Sunday, July 12, 2026
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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध में कपसेठी चौराहे पर फूटा जनाक्रोश, प्रधानमंत्री मुहम्मद यूनुस का फूंका पुतला

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पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर कट्टरपंथी तत्वों द्वारा किए जा रहे कथित अत्याचारों को लेकर देशभर में आक्रोश का माहौल है। इसी क्रम में रविवार को वाराणसी जिले के कपसेठी चौराहे पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने जनाक्रोश रैली निकालकर बांग्लादेश सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मुहम्मद यूनुस का पुतला दहन कर विरोध जताया।

वही प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों द्वारा लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। वही हाल ही में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को केवल हिंदू होने के कारण इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा जिंदा जलाए जाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस घटना को लेकर भारत के विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन,रैलियां और ज्ञापन देने का सिलसिला जारी है।

कपसेठी चौराहे पर आयोजित इस जनाक्रोश रैली में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर बांग्लादेश सरकार और वहां सक्रिय कट्टरपंथी संगठनों के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद चौराहे पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मुहम्मद यूनुस का पुतला दहन कर आक्रोश प्रकट किया गया।

कार्यक्रम के आयोजक एवं ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गगन सिंह ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक हैं। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि वह इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाए और बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाए,ताकि वहां के हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि यदि अत्याचार नहीं रुके तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।

इस विरोध प्रदर्शन में विधायक प्रतिनिधि अदिति सिंह,प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह,ग्राम प्रधान सुजीत कुमार,ग्राम प्रधान रबिंद्र कुमार,शंतोष सिंह शशिकांत शुक्ला,प्रधान प्रतिनिधि गुंजन सिंह, संधर्ष विश्वकर्मा,राम विलास पटेल,भाजपा मंडल अध्यक्ष अभिसेक दुबे,सर्वेश पाठक सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और विहिप कार्यकर्ता शामिल रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनी रही और पुतला दहन के बाद प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में मांग की कि बांग्लादेश में हिंदुओं की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो,ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

ईस्वी नववर्ष-2026 पर श्री सांवलिया सेठ मंदिर, मण्डफिया में विशेष दर्शन एवं सुरक्षा व्यवस्था

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इ खबर रिपोर्टर – मोइनुद्दीन कुरैशी
चित्तौड़गढ़, 30 दिसंबर। ईस्वी नववर्ष-2026 के अवसर पर श्री सांवलिया सेठ (मण्डफिया) में श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 30 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक विशेष दर्शन व्यवस्था की गई है। इस अवधि में श्रद्धालुओं का प्रवेश मीरा सर्किल से एवं निकासी यशोदा विहार चौक से सुनिश्चित की गई है।

सांवलिया जी मंदिर मंडल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रभा गौतम ने बताया कि श्रद्धालुओं के वाहनों हेतु विभिन्न मार्गों से आने वालों के लिए पृथक-पृथक पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं। मंदिर परिसर व प्रमुख मार्गों पर सीसीटीवी निगरानी, जिग-जैग लाइनों में पेयजल, शीत ऋतु को देखते हुए अलाव तथा पर्याप्त मोबाइल बायो-टॉयलेट्स की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के तहत मंदिर प्रशासन के 1000 सुरक्षाकर्मी एवं जिला पुलिस के 400 जवान तैनात किए गए हैं। सूचना प्रसारण हेतु पब्लिक एड्रेसिंग सिस्टम तथा 5 एलईडी स्क्रीन पर लाइव दर्शन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। नववर्ष के अवसर पर मंदिर परिसर को भव्य पुष्प सज्जा से सजाया गया है।

अधिक भीड़ को देखते हुए 30 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक वीआईपी दर्शन पूर्णतः बंद रहेंगे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन करने, जूता स्टैंड का उपयोग करने, कीमती सामान साथ न लाने एवं सतर्क रहने की अपील की है।

