Saturday, March 28, 2026
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प्यार की शादी के बाद बिछड़े प्रेमी: जेल से लौटे युवक ने लगाई गुहार, बोला—हम साथ रहना चाहते हैं, जबरन कराई जा रही है लड़की की शादी

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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से प्रेम प्रसंग और पारिवारिक विवाद से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। चौरी चौरा थाना क्षेत्र के जातूरधन गांव निवासी युवक निखिल राबर ने आरोप लगाया है कि उसने अपनी प्रेमिका अंशु खेरवार के साथ मंदिर में शादी की थी, लेकिन लड़की के परिवार ने उसे नाबालिग बताकर जेल भिजवा दिया। अब जेल से बाहर आने के बाद युवक ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार निखिल राबर, पिता नंदू, गोरखपुर जिले के चौरी चौरा थाना क्षेत्र के जातूरधन गांव का रहने वाला है। उसका कहना है कि उसका प्रेम संबंध लक्ष्मणपुर निवासी अंशु खेरवार, पिता मिथिलेश खेरवार से था। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। निखिल के मुताबिक अंशु ने पहले अपने पिता से शादी की बात की थी, लेकिन अंशु के पिता ने इस रिश्ते से साफ इनकार कर दिया।

निखिल का आरोप है कि उसने भी अंशु के पिता मिथिलेश खेरवार से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए रिश्ता ठुकरा दिया कि निखिल एक मिडिल क्लास परिवार से है। इसके बाद अंशु ने निखिल पर दबाव बनाया कि अगर परिवार नहीं मान रहा है तो दोनों भागकर शादी कर लें।

युवक का कहना है कि 9 अगस्त 2025 को दोनों घर से निकल गए और लखनऊ के कृष्ण मंदिर में शादी कर ली। शादी के बाद दोनों करीब एक महीने तक पति-पत्नी की तरह साथ भी रहे। इसी दौरान परिवार वालों को इसकी जानकारी मिली और दोनों को थाने बुलाया गया। निखिल का कहना है कि उस समय अंशु ने भी पुलिस के सामने उसके पक्ष में बयान दिया था कि वह अपनी मर्जी से उसके साथ आई है।

हालांकि, बाद में अंशु के पिता मिथिलेश खेरवार ने उसे नाबालिग बताते हुए मामला दर्ज करा दिया, जिसके बाद 3 सितंबर को निखिल को जेल भेज दिया गया। निखिल का कहना है कि लड़की को तीन महीने नाबालिग बताकर उसके खिलाफ मामला बना दिया गया, जिससे उसका पहले दिया गया बयान भी कमजोर पड़ गया। वह करीब पांच महीने तक जेल में रहा और 10 फरवरी को जमानत पर बाहर आया।

युवक का आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद 27 फरवरी 2026 को जब वह घर लौटा तो अंशु ने खुद इंस्टाग्राम के जरिए उससे संपर्क किया। निखिल के मुताबिक अंशु ने कॉल कर बताया कि उसके परिवार वाले उसकी शादी किसी दूसरे लड़के से जबरन कराने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि वह ऐसा नहीं चाहती और निखिल के साथ ही रहना चाहती है।

निखिल का कहना है कि वह एक साधारण मिडिल क्लास परिवार से है और अब बेहद परेशान है। उसने प्रशासन से गुहार लगाई है कि यदि अंशु बालिग है और अपनी मर्जी से उसके साथ रहना चाहती है तो दोनों को पति-पत्नी की तरह साथ रहने की अनुमति दी जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

युवक का कहना है कि वह और अंशु दोनों एक-दूसरे के साथ जीवन बिताना चाहते हैं, लेकिन पारिवारिक दबाव और कानूनी विवाद के कारण उनका जीवन संकट में पड़ गया है। अब दोनों को उम्मीद है कि प्रशासन उनके मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाएगा।

 

जमीनी विवाद के बीच आधी रात घर में चोरी का आरोप: 53 हजार नकद और दो लाख के जेवर ले गए बदमाश, थाने में सुनवाई न होने की शिकायत

