Monday, July 13, 2026
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शतक से चूके विराट कोहली, फिर भी बल्लेबाजी से किया धूम-धड़ाका; ठोक दिए इतने रन

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विराट कोहली ने गुजरात के खिलाफ मैच में शानदार बल्लेबाजी की है और उन्होंने 77 रनों की पारी खेली है, जिसमें उनके बल्ले से 13 चौके और एक छक्का निकला है।विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में दिल्ली और गुजरात के बीच मुकाबला हो रहा है और इस मैच में गुजरात के कप्तान चिंतन गाजा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। इसके बाद दिल्ली की पहले बल्लेबाजी आ गई। मैच में सुपरस्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने दमदार बल्लेबाजी की। दिल्ली की टीम ने अभी तक पांच विकेट के नुकसान पर 159 रन बना लिए हैं।
खेलक्रिकेटशतक से चूके विराट कोहली, फिर भी बल्लेबाजी से किया धूम-धड़ाका; ठोक दिए इतने रन
शतक से चूके विराट कोहली, फिर भी बल्लेबाजी से किया धूम-धड़ाका; ठोक दिए इतने रन
विराट कोहली ने गुजरात के खिलाफ मैच में शानदार बल्लेबाजी की है और उन्होंने 77 रनों की पारी खेली है, जिसमें उनके बल्ले से 13 चौके और एक छक्का निकला है विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में दिल्ली और गुजरात के बीच मुकाबला हो रहा है और इस मैच में गुजरात के कप्तान चिंतन गाजा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। इसके बाद दिल्ली की पहले बल्लेबाजी आ गई। मैच में सुपरस्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने दमदार बल्लेबाजी की। दिल्ली की टीम ने अभी तक पांच विकेट के नुकसान पर 159 रन बना लिए हैं।
विराट कोहली ने खेली 77 रनों की पारी
विराट कोहली मैच में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और उन्होंने अपनी पारी की शुरुआत से ही ताबड़तोड़ बल्लेबाजी जारी रखी। उनके आगे गुजरात के गेंदबाज बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुए। कोहली ने 61 गेंदों में ही 77 रन बनाए, जिसमें 13 चौके और एक छक्का शामिल रहा। भले ही वह अपने शतक से चूक गए, लेकिन अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सभी का दिल जीतने में सफल रहे। कोहली ने गेंदबाज विशाल जयसवाल की गेंद पर आगे बढ़कर बड़ा स्ट्रोक लगाना चाहा। लेकिन वह इससे चूक गए और फिर विकेटकीपर उर्विल पटेल ने उन्हें स्टंप आउट कर दिया। इसके बाद उन्हें पवेलियन लौटना पड़ा।

पिछले मैच में कोहली ने लगाया था शतक
विराट कोहली ने इस टूर्नामेंट के पिछले मैच में दमदार शतक लगाया था। तब उन्होंने आंध्र प्रदेश के खिलाफ 101 गेंदों में कुल 131 रन बनाए थे, जिसमें 14 चौके और तीन छक्के शामिल रहे थे। अच्छी बल्लेबाजी के दम पर ही वह टीम को जीत दिलाने में सफल हो पाए थे।

साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में दिखाया था दम
विराट कोहली पिछले कुछ समय से बहुत ही शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके बल्ले से खूब रन भी निकल रहे हैं। उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में कुल 302 रन बनाए थे, जिसमें दो शतक शामिल रहे थे। अच्छे खेल की वजह से उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का अवॉर्ड मिला था। वह टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट ले चुके हैं और उनका पूरा फोकस इस समय वनडे क्रिकेट पर ही है। वह वनडे वर्ल्ड कप 2027 में खेलना चाहते हैं और इसके लिए पूरी तैयारी कर रहे हैं।

बांका जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां सैतपुर गांव के रहने वाले शत्रुधन साह बीते 20 दिसंबर 2025 से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हैं।

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शत्रुधन साह के अचानक गायब हो जाने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और उनका परिवार गहरे सदमे में है।

