Wednesday, July 1, 2026
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‘स्कूल का खेल मैदान कब्जाकर बना दिए मकान, विरोध किया तो मारपीट और धमकियां’… अलवर में पीड़ित परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

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अलवर। राजस्थान के अलवर जिले की मुंडावर तहसील के गोपीपुरा गांव से सरकारी भूमि और सड़क निर्माण को लेकर विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद ने आरोप लगाया है कि उनके घर के पास स्थित स्कूल के खेल मैदान पर कुछ लोगों ने कथित रूप से अवैध कब्जा कर मकान बना लिए हैं। इतना ही नहीं, हाल ही में सड़क निर्माण के दौरान जब उन्होंने कथित अनियमितताओं का विरोध किया तो उनके और उनके परिवार के साथ मारपीट, अभद्र व्यवहार तथा जान से डराने-धमकाने की घटनाएं हुईं। पीड़ित परिवार का कहना है कि वह इस कदर दहशत में है कि थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

राजेंद्र प्रसाद के अनुसार 28 जून 2026 की सुबह करीब 11 बजे गोपीपुरा से टेहड़का मार्ग पर सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था। उनका आरोप है कि मौके पर 15 से 20 दिन पहले पटवारी ने पैमाइश करवा दी गई थी जिससे पटवारी में आदेश दिया था कि 25 फुट रास्ता छोड़े जाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में कथित रूप से विनोद पुत्र रामपत प्रभावशाली लोगों के दबाव और ठेकेदार के मिलीभगत के कारण सड़क का रुख बदल दिया गया, जिससे उन्हें नुकसान पहुंचा।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि गांव निवासी विनोद पुत्र रामपत तथा उसके साथ मौजूद अन्य लोगों ने पहले स्कूल के खेल मैदान पर अवैध कब्जा कर मकान बना लिए और अब सड़क निर्माण के दौरान भी अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके परिवार के साथ कथित रूप से जोर-जबरदस्ती, मारपीट और धमकी दी गई। उनका आरोप है कि आरोपियों ने ऐसा माहौल बना दिया है कि पूरा परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है और वे घर से बाहर निकलने में भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका आरोप है कि दबंगों के भय के कारण वे पुलिस तक अपनी शिकायत लेकर नहीं पहुंच पा रहे हैं। परिवार ने प्रशासन से सुरक्षा उपलब्ध कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल इस मामले में प्रतिवादी पक्ष का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि प्रशासन द्वारा जांच कराई जाती है तो वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। स्थानीय लोगों की नजरें अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं

देश के प्रमुख शहरों में घरों की बिक्री घटी, दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा बढ़ी प्रॉपर्टी की कीमतें

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अनुज पुरी ने कहा कि अब घरों की मांग में बढ़ोतरी मुख्य रूप से प्रीमियम हाउसिंग, वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) आधारित रोजगार केंद्रों और बुनियादी ढांचा विकास वाले क्षेत्रों तक सीमित होती जा रही है।
देश के 7 प्रमुख शहरों में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान घरों की बिक्री 6 प्रतिशत घटकर 90,715 यूनिट रह गई। आर्थिक अनिश्चितता और मकानों की बढ़ती कीमतें इसकी प्रमुख वजहें रहीं। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों से ये जानकारी मिली। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR), दिल्ली-एनसीआर, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में पिछले साल की समान अवधि में घरों की कुल बिक्री 96,285 यूनिट रही थी।घरों की औसत कीमत 7 प्रतिशत बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार, इन 7 शहरों में 2025 की समान अवधि की तुलना में चालू तिमाही में मकानों की औसत कीमत में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिलचस्प बात ये है कि एनारॉक के अप्रैल-जून तिमाही के बिक्री आंकड़े हाल ही में लिस्ट हुई कंपनी प्रॉपइक्विटी की रिपोर्ट से पूरी तरह अलग हैं।

प्रॉपइक्विटी ने जारी किए अलग आंकड़े
प्रॉपइक्विटी ने चालू तिमाही में घरों की बिक्री 19 प्रतिशत बढ़कर 1,12,458 इकाई होने का दावा किया था। एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा, ” ये आंकड़े अपेक्षित रुझान के अनुरूप हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध का असर पूरे रियल एस्टेट क्षेत्र पर साफ दिखाई दिया। पश्चिम एशिया युद्ध से उत्पन्न हुई बाधाओं और आईटी/आईटीईएस सेक्टर में एआई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण ज्यादा खरीदार फिलहाल खरीदारी का फैसला टाल रहे हैं।”

