Friday, July 3, 2026
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हमीरपुर में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत पर बवाल, पिता ने लगाया दहेज हत्या का आरोप, एसपी से लगाई न्याय की गुहार

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हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मृतका के पिता ने बेटी की ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और साजिश के तहत हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार ने स्थानीय पुलिस पर भी आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से न्याय और सुरक्षा की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के पलेरा थाना क्षेत्र के आलमपुरा गांव निवासी बसन्तलाल विश्वकर्मा की पुत्री साधना का विवाह 2 दिसंबर 2024 को हमीरपुर जिले के गोहाण्ड कस्बा निवासी आनन्द पुत्र देवकीनन्दन के साथ हुआ था। परिजनों का आरोप है कि विवाह के समय उन्होंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दहेज दिया था, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही पति आनन्द, सास उमा, ससुर देवकीनन्दन, देवर रुचित और ननद दीपिका अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर साधना का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने लगे।
इस मामले में मूल रूप से दोषी देवर रूचित और नंद दीपिका इनका मुख्य हाथ है इनको कड़ी से कड़ी सजा दिलानी चाहिए

परिजनों का कहना है कि साधना के साथ कई बार मारपीट भी की गई और लगातार उसे प्रताड़ित किया जाता रहा। आरोप है कि ससुराल पक्ष ने समझौते का भरोसा देकर उसे वापस अपने घर बुलाया और 27 मई 2026 को साजिश के तहत उसकी हत्या कर दी।

घटना की जानकारी मिलने के बाद मृतका के पिता ने 31 मई 2026 को थाना जरिया में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने बीएनएस की धारा 85 और 80(2) के साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत एफआईआर संख्या 0090 दर्ज की। हालांकि पीड़ित परिवार का आरोप है कि अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

बसन्तलाल विश्वकर्मा का कहना है कि स्थानीय पुलिस आरोपियों से मिली हुई है, जिसके कारण सभी नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी लगातार मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहे हैं और धमकी दे रहे हैं कि पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती तथा उनका नाम भी केस से हटवा दिया जाएगा।

इन परिस्थितियों से भयभीत पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक हमीरपुर को प्रार्थना पत्र सौंपकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और परिवार की सुरक्षा की मांग की है।

फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें न्याय मिलेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शादी में 10 लाख रुपये खर्च होने का दावा, फिर भी दहेज की मांग जारी; विवाहिता ने पति के अवैध संबंध और उत्पीड़न के लगाए गंभीर आरोप

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मुजफ्फरनगर।

जनपद मुजफ्फरनगर के तितावी क्षेत्र से दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और वैवाहिक विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता सोनम ने अपने पति एहसान, सास शाहिदा, ससुर चांद तथा अन्य ससुरालीजनों पर दहेज की लगातार मांग करने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और घर से निकालने की कोशिश करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सोनम के अनुसार उसकी शादी करीब छह वर्ष पूर्व पूरे रीति-रिवाज और सामाजिक परंपराओं के साथ एहसान से हुई थी। पीड़िता का दावा है कि उसके माता-पिता ने शादी में लगभग 10 लाख रुपये खर्च किए थे और घरेलू उपयोग का आवश्यक सामान, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा अन्य उपहार भी दिए थे। इसके बावजूद ससुराल पक्ष की ओर से अतिरिक्त दहेज की मांग की जाती रही।

पीड़िता का आरोप है कि शादी के शुरुआती दो महीने तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन उसके बाद दहेज को लेकर विवाद शुरू हो गया। ससुराल पक्ष कथित रूप से कार की मांग करने लगा और मांग पूरी न होने पर उसे अपमानित किया जाने लगा। सोनम का कहना है कि कई बार उसे तलाक देने और घर से निकालने की धमकियां भी दी गईं।

विवाहिता ने अपने पति पर एक अन्य महिला रेशमा के साथ अवैध संबंध होने का भी आरोप लगाया है। उसका कहना है कि यह संबंध शादी से पहले से था और विवाह के बाद भी जारी रहा। पीड़िता का आरोप है कि इसी वजह से उसे लगातार मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी और उसे परिवार से अलग करने की कोशिश की गई।

