Tuesday, July 7, 2026
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पालमपुर में कटर खरीदने के दो महीने के भीतर खराब, दुकानदार ने बदलने और ठीक करने से किया इनकार, उपभोक्ता में भारी आक्रोश

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पालमपुर। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर क्षेत्र से एक गंभीर उपभोक्ता शिकायत सामने आई है, जहां भवारना निवासी हेमचंद्र ने आरोप लगाया है कि उन्होंने थाकुरद्वारा स्थित शिव शक्ति ट्रेडर्स से एक कटर मशीन खरीदी थी, जो खरीदने के महज एक से दो महीने के भीतर ही खराब हो गई। पीड़ित का कहना है कि मशीन खरीदते समय उन्हें बेहतर गुणवत्ता और लंबे समय तक चलने का भरोसा दिया गया था, लेकिन कुछ ही समय में मशीन ने काम करना बंद कर दिया।

प्राप्त बिल के अनुसार यह खरीदारी 7 अक्टूबर 2025 को की गई थी। बिल में मशीन की कीमत लगभग 38 हजार 550 रुपये दर्ज है। हीमचंद्र का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद उन्हें खराब और संभवतः पुराना या एक्सपायरी सामान थमा दिया गया।

पीड़ित हीमचंद्र ने बताया कि जब वह मशीन को लेकर दुकान पर पहुंचे और दुकानदार से उसे बदलने या मरम्मत करने की बात कही, तो दुकान संचालक ने साफ इनकार कर दिया। आरोप है कि दुकानदार ने अभद्र भाषा में कहा कि हम न तो इसे बदलेंगे और न ही ठीक करेंगे, जो आपसे करते बने वह कर लीजिए।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। आसपास के कुछ लोगों का कहना है कि संबंधित दुकान पर पहले भी पुराने और खराब सामान बेचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि दुकान में एक्सपायरी और दोषपूर्ण सामान रखा जाता है, जिसे ग्राहकों को बेच दिया जाता है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि जब कोई ग्राहक शिकायत लेकर पहुंचता है तो उसे संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता। इस मामले ने क्षेत्र में दुकानदारों की जवाबदेही और उपभोक्ता अधिकारों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी ग्राहक को खरीद के तुरंत बाद उत्पाद में खराबी मिलती है और दुकानदार उसे बदलने या ठीक करने से मना करता है, तो यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर मामला बन सकता है। पीड़ित उपभोक्ता जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है और बिल के आधार पर कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन और उपभोक्ता विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है।

भोपाल में पत्रकारिता का ऐतिहासिक संगम: माखनलाल चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान 10 अप्रैल को, देश के दिग्गज विचारक होंगे शामिल

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भोपाल। राजधानी भोपाल में पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आयोजन होने जा रहा है। पं. माखनलाल चतुर्वेदी की स्मृति में आयोजित विशेष व्याख्यान कार्यक्रम 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को आयोजित किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित आयोजन में देश के वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद् और विचारक एक मंच पर जुटेंगे, जहां माखनलाल जी के युग और उनकी पत्रकारिता पर गहन चर्चा होगी।

यह कार्यक्रम माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जो पत्रकारिता शिक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी संस्थान माना जाता है। आयोजन का स्थल विश्वविद्यालय का माखनपुरम परिसर स्थित गणेश शंकर विद्यार्थी सभागार रहेगा, जो म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी के सामने, बिशनखेड़ी में स्थित है।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण होंगे प्रख्यात शिक्षाविद् और पूर्व कुलगुरु अच्युतानंद मिश्र, जो मुख्य वक्ता के रूप में “माखनलाल जी का युग एवं उनकी पत्रकारिता” विषय पर अपने विचार रखेंगे। उनके वक्तव्य से नई पीढ़ी को पत्रकारिता के मूल्यों और आदर्शों की गहराई समझने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव, जो अपने प्रशासनिक अनुभव और वैचारिक दृष्टिकोण से कार्यक्रम को नई दिशा देंगे।

इस व्याख्यान का संचालन करेंगे कला समीक्षक और संपादक विनय उपाध्याय, जो टैगोर विश्व कला केन्द्र, आरएनटीयू भोपाल के निदेशक भी हैं।

विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो. (डॉ.) पी. शशिकला ने इस आयोजन को संस्थान की प्रतिष्ठा से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्यक्रम बताते हुए सभी पत्रकारों, विद्यार्थियों और बुद्धिजीवियों से इसमें भाग लेने का आह्वान किया है।

यह आयोजन न केवल माखनलाल चतुर्वेदी के योगदान को याद करने का अवसर होगा, बल्कि वर्तमान दौर की पत्रकारिता के सामने खड़ी चुनौतियों और उसकी दिशा पर भी गंभीर मंथन का मंच बनेगा। भोपाल में होने वाला यह कार्यक्रम पत्रकारिता जगत के लिए एक बड़ी वैचारिक हलचल साबित हो सकता है।

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तंत्र, डर और संपत्ति की साजिश: 12 साल तक बहू पर जुल्म, जान बचाकर भागी महिला

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सोलन/बिलासपुर

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों की नींव और इंसानियत दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक महिला ने अपने ही ससुराल पक्ष पर पिछले 12 वर्षों से लगातार मानसिक, शारीरिक और सामाजिक प्रताड़ना देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि यह सब एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया, जिसका मकसद परिवार की संपत्ति पर कब्जा जमाना था।

पीड़िता सुनीता देवी के मुताबिक, उनके चचेरे देवर शीशराम, उसकी पत्नी गोंदा और बेटा अंकुर लंबे समय से उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। आरोप है कि इन लोगों ने उनके पति धनीराम को भी अपने प्रभाव में ले लिया है, जिसके कारण वे पत्नी के खिलाफ खड़े हो गए हैं। महिला का कहना है कि उनके पति की हालत भी लगातार खराब होती जा रही है और वे मानसिक दबाव में जी रहे हैं।

हालात इतने बिगड़ गए कि सुनीता देवी को अपनी जान बचाने के लिए सोलन स्थित अपना घर छोड़ना पड़ा और अब वे बिलासपुर में अपनी भांजी के घर शरण लेकर रह रही हैं। उन्होंने बताया कि आज भी वे डर के साये में जी रही हैं और उन्हें अपनी और अपने परिवार की जान का खतरा बना हुआ है।

महिला ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि ससुराल पक्ष के लोग तंत्र विद्या का सहारा लेकर उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि 13 मार्च 2025 को घर के बाहर तांत्रिक क्रिया करवाई गई, जिसके बाद से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी और वे सामान्य रूप से खाना तक नहीं खा पा रही हैं।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि देवर शीशराम पहले भी उन पर जानलेवा हमला करने की कोशिश कर चुका है। उसने दरांती से काटने की कोशिश की और कई बार उन्हें डराकर दहशत का माहौल बनाया गया। महिला का कहना है कि मौका मिलते ही आरोपी उन्हें खत्म करने की साजिश रच रहे हैं।

इतना ही नहीं, सुनीता देवी ने दावा किया कि उनके मायके पक्ष के कुछ सदस्यों की भी इसी तरह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है, हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

महिला ने मदन, जय, शीशराम और गोंदा को मुख्य आरोपी बताया है। इसके अलावा गणपत, रोशन, मुंशी प्रेम, नानक चंद और बाजीरा पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, इस पूरे मामले में अब तक पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि महिला के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद और अंधविश्वास के खतरनाक गठजोड़ का बड़ा उदाहरण बन सकता है।

अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि पीड़िता को न्याय कब तक मिल पाता है।

देवरिया स्टेशन से युवक रहस्यमय तरीके से लापता: 20 अप्रैल को होनी थी शादी, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल; बेटे की तलाश में भटक रहे परिजन

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देवरिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया रेलवे स्टेशन से एक युवक के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला सामने आया है। युवक 1 अप्रैल की शाम से गायब बताया जा रहा है। परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं लग सका है। बेटे के अचानक गायब होने से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और परिजन लगातार उसकी तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं।

