Tuesday, July 7, 2026
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30 साल दिल्ली में मेहनत, पीछे गांव में कब्जा! सीकर के खंडेला में दबंगों ने तोड़ा पुश्तैनी मकान, पुलिस पर भी उठे सवाल

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सीकर/खंडेला।
राजस्थान के सीकर जिले के खंडेला गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां रोज़गार की तलाश में 30 साल से दिल्ली में रह रहे गजानंद की पुश्तैनी संपत्ति पर कथित तौर पर दबंगों ने कब्जा कर लिया।
पीड़ित का आरोप है कि गांव लौटने पर उन्हें पता चला कि वार्ड नंबर आठ में स्थित उनका पुराना मकान, जो पहले से खंडहर की हालत में था, उसे तोड़कर कुछ लोगों ने जबरन कब्जा जमा लिया है।
गजानंद ने बताया कि वे वर्षों से दिल्ली में काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे।
इस दौरान गांव की जमीन और मकान की देखरेख नहीं हो पाई। इसी का फायदा उठाते हुए कुछ स्थानीय लोगों ने उनके हिस्से के मकान को पूरी तरह गिराकर उस पर कब्जा कर लिया।
पीड़ित का कहना है कि परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा जमीन को लेकर कोई सौदा किया गया है या नहीं, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है, लेकिन उनके हिस्से की संपत्ति पर अवैध कब्जा साफ तौर पर किया गया है।
सबसे गंभीर आरोप पुलिस पर लगाए गए हैं।
गजानंद का कहना है कि इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। उनका आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत से ही कब्जा करवाया गया है।
हालांकि उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई और एसपी को भी लिखित रूप में अवगत कराया, लेकिन पिछले तीन महीनों से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
पीड़ित अब प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
उनका कहना है कि उनके पुश्तैनी मकान पर दोबारा कब्जा दिलाया जाए और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
गांव में इस घटना को लेकर लोगों में भी चर्चा है और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक कार्रवाई करता है और क्या गजानंद को उनका हक मिल पाता है या नहीं।

गोरखनाथ मंदिर की दीवार तोड़कर सड़क बनाने का आरोप, विरोध करने पर घर में घुसकर मारपीट; 30 साल से पूजा कर रहीं महिला ने लगाई न्याय की गुहार

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रामपुर। जिले के शाहाबाद थाना क्षेत्र से आस्था, जमीन और मारपीट से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां की रहने वाली गुलाबो देवी ने आरोप लगाया है कि गांव में स्थित प्राचीन गोरखनाथ मंदिर की दीवार को तोड़कर कुछ लोग जबरन सड़क बनाने का प्रयास कर रहे हैं। पीड़िता का कहना है कि राजस्व अभिलेखों या किसी भी सरकारी दस्तावेज में उस स्थान पर सड़क का कोई उल्लेख नहीं है, इसके बावजूद दबंगई के बल पर मंदिर की जमीन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

गुलाबो देवी के अनुसार वह पिछले लगभग 30 वर्षों से गोरखनाथ मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना करती आ रही हैं। मंदिर उनके लिए केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि उनकी आस्था और विश्वास का केंद्र है। उन्होंने बताया कि हर साल 1 जनवरी को मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें गांव और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इसके अलावा हर रविवार को भी मंदिर में पूजा-पाठ और प्रसाद वितरण की परंपरा चली आ रही है, जिससे ग्रामीणों की गहरी धार्मिक भावनाएं इस मंदिर से जुड़ी हुई हैं।

पीड़िता का आरोप है कि गांव के ही कुछ लोग, जिनमें केदार सिंह, लज्जा देवी, प्रताप, आकाश, मुन्नी देवी, राजेंद्र सिंह, दिनेश, देशराज, हुकुम सिंह और अन्य शामिल हैं, मंदिर की दीवार तोड़कर वहां से रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। गुलाबो देवी का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो मंदिर की पवित्रता और वहां होने वाले धार्मिक आयोजनों पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें दबाव में लेने और डराने-धमकाने की कोशिश की गई।

