Monday, July 13, 2026
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दिल्ली आर्मी कैंप से लापता हुआ 18 वर्षीय गूंगा-मंदबुद्धि युवक, 20 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं

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बल्लभगढ़ का परिवार सदमे में, मां मिली वृद्धाश्रम में लेकिन बेटा अब भी गायब

बल्लभगढ़ (फरीदाबाद)।
हरियाणा के फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां इलाज के लिए गई मां के साथ गया 18 वर्षीय गूंगा और मंदबुद्धि युवक रहस्यमय ढंग से लापता हो गया। पीड़ित पिता जगतार सिंह, निवासी सेक्टर-8, थाना बल्लभगढ़, अपने बेटे जितेंद्र की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी हाथ नहीं लगी है।

जानकारी के अनुसार जितेंद्र (18 वर्ष) परिवार का सबसे छोटा बेटा है। वह जन्म से गूंगा और मंदबुद्धि है तथा उसका मेडिकल रिकॉर्ड भी मौजूद है। 10 नवंबर को दोपहर करीब 12 से 1 बजे के बीच पिता जगतार सिंह बेटा जितेंद्र उसकी मां सरस्वती
के इलाज के लिए दिल्ली के आर्मी कैंप गए थे बताया जाता है की मां सरस्वती बी होता और लीवर में जैसे बीमारी से ग्रसित है मां सरस्वती भी मानसिक रूप से अस्वस्थ बताई जा रही हैं।
इसी दौरान मां बच्चे को लेकर अचानक लापता हो गई।

लगातार खोजबीन के बाद 11 दिन बाद सरस्वती एक वृद्धाश्रम में मिली, लेकिन बेटे जितेंद्र का अब तक कोई पता नहीं चल सका। यह जानकारी मिलते ही परिवार की चिंता और बढ़ गई, क्योंकि जितेंद्र न बोल सकता है, न अपनी पहचान बता सकता है और मानसिक रूप से भी कमजोर है।

पिता जगतार सिंह का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में थाना बल्लभगढ़ में आवेदन भी दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई या सुराग नहीं मिला है। परिवार का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता के चलते कीमती समय निकलता जा रहा है, जिससे बेटे की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका बनी हुई है।

परिवार के मुताबिक जितेंद्र घर का सबसे दुलारा और मासूम बच्चा है। उसकी विशेष स्थिति के कारण वह किसी भी खतरे में आसानी से फंस सकता है। पिता की आंखों में आंसू और आवाज में बेबसी साफ झलकती है।
उनका कहना है कि हर गुजरते दिन के साथ डर बढ़ता जा रहा है कि कहीं उनके बेटे के साथ कोई अनहोनी न हो जाए।

अब पीड़ित परिवार ने मीडिया के माध्यम से आम जनता से भी मदद की अपील की है। यदि किसी को भी जितेंद्र के बारे में कोई जानकारी मिले, तो तुरंत 9319452539 या 8595619212 नंबर पर संपर्क करें। परिवार को उम्मीद है कि जनसहयोग से उनका बेटा सुरक्षित वापस घर लौट सकेगा।

 

महोबा से सनसनीखेज मामला | विकलांग दंपती के आवास पर कब्जे का आरोप, दीवार विवाद में मारपीट—थाने से भी मिली फटकार

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महोबा | विशेष रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के बरायन थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ऐन्चना से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां सरकारी आवास योजना के तहत घर बना रहे एक विकलांग व्यक्ति और उसकी पत्नी को पड़ोसी द्वारा प्रताड़ित किए जाने का आरोप है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर अवैध रूप से दीवार खड़ी कर दी गई और विरोध करने पर मारपीट की गई, जबकि पुलिस से शिकायत करने पर उल्टा उन्हें ही डांट-फटकार कर भगा दिया गया।

पीड़िता चिन्जी ने बताया कि उनके पति रामा शारीरिक रूप से विकलांग हैं। परिवार का नाम प्रधानमंत्री/राज्य आवास योजना में स्वीकृत हुआ था, जिसके बाद वे अपने पुश्तैनी घर की जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कर रहे थे। यह वही जमीन है, जहां उनका परिवार पिछले 25 से 30 वर्षों से निवास करता आ रहा है।

