Saturday, July 4, 2026
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अब दो फेज में होगा आईपीएल! सितंबर- अक्टूबर में भी खेले जाएंगे मुकाबले, आखिर कब से होगा ये बदलाव

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आईपीएल में मैचों की संख्या 74 से बढ़ाकर 94 होने की उम्मीद
इंडियन प्रीमियर लीग दुनिया की सबसे बड़ी लीग है। इसी को देखते हुए दुनियाभर में और भी लीगें शुरू हुई हैं। आईपीएल के लिए तो आईसीसी की ओर से अलग से विंडो भी दी गई है। जब ये टूर्नामेंट होता है तो दुनियाभर में इंटरनेशनल मैच काफी कम होते हैं। अभी की बात करें तो आईपीएल में कुल मिलाकर 74 मैच खेले जाते हैं। इनकी संख्या आने वाले दिनों में बढ़ाकर 94 करने की बात पहले से ही हो रही है। लेकिन इतने दिनों तक लगातार मैच करा पाना आसान नहीं होगा। वे भी तब जब अप्रैल और मई में भारत के ज्यादातर हिस्सोंं में खूब गर्मी होती है।

आईपीएल का दूसरा ​फेज सितंबर से लेकर अक्टूबर तक कराया जा सकता है
अप्रैल मई की गर्मी और उमस में खिलाड़ियों की इंजरी की भी समस्या आती है। इसी बारे में बात करते हुए आईपीएल के चेयरमैन अरुण कुमार धूमल का कहना है कि आईसीसी के फ्यूचर टूर प्रोग्राम और ब्रॉडकास्टर से बात अगर सही दिशा में जाती है तो आईपीएल के एक सीजन को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। पहला फेज फरवरी के आखिर से लेकर अप्रैल तक चलेगा और दूसरा फेज सितंबर से लेकर अक्टूबर तक खेला जा सकता है। धूमल ने ये बातें स्पोर्ट स्टार से एक खास बातचीत में कही।

त्योहारी सीजन में आईपीएल के ब्रॉड और ब्रॉडकास्टर को मिलेगा फायदा
दरअसल सितंबर से लेकर अक्टूबर तक का वक्त इसलिए चुना जा सकता है, क्योंकि उस वक्त भारत में मौसम काफी अच्छा होता है। बारिश जा चुकी होती है और धीरे धीरे सर्दी दस्तक दे रही होती है। इतना ही नहीं अक्टूबर में भारत में त्योहारों का मौसम भी आ चुका होता है। इस दौरान कई बड़ी बड़ी कं​पनियां खूब विज्ञापन भी देती हैं। इसका फायदा ब्रॉडकास्टर और आईपीएल को मिलने की संभावना होती है। बीसीसीआई इस बारे में गंभीरता से विचार कर रहा है। अगर साल 2027 के बाद अगले चक्र का विंडो मिला तो आईपीएल दो फेज में होते हुए नजर आ सकता है। यानी कुल मिलाकर देखें आईपीएल के दो फेज साल 2028 या ​फिर 2029 में हो सकता है।

ऑफिस से चोरी हुआ लाखों का डेटा, कर्मचारी की हरकत से हैरान जोया अख्तर, बोलीं- ‘पैसे के लिए किस हद तक गिर सकते हैं’

