Sunday, July 12, 2026
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T20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए एक और टीम का ऐलान, आईपीएल से बैन खिलाड़ी को दे दी कप्तानी

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आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 के लिए अब इंग्लैंड ने भी अपनी टीम का ऐलान कर दिया है। टीम इससे पहले श्रीलंका के खिलाफ टी20 सीरीज खेलती हुई नजर आएगी। हैरी ब्रूक को टीम का कप्तान बनाया गया है।अगले साल ​फरवरी में टी20 वर्ल्ड कप का आयोजन किया जाना है। इस बार इसकी मेजबानी भारत और श्रीलंका के पास है। टीम इंडिया का ऐलान तो पहले ही इस आईसीसी टूर्नामेंट के लिए कर दिया गया था, अब धीरे धीरे बाकी टीमों की भी घोषणा हो रही है। इस बीच अब से कुछ ही देर पहले इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने भी अपनी टीम की घोषणा कर दी है। खास बात ये है कि टीम की कमान हैरी ब्रूक को सौंपी गई है, जो आईपीएल से बैन कर दिए गए थे। चलिए इस नजर डालते हैं कि इंग्लैंड ने जिस टीम पर दांव लगाया है, उसमें कौन कौन से खिलाड़ी शामिल हैं।

जोफ्रा आर्चर खेलेंगे टी20 विश्व कप, श्रीलंका के खिलाफ भी होगी सीरीज
इंग्लैंड की टीम टी20 वर्ल्ड कप के साथ ही श्रीलंका के खिलाफ टी20 सीरीज भी खेलेगी। दोनों के लिए एक ही टीम चुनी गई है। हालांकि जोफ्रा आर्चर केवल टी20 वर्ल्ड कप खेलेंगे और ब्राइडन कार्स केवल श्रीलंका के खिलाफ टी20 सीरीज खेलते हुए नजर आएंगे। टीम की कमान जैसा कि हमने पहले ही बताया कि हैरी ब्रूक को दी गई है। वहीं पूर्व कप्तान जॉस बटलर और फिल साल्ट भी टीम में नजर आने वाले हैं। विल जैक्स और सैम करन को टीम में जगह दी गई है।
विश्व कप में 8 फरवरी को पहला मैच खेलेगी इंग्लैंड की टीम
वर्ल्ड कप में इंग्लैंड को ग्रुप सी में रखा गया है। इसमें नेपाल, वेस्टइंडीज और बांग्लादेश की टीमों के अलावा इटली को भी रखा गया है। इंग्लैंड की टीम अपना पहला मुकाबला 8 फरवरी को नेपाल के खिलाफ खेलती हुई नजर आएगी। ये मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। इंग्लैंड का सबसे मुश्किल मैच वेस्टइंडीज से ही होगा। बाकी टीमें तो काफी हल्की नजर आ रही हैं।

हैरी ब्रूक को दो साल के लिए किया गया है आईपीएल से बैन
इस बीच इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक की बात की जाए तो पिछले साल आईपीएल टीम में चुने जाने के बाद भी ऐनवक्त पर मना करने के कारण बीसीसीआई ने दो साल के लिए उन्हें आईपीएल से बैन कर दिया था। यानी वे इस साल भी आईपीएल नहीं खेल पाएंगे। देखना होगा कि हैरी ब्रूक की कप्तानी में इंग्लैंड की टीम कैसा प्रदर्शन करती है।

T20I वर्ल्ड कप 2026 के लिए इंग्लैंड की टीम: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जॉस बटलर, ब्राइडन कार्स, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल साल्ट, जोश टोंग और ल्यूक वुड।

काशी विश्वनाथ में 2 KM लंबी लाइन, महाकाल मंदिर में पैर रखने की जगह नहीं, जानिए नए साल पर बाकी धार्मिक स्थलों का हाल

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काशी से कटरा तक, अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक नए साल पर भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है। अयोध्या में रामलला और काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए मंदिर के बाहर 2–2 किलोमीटर लंबी लाइनें लगी हैं।नए साल को लेकर देशभर के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ है। कहीं लंबी लाइन लगी है तो कहीं पैर रखने तक की जगह नहीं है। आस्था के सैलाब को देखते हुए कई मंदिरों ने नई गाइडलाइंस जारी कर दी है। 31 दिसंबर को शिरडी साईं मंदिर श्रद्धालुओं के लिए पूरी रात खुला रहेगा। वहीं, वृंदावन में बांके बिहारी प्रशासन ने लोगों से मंदिर ना आने की अपील की है।