जानकारी के अनुसार बिहार के गोपालगंज जिले के डोमनपुर (लामी चौर) थाना भौर निवासी परमेद्र राम, उम्र करीब 22 वर्ष, पिता रामबली राम के पुत्र हैं। परिवार के अनुसार परमेद्र राम पिछले 6–7 वर्षों से महाराष्ट्र के पुणे में काम करते थे और कुछ समय पहले ही घर लौटे थे। बताया जा रहा है कि उनकी शादी भी तय हो चुकी थी और आगामी 20 अप्रैल 2026 को उनका विवाह होना था। घर में शादी की तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं और पूरे परिवार में खुशी का माहौल था।

परिजनों के मुताबिक 1 अप्रैल की शाम करीब 7:10 बजे परमेद्र राम ने अपनी मां धनावती देवी से फोन पर बात की थी। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। इस पर मां और घर के अन्य लोगों ने उन्हें जल्द घर आने को कहा। युवक ने बताया था कि वह देवरिया रेलवे स्टेशन पर है और अगले दिन घर पहुंच जाएगा।

लेकिन इसके बाद वह घर नहीं पहुंचा और न ही दोबारा परिवार से कोई संपर्क किया। जब परिजनों ने बार-बार फोन करना शुरू किया तो मोबाइल फोन तो लग रहा था, लेकिन कोई कॉल रिसीव नहीं कर रहा था। इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई। अगले दिन भी जब युवक घर नहीं पहुंचा तो परिजन उसकी तलाश में निकल पड़े।

परिवार वालों ने देवरिया रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में काफी खोजबीन की। इसके अलावा रिश्तेदारों और परिचितों से भी जानकारी ली गई, लेकिन युवक का कहीं भी कोई पता नहीं चल सका। युवक के इस तरह अचानक गायब हो जाने से परिवार के लोग बेहद परेशान और चिंतित हैं।

परमेद्र राम के माता-पिता का कहना है कि उनका बेटा मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ था और किसी प्रकार की परेशानी भी नहीं थी। ऐसे में उसका अचानक लापता हो जाना पूरे परिवार के लिए रहस्य और चिंता का विषय बन गया है। मां धनावती देवी का रो-रोकर बुरा हाल है और वह अपने बेटे के सुरक्षित लौट आने की आस में हर जगह गुहार लगा रही हैं। वहीं पिता रामबली राम भी बेटे की तलाश में लगातार इधर-उधर भटक रहे हैं।

परिजनों ने मीडिया और प्रशासन से मदद की अपील की है। उनका कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति को परमेद्र राम के बारे में कोई जानकारी मिले तो वह तुरंत परिवार के मोबाइल नंबर

9955715201
9572758548

पर संपर्क करे या नजदीकी थाने में सूचना दे, ताकि युवक को सुरक्षित घर वापस लाया जा सके। परिवार को उम्मीद है कि किसी की एक छोटी सी सूचना भी उनके बेटे को वापस लाने में मददगार साबित हो सकती है।

हिंगणघाट में मंदबुद्धि महिला से छेड़छाड़ और धमकी का सनसनीखेज मामला, आरोपी पर पुलिस में शिकायत दर्ज

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वर्धा जिले के हिंगणघाट शहर से एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। महात्मा फुले वार्ड में रहने वाली एक मंदबुद्धि महिला के साथ कथित तौर पर जबरन ले जाने की कोशिश, हाथ पकड़कर दबाव बनाने और विरोध करने पर धमकी देने का आरोप सामने आया है। पीड़िता के परिवार की शिकायत पर हिंगणघाट पुलिस थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है।

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना 6 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 7 बजे की बताई जा रही है। शिकायतकर्ता श्रीमती रेखा दीपक पांडे, उम्र 52 वर्ष, जो नगर परिषद में सफाई कर्मी के रूप में कार्यरत हैं, ने पुलिस को दी गई अपनी जुबानी रिपोर्ट में बताया कि वह रोज की तरह अपनी बड़ी बहन लक्ष्मी सुरेश पांडे के घर स्नान और शौच के लिए गई थीं, क्योंकि उनके घर में शौचालय और बाथरूम की सुविधा नहीं है।