शिकायत के अनुसार, पड़ोसी राकेश शर्मा, पिता तुलसीदास, ने पहले ही अपने घर की दीवार पीड़ितों की जमीन में एक से दो फुट अंदर तक बना ली थी। जब काशी कुमार और उनकी पत्नी ने घर का निर्माण शुरू किया और दीवार को सीधा करने की बात कही, तो आरोपी ने साफ इनकार कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि विपक्षी ने कहा कि “अब दीवार डाल दी गई है, अब कुछ नहीं हो सकता, हम दीवार सीधी नहीं करेंगे।”

पीड़िता का आरोप है कि जब इस अवैध निर्माण का विरोध किया गया तो आरोपी राकेश शर्मा ने झगड़ा किया और मारपीट पर उतर आया। इससे पीड़ित परिवार भय और तनाव में आ गया, खासकर तब जब घर का मुखिया विकलांग हो और परिवार पूरी तरह उसी सरकारी योजना के सहारे अपने सिर पर छत बनाने की उम्मीद लगाए बैठा हो।

न्याय की आस में काशी कुमार जब थाने पहुंचे और लिखित शिकायत देकर एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, तो उन्हें वहां से न्याय मिलने के बजाय अपमान झेलना पड़ा। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें ही डांट-फटकार कर भगा दिया और कोई कार्रवाई नहीं की गई।

पीड़ित परिवार का कहना है कि वे गरीब और असहाय हैं। विकलांग होने के कारण काशी कुमार पहले ही जीवन की कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं और अब पड़ोसी के कब्जे और प्रशासनिक अनदेखी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दंपती ने प्रशासन से मांग की है कि जमीन की निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए, अवैध दीवार हटाई जाए और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें अपने ही घर में सम्मान और सुरक्षा के साथ रहने का अधिकार मिल सके।

 

प्रेम, भरोसा और धोखे की दर्दनाक कहानी: शादी का झांसा, गर्भ ठहराया, फिर जबरन दवा देकर कराया गर्भपात — पीड़िता का आरोप

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ईखबर | उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर से सामने आई एक युवती की आपबीती ने रिश्तों और भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 19 वर्षीय पीड़िता करिश्मा ने गांव में आने-जाने वाले एक युवक पर प्रेमजाल में फंसाने, मंदिर में शादी करने, गर्भवती करने और बाद में जबरन दवा देकर गर्भपात कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि अब आरोपी युवक ने उससे दूरी बना ली है और किसी अन्य लड़की से संपर्क में है, जिससे उसकी जिंदगी पूरी तरह बर्बाद हो गई है।

पीड़िता के अनुसार, आरोपी युवक विमल (उम्र करीब 20 वर्ष) पहले उसके भाई का दोस्त था और गांव आता-जाता रहता था। इसी दौरान उसने भाई से पीड़िता का मोबाइल नंबर लिया और बातचीत शुरू की। धीरे-धीरे प्रेम संबंध बने और युवक ने शादी का वादा किया। पीड़िता का दावा है कि मंदिर में दोनों की शादी भी हुई, लेकिन इस बारे में किसी को नहीं बताया गया।

करिश्मा का आरोप है कि जब वह एक माह की गर्भवती हुई तो आरोपी ने उसे दवा देकर गर्भपात करा दिया। इसके बाद उसे पता चला कि युवक किसी दूसरी लड़की के साथ होटल में ठहरा था और उसके मोबाइल में आपत्तिजनक तस्वीरें भी थीं। विरोध करने पर युवक ने बात-चीत बंद कर दी और नंबर भी बंद कर लिया।

पीड़िता का कहना है कि वह अपने परिवार में बड़ी जिम्मेदारी निभाने वाली बेटी है। एक बहन की शादी हो चुकी है और एक छोटी बहन अभी पढ़ाई कर रही है। उसने रोते हुए कहा कि अब वह मानसिक रूप से टूट चुकी है और उसे न्याय की सख्त जरूरत है।

पीड़िता ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उसे न्याय दिलाया जाए। मामला प्रेम-प्रसंग, धोखाधड़ी और जबरन गर्भपात जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा होने के कारण अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

स्थानीय संवाददाता ई खबर मीडिया की रिपोर्ट

 

बेंगलुरु से तीन मासूमों संग लापता हुई पत्नी, लेबर पति की गुहार—चचेरे भाई पर शक, पुलिस-प्रशासन से मदद की अपील