काशी से कटरा तक, अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक नए साल पर भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है। अयोध्या में रामलला और काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए मंदिर के बाहर 2–2 किलोमीटर लंबी लाइनें लगी हैं। भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है।

श्रद्धालुओं को ना आने की भीड़ को देखते हुए बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन भी अब श्रद्धालुओं को आने से परहेज की अपील कर रहा है। भीड़ के बीच होटल-गेस्ट हाउस फुल हो चुके हैं। बाहर लंबी लाइन लगाने के बाद मंदिर के अंदर भी भक्तों को धक्के खाने पड़ रहे हैं। सुबह मंदिर के पट खुलने से पहले हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, तो रात में पट बंद होने के बाद भी यही हालात हैं। ऐसे में मंदिर प्रबंधन ने एडवाइजरी जारी कर श्रद्धालुओं से अभी वृंदावन का प्लान टालने की अपील की है।

प्रशासन की अपील के बाद भी श्रद्धालुओं के कदम नहीं रुक रहे हैं पिछले कुछ दिनों से करीब 4 से 5 लाख श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन पहुंच रहे हैं जबकि 31 दिसंबर और 1 जनवरी को ये संख्या और बढ़ने की संभावना है।हर रोज वाराणसी पहुंच रहे 3 से 4 लाख श्रद्धालु
बाबा की नगरी काशी में भी 25 दिसंबर के बाद से श्रद्धालुओं का सैलाब दिख रहा है। हर दिन पर्यटकों की संख्या नए रिकॉर्ड बना रही है। 3 से 4 लाख श्रद्धालु हर रोज वाराणसी पहुंच रहे हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर के बाहर 2–2 किलोमीटर की लंबी लाइनें लग रही हैं जिसे देखते हुए मंदिर में स्पर्श दर्शन पर 2 जनवरी तक के लिए रोक लगा दी गई है। वहीं सभी तरह के प्रोटोकॉल बंद कर दिए गए हैं। भक्तों की सुरक्षा के लिए मंदिर के चारों एंट्री गेट को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। सिक्योरिटी के लिए बैरिकेडिंग कर पूरे इलाके में CCTV से नजर रखी जा रही है।नए साल पर मंदिरों में नए नियम जारी
बांके बिहारी- मंदिर में सुबह-शाम का दर्शन का समय बदला
वैष्णो देवी- 24 घंटे में दर्शन के बाद बेस कैंप लौटना होगा
महाकाल- भस्म आरती की ऑनलाइन बुकिंग को बंद किया गया
अयोध्या- आरती-दर्शन के ऑनलाइन पास पूरी तरह से बुक
खाटूश्याम- 2 जनवरी तक VIP दर्शन पूरी तरह बंद
रामनगरी में उमड़ा भक्तों का सैलाब
रामनगरी अयोध्या में भी इस समय भीड़ काफी है। हर रोज 1 लाख से ज्यादा भक्त प्रभु श्री राम के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। आरती और दर्शन के लिए जारी किए जाने वाले ऑनलाइन पास पूरी तरह बुक हो चुके हैं। हनुमानगढ़ी में भी भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है और नए साल पर भीड़ और भी होने की संभावना है। ऐसे में पुलिस प्रशासन ने स्पेशल अरेंजमेंट किए हैं। जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाई गई है ताकि भीड़ को कंट्रोल किया जा सके। नए साल के मौके पर यहां 2 लाख से अधिक भक्तों के पहुंचने का अनुमान है।
श्राइन बोर्ड ने नई गाइडलाइंस जारी की
वैष्णो देवी के दर्शन के लिए भी कटरा में श्रद्धालुओं की भीड़ है। भारी भीड़ को देखते हुए श्राइन बोर्ड ने नई गाइडलाइंस जारी की है। इसमें RFID Card मिलने के बाद यात्रियों को 10 घंटे के भीतर यात्रा शुरू करनी होगी। वहीं, दर्शन के 24 घंटे के अंदर वापस बेस कैंप लौटना होगा। दर्शन के समय में भी बदलाव किया गया है। दर्शन का समय सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक रहेगा।
शिरडी साईं मंदिर में 31 दिसंबर को रातभर दर्शन
वहीं साईं बाबा के दर्शन के लिए जाने वाले भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। नए साल के स्वागत को देखते हुए 31 दिसंबर को साईं मंदिर को रातभर दर्शन के लिए खोले रखने का फैसला किया गया है। साथ ही भीड़ की संभावना को देखते हुए साईं संस्थान ने विशेष तैयारी की है।

ईरान में भी भड़का बड़ा जेन Z आंदोलन, जानें सुप्रीम लीडर खामेनेई के खिलाफ क्यों हुई भारी बगावत?

