Friday, July 3, 2026
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क्रूड ऑयल सस्‍ता होने के बाद क्‍या कम हुए पेट्रोल-डीजल के दाम? 20 जून का ताजा भाव चेक कर लें

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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बात बनने के साथ-साथ इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर यानी युद्धविराम फिर से लागू होने के बाद कच्‍चे तेल की कीमतें काफी हद तक नियंत्रण में हैं. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें मिडिल ईस्‍ट तनाव से पहले के स्‍तर पर आ गई हैं. कच्‍चे तेल का भाव 76 डॉलर से 80 डॉलर के बीच चल रहा है. ऐसे में पेट्रोल पंप पहुंच रहे लोगों की नजर सबसे पहले रेट चार्ट पर ही जा रही है. कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद उनके मन में यही सवाल है कि भारत में पेट्रोल और डीजल कब तक सस्ता होगा? चूंकि क्रूड ऑयल का बिजनेस फ्यूचर में होता है, यानी फिलहाल जो रेट दिख रहे हैं, उस रेट पर तेल जुलाई और अगस्‍त डिलीवर के लिए हैं. ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने में अभी देर है. अंतिम निर्णय सरकार और तेल कंपनियां लेंगी. बहरहाल आज शनिवार, 20 जून के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं.

हालांकि आज पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन कई शहरों में पेट्रोल-डीजल के भाव में कुछ पैसों का अंतर देखा जा रहा है. बाइक, कार से लेकर ट्रैक्‍टर और ट्रक तक, टंकी फुल करवाने से पहले जान लीजिए कि देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल के क्‍या भाव चल रहे हैं.

आज क्‍या भाव चल रहा पेट्रोल-डीजल?

तेल कंपनियों की ओर से जारी दरों के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बनी हुई है. वहीं, कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये, मुंबई में 111.21 रुपये और चेन्नई में 107.77 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है. बाजार के जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम हुई हैं. हालांकि जब से कीमतें 100 डॉलर/बैरल के आसपास या उससे भी ज्‍यादा हो गई थीं, तब से सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और हवाई ईंधन (जेट फ्यूल) पर हर दिन करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है. फिलहाल ये आंकड़ा कुछ कम होकर 650 करोड़ रुपये प्रतिदिन रुपये तक आया है.

बात करें डीजल की तो शनिवार को दिल्ली में डीजल का भाव 95.20 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है. इसके अलावा कोलकाता में ग्राहकों को एक लीटर डीजल के लिए 99.82 रुपये, मुंबई में 97.83 रुपये और चेन्नई में 99.55 रुपये देने पड़ रहे हैं. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दामों में युद्ध के चलते आए उछाल के बाद अमेरिका-ईरान शांति समझौत के चलते गिरावट आई है, जिससे आगे दाम और कम होने की उम्‍मीद बढ़ी है

भारत में बढ़ रही है दोहरी स्वास्थ्य चुनौती, शहरों में एक तरफ मोटापा-डायबिटीज तो दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में पोषण की कमी

भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी हैं. जहां पहले देश की सबसे बड़ी चिंता भूख और पोषण की कमी को दूर करना थी, वहीं अब मोटापा और डायबिटीज जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां एक तरफ बड़ी संख्या में लोग जरूरत से ज्यादा कैलोरी का सेवन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ लाखों लोग अभी भी पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं पा रहे हैं.

विशेषज्ञ इस स्थिति को “डबल न्यूट्रिशन बर्डन” यानी दोहरी पोषण चुनौती कहते हैं. यह केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता का भी संकेत माना जा रहा है.

मोटापा बन रहा है बड़ी चिंता

सर्वेक्षण के अनुसार देश में 30 प्रतिशत से अधिक महिलाएं और 27 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में हैं. खासकर शहरी क्षेत्रों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है. विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बैठे रहना, फास्ट फूड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन तथा शारीरिक गतिविधियों में कमी इसके प्रमुख कारण हैं. हालांकि अब यह समस्या केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है. बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों का असर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी दिखाई देने लगा है

डायबिटीज के बढ़ते मामले

मोटापे के साथ-साथ डायबिटीज के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. NFHS-6 के अनुसार करीब 18 प्रतिशत महिलाओं और 21 प्रतिशत पुरुषों में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया या वे डायबिटीज की दवाएं ले रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोगों ने समय रहते अपनी जीवनशैली में बदलाव नहीं किया तो आने वाले वर्षों में हृदय रोग, किडनी संबंधी बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ सकती हैं

