Sunday, July 12, 2026
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जैसलमेर में गायों के साथ क्रूरता और अवैध कब्जे का गंभीर आरोप, वीडियो बनाकर भ्रामक प्रचार; पुलिस से FIR की मांग

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जैसलमेर।

राजस्थान के जैसलमेर जिले के सांगड़ थाना क्षेत्र से गौवंश के साथ क्रूरता, अवैध परिवहन और सरकारी चारागाह भूमि पर कब्जे का एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम नेडान निवासी तनेरावसिंह पुत्र भीमसिंह राजपूत ने पुलिस थाना सांगड़ में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी पालतू गायों को साजिश के तहत खेत में फंसाकर पीटा गया, वीडियो बनाकर भ्रामक प्रचार किया गया और बाद में जबरन वाहन में भरकर गौशाला में छोड़ा गया।

शिकायत के अनुसार, कुछ दिन पहले प्रार्थी की 17 गायें अचानक लापता हो गईं। खोजबीन करने पर पता चला कि वे पास के खेत की दिशा में गई थीं, जो ग्राम दवाड़ा निवासी चौथाराम पुत्र घुडाराम रावणा राजपूत एवं तनेरावसिंह पुत्र खेतसिंह राजपूत का बताया जा रहा है। आरोप है कि खेत का मुख्य गेट जानबूझकर खुला छोड़ा गया, जिससे गायें अंदर चली गईं। इसके बाद गायों का वीडियो बनाया गया और उन्हें खेत से बाहर निकालने के दौरान ट्रैक्टर को तेज गति से दौड़ाया गया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि ट्रैक्टर के पीछे भगाने से एक-दो गायें गिर गईं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। बाद में जब गायें गौशाला में मिलीं तो उनके पैरों पर दबाव और फ्रैक्चर जैसे निशान पाए गए। इससे आशंका जताई जा रही है कि गायों के पीछे भारी वाहन चलाया गया। स्थिति बिगड़ने के डर से गायों को किसी वाहन में भरकर वहां से हटा दिया गया।

करीब 10 दिन बाद प्रार्थी की कुछ गायें भादरिया स्थित एक गौशाला में मिलीं, लेकिन गौशाला प्रशासन स्पष्ट नहीं कर सका कि गायों को किसने, किस वाहन से और किसके निर्देश पर वहां छोड़ा। आरोप है कि गौशाला कर्मचारियों ने न तो सीसीटीवी फुटेज दिखाई और न ही किसी प्रकार का वाहन या व्यक्ति का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया। जबकि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गायें एक साथ बड़ी संख्या में लाई गई थीं, जिससे वाहन द्वारा परिवहन की संभावना और मजबूत होती है।
गौशाला में यह भी सामने आया कि गायें स्पष्ट रूप से पालतू थीं और उनके शरीर पर पुराने व ताजे चोट के निशान मौजूद थे। प्रार्थी का आरोप है कि जानबूझकर गायों को अलग-अलग बाड़ों में रखा गया और एक गाय की मौत की सूचना भी नहीं दी गई। कुल 17 गायों में से एक गाय अभी भी बीमार है, दो गायें लापता हैं और शेष किसी तरह वापस मिली हैं।
मामले में एक और गंभीर पहलू यह है कि घटनास्थल के आसपास सरकारी चारागाह भूमि पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि चारागाह भूमि गौवंश और पशुधन के लिए आरक्षित होती है, ऐसे में वहां खेती करना कानून और जनहित दोनों के खिलाफ है। इस संबंध में राजस्व विभाग से भी जांच की मांग की गई है।

तनेरावसिंह ने आरोप लगाया है कि इस पूरे घटनाक्रम में चौथाराम पुत्र घुडाराम रावणा राजपूत और तनेरावसिंह पुत्र खेतसिंह राजपूत की अहम भूमिका है तथा उनके साथ 7-8 अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। पीड़ित ने पुलिस से मांग की है कि गौवंश के साथ क्रूरता, अवैध परिवहन, भ्रामक प्रचार और सरकारी भूमि पर कब्जे के इस मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष, गहन और समयबद्ध जांच की जाए।

 

क्रिसमस की रात नाबालिग लापता, सुबह आया फोन—“मेरे साथ रहेगी”

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सूरजपुर के प्रतापपुर थाना क्षेत्र में 16 वर्षीय किशोरी के अपहरण का आरोप, आरोपी पर पहले भी दर्ज है मामला; पास्टर दंपती समेत पांच पर मदद का शक