जोया अख्तर के ऑफिस से डेटा चोरी मामले के सामने आने के बाद पूरी इंडस्ट्री में हड़कंप है। इस मामले में गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं और अब खुद जोया अख्तर ने इस केस पर चुप्पी तोड़ी है। जानें, फिल्ममेकर ने क्या कहा।जोया अख्तर और रीमा कागती की प्रोडक्शन कंपनी टाइगर बेबी डिजिटल एलएलपी के ऑफिस से हुई एक बड़ी डेटा चोरी ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। जोया अख्तर के प्रोडक्शन हाउस के ऑफिस से लाखों की कीमत के संवेदनशील प्रोडक्शन डेटा वाली 66 हार्ड डिस्क गायब हो गईं, जिसके बाद मामला पुलिस तक जा पहुंचा। इस मामले में दो गिरफ्तारियां भी चुकी हैं, जिनमें से एक ऑफिस का कर्मचारी ही है। अब, जोया अख्तर ने भी हार्ड डिस्क चोरी के मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि ऑफिस से कई हार्ड डिस्क चोरी हुई है। ये चोरी कंपनी के किसी भीतरी व्यक्ति द्वारा की गई लगती है। उन्होंने बताया कि शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां भी की हैं।
जोया अख्तर ने ऑफिस में हुई चोरी की पुष्टि की
बॉलीवुड हंगामा से बात करते हुए ज़ोया अख्तर ने ऑफिस से हार्ड डिस्क चोरी की पुष्टि की और कहा, “हां, मेरे ऑफिस में चोरी हुई है, कुछ हार्ड डिस्क चोरी हुई हैं। मामले का पता चलने के बाद हमने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां भी कर चुकी है। ये अंदरूनी मामला है, ये देखकर दुख होता है कि लोग पैसे कमाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं। खुशकिस्मती से हमारे पास चोरी हुए डेटा की बैकअप फाइलें थीं।”

हार्ड डिस्क चोरी के बारे में क्या पता चला
ऑफिस में हुई चोरी की शिकायत टाइगर बेबी डिजिटल एलएलपी के कार्यकारी सहायक और मानव संसाधन प्रशासक मेहजबीन मुश्ताक शेख ने दर्ज कराई थी। शिकायत दर्ज होने के बाद बांद्रा पुलिस ने मोहम्मद शाहिद अजीम खान और रितेश सुरेश शाह नाम के शिख्स को गिरफ्तार कर लिया है और 29 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पूछताछ में मुश्ताक शेख ने 24 हार्ड डिस्क बेचे जाने की बात कबूल की है, जिनमें से प्रत्येक के लिए उसे 15 हजार से 20 हजार तक का भुगतान किया गया था।

कब सामने आया मामला?
ये मामला 21 मई को तब सामने आया जब कंपनी के कर्मचारियों को कुछ हार्ड डिस्क की जरूरत पड़ी। जांच करने पर कई हार्ड डिस्क नहीं मिलीं और इनकी जगह कार्यालय परिसर के अंदर कई क्षतिग्रस्त स्टोरेज बॉक्स और खाली केस मिले। कंपनी के स्टॉक में करीब 119 हार्ड डिस्क थीं, जिनमें से 66 गायब हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों में से एक ने कई हार्ड डिस्क चुराने और उन्हें अवैध बाजार में बेचने की बात कबूल की है।

कट्टरपंथियों के आगे झुकी पाकिस्तान की पंजाब सरकार, लाहौर में ‘इस्लामपुर को कृष्ण नगर’ करने वाले फैसले पर लिया यू-टर्न

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पाकिस्तान की फिर इंटरनेशनल लेवल पर बेइज्जती हो गई है क्योंकि चरमपंथियों के दवाब में उसे फिर अपना एक फैसला बदलना पड़ा है। उसे लाहौर में सड़कों के मूल नामों की बहाली पर यूटर्न लेना पड़ा है।Pakistan एक बार फिर हंसी का पात्र बन गया है क्योंकि उसे चरमपंथियों के दबाव में आकर अपना फैसला फिर बदलना पड़ा है। दरअसल, लाहौर के एक अफसर ने बीते मंगलवार को बताया कि कुछ कट्टरपंथी तत्वों के प्रेशर में आकर पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने लाहौर की सड़कों और गलियों को उनके मूल ऐतिहासिक नाम देने की अपनी स्कीम को स्थगित कर दिया है, जिसका मकसद लाहौर की विभाजन के पहले वाली विरासत को पुनर्जीवित करना था।

