Monday, July 13, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
Home Blog Page 193

बांग्लादेश हिंसा पर बहुत बड़ा खुलासा, मुनीर ने ISI का ‘ढाका सेल’ बनाया, कौन कर रहा नेतृत्व? जानें

0

जानकारी के मुताबिक मुनीर का ये ढाका सेल कहीं और से नहीं बल्कि ढाका में मौजूद पाकिस्तानी हाई कमीशन से काम कर रहा है। असीम मुनीर ने चोरी छुपे बांग्लादेश में ISI का ढाका सेल एक्टिव कर दिया है।
ढाका: बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच बड़ी खबर ये है कि इन सबके पीछे पाकिस्तान की आर्मी का हाथ है। पाकिस्तान की सेना के प्रमुख असीम मुनीर ने चोरी छुपे बांग्लादेश में ISI का ढाका सेल एक्टिव कर दिया है। बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद युनूस के ऊपर भी तख्तापलट का खतरा मंडरा रहा है।
कब किया गया ढाका सेल का गठन?
जानकारी के मुताबिक मुनीर का ये ढाका सेल कहीं और से नहीं बल्कि ढाका में मौजूद पाकिस्तानी हाई कमीशन से काम कर रहा है। मुनीर के इशारे पर ISI ने पिछले साल नवंबर में ढाका सेल का गठन किया था। बांग्लादेश में हो रही हिंसा के पीछे ढाका सेल का बड़ा रोल सामने आया है। बांग्लादेश में एक्टिव ISI के ढाका सेल का खुलासा बांग्लादेशी पत्रकार सलाउद्दीन शोएब ने किया है। बांग्लादेशी पत्रकार के मुताबिक ढाका सेल की कमान एक पाकिस्तानी ब्रिगेडियर संभाल रहा है। ISI के स्पेशल विंग में ब्रिगेडियर के अलावा मेजर समेत कई पाकिस्तानी अफसर काम कर रहे हैं।

जमात-ए-इस्लामी को सत्ता दिलाना मकसद
खबरों के मुताबिक पाकिस्तान की सरपरस्ती में चल रहे ढाका सेल का मुख्य मकसद बांग्लादेश की सत्ता पर कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी को काबिज़ कराना है। यही वजह है कि ISI का ढाका सेल चुनाव होने तक बांग्लादेश की सत्ता पर यूनुस को बरकार रखना चाहता है। यूनुस के ज़रिए ऐसा माहौल बनाना चाहता है कि बांग्लादेश के चुनाव में जमात भारी बहुमत से जीत जाए। बांग्लादेशी पत्रकार के मुताबिक हाल ही में वहां के मीडिया हाउस पर हुए हमले के पीछे ढाका सेल का बहुत बड़ा रोल है। ढाका सेल अपने मकसद को पूरा करने के लिए हर महीने 20 करोड़ टका बांग्लादेशी करेंसी खर्च कर रहा है। ये पैसा उसे ड्रग्स की तस्करी और भारत के नकली नोट के धंधे से मिलता है।
छात्र विद्रोह के नेता हादी की हत्या के बाद भड़की हिंसा
दरअसल, बांग्लादेश में 12 दिसंबर को 2024 के छात्र विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी (इंकलाब मंच के प्रवक्ता) को अज्ञात अपराधियों ने गोली मार दी थी। सिंगापुर में इलाज के दौरान हादी की मौत होने से हिंसा भड़क उठी। मीडिया हाउसों (प्रथम आलो, डेली स्टार) में आगजनी की गई। वहीं ईशनिंदा के आरोप में हिंदू समुदाय के एक व्यक्ति की पीटकर हत्या कर दी गई और उसके शव को आग लगा दी गई। मृत व्यक्ति की पहचान दीपू चंद्र दास (25) के रूप में हुई, जो मैमनसिंह शहर में एक कारखाने में काम करते थे। दास को पहले कारखाने के बाहर भीड़ ने ईशनिंदा के आरोपों को लेकर पीटा और फिर एक पेड़ से लटका दिया। पीटने के बाद उसके शरीर में आग लगा दी गई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा, “हम हिंसा, धमकी, आगजनी और संपत्ति को नष्ट करने के सभी कृत्यों की कड़ी निंदा करते हैं।” सरकार ने कहा, “इस नाजुक घड़ी में, हम प्रत्येक नागरिक से हिंसा, उकसावे और नफरत को खारिज करके हादी को याद करने का आह्वान करते हैं।” ढाका में नकाबपोश बंदूकधारियों के हमले के छह दिन बाद जुलाई विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के संदर्भ में यह बात कही गई। पिछले साल अगस्त में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से अपदस्थ होने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कई घटनाओं के कारण हिंदू आबादी प्रभावित हुई है।

दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन, हिंदू युवक की हत्या का विरोध, भीड़ ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की

0

ढाका में हिंदू युवक की हत्या के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे और नारेबाजी की। लोगों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने बांग्लादेश हाईकमीशन के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी है।नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर बड़ा प्रदर्शन हो रहा है। ढाका में हिंदू युवक की हत्या के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर पड़े हैं और जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। लोगों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी है।
बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश
इस बीच भीड़ ने सुरक्षा के लिए लगाई गई पुलिस की बैरिकेडिंग भी हटाने की कोशिश की। बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर जमा भीड़ ढाका में हुई घटना के खिलाफ नारेबाजी कर रही है। इस प्रदर्शन में विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठन के कार्यकर्ता भी शामिल हैं।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां चौकस
हालांकि इस प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही चौकस थी। दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त कर दिए ताकि किसी भी तरह की अनहोनी घटना नहीं हो। बांग्लादेश में हुई घटना का गुस्सा लोगों के चेहरे पर साफ नजर आ रहा था।

भीड़ ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की। इस दौरान भीड़ की पुलिस के साथ हल्की झड़प भी हुई। पुलिस ने भीड़ में मौजूद लोगों को बैरिकेड के उस पार जाने से रोकने की कोशिश की। अपने हाथों में तख्तियां लिए लोग बांग्लादेश की सत्ता और कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। वही प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग बैरिकेडिंग पर चढ़कर हनुमान चालीसा पढ़ते हुए नजर आए।
बता दें कि बांग्लादेश में छात्र विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद वहां हिंसा भड़क उठी। इस बीच ईशनिंदा के आरोप में हिंदू समुदाय के एक युवक दीपू चंद्र दास (25)की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और उसके शव को आग लगा दी गई। दीपू चंद्र दास मैमनसिंह शहर में एक कारखाने में काम करता था। भीड़ कारखाने के बाहर जमा हो गई थी और वहां दीपू चंद्र दास को बाहर निकाल कर तब तक उसे पीटा गया जबतक उसकी मौत नहीं हो गई। फिर भीड़ ने उसके शव को पेड़ से लटकाया और आग लगा दी।

फसल आने से पहले मजदूरों को भगाने का खेल: जोधपुर में गरीब खेत मजदूर परिवार पर मारपीट और धमकियों का आरोप

0

जोधपुर | विशेष रिपोर्ट

राजस्थान के जोधपुर जिले के नानण क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक गरीब खेत मजदूर परिवार ने खेत मालिकों पर मेहनत का मेहनताना न देने, मारपीट की धमकी देने और फसल तैयार होने से पहले भगा देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिकायतकर्ता चिमन्ना (उम्र 35 वर्ष) पुत्र आत्मजः हीरा राम, निवासी निम्बंडिया बेरा, नानण, जोधपुर (342601) ने बताया कि वह और उनके जैसे कई मजदूर दिवाली से करीब 15 दिन पहले खेत मालिक रामू रामवीर पुत्र कालूराम के यहां खेती का काम करने लगे थे। दिन-रात कड़ी मेहनत कर खेतों में फसल तैयार कराई, लेकिन अब जब फसल पकने वाली है तो उनसे कहा जा रहा है कि “तुमने कोई काम नहीं किया।”

चिमन्ना का आरोप है कि जब उन्होंने मेहनत की मजदूरी मांगी तो खेत मालिक और उनके परिजन भड़क गए। गाली-गलौज, मारपीट की धमकी और जान से मारने तक की बातें कही जाने लगीं। भयभीत होकर जब वह थाना पहुंचे तो वहां भी उनकी शिकायत लेने से मना कर दिया गया।

पीड़ित परिवार में दो बेटियां और एक बेटा हैं। चिमन्ना का कहना है कि लगातार प्रताड़ना के कारण परिवार की हालत इतनी खराब हो गई है कि खाने-पीने के लाले पड़ गए हैं। पत्नी और बच्चों के साथ दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