भाबीजी घर पर है एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे ने बताया एक्टिंग छोड़ने का प्लान, टीवी प्रोड्यूसर्स को कहा माफिया

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भाबीजी घर पर है एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे पिछले काफी दिनों से चर्चा में हैं, जिसका कारण उनके द्वारा शो के प्रोड्यूसर संजय कोहली पर लगाया गया सेक्सुअल हरैसमेंट का झूठा आरोप है. वहीं इसके कारण उन्हें काफी ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा. जबकि हाल ही में उन्होंने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर अपने स्ट्रगल का सामना करने को लेकर बताया. इतना ही नहीं उन्होंने टीवी इंडस्ट्री के प्रोड्यूसर्स को वाइट कॉलर माफिया भी कहा और इंडस्ट्री से  कन्फेशन को लेकर मिली आलोचना का सामना करने पर भी रिएक्शन दिया. वहीं उन्होंने अपने एक्टिंग की दुनिया को अलविदा कहने की ओर भी हिंट दिया.

शिल्पा शिंदे ने टीवी के प्रोड्यूसर्स को बताया माफिया

हाल ही में एक्टर शहजादा धामी ने कथित अनपेड फीस को लेकर लंबे समय से चल रहे स्ट्रगल के बारे में बात की, जो कि उन्होंने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में देखा है. वहीं शिल्पा शिंदे ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर इसी को रिशेयर किया और एक दमदार वीडियो के जरिए उन्होंने प्रोड्यूसर्स और आर्टिस्ट के साथ उनके अनुचित व्यवहार की आलोचना की. उन्होंने कहा, टीवी इंडस्ट्री के प्रोड्यूसर्स माफिया की तरह काम करते हैं. वह वाइट कॉलर वाले माफिया की तरह हैं. जो प्रोड्यूसर कलाकारों का साथ देने से इनकार करते हैं, उन्हें धमकाया जाता है और कहा जाता है कि अगर आगे उनके साथ कुछ हुआ, तो कोई भी उनके साथ खड़ा नहीं होगा

पेमेंट रोकने पर सुनाई खरी खोटी

आगे उन्होंने कहा, “उनके काम में भी रुकावट डाली जाती है. हम कलाकार कुछ नहीं कर सकते क्योंकि प्रोड्यूसर हमारा पेमेंट 90 दिनों तक रोककर रखते हैं और अक्सर वह पेमेंट मिलता ही नहीं है.” वहीं भाबीजी घर पर हैं कॉन्ट्रोवर्सी के दौरान अपने सहकर्मियों से सपोर्ट ना मिलने पर निराशा जाहिर करते हुए शिल्पा शिंदे ने कहा, आज भी जब उनके पास मेरे साथ खड़ा होने का मौका है. वह नहीं हैं. मुझे आवाज उठाने की जरुरत नहीं है. कोई नहीं जानता कि उस समय मुझ पर क्या बीती. लोगों ने मुझ पर झूठा आरोप लगाया कि मैंने ये सब पैसों के लिए किया है. आज 10 साल बाद. वो प्रोड्यूसर टीवी शोज और फिल्में बना रहा है. खुद के लिए लड़ने का जिगरा किसी के पास नहीं है. और फिर लोग सुसाइड जैसे बड़े कदम उठा लेते हैं. ”

सब्जी बेचने के लिए तैयार शिल्पा शिंदे

आगे उन्होंने कहा, आज मौका था, मेरे को आर्टिस्ट बोल सकते थे इस मैटर में. मेरा इमान जानता है कि क्या हुआ था मेरे साथ और क्या नहीं. मुझे नहीं काम करना है आप लोगों के साथ. चाहिए भी नहीं मुझे रोल. घटिया काम करते हो आप लोग. आज कल क्रिएटिविटी बची ही नहीं है. सब बकवास शोज करते हो आप लोग. इस तरह के घटिया आर्टिस्ट हैं इस इंडस्ट्री में. आप इसमें काम करना चाहते हो? इस तरह के घटिया आर्टिस्ट हैं इस इंडस्ट्री में. आप इसमें काम करना चाहते हो. मुझे करना ही नहीं है. रास्ते में सब्जी बेचूंगी पर ऐसे लोगों की नहीं चाटूंगी में.