पीड़िता ने मीडिया से बातचीत में बताया कि शुक्रवार की सुबह विपक्षी पक्ष के कुछ लोग उनके घर में घुस आए और उनके परिवार के साथ मारपीट की। इस घटना में गुलाबो देवी को अंदरूनी चोटें आई हैं और उनके बच्चे भी इस झगड़े की चपेट में आ गए। घटना के बाद से परिवार में दहशत का माहौल बना हुआ है।

गुलाबो देवी का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे वह बेहद परेशान और चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो मंदिर की संरचना को गंभीर नुकसान हो सकता है और इससे लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचेगी।

पीड़िता ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मंदिर की जमीन तथा दीवार को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने मांग की है कि मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि आने वाले समय में वहां होने वाले धार्मिक आयोजन और पूजा-पाठ बिना किसी बाधा के जारी रह सकें।

 

पुताई का काम करने गया युवक जिंदगी और मौत से जूझ रहा: जमींदार पर साजिश का शक, पिता बोले– धमकियां मिल रही हैं; पुलिस ने अब तक नहीं लिखी एफआईआर

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अशोकनगर। मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पुताई का काम करने गया 23 वर्षीय युवक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। पीड़ित के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे के साथ संदिग्ध परिस्थिति में गंभीर घटना हुई है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है। परिवार ने इस पूरे मामले में साजिश की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता केसरी लाल, निवासी ग्राम राजपुर, पोस्ट राजपुर, जिला अशोकनगर (मध्यप्रदेश) ने बताया कि उनका बेटा मुरली (उम्र करीब 23 वर्ष) पिछले चार-पांच दिनों से हटा खेड़ी गांव के एक जमींदार के यहां पुताई का काम करने गया हुआ था। 31 मार्च 2026 की शाम करीब 5 बजे अचानक मुरली की हालत बिगड़ने की सूचना मिली। आरोप है कि जमींदार द्वारा उसे अशोकनगर के एक अस्पताल में लाया गया, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज करने से मना कर दिया।

इसके बाद मुरली को भोपाल के हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। पीड़ित पिता का कहना है कि 1 अप्रैल को जमींदार ने फोन कर उन्हें बताया कि उनका बेटा पुताई करते समय ऊंचाई से गिर गया है, इसलिए उसे भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही परिवार के लोग तुरंत भोपाल पहुंचे, जहां उन्होंने देखा कि मुरली की हालत बेहद गंभीर है और वह अब तक होश में नहीं आया है।

परिवार का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया है कि युवक की हालत बहुत नाजुक है और उसके बचने की संभावना बेहद कम है। डॉक्टरों के अनुसार उसके बचने की संभावना लगभग 10 प्रतिशत बताई जा रही है। इस खबर के बाद से परिवार में मातम का माहौल है और परिजन लगातार अस्पताल में उसके होश में आने का इंतजार कर रहे हैं।

पीड़ित पिता केसरी लाल ने इस घटना को लेकर जमींदार पर गंभीर शक जताया है। उनका कहना है कि उन्हें लगता है कि उनके बेटे के साथ मारपीट या कोई अन्य गंभीर घटना हुई हो सकती है, जिसे छिपाने के लिए गिरने की कहानी बताई जा रही है। पिता का आरोप है कि जमींदार ने इलाज के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं दी और उल्टा उन्हें धमकियां दी जा रही हैं।

पिता ने यह भी बताया कि जमींदार उनके मोबाइल नंबर पर फोन कर धमकी देता है कि “जो करना है कर लो।” पीड़ित का कहना है कि उनके पास कीपैड फोन होने के कारण वे इन कॉल्स की रिकॉर्डिंग भी नहीं कर पाए हैं, जिससे वे सबूत जुटाने में भी असमर्थ हैं।

मामले को लेकर पीड़ित पिता अशोकनगर थाने और चौकी में भी शिकायत करने पहुंचे, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। वे कई बार पुलिस के पास जा चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

इधर परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर बताई जा रही है। भोपाल में चल रहे इलाज का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। पिता का कहना है कि उनके पास बेटे के इलाज के लिए पर्याप्त पैसे भी नहीं हैं और वे प्रशासन से आर्थिक मदद और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और यदि इसमें किसी की लापरवाही या साजिश सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।

 