कुछ खास क्षेत्रों में ही बढ़ रही है घरों की मांग
अनुज पुरी ने कहा कि अब घरों की मांग में बढ़ोतरी मुख्य रूप से प्रीमियम हाउसिंग, वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) आधारित रोजगार केंद्रों और बुनियादी ढांचा विकास वाले क्षेत्रों तक सीमित होती जा रही है।

दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा 13 प्रतिशत बढ़ी कीमतें
एनारॉक के आंकड़ों के मुताबिक, देश के इन सात प्रमुख शहरों में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की ऑफरिंग्स और डिलीवरी 7 प्रतिशत बढ़कर 1,06,000 यूनिट हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 98,625 यूनिट थी। कंसल्टेंसी कंपनी ने कहा कि इस कैलेंडर ईयर की दूसरी तिमाही में इन सातों शहरों में औसत आवासीय कीमत में सालाना आधार पर सात प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दिल्ली-एनसीआर में आवासीय कीमतों में सबसे ज्यादा 13 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई।

पाकिस्तान में हिट लेकिन भारत में फ्लॉप रही थी इमरान हाशमी की ‘आवारापन’, 19 साल बाद आ रहा सीक्वल, सुपहिट थे गाने

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इमरान हाशमी की फिल्म आवारापन 2 के टीजर ने इसके प्रीक्वल को भी सुर्खियों में ला दिया है जो साल 2007 में रिलीज हुआ था। आवारापन के गाने सुपरहिट रहे थे लेकिन इस फिल्म ने कमाई के मामले में मेकर्स को निराश किया था।
इमरान हाशमी की फिल्म आवारापन 2 का टीजर आज सोमवार को रिलीज हो गया है। डायरेक्टर नितिन कक्कड़ की इस फिल्म में इमरान के साथ सलिल आचार्य और शबाना आजमी भी दमदार रोल्स में नजर आने वाले हैं। सोमवार को मेकर्स ने आवारापन 2 का टीजर रिलीज कर दिया है और फिल्म 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। लेकिन इस फिल्म की चर्चा के साथ साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म आवारापन भी लोगों के दिमाग में घूम गई है। ये एक ऐसी फिल्म रही थी जिसके गाने सुपरहिट रहे थे लेकिन भारत में इस फिल्म को फ्लॉप का तमगा मिला था। लेकिन खास बात ये है कि ये फिल्म पाकिस्तान में खूब पसंद की गई थी और सुपरहिट साबित हुई थी। इस फिल्म का क्रेज पाकिस्तान में लंबे समय तक देखने को मिला था।
बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहा था प्रीक्वल
आवारापन साल 2007 में रिलीज हुई थी और इसे मोहित सूरी ने डायरेक्ट किया था। फिल्म की कहानी शुगफ्ता रफीक ने लिखी थी और लोगों के जहन में उतर गई थी। इमरान के साथ श्रेया सरण ने लीड रोल प्ले किया था और लोगों को भी ये जोड़ी काफी पसंद आई थी। इसके साथ ही मृणालिनी शर्मा ने भी दमदार रोल निभाया था। इसके साथ ही आशुतोष राणा, अशीष विद्यार्थी, रहमान खान, पूरब कोहली और साद रंधावा भी अहम किरदार निभाते दिखे थे। फिल्म को मुकेश भट्ट ने प्रोड्यूस किया था और उनके साथ साहिनी बॉब और सुमित सभ्रवाल भी प्रोड्यूसर्स की टीम में शामिल थे। लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि ये फिल्म कमाई के मामले में सुपरफ्लॉप रही थी। बॉक्स ऑफिस इंडिया के आंकड़ों की मानें तो फिल्म का बजट 18 करोड़ रुपये था और इसने वर्ल्डवाइड महज 12 करोड़ रुपयों की ही कमाई कर पाई थी।
ऑनलाइन डीवीडी ने बनाया सुपरहिट
ये फिल्म जिस दौर में रिलीज हुई थी तब डीवीडी प्लेयर्स का जमाना था। कमाल की कहानी और सुपरहिट गानों के साथ आई ये फिल्म ‘आप का सुरूर’ के साथ सिनेमाघरों में उतरी और इसी फिल्म की वजह से इसकी कमाई पर गहरा असर पड़ा। हालांकि जब ये फिल्म सिनेमाघरों से उतरी तो डीवीडी में लोगों को खूब पसंद आई। ये फिल्म टीवी पर भी लोगों का मनोरंजन करती रही और आज भी इसके गाने लोगों के जहन में बसे हैं। अब देखना होगा कि आवारापन का सीक्वल आवारापन 2 कमाई के मामले में क्या नए रिकॉर्ड बना सकती है।

सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा ऐलान, दिल्ली में 1 जुलाई से लागू होगी नई EV पॉलिसी; 4 साल में होगा ₹15,000 करोड़ का निवेश

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दिल्ली सरकार ने वाहन चालकों को बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को राजधानी में 1 जुलाई से नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी लागू करने का ऐलान किया है।
दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट ने नई दिल्ली EV पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी है। सरकार का प्रस्ताव है कि उपराज्यपाल की स्वीकृति के बाद यह नीति 1 जुलाई 2026 से लागू होगी और 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी। नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को टैक्स में छूट, सब्सिडी और अन्य सुविधाएं मिलेंगी। सरकार का दावा है कि अगले चार वर्षों में करीब 15,000 करोड़ रुपये का पूरा लाभ लोगों और EV सेक्टर को मिलेगा।

दिल्ली को बनाया जाएगा EV कैपिटल
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नई EV पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य दिल्ली को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ परिवहन वाली राजधानी बनाना है। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएं, जिससे वायु प्रदूषण कम हो और ईंधन पर खर्च भी घटे। इसी लक्ष्य के साथ दिल्ली को देश की EV कैपिटल बनाने की प्लानिंग तैयार की गई है।
EV खरीदने वालों को मिलेंगी बड़ी सुविधाएं
नई पॉलिसी के तहत सभी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट दी जाएगी। यह लाभ चार पहिया वाहनों के लिए 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले वाहनों पर मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे इलेक्ट्रिक कारों की खरीद को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

चार साल में ₹15,000 करोड़ का होगा फायदा
सरकार के अनुसार, अगले चार वर्षों में 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रत्यक्ष सरकारी निवेश किया जाएगा। इसके अलावा टैक्स छूट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं को मिलाकर लगभग 15,000 करोड़ रुपये का पूरा लाभ नागरिकों और EV उद्योग को मिलने की उम्मीद है। इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।
सरकारी कामकाज भी होगा पूरी तरह डिजिटल
दिल्ली सरकार ने प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर दिया है। ई-ऑफिस सिस्टम के जरिए सरकारी कामकाज को तेज, पारदर्शी और डिजिटल बनाया जा रहा है। अब तक 235 विभाग इस सिस्टम से जुड़ चुके हैं। 1.4 लाख से ज्यादा ई-फाइलें, 9.2 लाख से ज्यादा ई-रिसीट्स और 15 हजार से ज्यादा एक्टिव यूजर्स इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। इससे फाइलों की रियल टाइम ट्रैकिंग, तेजी से निस्तारण और बेहतर जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।

T20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद हरमनप्रीत कौर की कप्तानी पर मंडराया संकट? कोच ने अपने बयान से कर दिया साफ

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वुमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया से हारने के बाद भारतीय टीम ग्रुप स्टेज से बाहर हो गई। इस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया ग्रुप स्टेज में सिर्फ 3 मैच जीतने में कामयाब रही।
ICC वुमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ग्रुप स्टेज मैच में 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ ही भारतीय टीम इस टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज से बाहर हो गई है। भारतीय टीम लगातार दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज से बाहर हुई है। इस हार के बाद हरमनप्रीत कौर की कप्तानी पर सवाल उठने लगे हैं। अब सभी के मन में ये सवाल है कि टी20 वर्ल्ड कप में शर्मनाक प्रदर्शन के बाद क्या हरमनप्रीत से कप्तानी ले ली जाएगी। भारतीय महिला टीम के हेड कोच अमोल मजूमदार से भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच के बाद इसको लेकर सवाल किया गया।