सोनम ने यह भी आरोप लगाया कि उसके सास-ससुर और अन्य परिजन अक्सर उस पर दबाव बनाते थे कि वह अपने मायके से कार लेकर आए, अन्यथा ससुराल में रहने का अधिकार नहीं है। पीड़िता के अनुसार जब वह गर्भवती हुई और बाद में उसके बेटे का जन्म हुआ, तब भी उसके इलाज, दवाइयों और प्रसव का पूरा खर्च उसके माता-पिता ने उठाया, जबकि ससुराल पक्ष ने कोई सहयोग नहीं किया।

पीड़िता का कहना है कि आज उसका बेटा चार वर्ष का हो चुका है, लेकिन उसके पति ने न तो बच्चे की जिम्मेदारी उठाई और न ही परिवार के भरण-पोषण में कोई विशेष सहयोग किया। उसने आरोप लगाया कि उसे कई बार घर से निकाल दिया गया, जिसके कारण वह अपने छोटे बेटे के साथ दर-दर भटकने को मजबूर हो गई।

मामले को और गंभीर बनाते हुए सोनम ने दावा किया कि शादी में दिया गया कई लाख रुपये का सामान भी कथित रूप से तोड़फोड़ कर नष्ट कर दिया गया। इसके बावजूद दहेज की मांग बंद नहीं हुई और लगातार कार तथा अन्य सामान की मांग कर उसे परेशान किया जाता रहा।

पीड़िता का कहना है कि उसने कई बार संबंधित अधिकारियों और पुलिस से शिकायत कर न्याय की मांग की, लेकिन अब तक उसे अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है। उसने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि उसे और उसके मासूम बेटे को न्याय मिल सके।

वहीं, इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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सिगरेट और शराब नहीं पिलाई तो तलवार से काट डाला, आरोपी गिरफ्तार; पीड़ित परिवार में अब भी दहशत का माहौल

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पुणे।

पुणे के बोपखेल स्थित रामनगर इलाके में सिक्योरिटी गार्ड पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने आरोपी बादल वाल्मीकि को गिरफ्तार कर लिया है। बावजूद इसके पीड़ित परिवार अब भी भय और दहशत के साये में जी रहा है। परिवार का कहना है कि जिस बेरहमी से मामूली बात पर धारदार हथियार से हमला किया गया, उसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।

जानकारी के अनुसार आरबीएल बैंक में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत कुमार अंकज कारे राम अपने साथी शशि भूषण यादव के साथ ड्यूटी समाप्त कर देर रात घर लौट रहे थे। रात करीब 1 बजे रामनगर चौक ऑटो स्टैंड के पास एक युवक ने उन्हें रोक लिया और कथित रूप से सिगरेट तथा शराब की मांग करने लगा।

पीड़ितों के अनुसार जब उन्होंने इसका विरोध किया और घर जाने की बात कही तो आरोपी आक्रामक हो गया। आरोप है कि उसने धारदार हथियार निकालकर दोनों पर हमला कर दिया। हमले में अंकज के हाथ पर गंभीर चोट आई, जबकि शशि भूषण यादव भी बुरी तरह घायल हो गए। दोनों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया गया।

घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि महज सिगरेट और शराब नहीं पिलाने पर किसी व्यक्ति पर धारदार हथियार से हमला कर देना बेहद गंभीर और चिंताजनक घटना है। इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।

हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी बादल वाल्मीकि को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन पीड़ित परिवार का कहना है कि वे अब भी मानसिक रूप से भयभीत हैं। परिवार को आशंका है कि भविष्य में किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो, इसलिए आरोपी के खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच की जाए और आरोपी को उसके अपराध के अनुरूप कठोर दंड दिलाया जाए, ताकि समाज में ऐसा संदेश जाए कि कानून हाथ में लेने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है।

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मथुरा में आंधी-तूफान ने गरीब मजदूर का आशियाना उजाड़ा, मां-बेटे हुए बेघर, प्रशासन से लगाई मदद की गुहार

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मथुरा। जिले की छाता तहसील के शेरगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम साहब नगर पंचायत जटवारी में रहने वाले एक गरीब परिवार पर प्राकृतिक आपदा ने कहर बरपा दिया है। गांव निवासी आरिफ अपनी वृद्ध माता नसरी के साथ एक छोटी सी झोपड़ी में जीवन यापन कर रहे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और आरिफ मेहनत-मजदूरी करके किसी तरह घर का खर्च चलाते हैं।

