Tuesday, July 7, 2026
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अररिया के नरपतगंज में जमीन विवाद ने लिया हिंसक रूप, महिला से मारपीट, लूटपाट और घसीटने का आरोप, इलाके में सनसनी

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अररिया जिले के नरपतगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत डुमरिया वार्ड संख्या 10 पंचायत पलासी से एक बेहद सनसनीखेज और मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जमीन कब्जे के विवाद को लेकर एक महिला और उसके पति के साथ कथित रूप से बेरहमी से मारपीट, लूटपाट और अमानवीय व्यवहार किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़िता लीलावती देवी, उम्र लगभग 50 वर्ष, पत्नी भुवनेश्वर सिंह, ने थाना नरपतगंज में लिखित आवेदन देकर कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पीड़िता के अनुसार विवाद उनकी वैध जमीन को लेकर है, जो उनके पति भुवनेश्वर सिंह के नाम केवाला, दाखिल-खारिज और नियमित लगान रसीद के आधार पर दर्ज है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से उक्त जमीन पर घेराबंदी कर दखलकार के रूप में रह रहे हैं। आरोप है कि 30 मार्च 2026 की सुबह करीब 7 बजे गांव के ही कुछ लोग हथियारों से लैस होकर उनके घर और जमीन के पास पहुंचे और जमीन कब्जाने की नीयत से गाली-गलौज शुरू कर दी।

शिकायत के मुताबिक सूर्यनारायण सिंह, दिलीप सिंह, लिलधारी सिंह, रजिया देवी, शांति देवी, राहुल कुमार सिंह, कलावती देवी, प्रमोद कुमार सिंह समेत अन्य महिलाओं में भारती देवी मिलकर हमला किया। आरोप है कि दिलीप सिंह और लिलधारी सिंह ने लीलावती देवी के बाल पकड़कर उन्हें जमीन पर गिरा दिया और अर्धनग्न अवस्था में लात, मुक्कों और एड़ी से बेरहमी से पीटा। जब उनके पति बीच-बचाव के लिए पहुंचे तो आरोपियों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा और जमकर मारपीट की।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके और उनके पति के गले में गमछा लपेटकर घसीटा गया, जिससे दोनों के शरीर में गंभीर दर्द और सूजन है। घटना के दौरान महिला के नाक से सोने की नथ और पैरों से करीब 10 भरी चांदी का पायल छीन लिया गया। इतना ही नहीं, घर में रखे बक्से से 10 हजार रुपये नकद भी लूट लिए जाने का आरोप लगाया गया है।

घटना के बाद जब चीख-पुकार मची तो आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और दोनों को बदहवास तथा अचेत अवस्था में उठाकर सुरक्षित स्थान पर ले गए। पीड़िता ने इसे पहले से रची गई साजिश बताया है और सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों के बीच जमीन विवाद को लेकर बढ़ती हिंसा को लेकर चिंता बढ़ गई है। फिलहाल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।

दसवीं की 16 वर्षीय छात्रा रहस्यमय तरीके से लापता: 5 मार्च से बेटी की तलाश में भटक रहा पिता, पुलिस पर टालमटोल का आरोप

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लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के शारदा नगर थाना क्षेत्र के मूलचंद पूर्व गांव से एक नाबालिग छात्रा के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण परिजन बेहद परेशान और चिंतित हैं।

मूलचंद पूर्व गांव निवासी रामनिवास ने बताया कि उनकी बेटी किरण, जिसकी उम्र करीब 16 वर्ष है और वह कक्षा दसवीं की छात्रा है, 5 मार्च 2026 को दिन में करीब 12 बजे अचानक घर से लापता हो गई। उस समय घर पर वह अकेली थी। रामनिवास की पत्नी कबूतरी खेत में काम करने गई हुई थीं, जबकि उनके दोनों बेटे भी घर से बाहर थे। इसी दौरान किरण अपने साथ एक छोटा कीपैड मोबाइल फोन लेकर कहीं चली गई और उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल सका।