परिजनों के अनुसार शत्रुधन साह 20 दिसंबर की सुबह घर से यह कहकर निकले थे कि किसी जरूरी काम से बाहर जा रहे हैं और जल्द ही वापस लौट आएंगे। लेकिन शाम होने के बाद भी जब वे घर नहीं लौटे तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। पहले रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों के यहां खोजबीन की गई, लेकिन कहीं से भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

लापता शत्रुधन साह, आत्मज दुखन साह, ग्राम सैतपुर, पोस्ट समुखिया मोड़, थाना बांका, जिला बांका, बिहार के निवासी हैं। उनका आधार पहचान पत्र भी उपलब्ध है, जिससे उनकी पहचान स्पष्ट होती है। इसके बावजूद इतने लंबे समय तक उनका कोई पता नहीं चल पाना कई सवाल खड़े कर रहा है।

परिवार वालों का कहना है कि शत्रुधन साह का किसी से कोई विवाद नहीं था और न ही उन्होंने कभी घर छोड़कर जाने जैसी कोई बात कही थी। ऐसे में उनका अचानक इस तरह गायब हो जाना रहस्य बना हुआ है। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है और बूढ़े माता पिता हर दिन दरवाजे की ओर टकटकी लगाए बेटे के लौटने की राह देख रहे हैं।

स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग अनहोनी की आशंका जता रहे हैं तो कुछ को किसी आपराधिक घटना का शक है। हालांकि अब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

परिजनों ने थाना बांका में गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई है और पुलिस से अपील की है कि शत्रुधन साह की जल्द से जल्द तलाश की जाए। परिवार ने आम जनता से भी अनुरोध किया है कि यदि किसी को शत्रुधन साह के बारे में कोई भी जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस या परिजनों को सूचित करें।

1 हफ्ते होने वाले हैं पर अभी भी शत्रुधन साह का कोई सुराग न मिलना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह है कि इस रहस्यमय गुमशुदगी का सच कब और कैसे सामने आता है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अवशेषों को भारत लाने की मांग, परपोते चंद्र कुमार ने राष्ट्रपति मुर्मू को लिखा पत्र

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चंद्र कुमार बोस ने अपने पत्र में लिखा है कि नेताजी के अवशेष जापान के टोक्यो में रेनकोजी मंदिर में रखे हैं। इन अवशेषों को भारत लाया जाना चाहिए। इन्हें दिल्ली में बनाए जा रहे इंडियन नेशनल आर्मी के स्मारक में रखे जाने का प्लान है।नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर नेताजी के अवशेषों को भारत वापस लाने का अनुरोध किया है। उन्होंने लिखा कि नेताजी के अवशेष जापान के रेनकोजी मंदिर में रखे हुए हैं। इन्हें भारत लाने के लिए सरकार से पहले भी कई बार अपील की जा चुकी है। हालांकि, अब तक नेताजी के अवशेषों को भारत लाने की कोशिशें सफल नहीं हुई हैं, लेकिन अब चंद्र कुमार बोस को राष्ट्रपति मुर्मू से इसकी उम्मीद है।