नवाज शरीफ की अध्यक्षता वाली मीटिंग में हुआ था फैसला
पाकिस्तानी अखबार DAWN में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल यानी LAHR ने हाल ही में अपने प्रमुख नवाज शरीफ और उनकी बेटी, पंजाब की सीएम मरियम नवाज की संयुक्त अध्यक्षता में हुई एक मीटिंग में लाहौर और उसके आसपास के क्षेत्र की सड़कों और गलियों के मूल ऐतिहासिक नामों को बहाल करने की मंजूरी दी गई थी।

इन नामों को बदलने की हो रही थी चर्चा
अभी का नाम मूल नाम
इस्लामपुर कृष्ण नगर
बाबरी मस्जिद चौक जैन मंदिर चौक
सुन्नत नगर संत नगर
मुस्तफाबाद धरमपुरा
मौलाना जफर अली खान चौक लक्ष्मी चौक
सर आगा खान रोड डेविस रोड
फातिमा जिन्ना रोड क्वींस रोड
रहमान गली राम गली
बाग-ए-जिन्ना लॉरेंस रोड
पंजाब की सरकार ने अपने फैसले पर लिया यू-टर्न
हालांकि, विरोध होने के बाद अब पंजाब की सरकार ने इस निर्णय से पलटी मार ली है और कहा कि वह अभी लाहौर की सड़कों और गलियों के मूल नामों की बहाली पर सिर्फ विचार कर रही है। लाहौर के डिप्टी कमिश्नर कैप्टन आर. मोहम्मद अली एजाज के मुताबिक, अभी तक ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

चरमपंथियों के दवाब में बदलना पड़ा फैसला
सूत्रों के अनुसार, तमाम व्लॉगर्स सहित कुछ चरमपंथी तत्वों ने लाहौर की सड़कों और गलियों के पुराने ‘हिंदू और सिख’ नामों की बहाली के फैसले के लिए मुख्यमंत्री मरियम नवाज की कड़ी आलोचना की थी। चूंकि, आलोचकों ने मरियम नवाज सरकार के इस निर्णय को धार्मिक रंग दे दिया, इसलिए मरियम नवाज प्रशासन ने खिलाफत से बचने के लिए इस निर्णय को टाल दिया है।

मूल नामों की बहाली पर बनी थी सहमति
LHAR ने हाल ही में इतिहासकारों, वास्तुकारों, विद्वानों, अर्बन प्लानर्स और अन्य प्रमुख व्यक्तियों की एक मीटिंग आयोजित की थी और लाहौर भर की सड़कों, गलियों और इलाकों के मूल नामों की बहाली के प्रपोजल पर उनके सुझाव मांगे थे। इसमें ज्यादातर प्रतिभागियों ने लाहौर की सड़कों और गलियों के ऐतिहासिक नामों को बहाल करने के पक्ष में बात की थी।

भीषण गर्मी के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने जनता से की बड़ी अपील, बोले- ‘जितनी सावधानी बरत सकें, जरूर बरतें’

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देश के अनेक हिस्सों में जारी भीषण गर्मी के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने जनता से अपील की है। पीएम मोदी ने लोगों से कहा है कि वे इस भीषण गर्मी के समय में जितनी सावधानी बरत सकते हैं, जरूर बरतें।भारत के विभिन्न राज्यों में भीषण गर्मी ने लोगों को परेशान कर के रख दिया है। बड़ी संख्या में शहरों में तापमान 40 से ऊपर जल रहा है जिससे लोगों को घरों से बाहर निकलने में मुश्किल आ रही है। इसके अलावा तेज लू ने लोगों की परेशानियों को और ज्यादा बढ़ा दिया है। केरल में मॉनसून की एंट्री जल्द ही होने वाली है लेकिन देश के बाकी हिस्सों में मॉनसून के पहुंचने में समय लग सकता है। ऐसे में भीषण गर्मी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से बड़ी अपील की है। क्या बोले पीएम मोदी?
पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक X हैंडल से ट्वीट कर के कहा- “देश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही दैनिक जीवन में गर्मी से होने वाली कई कठिनाइयां भी बढ़ रही हैं। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि जितनी अधिक सावधानी बरत सकें, अवश्य बरतें। कृपया स्वयं को हाइड्रेटेड रखें, घर से बाहर निकलते समय पानी साथ रखें।