तालेड़ा के जाखमूण्ड गांव में देर रात घर में घुसकर महिला और उसके परिवार के साथ मारपीट तथा अश्लील हरकत का मामला सामने आया है।

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पीड़िता तंवर बाई पत्नी राजेन्द्र सिंह ने पुलिस उप अधीक्षक तालेड़ा, जिला बून्दी को शिकायत देकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना 21 जनवरी 2026 की रात की बताई जा रही है, जिसने पूरे गांव में सनसनी फैला दी है।

पीड़िता के अनुसार, घटना वाली रात वह अपने परिवार के साथ घर पर मौजूद थी। इसी दौरान गांव के ही निवासी देवप्रकाश गुर्जर पुत्र रामनिवास और कन्हैयालाल मेघवाल, जो कथित रूप से नशे की हालत में थे, जबरन उनके घर में घुस आए। आरोप है कि घर में घुसते ही दोनों ने गाली-गलौज शुरू कर दी और परिवार के सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार करने लगे।

शिकायत में बताया गया है कि आरोपियों ने पीड़िता के पुत्र दशरथ सिंह के साथ पहले कहासुनी की और फिर मारपीट पर उतारू हो गए। जब मां तंवर बाई अपने बेटे को बचाने के लिए बीच-बचाव करने पहुंचीं, तो देवप्रकाश गुर्जर ने उनके साथ हाथापाई की और अश्लील हरकतें कीं। इसी बीच शोर सुनकर उनकी पुत्री गोविन्द कंवर घर से बाहर आई और मां को बचाने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि आरोपी ने उसके साथ भी गाली-गलौज की और धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि दोनों आरोपी नशे के आदी हैं और आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। देवप्रकाश गुर्जर ने उनके पुत्र को जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि अगर वह अकेला मिला तो उसे खत्म कर देगा और पुलिस भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। इस धमकी के बाद परिवार दहशत में है।

शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि देवप्रकाश गुर्जर गांव में अवैध खनन का काम करता है और रोज ट्रैक्टर से मिट्टी निकालता है। पीड़िता का कहना है कि इसी बात को लेकर वह उनके पुत्र पर झूठा शक कर रहा है कि उसने पुलिस में शिकायत की है, जबकि परिवार का इस मामले से कोई संबंध नहीं है।

इसके अलावा कन्हैयालाल मेघवाल पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक उसने पूरे परिवार को धमकी दी कि यदि वे थाने में शिकायत करने गए तो उन पर झूठा मुकदमा दर्ज करवा देगा। इन धमकियों के कारण परिवार मानसिक रूप से बेहद परेशान और भयभीत है।

घटना के बाद गांव में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है। पीड़िता ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज, महिलाओं के साथ अभद्रता और जान से मारने की धमकी देने के मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।

गिरधरपुर में महिला की संदिग्ध मौत: बिना सूचना अंतिम संस्कार, मायके पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप

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ग्रेटर नोएडा के गिरधरपुर गांव में 25 वर्षीय महिला निकिता की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मृतका के मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे हत्या का मामला बताया है।
परिजनों के अनुसार, निकिता ने करीब 10 वर्ष पहले अपनी मर्जी से नीरज से विवाह किया था और वह अपने पति व तीन बच्चों के साथ गिरधरपुर में रह रही थीं। परिवार में 8 साल की बेटी, 6 साल का बेटा और 6 महीने का छोटा बच्चा है।
बताया जा रहा है कि 31 मार्च को मायके पक्ष को फोन के माध्यम से निकिता की तबीयत खराब होने की सूचना दी गई। जब तक परिवार गिरधरपुर पहुंचा, तब तक ससुराल पक्ष द्वारा निकिता का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। परिजनों का आरोप है कि उन्हें बेटी का चेहरा तक नहीं देखने दिया गया।
मायके पक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए कहा कि यदि मौत स्वाभाविक थी, तो उन्हें समय रहते सूचना क्यों नहीं दी गई। साथ ही, इतनी जल्दबाजी में अंतिम संस्कार किए जाने पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। वहीं ससुराल पक्ष ने इसे अपना पारिवारिक रिवाज बताते हुए कहा कि शव को अधिक समय तक घर में नहीं रखा जाता।
निकिता की मां ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की हत्या की गई है और सबूत मिटाने के लिए जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि ससुराल में पहले से विवाद चल रहा था, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
घटना के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोग भी मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। मायके पक्ष ने प्रशासन से दोषियों की गिरफ्तारी और मामले की गहन जांच की मांग की है।
मायके पक्ष ने आरोप लगाया है कि निकिता के ससुराल वालों ने बार-बार यह बयान बदले हैं कि कभी उसके सर दर्द थी और कभी कह रहे हैं कि उसकी हार्ट अटैक से मौत हुई उनके बयान बार-बार बदले जा रहे हैं जिससे यह शक होता है कि इस मामले में कुछ ना कुछ सच को छुपाया जा रहा है परिवार वालों ने अपील की है कि सच्चाई सबके सामने आए ताकि निकिता की आत्मा को शांति मिल सके और आरोपी सलाखों के पीछे जा सके।