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ईरान में भी युवा पीढ़ी (जेन-जी) का आंदोलन शुरू हो चुका है। जनता सड़कों पर उतर चुकी है और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रही है।तेहरानः नेपाल के बाद अब ईरान में भी जेन Z सड़कों पर उतर चुका है। तेहरान की सड़कों पर नारे लग रहे हैं.. दिस इज द फाइनल बैटल.. यानी ये निर्णायक लड़ाई है। इस नारे का सीधा मतलब है कि ईरान की अवाम सूप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ निर्णायक युद्ध में उतर गई है। सड़क से लेकर शॉपिंग मॉल्स तक में प्रदर्शन हो रहा है। खलीफा की आर्मी प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट चला रही है। बावजूद इसके भीड़ पीछे हटने को राजी नहीं है..लेकिन सवाल उठता है कि अचानक ईरान की अवाम इतनी आक्रमक क्यों हो गई?
ईरान में क्यों सड़कों पर उतरा जेन Z?
ईरान में आखिर अचानक सुप्रीम लीडर के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन क्यों होने लगे। आइये आपको इसके प्रमुख कारण बताते हैं। इसकी पहली वजह ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था है। दूसरा कारण सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की नीतियां हैं। ईरान में जेन जी के प्रदर्शन की शुरुआत आर्थिक संकट की वजह से हुई। शुरुआती प्रदर्शन तेहरान के दुकानदारों और व्यापारियों ने किया, लेकिन इस प्रदर्शन में फिर हर वर्ग जुड़ता गया… क्योंकि ईरान भयंकर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। अमेरिकी प्रतिबंध और क्षेत्रीय युद्धों की वजह से ईरान की मुद्रा ऑल टाइम लो पर पहुंच गई है। रविवार को रियाल की कीमत डॉलर के मुकाबले 14 लाख तक पहुंच गई…इससे ईरान में महंगाई बढ़ रही है। रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। इससे लोग भयानक गुस्से में हैं।

ईरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हुई झड़प
ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सोमवार और मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने तेहरान और मशहद में सुरक्षा बलों का सामना किया। विरोध प्रदर्शनों और सड़क पर हुई झड़पों के बीच अधिकारियों ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। ईरानी विपक्षी समूह नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान (एनसीआरआई) ने रिपोर्ट किया कि तेहरान में जुमहूरी भीड़ पर बड़ी संख्या में भीड़ ने मार्च किया और पास के इलाकों जैसे नासेर खोसरो स्ट्रीट और इस्तांबुल स्क्वायर में चले गए। तेहरान के केंद्रीय हिस्सों में प्रमुख सरकारी और व्यावसायिक क्षेत्रों के पास प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सड़क झड़पें हुईं। पुलिस ने शहर के केंद्र में को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और डंडे इस्तेमाल किए।

प्रदर्शनकारियों ने लगाए “बेशरम! बेशरम!” के नारे
प्रदर्शनकारियों ने “बेशरम! बेशरम!” के नारे लगाए और उन्होंने भी सुरक्षाबलों पर जवाबी हमले किए। इससे सुरक्षा बल कई क्षेत्रों से पीछे हटने पर मजबूर हुए। देशभर में व्यापारियों की हड़तालें और विरोध जारी रहे, तेहरान के ग्रैंड बाजार, लालेहजार स्ट्रीट, नासेर खोसरो और इस्तांबुल स्क्वायर सहित प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में दुकानें बंद रहीं। प्रदर्शनकारियों ने सत्ता में बैठे धर्मगुरुओं के पतन और नेतृत्व के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए। ऑनलाइन वीडियो में तेहरान के ग्रैंड बाजार के एक बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में प्रदर्शनकारियों को “डरो मत, हम सब साथ हैं” के नारे लगाते और सुरक्षा बलों को बेशरम कहते दिखाया गया।अन्य फुटेज में बाजार क्षेत्रों में “तानाशाह को मौत” के नारे लगाते हुए व्यापारियों से दुकानें बंद करने की अपील की गई, और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के इस्तीफे की मांग की गई।