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गया। बिहार के गया जिले के चहोती थाना क्षेत्र से जमीनी विवाद के बीच चोरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि आधी रात उनके घर में घुसकर नकदी और लाखों रुपये के जेवर चोरी कर लिए गए, लेकिन शिकायत के बावजूद पुलिस द्वारा अब तक उनकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।

मामले को लेकर शिकायतकर्ता बबलू यादव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनके पिता मुसाफिर यादव के घर में 20 मार्च की रात करीब 2 बजे चोरी की घटना हुई। बबलू यादव के अनुसार, उसी दिन दिन में करीब 11 बजे उनके भाइयों राजेश और दिलीपक को पुलिस थाने ले गई थी। इस दौरान परिवार पहले से ही जमीनी विवाद को लेकर तनाव में था। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के ही कुछ लोगों से जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि जमीन विवाद में किशोर यादव, अनुज यादव, पिंटू यादव और जद्दू यादव नाम के लोगों से लगातार झगड़ा चल रहा है। आरोप है कि ये लोग जमीन को लेकर दबाव बनाते हैं और आए दिन गुंडागर्दी दिखाते हैं। इसी विवाद के बीच 20 मार्च की रात करीब 2 बजे घर में चोरी हो गई। परिवार का आरोप है कि चोर घर से करीब 53 हजार रुपये नकद और करीब 2 लाख रुपये के महिला आभूषण लेकर फरार हो गए।

परिवार का कहना है कि घर में रखे गहनों में महिलाओं के कई कीमती जेवर शामिल थे, जिनकी कुल कीमत करीब 2 लाख रुपये बताई जा रही है। घटना के बाद जब पीड़ित परिवार शिकायत लेकर थाना चहोती पहुंचा तो आरोप है कि पुलिस ने उनकी प्राथमिकी दर्ज करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।

बबलू यादव का कहना है कि उन्होंने लिखित आवेदन भी दिया, लेकिन पुलिस द्वारा उसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि विपक्षी पक्ष की शिकायतों पर कार्रवाई और सुनवाई हो रही है, जबकि उनके मामले को अनदेखा किया जा रहा है। इस कारण पीड़ित परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा है।

पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मामले में निष्पक्ष जांच कराने और जल्द से जल्द प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आरोपियों का हौसला और बढ़ सकता है। परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलाएगा।

 

डेढ़ महीने बाद ही टूटा वैवाहिक जीवन: पति से बात तक नहीं करने दे रहे ससुराल वाले, रोसरा की सपना कुमारी ने लगाई न्याय की गुहार

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समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर जिले के रोसरा से एक भावनात्मक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां शादी के कुछ ही समय बाद एक महिला अपने पति से मिलने और बात करने के लिए तरस रही है। पीड़िता सपना कुमारी ने अपने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। सपना का कहना है कि उसके पति का फोन तक छीन लिया गया है और उसे उनसे बात करने नहीं दिया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार सपना कुमारी समस्तीपुर जिले के रोसरा क्षेत्र में डाक बंगला नए बस स्टैंड के पास की रहने वाली है। सपना की शादी 27 नवंबर 2025 को राजन कुमार से हुई थी। शादी के बाद राजन कुमार उसे दिल्ली लेकर गए, जहां दोनों करीब डेढ़ महीने तक साथ रहे। इसके बाद दोनों दिल्ली से वापस अपने ससुराल हसनपुर बल्दा पहुंचे, जहां करीब पांच दिन तक साथ रहे।

सपना कुमारी का आरोप है कि इसके बाद उसके ससुराल वालों ने उसे और उसके पति को रोसरा स्थित उसके मायके भेज दिया। मायके में दोनों करीब 20 दिन तक साथ रहे। इसी दौरान सपना की सास दुनिया वती देवी और ससुर प्रवीण यादव ने मिलकर राजन कुमार को फोन कर अपने घर बुला लिया। सपना का कहना है कि जब से उसके पति ससुराल गए हैं, तब से उनके परिवार वालों ने उनका फोन छीन लिया है और उसे पति से बात तक नहीं करने दी जा रही है।