चिमन्ना ने बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है। वह जहां भी मजदूरी करने जाते हैं, वहां यही पैटर्न दोहराया जाता है—
पहले दो-तीन महीने जमकर काम करवाया जाता है, फिर फसल आने के समय झगड़ा खड़ा कर, डराकर, धमकाकर उन्हें भगा दिया जाता है ताकि मजदूरी न देनी पड़े।

पीड़ित का आरोप है कि खेत मालिक आर्थिक रूप से मजबूत हैं और खुलेआम कहते हैं—
“जो करना है कर लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”

गरीबी, अशिक्षा और प्रभावशाली लोगों के दबाव के चलते यह परिवार न्याय से वंचित है। स्थानीय स्तर पर न तो प्रशासन सुन रहा है और न ही पुलिस, जिससे मजदूरों का शोषण खुलेआम जारी है।

यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों गरीब खेत मजदूरों की आवाज है जो हर साल मेहनत करते हैं, लेकिन फसल का फल कभी नहीं पाते। सवाल यह है कि क्या प्रशासन ऐसे मामलों पर संज्ञान लेगा, या गरीब मजदूर यूं ही अन्याय सहते रहेंगे?

 

समस्तीपुर में दबंगई बनाम हक: मामा की जमीन पर घर बनाना चाहते हैं गुटलन पासवान, गांव के लोग बन रहे बाधा

0

समस्तीपुर।
बिहार के समस्तीपुर जिले से एक बार फिर जमीन और अधिकार से जुड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। गुटलन पासवान, पिता नथनी पासवान, जिस जमीन पर घर बनाना चाहते हैं, वह उनके मामा कैलाश पासवान और चंदेश्वर पासवान की बताई जा रही है। परिवार की सहमति और वैध कागजात होने के बावजूद गांव के कुछ लोग उन्हें उस जमीन पर घर बनाने से रोक रहे हैं।

पीड़ित गुटलन पासवान का कहना है कि जमीन से जुड़े सभी आवश्यक कागजात उनके पास मौजूद हैं, लेकिन आज तक राजस्व रसीद नहीं कट पाई है। रसीद नहीं होने के कारण प्रशासनिक स्तर पर भी घर निर्माण की अनुमति नहीं मिल पा रही है। उन्होंने अंचल कार्यालय समेत कई अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन कहीं से समाधान नहीं निकला।

गुटलन पासवान ने आरोप लगाया कि गांव के ही कुछ प्रभावशाली लोग लगातार दबाव बना रहे हैं और धमकी देकर निर्माण कार्य रुकवा रहे हैं। इस बीच उन्होंने रसीद कटवाने के लिए सरकारी शुल्क देने की भी कोशिश की, लेकिन संबंधित कार्यालय ने भुगतान स्वीकार नहीं किया। नतीजतन, मामला आज भी अधर में लटका हुआ है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह विवाद अब केवल जमीन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक तनाव का रूप लेता जा रहा है। एक ओर परिवार के सदस्य जमीन देने को तैयार हैं, तो दूसरी ओर गांव के कुछ लोग बेवजह अड़ंगा डाल रहे हैं।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रशासन की निष्क्रियता और स्थानीय दबंगों की मनमानी के कारण गुटलन पासवान अपने ही रिश्तेदारों की जमीन पर छत नसीब होने से वंचित हैं। सवाल यह उठता है कि जब जमीन वैध है और परिवार की सहमति है, तो फिर घर निर्माण में बाधा क्यों?

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक संज्ञान लेता है और क्या गुटलन पासवान को उनका हक मिल पाएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

 

CDRI कर्मचारी पर रिश्तेदारी का भरोसा तोड़ने का आरोप, दादी के शेयर हड़पने का दावा, अकेली महिला ने लगाई न्याय की गुहार

0

लखनऊ | विशेष रिपोर्ट

राजधानी लखनऊ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सी.डी.आर.आई. (Central Drug Research Institute) में *कार्यरत एक कर्मचारी पर अपनी ही बहन (रुचि सक्सेना) के पिता का हक* हड़पने और वर्षों पुरानी पारिवारिक संपत्ति को गुपचुप तरीके से बेच देने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता का कहना है कि रिश्तों की आड़ में उसके साथ आर्थिक धोखाधड़ी की गई और आज वह अकेली होकर न्याय की चौखट पर खड़ी है।

