क्षेत्र के वेसिया चैन गांव निवासी विवेक उर्फ त्रिवेनी के साथ की थी।

पीड़ित पिता का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही पति विवेक उर्फ त्रिवेनी, उसकी मां सीता देवी, बहनोई कल्लू उर्फ राजाराम तथा बहन गीता देवी दहेज में मोटरसाइकिल और 50 हजार रुपये नकद की मांग को लेकर राधा देवी का लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करते थे। आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता को आए दिन गाली-गलौज कर प्रताड़ित किया जाता था और मारपीट भी की जाती थी।

परिजनों के मुताबिक 13 जून की शाम करीब पांच बजे उन्हें सूचना मिली कि उनकी पुत्री की हालत गंभीर है। सूचना मिलते ही परिवार के लोग तत्काल ससुराल पहुंचे, जहां राधा देवी मृत अवस्था में मिली। मृतका के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या गला दबाकर की गई है और इसे सामान्य मौत दिखाने की कोशिश की जा रही है।

घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी बेटी लगातार दहेज प्रताड़ना का शिकार थी और कई बार उसने अपनी पीड़ा परिवार को बताई थी, लेकिन उन्हें अंदेशा नहीं था कि एक दिन उसकी जान ही ले ली जाएगी।

मृतका के पिता ने कोतवाली देहात पुलिस को नामजद तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ हत्या एवं दहेज उत्पीड़न की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं क्षेत्र में घटना को लेकर लोगों में भी आक्रोश देखा जा रहा है।
अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। परिजन न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

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मां का आरोप: बेटे की हत्या के महीनों बाद भी आरोपी आजाद, परिवार दहशत में

हरदोई जिले के मल्लावां थाना क्षेत्र में युवक की हत्या के मामले में नया मोड़ सामने आया है। मृतक प्रदोष कुमार की मां रामादेवी ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर आरोप लगाया है कि बेटे की हत्या के इतने गंभीर मामले के बावजूद आज तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इतना ही नहीं, परिजनों का आरोप है कि पुलिस जांच भी सही दिशा में आगे नहीं बढ़ी, जिसके कारण आरोपी बेखौफ होकर गांव में घूम रहे हैं।

परिजनों का कहना है कि प्रदोष कुमार की हत्या कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया गंभीर अपराध था। मामले में न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि पुलिस जल्द कार्रवाई कर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाएगी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

मृतक की मां रामादेवी का आरोप है कि नामजद आरोपी लगातार परिवार पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आरोपी खुलेआम धमकी दे रहे हैं कि जिस तरह एक बेटे की जान ली गई, उसी तरह दूसरे पुत्र शिवचरन को भी निशाना बनाया जाएगा। इन धमकियों के कारण पूरा परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हत्या जैसे गंभीर मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है, तब आखिर अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती तो आरोपियों के हौसले इतने बुलंद नहीं होते।

गांव और आसपास के लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि हत्या के आरोप झेल रहे लोग खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार न्याय की आस में अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहा है। परिवार ने पुलिस अधीक्षक से आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।

अब निगाहें पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और कानून का भय कायम करने के लिए प्रशासन कब तक ठोस कदम उठाता है।

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आकाश जाटव समेत 40-50 लोगों पर घर में घुसकर जानलेवा हमला और पथराव का आरोप, पीड़ित ने लगाई कड़ी कार्रवाई की गुहार

इंदौर। शहर के आजाद नगर थाना क्षेत्र स्थित मूसाखेड़ी के शिवनगर इलाके में कथित रूप से घर में घुसकर हमला, पथराव और तोड़फोड़ का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आकाश जाटव, भैया जाटव तथा उनके साथ आए करीब 40 से 50 लोगों ने मिलकर उनके घर पर हमला बोल दिया।

इस दौरान गेट पर जमकर पथराव किया गया और मुख्य गेट को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।फरियादी शैलेश ने मीडिया को बताया कि हमलावरों ने अचानक घर को घेर लिया और देखते ही देखते पथराव शुरू कर दिया। आरोप है कि हमले में कई लोगों को चोटें आई हैं। घायल होने वालों में जगराम हरण, शोभाराम हरण, अरुण हरण और आकाश मोर के नाम बताए जा रहे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि हमले के दौरान जान से मारने की नीयत से हमला किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।