पीड़िता का आरोप है कि जब भी वह अपने पति को फोन करती है तो उसकी ननंद काजल फोन उठाती है और उससे गाली-गलौज करती है। इतना ही नहीं, सपना को ससुराल आने से भी रोक दिया गया है और उसे घर में घुसने तक नहीं दिया जा रहा है। सपना का कहना है कि वह अपने पति के साथ सामान्य वैवाहिक जीवन जीना चाहती है, लेकिन ससुराल पक्ष की वजह से वह उनसे बात तक नहीं कर पा रही है।

लगातार पति से संपर्क न हो पाने के कारण सपना कुमारी गहरे मानसिक तनाव में है। परिजनों के अनुसार वह अक्सर रोती रहती है और इस स्थिति ने उसकी मानसिक स्थिति पर भी असर डाला है। सपना ने प्रशासन से अपील की है कि उसके मामले की निष्पक्ष जांच कर उसे न्याय दिलाया जाए, ताकि वह अपने पति राजन कुमार के साथ सामान्य और सुखी वैवाहिक जीवन जी सके।

इस पूरे मामले को लेकर सपना कुमारी ने स्थानीय प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है और उम्मीद जताई है कि समय रहते कार्रवाई कर उसे न्याय दिलाया जाएगा।

 

10 महीने से परिवार से बिछड़ा युवक: असम के गोलाघाट जिले का निवासी बताने वाला मोहन रविदास लापता, घर पहुंचाने की अपील

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हैदराबाद। तेलंगाना के हैदराबाद से एक मार्मिक मामला सामने आया है, जहां करीब 10 महीनों से अपने परिवार से बिछड़ा एक युवक बेहद परेशान हालत में भटक रहा है। युवक का नाम मोहन रविदास बताया जा रहा है, जो खुद को असम राज्य के जिला गोलाघाट, थाना बोकाघाट, गांव जुगल अटी का निवासी बताता है। मोहन रविदास के पिता का नाम पदमा रविदास बताया जा रहा है।

इस मामले की जानकारी डमरूधर चालकी ने मीडिया से बातचीत के दौरान दी। डमरूधर चालकी का कहना है कि वह हैदराबाद के करबी नगर, श्रीसिल्ला, ताग्ला पल्ली इलाके के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि करीब दस महीने पहले उनकी मुलाकात मोहन रविदास से हुई थी, जो उस समय बेहद परेशान और असहाय हालत में थे।

डमरूधर चालकी के अनुसार मोहन रविदास बहुत कम बोलते हैं और अक्सर अपने परिवार को याद कर रोने लगते हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उनका आधार कार्ड और बैग कहीं चोरी हो गया, जिसके बाद से उनकी पहचान से जुड़े दस्तावेज भी गायब हो गए। इसी वजह से वह अपने घर या परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और पिछले कई महीनों से घर लौटने की कोशिश में भटक रहे हैं।

मोहन रविदास ने अपने परिवार के बारे में जो जानकारी दी है, उसके अनुसार उनके छोटे भाई का नाम कांता रविदास है, जबकि उनकी पत्नी का नाम जुटीं रविदास बताया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके दो बच्चे हैं, जो असम में ही रहते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि युवक दिन-रात अपने परिवार से मिलने की बात करता है और कई बार रोते-रोते उसकी हालत बिगड़ जाती है। पहचान से जुड़े कागजात न होने के कारण वह अपने घर का सही संपर्क नंबर या पता नहीं बता पा रहा है, जिससे अब तक उसके परिवार तक कोई सूचना नहीं पहुंच सकी है।

इस मामले को लेकर लोगों से मानवीय आधार पर मदद की अपील की गई है। यदि किसी व्यक्ति को असम के गोलाघाट जिले के थाना बोकाघाट क्षेत्र के जुगल अटी गांव के रहने वाले मोहन रविदास या उनके परिवार के बारे में कोई जानकारी हो, तो वह नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सूचना दे सकता है, ताकि लंबे समय से अपने परिवार से बिछड़ा यह युवक अपने घर वापस पहुंच सके।

संपर्क नंबर: 6305918889

शाहजहांपुर: भतीजे ने चाचा के मकान पर किया अवैध कब्जा, दे रहा धमकियां

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शाहजहांपुर में रिश्तों को शर्मसार करता मामला सामने आया है, जहां एक भतीजे ने अपने ही चाचा के मकान पर अवैध कब्जा कर लिया और अब उसे खाली करने के बजाय धमकियां दे रहा है। पीड़ित ने न्याय के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है, लेकिन अब तक उसे राहत नहीं मिल सकी है।