अमित शाह बोले- चुन-चुनकर निकालेंगे घुसपैठिए, ममता का पलटवार- बांग्ला बोलने वाला हर शख्स बांग्लादेशी नहीं

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ममता ने कहा कि बीजेपी बांग्ला बोलने वाले हर शख्स को बांग्लादेशी बताती है, उन्हें देश से बाहर करने की बात कहती है। उन्होंने कहा कि वो बंगाल में बीजेपी की गुंडागर्दी नहीं चलने देंगी।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर कोलकाता पहुंच चुके हैं, लेकिन उनके बंगाल पहुंचने से पहले ही ‘बांग्लादेशी घुसपैठ’ का मुद्दा केंद्र बिंदु बन गया है। असम की धरती से अमित शाह ने एक-एक घुसपैठिये को देश से बाहर करने का संकल्प दोहराकर बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है।

कोलकाता रवाना होने से पहले अमित शाह असम के नगांव जिले में थे। वहां उन्होंने महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव जी की जन्मस्थली ‘बटाद्रवा थान पुनर्विकास परियोजना’ का उद्घाटन किया। 162 बीघा जमीन पर 222 करोड़ रुपये की लागत से बने इस भव्य तीर्थ स्थल का लोकार्पण करते हुए अमित शाह ने पिछली सरकारों पर कड़ा प्रहार किया।

अमित शाह ने कहा, “वर्षों से यह पवित्र स्थान घुसपैठियों के कब्जे में था। हमारी सरकार ने न केवल इसे घुसपैठियों से मुक्त कराया, बल्कि इसे एक विश्व-प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बनाया है। अब देश से एक-एक घुसपैठिये को चुन-चुनकर बाहर निकाला जाएगा।”
बांग्ला बोलने वाला हर शख्स बांग्लादेशी नहीं”
अमित शाह के कोलकाता पहुंचने से पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने बीजेपी पर ध्रुवीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी बांग्ला भाषा बोलने वाले हर नागरिक को संदिग्ध नजरों से देख रही है।

ममता बनर्जी ने कहा, “क्या बांग्ला भाषा में बात करने से कोई बांग्लादेशी हो जाता है? 1971 के समझौते के अनुसार जो लोग आए, वे भारत के नागरिक हैं। जिन्होंने देश के लिए खून दिया और जेल गए, आप उन्हें बाहर निकालने की बात कर रहे हैं? बंगाल में बीजेपी की यह गुंडागर्दी नहीं चलेगी।”

अमित शाह अगले दो दिन कोलकाता में रहेंगे, जहां वे संगठन की बैठकों के साथ-साथ आगामी चुनाव की रणनीति तैयार करेंगे। साफ है कि बीजेपी इस बार ‘घुसपैठ’ और ‘नागरिकता’ को बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनाने जा रही है, वहीं ममता बनर्जी इसे ‘बंगाली अस्मिता’ से जोड़कर जवाब दे रही हैं।

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में मजदूरों का शोषण: 11 घंटे पानी में काम, ₹600 मजदूरी, अब परिवार समेत घर खाली करने का दबाव

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भरूच (गुजरात) | अखिलेश्वर से विशेष रिपोर्ट

गुजरात के भरूच जिले के अखिलेश्वर क्षेत्र अंतर्गत कुकरवाड़ा गांव में चल रहे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से मजदूरों के शोषण का गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। झारखंड के गढ़वा जिले के निवासी संतोष कुमार, उनकी पत्नी सरोज और तीन छोटे बच्चों के साथ पिछले छह वर्षों से यहां काम कर रहे हैं। संतोष कुमार के अनुसार, वह और उनके साथ करीब 180 मजदूर बुलेट ट्रेन निर्माण कार्य में लगे हुए हैं, जहां उनसे अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया जा रहा है।

मजदूरों का आरोप है कि उनसे प्रतिदिन करीब 11 घंटे तक पानी के अंदर काम कराया जाता है, लेकिन इसके बदले उन्हें मात्र ₹600 की मजदूरी दी जाती है। जबकि सरकार द्वारा उसी काम के लिए ठेकेदार अखिलेश प्रजापति को ₹1100 प्रति मजदूर भुगतान किया जाता है। मजदूरों का कहना है कि बीच का पैसा ठेकेदार हड़प लेता है और इसी लालच में मजदूरों पर अत्याचार किया जाता है।