चंद्र कुमार बोस का पत्र
चंद्र कुमार बोस ने अपने पत्र में लिखा, “महामहिम, मैं आपको शरत चंद्र बोस और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार के सदस्य के तौर पर लिख रहा हूं और भारत की आज और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी विरासत को और यादगार बनाने के लिए आपके सामने एक प्रस्ताव रखना चाहता हूं। जैसा कि आप जानती होंगी कि 21 अक्टूबर 2025 को हमने सिंगापुर में नेताजी द्वारा आजाद हिंद की प्रोविजनल सरकार की स्थापना के आठ दशक पूरे होने का जश्न मनाया था। मुझे पता चला है कि ब्रिटिश साम्राज्यवाद पर आखिरी हमले के सैनिकों को सम्मान देने और नेताजी के ‘चलो दिल्ली’ के मशहूर नारे को याद करने के लिए दिल्ली में एक सही जगह पर इंडियन नेशनल आर्मी (INA) का स्मारक बनाने का प्लान है। आपको यह भी पता है कि नेताजी के अवशेष दूर जापान में टोक्यो के रेनकोजी मंदिर में रखे हैं। दशकों से INA के पुराने सैनिकों के साथ-साथ नेताजी की बेटी प्रोफेसर अनीता बोस-फाफ और उनके परिवार के सदस्यों ने कई बार भारत सरकार से इस हीरो के अवशेषों को उनकी मातृभूमि में वापस लाने के लिए संपर्क किया है। हम आपसे इस मामले में पॉजिटिव लेने की अपील करते हैं।कौन हैं चंद्र कुमार बोस ?
चंद्र कुमार बोस द ओपन प्लेटफॉर्म फॉर नेताजी के कन्वीनर हैं। वह सोशियो-पॉलिटिकल कमेंटेटर और एक्टिविस्ट भी हैं। चंद्र कुमार के पिता आरामबाग सीट से सांसद रहे थे। ऐसे में राजनीति से उनका पुराना नाता रहा है। उन्होंने लंदन के हेंड्रिक्स कॉलेज से अर्थशास्त्र में डिग्री पूरी करने के बाद कोलकाता आईआईएम से अपनी पढ़ाई पूरी की। टाटा ग्रुप में करीब 18 साल काम किया। इसके बाद अपनी आईटी और कंसल्टेंसी कंपनी शुरू की। चंद्र कुमार 2016 में बीजेपी में शामिल हुए थे। 2016 में भवानीपुर और 2019 में कोलकाता दक्षिण से लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2023 में वैचारिक मतभेद का हवाला देते हुए उन्होंने पार्टी छोड़ दी।

दिल्ली में युवक की चाकू मारकर हत्या, आरोपी की तलाश में छापेमारी कर रही पुलिस

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गंभीर रूप से घायल युवक को पास के जग प्रवेश चंद्र अस्पताल पहुंचाया। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साध ही आरोपी की तलाश के लिए छापेमारी भी की जा रही है।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सनसनीखेज वारदात सामने आई है। दिल्ली के वेलकम इलाके में एक शख्स की चाकू मार कर हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक कल देर रात मामूली विवाद के बाद युवक पर चाकुओं से हमला किया गया।
तुरंत मौके पर पहुंची पुलिस टीम
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस की टीम पहुंची। मामले की अधिक जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा कि गुरुवार देर शाम घटना की जानकारी मिलने के बाद पेट्रोलिंग टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पाया कि वह व्यक्ति घायल हालत में पड़ा था।

डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
उसे तुरंत मेडिकल इलाज के लिए जग प्रवेश चंद्र अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, पुलिस ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई।

सूरज के रूप में हुई मृतक की पहचान
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि मृतक की पहचान सूरज के रूप में हुई है। हालांकि, उसकी उम्र, पता और बैकग्राउंड के बारे में और जानकारी वेरिफाई की जा रही है। अधिकारी ने आगे कहा कि पहली नजर में ऐसा लग रहा है कि व्यक्ति को चाकू के घाव लगे थे।

कई धाराओं में केस दर्ज कर आरोपी की तलाश तेज
घटना के बाद, BNS की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि चाकू मारने की घटना के सही कारणों की जांच की जा रही है। साध ही आरोपी की तलाश के लिए छापेमारी भी की जा रही है।

14 वर्षीय अमित शर्मा और 13 वर्षीय राजन रहस्यमय तरीके से लापता

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कुशीनगर के कसया में चार दिन बाद भी सुराग नहीं, परिवार ने जताई अनहोनी की आशंका