हरमनप्रीत कौर की कप्तानी को लेकर अमोल मजूमदार ने क्या कहा?
मैच के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात करते हुए, कोच अमोल मजूमदार ने हरमनप्रीत कौर का सपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि हरमनप्रीत आगे भी सभी फॉर्मेट में भारतीय महिला टीम की कप्तान बनी रहें। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि आखिरी फैसला सिलेक्टर्स का होगा। सेलेक्टर्स ही इस बात का फैसला लेंगे। मजूमदार ने कहा कि कप्तान कौन होगा, यह तय करना सिलेक्टर्स का काम है। लेकिन अगर मेरा छोटा और सीधा जवाब जानना चाहें, तो हां मैं उन्हें कप्तान के तौर पर देखना चाहता हूं।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में कैसा रहा हरमनप्रीत कौर का प्रदर्शन?
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में हरमनप्रीत कौर का प्रदर्शन बल्लेबाज के तौर पर भी मिलाजुला रहा। इस वर्ल्ड कप में उन्हें 5 मैचों में बल्लेबाजी करने का मौका मिला, इस दौरान उन्होंने 5 पारियों में 141 रन बनाए। इस दौरान उनका औसत 35.25 का रहा और उन्होंने ये सभी रन 131.77 की स्ट्राइक रेट से बनाए। इस टूर्नामेंट में वह एक अर्धशतक लगाने में कामयाब रही। उनका हाईएस्ट स्कोर 56 रन का रहा, ये पारी उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी ग्रुप स्टेज मैच में खेली थी।

ग्रुप स्टेज में सिर्फ 3 मैच जीत पाई टीम इंडिया
इस टी20 वर्ल्ड कप में भारतीय महिला टीम ग्रुप ए का हिस्सा थी। ग्रुप स्टेज में टीम इंडिया ने अपना पहला मैच पाकिस्तान से खेला था। वहां टीम इंडिया को 64 रनों से जीत मिली थी। इसके बाद टीम इंडिया ने अगला मैच नीदरलैंड्स से खेला था। ये मुकाबला टीम इंडिया ने 95 रनों से अपने नाम किया था। भारतीय टीम को इस वर्ल्ड कप में पहली हार साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली थी। वहीं बांग्लादेश को टीम इंडिया ने 5 विकेट से मात दी थी। पॉइंट्स टेबल में टीम इंडिया पांच मैचों में 3 जीत और 6 पॉइंट्स के साथ तीसरे नंबर पर रही।

 

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान बॉर्डर पर किया हमला, 29 लोगों की मौत

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पाकिस्तान ने हमले में 29 लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया है। हालांकि, इस पर अफगानिस्तान की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे पहले कराची में एक हमले में पाकिस्तान के तीन सैनिक मारे गए थे।
पाकिस्तानी सेना ने रविवार रात अफगानिस्तान बॉर्डर पर जोरदार हमला किया, जिसमें 29 लड़कों के मारे जाने की खबर है। पाकिस्तानी सेना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार पाकिस्तानी सिक्योरिटी फोर्स ने रविवार को पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर एक ग्राउंड ऑपरेशन किया। इस दौरान आतंकवादियों के ठिकानों और सुरक्षित ठिकानों पर “सोचे-समझे हमले” किए गए, जिसमें 29 लड़ाके मारे गए।

इन्फॉर्मेशन मिनिस्टर अताउल्लाह तरार ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह ऑपरेशन देश भर में हुए कई आतंकवादी हमलों के जवाब में शुरू किया गया था। अफगानिस्तान की तरफ से तुरंत कोई जवाब नहीं आया।

पाकिस्तानी सेना पर हो रहे हमले
पाकिस्तान में हाल के सालों में पुलिस और सिक्योरिटी फोर्स को निशाना बनाकर किए गए आतंकवादी हमलों में बढ़ोतरी देखी गई है। अधिकारियों ने ज्यादातर हिंसा के लिए पाकिस्तानी तालिबान, जिसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, या टीटीपी के नाम से जाना जाता है, और उससे जुड़े आतंकवादी ग्रुप्स को जिम्मेदार ठहराया है। एक दिन पहले ही बंदूकों और विस्फोटकों से लैस आतंकवादियों ने कराची में पैरामिलिट्री रेंजर्स के रीजनल हेडक्वार्टर को निशाना बनाया था, जिसमें तीन सैनिक मारे गए थे। इसके बाद सिक्योरिटी फोर्स ने तीन हमलावरों को मार गिराया और एक और हमलावर को गिरफ्तार किया, जिसकी पहचान सेना ने एक अफगान नागरिक के तौर पर की है।

तालिबान का सहयोगी है टीटीपी
पाकिस्तानी तालिबान से अलग हुए गुट जमात-उल-अहरार ने शनिवार रात एक बयान में कराची हमले की जिम्मेदारी ली। तरार ने कहा कि अफगान बॉर्डर पर पाकिस्तान के नए ऑपरेशन में पाकिस्तानी तालिबान के ठिकानों और सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी तालिबान अफगान तालिबान से अलग मिलिटेंट ग्रुप है, हालांकि दोनों सहयोगी हैं। अफगान तालिबान 2021 में पड़ोसी अफगानिस्तान में सत्ता में वापस आ गया।