बताया गया है कि 31 मई को क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान के कारण उनकी झोपड़ी की आधी छत उड़ गई थी। आर्थिक तंगी के चलते परिवार छत की मरम्मत नहीं करा सका और किसी तरह उसी टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर रहा। इसी बीच 9 जून को एक बार फिर तेज आंधी और खराब मौसम ने कहर बरपाया, जिससे झोपड़ी की बची हुई छत भी पूरी तरह गिर गई।

छत गिरने के बाद आरिफ और उनकी माता के सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अब उनके पास सिर छिपाने के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं बचा है। परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार अत्यंत गरीब है और स्वयं अपने स्तर पर मकान बनवाने की स्थिति में नहीं है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से सहायता की गुहार लगाते हुए मांग की है कि उन्हें तत्काल रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तथा सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता देकर उनके लिए स्थायी आवास की व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मानवीय आधार पर इस परिवार की मदद करने की अपील की है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गरीब परिवार की पुकार कब तक सुनता है और उन्हें राहत प्रदान करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

प्रेमी ने शादी का वादा कर 5 साल तक बनाया संबंध, अब मुकरा; न्याय के लिए बच्चों संग दर-दर भटक रही महिला

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उदवाड़ा। प्यार, भरोसा और साथ निभाने के वादों से शुरू हुई एक प्रेम कहानी अब एक महिला के लिए दर्द और संघर्ष की दास्तान बन गई है। उदवाड़ा क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता रिंकू का आरोप है कि एक युवक ने पहले उसे प्रेमजाल में फंसाया, शादी का भरोसा दिया और वर्षों तक उसके साथ संबंध बनाए रखे। जब उसने समाज और परिवार के सामने रिश्ते को वैधानिक रूप देने की बात कही तो प्रेमी अपने ही वादों से मुकर गया। अब पीड़िता अपने बच्चों के साथ न्याय की गुहार लगाते हुए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है।

पीड़िता रिंकू के अनुसार करीब पांच वर्ष पहले उसकी मुलाकात निकेश पटेल से हुई थी। बातचीत का सिलसिला धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गया। रिंकू का कहना है कि निकेश ने उसे विश्वास दिलाया था कि वह जीवनभर उसका साथ देगा और उचित समय आने पर उससे विवाह करेगा। इसी भरोसे के आधार पर दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती चली गईं। पीड़िता का दावा है कि इस दौरान दोनों परिवारों के बीच भी रिश्ते की जानकारी थी और एक लिखित समझौता भी तैयार किया गया था, जिसमें भविष्य में साथ रहने और विवाह करने जैसी बातें दर्ज थीं।

रिंकू का आरोप है कि जब उसने शादी का प्रस्ताव रखा तो निकेश का व्यवहार अचानक बदल गया। उसने तरह-तरह के बहाने बनाना शुरू कर दिए और शादी से बचने के लिए रिंकू के चरित्र पर ही सवाल उठाने लगा। पीड़िता का कहना है कि उस पर दूसरे युवकों से बातचीत करने जैसे आरोप लगाए गए, जबकि ऐसे आरोपों का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। रिंकू का आरोप है कि यह सब केवल शादी से बचने के लिए किया गया।

मामला तब और गंभीर हो गया जब पीड़िता अपने प्रेमी के घर पहुंची। रिंकू का आरोप है कि वहां उसके साथ अभद्रता की गई और प्रेमी के भाई बबलू तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने उसके साथ मारपीट की। घटना के बाद उसने थाने में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिल पाया है। पीड़िता का कहना है कि शिकायत के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उसका परिवार मानसिक और सामाजिक पीड़ा झेल रहा है।

रिंकू का कहना है कि वह अपने बच्चों के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित है। उसका आरोप है कि वर्षों तक साथ निभाने का भरोसा देने वाला युवक अब जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है। पीड़िता चाहती है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और उसे न्याय दिलाया जाए। उसका कहना है कि यदि समय रहते सुनवाई नहीं हुई तो उसके और उसके बच्चों के सामने गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

