Monday, July 6, 2026
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इंस्टाग्राम पर युवती की फोटो और आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट करने का मामला, कार्रवाई की मांग

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सोशल मीडिया पर एक युवती की फोटो और निजी संबंधों से जुड़े कथित कमेंट पोस्ट करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि “सूरत सिंह” नाम की इंस्टाग्राम आईडी से आरती नाम की युवती की तस्वीरें अपलोड कर उसके बारे में निजी बातें और आरोप लिखे जा रहे हैं, जिससे युवती और उसके परिवार की छवि प्रभावित हो रही है।
बताया जा रहा है कि इंस्टाग्राम स्टोरी और पोस्ट में युवती की फोटो के साथ कई मोबाइल नंबर और व्यक्तिगत टिप्पणियां भी साझा की गईं। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। पीड़ित पक्ष ने इसे मानसिक उत्पीड़न और बदनाम करने की कोशिश बताते हुए संबंधित आईडी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया का इस तरह गलत इस्तेमाल किसी की निजता और सम्मान को ठेस पहुंचा सकता है। लोगों ने साइबर सेल और पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की अपील की है।

इंस्टाग्राम आईडी से युवती की फोटो वायरल कर बदनाम करने का आरोप, पीड़िता ने सुनाई आपबीती

सोशल मीडिया पर युवती की फोटो और निजी जानकारी साझा कर बदनाम करने का मामला सामने आया है। पीड़िता आरती ने आरोप लगाया है कि “सूरत सिंह” नाम की इंस्टाग्राम आईडी चलाने वाला युवक लगातार उसे परेशान कर रहा है। युवती का कहना है कि आरोपी पहले इंस्टाग्राम पर लगातार फॉलो और मैसेज करता था। शुरुआत में सामान्य बातचीत हुई, लेकिन बाद में युवक ने धोखाधड़ी और धमकी देना शुरू कर दिया।
पीड़िता के अनुसार आरोपी ने उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया स्टोरी और पोस्ट में डालकर निजी बातें लिखीं तथा कई लोगों तक उसकी जानकारी पहुंचाई। युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके मोबाइल नंबर का गलत इस्तेमाल किया, जिसके चलते उसे अनजान लोगों के कॉल आने लगे। परेशान होकर उसे अपना नंबर तक बंद करना पड़ा।
आरती ने बताया कि आरोपी उसके पति और परिवार को भी फोन कर धमकियां दे रहा है। उसका कहना है कि आरोपी ने सोशल मीडिया पर उसकी छवि खराब करने की कोशिश की, जिससे उसे मानसिक तनाव और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़िता ने मीडिया के माध्यम से साइबर सेल और पुलिस प्रशासन से आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों ने भी कहा कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर किसी की निजी जिंदगी और सम्मान से खिलवाड़ करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए।

दतिया के थरेट थाना क्षेत्र में मारपीट और धमकी का मामला, पुलिस कार्रवाई में देरी से नाराज पीड़ित

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दतिया जिले के थरेट थाना क्षेत्र से मारपीट, धमकी और पुलिस कार्रवाई में देरी का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने इलाके में सनसनी फैला दी है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ दबंगों ने पुरानी रंजिश के चलते युवक पर बेल्ट और लोहे की रॉड से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इतना ही नहीं, आरोपी लगातार समझौते का दबाव बना रहे हैं और जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम वसई जीव निवासी तुलाराम अहिरवार ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में बताया कि बीते दिनों उसका पुत्र राहुल अपने मित्र के साथ गांव लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में गांव के ही कुछ लोगों ने उसे रोक लिया और पुरानी रंजिश को लेकर विवाद शुरू कर दिया। आरोप है कि पहले गाली गलौज की गई और उसके बाद बेल्ट तथा अन्य हथियारों से हमला कर दिया गया।

हमले में राहुल के सिर, हाथ और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। मारपीट इतनी बेरहमी से की गई कि मौके पर खून निकलने लगा और हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उसे दतिया रेफर कर दिया गया। राहुल को मारने वाले चार व्यक्ति हैं उनके नाम है सागर यादव ,कुरु उर्फ अरविंद पाल
अमनदीप उर्फ सूर्या यादव
सुरेंद्र यादव
धर्मेंद्र परिहार

पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस मामले में पहले भी संबंधित आरोपियों के खिलाफ थाना रेट में मामला दर्ज किया गया था, लेकिन अब तक पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई। इसी का फायदा उठाकर आरोपी खुलेआम गांव में घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार पर राजीनामा करने का दबाव बना रहे हैं।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी कह रहे हैं कि यदि समझौता नहीं किया गया तो पूरे परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इससे परिवार भय और दहशत में जी रहा है। परिवार का कहना है कि आरोपी कभी भी दोबारा हमला कर सकते हैं।

तुलाराम अहिरवार ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाए और उन पर कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में किसी बड़ी घटना को रोका जा सके।

फिलहाल इस पूरे मामले ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है और लोग पुलिस की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो मामला और गंभीर रूप ले सकता है।

50 हजार के लेन-देन पर खूनी हमला: लोहे के हथियार से युवक का सिर फोड़ा, चेन और नकदी भी लूटी

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समस्तीपुर। जिले के उजियारपुर थाना क्षेत्र में उधार के 50 हजार रुपये मांगने गए युवक पर जानलेवा हमला किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। गंभीर रूप से घायल युवक का इलाज सदर अस्पताल समस्तीपुर में चल रहा है, जहां उसने पुलिस के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।

घायल राजू राय (उम्र लगभग 19 वर्ष), निवासी रामनगर, वार्ड-10, ने बताया कि उसने करीब चार महीने पहले अपने पड़ोसी संजीव राय को 50 हजार रुपये दिए थे। 22 फरवरी 2025 की सुबह करीब 4 बजे वह अपने भाई दीपक कुमार के साथ पैसे वापस मांगने संजीव राय के घर गया था। आरोप है कि पैसे लौटाने के बजाय संजीव राय और उसके परिजनों ने गाली-गलौज शुरू कर दी और साफ कह दिया कि “अब तुम्हारा पैसा नहीं मिलेगा।”

राजू राय के मुताबिक, इसी दौरान आरोपियों ने लोहे के रॉड और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमलावरों में रामलगन राय, योगेंद्र राय, उमेश राय, भोला राय समेत कई लोग शामिल थे, जो हथियारों से लैस होकर आए थे। आरोप है कि रामलगन राय ने लोहे की रॉड से उसके सिर पर वार किया, जिससे उसका सिर फट गया और वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा।

पीड़ित ने बताया कि हमलावरों ने उसे जमीन पर गिराने के बाद भी बेरहमी से पीटना जारी रखा और जान से मारने की धमकी दी। इस दौरान उसके गले से सोने की चेन भी छीन ली गई, जिसकी कीमत करीब 20 हजार रुपये बताई जा रही है। घटना के दौरान हमलावर लगातार धमकी दे रहे थे कि अगर पुलिस में शिकायत की तो जान से मार देंगे।

हल्ला सुनकर जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो आरोपी फरार हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायल राजू राय को सदर अस्पताल समस्तीपुर में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में जब उसके पिता मामले की शिकायत करने गए तो उनके साथ भी मारपीट की गई, जिससे वे भी घायल हो गए।

फिलहाल पुलिस ने पीड़ित के बयान के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना ने एक बार फिर इलाके में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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36 साल पहले आई ब्लॉकबस्टर, जिसके हीरो-हीरोइन का डूब गया करियर, हीरो मांग रहा काम तो एक्ट्रेस का चेहरा हुआ खराब