परिवार का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक वे संघर्ष जारी रखेंगे। प्रशासन और पुलिस से अपील की गई है कि मामले को दबाने की बजाय सच्चाई सामने लाई जाए।

बीमार पिता के इलाज के दौरान बड़े भाई ने कराई कथित वसीयत: छोटे भाई को पैतृक मकान से किया बेदखल, 15 लाख रुपये की मांग का आरोप

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कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के डेरापुर थाना क्षेत्र के लारपुर पेड़ पंचायत नत्थू गांव में पारिवारिक संपत्ति को लेकर गंभीर विवाद का मामला सामने आया है। पीड़ित पिंटू शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके बड़े भाई ने पिता की बीमारी के दौरान कथित रूप से धोखे से वसीयत करवा ली और अब पैतृक मकान में रहने के लिए उनसे 15 लाख रुपये की मांग कर रहा है। पीड़ित का कहना है कि इस पूरे मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई और अब उन्हें अपने ही घर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है।

पीड़ित पिंटू शर्मा के अनुसार वर्ष 2019 में उनके पिता रामकिशन शर्मा गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। इलाज के लिए उन्हें मुंबई के टाटा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। पिंटू शर्मा का कहना है कि उस दौरान पिता के इलाज में अधिकतर खर्च उन्होंने ही उठाया, जबकि उनके बड़े भाई राजेश शर्मा ने कोई आर्थिक सहयोग नहीं किया। इसी बीच वर्ष 2021 में कथित रूप से राजेश शर्मा ने अपने पिता से वसीयत करवा ली, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। बाद में वर्ष 2023 में इलाज के दौरान ही उनके पिता रामकिशन शर्मा का निधन हो गया।

पीड़ित का कहना है कि उनके पिता ने दोनों भाइयों के लिए अलग-अलग दो मकान बनवाए थे और दोनों मकान लगभग एक जैसे थे ताकि दोनों बेटों को बराबरी का हक मिल सके। इसके बावजूद आरोप है कि बड़े भाई राजेश शर्मा ने लालच में आकर धोखाधड़ी से दोनों मकानों की वसीयत अपने नाम करवा ली। अब स्थिति यह है कि पिंटू शर्मा अपने ही पैतृक घर के अधिकार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

पिंटू शर्मा ने बताया कि वह मुंबई में रहकर मेहनत मजदूरी करते हैं और उसी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते रहे हैं। हाल ही में उनकी बेटी शादी के लायक हो गई है, जिसके लिए उन्होंने सोचा कि गांव में स्थित अपने पैतृक मकान की मरम्मत करवा लें ताकि बेटी की शादी की तैयारियां की जा सकें। लेकिन जब वह गांव पहुंचे तो देखा कि मकान पर ताला लगा हुआ है और उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया।

पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने इस बारे में अपने बड़े भाई राजेश शर्मा से बात की तो उसने साफ तौर पर कहा कि यदि मकान में रहना है तो 15 लाख रुपये देने होंगे, क्योंकि वसीयत उसके नाम हो चुकी है। पिंटू शर्मा का कहना है कि वह एक मजदूर हैं और इतनी बड़ी रकम देना उनके लिए संभव नहीं है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि उनके चाचा जगदीश शर्मा का घर भी पास में ही है और इस विवाद के चलते माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। पिंटू शर्मा का कहना है कि राजेश शर्मा उन्हें लगातार धमकी देता है कि यदि वह गांव में दिखाई भी दिए तो उन्हें जान से मरवा दिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि गांव के प्रधान ने भी इस मामले में हस्तक्षेप कर राजेश शर्मा को समझाने की कोशिश की थी कि वह अपने छोटे भाई का हिस्सा न छीने और पारिवारिक विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाए। लेकिन आरोप है कि राजेश शर्मा ने प्रधान की बात को भी नजरअंदाज करते हुए कहा कि वह उन्हें नहीं जानते और उनके कहने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

पीड़ित ने यह भी दावा किया है कि जिस वसीयत के आधार पर उनके बड़े भाई मकान पर कब्जा कर रहे हैं, उसमें गवाह के रूप में शामिल दो लोग भी राजेश शर्मा के ही परिवार से जुड़े हुए हैं। इनमें से एक व्यक्ति उनके मामा महेश शर्मा बताए जा रहे हैं। पिंटू शर्मा का कहना है कि इसी वजह से उन्हें वसीयत की निष्पक्षता पर भी संदेह है और उन्हें लगता है कि यह पूरी प्रक्रिया उनके साथ धोखाधड़ी कर की गई है।

पिंटू शर्मा ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने न्यायालय में वाद दायर किया हुआ है और लगातार न्याय के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुनवाई नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि इस विवाद के चलते वह मानसिक रूप से काफी परेशान हैं और परिवार के साथ असुरक्षा की भावना में जी रहे हैं।

पीड़ित ने लोगों से अपील भी की है कि जिस मकान को लेकर विवाद चल रहा है, उसे कोई भी व्यक्ति खरीदने का प्रयास न करे, क्योंकि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें उनके पैतृक मकान में रहने का अधिकार दिलाया जाए, ताकि वह अपनी बेटी की शादी सम्मानपूर्वक कर सकें।

 

बिहारमें मोबाइल वेटरनरी पशु इकाई परिवार कंपनी पर गंभीर आरोप, ड्राइवरों को हटाने और जान से मारने की धमकी देने का मामला गरमाया

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भोजपुर जिले के बरहा प्रखंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां भव्या कंपनी और उससे जुड़ी मोबाइल परिवार सेवा में कार्यरत कर्मचारियों ने कंपनी के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि कंपनी के अधिकारी गलत इल्जाम लगाकर पुराने कर्मचारियों को नौकरी से हटाने की साजिश रच रहे हैं और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

मामले में ड्राइवर धीरज कुमार और शंभू कुमार ने आरोप लगाया है कि कंपनी के अधिकारियों द्वारा उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। दोनों का कहना है कि वे लंबे समय से ईमानदारी के साथ कंपनी में कार्य कर रहे हैं, लेकिन अब कुछ अधिकारी उन्हें नौकरी से बाहर करने के लिए फर्जी दस्तावेज और गलत हाजिरी रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं।

पीड़ितों का आरोप है कि दूसरे व्यक्ति के बीमा और वाहन दस्तावेजों का उपयोग कर गलत तरीके से गाड़ी चलाने का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इसके आधार पर कंपनी प्रशासन उन्हें दोषी ठहराने की कोशिश कर रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यह पूरी तरह से सुनियोजित साजिश है ताकि उन्हें नौकरी से हटाकर किसी अन्य व्यक्ति को रखा जा सके।

सबसे गंभीर आरोप कंपनी के एक अधिकारी नीरज पर लगाया गया है। पीड़ितों के अनुसार नीरज नामक अधिकारी फोन पर लगातार धमकियां दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जान से मारने तक की धमकी दी गई है। इस धमकी के बाद दोनों कर्मचारी और उनके परिवार के लोग दहशत में हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कर्मचारियों के साथ अन्याय हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कंपनी के अधिकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों और धमकियों की गंभीरता से जांच की जाए।

धीरज कुमार और शंभू कुमार ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस पूरे मामले ने भोजपुर जिले के बरहा प्रखंड में सनसनी फैला दी है। अब सभी की नजर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

