Friday, July 3, 2026
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हांसोल में जमीन और रास्ते के विवाद ने लिया हिंसक रूप, महिला से छेड़छाड़ का आरोप; परिवार बोला- घर में घुसना हुआ मुश्किल, जान का खतरा

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रिपोर्ट: कंचन

अहमदाबाद। शहर के हांसोल क्षेत्र में एक परिवार और पड़ोसियों के बीच चल रहा मकान एवं रास्ते का विवाद अब गंभीर मारपीट, छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकियों तक पहुंच गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों ने उनके घर तक पहुंचने वाला रास्ता बंद कर दिया है, विरोध करने पर परिवार के सदस्यों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई और महिला के साथ अभद्रता करते हुए उसके कपड़े फाड़ने का प्रयास किया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल सका है और आरोपियों के दबाव के कारण मामला दबाने की कोशिश की जा रही है।

पीड़िता निरूबेन राजूभाई सराणिया ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि उनके पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों की लंबे समय से उनके मकान पर नजर है। आरोप है कि पड़ोसी उन्हें मकान बेचने का दबाव बना रहे हैं और इसके लिए लगातार धमकियां दे रहे हैं। परिवार का कहना है कि आरोपियों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि मकान नहीं बेचा गया तो उन्हें चैन से जीने नहीं दिया जाएगा।

पीड़ित परिवार के अनुसार 28 अप्रैल 2026 को घर से आने-जाने वाली गली को बंद करने का प्रयास किया गया था। विरोध करने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और मामला पुलिस तक पहुंचा। बाद में दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र पर छोड़ा गया, लेकिन इसके बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ। परिवार का आरोप है कि आरोपियों ने रातों-रात रास्ता बंद कर दिया, जिससे घर तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया।

परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी बन चुकी है कि घर में प्रवेश करने के लिए उन्हें वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि रास्ते पर निर्माण कर दिया गया है, जिससे उनका आवागमन लगभग ठप हो गया है। इस कारण छोटे बच्चों सहित पूरे परिवार को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि 10 जून 2026 को सभी आरोपी ठनठनभाई एदुभाई सराणिया, वयस्क, व्यवसाय व्यापार (गायों की खरीद-बिक्री),खुमाताभाई ठनठनभाई सराणिया,आशिकभाई जीतुभाई सराणिया,राजेंद्रभाई आलमभाई सराणिया,गीथाभाई गोविंदभाई सराणिया
सभी निवासी – सराणिया वास, इंदिरा ब्रिज के पास, हांसोल,अहमदाबाद।

एकजुट होकर उनके घर पहुंचे और उनके पति तथा बेटे पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। परिवार का दावा है कि एक सदस्य का हाथ भी गंभीर रूप से घायल हो गया। मारपीट के बाद परिवार को जान बचाकर घर छोड़कर भागना पड़ा और उन्होंने गांव के एक मुखिया के घर में शरण ली।

मामले का सबसे गंभीर पहलू तब सामने आया जब पीड़िता की पुत्री आरतीबेन ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने रास्ते में उसे जबरन पकड़ लिया और उसके साथ छेड़छाड़ की। परिवार का कहना है कि युवती के कपड़े फाड़ने का प्रयास किया गया तथा उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। आसपास मौजूद लोगों के हस्तक्षेप के बाद ही युवती को बचाया जा सका।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद जब वे शिकायत लेकर एयरपोर्ट पुलिस थाने पहुंचे तो उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने उच्च अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। परिवार ने आरोपियों के खिलाफ छेड़छाड़, मारपीट, धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी वडाली तथा अहमदाबाद क्षेत्र में गायों की अवैध खरीद-बिक्री और कथित रूप से वध से संबंधित गतिविधियों में संलिप्त हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि हिन्दू समाज में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है तथा उसकी रक्षा और देखभाल करना नैतिक कर्तव्य माना जाता है। इसलिए इस संबंध में भी उचित जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की प्रार्थना की जाती है

परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी आर्थिक रूप से प्रभावशाली हैं और इसी कारण विभिन्न स्तरों पर दबाव बनाकर कार्रवाई को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि कई जगहों पर पैसे के दम पर मामले को दबाया जा रहा है, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद लगातार कमजोर होती जा रही है।

पीड़ितों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने, सुरक्षा उपलब्ध कराने और बंद किए गए रास्ते को पुनः खुलवाने की मांग की है।

परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो किसी भी समय बड़ी और अप्रिय घटना घट सकती है। फिलहाल पूरे इलाके में इस मामले को लेकर चर्चा का माहौल है और लोग प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।

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हनुमान मंदिर की जमीन पर टंकी निर्माण को लेकर बड़ा विवाद, किसानों ने लगाया भूमि हड़पने का आरोप, प्रशासन से लगाई रोक की गुहार

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कंचन की रिपोर्ट

शाजापुर जिले की कालापीपल तहसील के ग्राम कमालपुर में हनुमान मंदिर के आसपास स्थित भूमि को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। वर्षों पुराने राजस्व रिकॉर्ड, बंदोबस्त की कथित त्रुटियों और भूमि सीमांकन के मुद्दे ने अब नया मोड़ ले लिया है। ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि बंदोबस्त के दौरान हुई गंभीर गलती के कारण उनकी निजी कृषि भूमि को मंदिर की भूमि में जोड़ दिया गया, जिससे उनकी जमीन का रकबा कम हो गया। अब इसी विवादित भूमि पर ग्राम पंचायत द्वारा पानी की टंकी निर्माण की तैयारी किए जाने से मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

ग्राम कमालपुर निवासी शंकरलाल शर्मा, गोविन्दराम शर्मा एवं अन्य किसानों का कहना है कि हनुमान मंदिर के पास स्थित सर्वे नंबर 838 एवं 839 की भूमि का मूल रकबा लगभग 0.418 हेक्टेयर था, लेकिन वर्ष 2011-12 के बंदोबस्त के दौरान कथित त्रुटि के चलते इसे बढ़ाकर नए सर्वे नंबर 675 में लगभग 0.620 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया। किसानों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में उनकी निजी भूमि का हिस्सा भी मंदिर की भूमि में जोड़ दिया गया, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

प्रार्थियों के अनुसार उनकी पुश्तैनी भूमि सर्वे नंबर 1183 रकबा 0.257 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी, लेकिन बंदोबस्त के बाद यह भूमि रिकॉर्ड में मंदिर की भूमि में समाहित हो गई। किसानों का दावा है कि इस त्रुटि के कारण उनकी लगभग 16 बिस्वा भूमि प्रभावित हुई है। उन्होंने इस संबंध में तहसीलदार, कलेक्टर, एसडीएम न्यायालय शुजालपुर सहित विभिन्न राजस्व अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन प्रस्तुत किए, लेकिन अब तक अंतिम निराकरण नहीं हो सका है।

मामले को लेकर अनुविभागीय अधिकारी न्यायालय शुजालपुर में प्रकरण भी विचाराधीन बताया जा रहा है। इसी बीच ग्राम पंचायत द्वारा विवादित क्षेत्र में पानी की टंकी निर्माण की प्रक्रिया शुरू किए जाने की सूचना मिलने पर किसानों ने प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि जब तक न्यायालय से अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए, अन्यथा भविष्य में भूमि विवाद और अधिक जटिल हो जाएगा।

राजस्व अभिलेखों के अनुसार नायब तहसीलदार कालापीपल द्वारा जनवरी 2026 में संबंधित राजस्व निरीक्षक और पटवारियों को भूमि सीमांकन करने के आदेश भी जारी किए गए थे। आदेश में स्पष्ट रूप से आवेदित भूमि का सीमांकन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि आज तक विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

विवाद को लेकर ग्राम स्तर पर पंचनामा भी तैयार किया गया, जिसमें स्थानीय पंचों ने यह उल्लेख किया कि मंदिर परिसर और उसके आसपास की भूमि के रकबे में बढ़ोतरी होने से कई किसानों की जमीन प्रभावित हुई है। पंचनामे में यह भी कहा गया कि जब तक संबंधित प्रकरण का अंतिम निराकरण नहीं हो जाता, तब तक विवादित क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक लगाई जानी चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच नहीं करता और विवादित भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहता है तो क्षेत्र में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पहले भूमि सीमांकन, रिकॉर्ड की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी कराई जाए, उसके बाद ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य कराया जाए।