फरियादी के अनुसार घटना में उसके सिर पर गंभीर चोट आई है। उनका आरोप है कि यह एक साधारण मारपीट नहीं बल्कि जानलेवा हमला है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा केवल शांति भंग की कार्रवाई करते हुए मामले को हल्का करने की कोशिश की जा रही है। पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास, बलवा, घर में घुसकर हमला, तोड़फोड़ और अन्य संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के बाद क्षेत्र में भय का वातावरण बना हुआ है। वहीं पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। मामले में दोनों पक्षों के बयान लिए जा रहे हैं। जांच के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।

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सतना में शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी का आरोप, युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक युवती ने सोशल मीडिया के माध्यम से हुई दोस्ती के बाद शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में शादी से इनकार करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत पर रामपुर बघेलान थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 23 वर्षीय कल्पना केवट निवासी ऐरा, थाना रामपुर बघेलान ने शिकायत में बताया कि उसकी पहचान करीब चार वर्ष पहले फेसबुक के जरिए रीवा जिले के गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के टीकर निवासी संतलाल केवट से हुई थी। दोनों के बीच धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी और फोन पर लगातार संपर्क बना रहा।

शिकायत के अनुसार, सितंबर 2024 में आरोपी युवती के गांव पहुंचा और शादी का भरोसा दिलाते हुए उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। युवती का आरोप है कि आरोपी लगातार उससे शादी का वादा करता रहा और हर बार किसी न किसी कारण का हवाला देकर विवाह टालता रहा।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी वीडियो कॉल के दौरान आपत्तिजनक हरकतें करने के लिए दबाव बनाता था और बातचीत की स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी करता था। जब युवती ने दो माह पहले शादी के लिए दबाव बनाया तो आरोपी ने कथित तौर पर उससे शादी करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि वह किसी अन्य लड़की को पसंद करता है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी ने युवती को उसकी कथित अश्लील वीडियो व्हाट्सएप पर भेजकर धमकी दी कि यदि उसने पुलिस में शिकायत की तो वह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा। इसके बाद आरोपी ने युवती से बातचीत पूरी तरह बंद कर दी और फोन उठाना भी बंद कर दिया।

पीड़िता ने घटना की जानकारी अपने माता-पिता को दी, जिसके बाद वह उनके साथ रामपुर बघेलान थाना पहुंची और लिखित शिकायत सौंपी।

रामपुर बघेलान थाना पुलिस ने 5 मई 2026 को एफआईआर क्रमांक 447/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 69, 77 और 351(2) के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कल्पना के घर वालों का कहना है कि इस पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है और कल्पना का मेडिकल भी करवा दिया है सब सबूत है पर कहते हैं पकड़ रहे हैं पर संतलाल को नहीं पकड़ा जा रहा है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए

संदिग्ध परिस्थितियों में प्रॉपर्टी कारोबारी को साथ ले जाने का आरोप, परिवार में मचा हड़कंप

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गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर में एक प्रॉपर्टी कारोबारी को कुछ लोगों द्वारा अचानक अपने साथ ले जाने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि पांच लोग स्वयं को सीआईडी कर्मी बताते हुए सोमवार 15 जून को दिन में उनके घर पहुंचे और बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के सहदेव साहनी को अपने साथ ले गए। घटना के बाद से परिवार में चिंता और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार सहदेव साहनी पुत्र स्वर्गीय सुखदेव साहनी, सुदामापुरी स्थित बिहारीपुरा क्षेत्र में परिवार के साथ रहते हैं और प्रॉपर्टी का कारोबार करते हैं। उनका निवास बी-207, सुदामापुरी, बिहारीपुरा, गाजियाबाद में है। परिवार का कहना है कि रविवार दोपहर अचानक पांच लोग घर पहुंचे और खुद को सीआईडी से जुड़ा बताते हुए सहदेव साहनी को पूछताछ के नाम पर अपने साथ ले गए।

सहदेव साहनी की पत्नी रूपा देवी ने बताया कि उनके पति को ले जाने वाले लोगों ने कोई लिखित नोटिस या दस्तावेज नहीं दिखाया। परिवार को केवल इतना बताया गया कि उन्हें थाने ले जाया जा रहा है। इसके बाद से परिजन लगातार जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन देर शाम तक उन्हें सहदेव साहनी के बारे में कोई स्पष्ट सूचना नहीं मिल सकी।

घटना के बाद परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। परिजनों का कहना है कि उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि सहदेव साहनी को किस मामले में पूछताछ के लिए ले जाया गया है।