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ईखबर | बिहार/बेंगलुरु
बिहार के अररिया जिले के रहने वाले एक मजदूर की दुनिया उस वक्त उजड़ गई, जब उसकी पत्नी तीन मासूम बच्चों को लेकर अचानक रहस्यमय ढंग से गायब हो गई। पीड़ित पति गौतम मंडल (30 वर्ष), पिता अनिल मंडल, इन दिनों इंसाफ और अपने परिवार की वापसी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

गौतम मंडल ने बताया कि 21 नवंबर 2025 को दोपहर करीब 1 बजे उनकी पत्नी सुधा देवी (28 वर्ष) उनके तीन बच्चों—आर्यन (6 वर्ष), आलिया कुमारी (5 वर्ष) और सूर्यांश (3 वर्ष)—को लेकर बेंगलुरु के जिगली इलाके से अचानक लापता हो गई। उस समय गौतम ड्यूटी पर थे और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उनकी मासिक आमदनी महज 10 हजार रुपये के आसपास है।
पीड़ित पति के अनुसार, उनकी शादी करीब 13 साल पहले हुई थी। दो साल पहले रोज़गार की तलाश में वे पत्नी और बच्चों के साथ बेंगलुरु शिफ्ट हुए थे। वहीं पास में उनका जीजा भी रहता था। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन हाल ही में पत्नी ने एक निजी कंपनी में काम ज्वाइन किया। इसी दौरान परिवार के ही चचेरे भाई गोलू कुमार (पत्नी के चाचा का बेटा) से उसकी नजदीकियां बढ़ने लगीं।

गौतम मंडल का आरोप है कि पत्नी के अचानक गायब होने के पीछे गोलू कुमार की भूमिका हो सकती है। उन्हें शक है कि वही पत्नी को बहला-फुसलाकर बच्चों समेत अपने साथ ले गया है। सबसे बड़ी चिंता तीन मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर है, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।

गौतम कहते हैं, “मैं सिर्फ मजदूर हूं, लेकिन मेरा परिवार ही मेरी सारी दुनिया है। मैं चाहता हूं कि मेरी पत्नी और बच्चे सुरक्षित लौट आएं। अगर कोई साजिश है तो उसकी सच्चाई सामने आए और दोषी पर कार्रवाई हो।”
पीड़ित पति ने मीडिया, पुलिस और प्रशासन से अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए। उनका कहना है कि सच चाहे जो भी हो, वह सामने आना चाहिए—दूध का दूध और पानी का पानी हो।

फिलहाल पत्नी और बच्चों की कोई खबर नहीं है, जिससे परिवार गहरे सदमे और भय में जी रहा है।

 

“सड़क–नाली को लेकर पटवा जी कॉलोनी में उबाल: 60 लोग पहुंचे नगर पालिका, आश्वासन में उलझा विकास”