अब सभी की निगाहें प्रशासन और न्यायालय के आगामी फैसले पर टिकी हैं। देखना होगा कि वर्षों से चले आ रहे इस भूमि विवाद का समाधान कब निकलता है और प्रभावित किसानों को न्याय मिल पाता है या नहीं।#HanumanMandirLandDispute
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दो बच्चों की मां रीभा बनी सोशल मीडिया की नई सनसनी, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बना रही वीडियो

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देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून जिले के ग्राम रामपुर चौई, सेलाकुई क्षेत्र की रहने वाली 23 वर्षीय रीभा इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से अपनी अलग पहचान बना रही हैं। दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ वह लगातार वीडियो कंटेंट तैयार कर रही हैं और अपने सपनों को नई उड़ान देने में जुटी हुई हैं। रीभा का कहना है कि वह केवल शौक के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और आर्थिक मजबूती के लिए भी सोशल मीडिया के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं।

जानकारी के अनुसार रीभा पिछले 15 से 20 दिनों से लगातार वीडियो बना रही हैं और अब तक करीब 8 से 9 वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर चुकी हैं। खास बात यह है कि वह अपने सभी वीडियो स्वयं के मोबाइल फोन से रिकॉर्ड करती हैं और एडिटिंग से लेकर अपलोडिंग तक का पूरा काम खुद ही करती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी मेहनत और आत्मविश्वास लोगों को प्रभावित कर रहा है।

रीभा के पति मिथिलेश कुमार कंपनी में नौकरी करते हैं और पत्नी के इस प्रयास में पूरा सहयोग दे रहे हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच पति-पत्नी दोनों अपने बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं। रीभा का मानना है कि यदि सोशल मीडिया पर उन्हें अच्छी पहचान और सफलता मिलती है तो वह उससे होने वाली आय का उपयोग अपने बच्चों की शिक्षा, पालन-पोषण और बेहतर भविष्य के लिए करेंगी।

उनकी पांच वर्षीय बेटी निहारिका और सात महीने का बेटा आरव उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। रीभा बताती हैं कि बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर जीवन देने का सपना ही उन्हें हर दिन कुछ नया करने के लिए प्रेरित करता है। बच्चों की देखभाल, घर के काम और वीडियो निर्माण के बीच वह अपने समय का बेहतर प्रबंधन कर रही हैं।

रीभा मुख्य रूप से हिंदी गीतों पर लिपसिंक और शॉर्ट वीडियो बनाती हैं। उनकी अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और गानों के साथ शानदार तालमेल दर्शकों को पसंद आ रहा है। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो धीरे-धीरे लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं और स्थानीय स्तर पर उनकी चर्चा बढ़ती जा रही है।

इंस्टाग्राम पर “रीभा कुमारी” नाम से सक्रिय यह युवा कंटेंट क्रिएटर चाहती हैं कि उनके वीडियो केवल उनके गांव या आसपास के क्षेत्रों तक सीमित न रहें, बल्कि पूरे उत्तराखंड और देशभर के लोग उनके हुनर को देखें। उनका सपना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से वह एक सफल क्रिएटर बनें और अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकें।

ग्राम रामपुर चौई, सेलाकुई, देहरादून (पिन कोड- 248011) की रहने वाली रीभा की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभर रही है जो पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को भी पूरा करना चाहती हैं। दो छोटे बच्चों की मां होने के बावजूद उनका लगातार सक्रिय रहना और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण यह साबित करता है कि मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत के दम पर हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।

अब सोशल मीडिया पर रीभा की बढ़ती सक्रियता और उनके सपनों की उड़ान को देखते हुए क्षेत्र के लोग भी उम्मीद जता रहे हैं कि आने वाले समय में वह उत्तराखंड की चर्चित डिजिटल क्रिएटरों में अपनी जगह बना सकती हैं