1980 के दशक के शेयर, 2001 में दादी का निधन

राजाजीपुरम, सेक्टर-13 सी-ब्लॉक निवासी रूचि सक्सेना, पुत्री स्वर्गीय श्रवण कुमार सक्सेना, ने बताया कि उनकी दादी लल्ली देवी ने 1980 के दशक में कुछ फिजिकल शेयर खरीदे थे। इन शेयरों की निगरानी परिवार के ही सदस्य संजीव सक्सेना, पुत्र स्वर्गीय संतोष कुमार सक्सेना, के पास थी, जो वर्तमान में CDRI लखनऊ के एनीमल हाउस विभाग में कर्मचारी हैं।

वर्ष 2001 में लल्ली देवी के निधन के बाद, रूचि की मां और दो भाई (जो अब जीवित नहीं हैं) ने जब अपने वैधानिक हिस्से की मांग की, तो संजीव सक्सेना ने यह कहकर टाल दिया कि “जब शेयर बिकेंगे, तब बंटवारा होगा।”
रिश्तों से दूरी और गुपचुप बिक्री
पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद संजीव सक्सेना ने परिवार से बातचीत, मिलना-जुलना और फोन उठाना तक बंद कर दिया। कुछ समय बाद यह सामने आया कि शेयरों को गुप्त रूप से बेच दिया गया, लेकिन उनके पिता या परिवार को कोई हिस्सा नहीं दिया गया, जबकि उस पर उनका कानूनी अधिकार था।

आज अकेली है रूचि, पति से तलाक, पूरा परिवार खत्म
रूचि सक्सेना ने बताया कि उनके पिता पहले ही गुजर चुके थे, अब मां और दोनों भाई भी नहीं रहे। उनकी शादी प्रेम विवाह थी, लेकिन 3–4 साल बाद तलाक हो गया। आज वह अपने माता-पिता के घर में अकेली जीवन गुजार रही हैं। उनका कहना है कि इसी अकेलेपन का फायदा उठाकर संजीव सक्सेना अब साफ कह रहे हैं कि “मेरे पास कोई शेयर नहीं है, मैं इस विषय पर बात नहीं करना चाहता।”
नंबर ब्लॉक, पता बदला, जवाबदेही से बचने का आरोप

पीड़िता का आरोप है कि संजीव सक्सेना ने जानबूझकर अपना निवास स्थान बदल लिया, ताकि वह उनसे संपर्क न कर सके। साथ ही उनका मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप हर जगह से ब्लॉक कर दिया गया है। जब शेयरों की बिक्री से जुड़े कागजात, एग्रीमेंट या हिसाब-किताब मांगा गया, तो वह भी दिखाने से मना कर दिया गया।
कभी कहा गया कि शेयर स्वर्गीय सुशील सक्सेना (जिनका 2011 में निधन हो गया) को दे दिए गए, तो कभी किसी और पर जिम्मेदारी डाल दी गई।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
रूचि सक्सेना ने CDRI के सूचना अधिकारी से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि शेयर कब, कैसे और किसके माध्यम से बेचे गए। उनका कहना है कि वह बेसहारा हैं, लेकिन अपने पिता के हक के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगी।

अब सवाल यह उठता है कि
क्या एक सरकारी संस्थान का कर्मचारी पारिवारिक भरोसे की आड़ में वर्षों तक संपत्ति हड़प सकता है?
और क्या एक अकेली महिला को उसके वैधानिक अधिकार मिल पाएंगे?

on

बेंगलुरु से तीन मासूमों संग लापता हुई पत्नी, लेबर पति की गुहार—चचेरे भाई पर शक, पुलिस-प्रशासन से मदद की अपील

0

ईखबर | बिहार/बेंगलुरु
बिहार के अररिया जिले के रहने वाले एक मजदूर की दुनिया उस वक्त उजड़ गई, जब उसकी पत्नी तीन मासूम बच्चों को लेकर अचानक रहस्यमय ढंग से गायब हो गई। पीड़ित पति गौतम मंडल (30 वर्ष), पिता अनिल मंडल, इन दिनों इंसाफ और अपने परिवार की वापसी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

