Monday, July 6, 2026
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पटना में टेंट व्यवसायी कर्ज के जाल में फंसा, 30–40 लाख के लेन-देन के बीच धमकियों से दहशत; सरकारी मदद की गुहार

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पटना (बिहार)।
राजधानी पटना थाना मनेर गांव सुखचक से एक बेहद चिंताजनक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां टेंट–पंडाल व्यवसाय से जुड़े एक व्यक्ति पर कर्ज, धमकी और सामाजिक दबाव का ऐसा बोझ पड़ गया है कि उसका पूरा परिवार संकट में आ गया है। शिकायतकर्ता बबलू कुमार पंडित, निवासी राजधानी पटना थाना मनेर गांव सुखचक पिछले करीब 10 वर्षों से टेंट–पंडाल का काम कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि मेहनत और भरोसे के बल पर उन्होंने अपना कारोबार खड़ा किया, लेकिन आज वही भरोसा उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है।

बबलू कुमार का कहना है कि दोस्ती-यारी और कामकाज के सिलसिले में उन्होंने अलग-अलग लोगों के पास करीब 30 से 40 लाख रुपये का लेन-देन कर रखा है। कई लोग उनके पैसे लौटाने को तैयार नहीं हैं। आरोप है कि जब वह अपना बकाया मांगने जाते हैं तो कुछ लोग रास्ते में गाड़ी रुकवा लेते हैं, पैसे मांगने पर उल्टा धमकाते हैं और जान से मारने की धमकी तक दे देते हैं। पीड़ित का कहना है कि डर और दबाव के कारण वह कई बार चुप रह जाने को मजबूर हो जाते हैं।

पीड़ित ने बताया कि टेंट–पंडाल के काम में उन्होंने छोटे-छोटे अमाउंट भी उधार पर दिए थे—कहीं 22 हजार, कहीं 25 हजार, कहीं 20 हजार, 18 हजार या 16 हजार रुपये। लेकिन बड़ी संख्या में लोग पैसे नहीं लौटा रहे हैं। कुछ मामलों में जातिगत विवाद भी सामने आया है, जहां केवल जाति के आधार पर पैसे देने से इनकार कर दिया गया। इन सब कारणों से वह धीरे-धीरे कर्ज के दलदल में फंसते चले गए।

बबलू कुमार पंडित ने कहा कि लगातार आर्थिक दबाव और धमकियों के चलते उनका मानसिक संतुलन भी बिगड़ने लगा है। उनके परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं, जिनकी पढ़ाई, पालन-पोषण और भविष्य को लेकर वह हर दिन चिंता में रहते हैं। उन्होंने बताया कि कर्ज बढ़ने की वजह से अब उनका टेंट–पंडाल का काम भी लगभग ठप हो गया है और नए काम लेने की स्थिति में नहीं हैं।

पीड़ित ने प्रशासन और सरकार से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनकी आवाज योगी और मोदी सरकार तक पहुंचे। वह चाहते हैं कि सरकार या प्रशासन की ओर से उन्हें किसी तरह का लोन, सब्सिडी या आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वह पुराने कर्ज को चुका सकें और दोबारा अपना काम शुरू कर सकें। उनका कहना है कि अगर समय रहते मदद नहीं मिली, तो उनका परिवार पूरी तरह बर्बाद हो सकता है।

यह मामला न सिर्फ एक छोटे व्यवसायी की आर्थिक बदहाली की कहानी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोग लेन-देन, सामाजिक दबाव और धमकियों के बीच पिस जाते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पीड़ा को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या एक कर्ज में डूबे परिवार को राहत मिल पाती है या नहीं।

 

प्रेम जाल में फंसाकर शादी, फिर 6 लाख और ढाई तोला सोना लेकर फरार: ट्रक ड्राइवर पर महिला ने लगाया धोखा देने का आरोप

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पानीपत। हरियाणा के पानीपत जिले में एक महिला के साथ कथित धोखाधड़ी और भरोसा तोड़ने का मामला सामने आया है। पीड़ित महिला नसीमा, जो सोंधापुर क्षेत्र की रहने वाली हैं, ने आरोप लगाया है कि एक व्यक्ति ने उसे प्रेम जाल में फंसाकर शादी की, फिर उससे लाखों रुपये और सोना लेकर फरार हो गया। अब महिला अपने दो बच्चों के साथ बेहद परेशान हालत में जीवन गुजारने को मजबूर है।