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अहमदाबाद में भूमि विवाद पर नया मोड़, कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई से पीछे हट रही नगर पालिका, पेड़ों की सुरक्षा को लेकर बढ़ा संघर्ष

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फलदार पेड़ों को नुकसान की आशंका पर उच्च अदालत ने बदला निचली अदालत का आदेश, नगर पालिका की कार्यशैली पर उठे सवाल

अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद से सामने आए एक पुराने भूमि विवाद ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। वर्षों से चल रहे इस मामले में भूमि पर लगे फलदार और छायादार पेड़ों की सुरक्षा को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों और शपथ पत्र के आधार पर उच्च अदालत ने निचली अदालत के आदेश में संशोधन करते हुए नए निर्देश जारी किए हैं। वहीं आरोप है कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद नगर पालिका अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रही, जिससे विवाद और गहरा गया है।

मामले में याचिकाकर्ता मोहम्मद अब्दुलमिया मलिक ने शपथ पत्र दाखिल कर अदालत को बताया कि याचिका में उल्लेखित सभी तथ्य उनके ज्ञान, विश्वास और उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार सत्य हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका के साथ संलग्न दस्तावेज मूल अभिलेखों की सही प्रतिलिपियां हैं।

दस्तावेजों के अनुसार विवादित भूमि पर वर्षों से नारियल, जामुन, बादाम, चीकू समेत कई प्रकार के फलदार और छायादार पेड़ मौजूद हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि इन पेड़ों को तैयार करने और संरक्षित रखने में लंबे समय की मेहनत और संसाधन लगे हैं। उनका कहना है कि यदि पेड़ों को काटा गया या किसी प्रकार की क्षति पहुंचाई गई तो इसकी भरपाई संभव नहीं होगी।

मामले के दौरान पंचायत और अन्य संबंधित पक्षों के बीच भूमि के स्वामित्व, उपयोग और उससे जुड़े अधिकारों को लेकर मतभेद सामने आए। सुनवाई के दौरान यह तर्क भी रखा गया कि कुछ पेड़ पहले से मौजूद थे जबकि कुछ बाद में लगाए गए थे। भविष्य में इन पेड़ों से होने वाली आय और उनके उपयोग को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच विवाद बना हुआ है।

सुनवाई के दौरान निचली अदालत के आदेश पर आपत्ति दर्ज कराई गई। इसके बाद उच्च अदालत के समक्ष विभिन्न दस्तावेज, पंचनामा और लिखित बयान प्रस्तुत किए गए। सभी तथ्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने माना कि न्याय के हित में पहले पारित आदेश में संशोधन आवश्यक है।

अदालत ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि यदि वर्तमान स्थिति में बदलाव किया गया या भूमि पर मौजूद पेड़ों को नुकसान पहुंचा तो संबंधित पक्ष को अपूरणीय क्षति हो सकती है। इसी आधार पर निचली अदालत के आदेश में बदलाव करते हुए नए निर्देश जारी किए गए और यथास्थिति बनाए रखने पर जोर दिया गया।

हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद नगर पालिका की ओर से अपेक्षित अनुपालन नहीं किया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रशासन की भूमिका और न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

इस मामले ने भूमि अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय निकायों की जवाबदेही को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें आगामी न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि विवादित भूमि और वहां मौजूद बहुमूल्य पेड़ों के संरक्षण तथा अधिकार का अंतिम फैसला किसके पक्ष में जाता है।

5 लाख रुपए लेकर सर्व पदाधिकारी ने गलत सर्वे किया, पुश्तैनी जमीन से बेदखल होने का दर्द लेकर न्याय की गुहार लगा रहा मुकेश यादव का परिवार

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बांका।

बिहार के बांका जिले के बेलसिरा क्षेत्र से भूमि विवाद और कथित प्रशासनिक अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित भोगता मुकेश कुमार यादव, उनके भाई सियाराम यादव और ललन कुमार यादव ने आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी जमीन को गलत तरीके से दूसरे पक्ष के पक्ष में दर्ज कर दिया गया है। परिवार का दावा है कि उनके पास जमीन से संबंधित पुराने दस्तावेज, बंदोबस्ती रिकॉर्ड, मालगुजारी रसीदें और अन्य राजस्व अभिलेख मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है।