सूरजपुर।
क्रिसमस के जश्न की रात एक परिवार पर मातम टूट पड़ा। प्रतापपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सिलफिली की 16 वर्षीय किशोरी रहस्यमय ढंग से लापता हो गई। परिजनों का आरोप है कि किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाया गया है। अगले दिन सुबह एक फोन कॉल ने सनसनी फैला दी—फोन करने वाले युवक ने कहा, “तारा मेरे घर है और मेरे साथ ही रहेगी।”

प्रार्थिया सहोदरी (35), पति संधुराम, जाति पनिका, निवासी ग्राम सिलफिली के अनुसार 24 दिसंबर 2025 की शाम करीब 5 बजे वह अपने चारों बच्चों के साथ बांधपारा बगिचापरीहा में क्रिसमस समारोह में शामिल होने गई थीं। रात होने पर परिवार वहीं रुक गया। तड़के करीब 3 बजे उनकी बेटी तारा को अंजु नामक युवती ने घर से बाहर बुलाया। कुछ देर बाद भी तारा वापस नहीं लौटी। जब मां बाहर देखने जाने लगीं तो पास्टर सुनिता ने यह कहकर रोक दिया कि वह खुद देखने जा रही हैं।

सुबह तक किशोरी के नहीं लौटने पर परिजनों ने आसपास तलाश की। 25 दिसंबर की सुबह करीब 9 बजे रोजेश पिता खैरू का फोन आया, जिसने बताया कि वह तारा को अपने घर ले आया है और उसे अपने साथ ही रखेगा। परिजनों का आरोप है कि रोजेश ने नाबालिग तारा को बहला-फुसलाकर भगाया है। इस मामले में आकाश, अंजु, राजकुमारी तथा पास्टर दंपती—सुनिता और रामखेलावन—पर मदद करने का संदेह जताया गया है।

परिजनों ने यह भी दावा किया कि आरोपी रोजेश के खिलाफ पहले भी नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर ले जाने के आरोप में थाना राजपुर में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। पीड़ित परिवार ने प्रतापपुर थाने में लिखित शिकायत देकर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

मामले ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है और किशोरी की बरामदगी प्राथमिकता है। सभी संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है।

 

ऋषिकेश: जंगल की जमीन पर मार्किंग कर रही थी वन विभाग की टीम, गुस्साई जनता ने किया पथराव, ट्रेनें भी रोकी

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ऋषिकेश में पथराव के बाद पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है। ऋषिकेश में वन विभाग के सर्वे के दौरान ये पत्थरबाजी की घटना हुई है। अब पुलिस की टीम पथराव करने वालों की पहचान कर रही है।ऋषिकेश में जंगल की जमीन के दौरान पुलिस पर पथराव के बाद इलाके में भारी पुलिसबल तैनात कर दिया गया है। साथ ही पुलिस ने पूरे इलाके में फ्लैग मार्च किया है। पथराव करने वालों की पहचान की जा रही है। पुलिस उन लोगों की भी तलाश कर रही है, जिन्होंने भीड़ को भड़काया है।
रेलवे ट्रैक पर बैठे गुस्साए लोग
ऋषिकेश में वन विभाग की गुमानीवाला और शिवाजी नगर क्षेत्र में खाली पड़ी वन भूमि के चिन्हीकरण की कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान कार्रवाई से नाराज लोग रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। ट्रेनों को रोकने की कोशिश की गई। इस दौरान पुलिस के साथ प्रशासन की टीम ने लोगों को समझने की कोशिश की तभी भीड़ से किसी ने पुलिस पर पत्थर फेंक दिया और देखते ही देखते पथराव होने से स्थिति गंभीर हो गई।
पीएसी की टीम को भी बुलाया गया
बचाव में पुलिस और दूसरे सुरक्षा कर्मी पीछे हटे और लाठियां फटकार कर भीड़ को खदेड़ने की कोशिश की लेकिन भीड़ मौके पर डटी रही। मौके पर पीएसी की टीम को बुलाया गया। देर रात तक पुलिस और प्रशासन के अफसर मौके पर टिके रहे।
बाधा डालने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
देहरादून के एसएसपी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वन विभाग अपनी कार्रवाई कर रहा है। इसमें बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

पीएम मोदी की तारीफ कर कांग्रेस में घिरे दिग्विजय, अब राहुल ने बोला-‘आप अपना काम कर गए’