वहीं स्थानीय लोगों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि किसी महिला को लंबे समय तक शादी का भरोसा देकर संबंध बनाए गए हैं और बाद में उससे किनारा किया गया है तो मामले की गहन जांच होनी चाहिए। फिलहाल पीड़िता न्याय की उम्मीद में अधिकारियों और पुलिस प्रशासन के दरवाजे खटखटा रही है।

अब सभी की नजर प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। सवाल यह है कि क्या पीड़िता को उसके संघर्ष का न्याय मिलेगा या फिर वह अपने बच्चों के साथ यूं ही न्याय की तलाश में भटकती रहेगी।

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दो महीने से अंधेरे में कैद पूरा इलाका, टूटे बिजली खंभों ने छीनी ग्रामीणों की जिंदगी की रफ्तार

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बदायूं।

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के थाना शरीफ नगर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कमालपुर जल्लुनगार में बिजली संकट अब एक गंभीर जनसमस्या का रूप ले चुका है। गांव के निवासी हरिओम पिता चंद्रपाल ने आरोप लगाया है कि पिछले करीब दो महीनों से क्षेत्र के लोग अंधेरे में जीवन गुजारने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान न होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

हरिओम के अनुसार गांव में लगे दो बिजली खंभे टूट जाने के बाद पूरे इलाके की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई। खंभों के टूटने के साथ ही बिजली आपूर्ति बंद हो गई, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी न तो खंभों की मरम्मत कराई गई और न ही वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई। नतीजा यह है कि सैकड़ों ग्रामीण बुनियादी सुविधा से वंचित होकर कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस मौसम में बिना बिजली के रहना किसी सजा से कम नहीं है। दिन में तेज गर्मी और रात में उमस के बीच लोग चैन की नींद तक नहीं ले पा रहे हैं। छोटे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है, वहीं बुजुर्गों और महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मोबाइल चार्जिंग, पेयजल व्यवस्था और अन्य दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

हरिओम ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों और विद्युत विभाग को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि यही समस्या किसी शहरी क्षेत्र में होती तो शायद तत्काल कार्रवाई होती, लेकिन गांव के लोगों की परेशानी को नजरअंदाज किया जा रहा है।

गांववासियों का कहना है कि दो महीने तक किसी पूरे इलाके का अंधेरे में डूबे रहना केवल बिजली विभाग की लापरवाही ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी का भी उदाहरण है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही टूटे हुए खंभों की मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो ग्रामीण सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराई जाए, टूटे हुए खंभों को बदला जाए और नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि दो महीने से अंधेरे और परेशानियों में जी रहे लोगों को राहत मिल सके
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भोजपुर में किशोर और किशोरी के एक साथ लापता होने से हड़कंप, परिजनों में चिंता का माहौल

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भोजपुर।

बिहार के भोजपुर जिले से एक किशोर और एक किशोरी के एक साथ लापता होने का मामला सामने आने के बाद इलाके में चिंता और चर्चा का माहौल बन गया है। परिजनों के अनुसार राकेश कुमार यादव उम्र 15 वर्ष, पिता आनंद शंकर यादव, निवासी लालू के डेरा, लछमी अहिर का डेरा, भोजपुर, 10 जून से लापता हैं। इसी दिन क्षेत्र की रहने वाली 16 वर्षीय किशोरी खुशी भी अपने घर से गायब बताई जा रही है।

परिजनों का कहना है कि दोनों के अचानक गायब होने के बाद से लगातार उनकी तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। राकेश के परिवार का आरोप है कि खुशी के परिजन उन पर उनकी बेटी को भगाकर ले जाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि राकेश के घर वालों का कहना है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

घटना के बाद दोनों परिवारों में चिंता बढ़ गई है। राकेश के परिजन अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं और उनका कहना है कि कई दिनों से कोई संपर्क नहीं होने के कारण परिवार बेहद तनाव में है। वहीं खुशी के परिजन भी अपनी बेटी की तलाश में जुटे हुए हैं।

स्थानीय लोगों के बीच इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन अभी तक दोनों नाबालिगों के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। परिजनों ने प्रशासन से दोनों की जल्द से जल्द तलाश करने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