पीड़ित संतोष कुमार ने बताया कि ठेकेदार अखिलेश प्रजापति है, जो अपने बेटे नंदन, हरि ओम और अंश के नाम पर ठेकेदारी का काम चलाता है। आरोप है कि ठेकेदार न सिर्फ मजदूरी में कटौती कर रहा है, बल्कि अब मजदूरों को जबरन उनके रहने के कमरे खाली करने का दबाव भी बना रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि मजदूरों को पहले से कोई सूचना नहीं दी गई और अचानक कहा गया कि तुरंत कमरा खाली करो।

संतोष कुमार का कहना है कि वह अपनी पत्नी और छोटे बच्चों के साथ उसी कमरे में रह रहे हैं। अचानक घर खाली करने को कहे जाने से परिवार सड़क पर आ जाने की कगार पर है। मजदूरों का कहना है कि वे बाहरी राज्य से हैं, यहां कोई जान-पहचान नहीं है और अचानक कमरा खाली कर देना उनके लिए असंभव है। उनका सिर्फ इतना कहना है कि यदि कमरा खाली कराना है तो कम से कम 8 से 10 दिन का समय दिया जाए, ताकि वे दूसरा ठिकाना ढूंढ सकें।

पीड़ितों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे थाने भी गए थे, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। संतोष कुमार के अनुसार, थाने में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि “कमरा ठेकेदार का है, वह खाली करा सकता है।” मजदूरों का कहना है कि पुलिस ने उनकी मजबूरी और हालात को समझने की कोशिश तक नहीं की।

इस पूरे मामले ने श्रम कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर देश में बुलेट ट्रेन जैसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हीं परियोजनाओं को खड़ा करने वाले मजदूर न्यूनतम मजदूरी, सम्मान और सुरक्षित आवास तक से वंचित हैं। करीब 180 मजदूरों का भविष्य और उनके परिवारों की सुरक्षा आज सवालों के घेरे में है।

मजदूरों ने प्रशासन और श्रम विभाग से मांग की है कि ठेकेदार के खिलाफ जांच कराई जाए, बकाया और सही मजदूरी दिलाई जाए तथा जबरन कमरे खाली कराने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

खजरी चौक से चोरी ने छीनी रोजी-रोटी: दो बच्चों की मां नीतू कुमारी का सहारा भी उठा ले गए चोर

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समस्तीपुर | 
जिले के घरहोटा थाना क्षेत्र की रहने वाली 22 वर्षीय नीतू कुमारी की जिंदगी पर एक और संकट टूट पड़ा है। खजरी चौक पर फल की छोटी-सी दुकान लगाकर अपने दो बच्चों का पेट पाल रही नीतू का पूरा दुकान-सामान चोर उड़ा ले गए। शाम करीब 6 बजे दुकान बंद कर जब वह घर पहुंची, तभी मौका पाकर चोरों ने उसकी मेहनत पर हाथ साफ कर दिया।

नीतू कुमारी की शादी को सात साल हो चुके हैं। पति रोशन राय करीब ढाई साल पहले घर छोड़कर चला गया। आज तक न तो उसकी कोई खबर है और न ही कोई मदद। ससुराल पक्ष ने भी किनारा कर लिया। ऐसे में नीतू ने हिम्मत नहीं हारी और फल बेचकर बच्चों की परवरिश शुरू की। यही दुकान उसकी जिंदगी की एकमात्र कमाई थी।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, खजरी चौक पर पहले भी चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था ढीली है। नीतू का कहना है कि दुकान में रखे फल, तौल मशीन, टोकरियां और रोजमर्रा का सारा सामान चोरी हो गया। अब हाल यह है कि अगले दिन दुकान लगाने तक के पैसे नहीं बचे।

पीड़िता ने थाना घरहोटा में शिकायत देने की बात कही है, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं है। नीतू सवाल कर रही है कि जब एक बेसहारा महिला की रोजी-रोटी भी सुरक्षित नहीं, तो वह बच्चों को कैसे पाले। स्थानीय समाजसेवियों ने प्रशासन से मांग की है कि चोरी की घटना का खुलासा कर पीड़िता को जल्द राहत दी जाए और बाजार क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई जाए।

यह मामला केवल चोरी का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जहां संघर्ष कर रही एक महिला की मेहनत भी सुरक्षित नहीं रह पाती।

 

कुरुक्षेत्र से पत्नी के लापता होने और सोशल मीडिया वीडियो पर पति के गंभीर आरोप, प्रशासन से न्याय की गुहार