36 साल पहले रिलीज हुई एक ब्लॉकबस्टर ने रातों-रात इसमें नजर आए लीड एक्टर्स को स्टार बना दिया, लेकिन इनके लिए ये फिल्म इतनी मनहूस साबित हुई की पहली फिल्म के बाद इनकी कोई फिल्म नहीं चली।90 के दशक में रिलीज हुई ‘आशिकी’ किसी को याद हो ना हो, इसके गाने आज भी हिट हैं। इस फिल्म से दो नए-नवेले एक्टर्स ने अपना डेब्यू किया था और आज दोनों ही फिल्म इंडस्ट्री से लापता हो चुके हैं। हम बात कर रहे हैं ‘आशिकी’ के लीड एक्टर्स राहुल रॉय और अनु अग्रवाल की, जिन्होंने अपनी डेब्यू फिल्म से खूब सुर्खियां बटोरीं। पहली ही फिल्म से दोनों स्टार बन गए। आशिकी की सफलता के बाद इन्हें फिल्मों पर फिल्में ऑफर होने लगीं, लेकिन आशिकी जैसी सफलता न तो फिर राहुल रॉय दोहरा पाए और न ही अनु अग्रवाल की किस्मत चमक सकी। धीरे-धीरे दिन ये आ गए कि दोनों ही फिल्म इंडस्ट्री से गायब हो गए।
राहुल रॉय मांग रहे काम
हाल ही में राहुल रॉय तब चर्चा में आ गए, जब सोशल मीडिया पर उनका एक कंटेंट क्रिएटर के साथ वीडियो सामने आया। इस वीडियो को लेकर कुछ लोगों ने अभिनेता का मजाक भी उड़ाया, जिसका जवाब देते हुए एक्टर ने ट्रोल्स को खूब खरी-खोटी सुनाई थी और साथ ही इस तरह के वीडियोज करने के पीछे की वजह भी बताई। ट्रोल्स को जवाब देते हुए अभिनेता ने बताया कि उन्हें कुछ कानूनी मामलों की फीस भरनी है और ये केस उस समय के हैं जब उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। इसी के साथ उन्होंने काम दिलाने की भी अपील की।नहीं मिल पाई पहले जैसी सफलता
राहुल रॉय ने 1990 में रिलीज हुई आशिकी से डेब्यू किया था और रातोंरात स्टारडम हासिल किया। इसके बाद उनके पास फिल्मों की लाइन लग गई, लेकिन वह आशिकी जैसी सफलता नहीं दोहरा पाए। जुनून और सपने साजन जैसी फिल्मों में काम के जरिए उन्होंने कुछ तारीफें हासिल कीं, लेकिन बाद में उन्हें काम मिलना बंद हो गया। 2020 में राहुल रॉय तब फिर चर्चा में आए, जब उन्हें नवंबर 2020 में कारगिल में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया था। इसके बाद उनका इलाज मुंबई के नानावती अस्पताल में चला, जहां की फीस सुपरस्टार सलमान खान ने भरी थी।

अनु अग्रवाल को झेलना पड़ा दर्द
राहुल रॉय की ही तरह इस फिल्म की लीड एक्ट्रेस अनु अग्रवाल का करियर भी ‘आशिकी’ के बाद पटरी से उतर गया। उनके साथ एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। 1999 में वह एक गंभीर सड़क हादसे का शिकार हो गईं, जिसमें उन्हें गहरी चोट आई और वह लंबे समय तक कोमा में रहीं। इस हादसे ने उनका चेहरा बुरी तरह बिगाड़ दिया और शरीर पर भी कई गंभीर चोटें आई थीं, जिसने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।

बीजेपी से जुड़ी बड़ी खबर, पश्चिम बंगाल के पर्यवेक्षक बनाए गए अमित शाह, जानें असम की जिम्मेदारी किसे मिली

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पश्चिम बंगाल और असम के लिए बीजेपी ने अपने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है। ये पर्यवेक्षक, विधायक दल के नेता के चुनाव करने में अहम भूमिका निभाएंगे।नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल और असम में बीजेपी को शानदार जीत हासिल हुई है। ऐसे में दोनों ही राज्यों में सरकार बनना तय है। बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री अमित शाह को अपना केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। वहीं ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी को केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
असम के लिए क्या फैसला?
बीजेपी ने असम में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को अपना केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। बीजेपी ने हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी को केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव के क्या रहे नतीजे?
पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को सामने आ गए। दोनों ही राज्यों में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया और अब दोनों ही राज्यों में बीजेपी की सरकार बनना तय है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 207 सीटें हासिल की हैं और तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों पर ही सिमट गई। कांग्रेस को 2, AJUP को 2 और CPIM को एक सीट हासिल हुई है। यानी पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार है।

असम में भी बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार है। यहां बीजेपी ने 82 सीटों पर जीत हासिल की है। कांग्रेस ने 19 और BOPF ने 10 सीटों पर जीत हासिल की है। AGP ने 10 और AIUDF ने 2 सीटें हासिल की हैं।

दोनों ही राज्यों में विपक्ष कमजोर है क्योंकि बीजेपी को प्रचंड जनादेश मिला है। हालांकि अभी दोनों राज्यों में सीएम का ऐलान होना है इसीलिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। अब देखना ये होगा कि असम और पश्चिम बंगाल में कौन विधायक दल का नेता बनता है और कौन राज्य का सीएम बनता है। बीजेपी ने पहले भी अपने फैसलों से जनता को चौंकाया है। इस बार क्या होगा, वह तो वक्त ही बताएगा।

गाटा नंबर बदलने का आरोप, जमीन विवाद में नया मोड़: आवेदक बोला– पुलिस मिली हुई है, रिपोर्ट में गड़बड़ी