पीड़ित परिवार के अनुसार उनके पिता स्वर्गीय फुल्कीत प्रसाद यादव के नाम से दर्ज पुश्तैनी भूमि पर वर्षों से उनका अधिकार रहा है। इसी जमीन पर खेती कर परिवार का भरण-पोषण होता था, लेकिन अब कथित रूप से प्रभावशाली लोगों द्वारा कब्जा कर लिए जाने से उनका जीवन संकट में पड़ गया है।

मुकेश कुमार यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मामले की जांच के दौरान संबंधित प्रशासनिक अधिकारी ने कथित रूप से रिश्वत लेकर गलत प्रतिवेदन तैयार कर दिया। पीड़ित का दावा है कि लगभग 5 लाख रुपये लेकर वास्तविक तथ्यों को नजरअंदाज किया गया और उनके पक्ष में मौजूद दस्तावेजों को महत्व नहीं दिया गया।

परिवार का कहना है कि उन्होंने जांच के दौरान सभी आवश्यक कागजात प्रस्तुत किए थे, जिनसे यह साबित होता है कि जमीन उनके पूर्वजों की है। इसके बावजूद कथित रूप से गलत रिपोर्ट बनाकर उनके अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया गया।

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि विपक्षी पक्ष के वकील यादव, राम लखन, मुख्तियार यादव तथा अन्य लोग मिलकर उनकी जमीन पर कब्जा जमाए हुए हैं। परिवार का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वे अपनी ही भूमि का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें खेत में प्रवेश तक करने से रोका जाता है।

उनका दावा है कि जमीन पर कब्जे के कारण खेती पूरी तरह ठप हो गई है और परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है

मुकेश कुमार यादव का कहना है कि उन्होंने कई बार अंचल कार्यालय, राजस्व विभाग और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई टाल दी गई।

परिवार का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच हुई होती तो उन्हें वर्षों तक न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ता।

पीड़ित परिवार ने स्थानीय सरपंच और मुखिया पर भी विपक्षी पक्ष का साथ देने का आरोप लगाया है। परिवार का दावा है कि पंचायत स्तर पर उनकी समस्याओं को अनदेखा किया गया और उन्हें न्याय दिलाने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की गई।

मुकेश कुमार यादव का कहना है कि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन थी। जमीन पर कब्जा होने के बाद परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। बच्चों की शिक्षा, घरेलू खर्च और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना भी कठिन होता जा रहा है।

परिवार का कहना है कि वे आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ सकें या लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाते रहें।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि विपक्षी पक्ष प्रभावशाली है और इसी कारण वे लगातार भय के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। परिवार को आशंका है कि विरोध करने पर उन्हें और अधिक परेशान किया जा सकता है।

मुकेश कुमार यादव ने प्रशासन से सुरक्षा प्रदान करने तथा उनकी पुश्तैनी जमीन पर पुनः कब्जा दिलाने की मांग की है।

पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बंदोबस्ती दस्तावेज, मालगुजारी रसीदें और पुराने राजस्व अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है।

मुकेश कुमार यादव का कहना है कि उनकी मांग केवल इतनी है कि उन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन वापस दिलाई जाए ताकि उनका परिवार दोबारा खेती कर सके और सम्मानजनक जीवन जी सके।

अब यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, भ्रष्टाचार और ग्रामीण न्याय व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।#MukeshKumarYadav
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उत्तराखंड में तीन बच्चों की मां रहस्यमय ढंग से लापता, पति का आरोप- प्रेमी के साथ घर से 5 तोला सोना, चांदी और नकदी लेकर फरार, पत्नी को बेचने की आशंका से सहमा परिवार

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नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां तीन बच्चों की मां के अचानक लापता होने के बाद पति ने एक युवक और उसके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पति का कहना है कि उसकी पत्नी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाया गया और घर में रखे लाखों रुपये के जेवरात व नकदी भी गायब हो गई। इतना ही नहीं, पति ने आशंका जताई है कि कहीं उसकी पत्नी को बेच तो नहीं दिया गया या फिर उसे किसी गलत धंधे में धकेलने की साजिश तो नहीं रची गई है।