गोली की रफ़्तार से हुए गोल पर नहीं टूटा सबसे तेज़ गोल का रिकॉर्ड, ब्राज़ील ने दिखाया सांबा स्टाइल फ़ुटबॉल का जादू

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इस्माइल साइबारी के गोल से मोरक्को ने स्कॉटलैंड को हराकर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट स्टेज के लिए अपनी जगह लगभग पक्की कर ली है. मैच के शुरुआती मिनट के अंदर ही इस्माइल साइबारी को ब्राहिम डियाज से सटीक पास मिला. साइबारी ने स्कॉटिश गोलकीकपर एंगस गन को छकाते हुए गेंद नेट में डाल दी. मैच के 71वें सेकेंड में हुआ यह गोल जारी वर्ल्ड कप का सबसे तेज गोल है जबकि वर्ल्ड कप इतिहास में मोरक्को की तरफ से किया गया सबसे तेज गोल है. मोरक्को ने अपना पिछला मुकाबला ब्राजील के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेला था और साइबारी ने उस मुकाबले में भी गोल किया था.

स्पेन में जन्में और बेल्जियम में पले-बढ़े 25 साल के साइबारी कथित तौर पर डच चैंपियन पीएसवी आइंडहोवन से  55 मिलियन यूरो में बायर्न म्यूनिख ट्रांसफर होने वाले हैं और इसमें महज औपचारिकता बाकी है. शानिवार को उन्होंने जिस तरह से गोलकीपर एंगस गन को पीछे छोड़ा, उसके पता चला कि उनको लेकर इतनी दिलचस्पी क्यों है. साथ ही इस दौरान मोरक्को और स्कॉटलैंड के बीच अनुभव की कमी भी साफ दिखी

मोरक्क के अब दो मैचों में चार अंक हैं. टीम पिछले संस्करण के सेमीफाइनल में पहुंची थी और इस बार भी उसका लक्ष्य, इस प्रदर्शन की बराबरी करना होगा. हालांकि, यह स्कॉटलैंड और उनके फैंस के लिए निराशा से भरी एक शाम रही. क्योंकि स्कॉटलैंड के स्ट्राइकर मोरक्को के गोलकीपर यासीन बौनोउ को टेस्ट ही नहीं कर पाए. स्कॉटलैंड ने पिछले सप्ताह हैती को 1-0 से हराकर, 1990 के बाज वर्ल्ड कप की अपनी पहली जीत दर्ज की थी. इसके टीम को भरोसा दिया था कि वह नॉकआउट राउंड के लिए क्वालीफाई कर सकती है. हालांकि, अब उन्हें अपने अगले मैच में ब्राजील का सामना करना है और यह मैच अहम हो जाएगा

परीक्षार्थियों के लिए रेलवे का तोहफा, MP में चलेगी स्पेशल ट्रेन, जानिए कहां हैं स्टॉपेज

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परीक्षा के लिए रेलवे ने विशेष ट्रेन चलाने का फैसला किया है. रेलवे अधिकारी ने बताया कि इस कदम से परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में छात्रों को बड़ी सुविधा मिलेगी

नीट री-एग्जाम 2026 परीक्षा में शामिल होने जा रहे अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने विशेष व्यवस्था की है. 21 जून 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के मद्देनजर रेलवे ने इंदौर, रतलाम, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से भोपाल आने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष ट्रेन (Special Train) चलाने का निर्णय लिया है. इस पहल का उद्देश्य परीक्षार्थियों को समय पर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाना और यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करना है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार संभावित अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए यह स्पेशल ट्रेन संचालित की जा रही है, जिससे हजारों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है.

NEET अभ्यर्थियों के लिए विशेष ट्रेन का संचालन

रेलवे द्वारा गाड़ी संख्या 09354 इंदौर-भोपाल स्पेशल ट्रेन का संचालन 20 जून 2026 को किया जाएगा. यह ट्रेन इंदौर से रवाना होकर प्रदेश के कई प्रमुख स्टेशनों से होते हुए भोपाल पहुंचेगी. ट्रेन इंदौर स्टेशन से सुबह 11:25 बजे प्रस्थान करेगी और फतेहाबाद, बड़नगर, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, शुजालपुर, सीहोर और संत हिरदाराम नगर स्टेशन पर ठहराव के बाद शाम 7:00 बजे भोपाल पहुंचेगी.

यह रहेगा ट्रेन का रूट और समय

स्पेशल ट्रेन इंदौर से चलकर इन स्टेशनों पर रुकेगी:

  • फतेहाबाद – 12:00 बजे
  • बड़नगर – 12:42 बजे
  • रतलाम – 1:30 बजे
  • नागदा – 2:23 बजे
  • उज्जैन – 3:25 बजे
  • मक्सी – 4:30 बजे
  • शुजालपुर – 5:21 बजे
  • सीहोर – 6:00 बजे
  • संत हिरदाराम नगर – 6:38 बजे
  • भोपाल – 7:00 बजे

इस सेवा से परीक्षा देने भोपाल आने वाले विद्यार्थियों को काफी सुविधा मिलेगी.

