सहरसा। बिहार के सहरसा और सुपौल जिलों से जुड़ा छह हजार रुपये के बकाया भुगतान का मामला अब गंभीर विवाद में बदल गया है। सुपौल जिले के गढ़ बरुआरी वार्ड नंबर 8 निवासी सुजीत कुमार झा ने आरोप लगाया है कि सहरसा के कोशी प्रोजेक्ट क्षेत्र निवासी रवि शंकर सिंह ने तीन वर्ष पहले उनसे 77 हजार रुपये उधार लिए थे। अधिकांश राशि लौटाए जाने के बावजूद शेष छह हजार रुपये नहीं लौटाए जा रहे हैं और पैसे मांगने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
सुजीत कुमार झा ने बताया कि वर्ष 2023 में रवि शंकर सिंह ने जरूरत का हवाला देते हुए उनसे कुल 77 हजार रुपये उधार लिए थे। उनका कहना है कि यह राशि कुछ नकद और कुछ फोनपे के माध्यम से दी गई थी। शिकायत के अनुसार, आरोपित ने बाद में 30 हजार रुपये फोनपे के जरिए लौटाए और 71 हजार रुपये नकद वापस किए। इसके बाद भी छह हजार रुपये बकाया रह गए।
पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने शेष राशि की मांग की तो रवि शंकर सिंह टालमटोल करने लगे। उनका कहना है कि बार-बार मांग करने पर आरोपित ने फोन लॉक कर दिया और कथित तौर पर कहा कि यदि थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई गई तो गोली मार दी जाएगी। इस आरोप के बाद मामला केवल लेन-देन के विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धमकी और सुरक्षा के मुद्दे से भी जुड़ गया।
सुजीत कुमार झा ने 1 जुलाई 2026 को सहरसा सदर थाना में लिखित आवेदन देकर मामले में कार्रवाई की मांग की थी। आवेदन में उन्होंने उधार राशि का विवरण, आंशिक भुगतान की जानकारी तथा कथित धमकी का उल्लेख किया है। उन्होंने बैंक पासबुक और लेन-देन से संबंधित दस्तावेज भी संलग्न करने की बात कही है।
थाना में दर्ज आवेदन के अनुसार मामले की जांच बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत शुरू की गई है और इसकी जांच एसआई चंचल कुमारी को सौंपी गई है। पीड़ित का कहना है कि आवेदन देने के बाद भी अब तक उन्हें किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है, जिससे वे स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
इस मामले ने स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है, क्योंकि एक छोटे से बकाया विवाद में कथित धमकी और पुलिस कार्रवाई में देरी जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में प्राप्त आवेदन और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपित पक्ष का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है।


