बिहार के वैशाली जिले से एक गंभीर पारिवारिक विवाद और दबंगई का मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने कुछ स्थानीय लोगों पर वर्षों से प्रताड़ित करने, मारपीट करने और पुराने मुकदमे को वापस लेने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पीड़िता मंजू देवी ने महिला थाना हाजीपुर में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि आरोपी लगातार धमकी देकर उनके परिवार को डराने की कोशिश कर रहे हैं और अब उनके घर के निर्माण कार्य को भी रुकवा दिया गया है।
जानकारी के अनुसार मंजू देवी, पत्नी अर्जुन महतो, वैशाली जिले के शाहपुर खूर्द क्षेत्र की रहने वाली हैं। पीड़िता का आरोप है कि पिछले करीब आठ से नौ वर्षों से कुछ लोगों के साथ उनका पारिवारिक विवाद चल रहा है और वे लोग उनकी संपत्ति पर कब्जा करने की नीयत से लगातार उन्हें और उनके परिवार को परेशान कर रहे हैं।
मंजू देवी के अनुसार वर्ष 2018 में आरोपियों ने उनके परिवार के साथ बुरी तरह मारपीट की थी। उस दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और मारपीट के दौरान उनके हाथ को दांत से काट लिया गया, जिससे उनकी एक उंगली गंभीर रूप से घायल हो गई। जब उनके पति अर्जुन महतो बीच-बचाव करने पहुंचे तो आरोपियों ने उनकी आंखों में मसाला झोंक दिया, जिससे उन्हें भी काफी चोट आई। इस घटना के बाद पीड़िता ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, जो अभी भी न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है।
पीड़िता का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद से आरोपी लगातार उन पर केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। उनका आरोप है कि आरोपी बार-बार धमकी देते हैं कि यदि मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो पूरे परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस कारण उनका परिवार लंबे समय से भय और मानसिक तनाव में जी रहा है।
मंजू देवी ने बताया कि 26 फरवरी 2026 को जब वे अपने घर के निर्माण के लिए भूमि पूजन कर नींव डालने का काम शुरू कर रहे थे, तभी आरोपी पक्ष के लोग वहां पहुंच गए और निर्माण कार्य रुकवा दिया। आरोप है कि उन्होंने गाली-गलौज करते हुए कहा कि पहले पुराना केस वापस लो, तभी घर बनाने दिया जाएगा। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने मारपीट शुरू कर दी।
इस मामले में मंजू देवी की बेटी पूजा कुमारी ने भी मीडिया से बातचीत में अपनी पीड़ा साझा की। करीब 20 वर्षीय पूजा कुमारी ने बताया कि उनके पिता अर्जुन महतो अलग स्थान पर रहते हैं और आरोपी लोग वहां जाकर भी उन्हें मारपीट कर परेशान करते हैं। उन्होंने कहा कि जब वे और उनका भाई अपनी मां के साथ बचाव के लिए जाते हैं तो आरोपियों द्वारा उनके साथ भी मारपीट की जाती है और लगातार धमकियां दी जाती हैं। पूजा कुमारी का कहना है कि पूरा परिवार लंबे समय से भय और तनाव में जी रहा है।
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि जब वे स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराने गए तो उनकी बात नहीं सुनी गई। इसके बाद उन्होंने महिला थाना हाजीपुर में आवेदन देकर आरोपी जोगिंदर महतो, राजेश महतो, उपेंद्र महतो और अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मंजू देवी और उनके परिवार ने प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि वे भयमुक्त होकर अपने घर का निर्माण कर सकें और सामान्य जीवन जी सकें।


लिखवाई और उसे थाने में जमा करा दिया। लेकिन उस तहरीर की कोई प्रति उन्हें नहीं दी गई। जब कुछ समय बाद उन्होंने तहरीर की छाया प्रति लेने की कोशिश की, तो उन्हें बताया गया कि मामला कोर्ट में भेज दिया गया है। प्रार्थी ने 26 नवंबर 2025 को थाना जाकर जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने 28 नवंबर 2025 को रजिस्ट्री के माध्यम से थाना अध्यक्ष को पत्र भी भेजा, लेकिन उसका भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इतना ही नहीं, 4 दिसंबर 2025 को दोबारा थाना जाने पर भी उन्हें तहरीर की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। अब वे यह भी नहीं जान पा रहे हैं कि उनकी शिकायत किस न्यायालय में भेजी गई है, जिससे वे वहां जाकर उसकी प्रति प्राप्त कर सकें। पीड़ित पिता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि उन्हें यह जानकारी उपलब्ध कराई जाए कि उनकी तहरीर किस कोर्ट में भेजी गई है, ताकि वे उसकी छाया प्रति प्राप्त कर सकें और आगे की कार्रवाई कर सकें। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां एक व्यक्ति अपने परिवार के चार सदस्यों को खोकर पहले ही गहरे सदमे में है, वहीं दूसरी ओर उसे न्यायिक प्रक्रिया की बुनियादी जानकारी और दस्तावेज पाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और पीड़ित को कब तक राहत मिलती है।
सहबीर ने बताया कि उसने 1 जनवरी 2026 को थाना चांदपुर में शिकायत दी, लेकिन वहां से उसे जलीलपुर चौकी भेज दिया गया। चौकी में प्रार्थना पत्र जमा होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