कुशीनगर।
जिले के कसया थाना क्षेत्र से दो नाबालिग बच्चों के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला सामने आया है। 22 दिसंबर की शाम घर से निकले 14 वर्षीय अमित शर्मा और 13 वर्षीय राजन अब तक वापस नहीं लौटे हैं। घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी दोनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अमित शर्मा (उम्र 14 वर्ष), पिता मुन्नीलाल शर्मा तथा राजन (उम्र 13 वर्ष), पिता टार्ज़न, दोनों गांव के ही रहने वाले हैं। 22 दिसंबर की शाम करीब 5 बजे दोनों बच्चे एक साथ घर से निकले थे। परिजनों को बताया गया था कि वे थोड़ी देर में वापस आ जाएंगे, लेकिन देर रात तक जब दोनों घर नहीं लौटे तो खोजबीन शुरू की गई।

छानबीन के दौरान गांव के चौराहे पर स्थित एक मोबाइल दुकान से अहम जानकारी सामने आई। दुकानदार के अनुसार शाम करीब 6 बजे दोनों बच्चे दुकान पर आए थे, जहां उन्होंने अपने मोबाइल फोन बेचे। इसके बाद दोनों बच्चे किस दिशा में गए, इसकी जानकारी किसी को नहीं हो सकी।

अमित की मां सुधा देवी और परिवार के अन्य सदस्यों का कहना है कि दोनों बच्चे शांत स्वभाव के थे और बिना बताए कहीं दूर जाने की संभावना कम है। ऐसे में उन्हें किसी अनहोनी की आशंका सता रही है। परिवार का कहना है कि बच्चों के अचानक गायब होने से पूरा घर भय और अनिश्चितता के माहौल में है।

परिजनों ने इस संबंध में कसया थाने में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई से परिवार संतुष्ट नहीं है और उनका कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तेज़ी से जांच की जानी चाहिए।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि दोनों नाबालिग बच्चों की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की जाए, मोबाइल दुकान और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं और जल्द से जल्द अमित शर्मा व राजन को सुरक्षित बरामद किया जाए।
यदि किसी व्यक्ति को बच्चों के संबंध में कोई भी जानकारी मिले, तो कृपया तुरंत इन नंबरों पर संपर्क करें:
+91 97161 27554, +91 97016 77382

रेडियो स्टेशन के पास बेरहमी से हत्या, पैसे न देने पर युवक को पत्थर से कुचला, सुनवाई न होने से परिवार बेहाल

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मकान संख्या 249, आज़ाद नगर चिंथाकोम्माडिन्ना, कडप्पा
जिला कडप्पा आंध्र प्रदेश – 516003

जराई कडप्पा शहर में रेडियो स्टेशन के पास एक खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीती रात रेलवे स्टेशन के करीब इमाम हुसैन और उनके साथी मौजूद थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनसे पैसे की मांग की। जब इमाम हुसैन ने पैसे देने से इनकार किया, तो आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद बढ़ते ही आरोपियों में से एक ने पास में पड़ा एक बड़ा और भारी पत्थर उठाकर इमाम हुसैन पर दे मारा। सिर पर गंभीर चोट लगने से इमाम हुसैन वहीं गिर पड़े और खून से लथपथ हो गए। अफरा-तफरी के बीच उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। मृतक इमाम हुसैन की उम्र करीब 23 वर्ष बताई जा रही है।
घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। रेलवे स्टेशन और रेडियो स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई इस वारदात से स्थानीय लोग दहशत में हैं। लोगों का कहना है कि अपराधी बेखौफ होकर वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि मृतक के परिजन लगातार थानों और अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। परिवार का आरोप है कि इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है। परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई न होने से उनका आक्रोश और दर्द बढ़ता जा रहा है।

इमाम हुसैन की मौत के बाद परिवारजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में मातम पसरा हुआ है और परिजन सवाल उठा रहे हैं कि आखिर खुलेआम हुई इस हत्या के दोषियों को कब गिरफ्तार किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने भी मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और आरोपियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिले, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

 

हरदोई में जमीन पैमाइश को लेकर बड़ा खुलासा, राजस्व रिकॉर्ड की गड़बड़ी से बढ़ा विवाद