गौतम मंडल ने बताया कि 21 नवंबर 2025 को दोपहर करीब 1 बजे उनकी पत्नी सुधा देवी (28 वर्ष) उनके तीन बच्चों—आर्यन (6 वर्ष), आलिया कुमारी (5 वर्ष) और सूर्यांश (3 वर्ष)—को लेकर बेंगलुरु के जिगली इलाके से अचानक लापता हो गई। उस समय गौतम ड्यूटी पर थे और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उनकी मासिक आमदनी महज 10 हजार रुपये के आसपास है।
पीड़ित पति के अनुसार, उनकी शादी करीब 13 साल पहले हुई थी। दो साल पहले रोज़गार की तलाश में वे पत्नी और बच्चों के साथ बेंगलुरु शिफ्ट हुए थे। वहीं पास में उनका जीजा भी रहता था। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन हाल ही में पत्नी ने एक निजी कंपनी में काम ज्वाइन किया। इसी दौरान परिवार के ही चचेरे भाई गोलू कुमार (पत्नी के चाचा का बेटा) से उसकी नजदीकियां बढ़ने लगीं।

गौतम मंडल का आरोप है कि पत्नी के अचानक गायब होने के पीछे गोलू कुमार की भूमिका हो सकती है। उन्हें शक है कि वही पत्नी को बहला-फुसलाकर बच्चों समेत अपने साथ ले गया है। सबसे बड़ी चिंता तीन मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर है, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।

गौतम कहते हैं, “मैं सिर्फ मजदूर हूं, लेकिन मेरा परिवार ही मेरी सारी दुनिया है। मैं चाहता हूं कि मेरी पत्नी और बच्चे सुरक्षित लौट आएं। अगर कोई साजिश है तो उसकी सच्चाई सामने आए और दोषी पर कार्रवाई हो।”
पीड़ित पति ने मीडिया, पुलिस और प्रशासन से अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए। उनका कहना है कि सच चाहे जो भी हो, वह सामने आना चाहिए—दूध का दूध और पानी का पानी हो।

फिलहाल पत्नी और बच्चों की कोई खबर नहीं है, जिससे परिवार गहरे सदमे और भय में जी रहा है।

 

भोपाल से गंभीर आरोप: गलत मेडिकल रेफर और ऑपरेशन से महिला का जीवन प्रभावित, न्याय की गुहार

0

भोपाल। सीआरपीएफ कैंप बंगरसिया, भोपाल में रहने वाली सरिता बाथरे ने चिकित्सा लापरवाही और मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि 9 अप्रैल 2025 की रात वह सीआरपीएफ कैंप में तैनात डॉक्टर पल्लवी के पास इलाज के लिए गई थीं, जहां कथित रूप से पूरी योजना बनाकर उन्हें भोपाल स्थित AIIMS भोपाल रेफर कर दिया गया।
सरिता का आरोप है कि उनकी स्थिति सामान्य डिलीवरी की थी, इसके बावजूद उन्हें ऑपरेशन के लिए मजबूर किया गया। ऑपरेशन के बाद से वह लगातार शारीरिक दर्द, अंदरूनी चोट, जलन और गंभीर मानसिक तनाव से जूझ रही हैं। पीड़िता के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम ने उनके जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
पीड़िता ने बताया कि वह लंबे समय से गहरे अवसाद में हैं। कई बार आत्मघाती विचार आने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि उनकी 7 और 8 वर्ष की बेटियों ने उन्हें संभाला और जीवन से हार न मानने का साहस दिया। सरिता का कहना है कि ऑपरेशन के बाद से उनकी शारीरिक हालत लगातार बिगड़ती गई—नींद, भोजन और दैनिक जीवन पर इसका गहरा असर पड़ा है।
महिला ने आरोप लगाया कि इस मामले में पल्लवी, सुधीर, कविता और धर्मेंद्र की भूमिका संदिग्ध है और उनकी वजह से उन्हें मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्तर पर भारी क्षति उठानी पड़ी। पीड़िता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और सच्चाई सार्वजनिक की जाए।
सरिता बाथरे ने प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाए, मेडिकल रिकॉर्ड और वीडियो/दस्तावेजों की जांच कराई जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित परिवार की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

अस्पताल में महिला के साथ कथित चिकित्सा लापरवाही व मानसिक प्रताड़ना का आरोप
सीआरपीएफ डॉक्टर व एम्स भोपाल पर गंभीर आरोप, जांच व सख्त कार्रवाई की मांग