बल्दीराय तहसील में जमीन बैनामा और अधिवक्ता पत्र पर बड़ा विवाद, पूनम बनाम गीता देवी केस ने मचाई हलचल

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सुल्तानपुर:
जिले की तहसील बल्दीराय में एक पुराने वाद ने अब सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। वर्ष 2006 से जुड़े पूनम बनाम गीता देवी प्रकरण में अधिवक्ता नियुक्ति पत्र और जमीन बैनामा को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी और अंगूठा निशान को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का केंद्र बना दिया है।

जानकारी के मुताबिक, 24 मार्च 2016 को बार एसोसिएशन बल्दीराय में प्रस्तुत एक अधिवक्ता नियुक्ति पत्र में वादी द्वारा अपने अधिवक्ता को व्यापक अधिकार दिए गए थे। इसमें वाद की पैरवी से लेकर दस्तावेज प्रस्तुत करने, समझौता करने और डिग्री की राशि प्राप्त करने तक की अनुमति शामिल थी। लेकिन अब इसी दस्तावेज की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि दस्तावेज में दर्ज सहमति और हस्ताक्षर पूरी तरह पारदर्शी नहीं हैं।

मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब गीता देवी के अंगूठा निशान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि जिस समय गीता देवी अंगूठा लगाने की स्थिति में थीं, उस समय उनके अंगूठे का निशान दस्तावेज में नहीं लिया गया। इस आधार पर पूरे अधिवक्ता पत्र को संदिग्ध बताया जा रहा है और इसकी निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

इसी बीच एक और बड़ा आरोप सामने आया है कि पूनम चौरसिया, पवन कुमार और रेशमा द्वारा विवादित जमीन का बैनामा अपने नाम करा लिया गया। बताया जा रहा है कि यह बैनामा उसी विवादित प्रक्रिया के दौरान हुआ, जिससे गीता देवी पक्ष को भारी नुकसान होने की आशंका है। इस घटनाक्रम ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है और जमीन से जुड़े इस विवाद ने अब कानूनी जटिलता का रूप ले लिया है।

स्थानीय लोगों और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिवक्ता नियुक्ति पत्र या बैनामा प्रक्रिया में किसी प्रकार की धोखाधड़ी या अनियमितता साबित होती है, तो यह न केवल संबंधित वाद को प्रभावित करेगा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करेगा। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की गहन जांच, हस्ताक्षर और अंगूठा निशान की पुष्टि तथा पूरी प्रक्रिया की वैधता की पड़ताल बेहद आवश्यक हो जाती है।

फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में साक्ष्य जुटाने में लगे हुए हैं। तहसील और न्यायालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की मांग तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर प्रशासनिक या न्यायिक स्तर पर ठोस कार्रवाई संभव है।

यह मामला अब न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर सच्चाई क्या है और न्याय किसे मिलेगा।

सड़क पर कब्जा और पक्का चबूतरा बनाकर रास्ता बंद करने का आरोप: ग्रामीणों में आक्रोश, बड़े वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप

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बस्ती। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के नगर थाना क्षेत्र के भरवलिया गांव में सड़क निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गांव के कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण कार्य में भारी अनियमितता की गई है और एक व्यक्ति द्वारा दबंगई के बल पर सड़क के हिस्से पर कब्जा कर लिया गया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि गांव का मुख्य रास्ता लगभग बाधित हो चुका है और बड़ी गाड़ियों का आना-जाना पूरी तरह ठप पड़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की कई बार शिकायत प्रशासन से की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में हाल ही में सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन गांव के ही निवासी किंकर पाण्डेय पर आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से मिलकर सड़क का पूरा आरसीसी निर्माण नहीं होने दिया। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क का केवल लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ही आरसीसी से बनाया गया, जबकि बाकी हिस्से को अधूरा छोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, आरोप है कि पहले उस हिस्से में मिट्टी, बांस और कचरा रखकर रास्ते को संकरा कर दिया गया था, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली, एंबुलेंस और अन्य चार पहिया वाहनों का निकलना बेहद मुश्किल हो गया था।