पीड़िता नसीमा का कहना है कि वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली है और उसकी पहली शादी वहीं हुई थी। पहली शादी से उसके छह बच्चे हुए थे, जिनमें से एक बेटे की मौत हो चुकी है। बाकी बच्चों में से कई की शादी हो चुकी है, जबकि दो बेटियां अभी अविवाहित हैं। नसीम के मुताबिक उसका पहला पति मानसिक रूप से अस्वस्थ था, जिसके कारण उसकी जिंदगी काफी मुश्किलों में गुजर रही थी।

इसी दौरान उसकी मुलाकात पानीपत के सोंधापुर इलाके में रहने वाले अकबर अंसारी से हुई। आरोप है कि अकबर अंसारी ने उसे भरोसा दिलाया कि वह उसके बच्चों का सहारा बनेगा और जिंदगी भर उसका साथ देगा। नसीम का कहना है कि इन बातों पर विश्वास कर उसने करीब एक साल पहले अकबर अंसारी से शादी कर ली और उसके साथ रहने लगी।

पीड़िता के मुताबिक शादी के कुछ समय बाद अकबर अंसारी ने उसे अपने घर से पैसे और जेवर लाने के लिए दबाव बनाया। आरोप है कि उसने नसीमा से करीब 6 लाख रुपये और ढाई तोला सोना ले लिया। इसके बाद वह अचानक गायब हो गया। महिला का कहना है कि अकबर अंसारी ट्रक ड्राइवर है और अलग-अलग जगहों पर रहता है और सही पता भी नहीं बताता।

नसीमा ने यह भी आरोप लगाया कि अकबर अंसारी के भाई, जिसका नाम रोहू बताया जा रहा है और जो सोनीपत में रहता है, उसने भी उससे करीब 30 हजार रुपये ले लिए, जो अब तक वापस नहीं किए गए। पीड़िता का कहना है कि आरोपी उसे पानीपत के कृष्णा गार्डन इलाके में छोड़कर चला गया और तब से उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं उठा रहा।

महिला के अनुसार अकबर अंसारी पहले से भी शादीशुदा था और उसकी पहली पत्नी गूंगी बताई जा रही है। नसीम का आरोप है कि यह बात भी उससे छिपाई गई और उसे झूठे वादों के जरिए अपने प्रेम जाल में फंसाया गया। अब करीब छह से सात महीने से आरोपी उससे दूर रह रहा है। वह न तो उसे अपने साथ रखता है और न ही बच्चों के खर्च, किराए या पढ़ाई के लिए कोई पैसा देता है।

पीड़िता नसीम ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आरोपी अकबर अंसारी और उसकी पहली पत्नी दोनों उसे घर में रहने नहीं देना चाहते। उनका कहना है कि वे नसीम को अपने साथ नहीं रखेंगे और न ही उसका खर्च उठाएंगे। नसीम का आरोप है कि आरोपी अकबर अंसारी समय-समय पर उससे फोन करके पैसे मांगता रहता है। कभी 3 हजार, कभी 5 हजार और कभी 10 हजार रुपये भेजने के लिए कहता है और कहता है कि जब लेने आएगा तो साथ ले जाएगा, लेकिन वह न तो उसे लेने आता है और न ही अपने साथ रखता है।

नसीम का कहना है कि वह अपने पहले घर से जेवर और पैसे लेकर आई थी और अब वहां भी वापस नहीं जा सकती। ऐसे में वह पूरी तरह असहाय हो गई है और अपने दो बच्चों की जिम्मेदारी अकेले उठा रही है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी अकबर अंसारी को ढूंढकर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उसे न्याय दिलाया जाए।

पटना से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है

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जहां एक नवविवाहिता ने अपने ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग, मारपीट और गाली गलौज करने का आरोप लगाया है। पीड़िता रूपा कुमारी, उम्र 21 वर्ष, ने माळसलामी थाना में लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है। शिकायत के अनुसार उसकी शादी 8 मार्च 2024 को हिंदू रीति रिवाज के साथ अमरजीत कुमार से हुई थी। शादी के शुरुआती कुछ दिनों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन इसके बाद ससुराल वालों का व्यवहार अचानक बदल गया।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसके पति, सास, ससुर और परिवार के अन्य सदस्य लगातार उस पर दहेज लाने का दबाव बना रहे थे। शिकायत में कहा गया है कि उससे बार बार अपने पिता के घर से तीन लाख रुपये लाने को कहा जाता था। जब वह इस मांग को पूरा करने में असमर्थता जताती थी, तब उसके साथ मारपीट की जाती थी और उसे अपशब्द कहे जाते थे। रूपा कुमारी का कहना है कि आए दिन उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा।