तीन सप्ताह के अंदर पाकिस्तान ने दोबारा हमला किया
नए ऑपरेशन से इस्लामाबाद और काबुल के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों में और तनाव आने की संभावना है। पाकिस्तान की सेना ने लगभग तीन सप्ताह पहले अफगानिस्तान में मिलिटेंट ठिकानों पर हवाई हमले शुरू किए थे। इन हमलों के बाद तीन हफ्ते से भी कम समय में पाकिस्तानी सेना ने बॉर्डर पर हमला किया है। इन हमलों ने लगभग एक महीने की शांति को खत्म कर दिया, जिसे इस्लामाबाद ने पड़ोसी देशों के बीच खुली लड़ाई बताया था, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पक्की शांति लाने की कोशिशें की जा रही थीं।

फरवरी से दोनों देशों के बीच तनाव
पाकिस्तान और अफगानिस्तान एक दूसरे पर फरवरी के महीने से हमले कर रहे हैं। फरवरी से बॉर्डर पार लड़ाई में सैकड़ों लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान ने अफगान इलाके में एयरस्ट्राइक की थी, जिसके बाद अफगानिस्तान ने जवाबी हमले किए थे। इसके बाद से कई बार दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति वार्ता हुई है, लेकिन कोई भी सीजफायर लंबे समय तक नहीं चला है। चीन ने अप्रैल में दोनों पक्षों की मेजबानी भी की थी और बाद में बीजिंग ने कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान अपने झगड़े को न बढ़ाने और हल ढूंढने पर सहमत हुए हैं।

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में कई हमले किए
पाकिस्तान ने पिछले साल से बॉर्डर पर और अफगानिस्तान के अंदर कई हमले किए हैं, जिसमें टीटीपी और दूसरे आतंकी संगठनों के कथित ठिकानों को निशाना बनाया गया है। पाकिस्तान अफगानिस्तान की अफगान तालिबान सरकार पर उन मिलिटेंट्स को पनाह देने का आरोप लगाता है, जो पाकिस्तान के अंदर जानलेवा हमले करते हैं। टीटीपी इन आतंकी संगठनों में सबसे अहम नाम है। हालांकि, अफगानिस्तान इस आरोप से इनकार करता है।

RSS के खिलाफ कमेंट करने पर प्रियांक खरगे को समन, 21 जुलाई तक देना होगा जवाब

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प्रियांक खरगे अक्सर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ टिप्पणी करते रहे हैं। इसी वजह से उनके खिलाफ समन जारी किया गया है। शिकायत करने वाले व्यक्ति का आरोप है कि खरगे ने संघ की बदनामी करने की कोशिश की है।
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे और यूथ कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाड को आरएसएस के खिलाफ टिप्पणी करने पर समन जारी किया गया है। बेंगलुरु की एक अदालत ने 27 जून को समन जारी कर 21 जुलाई तक जवाब मांगा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ प्रियांक की टिप्पणियों को लेकर आपराधिक मानहानि की शिकायत की गई थी। इसी शिकायत पर सुनवाई के बाद कोर्ठ ने समन जारी किया है।

एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट संदीप पाटिल ने माना कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि के अपराध के लिए प्रियांक खरगे और नलपाड के खिलाफ मामला बनता है।

कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “आरोपी नंबर 1 प्रियांक खरगे और 3 मोहम्मद नलपाड के खिलाफ BNS, 2023 की धारा 356 के तहत दंडनीय अपराध का संज्ञान लिया गया है। कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि वह इस मामले को आपराधिक मामले के तौर पर दर्ज करे और आरोपी नंबर 1 और 3 को समन जारी करे, जिसका जवाब 21 जुलाई, 2026 तक आना चाहिए।” हालांकि, कोर्ट ने कर्नाटक के पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही करने से इनकार कर दिया।

अक्टबूर 2025 के बयान पर दर्ज हुआ केस
बेंगलुरु के रहने वाले और आरएसएस कार्यकर्ता ए. तेजस ने ये याचिका दर्ज की थी, उनका आरोप है कि आरोपियों ने अक्टूबर 2025 में आरएसएस और उसके सदस्यों को निशाना बनाते हुए कई अपमानजनक बयान दिए। शिकायत के अनुसार, मंत्री रहते हुए प्रियांक खरगे ने 4 अक्टूबर, 2025 को कर्नाटक सरकार को पत्र लिखकर मांग की थी कि आरएसएस को सरकारी खेल के मैदानों, स्कूलों और कॉलेजों का इस्तेमाल करने से रोका जाए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह पत्र जानबूझकर मीडिया को जारी किया गया और संगठन की बदनामी करने के मकसद से खरगे के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया गया।

