गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले में कथित चिकित्सकीय लापरवाही का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत दायर परिवाद में जांच और आदेश के बाद अब पीड़ित सलीम खान ने आरोप लगाया है कि न्याय की लड़ाई लड़ने पर उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं, दबाव बनाया जा रहा है और उनके परिवार को भी भय के माहौल में जीना पड़ रहा है। पीड़ित का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो उनके साथ किसी भी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सलीम खान, निवासी असनंद शेख टोला, थाना उचकागांव, जिला गोपालगंज का आरोप है कि वर्ष 2024 में अंडकोष में दर्द की शिकायत होने पर उन्होंने एक निजी क्लिनिक में इलाज कराया था। उनका कहना है कि बिना आवश्यक जांच के ऑपरेशन कर दिया गया, जिसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। पीड़ित का दावा है कि इसके बाद उन्हें सिवान, गोरखपुर, वाराणसी और पटना तक इलाज कराना पड़ा, लेकिन गलत ऑपरेशन के कारण उनकी समस्या और जटिल हो गई।
पीड़ित का कहना है कि बिहार लोक शिकायत प्राधिकार के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में भी कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। आदेश के अनुसार, जांच में संबंधित चिकित्सक की योग्यता, क्लिनिक के पंजीकरण और उपचार प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। इसके बावजूद उन्हें अब तक प्रभावी राहत और न्याय नहीं मिल सका है।
सलीम खान ने आरोप लगाया है कि मामले में कुछ लोगों ने संबंधित चिकित्सकों का पक्ष लेते हुए उन पर समझौते का दबाव बनाया। उनका दावा है कि उनसे जबरन कुछ कागजातों पर हस्ताक्षर करवाए गए और उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके बारे में गलत बातें फैलाकर उनकी शिकायत को कमजोर करने की कोशिश की गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पीड़ित ने आगे आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी आपबीती सोशल मीडिया और फेसबुक के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की, तब उन्हें कथित रूप से धमकियां मिलने लगीं। उनका कहना है कि रास्ते में रोककर डराने-धमकाने का प्रयास किया गया, जिससे पूरा परिवार दहशत में है। सलीम खान का कहना है कि उनकी पत्नी महफूजा अकेले मेहनत करके परिवार का खर्च चला रही हैं। उनके चार छोटे बच्चे—दो बेटे और दो बेटियां—हैं, जिनका भविष्य भी इस पूरे विवाद के कारण प्रभावित हो रहा है।
पीड़ित ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने, उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा न्याय दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आम लोगों का स्वास्थ्य व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर विश्वास कमजोर हो सकता है।
समाचार में प्रकाशित आरोप पीड़ित पक्ष के दावों तथा उपलब्ध शिकायत और लोक शिकायत प्राधिकार के आदेश पर आधारित हैं। इन आरोपों पर संबंधित चिकित्सकों एवं अन्य आरोपित व्यक्तियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