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सूत्रों के मुताबिक रविवार को पार्टी की स्थापना दिवस के मौके पर कार्यक्रम के दौरान जब उनकी मुलाकात दिग्विजय सिंह से हुई तो राहुल गांधी ने मजाकिया लहजे में दिग्विजय सिंह को कहा-‘आप अपना काम कर गए। आप बदमाशी कर गए।नई दिल्ली: कांग्रेस के सीनियर नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से पहले बीजेपी और आरएसएस की संगठन शक्ति की तारीफ कर पार्टी के लिए असहज हालात पैदा कर दिया। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई भी दी और कहा कि वे पीएम नरेंद्र मोदी और आरएसएस की नीतियों के धुर विरोधी हैं। लेकिन तब तक पार्टी के अंदरूनी हालात काफी असहज हो चुके थे। सूत्रों के मुताबिक रविवार को पार्टी की स्थापना दिवस के मौके पर कार्यक्रम के दौरान जब राहुल गांधी की मुलाकात दिग्विजय सिंह से हुई तो उन्होंने मजाकिया लहजे में दिग्विजय सिंह को कहा-‘आप अपना काम कर गए। आप बदमाशी कर गए।
दिग्विजय मामले में रेवंत रेड्डी की एंट्री
उधर, तेलंगाना के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता रेवंत रेड्डी की भी इस मामले में एंट्री हुई। उन्होंने दिग्विजय सिंह का नाम तो नहीं लिया लेकिन इशारों पलटवार किया। रेवंत रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 1991 में पीवी नरसिम्हा राव और 2004 और 2009 में डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाकर बहुत अच्छा फैसला लिया था। रेड्डी के इस बयान को दिग्विजय सिंह की पोस्ट से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कार्य समिति की बैठक के दौरान भी पार्टी संगठन में विक्रेंद्रीकरण की पैरवी की। सूत्रों ने यह भी बताया कि दिग्विजय को कुछ सीनियर नेताओं ने टोका और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी टोकते हुए यह कहा कि अभी और नेताओं को बोलना है। कार्य समिति की बैठक शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पुरानी तस्वीर शेयर की जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं तथा उनके पीछे बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं।

दिग्विजय सिंह ने पोस्ट किया, ‘‘कोरा वेबसाइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।’’ उनके इस पोस्ट के बाद विवाद खड़ा हो गया।दिग्विजय ने क्या सफाई दी?
इसके बाद दिग्विजय सिंह ने सफाई दी। उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, ‘‘मैंने संगठन की तारीफ की है। मैं RSS और मोदी जी का घोर विरोधी था, घोर विरोधी हूं और रहूंगा।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने कार्य समिति की बैठक में विकेंद्रीकरण की पैरवी की है, सिंह ने कहा, ‘‘मुझे जो कहना था, वो मैंने बैठक के दौरान कह दिया।’’ उन्होंने यह भी कहा, ‘‘क्या संगठन को मजबूत करना या उसकी तारीफ करना, बुरी बात है।’’

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अगर आप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष के तौर पर मेरे कार्यकाल को देखेंगे तो पाएंगे कि मैंने विकेंद्रीकृत तरीके से काम किया। यह मेरा विचार है।’’ कार्य समिति की बैठक से पहले और बैठक के दौरान दिग्विजय का यह रुख कांग्रेस नेताओं को असहज करने वाला था। बैठक के बाद जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया तो पत्रकारों के सवाल नहीं लिए।

स्मृति मंधाना ने तोड़ा खुद का ही वर्ल्ड रिकॉर्ड, इंटरनेशनल क्रिकेट में ऐसा करने वाली इकलौती बल्लेबाज