‘प्यासे को पानी दें, प्रियजनों का हालचाल पूछें’
पीएम मोदी ने कहा- “ऐसे मौसम में आपकी संवेदनशीलता भी बहुत बड़ा सहारा बन जाती है। यदि संभव हो, तो किसी प्यासे व्यक्ति को एक गिलास पानी अवश्य दें। मैं ऐसे लोगों की सराहना भी करूँगा जो अपने घरों के और दुकानों के बाहर मटके में जल रखते हैं ताकि कोई भी उनसे पानी पी सके।” PM मोदी ने आगे कहा- जब भी संभव हो, अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य प्रियजनों को फोन कर उनका हालचाल अवश्य पूछें। उन्हें पर्याप्त पानी पीने, दोपहर की तेज धूप में बाहर न निकलने और जितना हो सके, आराम करने की सलाह दें।”

‘करुणा के साथ एक-दूसरे का ध्यान रखें’
पीएम मोदी ने कहा- “इस प्रचंड गर्मी में हमें अपने आसपास के पशु-पक्षियों को भी नहीं भूलना चाहिए। अपने घर, बालकनी, छत, दुकान या ऑफिस के बाहर पानी से भरा एक छोटा-सा बर्तन रखना भी किसी प्यासे पक्षी के लिए जीवनदान बन सकता है। आइए, इन कठिन दिनों में पूरी संवेदनशीलता और करुणा के साथ एक-दूसरे का ध्यान रखें

भागलपुर में अतिक्रमण विवाद से परेशान परिवार ने लगाई न्याय की गुहार, प्रशासनिक आदेश के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई

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भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले के शाहकुंड अंचल क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक परिवार पिछले कई वर्षों से जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटवाने के लिए प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। पीड़ित परिवार का कहना है कि सिविल कोर्ट से डिग्री मिलने, लगान रसीद कटने और सरकारी अमीन द्वारा नापी किए जाने के बावजूद विपक्षी पक्ष अतिक्रमण हटाने को तैयार नहीं है और प्रशासन भी कार्रवाई करने में उदासीन बना हुआ है।

शिकायतकर्ता प्रकाश प्रसाद सिंह पिता बटेश्वर मंडल निवासी ग्राम बांधव, पोस्ट रतनगंज, थाना सजौर, अंचल शाहकुंड, जिला भागलपुर ने थाना प्रभारी, अंचलाधिकारी और जिलाधिकारी को दिए आवेदन में बताया कि उनकी जमीन हल्का हाजीपुर, मौजा सजौर, जमाबंदी संख्या 2302, खाता संख्या 326, खेसरा संख्या 1718 में स्थित है, जिसका रकबा एक डिसमिल है। पीड़ित का कहना है कि उन्हें सिविल कोर्ट से डिग्री प्राप्त है तथा वे नियमित रूप से मालगुजारी भी जमा करते आ रहे हैं।

पीड़ित परिवार के अनुसार अंचल अमीन द्वारा 16 दिसंबर 2024 को डीआर नंबर 83 के तहत जमीन की नापी भी की गई थी। अमीन नगमा खातून ने जांच में एक डिसमिल जमीन प्रकाश प्रसाद सिंह की बताई, लेकिन विपक्षी छतीश प्रसाद सिंह पिता राम प्रसाद सिंह अमीन रिपोर्ट को मानने से इंकार कर रहे हैं। इतना ही नहीं, अनुमंडल अधिकारी द्वारा पत्रांक 4313 के तहत कार्रवाई का आदेश जारी होने के बाद भी अंचल स्तर पर अब तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया।

प्रकाश प्रसाद सिंह का आरोप है कि उन्होंने कई बार अंचलाधिकारी, थाना, जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों को आवेदन दिया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। परिवार का कहना है कि लगातार न्याय नहीं मिलने से वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं और अब प्रशासन से अंतिम उम्मीद लगाए बैठे हैं।

मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि पूर्व में चले सिविल वाद संख्या 38/01 को वादी पक्ष द्वारा वापस लेने की अनुमति न्यायालय से प्राप्त हो चुकी है। अदालत के आदेश में स्पष्ट किया गया कि वादी ने अपना दावा वापस ले लिया है। इसके बावजूद जमीन विवाद और अतिक्रमण की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि अनुमंडल अधिकारी के आदेश का पालन कराते हुए तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए और उन्हें उनकी जमीन पर कब्जा दिलाया जाए ताकि लंबे समय से चल रही परेशानी का समाधान हो सके।

इबोला का खतरा: बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पहुंची युगांडा की महिला को आइसोलेशन में रखा गया, वायरस की जांच होगी

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दुनिया में इबोला का खतरा बढ़ता जा रहा है। अब बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पहुंची युगांडा की महिला को आइसोलेशन में रखा गया है। आइसोलेशन में इबोला की जांच की जाएगी।दुनियाभर के देशों में इबोला वायरस को लेकर डर बढ़ता जा रहा है। इस वायरस की मार सबसे ज्यादा अफ्रीकी देश कांगो में पड़ी हुई है। WHO ने इबोला को लेकर टेंशन में है और लोगों से सावधान रहने की अपील की है। भारत सरकार भी इस इबोला वायरस को लेकर अलर्ट मोड पर है। हालांकि, इस बीच खबर सामने आई है कि बेंगलुरु के एयरपोर्ट पर युगांडा की एक महिला को इबोला जांच के लिए आइसोलेशन में रखा गया है।

क्या है पूरा मामला?
सामने आई जानकारी के अनुसार, बीते 23 मई को केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंची 28 वर्षीय युगांडा की एक महिला को इबोला जांच के लिए आइसोलेशन में रखा गया है। इस वायरल बीमारी को लेकर वैश्विक अलर्ट के बीच इबोला की जांच के लिए उसके सैंपल लिए जाने के बाद, एहतियाती कदम के तौर पर इस महिला को इंदिरा नगर स्थित महामारी रोग अस्पताल में आइसोलेट कर दिया गया है।

महिला में क्या लक्षण दिखे?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अफ्रीका के कुछ हिस्सों में हाल ही में सामने आए इबोला के प्रकोप देखते हुए ​​को भारत सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय इबोला की स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहा है। जानकारी के अनुसार, युगांडा से हाल ही में यात्रा करके लौटे एक व्यक्ति को, जिसमें हल्के दर्द के लक्षण थे, बेंगलुरु के सरकारी महामारी रोग अस्पताल में निगरानी और आगे की जांच के लिए आइसोलेशन में रखा गया है। व्यक्ति हल्के दर्द के अलावा, व्यक्ति की स्थिति अभी तक स्वस्थ है। सैंपल को लेकर लैब टेस्ट के लिए राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजा गया है। टेस्ट के रिजल्ट की प्रतीक्षा की जा रही है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, संबंधित राज्य अधिकारियों के साथ मिलकर, कड़ी निगरानी रख रहा है और WHO के दिशानिर्देशों के अनुसार सभी जरूरी प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। हालांकि, अब तक भारत में इबोला का कोई कंफर्म मामला सामने नहीं आया है।

“शादी बराबरी की साझेदारी, सर्विस कॉन्ट्रैक्ट नहीं”, बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- पत्नियां ‘नौकरानी’ नहीं

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि पत्नी द्वारा घर का काम न कर पाना या उससे इंकार करना क्रूरता के दायरे में नहीं आता। कोर्ट ने पत्नी को हर महीने ₹20,000 भरण-पोषण भत्ता देने का भी निर्देश दिया।बॉम्बे हाई कोर्ट ने वैवाहिक अधिकारों और लैंगिक समानता को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पत्नी द्वारा घर का काम (जैसे- खाना बनाना और साफ-सफाई) न कर पाना या उससे इंकार करना क्रूरता नहीं है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि “शादी बराबरी की साझेदारी है, ना कि कोई सर्विस कॉन्ट्रैक्ट।”