परिजनों के अनुसार जब काफी देर तक किरण घर वापस नहीं लौटी तो परिवार ने आसपास के रिश्तेदारों और परिचितों के यहां उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कहीं भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद पिता रामनिवास ने शारदा नगर थाने में जाकर अपनी बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। हालांकि परिवार का आरोप है कि शिकायत के बाद भी पुलिस की ओर से मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और सिर्फ टालमटोल की जा रही है।

रामनिवास का कहना है कि बेटी के लापता होने के बाद से पूरा परिवार गहरे सदमे और चिंता में है। वह अपनी बेटी की तलाश में लगातार दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। परिवार को डर सता रहा है कि कहीं उनकी बेटी किसी अनहोनी का शिकार न हो गई हो।

पीड़ित पिता ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द उनकी बेटी की तलाश की जाए, ताकि समय रहते उसे सुरक्षित घर लाया जा सके। परिवार का कहना है कि अगर समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो किसी भी बड़ी घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि एक नाबालिग छात्रा के लापता होने के मामले में पुलिस को तुरंत सक्रिय होकर जांच करनी चाहिए। वहीं परिवार उम्मीद लगाए बैठा है कि प्रशासन उनकी मदद करेगा और उनकी बेटी को जल्द से जल्द ढूंढकर सुरक्षित वापस लाया जाएगा।

गया के दांडीबाग में आस्था का अद्भुत नजारा: कुमारी किरण ने परिवार के साथ श्रद्धा-भक्ति से मनाया छठ पूजा का पर्व, सूर्य देव को अर्घ्य देकर मांगी सुख-समृद्धि

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गया के दांडीबाग में आस्था का अद्भुत नजारा: परिवार ने श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया छठ पूजा, व्रती महिलाओं ने सूर्य देव को अर्घ्य देकर मांगी सुख-समृद्धि

बिहार के गया जिले के विष्णुपद थाना क्षेत्र अंतर्गत दांडीबाग इलाके में छठ पूजा का पर्व इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। यहां रहने वाली कुमारी निशा ने अपने परिवार और बच्चों के साथ मिलकर वर्ष 2026 में छठ पूजा का कार्यक्रम विधि-विधान के साथ संपन्न किया। इस अवसर पर घर के आंगन में धार्मिक माहौल देखने को मिला, जहां व्रती महिलाओं ने पूरी आस्था और नियमों के साथ सूर्य देव की उपासना की।

छठ पूजा के दौरान कुमारी निशा और किरण कुमारी ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की। परिवार के सदस्यों और आसपास की महिलाओं ने भी इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। पूजा के दौरान घर में प्रसाद के रूप में ठेकुआ, फल-फूल, दूध और अन्य पारंपरिक सामग्री से अर्घ्य की तैयारी की गई। शाम के समय दीप जलाकर भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना की गई।

इस अवसर पर परिवार के अन्य परिजनों ने भी पूजा में सक्रिय रूप से भाग लिया। बच्चों और महिलाओं ने मिलकर पूजा की सभी तैयारियों में सहयोग किया। घर के आंगन में बनाए गए अस्थायी कुंड में जल भरकर व्रती महिलाओं ने उसमें खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया। इस दौरान आसपास की महिलाओं और बच्चों की मौजूदगी ने माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया।

छठ पूजा के इस आयोजन में पूरे परिवार की आस्था और समर्पण साफ दिखाई दिया। व्रती महिलाओं ने सूर्य देव और छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। पूजा के दौरान पारंपरिक गीतों और मंत्रों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि छठ पूजा बिहार की सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र परंपराओं में से एक है, जिसे लोग पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ मनाते हैं। दांडीबाग में भी इस वर्ष छठ पूजा का आयोजन बेहद शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जहां परिवार और समाज के लोगों ने मिलकर इस महान पर्व को उत्साह के साथ मनाया।

150 करोड़ की अवैध संपत्ति और टैक्स चोरी का आरोप: नगर निगम की जमीन घेरने का दावा, पीड़ित बोला—पूर्व विधायकों की मिलीभगत से चल रहा खेल