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सड़क–नाली के लिए जंग: पटवा जी कॉलोनी के 60 लोग पहुंचे नगर पालिका, आश्वासन पर अटकी विकास की रफ्तार
नगर क्षेत्र की पटवा जी कॉलोनी और दुर्गा नगर में सड़क–नाली निर्माण को लेकर गहराता विवाद अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में वे नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं, जबकि नगर पालिका और जनप्रतिनिधियों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही है।
बताया गया कि पटवा जी कॉलोनी के करीब 60 लोग एकजुट होकर नगर पालिका पहुंचे थे। वहां अधिकारियों द्वारा नियमों का हवाला देते हुए कहा गया कि पहले कॉलोनीवासी और संबंधित लोग अपने स्तर से सड़क और नाली का प्रारंभिक निर्माण कराएं, उसके बाद नगर पालिका उसे अपने अधिकार में लेकर स्थायी विकास करेगी। इस जवाब से लोग और अधिक असमंजस में पड़ गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके वार्ड की सबसे बड़ी समस्या सड़क है। बारिश निकल जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। जगह-जगह कीचड़, गड्ढे और पानी भराव से आवागमन मुश्किल हो गया है। कॉलोनीवासियों ने कई बार लिखित में समस्या बताने और सामूहिक बैठक करने की बात कही, लेकिन ठोस नतीजा नहीं निकल सका।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब दुर्गा नगर में एक सड़क के निर्माण को लेकर सवाल उठे। लोगों का कहना है कि जब वहां सड़क बन सकती है तो पटवा जी कॉलोनी में क्यों नहीं। इसे लेकर नगर पालिका की कार्यप्रणाली और दलालों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि टैक्स देने के बावजूद सड़क, नाली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में लोगों में यह चर्चा आम हो गई है कि अगर नगर पालिका विकास नहीं कर रही तो फिर टैक्स क्यों दिया जाए।
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि फिलहाल बारिश नहीं है, इस समय मुरुम या केरचा डालना सस्ता और आसान है। कॉलोनीवासी अपने स्तर से 5–6 गाड़ियां मंगवा रहे हैं और नगर पालिका या जनप्रतिनिधियों से केवल 2–3 गाड़ियों के सहयोग की मांग की जा रही है, ताकि रास्ता चलने लायक बन सके। लेकिन इस मांग पर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा।
वहीं वार्ड प्रतिनिधि और पार्षद पक्ष का कहना है कि वे लगातार नगर पालिका में सड़क–नाली के मुद्दे को उठा रहे हैं। विकास को लेकर यह कहना कि कोई सोच नहीं रहा, उचित नहीं है। उनका दावा है कि यदि लोगों को भरोसा नहीं है तो वे नगर पालिका के सीएमओ या इंजीनियर से जानकारी ले सकते हैं। हालांकि यह भी स्वीकार किया गया कि कई निर्णय उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।
फिलहाल स्थिति यह है कि कॉलोनीवासी उम्मीद, आश्वासन और इंतजार के बीच फंसे हुए हैं। सड़क का शिलान्यास कब होगा, विकास की गाड़ी कब चलेगी और दलालों की भूमिका पर कार्रवाई कब होगी—ये सवाल अब नगर में आम चर्चा का विषय बन चुके हैं।

भगवान प्रसाद यादव अचानक अपने आध्यात्मिक जीवन को लेकर लोगों के बीच आकर्षण और जिज्ञासा का केंद्र बन गए हैं।

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नगर पंचायत रानीगंज के वार्ड नंबर 14 स्थित नेभू टोला इन दिनों एक अनोखी वजह से चर्चा में है। यहां के निवासी भगवान प्रसाद यादव अचानक अपने आध्यात्मिक जीवन को लेकर लोगों के बीच आकर्षण और जिज्ञासा का केंद्र बन गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार भगवान प्रसाद यादव ने सांसारिक जीवन से दूरी बनाकर पूरी तरह ईश्वर भक्ति और साधना का मार्ग अपना लिया है, जिससे पूरे इलाके में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

भगवान प्रसाद यादव का कहना है कि उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त हुई है और भगवान की शक्तियों तथा भक्ति का गहरा ज्ञान उन्हें अनुभव के माध्यम से मिला है। इसी अनुभूति के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया कि वे अपना जीवन पूरी तरह भगवान के चरणों में समर्पित करेंगे। उनका मानना है कि सांसारिक मोह माया से दूर रहकर ही आत्मिक शांति और सच्चा संतोष प्राप्त किया जा सकता है।

भगवान प्रसाद यादव एक सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता का नाम दिनेश प्रसाद यादव और माता का नाम रंभा देवी है। वे विवाहित हैं और उनके तीन बच्चे भी हैं। परिवार के लोगों के अनुसार पहले वे सामान्य गृहस्थ जीवन जी रहे थे, लेकिन बीते कुछ समय से उनके स्वभाव और जीवनशैली में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि भगवान प्रसाद यादव अब अधिकतर समय पूजा पाठ, ध्यान और साधना में बिताते हैं। वे सांसारिक गतिविधियों से लगभग पूरी तरह दूर हो चुके हैं। सुबह से लेकर देर रात तक वे ईश्वर चिंतन में लीन रहते हैं और सादा जीवन अपनाए हुए हैं। उनके इस बदलाव को देखकर कुछ लोग उन्हें ईश्वर की कृपा का पात्र मान रहे हैं तो कुछ लोग इसे गहरी आध्यात्मिक अनुभूति का परिणाम बता रहे हैं।