शिकायत में सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र
शिकायत में पिछले साल 13 और 14 अक्टूबर को खरगे द्वारा किए गए कथित सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र किया गया। एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया था, “आरएसएस सदस्य से कभी दोस्ती न करें। सिर्फ दोस्त ही नहीं, भले ही वह आपका परिवार का सदस्य हो। वे असल में दुर्व्यवहार करने वाले लोग होते हैं।” अदालत ने मंत्री प्रियांक खरगे और यूथ कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाड से 21 जुलाई तक जवाब मांगा है। हालांकि, जब गृह मंत्री प्रियांक खरगे से इस अदालती कार्यवाही के बारे पूछा गया तो उन्होंने प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया।

कौन हैं अनिरुद्ध रविचंदर, जो बनेंगे काव्या मारन के दूल्हे राजा? रिश्ते पर लगी मुहर

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मशहूर कंपोजर अनिरुद्ध रविचंदर और SRH की सीईओ काव्या मारन की शादी पक्की हो गई है, ऐसे हम नहीं कह रहे बल्कि खुद उनके अंकल ने इसकी पुष्टि की है। जल्द ही अनिरुद्ध घोड़ी चढ़ने वाले हैं।
म्यूजिक कंपोजर अनिरुद्ध रविचंदर और सनराइजर्स हैदराबाद की सीईओ काव्या मारन के अफेयर और शादी की अफवाहें काफी समय से सुर्खियां बटोर रही हैं। हालांकि इन दोनों ने ही हमेशा इस मामले पर चुप्पी साधे रखी और अपनी पर्सनल लाइफ पर कभी खुलकर बात नहीं की, लेकिन अब अनिरुद्ध के अंकल ने इस पूरे मामले पर से पर्दा उठा दिया है और दोनों के रिश्ते पर पक्की मुहर लगा दी है। अनिरुद्ध के अंकल का बयान अब सुर्खियों में है और तेजी से वायरल हो रहा है।

अनिरुद्ध के अंकल ने शादी की खबरों को बताया सच
अनिरुद्ध और काव्या मारन की शादी की खबरों को तब और हवा मिल गई जब अनिरुद्ध के अंकल और जाने-माने अभिनेता वाई जी महेंद्र ने इस बात की पुष्टि कर दी। एक मीडिया चैनल KPTV से बातचीत के दौरान महेंद्र ने अनिरुद्ध की तारीफ करते हुए उन्हें बेहद शांत और सीधा लड़का बताया। उन्होंने अनिरुद्ध को बधाई देते हुए कहा, ‘मैं इस मौके पर उन्हें बधाई देना चाहता हूं। वह एक बहुत बड़े परिवार में शादी करने जा रहे हैं। मुझे जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक यह शादी बिल्कुल तय है और दोनों जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं।’

काव्या की अंकल ने की तारीफ
हालांकि महेंद्र ने शादी की तारीख या वेन्यू जैसी अन्य जानकारियों को शेयर करने से परहेज किया। काव्या मारन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि काव्या कोई आम लड़की नहीं हैं। वे बेहद काबिल और मेहनती हैं, जो इतनी बड़ी क्रिकेट टीम को अकेले संभालती हैं। उनमें अपने पिता कलानिधि मारन के बिजनेस वाले गुण कूट-कूट कर भरे हैं। महेंद्र ने आगे कहा कि दोनों की जोड़ी बहुत खूबसूरत है और शादी के बाद उन्हें मिलकर म्यूजिक बिजनेस में हाथ आजमाना चाहिए।

साल 2025 में भी उड़ी थी अफेयर और शादी की अफवाहें
यह पहली बार नहीं है जब अनिरुद्ध और काव्या का नाम एक साथ जोड़ा जा रहा है। इससे पहले साल 2025 में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक पोस्ट जमकर वायरल हुई थी। उस पोस्ट में दावा किया गया था कि काव्या और अनिरुद्ध एक साल से ज्यादा समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं और जल्द ही शादी कर सकते हैं। यहां तक कि यह भी कहा गया था कि सुपरस्टार रजनीकांत जो रिश्ते में अनिरुद्ध के रिश्तेदार लगते हैं ने खुद काव्या के पिता कलानिधि मारन से मुलाकात कर दोनों के रिश्ते की बात आगे बढ़ाई थी।