आरपी अस्पताल में रह रही सरिता नामक महिला ने चिकित्सा तंत्र से जुड़े कुछ डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि उनके पति अस्पताल नहीं आ रहे थे और उनके स्वास्थ्य व देखभाल पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। इसी दौरान डॉ. धर्मेंद्र और डॉ. पल्लवी को इस स्थिति की जानकारी थी, फिर भी कथित रूप से उनके ऑपरेशन की योजना बनाई गई।
पीड़िता के अनुसार, एक अन्य व्यक्ति सुधीर, कविता को भी पूरी स्थिति की जानकारी थी। सरिता का आरोप है कि वह पूरी तरह स्वस्थ थीं और सामान्य प्रसव संभव था, इसके बावजूद उन पर ऑपरेशन कराने का दबाव बनाया गया। उनका यह भी कहना है कि उनके बच्चे को लेकर झूठी बातें कही गईं और यह दावा किया गया कि बच्चे ने पोटी कर ली है, जबकि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ था।
सरिता ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन नसबंदी व ऑपरेशन के लिए दबाव डाला गया और डराया गया। पीड़िता के मुताबिक, एक मौके पर उन्हें अकेला पाकर यह कहकर भयभीत किया गया कि बच्चे की किडनी में समस्या है। उनका दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया से उन्हें गहरी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
महिला ने आरोप लगाया कि मामले में सीआरपीएफ के डॉक्टरों तथा एम्स भोपाल से जुड़े चिकित्सकीय तंत्र की भूमिका संदिग्ध है। पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।
पीड़िता ने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ दिया है। उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि भविष्य में किसी अन्य महिला के साथ ऐसा न हो, इसके लिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
Note: (यह खबर पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित पक्षों का पक्ष आना शेष है)

फतेहपुर की प्रियंका सोशल मीडिया के जरिए छूना चाहती हैं नई ऊंचाइयां

0

फतेहपुर।
नमस्कार दोस्तों, ई खबर में आपका स्वागत है।
आज हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के मालकनपुर गांव में रहने वाली 20 वर्षीय प्रियंका की, जो अपनी मेहनत, लगन और हौसले के दम पर सोशल मीडिया की दुनिया में एक अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली प्रियंका ने संघर्षों के बीच आगे बढ़ते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनी आवाज बनाया है। आज उन्हें लोग प्यार से “सोशल मीडिया क्वीन” कहने लगे हैं।
प्रियंका का सफर: हौसले से शुरू हुई कहानी
प्रियंका के सपने बड़े थे, लेकिन हालात हमेशा उनके पक्ष में नहीं रहे।
उन्होंने वर्ष 2025 में सोशल मीडिया पर सक्रिय होना शुरू किया। शुरुआत में यह सिर्फ एक शौक था, लेकिन धीरे-धीरे वीडियो बनाना उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया। निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ वह आगे बढ़ रही हैं।
प्रियंका के सोशल मीडिया हैंडल (पोस्ट से प्राप्त आईडी)
Instagram ID: pintu31030
(प्रोफाइल नाम: Pintu Pal)
YouTube Channel: @Pintupal-p6v1d
(Channel Name: Pintu pal)
Facebook ID: Pintu Pal
इन प्लेटफॉर्म्स पर प्रियंका अपने वीडियो और रील्स के माध्यम से लोगों से जुड़ रही हैं और धीरे-धीरे दर्शकों का सहयोग भी मिल रहा है।
प्रियंका का संदेश
प्रियंका का कहना है कि सोशल मीडिया उनके लिए सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का एक माध्यम है।
वह चाहती हैं कि लोग उनके कंटेंट को देखें, साझा करें और उनका हौसला बढ़ाएं, ताकि वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकें।
परिवार का संघर्ष और साथ
प्रियंका बताती हैं कि उनके पिता स्वर्गीय राम सिंह हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया। कठिन परिस्थितियों में भी वह अपने सपनों को छोड़ना नहीं चाहतीं और लगातार आगे बढ़ रही हैं।
प्रेरणा बनने का सपना
प्रियंका का सपना है कि वह अपनी सफलता के जरिए उन युवाओं को प्रेरित कर सकें, जो गरीबी या हालातों के कारण अपने सपनों को दबा देते हैं।
उनका कहना है—
“अगर सपने देखने की हिम्मत हो और मेहनत करने का जज्बा, तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।”
समाज के लिए संदेश
प्रियंका की कहानी यह साबित करती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो रास्ता जरूर निकलता है। आज वह न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
दोस्तों, अगर आपको यह खबर पसंद आई हो तो इसे जरूर शेयर करें और प्रियंका के इंस्टाग्राम व यूट्यूब अकाउंट को फॉलो कर उनका हौसला बढ़ाएं।