मामला तहसील सदर क्षेत्र के मोहल्ला व्याजा फिरोज का है, जहां रहने वाले रामनरायन पुत्र नन्हें लाल ने आरोप लगाया है कि उनकी मां ने वर्ष 2019 में विधिवत वसीयत के जरिए मकान उनके नाम कर दिया था। मां के निधन के बाद वह मकान के वैध मालिक बन गए और उसी में रह रहे थे। लेकिन इसी बीच उनके भतीजे लालू उर्फ आशीष ने मौके का फायदा उठाते हुए मकान पर जबरन कब्जा कर लिया।

पीड़ित का कहना है कि आरोपी न सिर्फ मकान खाली करने से इंकार कर रहा है, बल्कि उल्टा उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दे रहा है। रामनरायन ने बताया कि उन्होंने तहसील दिवस में भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे उनका परिवार भय और तनाव में जीने को मजबूर है।

रामनरायन ने प्रशासन से अपील की है कि उनके दस्तावेजों और वसीयत के आधार पर उनके मकान को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कब तक पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटकते रहेंगे और दबंग खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाते रहेंगे। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक कार्रवाई करता है और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।

दीवार बनाने के विवाद में खूनी संघर्ष, कई लोग घायल — जानलेवा हमले का आरोप

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कुशीनगर। नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के सरपतही खुर्द टोला भरपटिया गांव में दीवार निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। प्रार्थी रमेश यादव पुत्र गनेश ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि 15 फरवरी 2026 की सुबह करीब 8 बजे उनके पट्टीदार हरदयाल पुत्र गनेश अपने भाई धनवंत पुत्र गनेश के साथ दीवार बना रहे थे।
इसी दौरान रमेश के भाई भगवती ने दीवार सीधी बनाने को कहा, जिस पर आरोप है कि धनवंत ने गुस्से में आकर भगवती का गला पकड़ लिया। तभी हरदयाल और उसके दोनों बेटे अनुज व सालू ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया, जिससे भगवती का हाथ-पैर टूट गया।
प्रार्थी रमेश ने बताया कि जब वह बीच-बचाव करने पहुंचे तो अनुज ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। वहीं, भगवती को बचाने आई उसकी पत्नी कमलावती, पुत्र कुशाल और चार बेटियां पूजा, गुंजा, अल्पना भी हमले का शिकार हो गईं।
तहरीर के अनुसार, आरोपियों अनुज पुत्र हरदयाल, सालू पुत्र हरदयाल, धनवंत पुत्र गनेश, हरदयाल पुत्र गनेश, लक्ष्मण पुत्र सरदार, संदीप पुत्र सुरेन्द्र, सुरेन्द्र पुत्र कमला, सोनिया पत्नी हरदयाल, मंजू पत्नी धनवंत, गुडिया पुत्री हरदयाल और अंशू पुत्री हरदयाल ने मिलकर लाठी-डंडों, ईंट और लोहे की रॉड से जानलेवा हमला किया। इस हमले में कमलावती और उनकी बेटियों के सिर फट गए, जबकि कुशाल के सिर में गंभीर चोट लगने से वह जमीन पर गिरकर बेहोश हो गया।
घटना के दौरान रमेश की पत्नी उमा देवी और बेटी मीना भी मौके पर पहुंचीं, जिन पर भी अनुज और सालू ने चाकू व फाइटर से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।
पीड़ित रमेश यादव ने पुलिस से सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

स्नैपचैट से शुरू हुआ प्यार, शादी के वादे के बाद मुकरा युवक: पीड़िता ने लगाया धोखे और शोषण का आरोप

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चित्रकूट/कानपुर देहात। सोशल मीडिया पर शुरू हुई एक प्रेम कहानी अब विवाद और आरोपों में बदल गई है। चित्रकूट के रामनगर की रहने वाली शबनम ने कानपुर देहात के शर्मा मोहल्ले के निवासी अभिषेक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि नवंबर 2023 में स्नैपचैट के जरिए दोनों की दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई। 15 दिसंबर 2025 तक दोनों के बीच लगातार बातचीत होती रही और मुलाकातों का सिलसिला भी जारी रहा।