फिलहाल दोनों किशोरों का कोई पता नहीं चल पाया है, जिससे दोनों परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। पुलिस और प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही दोनों को सुरक्षित बरामद कर लिया जाएगा।

15 महीने की किस्त के बाद मांगी जा रही 24 महीने की वसूली! सैकड़ों महिलाओं का हंगामा, बैंक कर्मचारियों पर गुमराह करने का आरोप

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आरा। भोजपुर जिले के आरा नगर क्षेत्र में महिला समूह ऋण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सैकड़ों महिलाओं ने आरोप लगाया है कि ऋण वितरण के समय बैंक कर्मियों ने उन्हें 15 से 18 माह तक किस्त जमा करने की जानकारी दी थी, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद अब उनसे अतिरिक्त महीनों की किस्त जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि बैंक की इस कथित मनमानी से वे आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं।

मामले को लेकर विचणूनगर निवासी पूनम देवी सहित कई महिलाओं ने आरोप लगाया है कि जनाबैंक के माध्यम से करीब 200 महिलाओं को ऋण दिया गया था। ऋण स्वीकृति के दौरान बैंक कर्मियों द्वारा बताया गया था कि कुछ महिलाओं को 15 माह और कुछ को 18 माह तक किस्त जमा करनी होगी। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने समय पर सभी किस्तों का भुगतान भी कर दिया, लेकिन अब उनसे अतिरिक्त किस्तों की मांग की जा रही है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जब उन्होंने बैंक पहुंचकर इस संबंध में जानकारी मांगी तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। महिलाओं का कहना है कि पहले 15 माह की अवधि बताई गई, फिर 24 माह तक किस्त जमा करने की बात कही जाने लगी। इसके बाद भी कथित रूप से उन्हें बताया गया कि यदि आगे भी किस्त जमा नहीं की गई तो भविष्य में दोबारा ऋण सुविधा नहीं मिलेगी।

पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि बैंक प्रबंधन और कर्मचारियों से कई बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। उल्टा उन्हें डांट-फटकार कर वापस भेज दिया गया। महिलाओं का कहना है कि वे लगातार बैंक और संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

मामले को लेकर महिलाओं ने नगर थाना आरा में भी आवेदन दिया, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने यह कहते हुए कार्रवाई करने से इनकार कर दिया कि ऋण लेते समय उन्होंने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। महिलाओं का कहना है कि उन्हें ऋण की शर्तों की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी और अब बदलती शर्तों के नाम पर अतिरिक्त वसूली की जा रही है।

पीड़ित पक्ष का दावा है कि बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित कार्यप्रणाली से करीब 200 परिवार प्रभावित हुए हैं। महिलाओं का कहना है कि वे पहले ही आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रही हैं, ऐसे में अतिरिक्त किस्तों की मांग उनके लिए बड़ी परेशानी बन गई है।

महिलाओं ने जिला प्रशासन, बैंकिंग अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि ऋण वितरण के समय बताई गई शर्तों और वर्तमान में मांगी जा रही किस्तों की जांच की जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और बैंक के आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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बिहार के कैमूर जिले में सामने आया चौंकाने वाला मामला, वर्षों पहले कई लोगों की जान बचाने वाले युवक ने लगाया उत्पीड़न का आरोप

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कैमूर। बिहार के कैमूर जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है। भौरई गांव निवासी प्रेम बिन्द ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2016 के दौरान एक गंभीर घटना में उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों की जान बचाई थी, लेकिन अब उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।

प्रेम बिन्द, जो जासलोचन बिन्द के पुत्र हैं और चैनपुर प्रखंड के भौरई गांव के निवासी हैं, का कहना है कि वर्ष 2016 में लॉकडाउन के दौरान वह एक कंपनी में कार्यरत थे। इसी दौरान परिसर में एक संदिग्ध बम रखा हुआ मिला। आरोप है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने साहस दिखाते हुए बम को वहां से हटाया, जिससे एक बड़े हादसे को टाल दिया गया और कई लोगों की जान बच गई।

पीड़ित के अनुसार, घटना के दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। उनका आरोप है कि विश्व तिवारी नामक व्यक्ति उन्हें रमाकांत थाना क्षेत्र में ले गए, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। प्रेम बिन्द का कहना है कि उस समय उन्होंने किसी प्रकार की चर्चा किए बिना चुपचाप बम को हटाकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की।