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स्मृति मंधाना ने श्रीलंका के खिलाफ चौथे टी20 मैच में शानदार बल्लेबाजी की है और उन्होंने बेहतरीन 80 रनों की पारी खेली। उनकी इस पारी की वजह से ही टीम बड़ा स्कोर बना पाई।भारतीय टीम की सुपरस्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना श्रीलंका के खिलाफ शुरुआती तीन टी20 मैचों में अपनी लय में दिखाई नहीं दीं, लेकिन चौथे मैच में उन्होंने फॉर्म में वापसी की और दमदार खेल दिखाया। उन्होंने मैदान पर उतरते ही ताबड़तोड़ बैटिंग की। उनकी बल्लेबाजी का श्रीलंकाई बॉलर्स के पास कोई जवाब नहीं था। मंधाना ने मैच में दमदार अर्धशतक लगाया और टीम को जीत दिलाने के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड दिया। भारत ने मैच 30 रनों से अपने नाम किया।
स्मृति मंधाना ने किया कमाल
स्मृति मंधाना ने मैच में 48 गेंदों में कुल 80 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने अपनी पारी में 11 चौके और तीन छक्के जड़े। वह श्रीलंकाई बॉलर मालशा शेहानी की गेंद पर बड़ा स्ट्रोक लगाने के चक्कर में इमेशा दुलानी को कैच दे बैठीं। इसी के साथ उन्होंने महिला इंटरनेशनल क्रिकेट के एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने का खुद का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। मंधाना ने साल 2025 में इंटरनेशनल क्रिकेट में 1703 रन बनाए हैं।
वह पहली ऐसी महिला प्लेयर हैं, जिन्होंने एक साल में 1700 से ज्यादा रन बनाए हैं। उनसे पहले ऐसा कोई भी महिला प्लेयर नहीं कर पाई थी। इससे पहले उन्होंने साल 2024 में इंटरनेशनल क्रिकेट में कुल 1659 रन बनाए थे। अब वह अपने इस कीर्तिमान को पीछे छोड़ चुकी हैं।
साल 2025 में मंधाना ने भारतीय टीम के लिए बनाए खूब रन
स्मृति मंधाना ने साल 2025 में भारतीय टीम के लिए बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है और वह टीम के लिए वनडे वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीतने वाली टीम की सदस्य भी रही हैं। उन्होंने साल 2025 के 23 वनडे मैचों में कुल 1362 रन बनाए हैं, जिसमें पांच शतक और पांच अर्धशतक शामिल रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने T20I क्रिकेट में साल 2025 में कुल 9 मैचों में कुल 341 रन बनाए हैं। इस तरह से उन्होंने इस साल कुल 1703 रन बनाए हैं।
विस्फोटक बल्लेबाजी में माहिर हैं स्मृति स्मृति मंधाना हमेशा से ही अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए फेमस रही हैं और उनके पास वह काबिलियत है कि वह किसी भी गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा सकें। वह चंद गेंदों में ही मैच का रुख बदलने में माहिर हैं। एक बार वह क्रीज पर टिक गईं, तो उनके बल्ले से बड़ी पारी आना बिल्कुल तय है।

एयरपोर्ट पर उमड़ी हजारों की भीड़ के बीच गिरे थलापति विजय, सुपरस्टार के लिए दीवानगी की हदें पार कर रहे फैन, वीडियो देख इंटरनेट पर मची खलबली

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सुपरस्टार थलापति विजय की एक झलक पाने को एयरपोर्ट हजारों की भीड़ उमड़ी। बेकाबू भीड़ के चलते अफरातफरी और हंगामे जैसा माहौल हो गया। जैसे-तैसे विजय इस भीड़ को पार करते हुए अपनी गाड़ी तक पहुंचे, अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।क्या आपने किसी भी स्टार के लिए ऐसी दीवानगी देखी है? ये सुपरस्टार जहां भी जाता है, फैंस इसे घेर लेते हैं, हजारों की भीड़ के बीच ये एक्टर खलबली मचाने के लिए जाना जाता है। स्टार पावर दिखाने में ये कभी भी नहीं चूकता, ये कोई और नहीं बल्कि थलपति विजय हैं। विजय के साथ ठीक ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ। रविवार देर रात थलपति विजय के चेन्नई लौटने पर एयरपोर्ट पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मलेशिया से लौटे एक्टर और राजनेता विजय की एक झलक पाने के लिए फैंस की दीवानगी चरम पर देखने को मिली। पुलिस ने जैसे-तैसे थलापति विजय को भीड़ के बीच से निकाला और हजारों की संख्या में उमड़े लोगों को नियंत्रित करने की कोशिश की।
अफरातफरी के बीच गिरे थलापति
इतना ही नहीं इस फैंस की भारी भीड़ के बीच थलापति विजय अपना संतुलन खो बैठे और फिसलकर गिर पड़े। हालांकि राहत की बात यह रही कि उन्हें किसी तरह की चोट नहीं आई। तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के अध्यक्ष और लोकप्रिय अभिनेता विजय मलेशिया में आयोजित ‘जन नायकन’ फिल्म के ऑडियो लॉन्च इवेंट में शामिल होने के बाद रविवार रात चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचे थे। जैसे ही वह एयरपोर्ट के बाहर निकलने की ओर बढ़े, बड़ी संख्या में मौजूद फैंस उनकी एक झलक पाने के लिए आगे आ गए। भीड़ अचानक बेकाबू हो गई, जिससे उनकी गाड़ी के पास कुछ समय के लिए हंगामा मच गया। इसी अफरातफरी के दौरान विजय का संतुलन बिगड़ गया और वह अपनी कार तक पहुंचने से ठीक पहले जमीन पर गिर पड़े।
इस तरह निकले भीड़ से बाहर
मौके पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत स्थिति संभाली, उन्हें सहारा देकर उठाया और सुरक्षित रूप से गाड़ी तक पहुंचाया। पूरी घटना कुछ ही सेकंड में खत्म हो गई और हालात जल्द ही काबू में आ गए। बताया जा रहा है कि विजय पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें कोई चोट नहीं आई। यह घटना उस वक्त हुई जब विजय कुआलालंपुर से लौटे थे, जहां उन्होंने अपनी आखिरी फिल्म के भव्य ऑडियो लॉन्च में हिस्सा लिया था। कुछ टीवी रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया कि एयरपोर्ट परिसर के अंदर विजय के काफिले की एक गाड़ी को हल्की दुर्घटना का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस संबंध में अब तक अधिकारियों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
‘जन नायकन’ ऑडियो लॉन्च इवेंट में दिखी थी स्टार पावर
इससे पहले 27 दिसंबर को विजय ने कुआलालंपुर के बुकिट जलील स्टेडियम में आयोजित ‘जन नायकन’ ऑडियो लॉन्च इवेंट में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था। इस कार्यक्रम में करीब एक लाख लोगों की मौजूदगी बताई गई, जिसके बाद मलेशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इसे मलेशिया में किसी ऑडियो लॉन्च इवेंट में सबसे ज्यादा दर्शकों की उपस्थिति का रिकॉर्ड घोषित किया। इस मंच से विजय ने अपने भविष्य को लेकर एक अहम बात भी साझा की। उन्होंने एक बार फिर यह साफ किया कि वह सार्वजनिक जीवन और राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सिनेमा से दूरी बनाने का फैसला कर चुके हैं।
विजय ने दिया था भावुक अपने भावुक भाषण में विजय ने कहा कि जब उन्होंने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी, तो उन्हें लगा था कि वह रेत का एक छोटा सा घर बना रहे हैं, लेकिन दर्शकों ने उनके लिए एक महल और किला खड़ा कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अपने चाहने वालों के सम्मान और प्यार के लिए वह खुद सिनेमा को अलविदा कह रहे हैं। एयरपोर्ट पर हुई यह घटना भले ही पल भर की रही हो, लेकिन इसने एक बार फिर यह दिखा दिया कि थलपति विजय के लिए उनके फैंस की दीवानगी किस हद तक जाती है।