ग्रामीणों ने बताया कि अब स्थिति और गंभीर हो गई है। उनका आरोप है कि जिस जगह पहले मिट्टी, बांस और कचरा रखा गया था, अब उसी स्थान पर पक्का चबूतरा बना दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस चबूतरे के कारण रास्ता लगभग बंद हो गया है और बड़े वाहन तो दूर, कई बार छोटे वाहन निकालना भी मुश्किल हो जाता है। इससे पूरे गांव के लोगों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि किंकर पाण्डेय ने अपने मकान के पास दीवार से सटाकर जंगला और झाप लगाने की कोशिश भी की है, रायपुर से उत्तम पांडे का जितना घर है उनसे ज्यादा आरोपी का घर है फिर भी आरोपी रोड पर मेरी जगह है

जिससे रास्ता और अधिक बाधित हो रहा है। गांव के लोगों का आरोप है कि यह सब दबंगई दिखाते हुए किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर गांव के ही रामधीर और रघुवर जैसे लोगों ने अपना मकान बनाते समय लगभग दो मीटर जमीन सड़क के लिए छोड़ दी थी, ताकि गांव के रास्ते में कोई बाधा न आए। इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा कब्जा कर रास्ता संकरा कर दिया गया है, जिससे पूरे गांव को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने रास्ते से मिट्टी, बांस और कचरा हटाने की बात कही तो विपक्षी पक्ष के लोगों ने झगड़ा और मारपीट की स्थिति पैदा कर दी। आरोप है कि किंकर पाण्डेय के परिवार के कई सदस्य एकजुट होकर ग्रामीणों को धमकाते हैं और विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देते हैं। इससे गांव में तनाव का माहौल बन गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन, नगर थाना और अन्य अधिकारियों से कई बार ऑनलाइन और लिखित रूप में की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही मामले की निष्पक्ष जांच कर रास्ता खाली नहीं कराया गया तो गांव में कभी भी बड़ा विवाद या अप्रिय घटना हो सकती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की जाए, सड़क पर बनाए गए पक्के चबूतरे को हटवाया जाए और बचा हुआ आरसीसी निर्माण पूरा कराया जाए, ताकि गांव के लोगों को आने-जाने में राहत मिल सके और गांव में शांति व्यवस्था बनी रहे।

बलिया जिले के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के डुहा बिहरा गांव से एक बेहद सनसनीखेज

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मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने ही पाटीदारों पर मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और सोने की चेन झपटने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता सविता देवी, पत्नी हरेंद्र यादव, ने प्रशासन से अपनी जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है। महिला का कहना है कि वह घर पर अकेली रहती हैं, जबकि उनके पति और बच्चे बाहर रहते हैं, इसी का फायदा उठाकर आरोपी लगातार उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं।

पीड़िता के अनुसार गांव के ही राजेश यादव, सुनीता यादव, सिंधु, नीतू और शिवम यादव लंबे समय से उनसे अदावत रखते हैं। महिला ने आरोप लगाया कि ये सभी लोग आए दिन उनके साथ बदसलूकी करते हैं, गंदी गालियां देते हैं और मानसिक रूप से परेशान करते रहते हैं। मामला उस समय और गंभीर हो गया जब 22 मार्च 2026 को कथित तौर पर सभी आरोपी उनके घर पहुंचे और विवाद शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की, जान से मारने की धमकी दी और इस दौरान उनकी सोने की चेन भी झपट ली।

सविता देवी ने बताया कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने सिकंदरपुर थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन अब तक न तो कोई सुनवाई हुई और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। इससे पीड़िता और उनका परिवार दहशत में है। महिला का कहना है कि आरोपी खुलेआम धमकी दे रहे हैं कि मौका मिलने पर उन्हें जान से मार देंगे। चूंकि वह घर में अकेली रहती हैं, इसलिए उन्हें हर समय किसी अनहोनी का डर सताता रहता है।

गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो मामला और गंभीर रूप ले सकता है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उनकी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर थाने में शिकायत देने के बाद भी अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्या पीड़िता को न्याय मिलेगा, या फिर दबंगों का खौफ यूं ही बना रहेगा। पूरे इलाके में इस घटना को लेकर तनाव का माहौल है और लोग पुलिस की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।