मामले को और गंभीर बनाते हुए पीड़िता ने आरोप लगाया है उनके पति शराब भी पीते हैं और जुआ भी खेलते हैं और जुआ से खेलने के लिए पैसे चुराते हैं और इल्जाम रूप पर लगाते हैं कि उसके सोने और चांदी के गहने भी उससे छीन लिए गए। शिकायत के मुताबिक उसके मंगलसूत्र, कान की बाली, नथिया, सोने का बजरंगबली लॉकेट और चांदी की पायल उसकी सास ने अपने पास रख ली। जब उसने अपने गहने वापस मांगे, तो कथित तौर पर उससे कहा गया कि पहले अपने पिता से एक लाख रुपये लेकर आओ, तभी सामान वापस मिलेगा।

रूपा कुमारी ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने इन बातों का विरोध किया और परिवार को समझाने की कोशिश की, तो सभी लोग मिलकर उसके साथ मारपीट करने लगे और लगातार दहेज को लेकर ताने देते रहे। पीड़िता का कहना है कि उसे कई बार घर से बाहर निकालने की भी कोशिश की गई।

इस शिकायत के आधार पर माळसलामी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना के जांच अधिकारी ने बताया कि पीड़िता के आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और सभी पक्षों से पूछताछ की जाएगी।

इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय लोगों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दहेज प्रताड़ना जैसे मामलों में लगातार बढ़ती शिकायतें समाज के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी।

बेटी को स्कूल में प्रवेश से किया इनकार: पिता ने राष्ट्रपति तक लगाई गुहार, कहा— “किसी से भी शिकायत कर लो, एडमिशन नहीं देंगे”

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दिल्ली के शाहदरा इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक पिता अपनी बेटी को उसी संस्थान की सीनियर सेकेंडरी शाखा में दाखिला दिलाने के लिए महीनों से दर-दर भटक रहा है, लेकिन स्कूल प्रशासन द्वारा उसे प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया गया है। आरोप है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद न तो कोई स्पष्ट कारण बताया जा रहा है और न ही समस्या का समाधान किया जा रहा है।

पीड़ित अमित कुमार, जो शाहदरा के तेलीवाड़ा इलाके के निवासी हैं, का कहना है कि उनकी बेटी भूमि पहले कृष्णा नगर स्थित हंस राज स्मारक स्कूल में कक्षा 8 तक पढ़ाई कर चुकी है। अब परिवार चाहता था कि वह उसी संस्थान की दिलशाद गार्डन स्थित सीनियर सेकेंडरी शाखा में आगे की पढ़ाई जारी रखे। लेकिन विद्यालय प्रशासन ने अचानक उसे प्रवेश देने से मना कर दिया। पिता का आरोप है कि कई बार स्कूल के अधिकारियों से मिलने के बाद भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

अमित कुमार का कहना है कि जब उन्होंने विद्यालय प्रशासन से कारण जानने की कोशिश की तो कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक लहजे में कहा कि “आप किसी से भी शिकायत कर लें, हम एडमिशन नहीं देंगे।” इस कथन से परेशान पिता का कहना है कि यह न केवल उनके परिवार के लिए अपमानजनक है बल्कि उनकी बेटी के शिक्षा के अधिकार का भी सीधा उल्लंघन है। उनका कहना है कि बेटी पढ़ाई में मेहनती और अनुशासित छात्रा है, लेकिन कुछ पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उसके अंक अपेक्षा से कम, लगभग 50 प्रतिशत आए थे।

मामले को सुलझाने के लिए पीड़ित परिवार ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क किया। कृष्णा नगर क्षेत्र के विधायक अनिल गोयल ने पीड़ित के पक्ष में एक लिखित अनुशंसा पत्र भी दिया, जिसमें मानवीय आधार पर बच्ची को प्रवेश देने का आग्रह किया गया था। हालांकि पिता का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने इस सिफारिश को भी स्वीकार करने से मना कर दिया और कोई कार्रवाई नहीं की।