न्यायमूर्ति भारती डांगरे और मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने पारिवारिक अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) पति को क्रूरता के आधार पर तलाक की मंजूरी दी गई थी। इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने पति को अपनी अलग रह रही पत्नी को हर महीने ₹20,000 भरण-पोषण भत्ता देने का भी निर्देश दिया है।

पत्नियों को ‘नौकरानी’ नहीं समझा जा सकता: HC
हाई कोर्ट ने पति की उस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि पत्नी द्वारा खाना न बनाना, सफाई न करना या उसके माता-पिता की बात न मानना मानसिक क्रूरता है। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा, “खाना बनाने या साफ-सफाई जैसे घरेलू काम करने में महज विफलता को अपने आप क्रूरता नहीं माना जा सकता। शादी दो लोगों के बीच बराबरी की साझेदारी है, कोई सर्विस कॉन्ट्रैक्ट नहीं है और पत्नियों को ‘नौकरानी’ नहीं समझा जा सकता।”

अदालत ने आगे कहा कि फैमिली कोर्ट का यह निष्कर्ष बिल्कुल भी उचित नहीं था कि पति अपनी पत्नी के खिलाफ क्रूरता के आरोपों को साबित करने में सफल रहा।

शुरू से विवादों में रही ये शादी
इस जोड़े की शादी 28 फरवरी 2002 को हुई थी, लेकिन शादी के कुछ ही दिनों के भीतर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गए। हालांकि, जून 2002 में मध्यस्थता के जरिए मामला कुछ समय के लिए सुलझ गया और दोनों ने नई शुरुआत करने का फैसला किया, लेकिन यह समझौता ज्यादा दिन नहीं चला। 7 जुलाई 2002 को पत्नी अपने ससुराल से अलग होकर माता-पिता के घर रहने चली गई।

इसके बाद, साल 2004 में पति ने मुंबई की फैमिली कोर्ट में क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की, जबकि पत्नी ने भरण-पोषण भत्ते के लिए गुहार लगाई। साल 2010 में फैमिली कोर्ट ने पति को तलाक दे दिया और पत्नी की गुजारा भत्ता याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के खिलाफ पत्नी ने हाई कोर्ट का रुख किया था।

दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप
पति का आरोप था कि उसकी पत्नी का व्यवहार बेहद रूखा था, वह घर का काम नहीं करती थी, सास-ससुर की बात नहीं मानती थी और उसे खाना बनाना भी नहीं आता था। पति ने यह भी दावा किया कि पत्नी उसे आत्महत्या की धमकी देती थी और तलाक की याचिका के बदले में पुलिस व अन्य अधिकारियों से शिकायत कर उसे मानसिक तनाव देती थी।

दूसरी ओर, पत्नी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए पति और उसके परिवार पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया। उसने कहा कि शादी में उसके माता-पिता द्वारा काफी खर्च किए जाने के बावजूद, ससुराल वाले लगातार महंगे गहनों और नकदी की मांग करते थे। उसे छोटी-छोटी बातों पर प्रताड़ित, अपमानित और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था, जिसके कारण मजबूरन उसे घर छोड़ना पड़ा और शिकायतें दर्ज करानी पड़ीं।

“क्षमता से तय होगा गुजारा भत्ता”
मामले की सुनवाई के दौरान पति ने पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता देने का विरोध किया था। उसका तर्क था कि पत्नी आर्थिक रूप से स्वतंत्र है और वह ब्राइडल साड़ी डेकोरेशन, पेंटिंग, ड्राइंग और आर्ट क्लासेस चलाकर अपनी आजीविका कमाती है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि पति की वित्तीय क्षमता का आकलन केवल उसके द्वारा टैक्स रिटर्न में घोषित आय के आधार पर नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि पति एक योग्य CA है, इसलिए उसके पास अच्छी-खासी कमाई करने की क्षमता है। अदालत को गुजारा भत्ता तय करते समय कुल परिस्थितियों, पेशेवर योग्यता और जीवन स्तर को ध्यान में रखना चाहिए। कोर्ट ने देश में बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के खर्चों का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि जो रकम साल 2005 या 2010 में अंतरिम चरण के दौरान उचित लगती थी, वह आज के आर्थिक परिदृश्य में एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती।