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मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में कथित रूप से अवैध संपत्ति, टैक्स चोरी और सरकारी जमीन पर कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि शहर के कुछ प्रभावशाली लोगों ने नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है और वर्षों से बड़े पैमाने पर कर चोरी कर अवैध संपत्ति अर्जित की है। पीड़ित का कहना है कि वह पिछले करीब दस वर्षों से विभिन्न विभागों में शिकायत कर रहा है, लेकिन अब तक कहीं भी कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है।

जानकारी के अनुसार मुरादाबाद के थाना कटघर क्षेत्र स्थित रहमत नगर निवासी मोहम्मद वसीम पुत्र मोहम्मद रईस ने आयकर विभाग को दिए अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि हाजी नफीस पुत्र मेहदी हसन और इमरान पुत्र हाजी नफीस ने कथित रूप से बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार के जरिए करीब 150 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित कर ली है। पीड़ित का दावा है कि यह संपत्ति टैक्स चोरी और अन्य अवैध तरीकों से जुटाई गई है।

मोहम्मद वसीम के मुताबिक आरोपितों ने आयकर और जीएसटी से बचने के लिए कई संपत्तियां अपने रिश्तेदारों और अन्य लोगों के नाम पर खरीद रखी हैं। उनका कहना है कि अवैध कमाई को छिपाने के लिए कई तरह के तरीके अपनाए गए हैं, जिससे सरकारी विभागों को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि नगर निगम की जमीन को भी घेरकर उस पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में स्थानीय स्तर पर कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत होने का भी संदेह है। वसीम का आरोप है कि पटवारी और अन्य लोगों की मदद से सरकारी जमीन को घेरकर निजी उपयोग में लिया जा रहा है।

मोहम्मद वसीम ने मीडिया से बातचीत में यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कुछ राजनीतिक लोगों का भी संरक्षण मिल रहा है। उनका कहना है कि पूर्व सभा के विधायक हाजी राम कुरैशी और पूर्व विधायक हाजी ईशुभ अंसारी की कथित मिलीभगत के कारण ही आरोपित लोगों के हौसले बुलंद हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

पीड़ित का कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय, आयकर विभाग और अन्य संबंधित विभागों में कई बार लिखित शिकायत दी है। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि करीब दस वर्षों से वह न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।

पीड़ित ने आयकर विभाग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कराई जाए तो टैक्स चोरी और अवैध संपत्ति के बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है और नगर निगम की जमीन को भी अवैध कब्जे से मुक्त कराया जा सकता है।

पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भ्रष्टाचार और कर चोरी जैसे मामलों पर रोक लग सके और उन्हें न्याय मिल सके।

बदायूं में दिव्यांग व्यक्ति से 10 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी, मैसेज आते ही खाते से रकम गायब

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बदायूं जिले के थाना इस्लामनगर क्षेत्र से ऑनलाइन ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित विजय वीर, जो दिव्यांग हैं, के साथ साइबर ठगों ने 10 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर दी। घटना के बाद पीड़ित और उनके परिवार में चिंता का माहौल है। पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस से करने की बात कही है।

मिली जानकारी के अनुसार विजय वीर निवासी जिला बदायूं के मोबाइल फोन पर एक संदिग्ध मैसेज आया। मैसेज देखने के कुछ ही देर बाद उनके बैंक खाते से 10 हजार रुपये निकल जाने का पता चला। जब उन्होंने मोबाइल और बैंक खाते की जानकारी चेक की तो खाते से रकम कट चुकी थी। इस अचानक हुई घटना से वह हैरान रह गए।

पीड़ित विजय वीर ने बताया कि उन्हें मोबाइल पर एक मैसेज प्राप्त हुआ था, जो पहली नजर में सामान्य प्रतीत हो रहा था। मैसेज देखने के बाद कुछ समय में बैंक खाते से पैसे कटने का नोटिफिकेशन आया। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं।