न्याय की उम्मीद में अमित कुमार ने इस मामले की शिकायत केंद्र सरकार के ऑनलाइन पोर्टल CPGRAMS और दिल्ली शिक्षा निदेशालय में भी दर्ज कराई है। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति भवन को भी लिखित शिकायत भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। पिता का कहना है कि बेटी का पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है और समय निकलता जा रहा है, लेकिन अब तक कहीं से भी समाधान नहीं मिल पाया है।

पीड़ित का कहना है कि यह केवल उनके परिवार का मामला नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के अधिकार और स्कूलों की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कर विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए जाएं ताकि उनकी बेटी को जल्द से जल्द प्रवेश मिल सके और उसकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

वहीं इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। अभिभावकों का कहना है कि यदि कोई छात्र पहले उसी संस्थान में पढ़ चुका है और आगे पढ़ाई जारी रखना चाहता है, तो उसे उचित कारण बताए बिना प्रवेश से वंचित करना शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित छात्रा को न्याय कब तक मिल पाता है।

मधुबनी में महिला का सनसनीखेज आरोप: जमीन विवाद में 80 लोगों का गैंग बना कर महीनों तक शोषण, कई जगह शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

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बिहार के मधुबनी जिले से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक महिला ने आरोप लगाया है कि पुराने जमीन विवाद को लेकर करीब 80 लोगों के एक कथित गिरोह ने उसे लगातार प्रताड़ित किया और कई महीनों तक अलग-अलग जगहों पर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का कहना है कि उसने कई बार पुलिस और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब महिला ने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।

पीड़िता सबीला खातुन, उम्र लगभग 35 वर्ष, ने बताया कि उनकी शादी 19 मई 2011 को मोहम्मद बदरूल के साथ मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार हुई थी। शादी के समय उनके माता-पिता आर्थिक रूप से कमजोर थे। पीड़िता का आरोप है कि शादी के बाद उनके मामा और रिश्तेदारों ने उनसे और उनके पति से पैसे मांगे और जमीन खरीद कर घर बनवाने का वादा किया। पीड़िता के अनुसार उनके पति ने करीब आठ लाख चालीस हजार रुपये उन्हें दिए, लेकिन जमीन नहीं खरीदी गई और पैसे भी वापस नहीं किए गए। इसी को लेकर वर्षों से विवाद चलता रहा।

महिला का आरोप है कि वर्ष 2024 में इस विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 जनवरी 2024 को कुछ लोग उनके घर आए और बातचीत के बहाने उन्हें अंदर बंद कर दिया। इसके बाद उनके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए और पूरी घटना का वीडियो भी बना लिया गया। पीड़िता का कहना है कि इसी वीडियो को आधार बनाकर कई लोगों ने उन्हें लगातार ब्लैकमेल किया और धमकी दी कि अगर वह उनकी बात नहीं मानेगी तो उनके पति की हत्या कर दी जाएगी।

महिला का आरोप है कि इसके बाद लगभग 2 सालों तक अलग-अलग जगहों पर उसे ले जाकर उसके साथ गलत काम किया गया। पीड़िता का कहना है कि शहर में करीब छह स्थानों पर ऐसे अड्डे बनाए गए थे, जहां उसे ले जाया जाता था। इतना ही नहीं, झंझारपुर में भी तीन जगहों पर उसे परेशान किया गया। पीड़िता का दावा है कि इस पूरे मामले में कई पुरुषों के साथ-साथ कुछ महिलाओं की भी भूमिका रही, जो उसे धमकाकर अलग-अलग जगहों पर ले जाती थीं।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि पूरे मामले के पीछे जमीन विवाद भी एक बड़ा कारण है। उनके ससुर मोहम्मद अलाउद्दीन के नाम पर लहेरियागंज इलाके में करीब एक बीघा जमीन है, जिसकी बाजार में काफी कीमत है। महिला का आरोप है कि उसी जमीन को कब्जाने के लिए कुछ लोगों ने एक गिरोह बनाकर उनके परिवार को निशाना बनाया और उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।