कासगंज की नाबालिग किशोरी लापता, परिजनों ने अपहरण और मानव तस्करी गिरोह का लगाया आरोप; कार्रवाई न होने से परिवार परेशान

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कासगंज। उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से एक नाबालिग किशोरी के कथित अपहरण का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित पिता राजपाल पुत्र कालीचरन निवासी मझोला थाना पटियाली ने मंडल आयुक्त अलीगढ़ और जिलाधिकारी कासगंज को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनकी 17 वर्षीय बेटी शिवानी को गांव की ही एक युवती बहला-फुसलाकर ले गई, जिसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल सका है। परिवार का आरोप है कि कई शिकायतों के बावजूद पुलिस ने अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की।

शिकायत के अनुसार घटना 09 मई 2026 की दोपहर करीब 12 बजे की है। आरोप है कि गांव की मीना पुत्री जुगेन्द्र ने शिवानी को घर से बुलाकर अपने घर ले गई, जहां पहले से मुकेश उर्फ रसिया पुत्र धर्मवीर निवासी विदरका थाना इगलास जिला अलीगढ़ समेत कई अन्य लोग मौजूद थे। पीड़ित पिता का आरोप है कि इसके बाद उनकी बेटी को मुकेश उर्फ रसिया और उसके साथियों के हवाले कर दिया गया, जो उसे अपने साथ कहीं ले गए।

परिवार का कहना है कि जब बेटी देर शाम तक घर नहीं लौटी तो उन्होंने खोजबीन शुरू की। मीना के घर जाकर पूछताछ करने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि उनकी बेटी कथित रूप से मुकेश उर्फ रसिया के कब्जे में है। शिकायत में विपिन, मुन्ना, अनिल बाबा, हेमंत और अर्जुन नामक लोगों का भी जिक्र किया गया है।

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि संबंधित लोग नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर ले जाने और उन्हें दूसरे स्थानों पर बेचने जैसे अवैध कार्यों में शामिल गिरोह का हिस्सा हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने 09 मई को ही थाना पटियाली में शिकायत दी थी, लेकिन अब तक न तो मुकदमा दर्ज हुआ और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।

राजपाल का कहना है कि वह लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। परिवार ने प्रशासन से तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर बेटी की बरामदगी और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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उजड़ खेड़ा के घने जंगलों में 45 डिग्री तापमान के बीच नागा बाबा की धूनी तपस्या, नशा मुक्त भारत का लिया संकल्प

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हरिद्वार से पधारे श्री बृजेश गिरी महाराज नागा बाबा, श्री महंत भूडेर मंडल एवं श्री शंभू पंचायती अटाला अखाड़ा द्वारा मानूवास गांव के उजड़ खेड़ा क्षेत्र के घने जंगलों में 41 दिवसीय धूनी तपस्या की जा रही है। यह तपस्या 13 मई से प्रारंभ होकर 22 जून तक चलेगी। तपस्या का मुख्य उद्देश्य देश और समाज को नशा मुक्त बनाने का संदेश देना है।

नागा बाबा श्री बृजेश गिरी महाराज का कहना है कि सनातन धर्म में नशा निषेध माना गया है, लेकिन आज समाज में नशे की लत सबसे बड़ी सामाजिक बुराई बन चुकी है। युवा पीढ़ी तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रही है, जिससे परिवार और समाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं। इसी चिंता को लेकर उन्होंने कठिन तपस्या का मार्ग चुना है ताकि लोगों में जागरूकता फैले और समाज नशे से दूर हो सके।