कागज़ों में मीटर, खेतों में अंधेरा! बेतिया में किसान को मीटर आवंटित, लेकिन बिजली अब भी इंतज़ार में

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बेतिया।
सरकारी फाइलों में सब कुछ “ओके”, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट। पश्चिम चम्पारण जिले के बेतिया विद्युत प्रमंडल से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक किसान को कृषि कार्य के लिए बिजली मीटर तो आवंटित कर दिया गया, भुगतान भी पूरा हो गया, तमाम स्तरों से स्वीकृति भी मिल गई, लेकिन महीनों बाद भी खेत तक बिजली नहीं पहुंच सकी।

मामला गोपालपुर थाना क्षेत्र के ग्राम परसौना, पोस्ट बकुलहर मठ निवासी किसान जोगिन्दर साह से जुड़ा है। उपभोक्ता संख्या 520315988944 के तहत उन्होंने कृषि कार्य हेतु मीटर लगाने के लिए विधिवत आवेदन दिया था। आवेदन में साफ तौर पर उल्लेख किया गया था कि सिंचाई और खेती के लिए बिजली की अत्यंत आवश्यकता है।

आवेदन की स्थिति पर नज़र डालें तो तस्वीर और भी चौंकाने वाली है।
दस्तावेज सत्यापन पूरा, सीएफ स्वीकृत, टीएफ स्वीकृत, भुगतान पूर्ण, मीटर उपभोक्ता को आवंटित, मीटर इंस्टॉलेशन के लिए उपभोक्ता डाउनलोडेड, मीटर अप्रूव्ड — यानी सिस्टम में एक भी स्टेप पेंडिंग नहीं। इसके बावजूद आज तक न तो मीटर लगाया गया और न ही खेतों में बिजली पहुंची।

किसान जोगिन्दर साह का कहना है कि उन्होंने 3 अक्टूबर 2025 को आवेदन किया, सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी कीं, विभाग की ओर से कोई आपत्ति नहीं जताई गई, फिर भी बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिल रहा है। खेतों में फसल सूख रही है और किसान प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कार्यपालक अभियंता कार्यालय, विद्युत बेतिया से 19 अप्रैल 2025 को पत्रांक 673 के तहत मीटर से जुड़ी प्रक्रिया पूरी दर्शाई जा चुकी है, तो फिर जमीनी स्तर पर काम क्यों अटका हुआ है? क्या यह सिस्टम की सुस्ती है या फिर जिम्मेदारों की लापरवाही?