वापसी के लिए भी विशेष व्यवस्था

रेलवे ने वापसी यात्रा के लिए भी विशेष ट्रेन की व्यवस्था की है. गाड़ी संख्या 09353 भोपाल-रतलाम स्पेशल ट्रेन 20 जून 2026 को भोपाल से शाम 7:40 बजे रवाना होगी. यह संत हिरदाराम नगर, सीहोर, शुजालपुर, मक्सी, उज्जैन और नागदा होते हुए अगले दिन रात 12:55 बजे रतलाम पहुंचेगी. इससे परीक्षा के बाद विद्यार्थियों और अभिभावकों को अपने गंतव्य तक लौटने में सुविधा मिलेगी.

17 कोचों की रहेगी व्यवस्था

रेलवे ने बढ़ी हुई यात्री संख्या को देखते हुए ट्रेन में पर्याप्त कोच लगाए हैं. इस विशेष ट्रेन में:

  • 13 स्लीपर कोच
  • 2 सामान्य श्रेणी कोच
  • 2 एसएलआर/डी कोच

सहित कुल 17 कोच उपलब्ध रहेंगे.

रेलवे ने की सुविधा का लाभ लेने की अपील

सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि NEET परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए यह विशेष ट्रेन चलाई जा रही है. उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की कि वे इस सेवा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और यात्रा की पूर्व योजना बनाकर रेलवे की विशेष सुविधा का उपयोग करें

रेलवे ने भीड़ से निपटने किये खास इंतजाम

रेल्वे ने  नीट परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों की संभावित अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए तथा उनके आवागमन को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से यह स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है. रेल्वे ने परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे इस स्पेशल ट्रेन सुविधा का अधिकाधिक लाभ उठाएं.

इसके साथ ही नीट परीक्षा के मद्देनज़र भोपाल मंडल में विशेष भीड़ प्रबंधन व्यवस्था भी की गई है. परीक्षा में सम्मिलित होने वाले बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आवागमन को देखते हुए पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने यात्रियों एवं परीक्षार्थियों की सुविधा तथा सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक भीड़ प्रबंधन व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है.

  • स्टेशन परिसरों, प्रवेश एवं निकास द्वारों तथा प्लेटफार्मों पर विशेष भीड़ प्रबंधन व्यवस्था लागू रहेगी.
  • वाणिज्यिक, रेलवे सुरक्षा बल एवं परिचालन कर्मचारियों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी.
  • यात्रियों के मार्गदर्शन हेतु घोषणा प्रणाली एवं पूछताछ काउंटर सक्रिय रहेंगे.
  • कतार प्रबंधन एवं यात्रियों के सुचारु आवागमन के लिए आवश्यक बैरिकेडिंग एवं मार्गदर्शन व्यवस्था की जाएगी.
  • परीक्षा केन्द्रों की ओर जाने वाले यात्रियों को आवश्यक जानकारी एवं सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.
  • किसी भी अप्रत्याशित भीड़ अथवा विशेष स्थिति से निपटने के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.

 भोपाल मंडल ने सभी संबंधित अधिकारियों को किया गया निर्देशित

अधिकारियो को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा दिवस पर परीक्षा केन्द्रों से जुड़े स्टेशनों पर विशेष निगरानी रखी जाए तथा ट्रेनों का संचालन समयानुसार बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ. परीक्षा केन्द्रों से होकर गुजरने वाली अथवा वहाँ रुकने वाली ट्रेनों की समयपालन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. वही रेल प्रशासन ने अभ्यर्थियों एवं उनके परिजनों से अपील की है कि वे यात्रा के लिए पर्याप्त समय लेकर स्टेशन पहुँचें, रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें तथा सुरक्षित एवं व्यवस्थित यात्रा में सहयोग प्रदान करें.

ऑनलाइन मिलेगी पूरी जानकारी

रेलवे ने यात्रियों को ट्रेन के समय, ठहराव और अन्य जानकारी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की सलाह दी है. यात्री NTES ऐप RailOne ऐप और भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर ट्रेन से संबंधित अपडेटेड जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

परीक्षार्थियों को मिलेगी बड़ी राहत

NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के दौरान लाखों छात्र यात्रा करते हैं. ऐसे में रेलवे की यह पहल विशेष रूप से इंदौर, रतलाम, उज्जैन, सीहोर और भोपाल संभाग के परीक्षार्थियों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है. इससे छात्रों को समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने में मदद मिलेगी और अंतिम समय की यात्रा संबंधी चिंताओं से भी राहत मिलेगी

होर्मुज पर ईरान का नया हथकंडा, जहाजों पर लगा दी इंश्योरेंस की शर्त, एंट्री से 48 घंटे पहले देनी होगी सूचना

ईरान की नई बनाई गई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने ये नए नियम जारी किए हैं. यह संस्था वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौते के तहत बनाई गई है. इसका मकसद तीन महीने से ज्यादा चले संघर्ष के बाद इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू करना है.