मानूवास गांव के स्थानीय लोगों का कहना है कि 13 मई से पहले इस क्षेत्र में दिन के समय भी आने से लोग डरते थे। घना जंगल और सुनसान इलाका होने के कारण यहां भय का माहौल रहता था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। आज यहां रात के समय भी लोगों की आवाजाही बढ़ गई है और जंगल में धार्मिक माहौल देखने को मिल रहा है। श्रद्धालुओं का लगातार पहुंचना जारी है।

45 डिग्री की भीषण गर्मी के बीच धूनी के पास बैठकर तपस्या करना लोगों के लिए आस्था और साधना का अद्भुत उदाहरण बन गया है। घने जंगलों के बीच नागा बाबा की यह तपस्या क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। दूर-दूर से लोग दर्शन करने पहुंच रहे हैं और नशा मुक्त समाज के इस संदेश का समर्थन कर रहे हैं।

श्री बृजेश गिरी महाराज (नागा बाबा) इनका मोबाइल नंबर है
9911922746

नारायण पर्वत से 21 दिनों की एकांत नारायण और हनुमत साधना पूरी करके वापस लौटे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, सामने आई तस्वीर

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, नारायण पर्वत से 21 दिनों की एकांत नारायण और हनुमत साधना पूरी करके लौटे हैं और उन्होंने अपने अनुयायियों से मुलाकात की है।भोपाल: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की वैकुण्ठ धाम में चल रही 21 दिवसीय कठोर साधना आज पूर्ण हो गई। इस दौरान उन्होंने नारायण पर्वत पर विशालकाय चट्टान के नीचे बनी एक छोटी सी गुफा में रहकर एकांत तपस्या की। साधना के पहले 11 दिन पूर्ण एकांत में कठोर तप करते हुए बिताए गए, जबकि शेष 10 दिनों तक प्राचीन खाकचोक हनुमना मंदिर में हनुमान साधना और आराधना जारी रही।
बताया जा रहा है कि इस दिव्य साधना के दौरान बागेश्वर सरकार ने नारायण पर्वत की परिक्रमा भी की और भगवान विष्णु की विशेष उपासना में लीन रहे। अब साधना पूर्ण होने के बाद उनकी भक्तों के बीच की दिव्य तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें श्रद्धालु आस्था और तपस्या का अद्भुत स्वरूप मान रहे हैं।

इस दौरान बद्रीनाथ में खाकचौक हनुमान मंदिर में अंतिम दिवस की साधना विराम तक बागेश्वर सरकार का इंतजार कर रहे देश-दुनिया से आए हुए भक्तों के बीच पहुंचे और बागेश्वर सरकार से श्रद्धालुओं ने उनकी साधना के 21 दिनों की बड़ी चर्चा की। इस दौरान बागेश्वर सरकार से मिलने के लिए अयोध्या हनुमान गढ़ी से राजूदास जी महाराज भी पहुंचे और बागेश्वर सरकार से भेंट की और उनकी 21 दिवसीय साधना के बारे में चर्चा की।

बाबा बागेश्वर ने क्या बताया?
बाबा बागेश्वर ने साधना के दौरान बताया कि इस 21 दिवसीय हनुमान साधना के दौरान भगवान नारायण पर्वत की परिक्रमा की। इस दौरान हमारे साथ बालकयोगेश्वर दास जी महाराज भी थे। बाबा बागेश्वर ने 21 दिवसीय साधना के दौरान नारायण पर्वत की दुर्गम पहाड़ियों में 13 घंटे पैदल यात्रा की।

इस दौरान वे 15 हजार फीट की ऊंचाई तक स्थित बर्फीले पहाड़ों पर पहुंचे। वहीं, श्री बद्रीनाथ धाम के महंत बालक योगेश्वरदास ने भी नारायण पर्वत की पवित्र परिक्रमा पूर्ण की। 21 दिवसीय साधना के दौरान बाबा बागेश्वर को अनुयायियों की बहुत याद आई। इस दौरान बाबा बागेश्वर ने एक फिल्मी गीत भी गुनगुनाया।