नेभू टोला और आसपास के क्षेत्रों में लोग उन्हें देखने और उनसे बातचीत करने के लिए पहुंच रहे हैं। कई लोग उनसे आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी ले रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर पंचायत रानीगंज में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जहां एक सामान्य गृहस्थ का अचानक आध्यात्मिक जीवन की ओर मुड़ जाना लोगों के लिए आश्चर्य और आकर्षण दोनों का विषय बना हुआ है।

50 साल पुरानी परचून की दुकान पर कब्जे की कोशिश, रात 2 बजे छत तोड़ने पहुंचे दबंग

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दुकानदार पर जानलेवा हमले की साजिश, हथौड़ा–गैंती लेकर पहुंचे 15–20 लोग, परिवार दहशत में
खुर्जा नगर (बुलंदशहर)।
कोतवाली खुर्जा नगर क्षेत्र से दबंगई और अराजकता का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां करीब 50 वर्षों से चल रही एक परचून की दुकान को जबरन हड़पने के लिए देर रात हमला किया गया। आरोप है कि 15 से 20 की संख्या में आए दो पहिए वाहन से आते हैं थानेदार हथियारों के साथ और बंदूक लेकर भी असामाजिक तत्वों ने हथौड़ा, गैंती और सबल से दुकान की छत तोड़ने का प्रयास किया और दुकानदार को जान से मारने की धमकी दी।
पीड़ित दुकानदार गुड्डन शर्मा पुत्र स्व. खीच्चूमल शर्मा, निवासी मोहल्ला सराय शेख आलम, थाना खुर्जा नगर, वर्षों से इसी दुकान के सहारे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। गुड्डन शर्मा ने बताया कि यह दुकान उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है और वह लगातार आवाद किरायेदार हैं। दुकान को लेकर मामला सिविल कोर्ट में विचाराधीन है, जिसमें 16 जनवरी 2026 की तारीख नियत है, इसके बावजूद दबंग पक्ष लगातार अवैध दबाव बना रहा है।
पीड़ित के अनुसार 19 दिसंबर 2025 की रात करीब 2 बजे कुछ लोग दोपहिया वाहनों से दुकान पर पहुंचे और छत तोड़ने लगे। शोर सुनकर जब गुड्डन शर्मा जागे और विरोध किया तो हमलावरों ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। बताया जा रहा है कि इससे पहले 13 दिसंबर 2025 को भी इसी तरह की घटना हो चुकी है, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
गुड्डन शर्मा का आरोप है कि विवादित दुकान को लेकर राजेश प्रजापति और सतीश नाम के लोग यह लोग थाने में पैसे देकर मामले को दबा देते हैं और इन्हीं लोगों ने गुंडे लगा के रखी है जो की मुसलमान जाति के बताए जा रहे हैं और लगातार धमका रहे हैं। इन लोगों द्वारा पहले भी दुकान खाली न करने पर जान से मारने की धमकी दी जा चुकी है। घटना की सूचना पर 112 पुलिस मौके पर पहुंची और हमलावरों द्वारा छोड़े गए औजार अपने कब्जे में लिए, लेकिन पीड़ित का कहना है कि अब तक प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है।
पीड़ित दुकानदार का कहना है कि उनकी यही दुकान उनके जीवन का एकमात्र सहारा है। उनके चार बच्चे हैं और परिवार पूरी तरह इसी पर निर्भर है। लगातार धमकियों और हमलों के चलते पूरा परिवार भय और दहशत में जीने को मजबूर है। गुड्डन शर्मा ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए तो कोई बड़ी और जानलेवा घटना घट सकती है।
पीड़ित ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि एक गरीब दुकानदार और उसके परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

 

धान लदे ट्रैक्टर से लौटते परिवार पर हमला, महिला का सिर फोड़ा; इलाज के बाद थाने पहुंचे बेटे को ही पुलिस ने बैठाया, उल्टा दर्ज हुआ केस