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आगरा। फतेहाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम नौगवां में जमीन विवाद अब और ज्यादा उलझता जा रहा है। फर्जी बैनामे के आरोपों के बीच अब आवेदक रामशंकर ने पुलिस जांच पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका दावा है कि पुलिस ने जांच के दौरान गाटा संख्या तक बदल दी और पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

रामशंकर का कहना है कि वर्ष 2016, 2017 और 2018 में हुई कार्यवाही और रिपोर्ट में भारी गड़बड़ी की गई है। उनका आरोप है कि असली विवाद गाटा संख्या 216 से जुड़ा था, लेकिन पुलिस ने उसे बदलकर 125 कर दिया। इतना ही नहीं, गाटा संख्या 218, जो कथित तौर पर पोखर/तालाब की जमीन है, उसे रिकॉर्ड से “गुम” बताया गया। आवेदक का आरोप है कि इस तरह की हेराफेरी जानबूझकर की गई ताकि विपक्षी पक्ष को फायदा पहुंचाया जा सके।
विपक्षी मोबाइल नंबर 97589 51395,9012307943

उन्होंने यह भी कहा कि थाना स्तर पर 2023 से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उल्टा, पुलिसकर्मी गाटा नंबर बदलने और “कब्जा नहीं है” कहकर मामले को कमजोर करने में लगे हैं। रामशंकर ने साफ आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी विपक्षी लोगों से मिले हुए हैं और आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

मामले की जड़ में खाता संख्या 125 की गाटा संख्या 217, रकबा 1.3080 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जो पहले महेंद्र पुत्र रत्ना के नाम दर्ज थी। आरोप है कि गांव के ही कुछ लोगों—जयवीर, मलखान सिंह, बल्लो और गिर्राज सिंह—ने फर्जी तरीके से बैनामा कराकर इस जमीन को अपने नाम करा लिया। इस संबंध में पहले भी धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।

हालांकि, पुलिस की ताजा जांच रिपोर्ट में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। जांच अधिकारी के मुताबिक, 2016 में दर्ज मुकदमे में 2017 में अंतिम रिपोर्ट कोर्ट भेज दी गई थी। साथ ही, “सन्तो देवी बनाम राजेन्द्र सिंह” नाम से एक दीवानी वाद अभी न्यायालय में लंबित है, जिसकी सुनवाई 7 अप्रैल 2026 को होनी है।

पुलिस का कहना है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण थाना स्तर पर आगे कोई कार्रवाई जरूरी नहीं है। लेकिन आवेदक के लगातार आरोपों और गाटा नंबर बदलने जैसी बातों ने पूरे प्रकरण को संदिग्ध बना दिया है। गांव में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं और अब सभी की नजर कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है।

दिल्ली में मजदूरी कर परिवार पाल रहीं जय कुमारी, सोशल मीडिया पर पहचान बनाने की जंग में जुटीं

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दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच एक ऐसी महिला की कहानी सामने आई है, जो दिनभर मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालती हैं और रात में अपने सपनों को पूरा करने के लिए सोशल मीडिया पर मेहनत करती हैं। हम बात कर रहे हैं जय कुमारी की, जिनकी मेहनत और संघर्ष अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

मूल रूप से Jhansi की रहने वाली जय कुमारी पिछले काफी समय से Delhi में रहकर मजदूरी का काम कर रही हैं। आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा है। जय कुमारी की उम्र करीब 40 वर्ष है और उनके तीन बच्चे हैं

बताया जा रहा है कि जय कुमारी पिछले एक साल से लगातार सोशल मीडिया पर वीडियो बना रही हैं। खास बात यह है कि मजदूरी के कठिन काम के बाद भी वह समय निकालकर अलग-अलग तरह के वीडियो तैयार करती हैं। उनके वीडियो में कभी मनोरंजन, कभी जीवन संघर्ष और कभी सामाजिक संदेश देखने को मिलता है।

जय कुमारी का कहना है कि उनका सपना है कि सोशल मीडिया पर उनकी अलग पहचान बने और लोग उनके काम को सराहें। इसके लिए वह लगातार मेहनत कर रही हैं और हर दिन कुछ नया करने की कोशिश करती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका हौसला कमजोर नहीं पड़ा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जय कुमारी की मेहनत और लगन प्रेरणादायक है। जिस तरह वह परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने सपनों के लिए संघर्ष कर रही हैं, वह समाज के लिए एक मिसाल है।