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कुरुक्षेत्र।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के एक गांव से पत्नी के लापता होने और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित पति ने पत्नी पर बच्चों को छोड़कर दूसरे युवक के साथ चले जाने, मानसिक प्रताड़ना और गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की मांग की है।
पीड़ित नरेश (40) पुत्र शिवानंद ने मीडिया को बताया कि उसकी शादी वर्ष 2007 में चांदनी (26) से हुई थी। दंपति के पांच बच्चे हैं। नरेश के अनुसार उनकी करीब 12 वर्षीय बेटी कोमल लंबे समय से पेट दर्द से पीड़ित थी और उसका इलाज चल रहा था। बच्ची अस्पताल में भर्ती थी, लेकिन आरोप है कि इस दौरान चांदनी उसकी देखभाल करने के बजाय एक युवक से मिलने चली जाती थी। नरेश का दावा है कि इसी लापरवाही के चलते वर्ष 2024 में उसकी बेटी की मृत्यु हो गई, जिसकी जिम्मेदार चांदनी और उसका प्रेमी शिवम है।
नरेश ने बताया कि तमाम परिस्थितियों के बावजूद वह परिवार को संभालते हुए पत्नी के साथ रह रहा था। 26 नवंबर की रात करीब 3 बजे चांदनी ने उसे उठाकर अंदर वाले कमरे में सोने को कहा। सुबह उठने पर उसे एक पर्ची मिली, जिसमें लिखा था कि वह अंबाला जा रही है।
पीड़ित का आरोप है कि चांदनी इंस्टाग्राम पर झारखंड निवासी युवक शिवम गोंड के संपर्क में थी और उसी के साथ घर छोड़कर चली गई। इसके बाद चांदनी ने युवक के साथ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए और नरेश को भी भेजे, जिनमें वह लव मैरिज की बात करती दिखाई दे रही है। नरेश के अनुसार 29 दिसंबर 2025 को भी चांदनी ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला, जिसकी लोकेशन गोरखपुर के किशोर नगर पार्क की बताई जा रही है।
नरेश ने यह भी बताया कि चांदनी एक लिखित नोट छोड़कर गई थी, जिसमें उसने लिखा कि वह अपनी मर्जी से 26 नवंबर की सुबह करीब 5 बजे पेहवा से घर छोड़कर जा रही है। नोट में यह भी उल्लेख था कि वह पति के साथ नहीं रहना चाहती, उसे परेशान किया गया है और उसे खोजने की कोशिश न की जाए।
पीड़ित का आरोप है कि चांदनी घर से सोने-चांदी के जेवर, करीब 40 हजार रुपये नकद और दो बैग कपड़े भी साथ ले गई। नरेश का कहना है कि वही युवक शिवम पहले भी करवा चौथ के दिन उनकी पत्नी के साथ उनके घर पर रह चुका है।
नरेश ने मीडिया को बताया कि पत्नी द्वारा बच्चों को छोड़कर चले जाने की बात को वह किसी तरह स्वीकार कर चुका था, लेकिन अब लगातार दूसरे युवक के साथ वीडियो भेजे जाने और सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने से वह गंभीर मानसिक तनाव में है। उसका यह भी आरोप है कि चांदनी लोकेशन बदल-बदलकर पुलिस और मीडिया को गुमराह कर रही है, ताकि वह किसी की पकड़ में न आ सके।
नरेश ने यह भी जानकारी दी की चांदनी यह झूठ बोल रही है की मेरे कोई बच्चे नहीं है मैं तो कँवारी हूँ। और यह बच्चे मेरी बहन के है। और अपने आशिक शुभम के परिवार वालों को भी झूठ बोल रही है की मेरे कोई बच्चा नहीं है मैं कँवारी हूँ।और मैं अपनी बहन के बच्चों को पाल रही थी। परन्तु नरेश ने बताया की चांदनी ही इन्हीं पांच बच्चों की माँ है क्योंकि बैंक में भी खाता चांदनी के नाम पर है बच्चों का। नरेश ने बताया कि चांदनी की सबसे बड़ी लड़की 14 साल की है। और वह बार-बार यही बोल रही है कि यह बच्चे मेरे नहीं है मेरी बहन के बच्चे हैं।