फिलहाल परिवार प्रशासन से सहदेव साहनी के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने और उनकी स्थिति से अवगत कराने की मांग कर रहा है। मामले को लेकर संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है।

सहदेव साहनी का जन्म 31 दिसंबर 2016 अंकित है, जबकि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार वे लंबे समय से गाजियाबाद में रहकर प्रॉपर्टी के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करेगा।

11 रुपये के प्रसाद’ से शुरू हुई व्यवस्था पर उठे सवाल, अब रोजाना हजारों की चढ़ोतरी और भारी भीड़ के दावों से चर्चा में बेहटा जवी

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बदायूं।
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की बिल्सी तहसील स्थित ग्राम बेहटा जवी इन दिनों एक कथित चमत्कारी उपचार केंद्र को लेकर सुर्खियों में है। जहां कभी सीमित संख्या में लोग पहुंचते थे, वहीं अब प्रतिदिन दूर-दराज के जिलों और राज्यों से सैकड़ों लोगों के पहुंचने के दावे किए जा रहे हैं। इस बीच स्थानीय लोगों ने केंद्र संचालक और वहां की गतिविधियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय पहले तक संबंधित व्यक्ति स्वयं को केवल पथरी, गांठ और कुछ सामान्य समस्याओं के लिए पारंपरिक जड़ी-बूटी आधारित उपाय बताने वाला व्यक्ति बताते थे। दावा किया जाता था कि उपचार के बदले केवल 11 या 21 रुपये प्रसाद स्वरूप लिए जाते हैं और किसी प्रकार के धन संग्रह या लालच से उनका कोई संबंध नहीं है।

लेकिन अब स्थानीय लोगों का आरोप है कि हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं और कई श्रद्धालु स्वेच्छा से सैकड़ों से लेकर हजारों रुपये तक भेंट कर रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि परिसर में रखा बड़ा दान पात्र दिनभर में कई बार भर जाता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों के अनुसार संबंधित परिवार पहले मुख्य रूप से खेती-बाड़ी पर निर्भर था। उनके खेतों में भिंडी, तोरी, लौकी, ग्वार की फली, टिंडा, खीरा, तरबूज और खरबूजे जैसी सब्जियों और फसलों की खेती होती रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले परिवार खेती को प्राथमिकता देता था, लेकिन अब कथित उपचार केंद्र की बढ़ती लोकप्रियता के बाद पूरा ध्यान वहीं केंद्रित हो गया है।

क्षेत्र में सबसे बड़ी बहस उन दावों को लेकर छिड़ी हुई है जिनमें बिना चिकित्सकीय जांच और आधुनिक चिकित्सा के विभिन्न रोगों के ठीक होने की बात कही जाती है। कई स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गंभीर बीमारियों का इलाज केवल प्रशिक्षित चिकित्सकों और वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति से ही संभव है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को इलाज के नाम पर अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए।

कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि केंद्र के आसपास ऐसा माहौल बना दिया गया है कि अनेक लोग संबंधित व्यक्ति को असाधारण शक्तियों वाला मानने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि वास्तव में कोई चमत्कारी शक्ति है तो उसका प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने आना चाहिए। वहीं समर्थकों का दावा है कि कई लोगों को लाभ मिला है, जिसके कारण वहां भीड़ बढ़ रही है।

मामले का एक संवेदनशील पहलू महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सामने आया है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि केंद्र पर मौजूद कुछ युवक महिला आगंतुकों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। एक युवती के साथ कथित बदसलूकी की चर्चा भी स्थानीय स्तर पर हो रही है। हालांकि इन आरोपों की किसी सक्षम एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और न ही इस संबंध में आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी प्रकार के उपचार, चमत्कार या रोगमुक्ति के दावे किए जा रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को मामले की जांच करनी चाहिए। उनका मानना है कि लोगों की आस्था का सम्मान होना चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और चिकित्सकीय परामर्श को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

गांव और आसपास के क्षेत्रों में इस पूरे प्रकरण को लेकर चर्चा का माहौल है। एक पक्ष इसे आस्था का विषय बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अंधविश्वास और आर्थिक लाभ से जोड़कर देख रहा है। फिलहाल संबंधित व्यक्ति या उनके प्रतिनिधियों की ओर से आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हालांकि, समाचार में वर्णित सभी आरोप स्थानीय लोगों और आगंतुकों के दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की वास्तविक स्थिति किसी निष्पक्ष प्रशासनिक, चिकित्सकीय अथवा कानूनी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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