पहले अनिरुद्ध ने शादी की खबरों को किया था खारिज
हालांकि उस वक्त अनिरुद्ध ने इन खबरों को पूरी तरह बकवास करार दिया था। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा था, ‘शादी? हाहा.. शांत हो जाओ दोस्तों, कृपया इस तरह की अफवाहें फैलाना बंद करो।’ उस समय भले ही अनिरुद्ध ने शादी की बात को खारिज कर दिया था, लेकिन काव्या मारन को डेट करने के सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की थी। अब अनिरुद्ध के अंकल के इस नए बयान के बाद फैंस आधिकारिक तौर पर इस जोड़ी की तरफ से गुड न्यूज सुनने का इंतजार कर रहे हैं।

ग्वालियर में हाईकोर्ट के आदेश पर बुलडोजर एक्शन, टूटे 75 मकान, बेघर हुए लोगों ने खड़े किए सवाल

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मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हाईकोर्ट के आदेश के बाद अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन किया गया। इस प्रक्रिया में 75 घर तोड़े गए हैं। ऐसे में बेघर हुए लोगों का गुस्सा फूट रहा है।
मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने माननीय हाईकोर्ट के निर्देश पर एक बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गोला का मंदिर इलाके में स्थित नारायण विहार कॉलोनी में प्रशासनिक अमले ने बुलडोजर चलाकर लगभग 75 मकानों को जमींदोज कर दिया। इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई से पूरी कॉलोनी में चीख-पुकार मच गई और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। कार्रवाई के दौरान महिलाओं और पुरुषों ने जमकर हंगामा किया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से उनकी तीखी बहस भी हुई। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

याचिकाकर्ता पर कोर्ट को गुमराह करने और राजनीतिक रसूख का आरोप
बेघर हुए पीड़ित लोगों ने इस कार्रवाई के पीछे एक गहरी साजिश का आरोप लगाया है। स्थानीय निवासी विनोद भदौरिया, छोटू तोमर, पवन पीड़ित और राकेश तोमर आदि का कहना है कि वे कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन याचिकाकर्ता नरेश अग्रवाल ने हाईकोर्ट को गुमराह कर यह आदेश हासिल किया है। निवासियों के मुताबिक, उद्योग विभाग ने सालों पहले नरेश अग्रवाल को व्यापार के लिए यहां जमीन लीज पर दी थी। यह पूरा विवाद उसी जमीन के एप्रोच रोड को लेकर है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पहुंच मार्ग पहले से ही 60 फीट चौड़ा है, जो कहीं-कहीं थोड़ा कम हो सकता है। इसके बावजूद, याचिकाकर्ता जानबूझकर इस पूरी जगह को खाली करवाना चाहता है ताकि वह इस सरकारी जमीन को भी अपने कब्जे में ले सके।

प्रशासन की कार्यप्रणाली और राजनीतिक दबाव पर उठाए सवाल
नारायण विहार के निवासियों ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता नरेश अग्रवाल उद्योग विभाग से मिली लीज की जमीन पर अवैध व्यापार कर रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस और खुद उद्योग विभाग को इस सच्चाई की पूरी जानकारी है, लेकिन नरेश अग्रवाल के मजबूत राजनीतिक रसूख और आर्थिक दबदबे के कारण उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। स्थानीय लोगों ने रुआंसे होकर कहा कि वे यहाँ पिछले 20 से 25 सालों से निवास कर रहे हैं, तब प्रशासन को कभी यह अतिक्रमण नजर नहीं आया। आज सिर्फ एक रसूखदार और पैसे वाले व्यक्ति के दबाव में आकर गरीबों के आशियाने उजाड़ दिए गए। यहाँ रहने वाले अधिकांश परिवार दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं, जिनके पास अब रहने को कोई जगह नहीं बची है।
न्यायालय का आदेश था, पहले ही दिया था समय: एसडीएम
दूसरी तरफ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे एसडीएम नरेंद्र बाबू यादव ने प्रशासनिक पक्ष रखते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के तहत की गई है। उन्होंने बताया कि यहाँ निवासरत लोगों को अचानक नहीं हटाया गया है, बल्कि उन्हें बहुत पहले ही नोटिस देकर सूचित कर दिया गया था और मकान खाली करने का पर्याप्त समय भी दिया गया था। एसडीएम के अनुसार मौके पर लोगों को समझाइश दी गई और शांतिपूर्ण तरीके से अतिक्रमण हटाया गया। इस कार्रवाई की अंतिम रिपोर्ट अब माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि स्थानीय निवासियों को अपनी बात कहनी है तो वे न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