यह मामला अकेले एक किसान का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों किसानों की आवाज़ बनता जा रहा है, जो सरकारी योजनाओं में “ऑनलाइन स्वीकृति” और “ऑफलाइन हकीकत” के बीच पिस रहे हैं। अगर समय रहते बिजली कनेक्शन नहीं मिला, तो इसका सीधा असर खेती, उत्पादन और किसान की आय पर पड़ेगा।

अब देखना यह है कि विद्युत विभाग इस खबर के बाद हरकत में आता है या फिर किसान जोगिन्दर साह की फाइल यूं ही टेबल से टेबल घूमती रहेगी।

 

खेत की मेड़ को लेकर खूनी संघर्ष, लाठी-डंडों से हमला; पीड़ित बोला– जान से मारने की धमकी, पुलिस ने FIR तक नहीं लिखी

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धार/कुक्षी।
जिले के कुक्षी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम भैसलाय (सोल्यापुरा) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां खेत की मेड़ (सेंडे का पत्थर) को लेकर हुए विवाद में एक किसान के साथ बेरहमी से मारपीट किए जाने का आरोप है। पीड़ित ने न केवल गंभीर हमले की शिकायत की है, बल्कि पुलिस पर भी एफआईआर दर्ज न करने और दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंच चुका है, फिर भी कार्रवाई लंबित बताई जा रही है।

पीड़ित बलराम पिता मोहन देसाई भिलाला (27 वर्ष) निवासी ग्राम भैसलाय, तहसील कुक्षी, जिला धार ने बताया कि उसका खेत आरोपी राजु बामनिया पिता भंगड़ा के खेत से लगा हुआ है। 12 नवंबर 2025 की सुबह करीब 8 बजे जब वह अपने खेत पर काम कर रहा था, तब उसने देखा कि खेत की सीमा तय करने वाला पत्थर उखाड़ दिया गया है।

जब बलराम ने इस बारे में राजु बामनिया के बेटे अजय से सवाल किया तो वह गाली-गलौज करने लगा और देखते ही देखते लात-घूंसे से मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि कुछ ही देर में अजय की मां कनीबाई और पिता राजु बामनिया भी मौके पर पहुंचे और हाथों में लकड़ी के डंडे लेकर बलराम पर हमला कर दिया।

पीड़ित के अनुसार तीनों ने मिलकर उसे बेरहमी से पीटा, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। घटना के समय उसकी साली निर्मला सहित आसपास के लोग मौजूद थे, जिन्होंने बीच-बचाव कर उसकी जान बचाई। आरोप है कि जाते समय आरोपी परिवार ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी।

बलराम का कहना है कि उसने इस घटना की रिपोर्ट थाना कुक्षी में दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने न तो सही धाराओं में मामला दर्ज किया और न ही उसका मेडिकल कराया। मजबूर होकर उसने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसका क्रमांक 35538843 है।

पीड़ित का आरोप है कि जब वह शिकायत की प्रगति जानने थाने पहुंचा तो वहां एक पुलिसकर्मी ने उसका मोबाइल छीनकर हेल्पलाइन शिकायत ही बंद करवा दी और धमकी दी कि ज्यादा बोलोगे तो थाने में बंद कर दूंगा। इसके बाद उसने दोबारा शिकायत क्रमांक 36014174 (दिनांक 24-12-2025) दर्ज कराई, जो फिलहाल “ओपन” स्थिति में बताई जा रही है।

पीड़ित का कहना है कि अब तक न तो एफआईआर दर्ज हुई है, न मेडिकल कराया गया और न ही आरोपियों पर कोई कार्रवाई हुई है। उसने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उसे न्याय मिल सके।

यह मामला न केवल ग्रामीण स्तर पर बढ़ते भूमि विवाद और हिंसा की तस्वीर दिखाता है, बल्कि पुलिस कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस पूरे प्रकरण में कब तक संज्ञान लेते हैं और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।

 

तीन महीने तक टैक्सी चलाई, अब तक नहीं मिली सैलरी फरीदाबाद में टैक्सी चालक का आरोप, मालिक ने रोके 30 हजार रुपये

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फरीदाबाद।
जिले के बडकल कॉलोनी निवासी 45 वर्षीय टैक्सी चालक बाबू खान ने टैक्सी मालिक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बाबू खान का कहना है कि उन्होंने तीन महीने तक ईमानदारी से टैक्सी चलाई, लेकिन तय सैलरी के बावजूद अब तक उन्हें एक भी रुपया नहीं दिया गया।