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जहानाबाद
जिले के उत्तर थाना क्षेत्र में रास्ते और पुराने विवाद को लेकर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। खेत से धान लेकर घर लौट रहे एक परिवार पर पड़ोसियों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस घटना में महिला के सिर पर गंभीर चोट आई, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब इलाज के बाद उनका बेटा थाने एफआईआर की कॉपी लेने पहुंचा, तो पुलिस ने पीड़ित की बजाय उसी को थाने में बैठा लिया और उसके खिलाफ ही मामला दर्ज कर दिया।
पीड़ित मिंटू यादव पिता रामजी प्रसाद, जिला जहानाबाद के उत्तर थाना क्षेत्र के निवासी हैं। वर्तमान में वे रोज़गार के सिलसिले में लुधियाना में रहते हैं। मिंटू यादव के अनुसार 16 दिसंबर की शाम उनकी पत्नी रीता देवी और बेटा विकास कुमार ट्रैक्टर-ट्रॉली से खेत से धान लेकर अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में पड़ोसी सुनील और मुकेश का घर पड़ता है। आरोप है कि दोनों ने अपने घर के सामने करीब दो फीट तक अतिक्रमण कर रखा है।
जब ट्रैक्टर-ट्रॉली उनके घर के सामने से गुजर रही थी, उसी दौरान ट्रॉली का हिस्सा हल्के से उनके अतिक्रमित हिस्से की ओर लग गया। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। विकास कुमार का कहना है कि इस दौरान किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ था और न ही जानबूझकर कोई टक्कर मारी गई थी। उन्होंने बताया कि उनके घर के सामने पहले से ही गाय-भैंस बांधने की जगह बनाई गई है, जिसे लेकर भी पहले विवाद होते रहे हैं।
परिजनों का आरोप है कि मामूली बात को लेकर सुनील और मुकेश ने गाली-गलौज शुरू कर दी, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इसी दौरान मुकेश ने डंडे से हमला कर दिया। डंडे का जोरदार वार रीता देवी के सिर पर लगा, जिससे वह मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ीं। आसपास के लोगों ने बीच-बचाव किया, जिसके बाद घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
रीता देवी की हालत गंभीर बताई जा रही है। उनका इलाज कई दिनों तक अस्पताल में चला। पीड़ित पक्ष का कहना है कि हमलावरों से उनकी पुरानी रंजिश भी चली आ रही है और इसी कारण जानबूझकर हमला किया गया।
मिंटू यादव ने बताया कि घटना के समय वे लुधियाना में थे। पत्नी के घायल होने की सूचना मिलने पर वे बेहद परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब उनका बेटा विकास कुमार थाने एफआईआर की कॉपी लेने पहुंचा, तो पुलिस ने उसे ही थाने में बैठा लिया। विकास को देर तक थाने में रोके रखा गया और बाद में उसके खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया गया।
परिवार का आरोप है कि पुलिस ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय आरोपियों का पक्ष लिया। मिंटू यादव और पिंटू कुमार का कहना है कि पत्नी गंभीर हालत में थी, घर के लोग बाहर थे, इसके बावजूद पुलिस ने उल्टा पीड़ित परिवार को ही आरोपी बना दिया। उनका दावा है कि उनके बेटे को झूठे मामले में फंसाया गया है।
इस घटना के बाद इलाके में तनाव और चर्चा का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

गाजियाबाद में नवविवाहिता का गंभीर आरोप: बच्चे की मौत के बाद ससुरालियों की मारपीट, पति दो दिन से लापता

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लोनी | जनपद गाजियाबाद
थाना जामिका सिटी क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। 23 वर्षीय नवविवाहिता जॉनी ने अपने ससुराल पक्ष पर बेटे की मौत का दोष मढ़कर लगातार मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां देने का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि उसका पति संदीप बीते दो दिनों से लापता है।
पीड़िता के अनुसार, शादी के करीब दो साल बाद बड़े ऑपरेशन से जन्मे नवजात की मौत हो गई। इसके बाद ससुरालियों ने उसी घटना को लेकर उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। विरोध करने पर उसे और उसके पति को घर से निकाल दिया गया, जिसके बाद वे किराए के मकान में रहने लगे। आरोप है कि ससुराल पक्ष चोरी-छिपे संदीप को बुलाकर उसके खिलाफ भड़काता रहा।
जॉनी का कहना है कि विवाद बढ़ने पर ससुरालियों ने झूठा माहौल बनाकर यह प्रचार किया कि उसके भाई ने मारपीट की है, जिससे उसकी शिकायत दब गई। अब संदीप का मोबाइल बंद है या कॉल रिसीव नहीं हो रही। पीड़िता को आशंका है कि संदीप ससुराल में ही है और जानबूझकर उससे संपर्क नहीं करने दिया जा रहा।
पीड़िता ने स्पष्ट कहा है कि यदि उसके साथ कोई अनहोनी होती है तो पति और ससुराल पक्ष जिम्मेदार होंगे। उसने बताया कि पिता ने मदद के लिए कपड़ों की छोटी दुकान खुलवाई है, जिससे वह किराया और खर्च चला रही है। आरोप है कि ससुराल गई तो ननद, जेठानी और अन्य परिजनों ने डंडों से हमला करने की कोशिश की, पड़ोसियों के घर में छिपकर जान बचानी पड़ी।
पीड़िता ने थाने में प्रार्थना पत्र देकर सुरक्षा और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि शिकायत दर्ज कर जांच की जा रही है, तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