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हरदोई | ब्यूरो रिपोर्ट
हरदोई जनपद की तहसील सवायजपुर अंतर्गत ग्राम ककराली में भूमि पैमाइश के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। न्यायालय के आदेश पर कराई गई पैमाइश में स्पष्ट हुआ कि गाटा संख्या 1755 और 1754 के बीच वर्षों से कोई स्थायी मेड़ या स्पष्ट सीमा मौजूद नहीं थी। इसी अस्पष्टता के कारण जमीन को लेकर विवाद लगातार गहराता रहा।
यह मामला वाद संख्या टी 202510330406657 से जुड़ा है। आवेदिका श्रीमती केतुका, पत्नी सुमेर, निवासी अन्नूखेड़ा (मजरा काली पावन) ने अपनी भूमि गाटा संख्या 1755 की पैमाइश कराए जाने की मांग की थी। न्यायालय के निर्देश पर राजस्व विभाग ने तय तिथि पर क्षेत्रीय लेखपाल, राजस्व कर्मियों और दोनों पक्षों की मौजूदगी में मौके पर पैमाइश की।
पैमाइश से पहले पुराने राजस्व अभिलेखों और नक्शों का मिलान किया गया। इसके बाद उपकरणों की जांच कर विधिवत नाप शुरू हुई। जांच में सामने आया कि गाटा संख्या 1755 के पूर्वी हिस्से में उत्तर दिशा में 16 मीटर और दक्षिण में 12 मीटर भूमि पाई गई। वहीं पश्चिमी हिस्से में उत्तर दिशा 18 मीटर और दक्षिण दिशा 16 मीटर दर्ज हुई, जो राजस्व नक्शे के अनुसार गाटा संख्या 1754 में सम्मिलित पाई गई।
सबसे अहम खुलासा यह रहा कि दोनों गाटों के बीच कोई पुरानी स्थायी सीमा या मेड़ नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि लंबे समय से सीमाएं स्पष्ट न होने के कारण जमीन की वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम बना रहा। पैमाइश के निष्कर्ष मौके पर मौजूद दोनों पक्षों को बताए गए और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी दिया गया।
राजस्व विभाग की तैयार रिपोर्ट अब न्यायालय में पेश की जाएगी, जहां आगे की कार्रवाई तय होगी। यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व रिकॉर्ड की शुद्धता और भूमि सीमाओं की स्पष्टता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।

श्रवण पाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कानून को और लेखपाल प्रॉपर्टी डीलर्स के साथ भूमिया के साथ मिले हुए हैं और हमारी जमीन नक़्शे के हिसाब से पूरी नहीं कर रहे हैं इसलिए अंत में जाकर हमने मीडिया का सहारा लिया और मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री से गुहार लगा रहे हैं कि हमें न्याय दिलाया जाए और हमारी जमीन पूरी की जाए। और जबरदस्ती हमारी जमीन पर खंबे लगा दिए गए हैं और माननीय न्यायालय में मामला विचाराधीन है। इसके बावजूद ही हमारी जमीन पर कब्जा कर लिए हैं हमें नए दिलाया जाए और हमारी जमीन हमें नक़्शे के हिसाब से पूरी करके दी जाए।

करौली के कोंसरा गांव में खूनी तांडव: 15 से अधिक हमलावरों ने परिवार पर किया जानलेवा हमला, लूट और फायरिंग से फैली दहशत

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करौली जिले के सदर थाना क्षेत्र के कोंसरा गांव में रविवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब करीब 15 से अधिक हमलावरों ने एक परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया। हमलावर बोलेरो और स्कॉर्पियो गाड़ियों में सवार होकर लाठी, डंडे, कुल्हाड़ी और कट्टों से लैस होकर गांव में पहुंचे और घर में घुसकर बर्बर तरीके से मारपीट की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना 21 दिसंबर 2025 को सुबह करीब 7 बजे की है। कोंसरा निवासी बनीसीग मीना अपने भाई धनबीर, मां मूली देवी और भांजे हाकिम व राजू के साथ घर पर बैठकर चाय पी रहे थे। इसी दौरान पाटौर गांव के सुरेश, मुनेश, उदल, कल्ला, अकरम और विक्रम पुत्र रामचरण अपने साथ करीब 15 लोगों को लेकर बोलेरो और स्कॉर्पियो वाहन से मौके पर पहुंचे।