घटना के बाद विजय वीर ने परिजनों को जानकारी दी, जिसके बाद परिवार के लोग भी चिंतित हो गए। पीड़ित का कहना है कि वह पहले से दिव्यांग हैं और आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं है। ऐसे में 10 हजार रुपये की ठगी उनके लिए बड़ी क्षति है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह के ऑनलाइन फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। साइबर ठग लोगों को मैसेज, लिंक और कॉल के जरिए निशाना बना रहे हैं। कई बार लोग अनजाने में मैसेज खोल लेते हैं या लिंक पर क्लिक कर देते हैं, जिसके बाद उनके बैंक खातों से पैसे गायब हो जाते हैं।

थाना इस्लामनगर क्षेत्र में इस घटना के सामने आने के बाद लोगों में भी डर का माहौल है। लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि ऐसे साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और व्यक्ति को इस तरह की ठगी का शिकार न होना पड़े।

पुलिस का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति के साथ इस प्रकार की घटना होती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए और नजदीकी थाने में सूचना देनी चाहिए। समय रहते शिकायत करने पर रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

पंजाब की सियासत में बड़ा उलटफेर, दंगा पीड़ितों के ‘मसीहा’ एच. एस. फुल्का ने थामा BJP का दामन

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पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए राहत भरी खबर आई है। ‘आप’ के पूर्व विधायक और 1984 सिख विरोधी दंगा पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ने वाले एच.एस. फुल्का ने बीजेपी का दामन थाम लिया है।पंजाब के राजनीतिक गलियारों से बड़ी खबर सामने आई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का बुधवार दोपहर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। करीब 7 साल के लंबे अंतराल के बाद फुल्का ने सक्रिय राजनीति में वापसी की है, जिसे पंजाब में बीजेपी के लिए एक बड़े “बूस्ट” के तौर पर देखा जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के प्रतिष्ठित वकील फुल्का की पहचान 1984 के सिख विरोधी दंगा पीड़ितों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने वाले योद्धा के रूप में है। उन्होंने दशकों तक पीड़ितों का पक्ष मजबूती से रखा, जिसके कारण सिख समुदाय और पंजाब में उनका गहरा सम्मान है।

फूलका, जो पहले ढाका विधानसभा क्षेत्र से सांसद थे, ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और अन्य उपस्थित लोगों की मौजूदगी में राष्ट्रीय राजधानी स्थित पार्टी मुख्यालय में औपचारिक रूप से भाजपा में प्रवेश किया।

एच.एस. फुल्का का सियासी सफर
फुल्का ने 2014 में AAP के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। उन्होंने लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू से 19,709 वोटों से हार गए। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने दाखा निर्वाचन क्षेत्र से अकाली दल के मनप्रीत सिंह अयाली को हराकर जीत दर्ज की। इसके बाद वे पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे।

2015 के बेअदबी मामलों में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा कार्रवाई न किए जाने के विरोध में उन्होंने 2018 में विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और बाद में ‘आप’ भी छोड़ दी।

दिसंबर 2024 में वे कुछ समय के लिए शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ आए थे, जब अकाल तख्त के निर्देश पर पार्टी के पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही थी।

ढाई महीने से लापता पत्नी की तलाश में भटक रहा पति: ठेकेदार पर गंभीर आरोप, पुलिस कार्रवाई नहीं होने से बढ़ी चिंता

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अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक अपनी पत्नी के लापता होने के बाद पिछले करीब दो महीने से दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़ित पति संजय का आरोप है कि उसकी पत्नी संगीता देवी को एक युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है, लेकिन शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। परेशान पति ने प्रशासन और समाज से मदद की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार संगीता देवी की शादी करीब ढाई साल पहले अलीगढ़ के रहने वाले संजय से हुई थी। शादी के बाद वह अपने परिवार के साथ मजदूरी करने के लिए गुजरात के पाटन जिले के गांव वामैया में रह रही थी। यहां संगीता की मां संतोष देवी भी मजदूरी का काम करती हैं। परिवार के मुताबिक करीब दो महीने पहले संगीता देवी शाम के समय पानी भरने के लिए घर से निकली थी, लेकिन इसके बाद वह वापस नहीं लौटी।