वैश्विक ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन माने जाने वाले हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग को व्यापार के लिए दोबारा तो खोल दिया गया है, लेकिन अब ईरान ने यहां से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए सख्त नियम और शर्तें लागू कर दी हैं. ईरान के इस कदम के बाद अब किसी भी देश का जहाज बिना एडवांस रजिस्ट्रेशन, सरकारी परमिट और पुख्ता इंश्योरेंस के इस रास्ते को पार नहीं कर सकेगा.

दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक हॉर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का लगभग पांचवां हिस्सा (20 फीसदी) गुजरता है. ऐसे में ईरान का यह नया फरमान अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. ईरान ने साफ किया है कि इन नए नियमों का मकसद तीन महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद इस रूट पर कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को चाक-चौबंद करना है.

नए नियम लागू करने के लिए ‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ का गठन

इस पूरे सिस्टम को संभालने और नए नियमों को जमीन पर उतारने के लिए ईरान ने एक नई संस्था का गठन किया है, जिसे ‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ (PGSA) नाम दिया गया है. दिलचस्प बात यह है कि इस अथॉरिटी का निर्माण वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए उसी समझौते के तहत किया गया है, जिसके बाद तीन महीने से बंद पड़े इस रास्ते को दोबारा चालू करने पर सहमति बनी थी.

एंट्री से 48 घंटे पहले देनी होगी सूचना

संशोधित नियमों और प्रक्रियाओं के मुताबिक, अब किसी भी जहाज के मालिक या ऑपरेटर के लिए मनमर्जी से इस रास्ते में दाखिल होना मुमकिन नहीं होगा. जहाजों को हॉर्मुज स्ट्रेट की सीमा में पहुंचने से कम से कम 48 घंटे पहले ट्रांजिट रिक्वेस्ट यानी गुजरने की अर्जी सबमिट करनी होगी.

तय कॉरिडोर से ही गुजरेंगे जहाज

सुरक्षा का हवाला देते हुए ईरान ने जहाजों के रूट को लेकर भी पाबंदी लगा दी है. पिछले तीन महीनों के टकराव और सैन्य तनाव के कारण इस समुद्री इलाके में बारूदी सुरंगों या अन्य घातक खतरों की आशंका बनी हुई है. इसी को ध्यान में रखते हुए ईरान ने विशेष शिपिंग कॉरिडोर निर्धारित किए हैं. सभी जहाजों को अनिवार्य रूप से सिर्फ इन्हीं सुरक्षित रास्तों से होकर गुजरना होगा ताकि वे किसी भी संभावित हादसे का शिकार न हों.

अथॉरिटी ने अंतिम चेतावनी के तौर पर कहा है कि अगर कोई भी जहाज इन नियमों, शर्तों या तय रूट का उल्लंघन करता है, तो उसके बाद पैदा होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या नुकसान की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ जहाज के मालिकों और ऑपरेटरों की होगी

पटना में प्रस्तावित टाउनशिप का नाम पाटलिपुत्र होगा, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया ऐलान

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बिहार की राजधानी पटना में प्रस्तावित टाउनशिप का नाम अब पाटलिपुत्र होगा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ये ऐलान किया. उन्होंने सहयोग शिविर के दौरान फुलवारी शरीफ के नदियावां में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रस्तावित टाउनशिप का नाम अब पाटलिपुत्र होगा. बता दें कि ये कोई नया नाम नहीं है बल्कि राजधानी का प्राचीन नाम है. प्राचीन नाम पाटलिपुत्र अब पटना की प्रस्तावित टाउनशिप का होगा.

सरकार अब टाउनशिप भी बना रही

उन्होंने कहा कि कंकड़बाग पटना की पहचान थी. इसे लोग एशिया का सबसे बड़ा टाउनशिप कहते थे. 60-70 के दशक में काम शुरू हुआ और धीरे-धीरे वह स्लम का इलाका बन चुका है. अब वह टाउनशिप नहीं रहा.उन्होंने कहा कि जब वह नगर विकास मंत्री रहे तो वहां का पानी निकालने में ही बहुत दिक्कत होती थी. धीरे-धीरे उसे ठीक किया. लेकिन अब सरकार टाउनशिप भी बना रही है.