पहली बार गुजरात आया 15 वर्षीय किशोर लापता, सूरत में मामा के साथ काम करने आया था, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

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सूरत/बहराइच।
गुजरात के सूरत जिले से एक सनसनीखेज और बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले का रहने वाला 15 वर्षीय नाबालिग किशोर रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया है। लापता किशोर की पहचान पवन कुमार (उम्र 15 वर्ष), पिता जोखनलाल और माता कलावती के रूप में हुई है। पवन अपने मामा राम ब्यावन के साथ पहली बार रोजगार की तलाश में सूरत आया था, लेकिन महज तीन दिन बाद ही वह अचानक गायब हो गया।

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता राम ब्यावन, जो बहराइच के निवासी हैं, अपने भांजे पवन कुमार को 25 दिसंबर 2025 को सूरत लेकर आए थे। दोनों यहां एक साड़ी पैकिंग कंपनी में काम करने आए थे, जहां पवन को पहली बार काम पर रखा गया था। बताया जा रहा है कि यह पवन का पहला दिन था और वह न तो सूरत के रास्तों से परिचित था और न ही उसके पास कोई मोबाइल फोन या पैसे थे।
घटना 28 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 7 बजे की बताई जा रही है। राम ब्यावन जब अपने भांजे पवन कुमार को अंजन गांव स्थित साड़ी पैकिंग कंपनी के बाहर छोड़कर काम पर चले गए, उसी दौरान पवन अचानक लापता हो गया। उसके मामा ने पवन से बोला था कि मैं तुझे लेने आऊंगा लेकिन तब पवन कुमार वहां पर नहीं था आसपास तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।

परिजनों का कहना है कि पवन की मानसिक स्थिति भी पूरी तरह सामान्य है, मामा राम ब्यावन ने बताया कि वे खुद भी सूरत में नए हैं और ज्यादा जगहों की जानकारी नहीं रखते। इसके बावजूद वे लगातार फैक्ट्रियों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में पवन की तलाश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।
इधर, बहराइच में पवन की मां कलावती का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटे के अचानक लापता होने की खबर मिलने के बाद से वह लगातार बेसुध हैं। परिवार का कहना है कि पवन बहुत ही मासूम है और पहली बार घर से बाहर, वह भी दूसरे राज्य में काम करने आया था। परिजनों को आशंका है कि कहीं उसके साथ कोई अनहोनी न हो गई हो।
परिवार और रिश्तेदारों ने आम जनता और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। पवन कुमार के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी मिलने पर नजदीकी पुलिस थाने में सूचना देने या नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर तत्काल संपर्क करने की अपील की गई है। परिवार की ओर से यह भी घोषणा की गई है कि पवन के बारे में सही जानकारी देने वाले व्यक्ति को ₹5000 का नकद इनाम दिया जाएगा।
संपर्क नंबर: 9250248728
7388009654
परिवार ने प्रशासन से भी मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए नाबालिग की गुमशुदगी दर्ज कर तत्काल तलाश अभियान शुरू किया जाए, ताकि समय रहते पवन कुमार को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया जा सके।

 

दहेज, दूसरी औरत और सोशल मीडिया स्टेटस ने उजाड़ा घर, पति मासूम बेटे-बेटी को लेकर फरार, पीड़िता दर-दर भटकने को मजबूर

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देवरिया।
जनपद देवरिया के थाना तरकुलवा क्षेत्र से दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और बच्चों के अपहरण जैसा सनसनीखेज मामला सामने आया है। 24 वर्षीय विवाहिता सोनी देवी ने अपने पति अर्जुन पर दहेज के लिए प्रताड़ना, दूसरी महिला से अवैध संबंध, जान से मारने की धमकी और अब दो नाबालिग बच्चों को लेकर फरार हो जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है।