भोपाल, 21 दिसंबर 2025। मध्यप्रदेश शासन के सहकारिता, खेल एवं युवा

0

भोपाल, 21 दिसंबर 2025। मध्यप्रदेश शासन के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री एवं नरेला विधानसभा के लोकप्रिय विधायक श्री विश्वास कैलाश सारंग ने रविवार को नरेला विधानसभा अंतर्गत वार्ड क्रमांक 70 स्थित श्री पशुपतिनाथ मंदिर के समीप सड़क निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत भूमिपूजन कर क्षेत्रवासियों को विकास की कई सौगाते दी। भूमिपूजन अवसर पर पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में नेपाली समाज द्वारा मंत्री श्री सारंग का पारंपरिक ढोल-नगाड़ों एवं पुष्पवर्षा के साथ आत्मीय, भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया गया। स्वागत से अभिभूत मंत्री श्री सारंग ने समाजजनों का हृदय से आभार व्यक्त किया।


मध्याप्रदेश शासन के मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा का समग्र, संतुलित और सतत विकास ही मेरा संकल्प है। वर्ष 2008 से पूर्व नरेला क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से वंचित था, किंतु वर्ष 2008 के बाद भाजपा सरकार और हमारे निरंतर प्रयासों से नरेला विधानसभा ने विकास की नई पहचान बनाई है। आज नरेला विधानसभा में चौड़ी और गुणवत्तापूर्ण सड़कें, सुदृढ़ विद्युत व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, नाली-ड्रेनेज सिस्टम जैसी मूलभूत सुविधाएं सशक्त रूप से उपलब्ध हैं। साथ ही सांदीपनी विद्यालय, अस्पताल, महाविद्यालय सहित अनेक शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना कर क्षेत्रवासियों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उनके घर के पास उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि विकास केवल कंक्रीट और डामर तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और सम्मानजनक जीवन स्तर से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में नरेला विधानसभा को विकास का आदर्श मॉडल बनाया जा रहा है।

कार्यक्रम में नेपाली समाज के अध्यक्ष श्री लोकमणी घिमिरे, पूर्व अध्यक्ष श्री दिवाकर आर्याल, श्री डोलराज भंडारी, श्री डोलराज गैरे, श्री लीलामणि पांडे, श्री विष्णु शर्मा, श्री जगन्नाथ पौडेल सहित समाज के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। धन्यवाद।

पत्नी तीन बच्चों संग लापता, गरीब पति की सरकार-प्रशासन से मदद की गुहार

0

रामपुर (उत्तर प्रदेश)।
जिले के गांव सालवीनगर से एक पारिवारिक मामला सामने आया है, जहां पति ने अपनी पत्नी के लापता होने और तीन बच्चों को साथ ले जाने को लेकर गहरी चिंता जताई है। पीड़ित पति उमेश कुमार ने मीडिया के माध्यम से अपनी पत्नी से घर लौटने की भावुक अपील की है।
उमेश कुमार ने बताया कि उनकी शादी मार्च 2020 में नीतू, पुत्री रामकुमार, निवासी पत्रखेड़ा से हुई थी। दंपति के तीन बच्चे हैं। उमेश के अनुसार, 29 अक्टूबर 2024 को नीतू मायके जाने की बात कहकर घर से निकली थी और तीनों बच्चों को भी साथ ले गई। इसके बाद से वह वापस नहीं लौटी।
उमेश का कहना है कि परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार नीतू अब तक घर नहीं आई है। उन्होंने आशंका जताई कि उनकी पत्नी संभवतः किसी अन्य युवक के साथ चली गई है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
भावुक होते हुए उमेश कुमार ने कहा कि नीतू जहां भी हो, बच्चों के साथ सुरक्षित घर लौट आए। “मैं उसे स्वीकार करने को तैयार हूं, बस वह बच्चों के साथ वापस आ जाए,” उमेश ने कहा।
पीड़ित पति ने यह भी बताया कि नीतू ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा रखा है। उमेश के अनुसार उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और वह किसी वकील की फीस वहन करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने सरकार, पुलिस और प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि उन्हें कानूनी उलझनों से बचाते हुए मदद की जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और परिवार फिर से एकजुट हो सके।

उमेश ने यह भी बताया कि ससुराल पक्ष के लोग भी मुझे बार-बार धमकी दे रहे हैं कि तुझे जान से मार देंगे।