नेताओं के खिलाफ फूटा गुस्सा, चुनाव बहिष्कार का ऐलान
बुलडोजर की इस कार्रवाई से गुस्साए लोगों ने मौके पर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अपना आशियाना उजड़ता देख बेघर हुए लोगों का दर्द सरकार और राजनीतिक दलों के प्रति गुस्से में बदल गया। पीड़ितों का कहना है कि जब आज उनके सिर से छत छीनी जा रही थी और उनके बच्चे सड़क पर आ गए, तब उनकी मदद के लिए कोई भी जनप्रतिनिधि या नेता आगे नहीं आया। आक्रोशित निवासियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि आने वाले समय में वे किसी भी राजनीतिक दल के नेता को वोट नहीं देंगे और चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।

पावर फाइनेंस के साथ मर्ज होगी REC लिमिटेड, दोनों सरकारी कंपनियों के बोर्ड ने मर्जर को दी मंजूरी

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आरईसी के पीएफसी में मर्ज होने से एक ऐसी फाइनेंशियल कंपनी बनेगी, जिसका कुल लोन बुक 11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा।
पब्लिक सेक्टर की पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PFC) और आरईसी लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने दोनों कंपनियों के मर्जर की योजना को मंजूरी दे दी है। पीएफसी और आरईसी ने शेयर बाजार को दी सूचना में ये जानकारी दी। आरईसी के पीएफसी में मर्ज होने से एक ऐसी फाइनेंशियल कंपनी बनेगी, जिसका कुल लोन बुक 11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा।

आरईसी के शेयरहोल्डरों को जारी किए जाएंगे पीएफसी के शेयर
स्कीम और वैल्यूएशन रिपोर्ट के अनुसार, आरईसी का पीएफसी में प्रस्तावित मर्जर के लिए शेयर एक्सचेंज रेश्यो के तहत आरईसी के शेयरहोल्डरों को 10-10 रुपये की फेस वैल्यू वाले प्रत्येक 100 शेयर के बदले पीएफसी के 10-10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 88 शेयर जारी किए जाएंगे। ये शेयर उन शेयरहोल्डरों को जारी किए जाएंगे, जिनके पास पीएफसी और आरईसी के बोर्ड द्वारा तय की जाने वाली रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के शेयर होंगे।

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230-232 के तहत होगा दोनों कंपनियों का मर्जर
ये मर्जर कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230-232 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत किया जाएगा, जिसमें संबंधित शेयरहोल्डरों और कर्जदाताओं को भी शामिल किया गया है। ये मर्जर कई शर्तों पर निर्भर है। इनमें दोनों कंपनियों के शेयरहोल्डरों और कर्जदाताओं की मंजूरी और सभी संबंधित रेगुलेटरी और सरकारी अथॉरिटी की मंजूरी शामिल है।

पीएफसी और आरईसी ने जारी किया जॉइंट स्टेटमेंट
दोनों कंपनियों के जॉइंट स्टेटमेंट के अनुसार, मर्जर के बाद बनी कंपनी का कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत ‘सरकारी कंपनी’ का दर्जा बनाए रखना और भारत सरकार का मर्जर के बाद बनी कंपनी में (सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से) ज्यादातर मतदान अधिकार और नियंत्रण बनाए रखना भी जरूरी है।

दोनों सरकारी कंपनियों ने अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए अपॉइंट किए एडवाइजर
पीएफसी और आरईसी दोनों के लिए डेलॉयट तोचे तोहमत्सु इंडिया एलएलपी डील और टैक्स एडवाइजर तथा सिरिल अमरचंद मंगलदास लीगल एडवाइजर के तौर पर काम कर रही है। इसके अलावा, पीएफसी ने आरबीएसए वैल्यूएशन एडवाइजर एलएलपी और आरईसी ने ईएंडवाई मर्चेन्ट बैंकिंग सर्विसेज एलएलपी को जॉइंट वैल्यूएशन रिपोर्ट देने के लिए अपॉइंट किया था। इसके साथ, पीएफसी ने एसबीआई कैपिटल मार्केट्स और आरईसी ने नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट को जॉइंट वैल्यूएशन रिपोर्ट पर अपनी-अपनी राय देने के लिए अपॉइंट किया था।