घटना के समय उनकी बड़ी बहन लक्ष्मी पांडे नगर परिषद में हाजिरी देने गई हुई थीं, जबकि उनकी भतीजी गंगा सुरेश पांडे, उम्र लगभग 35 वर्ष, घर पर अकेली थी। शिकायत में बताया गया है कि गंगा बचपन से ही मंदबुद्धि है और इसी कारण परिवार उसकी विशेष देखभाल करता है।

रेखा पांडे ने पुलिस को बताया कि जब वह शौचालय में थीं, तभी उन्हें बाहर किसी पुरुष की आवाज सुनाई दी। शक होने पर जब वह बाहर निकलीं तो उन्होंने देखा कि मोहल्ले में रहने वाला 70 वर्षीय विजु बापुराव साडे उनकी भतीजी गंगा का हाथ पकड़कर उसे अपने साथ चलने के लिए कह रहा था। शिकायत के अनुसार आरोपी कथित तौर पर कह रहा था कि जल्दी चलो, कुछ नहीं होगा।

जब गंगा ने आरोपी के साथ जाने से इनकार किया तो रेखा पांडे तुरंत मौके पर पहुंचीं और जोर से चिल्लाते हुए अपनी भतीजी को छुड़ाया। आरोप है कि इस दौरान आरोपी ने शिकायतकर्ता को गालियां दीं और धमकी दी कि अगर पुलिस में रिपोर्ट की तो अंजाम बुरा होगा।

इतना ही नहीं, विरोध करने पर आरोपी ने रेखा पांडे को धक्का दिया, उनका हाथ मरोड़ा और मौके से फरार हो गया। घटना के बाद शिकायतकर्ता ने तुरंत अपनी बड़ी बहन लक्ष्मी पांडे को बुलवाया और पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिवार गंगा को साथ लेकर सीधे हिंगणघाट पुलिस थाना पहुंचा, जहां जुबानी रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

इस घटना के सामने आने के बाद महात्मा फुले वार्ड के लोगों में आक्रोश और भय का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते परिवार की महिला मौके पर न पहुंचती, तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पूरे क्षेत्र की नजर पुलिस कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आरोपी के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई की जाती है।

यह मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक मानसिक रूप से कमजोर महिला को निशाना बनाने का आरोप है। ऐसी घटना ने समाज में महिलाओं और विशेष रूप से दिव्यांग व मानसिक रूप से कमजोर लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गुड़गांव में काम करने वाले बेटे का आरोप: 80 लाख की जमीन मुआवजे में हड़प लिए गए हिस्से, पिता और भाई पर गंभीर आरोप

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हाथरसगेट क्षेत्र के मूंगसा गांव में पुश्तैनी जमीन के मुआवजे को लेकर परिवार में बड़ा विवाद सामने आया है। गुड़गांव, हरियाणा में काम करने वाले प्रमोद शर्मा ने अपने ही पिता और भाई पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के बदले मिले करीब 80 लाख रुपये में उनके हिस्से की रकम हड़प ली गई।

प्रमोद शर्मा, पिता धनपतलाल के बड़े बेटे हैं। परिवार में उनके अलावा तीन छोटे भाई प्रकाश चंद, नवनीत और रमाकांत हैं। जानकारी के अनुसार, गांव मूंगसा स्थित पुश्तैनी जमीन सरकार द्वारा सड़क परियोजना के तहत अधिग्रहित की गई थी, जिसके एवज में धनपतलाल को लाखों रुपये का मुआवजा मिला। आरोप है कि यह पूरी संपत्ति पैतृक होने के बावजूद मुआवजे की राशि का उचित बंटवारा नहीं किया गया।

प्रमोद शर्मा का कहना है कि उनके हिस्से का पैसा छोटे भाई नवनीत ने अपने पास रख लिया। वहीं, पिता धनपतलाल ने भी अन्य तीनों बेटों के साथ अन्याय करते हुए पूरी राशि का पारदर्शी तरीके से वितरण नहीं किया। उनका आरोप है कि जमीन की कीमत लाखों में थी, लेकिन चेक सीधे नवनीत के नाम काट दिए गए, जिससे बाकी भाइयों को उनका हक नहीं मिल पाया।