आज के दौर में सोशल मीडिया कई लोगों के लिए पहचान बनाने का माध्यम बन चुका है और जय कुमारी भी इसी उम्मीद के साथ आगे बढ़ रही हैं कि एक दिन उनकी मेहनत रंग लाएगी और उनका नाम दूर-दूर तक पहुंचेगा।

जय कुमारी की यह कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कठिन परिस्थितियां भी इंसान के सपनों को रोक नहीं सकतीं। मजदूरी से लेकर मोबाइल कैमरे तक का यह सफर संघर्ष, उम्मीद और सफलता की तलाश की एक मिसाल बनता जा रहा है।

चंदौली जिले के कन्दवा थाना क्षेत्र के मुड्डा गांव में पुरानी रंजिश को लेकर एक परिवार और पड़ोसी महिला के बीच विवाद का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

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पीड़ित पक्ष ने पुलिस अधीक्षक चन्दौली को प्रार्थना पत्र देकर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर गांव में चर्चा तेज हो गई है।

मिली जानकारी के अनुसार मुड्डा गांव निवासी राजवंश पाल ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि गांव की ही रहने वाली लीलावती देवी के साथ करीब 10 फीट गली को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। इसी रंजिश के चलते विपक्षी पक्ष ने वर्ष 2023 में उनके खिलाफ फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराकर धारा 354, 323, 325, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।

राजवंश पाल का आरोप है कि उस समय उन्होंने भी घटना की शिकायत थाना कन्दवा में की थी, लेकिन पुलिस द्वारा उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित का कहना है कि लगातार विवाद और मुकदमेबाजी के कारण उनके परिवार को मानसिक और सामाजिक रूप से काफी नुकसान उठाना पड़ा।

राजवंश पाल का आरोप है कि लीलावती देवी और उनका परिवार लगातार उन्हें गांव छोड़ने की धमकी दे रहा है। आरोप है कि लीलावती देवी अक्सर यह कहकर दबाव बनाती हैं कि उनका बेटा कृष्णकांत पाल का बेटा अग्निवीर पुलिस में भर्ती हो चुका है और उसके प्रभाव के दम पर लीलाऊती देवी फर्जी मुकदमे में फंसा सकती हैं। इतना ही नहीं, परिवार का आरोप है कि कृष्णकांत पाल जो भी खुलेआम धमकी देता है कि अगर उन्होंने गांव नहीं छोड़ा तो उन्हें झूठे मामलों में फंसा दिया जाएगा और उनका जीवन बर्बाद कर दिया जाएगा।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि फर्जी मुकदमे में उनके 83 वर्षीय पिता सीताराम को भी घसीटा गया, जिससे वह गहरे सदमे में आ गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। परिवार का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया।

राजवंश पाल ने अपने प्रार्थना पत्र में एक और गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि बीते 20 अप्रैल 2026 को उनकी पुत्री के साथ भी जानलेवा घटना हुई। आरोप है कि विपक्षी महिला ने उनकी पुत्री का गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया। पुत्री के शोर मचाने पर गांव के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद उसकी जान बच सकी।

पीड़ित परिवार का कहना है कि विपक्षी पक्ष लगातार उन्हें गांव छोड़ने की धमकी देता है और कहता है कि उनका प्रभाव पुलिस तक है, इसलिए वह किसी को भी झूठे मुकदमे में फंसा सकती है। परिवार ने आरोप लगाया कि इस तरह की धमकियों से पूरा परिवार भय और तनाव में जीने को मजबूर है।

राजवंश पाल ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोपित महिला के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

फिलहाल पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद अब सभी की नजर पुलिस कार्रवाई पर टिकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला गांव में लंबे समय से चल रहे विवाद की गंभीर तस्वीर सामने ला सकता है। वहीं दूसरी ओर पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

चीन की पटाखा फैक्ट्री में हुआ जोरदार विस्फोट, 21 लोगों की मौत; 61 घायल

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चीन की एक पटाखा फैक्ट्री में जोरदार विस्फोट हो गया। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 61 लोग घायल बताए जा रहे हैं। फिलहाल घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।बीजिंग: इस वक्त की बड़ी खबर चीन से सामने आ रही है। यहां चीनी सरकारी मीडिया ने मंगलवार को बताया कि हुनान प्रांत के लियुयांग शहर में एक आतिशबाजी निर्माण कारखाने में विस्फोट हो गया। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 61 लोग घायल बताए जा रहे हैं। फिलहाल घटनास्थल पर राहत और बचाव का कार्य किया जा रहा है। मौके पर 500 बचावकर्मी मौजूद हैं। वहीं विस्फोट के कारणों की जांच की जा रही है।