मैंने तो बड़े पटना की कल्पना की है

सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि जो टाउनशिप बनाई जा रही है, पटना की पहचान एक नए शहर पाटलिपुत्र से होनी चाहिए.जो कई लोग मुद्दा बनाते हैं कि ये मगध की राजधानी था. इसका नाम पाटलिपुत्र था. इसका नाम बदल देना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैंने तो इससे बड़े पटना की कल्पना की है.उसका नाम भी पाटलिपुत्र रखने का काम किया है. उन्होंने कहा कि अब किसी को दिक्कत नहीं होगी.

नई टाउनशिप का नाम होगा पाटलिपुत्र

पाटलिपुत्र नाम नया नहीं है. बिहार की राजधानी पटना पहले पाटलिपुत्र के नाम से जानी जाती थी. ऐसा कहा जाता है कि करीब 3 हजार साल पहले यहां पर बहुत सारे पाटलि के पेड़ थे. इसी वजह से इसका नाम पहले पाटलिग्राम और फिर पाटलिपुत्र हुआ. जानकार कहते हैं कि पटना शब्द पत्तन से बना है. 1704 ईसवी में इसका नाम बदलकर अजीमाबाद रखा गया हालांकि बाद में फिर से यह पटना हो गया. सरकार अब नई टाउनशिप का नाम पटना के पुराने नाम पाटलिपुत्र केे नाम पर रखने जा रही है

बिहार में सरकार दे रही घर बैठे कमाने का मौका, होमस्टे योजना में देगी पैसा

बिहार सरकार की ‘मुख्यमंत्री होमस्टे प्रमोशन स्कीम 2026’ को मंजूरी मिल गई है, जिससे बिहार के लोगों को घर बैठे लाखों कमाने का मौका मिलेगा.

चीन ने शुरू किया दुनिया के सबसे बड़े बांध का निर्माण, जवाब में भारत भी अरुणाचल में रच रहा ‘चक्रव्यूह’

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सरकार ने संसद को भरोसा दिया है कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन और उनकी आजीविका की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी सुरक्षात्मक और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं. इसके साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया है

चीन ने तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी के निचले हिस्से पर दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोइलेक्ट्रिक बांध का निर्माण आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है. यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश की सीमा से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर बनाई जा रही है. ये भारत की सुरक्षा और जल संप्रभुता के लिहाज से एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है.

चीन के इस आक्रामक कदम का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत सरकार ने भी कमर कस ली है. भारत ने अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग और सियांग जिलों में ‘सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट’ (SUMP) को तेजी से आगे बढ़ाने का फैसला किया है. 11,000 मेगावाट की क्षमता वाला यह मेगा-डेम सियांग नदी (जिसे असम में ब्रह्मपुत्र कहा जाता है) पर प्रस्तावित है. इस परियोजना की कमान सरकारी कंपनी एनएचपीसी (NHPC) के हाथों में है.

अगर यह बांध बनकर तैयार होता है, तो यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना होगी. इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से हर साल लगभग 47 अरब यूनिट बिजली पैदा होने की उम्मीद है. इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 13 अरब डॉलर (यानी लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये) आंकी गई है. यह प्रोजेक्ट चीन के लिए रणनीतिक जवाब होगा और इलाके में बाढ़ नियंत्रण के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है.

दोनों देशों की तैयारियों में जमीन-आसमान का अंतर

हालांकि, दोनों देशों की जमीनी तैयारियों की तुलना की जाए, तो भारत के सामने चुनौतियां बहुत बड़ी हैं. एक तरफ जहां चीन ने अपने 60,000 मेगावाट की क्षमता वाले ‘मेडॉग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट’ पर तेजी से काम शुरू कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ भारत का ‘सियांग प्रोजेक्ट’ (SUMP) अभी भी प्री-फिजिबिलिटी स्टडी के दौर में ही अटका हुआ है. इस प्रोजेक्ट पर अभी निर्माण से पहले का जमीनी काम भी शुरू होना बाकी है. चीन का प्रस्तावित बांध क्षमता के मामले में भारत के प्रोजेक्ट से कई गुना बड़ा है

चीन ने शुरू किया दुनिया के सबसे बड़े बांध का निर्माण, जवाब में भारत भी अरुणाचल में रच रहा ‘चक्रव्यूह’

बिजली बनाने के अलावा, SUMP को खास तौर पर नीचे की तरफ मौसमी बाढ़ को कंट्रोल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है चीन ने तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी के निचले हिस्से पर दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोइलेक्ट्रिक बांध का निर्माण आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है. यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश की सीमा से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर बनाई जा रही है. ये भारत की सुरक्षा और जल संप्रभुता के लिहाज से एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है.