पीड़ित पति ने पूरे मामले को मानसिक उत्पीड़न बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाई है। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में सवारियों से भरी बस खाई में गिरी, 7 लोगों के मरने की आशंका; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा में आज सुबह-सुबह बड़ा अनर्थ हो गया। यहां भिकियासैंण के पास यात्रियों से भरी बस खाई में गिर गई, जिससे 6-7 लोगों की मौत हो गई है। जबकि कई लोगों की हालत गंभीर है।उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है। भिकियासैंण के पास यात्रियों से भरी बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। घटना के बाद इलाके में राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। SDRF की टीम को दुर्घटनास्थल पर भेजा गया है। मिली जानकारी के अनुसार, 6-7 लोगों के मरने की आशंका है, जबकि घायल यात्रियों को भिकियासैंण के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अल्मोड़ा के SSP देवेंद्र पिंचा ने कहा, “बचाव टीमों को मौके पर भेज दिया गया है। कुछ लोगों की मौत की खबरें हैं।”

कैसे हुआ हादसा?
यह हादसा भिकियासैंण–विनायक–जालली मोटर मार्ग पर शिलापनी के पास हुआ। बस भिकियासैंण से रामनगर के लिए निकली थी। सुबह करीब 6 बजे द्वाराहाट से निकली थी तभी रास्ते में बस अनियंत्रित हो गई और गहरी खाई में जा गिरी। इस दुर्घटना में 6 से 7 लोगों की मौत हो गई है। कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

घटनास्थल जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर है। आपदा अधिकारी विनीत पाल ने जानकारी देते हुए बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी लाई जा रही है और घायलों को तुरंत इलाज मुहैया कराया जा रहा है।
CM धामी ने जताया शोक
हादसे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सीएम ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है, ”जनपद अल्मोड़ा में भिकियासैंण से रामनगर जा रही बस के भिकियासैंण–विनायक मोटर मार्ग पर दुर्घटनाग्रस्त होने का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ है, जिसमें यात्रियों के हताहत होने की सूचना है। यह घटना अत्यंत पीड़ादायक और हृदयविदारक है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगतों की आत्मा को श्रीचरणों में स्थान एवं शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।”

आगे उन्होंने लिखा है, ”हादसे में घायल यात्रियों को जिला प्रशासन द्वारा त्वरित रूप से नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। गंभीर रूप से घायलों को बेहतर उपचार हेतु उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया गया है। इस पूरे प्रकरण की सतत निगरानी की जा रही है और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से निरंतर संपर्क में हूं। ईश्वर से सभी घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।”

समस्तीपुर की युवती रहस्यमय हालात में लापता, 5 साल के बेटे को छोड़कर घर से निकली, गरीब परिवार की बढ़ी चिंता

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समस्तीपुर | उजियारपुर

बिहार के समस्तीपुर जिले थाना उजियारपुर गांव अकाहां रायपुर से एक सनसनीखेज और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक 23 वर्षीय विवाहिता रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई है। घटना के बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। आर्थिक तंगी के कारण परिजन हर जगह खोजबीन करने में भी असमर्थ हैं और अब उन्होंने मीडिया के माध्यम से लोगों से मदद की गुहार लगाई है।

मामला उजियारपुर थाना क्षेत्र के गांव ए कहां रायपुर का है। शिकायतकर्ता राजाराम सरदार महतो जिला समस्तीपुर के रहने वाले हैं। राजाराम पिता सरवन महेतो ने बताया कि उनकी बहन काजल कुमारी (उम्र 23 वर्ष), जिनकी शादी विकास कुमार से हुई थी, दिल्ली में पति के साथ रहती थीं। पति-पत्नी के साथ उनका 5 वर्षीय बेटा रितिक कुमार भी रहता था।

राजाराम के अनुसार, घटना 24 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 10 बजे की है। काजल कुमारी घर से बाहर निकली थीं, उस समय उनका बेटा रितिक उनके पीछे-पीछे आ रहा था। इसी दौरान काजल ने बच्चे को थप्पड़ मारते हुए कहा कि “मैं अभी घर में आ रही हूं।” इसके बाद वह घर से चली गईं। जाते समय वह अपना मोबाइल फोन और आधार कार्ड भी साथ ले गई थीं, जो मोबाइल कवर में रखा हुआ था।

परिजनों का कहना है कि इसके बाद से काजल कुमारी का आज तक कोई पता नहीं चल पाया है। उनका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा है। रिश्तेदारों, परिचितों और संभावित स्थानों पर काफी खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा। परिवार का कहना है कि काजल की मानसिक स्थिति पूरी तरह सामान्य थी और इससे पहले कभी इस तरह की कोई घटना नहीं हुई थी। वह ज्यादा पढ़ी-लिखी भी नहीं है।