जॉनी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मुझे जान से मारने की धमकियां दी जा रही है और मुझे घर से बेदखल कर दिया गया है और अब पति और ससुराल वाले मुझे अपने घर नहीं आने दे रहे और मैं किराए के मकान में रह रही हूं वहीं से अपना पालन पोषण कर रही हूं। जॉनी ने मीडिया को यह भी जानकारी दी की ससुराल पक्ष के लोगों ने मेरे पति को ही कहीं छुपा रखा है और वह 2 दिन से कहीं लापता है नहीं आए और उनका फोन भी नहीं लग रहा है ओ मेरी पुलिस प्रशासन और सरकार से गुहार है कि मेरे पति को ढूंढा जाए और मुझे मिलवाया जाए और ससुराल पक्ष के लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

अमेठी जिले के मुंशीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत पहाड़पुर गांव से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है,

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अमेठी (उत्तर प्रदेश)।
अमेठी जिले के मुंशीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत पहाड़पुर गांव से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह घर बनाने वाले एक गरीब परिवार का आशियाना बिना किसी पूर्व सूचना के तोड़ दिया गया। पीड़ित पवन कुमार कश्यप (40 वर्ष) का आरोप है कि पूर्वजों से चली आ रही जमीन पर बने उनके मकान को दबंगों ने पुलिस के नाम पर ढहा दिया, जबकि उनके पास न तो कोई नोटिस था और न ही कोई लिखित आदेश।

पवन कुमार कश्यप ने बताया कि उनके परिवार में दो बेटियां और दो बेटे हैं। बेटियां शादी योग्य हैं लेकिन घर टूटने के बाद परिवार की हालत बद से बदतर हो गई है। पवन का कहना है कि जिस जमीन पर उनका घर था, वह वर्षों से उनके कब्जे में थी, लेकिन बाद में चंद्रवंशी समुदाय के लोगों के आने से उसे आबादी की जमीन बताया जाने लगा।

पीड़ित के अनुसार उन्होंने कड़ी मेहनत और मजदूरी से पैसे जोड़कर पक्का मकान बनवाना शुरू किया था। करीब 8 फुट ऊंची दीवार खड़ी हो चुकी थी और छत डालने की तैयारी थी। घर बनाने के लिए पत्नी बबीता ने अपने कान के झुमके तक बेच दिए थे और रिश्तेदारों से मदद लेकर किसी तरह निर्माण कराया जा रहा था। इसी बीच नेकपाल गोविंद तिवारी नामक व्यक्ति और पुलिस अन्य लोगों के साथ मौके पर पहुंचा और बिना कोई कागजात दिखाए पूरी दीवार तोड़ दी।

पवन का आरोप है कि मौके पर पुलिस पहुंची, लेकिन किसी प्रकार का नोटिस या आदेश नहीं दिखाया गया। उनका कहना है कि अगर घर तोड़ना ही था तो प्रशासन पहले उन्हें कहीं रहने के लिए वैकल्पिक जगह देता। अब चार बच्चों और पत्नी के साथ वह खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

परिवार का कहना है कि उनके पास न तो खेती की जमीन है और न ही कोई स्थायी रोजगार। मजदूरी ही जीवन का एकमात्र सहारा है। घर टूटने के बाद बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी और परिवार की सुरक्षा सभी सवालों के घेरे में आ गई है।

अब पीड़ित परिवार ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन और सरकार से गुहार लगाई है कि उन्हें न्याय दिलाया जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और रहने के लिए कोई सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए। गांव में इस घटना के बाद लोगों में भी रोष और डर का माहौल है।