पटाखा फैक्ट्री में लगी आग
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह विस्फोट सोमवार शाम लगभग 5 बजे गुआंडू टाउनशिप में स्थित लियुयांग हुआशेंग आतिशबाजी निर्माण और प्रदर्शन कंपनी नामक आतिशबाजी कारखाने में हुआ। वहीं विस्फोट के तुरंत बाद आपातकालीन और अग्निशमन दल घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर राहत और बचाव का कार्य जारी है। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई और 61 अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल घायलों का इलाज किया जा रहा है।

राहत और बचाव कार्य जारी
रिपोर्ट के अनुसार, घटनास्थल पर लगभग 500 बचावकर्मी तैनात किए गए हैं। अधिकारियों ने दो बारूद के गोदामों से उच्च जोखिम का हवाला देते हुए खतरनाक क्षेत्रों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारी विस्फोट के कारणों की जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कंपनी के प्रभारी लोगों के खिलाफ “नियंत्रण उपाय” किए हैं, हालांकि उपायों का विवरण नहीं दिया गया है।

अभियान में तैनात किए गए रोबोट
वहीं बचाव अभियान के दौरान अन्य दुर्घटनाओं को रोकने के लिए, बचावकर्ताओं ने संभावित खतरों को दूर करने के लिए छिड़काव और नमीकरण जैसे उपाय अपनाए। उन्होंने खोज और बचाव अभियान में सहायता के लिए तीन रोबोट भी तैनात किए। बता दें कि इससे पहले फरवरी में, चीन ने चंद्र नव वर्ष के आसपास आतिशबाजी की दुकानों में हुए दो घातक विस्फोटों की सूचना दी थी।

मजदूर से ठगी और धमकी का आरोप: 90 हजार के काम पर आधा भुगतान, ठेकेदार ने दी मारपीट की धमकी

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फरीदाबाद। अरावली क्षेत्र में मजदूरी कर रहे एक श्रमिक के साथ ठगी और धमकी का गंभीर मामला सामने आया है। खेड़ी कलां निवासी बृजनंदन, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महुआ जिले के रहने वाले हैं, ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार को सिर्फ उनकी मेहनत की पूरी मजदूरी नहीं दी, बल्कि विरोध करने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

पीड़ित के अनुसार, उन्होंने करीब डेढ़ महीने तक अरावली क्षेत्र में ताल-पत्थर का काम किया। काम शुरू होने से पहले ठेकेदार बृजनंदन ओर मालिक सर्वजीत के साथ 150 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से मजदूरी तय हुई थी। इस आधार पर कुल भुगतान करीब 90 हजार रुपये बनता था। लेकिन काम पूरा होने के बाद मालिक सर्वजीत ने शर्त बदलते हुए मात्र 18 रुपये प्रति स्क्वायर फीट देने की बात कही और अब तक केवल 45 हजार रुपये ही दिए हैं। बाकी रकम देने से साफ इंकार कर दिया गया है।

मामले गंभीर बात यह है कि बृजनंदन ने बताया कि उनकी पत्नी सुनीता 8 महीने की गर्भवती हैं और बकाया मजदूरी न मिलने के कारण परिवार की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। आर्थिक तंगी और तनाव के चलते उनकी पत्नी की तबीयत भी बिगड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद मालिक पैसे देने को तैयार नहीं है।

बृजनंदन का आरोप है कि जब उन्होंने बकाया रकम की मांग की, तो ठेकेदार सर्वजीत ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि अगर ज्यादा बोलोगे तो मारूंगा, और पुलिस को बुलाने की चुनौती भी दी। इतना ही नहीं, अब वह केवल 600 रुपये और लेने की बात कह रहा है, जिससे मजदूर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

पीड़ित मजदूर बृजनंदन का कहना है कि वह परिवार का इकलौता कमाने वाला है और इतनी बड़ी रकम फंस जाने से उसकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। उसने प्रशासन और पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है और मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अरावली क्षेत्र में मजदूरों के साथ इस तरह के शोषण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जहां पहले अधिक रेट पर काम तय किया जाता है और बाद में भुगतान के समय शर्तें बदल दी जाती हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन की सख्ती बेहद जरूरी है ताकि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा हो सके।