पीड़ित बाबू खान के अनुसार वह पेशे से टैक्सी चालक हैं और पिछले तीन महीनों से सनी सरदार नामक व्यक्ति की टैक्सी चला रहे थे। दोनों के बीच हर महीने 10 हजार रुपये सैलरी तय हुई थी। बाबू खान ने शुरू में ही साफ कह दिया था कि वह हर महीने पैसे नहीं लेंगे, बल्कि तीन महीने की पूरी रकम एक साथ लेंगे, क्योंकि उन्हें किसी अन्य व्यक्ति को पैसा देना था।

16 दिसंबर को पूरे हुए तीन महीने, भुगतान अब तक लंबित
बाबू खान ने बताया कि 16 दिसंबर को उनके काम के पूरे तीन महीने हो गए, लेकिन इसके बावजूद सैलरी नहीं दी गई। जब भी वह पैसे की मांग करते हैं तो टैक्सी मालिक टालमटोल करता है और कहता है कि जब आएंगे तब पैसे दे देंगे। अब हालत यह है कि पैसे देने को लेकर साफ तौर पर हामी भी नहीं भरी जा रही।

फोन पर आश्वासन, जमीन पर कुछ नहीं
पीड़ित चालक का कहना है कि उन्होंने टैक्सी मालिक सनी सरदार से कई बार फोन पर संपर्क किया। बताया गया कि मालिक का मोबाइल नंबर 9560 22 XX 01 है। हर बार कॉल करने पर सिर्फ आश्वासन दिया गया, लेकिन आज तक पैसे नहीं दिए गए।

कर्जदार कर रहे दबाव, परिवार पर संकट
बाबू खान ने बताया कि उन्होंने भरोसे के साथ काम किया और इसी उम्मीद में पहले से लिए गए कर्ज का भुगतान रोक रखा था। अब जिन लोगों को पैसा देना है, वे लगातार दबाव बना रहे हैं। इससे उनका परिवार आर्थिक और मानसिक तनाव में है।

प्रशासन से न्याय की गुहार
पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में हस्तक्षेप किया जाए और उनकी मेहनत की कमाई दिलाई जाए। बाबू खान का कहना है कि गरीब और मेहनतकश लोगों की सैलरी रोकना अन्याय है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

 

2025 में अजेय रहे NDA की अब 2026 पर नजर, इस बार इन 5 राज्यों में होगी अग्निपरीक्षा