परिजनों ने पहले आसपास के इलाकों में काफी तलाश की। रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों से भी पूछताछ की गई, लेकिन संगीता का कहीं कोई पता नहीं चल सका। बाद में परिवार को जानकारी मिली कि उनके साथ मजदूरी करने वाला एक युवक छबराम उसे अपने साथ लेकर चला गया है। आरोप है कि यह युवक ठेकेदार लालू के यहां काम करता था, जो ऊंचा नगला का रहने वाला बताया जा रहा है।

पीड़ित पति संजय ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उसकी पत्नी बेहद भोली-भाली है और आसानी से किसी की बातों में आ जाती है। उनका आरोप है कि ठेकेदार लालू ने भी इस मामले में भूमिका निभाई है और उसने खुद मोटरसाइकिल से संगीता को कहीं छोड़ने की बात सामने आई है। हालांकि इस पूरे मामले की सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

परिवार का कहना है कि उन्होंने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत भी दी है, लेकिन अब तक पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। पति संजय का कहना है कि वह अपनी पत्नी को खोजने के लिए लगातार अलग-अलग जगहों पर भटक रहा है, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से अपील की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द से जल्द जांच कर संगीता देवी का पता लगाया जाए और यदि किसी ने उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। परिवार का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े अनहोनी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

 संदिग्ध मौत के बाद बढ़ा बवाल, शिकायत दर्ज कराने पहुंचे परिजनों को पुलिस ने नहीं दी रसीद, धमकियों से दहशत

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खगड़िया/दिल्ली। उषा देवी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। पहले जहां परिजनों ने इसे हत्या बताते हुए पति और उसके कथित संबंधों पर सवाल उठाए थे, वहीं अब पुलिस की कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर पर मिल रही धमकियों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद जब वे थाने में लिखित शिकायत देने पहुंचे, तो पुलिस ने शिकायत को सही तरीके से दर्ज नहीं किया और न ही उसकी कोई रसीद या प्राप्ति दी। इतना ही नहीं, जब परिवार के लोग शिकायत की कॉपी का फोटो लेने लगे तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें ऐसा करने से भी रोक दिया। इस व्यवहार से परिवार में आक्रोश और भय का माहौल है।

मामले में नया मोड़ तब आया जब परिजनों ने आरोप लगाया कि उषा देवी के पति और उनके परिवार की ओर से लगातार धमकियां दी जा रही हैं। परिजनों के अनुसार, संजय दास, सुरेंद्र दास और पांडव दास सहित अन्य लोग उषा के भाई को फोन कर धमका रहे हैं कि यदि शिकायत वापस नहीं ली गई तो जान से मार दिया जाएगा। कुछ लोग मौके पर पहुंचकर सीधे दबाव बना रहे हैं, जबकि अन्य फोन कॉल के जरिए धमकी दे रहे हैं।

परिवार का कहना है कि इस समय उषा का भाई वहां अकेले हैं और लगातार भय के साये में जी रहे हैं। उनके अनुसार, अभी सभी परिजन वहां नहीं पहुंच पाए हैं, जिसका फायदा उठाकर आरोपित पक्ष दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

मृतका के रिश्तेदारों ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस न केवल शिकायत दर्ज करने में टालमटोल कर रही है, बल्कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश भी की जा रही है। ऐसे में उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर होती जा रही है।

परिजनों का कहना है कि उषा देवी पिछले कई वर्षों से घरेलू कलह, मारपीट और पति के कथित अवैध संबंधों के कारण मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान थीं। इसलिए उनकी अचानक हुई मौत को आत्महत्या मानना संदेह के घेरे में है और इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।

परिवार ने प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया जाए, शिकायत को विधिवत दर्ज कर उसकी रसीद दी जाए और पीड़ित पक्ष की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च स्तर पर न्याय की गुहार लगाएंगे।

यह मामला अब केवल एक संदिग्ध मौत का नहीं रह गया है, बल्कि इसमें पुलिस की पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कानपुर में दबंगों का कहर: घर का जीना तुड़वाया, विरोध करने पर युवक से मारपीट—पुलिस पर भी लगे गंभीर आरोप