परिवार की स्थिति भी इस विवाद को और उलझाती है। जहां प्रमोद शर्मा और सबसे छोटे भाई रमाकांत अविवाहित हैं, वहीं प्रकाश चंद का वैवाहिक जीवन चल रहा है और नवनीत अपने परिवार के साथ गांव में रहता है। रमाकांत पेशे से ड्राइवर है और वह भी इस मामले में अपने अधिकार को लेकर असमंजस में है।

प्रमोद शर्मा ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पैतृक संपत्ति में सभी भाइयों को उनका कानूनी अधिकार दिलाया जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे उच्च अधिकारियों और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों के अनुसार, यह मामला अब गांव में चर्चा का विषय बन चुका है और परिवार के भीतर बढ़ता तनाव किसी बड़े विवाद का रूप ले सकता है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रिश्तेदार के साथ फरार हुई विवाहिता पकड़ी गई: 10 दिन बाद पुलिस के हाथ लगे युवक-युवती, अब पति ने साथ रखने से किया इनकार

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सहरसा। बिहार के सहरसा जिले के महुआ थाना क्षेत्र से एक पारिवारिक विवाद का मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है। यहां महुआ थाना क्षेत्र के महुआ गांव गोदराम वार्ड नंबर 4 में एक विवाहिता अपने ही रिश्तेदार युवक के साथ घर छोड़कर चली गई थी। करीब दस दिन बाद दोनों को पकड़ लिया गया, लेकिन अब पति ने पत्नी को अपने साथ रखने से साफ इनकार कर दिया है। मामला फिलहाल कोर्ट में पहुंच गया है और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

मिली जानकारी के अनुसार बड़े भाई गोलू कुमार ने बताया कि उनके छोटे भाई रोहित कुमार की शादी करीब दो वर्ष पहले नैना देवी से हुई थी। शादी के बाद कुछ समय तक दोनों के बीच संबंध सामान्य रहे, लेकिन 10 मार्च 2026 को अचानक नैना देवी घर से लापता हो गई। परिजनों ने काफी तलाश की, जिसके बाद पता चला कि वह पूर्णिया जिले के रहने वाले सुजीत कुमार के साथ चली गई है।

परिवार का आरोप है कि सुजीत कुमार रिश्ते में नैना का चाचा का बेटा लगता है और दोनों का मायका भी पूर्णिया जिले में ही है। बताया जा रहा है कि दोनों करीब दस दिनों तक साथ रहे और इसी दौरान शादी करने की भी चर्चा सामने आई। परिजनों के अनुसार जब नैना घर से गई तो वह अपने साथ करीब पांच हजार रुपये भी लेकर चली गई थी, जो रोहित कुमार ने उसे दिए थे।

परिवार के मुताबिक रोहित कुमार पंजाब में रहकर मजदूरी करते हैं और वहीं से परिवार का खर्च चलाते हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत की और दोनों की तलाश शुरू की गई। बताया जा रहा है कि 2 अप्रैल को पुलिस ने युवक और युवती को पकड़ लिया।

परिजनों का कहना है कि दोनों को पकड़े जाने के बाद दो दिन तक थाने में रखा गया। हालांकि आरोप है कि पुलिस ने लड़की को तो थाने में रखा, लेकिन युवक को हिरासत में नहीं लिया गया। इस बीच नैना देवी के माता-पिता ने भी महुआ थाना में आवेदन दिया था। फिलहाल मामला अदालत में पहुंच चुका है और कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान नैना देवी ने कहा है कि वह अपने पति रोहित कुमार के साथ ही रहना चाहती है। लेकिन दूसरी ओर रोहित कुमार ने साफ शब्दों में कहा है कि जो पत्नी दस दिनों तक किसी अन्य युवक के साथ रही है, उसे वह अब अपने साथ नहीं रखना चाहते। उनका कहना है कि उन्हें किसी भी प्रकार से इस रिश्ते को निभाने के लिए मजबूर न किया जाए।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है और गांव में भी मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। फिलहाल अदालत में चल रही सुनवाई के बाद ही मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं पीड़ित परिवार ने प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई और रोहित कुमार पर किसी भी प्रकार की जोर जबरदस्ती नहीं की जाए वह सिर्फ इतना चाहते हैं कि नैना के साथ नहीं रहना चाहते हैं न्याय की मांग की है।