प्रेम बिन्द का यह भी कहना है कि उनके भाई विनोद के पास इस पूरी घटना से जुड़े दस्तावेज, लिखित विवरण और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद थे, लेकिन समय के साथ उनके भाई का निधन हो गया। इसके बाद से उनके पास उपलब्ध कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्रभावित हो गईं।

पीड़ित ने आरोप लगाया है कि विश्व नंद तिवारी, जो पशु विभाग में कार्यरत बताए जा रहे हैं, लगातार उनका पीछा कर रहे हैं और उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से दबाव और भय के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
प्रेम बिंन्द जी ने बोला कि विश्वनंद तिवारी और थाना प्रभारी नीतू मैडम इन्होंने कंप्लेंट नहीं ली

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि पीड़ित के पास उपलब्ध अन्य साक्ष्य और दस्तावेज सामने आते हैं, तो यह मामला और भी महत्वपूर्ण रूप ले सकता है।

फिलहाल, संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके।

बहला-फुसलाकर महिला को बच्चे समेत ले जाने का आरोप, डेढ़ साल के मासूम के साथ लापता हुई मां; परिवार की आंखों से नहीं थम रहे आंसू

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उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से एक विवाहिता महिला के अपने डेढ़ साल के बच्चे के साथ लापता होने का मामला सामने आया है। घटना के बाद से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। महिला के पति और परिजन लगातार उसकी तलाश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है। परिवार का आरोप है कि एक युवक महिला को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है, जिसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता सत्येंद्र, निवासी इटावा, उत्तर प्रदेश ने बताया कि उनकी पत्नी अंजली देवी 11 जून 2026 को अपने डेढ़ वर्षीय पुत्र अक्षय कुमार के साथ घर से लापता हो गई थीं। परिवार के अनुसार महिला के अचानक गायब होने के बाद परिजनों ने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।

परिवार का दावा है कि उसी रात करीब 11 बजे अंजली देवी का फोन 7080172177 आया था। परिजनों के मुताबिक बातचीत के दौरान महिला ने बताया कि उसे अर्जुन 7973267575 जो बिहार का रहने वाला है। अर्जुन से पहले फुसलाकर अपने साथ ले आया है इसके बाद महिला से दोबारा संपर्क नहीं हो सका और संबंधित मोबाइल नंबर लगातार स्विच ऑफ बताए जा रहे हैं।

पीड़ित पति सत्येंद्र का कहना है कि उनकी पत्नी के साथ उनका डेढ़ साल का बेटा अक्षय कुमार भी लापता है। परिवार की सबसे बड़ी चिंता मासूम बच्चे को लेकर है। परिजनों का कहना है कि बच्चे की सुरक्षा को लेकर वे बेहद चिंतित हैं और हर गुजरते दिन के साथ उनकी बेचैनी बढ़ती जा रही है।

परिवार का आरोप है कि महिला को बहला-फुसलाकर घर से ले जाया गया है। घटना के बाद से पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि उन्हें न तो महिला की वर्तमान स्थिति की जानकारी है और न ही बच्चे के बारे में कोई सूचना मिल पा रही है। इससे परिवार लगातार मानसिक तनाव में है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि महिला और बच्चे को सुरक्षित बरामद करने के लिए जल्द से जल्द जांच तेज की जाए। साथ ही उन्होंने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी को अंजली देवी या उनके साथ मौजूद बच्चे के संबंध में कोई जानकारी मिले तो तत्काल नजदीकी पुलिस थाने या संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है। परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी गुहार सुनेगा और मां-बेटे को सुरक्षित खोजकर परिवार से मिलाएगा। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।#AnjaliDeviMissing #EtawahNews #MissingMother #ChildMissingCase #AkshayKumar #FamilyInDistress #UPBreakingNews #MissingWomanAlert #SearchForAnjali #PublicHelpNeeded #MotherAndChildMissing #JusticeForFamily #PoliceInvestigation #HindiNewsToday #KanchanKiReport #EtawahBreaking #GroundReport #WomanMissingCase #UrgentSearch #BreakingHindiNews