दिल्ली में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाई है। साथ ही, लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की बात भी कही है।
दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट ने आज (गुरुवार को) कड़ी नाराजगी जताई। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद थी कि जिम्मेदार अधिकारी खुद कार्रवाई करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब अदालत ऐसे आदेश देगी जिनका असर कई लोगों पर पड़ेगा।
तय होगी लापरवाह अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अब लापरवाही करने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। अदालत ने कहा कि अब सबकुछ आदेश में साफ-साफ लिखा जाएगा। सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मालवीय नगर अग्निकांड, लखनऊ में लगी आग और साकेत में इमारत गिरने जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
साकेत, लाजपत नगर और सरोजिनी नगर का होगा निरीक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने साकेत, लाजपत नगर और सरोजिनी नगर इलाके का निरीक्षण कराने का आदेश दिया है। इसके लिए आईआईटी दिल्ली के 2 वरिष्ठ प्रोफेसरों, दो ड्राफ्ट्समैन और एमसीडी के अधिकारियों की एक टीम बनाई जाएगी। यह टीम इन इलाकों में इमारतों की स्थिति और नियमों के पालन की जांच करेगी।
गुरुग्राम विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन को किया तलब
सर्वोच्च अदालत ने गुरुग्राम की एक मीडिया रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया है कि गुरुग्राम की 93 प्रतिशत इमारतों में फायर सेफ्टी के जरूरी इंतजाम नहीं हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन को अगली सुनवाई में कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। इसके अलावा लखनऊ नगर निगम के आयुक्त को भी अदालत ने तलब किया है।
मालवीय नगर अग्निकांड क्या है?
साउथ दिल्ली के मालवीय नगर के हौज रानी क्षेत्र में 3 जून 2026 को सुबह लगभग 8:30 बजे होटल फ्लोरिश स्टे में भीषण अग्निकांड हुआ था। इस आग हादसे में एक होटल और रेस्टोरेंट की इमारत में आग लग गई थी और इसमें 21 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना में 35 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से जख्मी भी हो गए थे। इस अग्निकांड के दौरान, होटल का गेट लॉक हो गया था और कई लोगों को अपनी जान बचाने के लिए बिल्डिंग से कूदना पड़ गया था।