महिला का कहना है कि इस मामले में कई नाम सामने आए हैं, जिनमें कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग और वार्ड पार्षद , आलम सरदार, एयनुल, मोहम्मद लाल , साहब, जाकिर, जाहिर, सोनू, मुर्तुजा डॉक्टर, नन्हे, रुस्तम, फूल ऊर्जा, आहिद झा, संजय झा संतोष निखिल सन्नी, गुलाब, रुखसाना खातून, सुल्तान खातून, अफसाना खातून, और अन्य करीब 80 शामिल बताए जा रहे हैं। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी लगातार धमकी देते हैं कि यदि वह उनके कहे अनुसार काम नहीं करेगी तो उसके पति को जान से मार दिया जाएगा। इस डर के कारण वह लंबे समय तक चुप रही, लेकिन अब मामला असहनीय हो गया है।

पीड़िता ने बताया कि उसने इस मामले को लेकर मधुबनी, पंडौल, झंझारपुर और अन्य 10 से 15 जगह पर आवेदन दिए, लेकिन कहीं भी कोई सुनवाई नहीं हुई। महिला का आरोप है कि आरोपी प्रभावशाली होने के कारण मामला दबाया जा रहा है। और लगातार पति को मारने की धमकी दी जा रही है अब पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

पीड़िता और उसका परिवार अब प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि समय रहते उन्हें न्याय मिलेगा और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी और महिला को इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।

 

बैसाखी राम कैंसर से जूझ रहे, घर पहुंचा तो गैस सिलेंडर निकला खाली, समय पर नया सिलेंडर न मिलने से बढ़ी परेशानी

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पठानकोट जिले के बसरूप गांव से एक बेहद संवेदनशील और चिंता बढ़ाने वाला मामला सामने आया है। गांव बसरूप, पोस्ट ऑफिस फिरोजपुर कलां, जिला पठानकोट, पंजाब निवासी बैसाखी राम इन दिनों कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। बीमारी के कारण पहले ही उनका स्वास्थ्य काफी कमजोर है और उन्हें बार बार आने जाने में अत्यधिक परेशानी होती है। ऐसे में जब वह अपने घर पहुंचे तो उन्हें पता चला कि घर में रखा गैस सिलेंडर पूरी तरह खाली हो चुका है।

परिवार के अनुसार खाना बनाने के लिए गैस उपलब्ध न होने से घर में तुरंत संकट की स्थिति पैदा हो गई। बैसाखी राम ने तत्काल इंडेन गैस एजेंसी से संपर्क किया और कई बार फोन कर अपनी समस्या बताई। उनके मोबाइल पर लगातार संदेश प्राप्त हुए जिनमें कहा गया कि यदि वह पात्र ग्राहक हैं तो चार घंटे के भीतर बुकिंग रेफरेंस नंबर मिल जाएगा तथा अनुरोध चौबीस घंटे के भीतर प्रक्रिया में ले लिया जाएगा।

इसके बावजूद जब बैसाखी राम निर्धारित तारीख और नंबर के अनुसार सिलेंडर लेने पहुंचे तो एजेंसी की ओर से कथित रूप से उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि अभी सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। इस जवाब से वह बेहद परेशान हो गए क्योंकि उनकी शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह बार बार एजेंसी के चक्कर लगा सकें।

बताया जा रहा है कि गैस सिलेंडर न मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में बाहर से खाना पीना करना पड़ रहा है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में बाहर का भोजन उनके स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। परिवार वालों का कहना है कि इस लापरवाही से मरीज की तकलीफ और बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को आवश्यक घरेलू सुविधाएं समय पर मिलनी चाहिए। गैस सिलेंडर जैसी मूलभूत जरूरत में देरी होना प्रशासन और संबंधित एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

बैसाखी राम ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि उन्हें समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए ताकि उन्हें बार बार परेशान न होना पड़े। उनका कहना है कि बीमारी के चलते वह इतना संघर्ष नहीं कर पा रहे हैं और प्रशासन को मानवता के आधार पर उनकी मदद करनी चाहिए।

अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग और गैस एजेंसी इस मामले में कितनी जल्दी संज्ञान लेकर राहत पहुंचाती है।

पटना में जमीन विवाद ने लिया हिंसक रूप: गोतनी और परिजनों पर महिला को बेरहमी से पीटने का आरोप, 112 पर कॉल के बाद भी सहमी पीड़िता

