Monday, June 15, 2026
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11 रुपये के प्रसाद’ से शुरू हुई व्यवस्था पर उठे सवाल, अब रोजाना हजारों की चढ़ोतरी और भारी भीड़ के दावों से चर्चा में बेहटा जवी

बदायूं।
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की बिल्सी तहसील स्थित ग्राम बेहटा जवी इन दिनों एक कथित चमत्कारी उपचार केंद्र को लेकर सुर्खियों में है। जहां कभी सीमित संख्या में लोग पहुंचते थे, वहीं अब प्रतिदिन दूर-दराज के जिलों और राज्यों से सैकड़ों लोगों के पहुंचने के दावे किए जा रहे हैं। इस बीच स्थानीय लोगों ने केंद्र संचालक और वहां की गतिविधियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय पहले तक संबंधित व्यक्ति स्वयं को केवल पथरी, गांठ और कुछ सामान्य समस्याओं के लिए पारंपरिक जड़ी-बूटी आधारित उपाय बताने वाला व्यक्ति बताते थे। दावा किया जाता था कि उपचार के बदले केवल 11 या 21 रुपये प्रसाद स्वरूप लिए जाते हैं और किसी प्रकार के धन संग्रह या लालच से उनका कोई संबंध नहीं है।

लेकिन अब स्थानीय लोगों का आरोप है कि हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं और कई श्रद्धालु स्वेच्छा से सैकड़ों से लेकर हजारों रुपये तक भेंट कर रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि परिसर में रखा बड़ा दान पात्र दिनभर में कई बार भर जाता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों के अनुसार संबंधित परिवार पहले मुख्य रूप से खेती-बाड़ी पर निर्भर था। उनके खेतों में भिंडी, तोरी, लौकी, ग्वार की फली, टिंडा, खीरा, तरबूज और खरबूजे जैसी सब्जियों और फसलों की खेती होती रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले परिवार खेती को प्राथमिकता देता था, लेकिन अब कथित उपचार केंद्र की बढ़ती लोकप्रियता के बाद पूरा ध्यान वहीं केंद्रित हो गया है।

क्षेत्र में सबसे बड़ी बहस उन दावों को लेकर छिड़ी हुई है जिनमें बिना चिकित्सकीय जांच और आधुनिक चिकित्सा के विभिन्न रोगों के ठीक होने की बात कही जाती है। कई स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गंभीर बीमारियों का इलाज केवल प्रशिक्षित चिकित्सकों और वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति से ही संभव है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को इलाज के नाम पर अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए।

कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि केंद्र के आसपास ऐसा माहौल बना दिया गया है कि अनेक लोग संबंधित व्यक्ति को असाधारण शक्तियों वाला मानने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि वास्तव में कोई चमत्कारी शक्ति है तो उसका प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने आना चाहिए। वहीं समर्थकों का दावा है कि कई लोगों को लाभ मिला है, जिसके कारण वहां भीड़ बढ़ रही है।

मामले का एक संवेदनशील पहलू महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सामने आया है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि केंद्र पर मौजूद कुछ युवक महिला आगंतुकों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। एक युवती के साथ कथित बदसलूकी की चर्चा भी स्थानीय स्तर पर हो रही है। हालांकि इन आरोपों की किसी सक्षम एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और न ही इस संबंध में आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी प्रकार के उपचार, चमत्कार या रोगमुक्ति के दावे किए जा रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को मामले की जांच करनी चाहिए। उनका मानना है कि लोगों की आस्था का सम्मान होना चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और चिकित्सकीय परामर्श को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

गांव और आसपास के क्षेत्रों में इस पूरे प्रकरण को लेकर चर्चा का माहौल है। एक पक्ष इसे आस्था का विषय बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अंधविश्वास और आर्थिक लाभ से जोड़कर देख रहा है। फिलहाल संबंधित व्यक्ति या उनके प्रतिनिधियों की ओर से आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हालांकि, समाचार में वर्णित सभी आरोप स्थानीय लोगों और आगंतुकों के दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की वास्तविक स्थिति किसी निष्पक्ष प्रशासनिक, चिकित्सकीय अथवा कानूनी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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