मिली जानकारी के अनुसार कालाढूंगी निवासी अब्दुल फहीम वर्तमान में बाजपुर क्षेत्र के ग्राम बरहनी में रहकर राजमिस्त्री का काम करता है। उसकी शादी लगभग 12 वर्ष पहले नगमा से मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार हुई थी। दंपति के तीन छोटे बच्चे हैं, जिनकी उम्र लगभग 8 वर्ष, 6 वर्ष और 4 वर्ष बताई गई है। इसके अलावा उन्होंने एक बेटी को गोद भी लिया हुआ है।

अब्दुल फहीम के अनुसार वह पिछले तीन वर्षों से किराये के मकान में रहकर मेहनत-मजदूरी से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। आरोप है कि 11 मई 2026 को वह काम पर गया हुआ था, इसी दौरान उसकी पत्नी घर से अचानक कहीं चली गई। शाम को घर लौटने पर पत्नी के गायब होने का पता चला तो उसने रिश्तेदारों और ससुराल पक्ष से संपर्क किया, लेकिन वहां भी उसका कोई पता नहीं चला।

पीड़ित का कहना है कि करीब तीन दिन बाद पत्नी के भाई द्वारा उसे कालाढूंगी चौकी लाया गया, जहां पता चला कि वह रवि नामक युवक के साथ थी। इसके बाद समझाइश देकर वह पत्नी को अपने घर वापस ले आया। लेकिन कुछ दिन बाद जब वह फिर मजदूरी करने गया तो पत्नी कथित तौर पर घर में रखा करीब 5 तोला सोना, 200 ग्राम चांदी और 75 हजार रुपये नकद लेकर दोबारा गायब हो गई।

अब्दुल फहीम का आरोप है कि अमरोहा निवासी रवि और उसके परिवार ने उसकी पत्नी को अपने बहकावे में ले लिया और जेवरात तथा नकदी अपने पास रखकर दोनों को कहीं फरार कर दिया। उसने यह भी आरोप लगाया कि रवि और उसके परिवार द्वारा उसकी पत्नी के साथ किसी अनहोनी की आशंका से वह बेहद डरा हुआ है।

पीड़ित का कहना है कि उसकी पत्नी के गायब होने से तीनों मासूम बच्चे मां के बिना बिलख रहे हैं। एक तरफ बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी है तो दूसरी ओर पत्नी की तलाश की चिंता ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया है।

अब्दुल फहीम ने प्रशासन से गुहार लगाते हुए पत्नी को सकुशल बरामद करने तथा आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

रेलवे भर्ती में सरकार कैसे लाएगी तेजी? रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया प्लान, पिछले 1 साल में 43 हजार से ज्यादा लोगों को दी है नौकरी

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केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में रेलवे ने 43 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों की नौकरी दी है। अब रेलवे भर्ती में टेक्नोलॉजी-आधारित सिस्टम की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज (शुक्रवार को) RRB भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भर्ती प्रक्रियाओं में ज्यादा पारदर्शिता, सटीकता और तेजी से काम पूरा करने पर जोर दिया गया है। अब सभी विभागीय परीक्षाएं CBT यानी कंप्यूटर आधारित परीक्षा के जरिए होंगी। रेलवे, टैबलेट-आधारित टेस्टिंग का दायरा बढ़ाएगा।

पिछले वित्त वर्ष में 43 हजार 781 लोगों को दी नौकरी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में 43 हजार 781 उम्मीदवारों को रेलवे में नौकरी दी गई। भारतीय रेलवे ने व्यवस्थित और टेक्नोलॉजी-आधारित प्रक्रिया के जरिए भर्ती में तेजी लाई है।
पिछले वित्त वर्ष में रेलवे ने 18 हजार 799 असिस्टेंट लोको पायलट, 14 हजार 298 टेक्नीशियन और 1 हजार 376 पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती की। सालाना भर्ती कैलेंडर के तहत निकली वैकेंसी की जानकारी को उम्मीदवारों ने काफी पसंद किया: अश्विनी वैष्णव