भाई राजाराम का कहना है कि वे लगातार बहन की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन गरीब परिवार होने के कारण हर जगह जाकर ढूंढ पाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा है। घर वालों की चिंता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और मासूम बच्चे की हालत भी बेहद दयनीय है, जो मां को लगातार याद कर रहा है।

परिजनों ने अब मीडिया के माध्यम से आम जनता और प्रशासन से मदद की अपील की है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को काजल कुमारी के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो वह तुरंत नजदीकी थाने में सूचना दे, ताकि समय रहते युवती का पता लगाया जा सके।
यह मामला न सिर्फ एक परिवार की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि लापता मामलों में गरीब परिवारों को किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अब परिजनों की आखिरी उम्मीद प्रशासन और समाज से सहयोग की है।

 

पंजाब में मजदूरी, घर में टूटा भरोसा: दो बच्चों और 5 लाख लेकर पत्नी लापता, पति बोला– ‘बस मेरे बच्चे लौटा दो’

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बेगूसराय/पंजाब।
बेगूसराय जिले के गढ़पुर थाना क्षेत्र से जुड़ा एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। 24 वर्षीय सुनील कुमार, पिता कोकई यादव, जो वर्तमान में पंजाब में मजदूरी कर परिवार पाल रहे थे, आज खुद को पूरी तरह अकेला और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सुनील का आरोप है कि उनकी पत्नी मुस्कान बानो उनके दो मासूम बच्चों और करीब 5 लाख रुपए की जमा पूंजी लेकर अचानक घर छोड़कर चली गई और अब किसी और से दूसरी शादी कर ली है।

सुनील कुमार ने बताया कि उनके माता-पिता पहले ही नहीं रहे। परिवार के नाम पर पत्नी और दो छोटे बच्चे ही उनकी पूरी दुनिया थे। पत्नी मुस्कान बानो से उनकी शादी को करीब 6 साल हो चुके हैं। दोनों के दो बच्चे हैं—एक 4 साल की बेटी और 6 महीने का बेटा। मुस्कान बानो पूर्णिया जिले के भवानीपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनके पिता एमडी आजाद और माता असमीना खातून हैं।

सुनील का कहना है कि मुस्कान बानो के साथ उनकी शादी दो बार कराई गई थी—एक बार सामाजिक तौर पर और दूसरी बार कोर्ट मैरिज के जरिए, ताकि रिश्ते को कानूनी मजबूती मिल सके। सुनील ने मजदूरी कर-करके जो भी कमाया, वह घर और बच्चों के भविष्य के लिए पत्नी को सौंपते रहे। इसी तरह करीब 5 लाख रुपए की रकम इकट्ठा हो गई।

23 नवंबर की सुबह बदली जिंदगी
23 नवंबर की सुबह करीब 10:30 बजे, जब सुनील रोज की तरह पंजाब के ममखोर इलाके में काम पर गए थे, उसी दौरान मुस्कान बानो दोनों बच्चों को लेकर घर से चली गई। साथ में वह पूरी जमा पूंजी भी ले गई। काफी तलाश और पूछताछ के बाद अब सुनील को जानकारी मिली है कि मुस्कान ने पानीपत जाकर दूसरी शादी कर ली है।

जब सुनील ने इस बारे में ससुराल पक्ष से बात की तो उनका आरोप है कि जवाब और भी ज्यादा चौंकाने वाला था। ससुराल वालों ने कथित तौर पर कहा—“उसकी जिंदगी है, जो करना था कर लिया। तुम भी दूसरी शादी कर लो।”

‘दूसरी शादी नहीं, बच्चे चाहिए’
सुनील की आवाज भर्राई हुई है। वह कहते हैं, “हम दूसरी शादी क्यों करें? हमें हमारी बेटी और बेटा वापस चाहिए। वह नहीं आना चाहती तो न आए, लेकिन हमारे बच्चों को लौटा दे। हमारे माता-पिता नहीं हैं, परिवार में कोई नहीं है। वही बच्चे हमारे जीने का सहारा हैं।”

सुनील का आरोप है कि न सिर्फ उन्हें भावनात्मक रूप से तोड़ा गया, बल्कि आर्थिक रूप से भी पूरी तरह खाली कर दिया गया। अब वह प्रशासन और समाज से सिर्फ एक ही मांग कर रहे हैं—उनके मासूम बच्चों को उन्हें वापस दिलाया जाए।

मामला अब इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि एक मजदूर पिता, जिसने मेहनत से घर बसाया, आज अपने ही बच्चों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर क्यों है?