आरोप है कि हमलावरों ने आते ही घर में जबरन घुसपैठ की। जान बचाने के लिए परिवार के लोग पाटौरनुमा कमरे में घुसकर कुंडी लगाकर छिप गए, लेकिन हमलावर छत पर चढ़ गए और पत्थर फेंककर पटौर की पट्टियां तोड़ दीं। इसके बाद घर के अंदर घुसकर सभी को बाहर खींच लाया गया और बेरहमी से पीटा गया।

हमले में सुरेश ने धनबीर के सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया, जबकि कल्ला ने हाथ पर उल्टी कुल्हाड़ी मारी। अन्य आरोपियों ने लाठी डंडों और पत्थरों से हमला किया। बीच-बचाव करने आई मां मूली देवी, भांजे हाकिम और राजू को भी नहीं बख्शा गया। सभी को गंभीर चोटें आईं।

हल्ला सुनकर आसपास के खेतों में रखवाली कर रहे रामरूप मीना, बनीसीग और भरतू, रामलखन सहित अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को आता देख हमलावर पीड़ितों को मरा समझकर छोड़कर भाग गए। जाते-जाते आरोपी उदल ने कट्टे से फायरिंग भी की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।

आरोप है कि हमलावर घर से सोने-चांदी की चैन, कानों के कुंडल और एक बक्सा तोड़कर जेवरात चुरा ले गए। साथ ही भांजे हाकिम का वीवो कंपनी का मोबाइल फोन, जिसकी कीमत करीब 35 हजार रुपये बताई जा रही है, छीन लिया गया।

घटना की सूचना ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को दी। मौके पर पहुंची सदर थाना पुलिस ने सभी घायलों को करौली जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां धनबीर और मां मूली देवी को भर्ती किया गया। दोनों का इलाज जारी है।

पीड़ित बनीसीग मीना ने सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और हमलावरों की तलाश की जा रही है।

इंदौर के रजवाड़ा इलाके में कथित कब्जे की साजिश, महिला ने रात में तोड़फोड़ और धमकी का लगाया आरोप, प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

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इंदौर (मध्य प्रदेश) | विशेष रिपोर्ट

इंदौर शहर के थाना एमजी रोड क्षेत्र अंतर्गत रजवाड़ा, बक्शी गली से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां 45 वर्षीय लक्ष्मी वर्मा, पिता स्वर्गीय राधे कृष्ण वर्मा, ने अपने मकान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। लक्ष्मी वर्मा का कहना है कि पिछले 15 से 20 दिनों से उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और पैसे के बल पर उनका मकान हड़पने की कोशिश की जा रही है। यह मामला अब पूरे रजवाड़ा इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

लक्ष्मी वर्मा ने बताया कि वह पहले इसी मकान में किराएदार के रूप में रहती थीं। बाद में वर्ष 2022 में उन्होंने यह मकान स्वर्गीय कालूराम से विधिवत रूप से खरीद लिया था। तब से उनका पूरा परिवार इसी घर में रह रहा है और अब तक किसी भी तरह की कोई समस्या सामने नहीं आई थी। लेकिन अचानक कुछ प्रभावशाली लोगों की नजर इस इलाके पर पड़ गई और पूरे रजवाड़ा को खाली कराने का दबाव बनने लगा।