रेलवे भर्ती में टेक्नोलॉजी-आधारित सिस्टम की जरूरत पर जोर
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज भारतीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की भर्ती प्रक्रिया पर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने ज्यादा पारदर्शी, सटीक और टेक्नोलॉजी-आधारित सिस्टम की जरूरत पर जोर दिया।

सेना के जवान की बेटी ने मुख्यमंत्री से लगाई अंतिम उम्मीद, बोली- पेंशन और बेटी को नौकरी नहीं मिली तो जीना होगा मुश्किल

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एक विधवा महिला की दर्दभरी पुकार ने प्रशासनिक व्यवस्था और जनकल्याण योजनाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री को लिखे गए भावुक पत्र में महिला ने अपनी आर्थिक तंगी, बीमारी और परिवार के भविष्य को लेकर ऐसी व्यथा सुनाई है जिसे पढ़कर किसी का भी दिल पसीज सकता है। महिला का कहना है कि अब उसके पास सरकार से मदद मांगने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

शाहीन परविन खान नामक महिला ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में बताया कि वह विधवा हैं और उम्र के इस पड़ाव पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं। उन्होंने लिखा है कि अब उनसे कोई काम नहीं होता, उन्हें बीपी सहित अन्य बीमारियां हैं और परिवार की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। घर में आर्थिक संकट इतना गहरा गया है कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी कठिन होता जा रहा है।

महिला ने अपने पत्र में बताया कि उनके पिता भारतीय सेना में थे और देश की रक्षा के लिए उन्होंने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया। उनका कहना है कि उनके पिता ने देश के लिए संघर्ष किया, गोलियां तक झेलीं और राष्ट्र की सेवा की, लेकिन आज उनकी बेटी और नाती अभावों में जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सैनिक परिवारों की यह स्थिति है तो आम नागरिकों की परेशानियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

शाहीन परविन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उन्हें उनकी पात्रता के अनुसार पेंशन उपलब्ध कराई जाए और उनकी बेटी को सरकारी नौकरी दी जाए। उनका कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि उनके नाती का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। उसकी पढ़ाई-लिखाई और जीवन को लेकर वह दिन-रात चिंतित रहती हैं, जिसके कारण मानसिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

पत्र में महिला ने भावुक शब्दों में लिखा है कि भविष्य की चिंता ने उनका जीवन मुश्किल बना दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि अब उनके परिवार की उम्मीदें केवल सरकार पर टिकी हैं। यदि समय रहते सहायता नहीं मिली तो परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। महिला ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनके पास जीने और मरने के बीच निर्णय लेने जैसी मजबूरी की स्थिति बनती जा रही है और इस कठिन समय में सरकार ही उनके परिवार का सहारा बन सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तत्काल जांच और सहायता की आवश्यकता है। वहीं यह मामला एक बार फिर उन परिवारों की समस्याओं को उजागर करता है जो कभी देश सेवा से जुड़े रहे, लेकिन आज आर्थिक संकट और असुरक्षा के बीच जीवन गुजारने को मजबूर हैं।

अब सभी की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं कि एक सैनिक परिवार की बेटी की इस दर्दभरी गुहार पर कब तक संज्ञान लिया जाता है और क्या समय रहते इस परिवार को राहत और न्याय मिल पाएगा।

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वापी की कंपनी में कार्यरत समस्तीपुर के मजदूर की डेढ़ महीने से अधिक की सैलरी रुकी, परिवार पर बढ़ा आर्थिक संकट

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वापी (गुजरात)। बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले गजेंद्र मंडल, जो वर्तमान में गुजरात के वापी स्थित सरला परफॉर्मेंस फाइबर्स कंपनी में कार्यरत हैं, अपनी रुकी हुई सैलरी को लेकर गंभीर आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। गजेंद्र मंडल कंपनी के कैंटीन विभाग में पियॉन के पद पर कार्यरत हैं और उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने 1 नवंबर 2024 को कंपनी में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। मजदूर का कहना है कि वह पिछले लंबे समय से मेहनत और ईमानदारी के साथ काम कर रहे हैं।