8 साल पहले हुई थी शादी, तीन बच्चों की मां है पीड़िता
पीड़िता सोनी देवी, पत्नी अर्जुन, मूल रूप से ग्राम करमा, थाना कोठीभार, जनपद महराजगंज की रहने वाली है। उसकी शादी वर्ष 2018 में अर्जुन पुत्र रमायन, निवासी ग्राम चकजगबंधन उर्फ मिश्रौली, थाना तरकुलवा, जनपद देवरिया के साथ हुई थी। शादी के बाद सोनी ने तीन बच्चों को जन्म दिया—बड़ी बेटी गुड़िया (6 वर्ष), बेटा शिवम (3 वर्ष) और चार माह की मासूम बेटी राधा।

शादी में दिए 2 लाख नकद, फिर भी दहेज का ताना
सोनी का आरोप है कि शादी के समय उसके मायके पक्ष ने अपनी हैसियत के अनुसार लगभग दो लाख रुपये नकद, चांदी के जेवर, कीमती कपड़े और घरेलू सामान उपहार स्वरूप दिया था। इसके बावजूद पति और ससुराल पक्ष खुश नहीं थे। शादी के कुछ समय बाद ही उसे कम दहेज लाने का ताना दिया जाने लगा और बुलेट मोटरसाइकिल की मांग शुरू हो गई।

मारपीट, भूखा रखना और हत्या की कोशिश तक
पीड़िता के अनुसार दहेज की मांग पूरी न होने पर उसे लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कई बार खाना-पीना बंद करा दिया गया, घर खर्च के लिए पैसे नहीं दिए गए और चाकू लेकर हत्या करने की कोशिश तक की गई। पति उसे जान से मारने और दूसरी शादी करने की धमकी देता था। सोनी का कहना है कि वह बच्चों के भविष्य के लिए सब सहती रही।

दूसरी महिला से 6 साल से संबंध, सोशल मीडिया पर स्टेटस बना झगड़े की वजह
सोनी देवी ने बताया कि उसके पति अर्जुन का करीब 6 वर्षों से रीता देवी नाम की महिला से अवैध संबंध है। रीता देवी भगवान क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है। आरोप है कि दोनों फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे के साथ फोटो और स्टेटस लगाते थे। इन्हीं सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होते थे।

18 दिसंबर को मासूम बच्चों को लेकर भागा पति
पीड़िता के अनुसार 18 दिसंबर 2025 को उसने जब पति से दूसरी महिला के संबंध को लेकर बात की तो उसने मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद अर्जुन अपने साथ बेटे शिवम और चार माह की बेटी राधा को लेकर घर से फरार हो गया। विरोध करने पर सोनी को लात-घूंसों से पीटकर घायल कर दिया गया और धमकी दी गई कि जब तक बुलेट मोटरसाइकिल नहीं मंगाई जाएगी, बच्चों का मुंह नहीं देखने दिया जाएगा।

पहले भी तीन बार छोड़ चुका है घर
सोनी का कहना है कि अर्जुन इससे पहले भी तीन बार घर छोड़कर जा चुका है, लेकिन हर बार लौट आता था। इस बार मामला इसलिए गंभीर हो गया है क्योंकि वह दो नाबालिग बच्चों को भी अपने साथ ले गया है। जब सोनी ने जानकारी जुटाई तो पता चला कि रीता देवी भी अपने घर पर नहीं है, जिससे आशंका और गहरा गई है कि दोनों साथ फरार हैं।

थाने में दी तहरीर, पुलिस ने शुरू की जांच
पीड़िता ने थाना तरकुलवा में लिखित शिकायत देकर पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट और बच्चों को लेकर फरार होने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले में अभियोग पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है। जांच की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक सुरेंद्र बहादुर सिंह को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि बच्चों की सकुशल बरामदगी प्राथमिकता है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

समाज पर सवाल, मासूमों का भविष्य अधर में
यह मामला एक बार फिर दहेज प्रथा, अवैध संबंधों और घरेलू हिंसा की कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। मासूम बच्चों को आपसी विवाद का शिकार बनाए जाने से समाज में गहरी चिंता है। पीड़िता न्याय और अपने बच्चों की वापसी की आस में दर-दर भटकने को मजबूर है, जबकि प्रशासन पर अब इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई की जिम्मेदारी है।

गदपुरी सहस्रार चक्र मंदिर में 1 जनवरी 2026 को विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम, दिल्ली-एनसीआर से अपील!