शबनम के अनुसार, अभिषेक उससे मिलने के लिए कई बार चित्रकूट आता-जाता था, वहीं वह भी अभिषेक के घर कानपुर देहात तक गई। दोनों के बीच संबंध इतने गहरे हो गए थे कि वे पति-पत्नी की तरह साथ रहने लगे थे। एक बार दोनों को चित्रकूट कोतवाली में भी पकड़ा गया था, जिससे मामले ने उस समय भी तूल पकड़ा था। इसके अलावा शबनम अभिषेक की मौसी के यहां मातानपुर में आयोजित एक पारिवारिक कार्यक्रम (मुंडन) में भी उससे मिलने पहुंची थी।

पीड़िता का आरोप है कि अभिषेक ने उसे शादी का भरोसा दिलाया था और खुद को उसका पति बताकर उसके साथ संबंध बनाए। यहां तक कि 9 दिसंबर 2025 को दोनों ने घर से भागकर कोर्ट मैरिज करने की कोशिश भी की, लेकिन उस समय उम्र कम होने के कारण शादी नहीं हो सकी। इसके बाद अचानक अभिषेक का व्यवहार बदल गया और उसने बातचीत बंद कर दी।

शबनम का कहना है कि अब अभिषेक नई सोशल मीडिया आईडी बनाकर इंस्टाग्राम पर उसे मैसेज करता है और तुरंत डिलीट कर देता है। वहीं, उसे जानकारी मिली है कि अभिषेक अब किसी अन्य लड़की से शादी करने जा रहा है। इससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान है और खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

पीड़िता ने बताया कि उसने अभिषेक को अपना पति मानकर उस पर पूरा भरोसा किया और अपना सब कुछ उसे सौंप दिया। अब जब वह शादी से मुकर रहा है, तो वह न्याय की गुहार लगा रही है। शबनम ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उसे न्याय दिलाया जाए और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

 

ठेकेदार की ठगी से मजदूर बेहाल: 1.65 लाख रुपये बकाया, खाने तक के पैसे नहीं दिए

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रायपुर (छत्तीसगढ़)। राजधानी रायपुर के भनपुरी क्षेत्र से मजदूरों के शोषण और ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। झारखंड के रहने वाले मजदूरों ने आरोप लगाया है कि घर निर्माण के लिए बुलाए गए ठेकेदार ने उनसे काम तो करा लिया, लेकिन मेहनताना देने में आनाकानी कर रहा है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें कई दिनों से न तो भुगतान मिला है और न ही खाने-पीने तक के लिए पैसे दिए गए हैं।


मिली जानकारी के अनुसार, ठेकेदार का नाम रविउल रहमान बताया जा रहा है, जो भिलाई-रायपुर क्षेत्र के एम एन संडक पारा का निवासी है। मजदूरों को रायपुर के भनपुरी स्थित विक्रम नगर (थाना खमतराई, पिन कोड 493221) में स्थानीय मकान निर्माण कार्य के लिए बुलाया गया था। मजदूरों का आरोप है कि काम पूरा होने के बाद भी उन्हें उनका पूरा भुगतान नहीं किया गया।
पीड़ित मजदूरों के अनुसार, कुल काम लगभग 3 लाख 10 हजार रुपये का हुआ, जिसमें से केवल 1 लाख 45 हजार रुपये ही दिए गए हैं, जबकि करीब 1 लाख 65 हजार रुपये अब भी बकाया है। मजदूरों का कहना है कि वे लगातार अपने पैसे की मांग कर रहे हैं, लेकिन ठेकेदार टालमटोल कर रहा है और कोई ठोस जवाब नहीं दे रहा।
मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार ने उन्हें खाने तक के पैसे नहीं दिए, जिससे उनकी स्थिति और भी दयनीय हो गई है। बाहर राज्य से आए इन मजदूरों के सामने अब रोजमर्रा के खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।
पीड़ितों ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और जल्द से जल्द बकाया राशि दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
इस मामले ने एक बार फिर निर्माण कार्यों में लगे असंगठित मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।

सरकारी तालाब पर दबंगों का कब्जा, सीसी रोड के नीचे बनाए मकान, ग्रामीणों में आक्रोश