पीड़िता के अनुसार, विपक्षी पक्ष में शामिल बताए जा रहे सुनील मथुरिया और सुनील अग्रवाल खुद को पैसे वाली पार्टी बताते हैं। आरोप है कि ये लोग पूरे रजवाड़ा क्षेत्र में करीब 200 से 250 घरों और दुकानों को खाली कराना चाहते हैं, ताकि वहां बड़े स्तर पर मॉल और व्यावसायिक प्रोजेक्ट तैयार किए जा सकें। इसके लिए लोगों को मोटी रकम का लालच दिया जा रहा है और जो लोग इनकार कर रहे हैं, उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है।
लक्ष्मी वर्मा का आरोप है कि उन्हें भी आठ लाख रुपये लेने और मकान खाली करने का दबाव बनाया गया। उनका कहना है कि रात के समय कुछ लोग आते हैं, तोड़फोड़ करते हैं और जानबूझकर भय का माहौल पैदा करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुनीमों और अन्य लोगों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है, जिससे आम परिवार असहाय महसूस कर रहे हैं।

पीड़िता ने बताया कि रजवाड़ा की मूल मालकिन वंदना देवी, जो काफी बुजुर्ग हैं, इस समय बेड रेस्ट पर हैं और किसी को कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। इसी स्थिति का फायदा उठाकर कथित तौर पर कुछ लोग खुद को पूरे इलाके का मालिक बताकर अवैध कब्जे की कोशिश कर रहे हैं। लक्ष्मी वर्मा का कहना है कि जमींदारों की चुप्पी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
लक्ष्मी वर्मा का दर्द है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो उनके सिर से छत छिन सकती है। वे लगातार दर-दर भटकने को मजबूर हैं, लेकिन अब तक कहीं से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मांग की है कि उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के घर सुरक्षित रह सकें।

 

गरीब मजदूर की दोपहिया बाइक चोरी, थाने में आवेदन तक नहीं लिया गया: विदिशा के युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

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इंदौर/विदिशा | विशेष रिपोर्ट

मध्य प्रदेश से एक सनसनीखेज और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक गरीब मजदूर की मेहनत की कमाई से खरीदी गई दोपहिया बाइक चोरी हो गई, लेकिन पीड़ित को अब तक पुलिस की मदद तक नसीब नहीं हुई है।

पीड़ित बृजेश कुमार, निवासी गांव किशनपुरा, थाना स्वरोज, जिला विदिशा हैं। बृजेश कुमार मजदूरी और बेलदारी का काम करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। उन्होंने बताया कि 17 दिसंबर 2025 को दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे के बीच उनकी हीरो स्प्लेंडर बाइक चोरी हो गई।
बृजेश कुमार वर्तमान में इंदौर में किराए के कमरे में रहते हैं। घटना के दिन उन्होंने अपनी बाइक रूम के सामने खाली जगह में खड़ी की थी, जहां अन्य किराएदार भी रहते हैं। जब वह लौटे तो बाइक वहां से गायब थी। आसपास काफी खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

पीड़ित ने बताया कि चोरी हुई बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर MP09 XE 8371 है, जो मध्य प्रदेश परिवहन विभाग से पंजीकृत है। बाइक का चेसिस नंबर MBLHAW121MSF42857 है। बृजेश कुमार के पास बाइक से जुड़े सभी वैध कागजात मौजूद हैं, इसके बावजूद उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
पीड़ित का आरोप है कि जब वह थाने पहुंचे तो पुलिस ने आवेदन लिखने से इनकार कर दिया। कई बार चक्कर लगाने के बावजूद न तो FIR दर्ज की गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई, जिससे वह मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं।
बृजेश कुमार ने मीडिया को बताया कि यह बाइक उनके लिए सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि रोजगार का एकमात्र सहारा है। बाइक के बिना काम पर जाना मुश्किल हो गया है, जिससे परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

पीड़ित ने प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल FIR दर्ज की जाए और बाइक की बरामदगी के लिए कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो चोरों के हौसले और बढ़ेंगे।
यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि क्या गरीब और मजदूर वर्ग की शिकायतें सिस्टम में सचमुच सुनी जाती हैं, या उन्हें सिर्फ दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या पीड़ित मजदूर को उसकी मेहनत की कमाई वापस मिल पाती है या नहीं।