 

31 साल की रहस्यमयी कहानी, 1995 से सत्य और शक्ति की खोज में जुटे अलवर के जय श्री राम सत्य बाबा, लोगों तक पहुंचा रहे सच का ज्ञान

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बिहार के अरवल जिले के खमैनी पोस्ट क्षेत्र से एक ऐसी रहस्यमयी और चर्चित कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में कौतूहल और चर्चा का माहौल बना दिया है। पिछले 31 वर्षों से चल रही यह कहानी अब लोगों के बीच तेजी से फैल रही है। वर्ष 1995 से शुरू हुई इस आध्यात्मिक यात्रा ने आज 2026 तक एक लंबा सफर तय कर लिया है। स्थानीय लोग इसे आस्था, विश्वास और रहस्य से जुड़ी एक अनोखी गाथा मान रहे हैं।

बताया जाता है कि जय श्री राम सत्य बाबा ने वर्ष 1995 में सत्य और शक्ति की खोज का मार्ग अपनाया था। उसी समय से उन्होंने आध्यात्मिक साधना, ध्यान और ईश्वर भक्ति के माध्यम से अपने जीवन को समाज सेवा और सत्य के प्रचार के लिए समर्पित कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि बाबा को कई घटनाओं का पूर्वाभास पहले ही हो जाता है। कई बार उन्होंने जिन बातों की जानकारी पहले दी, वे बाद में सच साबित हुईं। यही कारण है कि क्षेत्र में लोग उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हैं और उन पर विश्वास भी करते हैं।

गांव और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि सत्य बाबा लंबे समय से समाज में सच, धर्म और आस्था का संदेश दे रहे हैं। उनका कहना है कि आज के समय में झूठ, भ्रम और गलत रास्तों की भरमार है, ऐसे में लोगों को सत्य का ज्ञान देना बहुत जरूरी है। बाबा लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने, सच्चाई अपनाने और समाज में प्रेम व भाईचारे का संदेश देने की बात करते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा को भविष्य में होने वाली कुछ घटनाओं का संकेत पहले ही मिल जाता है। लोग इसे दिव्य शक्ति से जोड़कर देख रहे हैं। कई ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने पहले भी कुछ सामाजिक और व्यक्तिगत घटनाओं को लेकर भविष्यवाणी की थी, जो बाद में सही साबित हुई। इसी वजह से इलाके में उनके अनुयायियों और समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

31 साल की इस लंबी कहानी ने अब एक नए मोड़ पर लोगों का ध्यान खींचा है। वर्ष 1995 से 2026 तक के इस पूरे सफर को लेकर लोग और अधिक जानने के इच्छुक हैं। चर्चा है कि उनकी पूरी कहानी, साधना और उनसे जुड़े कई रहस्यमयी पहलुओं को जल्द ही विस्तार से लोगों के सामने लाया जाएगा। व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के माध्यम से भी यह कहानी तेजी से फैल रही है।

कुछ लोग इसे आस्था और ईश्वर की कृपा मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे केवल विश्वास और मनोबल से जोड़कर देख रहे हैं। लेकिन एक बात साफ है कि जय श्री राम सत्य बाबा की यह कहानी अब क्षेत्र में चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है। लोग उनकी 31 साल की तपस्या, साधना और सत्य की खोज को लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बाबा का उद्देश्य किसी को भयभीत करना नहीं, बल्कि सच का ज्ञान देकर सही राह दिखाना है। उनका संदेश है कि मनुष्य को हमेशा सत्य, धर्म और मानवता के रास्ते पर चलना चाहिए। यही वजह है कि लोग उन्हें एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में देखने लगे हैं।

31 साल की यह रहस्यमयी कहानी आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे कर सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि 1995 से शुरू हुई यह आध्यात्मिक यात्रा आगे क्या नया मोड़ लेती है और इससे जुड़े कौन-कौन से रहस्य सामने आते हैं।

पहली पत्नी से तलाक छिपाकर मंदिर में रचाई शादी, 14 साल बाद महिला का आरोप: ‘बच्चा पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया’, अब मिल रहीं जान से मारने की धमकियां