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कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 33 वर्षीय अंकुश ने अपने ही इलाके के कुछ लोगों पर न केवल उनके मकान के निर्माण में बाधा डालने बल्कि मारपीट और तोड़फोड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने अपने घर में जीना (सीढ़ी) बनवाया था, जिसे उनके पड़ोसी कुलदीप और राहुल ने जबरन तुड़वा दिया। इतना ही नहीं, अंकुश का आरोप है कि इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस ने भी उनकी कोई मदद नहीं की, बल्कि उल्टा उन पर ही कार्रवाई करने का दबाव बनाया गया।

पीड़ित अंकुश के अनुसार, उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस से की थी और मदद के लिए कॉल भी किया था, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। उनका आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में ही उनके घर का जीना गिरा दिया गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अंकुश ने यह भी बताया कि 30 मार्च को दोपहर करीब 3 बजे कुलदीप और राहुल ने कुछ बाहरी लोगों को बुलाकर उनके साथ जमकर मारपीट की, जिससे वह घायल हो गए।

अंकुश का कहना है कि वह लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन चौबेपुर थाने से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें अब स्थानीय पुलिस से कोई उम्मीद नहीं है और वह चाहते हैं कि उच्च स्तर पर इस मामले की जांच हो। पीड़ित ने मांग की है कि उनके घर को हुए नुकसान की भरपाई कुलदीप और राहुल से कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पीड़ित के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला बेहद गंभीर हो सकता है, जिसमें न केवल दबंगई बल्कि प्रशासनिक लापरवाही भी उजागर होती है। फिलहाल, इलाके में इस घटना को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है और लोग न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

 5 साल से आवास और राशन के लिए भटक रहा मजदूर, अब विकलांग पिता की पेंशन भी अटकी; वोट के समय ही याद आती है पंचायत

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टीकमगढ़ जिले के निवाड़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत हीरापुर गांव के निवासी मातादीन अहिरवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले पांच वर्षों से वे न तो राशन कार्ड बनवा पा रहे हैं और न ही उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल सका है। लगातार पंचायत और अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है।

मातादीन, जिनके पिता का नाम नारायण दास है, वर्तमान में रोजी-रोटी के लिए फरीदाबाद में मजदूरी करते हैं। उनका कहना है कि गांव में रोजगार के अभाव के कारण उन्हें बाहर रहना पड़ता है, लेकिन इसके चलते उन्हें सरकारी योजनाओं से वंचित कर दिया जाना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। वे बताते हैं कि ग्राम प्रधान संतोष यादव से कई बार संपर्क करने पर भी हर बार यही जवाब मिलता है कि “अभी फॉर्म नहीं भरे जा रहे हैं, जब भरेंगे तब आवेदन कर देना।”

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। मातादीन ने बताया कि उनके पिता नारायण दास वर्ष 2013 से विकलांग हैं, लेकिन आज तक उन्हें विकलांगता पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया है। पेंशन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति और अधिक दयनीय हो गई है। उन्होंने कई बार संबंधित विभागों में प्रयास किया, लेकिन हर बार कोई न कोई अड़चन बताकर काम टाल दिया जाता है।

मातादीन ने इस संबंध में 181 हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां से भी उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि वे गांव में स्थायी रूप से नहीं रहते, इसलिए उनका काम नहीं हो पा रहा है। इस पर उनका सवाल है कि जब चुनाव के समय वोट डालने के लिए उन्हें गांव बुलाया जाता है, तो फिर योजनाओं का लाभ देने में यह भेदभाव क्यों किया जाता है?

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गांव में कई ऐसे लोगों को आवास योजना का लाभ मिल चुका है, जिनके पहले से पक्के मकान हैं। “उनके घरों के फोटो खींचकर पैसे निकाल लिए जाते हैं, लेकिन हमारा आवेदन ही आगे नहीं बढ़ता,” मातादीन ने कहा। वे अपने गांव में घर बनाना चाहते हैं, लेकिन सरकारी सहायता के अभाव में उनका सपना अधूरा है।

यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक जरूरतमंद लोग अपने अधिकारों के लिए भटकते रहेंगे। एक तरफ सरकार योजनाओं के व्यापक प्रचार का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।