चीन के इस आक्रामक कदम का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत सरकार ने भी कमर कस ली है. भारत ने अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग और सियांग जिलों में ‘सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट’ (SUMP) को तेजी से आगे बढ़ाने का फैसला किया है. 11,000 मेगावाट की क्षमता वाला यह मेगा-डेम सियांग नदी (जिसे असम में ब्रह्मपुत्र कहा जाता है) पर प्रस्तावित है. इस परियोजना की कमान सरकारी कंपनी एनएचपीसी (NHPC) के हाथों में है.

अगर यह बांध बनकर तैयार होता है, तो यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना होगी. इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से हर साल लगभग 47 अरब यूनिट बिजली पैदा होने की उम्मीद है. इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 13 अरब डॉलर (यानी लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये) आंकी गई है. यह प्रोजेक्ट चीन के लिए रणनीतिक जवाब होगा और इलाके में बाढ़ नियंत्रण के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है.

दोनों देशों की तैयारियों में जमीन-आसमान का अंतर

हालांकि, दोनों देशों की जमीनी तैयारियों की तुलना की जाए, तो भारत के सामने चुनौतियां बहुत बड़ी हैं. एक तरफ जहां चीन ने अपने 60,000 मेगावाट की क्षमता वाले ‘मेडॉग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट’ पर तेजी से काम शुरू कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ भारत का ‘सियांग प्रोजेक्ट’ (SUMP) अभी भी प्री-फिजिबिलिटी स्टडी के दौर में ही अटका हुआ है. इस प्रोजेक्ट पर अभी निर्माण से पहले का जमीनी काम भी शुरू होना बाकी है. चीन का प्रस्तावित बांध क्षमता के मामले में भारत के प्रोजेक्ट से कई गुना बड़ा है यही वजह है कि नई दिल्ली अब इस विवादित नदी पर चीन की हर हरकत पर पैनी नजर रखते हुए, अपनी रणनीतिक जवाबी कार्रवाई की रफ्तार को दोगुना करने की कोशिश कर रही है. भारत के लिए समय रहते इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारना एक बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है.

क्या चीन के डैम बनाने से भूकंप का खतरा होगा?

यारलुंग सांगपो नदी पर डैम बनाने के लिए चीन ने 1 ट्रिलियन युआन यानी 137 बिलियन डॉलर का बजट रखा है. ये डैम अरुणाचल प्रदेश से सटे मेडोग काउंटी में बनाया जा रहा है. चीन मामलों के जानकार रॉबिन्द्र सचदेव ने एनडीटीवी को बताया कि अगर ये बांध बनता है तो इससे नदियों के बहाव में बदलाव आएगा और इससे हिमालय पर बुरा प्रभाव पड़ेगा.

रॉबिन्द्र सचदेव कहते हैं, “धरती की किसी हिस्से में अगर आप इतना पानी एक साथ जमा कर लेते हैं कि उसे संभालना मुश्किल हो जाए तो इसके खतरे भी काफी सारे हैं. तिब्बत के इस हिस्से में पहले से कई डैम बनाए जा चुके हैं. ये इलाके हिमालय की तराई में है और अगर तराई का हिस्सा ही पानी से भरा और हिमालय पर कोई गहरा प्रभाव पड़े तो फिर भूकंप के खतरे का अंदेशा रहता है. चीन ने इन चिंताओं को लेकर क्या किया ये तो जानकारी नहीं है लेकिन डैम बनाने से भूकंप का खतरा लगातार बना रहेगा.”

निचले इलाकों में तबाही का मंडराता खतरा

यारलुंग त्सांगपो नदी तिब्बत से निकलकर भारत में ‘सियांग’ के रूप में प्रवेश करती है और आगे चलकर असम में विशाल ब्रह्मपुत्र नदी बन जाती है. ये नदी अरुणाचल प्रदेश और असम के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है. जल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऊपरी इलाके (तिब्बत) में इतनी बड़ी क्षमता का बांध बनने से निचले इलाकों में पानी का बहाव पूरी तरह प्रभावित हो सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बांध के कारण स्थानीय इकोसिस्टम पूरी तरह तबाह हो सकता है, खेती-किसानी चौपट हो सकती है और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में कभी भी अचानक विनाशकारी बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है. चीन इस पानी का इस्तेमाल भारत के खिलाफ एक ‘वॉटर वेपन’ के रूप में भी कर सकता है.