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पटना। राजधानी पटना से पारिवारिक जमीन विवाद से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपनी गोतनी और ससुराल पक्ष के लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि उसे पिछले कई वर्षों से जमीन के हिस्से को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा है और हाल ही में उसके साथ बेरहमी से मारपीट भी की गई। पीड़िता अब प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगा रही है।

जानकारी के अनुसार कविता देवी, पति टिंकू, पटना जिले के मोहम्मदपुर पोस्ट के वार्ड नंबर 9 की रहने वाली हैं। उनका आरोप है कि ससुराल की पैतृक जमीन को लेकर लंबे समय से परिवार में विवाद चल रहा है। कविता देवी का कहना है कि उनके ससुर अयोध्या साहनी और सास भागीरथी देवी भी इस मामले में उनके खिलाफ खड़े हैं और बार-बार घर छोड़कर चले जाने का दबाव बनाते हैं। पीड़िता के अनुसार उन्हें साफ तौर पर कहा जाता है कि उन्हें इस जमीन में कोई हिस्सा नहीं दिया जाएगा।

पीड़िता का आरोप है कि उनकी गोतनी जूली देवी, पति पिंटू साहनी, और उसकी बहन डोली देवी अपने पति गुड्डू साहनी के साथ मिलकर उन्हें लगातार परेशान करते हैं। कविता देवी का कहना है कि दोनों बहनों ने प्रेम विवाह किया था और अक्सर यह कहते हैं कि उन्होंने इस परिवार में शादी ही जमीन हड़पने और उन्हें बर्बाद करने के लिए की है। इसी कारण पिछले 10 से 15 वर्षों से घर में जमीन को लेकर तनाव बना हुआ है।

कविता देवी के मुताबिक करीब चार दिन पहले विवाद अचानक हिंसक हो गया। उनका आरोप है कि उनकी गोतनी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। इस दौरान उन्हें बाल पकड़कर घसीटा गया और बुरी तरह पीटा गया, जिससे उनके सिर और सीने पर गंभीर चोटें आईं। पीड़िता का कहना है कि मारपीट इतनी जोरदार थी कि उनका सिर भी फट गया।

बताया जा रहा है कि जब पुतुल देवी नाम की महिला बीच-बचाव करने पहुंचीं, तब किसी तरह स्थिति संभाली जा सकी और पीड़िता को बचाया गया। इसके बाद कविता देवी ने डर के माहौल में 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस से मदद मांगी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पीड़िता को बाहर आने के लिए आश्वस्त किया कि कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

हालांकि पीड़िता का कहना है कि वह डर के कारण काफी देर तक घर से बाहर नहीं निकल सकीं। जब पुलिस के आश्वासन के बाद वह बाहर आईं तो भी उन्हें लगातार धमकियां दी जाती रहीं। कविता देवी का आरोप है कि अगर उन्होंने कहीं भी शिकायत या मुकदमा दर्ज कराया तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है।

तीन बच्चों की मां कविता देवी का कहना है कि वह लंबे समय से मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न झेल रही हैं। लगातार मिल रही धमकियों के कारण वह बेहद डरी और सहमी हुई हैं। रो-रोकर उनका बुरा हाल है और अब वह चाहती हैं कि प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप कर उन्हें सुरक्षा प्रदान करे और जमीन में उनका वैधानिक हिस्सा दिलाने में मदद करे।

पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और भविष्य में उनके साथ किसी प्रकार की अनहोनी न हो।

लोहरदगा में जमीन विवाद ने लिया खतरनाक रूप: महिला ने उपायुक्त से लगाई गुहार, जान से मारने की धमकी का आरोप

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लोहरदगा (झारखंड)। जिले के कुडू थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम माराडीह की रहने वाली हिरावंती देवी ने अपने ही परिवार और गांव के कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उपायुक्त से न्याय की गुहार लगाई है। मामला पुश्तैनी जमीन के बंटवारे से जुड़ा है, जो अब धीरे-धीरे हिंसक विवाद का रूप लेता जा रहा है। महिला का आरोप है कि जमीन नापी की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक मापी नहीं कराई गई, जिससे विवाद और गहरा गया है।