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दिल्ली। राजधानी दिल्ली के विजय विहार थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला पारिवारिक विवाद सामने आया है, जहां एक महिला ने एक व्यक्ति पर धोखे से शादी करने, वर्षों तक शोषण करने और अब धमकियां देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता का दावा है कि आरोपी ने अपनी पहली पत्नी से तलाक होने की झूठी बात कहकर उसे अपने जाल में फंसाया, मंदिर में शादी की और कई साल तक साथ रखने के बाद अब उसे और उसके बच्चे को छोड़ने की कोशिश कर रहा है।

पीड़िता हेमा ने बताया कि उनके पहले पति की वर्ष 2001 में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी दूसरी शादी हुई, लेकिन वह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं चल पाया और उन्हें वहां भी धोखे और मारपीट का सामना करना पड़ा। उस दौरान वह इंदिरा पार्क इलाके में किराये के मकान में रहती थीं। उसी समय पड़ोस में रहने वाले प्रशांत भारतीयापता जॉनसन’एस मैरि स्कूल हनुमान मंदिर शास्त्री पार्क गली नंबर 3 बुरारी और उसकी मां से उनकी पहचान हुई। हेमा के मुताबिक उस समय प्रशांत की शादी नहीं हुई थी और वह अक्सर उन्हें घरेलू हिंसा से बचाने के लिए आगे आता था।

हेमा का कहना है कि कुछ समय बाद प्रशांत की शादी हो गई, लेकिन करीब दो साल तक उनका उससे कोई संपर्क नहीं रहा। बाद में प्रशांत ने खुद उनसे संपर्क किया और बताया कि वह अपनी पत्नी को तलाक देने जा रहा है क्योंकि उसकी पत्नी से उसे बच्चे नहीं हो रहे हैं। पीड़िता के अनुसार इसी दौरान प्रशांत ने उन्हें अपने विश्वास में लिया और शादी का प्रस्ताव रखा। हेमा का आरोप है कि प्रशांत ने उनसे कहा कि वह जल्द ही अपनी पत्नी से अलग होकर उनके साथ नया जीवन शुरू करना चाहता है।

महिला का दावा है कि इसके बाद दोनों ने बवाना के एक मंदिर में गुपचुप तरीके से शादी कर ली और साथ रहने लगे। प्रशांत बवाना में मशीन और बैनर के काम से जुड़ा हुआ था और उसकी वहां एक दुकान भी थी। हेमा का कहना है कि वह खुद पार्लर का काम करती थीं और अच्छी कमाई करती थीं। दोनों कुछ समय तक बवाना और बाद में बुध विहार इलाके में साथ रहने लगे।

पीड़िता के मुताबिक शादी के बाद उनकी जिंदगी में कई मुश्किलें आईं। एक बार गर्भधारण के दौरान बच्चे की धड़कन बंद हो गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने गर्भपात कराना पड़ा। इसके बाद काफी इलाज और कठिनाइयों के बाद उन्होंने पांचवा बच्चे को जन्म दिया। उनका कहना है कि संजय गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान उनके बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम वरदान रखा गया।

हेमा का आरोप है कि बच्चे के जन्म के बाद ही प्रशांत पहली पत्नी मीनू उर्फ सुरभि और उसके परिवार का व्यवहार बदल गया। उन्होंने दावा किया कि प्रशांत की मां कृष्णा और अन्य परिजनों ने उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। महिला का कहना है कि धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि प्रशांत ने अपनी पहली पत्नी मेनू उर्फ सुरभि से तलाक नहीं लिया था और वह अब भी उससे संपर्क में था। इसी दौरान आईवीएफ द्वारा मीनू उर्फ सुरभि की एक बेटी है जिसका नाम याशी उम्र 6 वर्ष है पीड़िता का यह भी आरोप है कि प्रशांत के अपनी भाभी से भी अनुचित संबंध थे और अन्य लड़कियों के साथ भी और उसकी पहली पत्नी मीनू उर्फ सुरभि भी इस पूरे मामले से जुड़ी हुई थी। इतना ही नहीं पीढ़ी महिला को प्रशांत के दोस्त जो की गंदी नजर रखते थे जिनका नाम विकास शर्मा आकाश जो कि प्रशांत का साला है रोहित भाई विशाल और भी अन्य लोग जोर के शारीरिक तौर से पीड़ित महिला को परेशान करते थे और उन पर गंदी नजर रखते थे