पीड़ित गजेंद्र मंडल के अनुसार उनकी करीब एक महीने दो दिन की सैलरी अब तक नहीं दी गई है। उनका आरोप है कि उनकी मजदूरी का भुगतान रोककर रखा गया है, जिससे उनके सामने रोजमर्रा के खर्चों और परिवार के पालन-पोषण की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि मजदूरी ही उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत है और समय पर वेतन नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

गजेंद्र मंडल ने आरोप लगाया है कि विपिन कुमार जो HR है कंपनी के और वरुण नरोला नामक व्यक्तियों द्वारा उनकी सैलरी रोककर रखी गई है। पीड़ित का कहना है कि कई बार वेतन जारी करने का आग्रह करने के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। इससे वह मानसिक रूप से भी परेशान हैं और लगातार चिंता में जी रहे हैं।

मजदूर का कहना है कि उन्होंने हमेशा कंपनी के नियमों का पालन करते हुए पूरी निष्ठा से कार्य किया है, लेकिन इसके बावजूद उनकी मेहनत की कमाई समय पर नहीं मिल रही है। उनका कहना है कि मजदूर वर्ग के लिए समय पर वेतन मिलना सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी के सहारे उनका परिवार चलता है।

गजेंद्र मंडल ने संबंधित अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन से उनकी बकाया सैलरी जल्द जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए श्रम विभाग सहित संबंधित सरकारी कार्यालयों का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।

हापुड़ में किसान की फसल सूखने की कगार पर, पैसा जमा करने के बाद भी नहीं मिला नलकूप का बिजली कनेक्शन, अधिकारियों से लगाई गुहार

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हापुड़। जिले के धौलाना ब्लॉक के शाहपुर फगौता गांव के एक किसान ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत नलकूप के लिए निर्धारित पूरी धनराशि जमा करने के बावजूद महीनों बाद भी उसे बिजली कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया गया है। किसान का कहना है कि बिजली आपूर्ति न मिलने के कारण उसकी फसलें सूखने लगी हैं और उसे भारी आर्थिक नुकसान का खतरा पैदा हो गया है।

शाहपुर फगौता निवासी प्रेमपाल सिंह पुत्र निर्मल सिंह ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत अपने खेत में नया नलकूप लगवाया था। नलकूप को संचालित करने के लिए बिजली विभाग द्वारा निर्धारित समस्त शुल्क जमा कर दिया गया। फगौता बिजलीघर के जेई द्वारा उन्हें 25 केवीए का नया कनेक्शन आवंटित किया गया, जिसकी डीपी दान सिंह के नाम से बताई गई।

प्रेमपाल सिंह का आरोप है कि जब विभाग की ओर से लाइन खींचने के लिए श्रमिक पहुंचे तो गांव के ही दान सिंह और विकास नामक व्यक्तियों ने विरोध करते हुए बिजली लाइन बिछाने से रोक दिया। आरोप है कि दोनों ने यह कहते हुए कार्य रुकवा दिया कि यह उनका क्षेत्र है और यहां से लाइन नहीं गुजरने दी जाएगी।

पीड़ित किसान का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार संबंधित जेई, एसडीओ और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परेशान होकर उन्होंने जिलाधिकारी हापुड़, विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों तथा प्रशासन को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रेमपाल जी ने से कई जगह आवेदन भी दिए हैं पर अभी तक नहीं किसी प्रशासन ने सुना और ना ही इस पर खबर लि इसीलिए यहां मीडिया द्वारा मदद चाहते हैं और प्रशासन जल्द से जल्द इसमें कार्रवाई करें

प्रेमपाल सिंह ने बताया कि समय पर सिंचाई नहीं होने के कारण उनकी फसलें बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। यदि जल्द बिजली कनेक्शन चालू नहीं कराया गया तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं और नलकूप तक बिजली लाइन पहुंचाकर आपूर्ति शुरू कराई जाए।

ग्रामीण क्षेत्र में किसानों को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बावजूद यदि लाभार्थियों को समय पर बिजली कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है, तो इससे योजनाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है और पीड़ित किसान को राहत मिल पाती है या नहीं।