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गदपुरी में सहस्रार चक्र मंदिर में जनवरी 2026 को भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम, दिल्ली-एनसीआर से श्रद्धालुओं से पहुंचने की अपील आगरा/गदपुरी। गदपुरी क्षेत्र में नवनिर्मित सहस्रार चक्र मंदिर में जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में विशेष आध्यात्मिक आयोजनों की घोषणा की गई है। आयोजकों के अनुसार 1 जनवरी से 4 जनवरी 2026 तक सुबह से शाम तक आध्यात्मिक क्रियाएं, जप-हवन और पूजा-अनुष्ठान होंगे। इस दौरान गुरुजी की उपस्थिति में गुरुजी के गुरु की चरण-पादुका स्थापना भी की जाएगी, जिसे अत्यंत पावन अवसर बताया गया है। कार्यक्रम को खास तौर पर दिल्ली और एनसीआर के श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। आयोजकों का कहना है कि ऑनलाइन लाइव की सुविधा संभव है, लेकिन मंदिर में उपस्थित होकर पूजा-अर्चना करने से मिलने वाली शांति और अनुभूति अलग होती है। मंदिर से जुड़े लोगों का दावा है कि यहां निष्काम और किसी का अहित न करने वाली मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। आयोजन के दौरान श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपलब्ध मंत्रों के अनुसार जप कर सकते हैं, हवन करवा सकते हैं और गुरुजी से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। आयोजकों ने बताया कि आध्यात्मिक और मानसिक शांति के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं से 1 से 4 जनवरी 2026 के बीच अधिक से अधिक संख्या में गदपुरी पहुंचकर कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की गई है। कार्यक्रम, समय-सारिणी और अन्य विवरण के लिए आयोजकों से सीधे संपर्क कर जानकारी ली जा सकती है।

साबरमती एक्सप्रेस में दिनदहाड़े पर्स चोरी, महिला यात्री के 5 हजार रुपये गायब, रेलवे सुरक्षा पर सवाल

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बाराबंकी/लखनऊ | विशेष रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के थाना रामनगर क्षेत्र की रहने वाली पूजा चौहान, पति नंदकिशोर चौहान, के साथ रेल यात्रा के दौरान चोरी की सनसनीखेज घटना सामने आई है। मामला 24 दिसंबर 2025 का है, जब पूजा चौहान दोपहर करीब 12 बजे लखनऊ से अहमदाबाद के लिए साबरमती एक्सप्रेस से यात्रा कर रही थीं। इसी दौरान अज्ञात चोरों ने उनका पर्स चोरी कर लिया, जिसमें करीब 5 हजार रुपये नकद रखे हुए थे।

पीड़िता के अनुसार, ट्रेन में सफर के दौरान अचानक पर्स गायब होने का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने तत्काल आसपास बैठे यात्रियों से पूछताछ की और डिब्बे में काफी देर तक पर्स की तलाश की, लेकिन कहीं भी कोई सुराग नहीं मिला। घटना के बाद पूजा चौहान काफी परेशान नजर आईं और उन्होंने इसे रेलवे सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक बताया।

बताया जा रहा है कि जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त ट्रेन में यात्रियों की अच्छी-खासी भीड़ थी। इसी भीड़ का फायदा उठाकर चोरों ने वारदात को अंजाम दिया। पीड़िता का कहना है कि पर्स में रखे रुपये उनके यात्रा खर्च और निजी जरूरतों के लिए थे, जो चोरी हो जाने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