लोकसभा में सरकार का जवाब 

इस संवेदनशील मुद्दे पर केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट है. लोकसभा में एक औपचारिक लिखित जवाब में सरकार ने पुष्टि की है कि वह ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन में चीनी गतिविधियों और वहां बन रहे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर बारीकी से नजर रख रही है

बिजली के साथ-साथ ‘बाढ़ नियंत्रण’ का मास्टरप्लान

भारत का ‘सियांग प्रोजेक्ट’ (SUMP) सिर्फ बिजली पैदा करने का जरिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी रणनीतिक सोच है. इस बांध को विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया जा रहा है ताकि मानसून के दौरान निचले इलाकों में आने वाली विनाशकारी बाढ़ को रोका जा सके. इसके साथ ही, अगर चीन ऊपर से अचानक भारी मात्रा में पानी छोड़ता है या पानी का रुख मोड़ता है, तो यह बांध भारतीय क्षेत्र के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेगा.

चूंकि इस मेगा-प्रोजेक्ट को पूरा होने में अभी लंबा समय लगेगा, इसलिए भारत सरकार अंतरिम अवधि के लिए भी तैयारी कर रही है. इसके तहत पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ की भविष्यवाणी करने वाले सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है, नदी निगरानी नेटवर्क का दायरा बढ़ाया जा रहा है और बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके

SBI Mutual Fund अगले महीने ला सकता है 13,000 करोड़ रुपये का IPO, सेबी से मिली मंजूरी

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 देश की सबसे बड़ी ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई म्यूचुअल फंड को बाजार नियामक सेबी से आईपीओ लाने की मंजूरी मिल गई है। मामले से जुड़े सूत्रों ने शुक्रवार को ये जानकारी दी। मार्च में दस्तावेजों (DRHP) के अनुसार, एसबीआई म्यूचुअल फंड का आईपीओ पूरी तरह से 20.37 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री पेशकश (OFS) पर आधारित होगा, जिसमें कोई नया इश्यू शामिल नहीं है। इस आईपीओ में एसबीआई म्यूचुअल फंड की प्रोमोटर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और एमुंडी इंडिया होल्डिंग अपनी हिस्सेदारी की बिक्री करेंगे।

13,000 करोड़ रुपये का आईपीओ ला सकती है कंपनी 

सूत्र ने बताया कि ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी को लगभग 13,000 करोड़ रुपये आईपीओ लाने के लिए सेबी की मंजूरी मिल गई है। उम्मीद है कि आईपीओ अगले महीने पेश किया जाएगा। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड (SBIFML) लिस्टिंग के बाद आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी, एचडीएफसी ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी, यूटीआई ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी, श्रीराम एएमसी और निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट कंपनी जैसी अन्य लिस्टेड ऐसेट मैनेजमेंट कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी।

साल 1987 में हुई थी एसबीआई म्यूचुअल फंड कंपनी की स्थापना

बताते चलें कि एसबीआई म्यूचुअल फंड कंपनी की स्थापना साल 1987 में हुई थी। जिसके बाद 1993 में ये कंपनी सेबी के साथ रजिस्टर हुई थी। साल 2011 में एसबीआई म्यूचुअल फंड कंपनी, पेरिस की एमुंडी के साथ मिलकर एक जॉइंट वेंचर बन गई थी। आज के समय में, एसबीआई म्यूचुअल फंड लगभग 92 स्कीम चला रही है। इनमें 52 इक्विटी फंड, 23 डेट फंड, 13 हाइब्रिड फंड और 4 अन्य फंड स्कीम्स शामिल हैं।

12.70 लाख करोड़ रुपये का निवेश मैनेज कर रही है एसबीआई म्यूचुअल फंड कंपनी

मौजूदा समय में, एसबीआई म्यूचुअल फंड कंपनी निवेशकों का लगभग 12.70 लाख करोड़ रुपये मैनेज कर रही है। देश की किसी भी अन्य म्यूचुअल फंड कंपनी का इतना AUM (ऐसेट अंडर मैनेजमेंट) नहीं है। इससे ये मालूम चलता है कि निवेशकों को इस म्यूचुअल फंड कंपनी पर कितना भरोसा है। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड, एसबीआई और पेरिस की एमुंडी का एक जॉइंट वेंचर है, जिसमें एसबीआई की 61.98 प्रतिशत हिस्सेदारी है और एमुंडी की 36.40 प्रतिशत हिस्सेदारी है।