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बदायूँ जिले के उसहैत थाना क्षेत्र के ग्राम नगासी में सरकारी तालाब पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि गांव के कुछ दबंग लोगों ने धीरे-धीरे तालाब की जमीन पर कब्जा कर पक्का निर्माण कर लिया है, जबकि प्रशासन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका है।

ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम नगासी, मौन्नामपुर के पास स्थित सरकारी तालाब (कोड संख्या 243641) पर कई लोगों ने मिलकर कब्जा कर लिया है। आरोपियों में कल्याण सिंह के पुत्र राजेश सिंह, नेकराम के परिवार के सदस्य, साधु सिंह, कड़ी सिंह सहित अन्य लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने पहले तालाब में भैंस का गोबर डालकर उसे पाटा, फिर ऊपर से मिट्टी डालकर जमीन को समतल किया और धीरे-धीरे वहां मकान खड़े कर दिए।

हैरानी की बात यह है कि इन अवैध निर्माणों के ऊपर से सीसी रोड तक बना दी गई है, जिससे यह कब्जा और भी स्थायी रूप ले चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है यहां पर रोड पर ही तालाब बना हुआ है और आने-जाने में आसुविधा है यह कब्जा सुनील राठौर के घर के पास वाले हिस्से में ज्यादा तेजी से हुआ है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी जमीन पर इस तरह का अवैध कब्जा खुलेआम किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। इससे गांव के लोगों में रोष व्याप्त है और वे लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि अभी तक कब्जा नहीं जाता है

गांव वालों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की गई तो पूरा तालाब खत्म हो जाएगा, जिससे जल संरक्षण पर भी गंभीर असर पड़ेगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर अवैध कब्जा हटवाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है यहां के लोग बहुत ज्यादा परेशान है इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए

बुजुर्ग पिता पर अत्याचार: बेटे-बहू की प्रताड़ना और पुलिस की मारपीट से एक कान से सुनाई देना बंद

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फरीदाबाद। हरियाणा के पल्ला थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग पिता ने अपने ही बेटे-बहू और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित सुरेन्द्र प्रसाद (59 वर्ष), जो मूल रूप से दिल्ली के ओखला क्षेत्र के निवासी हैं, ने आरोप लगाया है कि उनके छोटे बेटे प्रमोद कुमार और बहू अनीता कुमारी उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

पीड़ित के अनुसार, सुरेंद्र प्रसाद की पत्नी सुमरन जो की 56 साल की है उनके नाम यहां मकान है उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से अजय नगर, स्माइलपुर (फरीदाबाद) में घर बनाया था, लेकिन अब उसी घर में उन्हें रहने नहीं दिया जा रहा। सुरेन्द्र प्रसाद का कहना है कि उनका बेटा और बहू अक्सर गाली-गलौज करते हैं और घर से बाहर निकालने की धमकी देते हैं।

घटना 17 मार्च 2026 की बताई जा रही है, जब बहू अनीता कुमारी ने उनकी पत्नी के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट की। स्थिति बिगड़ने पर 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को बुलाया गया, लेकिन आरोप है कि मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित के साथ ही मारपीट कर दी।

सुरेन्द्र प्रसाद ने आरोप लगाया कि पल्ला थाने में तैनात पुलिसकर्मी प्रकाश चंद ने उन्हें बिना किसी कारण घर से उठाकर पीटा, और पुलिस कर्मी प्रकाश चंद जी को सुरेंद्र जी को पीटने के लिए घूस दी गई थी जबकि उस समय वे अपने कमरे में सो रहे थे और विवाद से उनका कोई सीधा संबंध नहीं था। इस मारपीट के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं और अब उन्हें एक कान से सुनाई नहीं दे रहा है।

पीड़ित का कहना है कि पुलिस की यह कार्रवाई पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना और विभागीय अनुशासन के खिलाफ है। उन्होंने अपना मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है और दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सुरेन्द्र प्रसाद ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा है कि उन्हें उनके ही घर में सुरक्षा और सम्मान के साथ रहने का अधिकार दिलाया जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।

इस घटना ने एक बार फिर परिवारिक कलह और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।