पीड़िता का आरोप है कि जब उन्होंने इस धोखे का विरोध किया तो प्रशांत ने कथित तौर पर कहा कि उसने सिर्फ बच्चा पैदा करने के लिए उससे संबंध बनाए थे और अब उसे यहां से चले जाना चाहिए। महिला के मुताबिक प्रशांत ने कई बार उन्हें धमकी दी और कहा कि अगर वह ज्यादा विरोध करेंगी तो उन्हें और उनके बच्चे को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

हेमा का कहना है कि मामले को लेकर उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दी थी और कानूनी लड़ाई शुरू हुई। यह मामला उच्च अदालतों तक भी पहुंचा और करीब छह साल तक कोर्ट में सुनवाई चलती रही। इस दौरान दोनों परिवारों के बीच कई बार समझौते और बैठकों की कोशिशें भी हुईं, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि उन्हें न्याय नहीं मिल पाया।

पीड़िता का कहना है कि अब भी आरोपी और उसके परिचित लोग उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं। उनका आरोप है कि आरोपी के कुछ दोस्त भी उन्हें अपमानित करते थे और कई बार अभद्र टिप्पणियां करते थे। पीड़िता का कहना है कि इस पूरे मामले ने उनकी जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है और वह लंबे समय से न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं।

हेमा ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, शोषण और धमकी देने के आरोपों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने अपने और अपने बेटे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। और बच्चे के भविष्य और पीड़ित पत्नी हेमा के लिए आर्थिक सहायता मिले

‘मैं मर ’ जाऊंगा… मां को आखिरी कॉल के बाद युवक ने दी जान, गैस एजेंसी मालिक पर गंभीर आरोप

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गुजरात के दमन कच्ची ग्राम पुलिस चौकी के वापी में एक 19 वर्षीय युवक की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान अंकित कुमार सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के इंदौर का निवासी था और दमन क्षेत्र में एक गैस एजेंसी पर काम करता था।

पुलिस और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, युवक की मौत का कारण “एस्फिक्सिया” यानी दम घुटना बताया गया है, जो कि फांसी लगाने की स्थिति में होता है। शव के गले पर लिगेचर मार्क (रस्सी का निशान) पाया गया, जिससे यह मामला आत्महत्या की ओर इशारा करता है। मेडिकल रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मौत पोस्टमार्टम से लगभग 24 घंटे पहले हुई थी।

घटना 15 नवंबर 2025 की रात की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, अंकित ने उसी दिन अपनी नौकरी छोड़ दी थी और घर जाने की बात कह रहा था। रात में वह अपने रिश्तेदार के गोदाम में बने एक कमरे में रुका हुआ था। इसी दौरान उसने फोन पर अपनी मां से बात करते हुए आत्महत्या करने की बात कही थी।

परिजनों को जब इस बात की जानकारी मिली तो तुरंत गोदाम पहुंचा गया, जहां अंकित रस्सी के सहारे फांसी के फंदे पर लटका मिला। उसे तुरंत नीचे उतारकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

हालांकि, इस मामले ने नया मोड़ तब ले लिया जब मृतक के पिता ने गैस एजेंसी मालिक पर गंभीर आरोप लगाए। पिता का कहना है कि उनके बेटे को पैसे के लेन-देन को लेकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया था, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गया और यह कदम उठाने को मजबूर हुआ।

पिता ने प्रशासन से मांग की है कि गैस एजेंसी मालिक के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (एबेटमेंट टू सुसाइड) का मामला दर्ज किया जाए और सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते न्याय नहीं मिला, तो ऐसे मामलों में और भी युवा शिकार हो सकते हैं।

वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के आरोपों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

न्याय की आस में दर-दर भटक रहा एक पिता आज भी अपने बेटे के लिए इंसाफ की गुहार लगा रहा है।