पीड़िता के अनुसार, उन्होंने 2 अगस्त 2024 को जमीन नापी के लिए विधिवत रसीद कटवाई थी, लेकिन अब तक प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस बीच उनके तीन भाइयों—अविदेश भारती, ओम प्रकाश भारती और स्वर्गीय मुकेश भारती के बीच खाता संख्या 1, प्लॉट संख्या 22 की जमीन का बराबर बंटवारा होना है, लेकिन गोतिया और अन्य लोग इसमें बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।

हिरावंती देवी का आरोप है कि जब भी वे अपने हिस्से की मांग करती हैं, तो उन्हें गाली-गलौज, मारपीट और यहां तक कि जान से मारने की धमकी दी जाती है। उन्होंने ओम प्रकाश भारती, ज्योतिष भारती और जसवंत भारती पर विशेष रूप से आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग दबंग प्रवृत्ति के हैं और गांव के अन्य लोगों को भी अपने पक्ष में कर लिया है।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने धोखाधड़ी कर उनके पति से जमीन से संबंधित कागजात पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए और अब पूरी जमीन पर कब्जा करने की साजिश रच रहे हैं। इतना ही नहीं, नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने और जमीन हड़पने की योजना भी बताई गई है।

पीड़िता ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, कुडू थाना, अंचल कार्यालय और अनुमंडल न्यायालय तक शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे उनके और उनके परिवार के जान-माल पर खतरा मंडरा रहा है।

हिरावंती देवी ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द जमीन का निष्पक्ष बंटवारा कराया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि किसी बड़ी अनहोनी से पहले न्याय मिल सके।

झूठा विवाह कर 20 लाख और जेवर हड़पने का आरोप: पति दूसरी महिला संग रह रहा, विरोध करने पर मां-बेटे को पीटा; पीड़िता ने लगाई न्याय की गुहार

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सूरत से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने पति पर झूठा विवाह कर लाखों रुपए और कीमती जेवर हड़पने के बाद दूसरी महिला के साथ फरार होने का गंभीर आरोप लगाया है। इतना ही नहीं, पीड़िता का कहना है कि जब उसने इसका विरोध किया तो आरोपी और उसके परिजनों ने उसके बेटे के साथ मारपीट की और बाद में उसे भी सड़क पर पटक-पटक कर पीटा। पीड़िता ने सूरत पुलिस आयुक्त को शिकायत देकर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है, लेकिन उसका आरोप है कि अब तक कहीं भी उसकी सुनवाई नहीं हो रही है।

जानकारी के अनुसार सूरत जिले के पलसाना क्षेत्र के कानव गांव निवासी 36 वर्षीय पुष्पा राजुभाई तावड़े घरेलू कामकाज कर जीवन यापन करती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पहली शादी बहुत कम उम्र में हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद ही उनके पहले पति का निधन हो गया। इसके बाद वह विधवा जीवन में बेहद कठिन परिस्थितियों में घरों में काम करके अपना गुजारा कर रही थीं। वर्ष 2017 में उनकी मुलाकात उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के रहने वाले ब्रजभान सिंह से हुई।

पीड़िता के मुताबिक आरोपी ब्रजभान सिंह ने खुद को अविवाहित बताकर उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा और भरोसा दिलाया कि वह जीवनभर उनका साथ देगा। आर्थिक और सामाजिक मजबूरी का फायदा उठाकर उसने पुष्पा का विश्वास जीत लिया। इसके बाद 17 मई 2017 को अंबाजी में दोनों ने धार्मिक रीति-रिवाज से विवाह किया और पति-पत्नी की तरह साथ रहने लगे। इस संबंध से उनका एक बेटा भी हुआ, जिसका नाम सुंदरम सिंह है।

महिला का आरोप है कि विवाह के बाद आरोपी ने धीरे-धीरे भरोसा जीतकर अलग-अलग बहाने से उससे बड़ी रकम लेनी शुरू कर दी। उसने कभी व्यापार करने तो कभी घर खरीदने का सपना दिखाया। पीड़िता के अनुसार उसने अपनी लगभग दस वर्षों की मेहनत से जमा की गई करीब 20 लाख रुपए नकद और लगभग 5 लाख रुपए मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण आरोपी को दे दिए।