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2025 में दिल्ली और बिहार में जीत के बाद NDA का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब 2026 में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव NDA के लिए बड़ी अग्निपरीक्षा होंगे।2025 का साल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी कि NDA के लिए राजनीतिक दृष्टि से बेहद सफल रहा। दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों में मिली जीत ने बीजेपी के नेतृत्व वाले इस गठबंधन का आत्मविश्वास बढ़ाया है। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने अपने दम पर सरकार बनाकर एक दशक से अधिक समय बाद सत्ता में वापसी की, जबकि बिहार में बीजेपी ने जेडीयू के साथ मिलकर सत्ता बरकरार रखी। दोनों ही राज्यों में आए ऐतिहासिक चुनावी नतीजों के बाद अब NDA की निगाह 2026 में होने वाले 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों पर टिकी है।
2025 की जीत क्यों रही अहम?
दिल्ली और बिहार दोनों ही चुनावों के नतीजे BJP और NDA के लिए अलग-अलग मायनों में महत्वपूर्ण रहे। दिल्ली में बीजेपी की जीत को शहरी मतदाताओं के बीच संगठन की पकड़ मजबूत होने के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। वहीं, बिहार में गठबंधन राजनीति की जटिलताओं के बावजूद सत्ता में बने रहना यह दिखाता है कि बीजेपी क्षेत्रीय दलों के साथ संतुलन साधने में सफल रही है। इन दोनों जीतों ने यह संदेश दिया कि NDA राष्ट्रीय और प्रांतीय, दोनों स्तरों पर चुनावी रणनीति गढ़ने और फिर उन्हें जमीनी स्तर पर उतारने में सक्षम है।
2026 में इन 5 राज्यों में हैं चुनाव
2026 में जिन 5 राज्यों यानी कि असम, पश्चिम बंगाल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनका राजनीतिक महत्व अलग-अलग कारणों से है। इनमें से कुछ राज्यों में NDA पहले से सत्ता में है, तो कुछ ऐसे हैं जहां वह कभी भी सत्ता में नहीं आई। इन चुनावों के नतीजे न केवल राज्यों की भविष्य की राजनीति तय करेंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले NDA की दिशा और दशा का संकेत भी देंगे। आइए, अब संक्षेप में इन पांचों राज्यों के हालात पर गौर करते हैं:असम में सत्ता बचाने की चुनौती: असम में NDA पहले से सत्ता में है। यहां मुख्य चुनौती सरकार के कामकाज को लेकर जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। बुनियादी ढांचा, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे निर्णायक हो सकते हैं। सत्ता विरोधी रुझान से निपटना NDA के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान होगा। हालांकि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की लोकप्रियता सूबे में अभी भी बरकरार है और विपक्ष के लिए उन्हें हटा पाना आसान नहीं होगा।
बंगाल में कड़ी टक्कर की उम्मीद: पश्चिम बंगाल में NDA के लिए राह आसान नहीं है हालांकि पिछले कुछ महीनों में सूबे की सियासत में काफी बदलाव देखने को मिला है। TMC से निकाले गए विधायक हुमायूं कबीर द्वारा नई पार्टी बनाने के बाद अब सियासी पंडितों की नजरें उनके अगले कदमों पर हैं। वहीं, बीजेपी ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य में अपना जनाधार बढ़ाया है, लेकिन सत्ता तक पहुंचने के लिए उसे ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ बढ़ानी होगी और हिंदुत्व के मुद्दे पर लोगों को एकजुट करना होगा। कुल मिलाकर 2026 का चुनाव सूबे के लिए आने वाले कई सालों की सियासत तय करेगा।
NDA के लिए तमिलनाडु का किला अहम: तमिलनाडु लंबे समय से क्षेत्रीय दलों की राजनीति का केंद्र रहा है। यहां NDA के लिए मुख्य सवाल यह है कि वह खुद को एक व्यवहारिक विकल्प के रूप में कैसे पेश करता है क्योंकि बीते कुछ महीनों में यहां गठबंधन में काफी उथल-पुथल देखने के मिली है। हालांकि BJP और AIADMK फिर से साथ आ गए हैं, लेकिन वह स्टालिन के स्थायी नेतृत्व को कितनी चुनौती दे पाएंगे, यह देखने वाली बात होगी। बीजेपी के लिए राहत की बात यह है कि अन्नामलाई के नेतृत्व में पार्टी ने पिछलेकुछ सालों में तमिल राजनीति में अपना असर दिखाया है।
केरल में बड़ा असर छोड़ना चाहेगा NDA: केरल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों ने बीजेपी के साथ-साथ एनडीए के लिए उम्मीदें जगा दी हैं। सूबे के चुनावी इतिहास में पहली बार इसकी राजधानी तिरुवनंतपुरम में बीजेपी का मेयर चुना गया है। इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनावों में त्रिशूर लोकसभा सीट पर बीजेपी के सुरेश गोपी की जीत ने पार्टी में नया आत्मविश्वास भरा था। यहां NDA का लक्ष्य अपनी सांगठनिक उपस्थिति को और मजबूत करना और शहरी मध्यम वर्ग तथा युवाओं के बीच समर्थन बढ़ाना होगा।
पुदुचेरी में गठबंधन संतुलन की परीक्षा: पुदुचेरी जैसे छोटे केंद्रशासित प्रदेश में स्थानीय मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति से अधिक प्रभावी रहते हैं। यहां NDA के सामने गठबंधन सहयोगियों के बीच तालमेल बनाए रखने और प्रशासनिक स्थिरता का भरोसा दिलाने की चुनौती होगी। बीजेपी यहां की सरकार में जूनियर पार्टनर है और वह इस बार के चुनावों में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहेगी।
NDA के लिए बेहद अहम है 2026
अगर यह कहा जाए कि 2026 बीजेपी के साथ-साथ एनडीए के लिए अहम साल है तो गलत नहीं होगा। बीजेपी जहां इस बार पश्चिम बंगाल में जीत दर्ज करना चाहेगी वहीं गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर तमिलनाडु में भी परचम लहराने पर उसकी नजर होगी। केरल में बीजेपी या एनडीए अभी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, लेकिन फिर भी उसकी कोशिश सूबे की सियासत में बड़ा खिलाड़ी बनने की होगी। असम और पुदुचेरी में NDA की कोशिश एक बार फिर अपनी सत्ता बरकरार रखने की होगी। अगर बीजेपी इस साल 5 में से किन्हीं 4 राज्यों की सत्ता में भी हिस्सेदार बन पाती है तो NDA को 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए भी बूस्ट मिलेगा।