पीड़िता का कहना है कि 14 फरवरी 2026 को आरोपी अचानक बिना बताए घर से गायब हो गया। बाद में उसे पता चला कि वह मंजू नाम की एक महिला के साथ रह रहा है। इतना ही नहीं, आरोपी अब खुले तौर पर कह रहा है कि वह पुष्पा को अपने साथ नहीं रखेगा। इस घटना के बाद से महिला अपने छोटे बेटे के साथ बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजारने को मजबूर है।

मामले को और गंभीर बनाते हुए पीड़िता ने आरोप लगाया कि 17 मार्च को जब उसका बेटा आरोपी के पास गया तो उसे बुरी तरह पीटा गया। महिला का कहना है कि आरोपी ब्रजभान और उसके रिश्तेदार आरूषी बृजवाने ने उसके बेटे को बेरहमी से मारा। इसके बाद 6 अप्रैल को जब पुष्पा ने इस घटना का विरोध किया तो आरोपी और उसके भांजे अरुण ने उसे सड़क पर पटक-पटक कर मारपीट की। पीड़िता का कहना है कि इस घटना के बाद से वह बेहद डरी और परेशान है।

पुष्पा का आरोप है कि उसने इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस से भी की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि मामला दबाने की कोशिश की जा रही है, जिसके कारण वह न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। पीड़िता का कहना है कि आरोपी पहले भी कई महिलाओं को झूठे प्रेम और विवाह के जाल में फंसाकर पैसे ऐंठ चुका है।

पीड़िता ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420, 493, 494 और 506 के तहत मामला दर्ज कर उसे जल्द गिरफ्तार किया जाए। साथ ही उससे उसकी मेहनत की कमाई और जेवर वापस दिलाए जाएं, ताकि वह अपने बेटे की परवरिश और पढ़ाई ठीक से कर सके। रो-रो कर बुरा हाल बताते हुए महिला ने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उसके और उसके बच्चे के भविष्य पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

सूची में नाम होने के बावजूद नहीं मिला आवास: झांसी का परिवार कच्चे मकान में रहने को मजबूर, 1076 पर शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई

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झांसी जिले से प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां सूची में नाम होने के बावजूद एक गरीब परिवार को अब तक आवास का लाभ नहीं मिल पाया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि कई महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में परिवार आज भी जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर है और हर बारिश में उन्हें बड़े खतरे के बीच जिंदगी गुजारनी पड़ती है।

जानकारी के अनुसार झांसी जिले के बीरपुरा गांव निवासी गोविंद दास ने बताया कि वह बेहद गरीब परिवार से आते हैं और वर्षों से कच्चे मकान में रहकर जीवन यापन कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में उनका नाम शामिल है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक योजना का लाभ नहीं दिया गया। इस संबंध में उन्होंने करीब पांच महीने पहले संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़ित गोविंद दास के अनुसार उन्होंने अपनी समस्या को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के शिकायत पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1076 पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्हें उम्मीद थी कि वहां से उनकी समस्या का समाधान होगा, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी कोई अधिकारी उनकी शिकायत पर ध्यान देने नहीं आया। इससे परिवार में निराशा और चिंता बढ़ती जा रही है।

गोविंद दास ने बताया कि उनका परिवार एक ही छोटे और जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर है, जहां लगभग छह से सात लोग एक साथ रहते हैं। मकान की हालत इतनी खराब है कि बरसात के दिनों में छत टपकने लगती है और दीवारें भी कमजोर हो जाती हैं। ऐसे हालात में परिवार के सदस्यों को हर समय मकान गिरने का डर सताता रहता है।

पीड़ित का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह खुद नया मकान बनवाने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए उन्हें सरकार की आवास योजना से बड़ी उम्मीद थी, लेकिन लगातार प्रयासों के बावजूद उन्हें अब तक कोई लाभ नहीं मिला। उनका आरोप है कि स्थानीय स्तर पर उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

गोविंद दास ने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि उनकी समस्या को गंभीरता से सुना जाए और जल्द से जल्द उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाए। उनका कहना है कि यदि उन्हें समय पर सहायता मिल जाए तो उनका परिवार सुरक्षित घर में रह सकेगा और बच्चों का भविष्य भी बेहतर हो सकेगा।

अब देखना होगा कि यह मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और क्या गरीब परिवार को आखिरकार सरकारी योजना का लाभ मिल पाता है या नहीं।