इस घटना ने एक बार फिर ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आए दिन हो रही चोरी की घटनाओं के बावजूद यात्रियों का कहना है कि रेलवे सुरक्षा बल की मौजूदगी नाम मात्र की नजर आती है। स्थानीय लोगों और यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं पर लगाम लग सके।

फिलहाल, पूजा चौहान द्वारा संबंधित अधिकारियों को सूचना दिए जाने की बात कही जा रही है। यह मामला अब यात्रियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग रेल यात्रा के दौरान सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं।

 

लखीसराय में जातिसूचक गाली और लाठी–डंडों से तांडव — दबिया से हमला, देवर का सिर फटा; गंभीर हालत में PMCH रेफर

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“मारो साला दुषाध… नीच जाति हमारे घर के सामने जानवर छोड़ता है”–पीड़ित परिवार का आरोप

लखीसराय जिले के किऊल थाना क्षेत्र के सिंहचक गांव से एक बेहद सनसनीखेज और दहलाने वाला मामला सामने आया है। शुक्रवार 14 नवंबर की शाम करीब आठ–नौ बजे पूनम देवी का मवेशी गलती से खुलकर गांव के ही कपिल यादव के दरवाजे पर चला गया। बस इसी बात पर शुरू हुआ विवाद अचानक हिंसक हो उठा। पूनम देवी जब अपना मवेशी लेने पहुंचीं, तो आरोप है कि कपिल यादव ने उन्हें भद्दी–भद्दी जातिसूचक गालियां देते हुए धक्का–मुक्की शुरू कर दी।

हो-हल्ला सुनकर पूनम देवी के पति रोशन पासवान मौके पर पहुंचे, तो कपिल यादव ने उन्हें भी गंदी जातिसूचक गालियां देते हुए थप्पड़–लात से मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि मामला यहीं नहीं रुका। थोड़ी देर बाद कपिल यादव अपने परिवार के चार सदस्यों के साथ लाठी–डंडा, रॉड और दबिया लेकर सीधे पासवान परिवार के घर पर चढ़ आया।

पीड़ित परिवार का कहना है कि हमलावरों में कपिल यादव (55), उसका बेटा गोलू यादव (23), बेटी दौलत कुमारी (20) और पत्नी मीरा देवी (51) शामिल थे। इन सभी ने मिलकर घर में घुसकर हमला बोला। इसी दौरान गोलू यादव ने दबिया से पूनम देवी के देवर कुंदन कुमार के सिर पर वार कर दिया, जिससे सिर फट गया और उसे करीब 12 टांके आए। उसकी हालत इतनी गंभीर हुई कि सदर अस्पताल लखीसराय से तुरंत PMCH पटना रेफर कर दिया गया, जहां वह अब भी नाजुक स्थिति में जिंदगी से संघर्ष कर रहा है।

हमले में पूनम देवी के पति रोशन पासवान का हाथ और कंधा लाठी की मार से टूट गया। बीच–बचाव करने आई उनकी सास सुमा देवी और खुद पूनम देवी को भी बुरी तरह पीटा गया, जिससे दोनों के हाथ टूट गए। पीड़िता का आरोप है कि हमले के दौरान यादव परिवार लगातार जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करता रहा और कहता रहा—“मारो साला दुषाध… नीच जाति हमारे घर के पास जानवर छोड़ देता है।”

ग्रामीण सूत्रों के अनुसार, गांव में पासवान जाति का केवल एक ही परिवार है, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। बताया जा रहा है कि पटाखे की तेज आवाज से पहले मवेशी बिदककर खुल गया था, जिसके बाद यह पूरी घटना घटित हुई। लेकिन आरोप है कि छोटी सी बात पर यादव परिवार ने योजनाबद्ध तरीके से घर पर हमला कर दिया।

पीड़ित परिवार ने अनुसूचित जाति/जनजाति थाना लखीसराय में लिखित आवेदन देकर सभी आरोपितों पर SC/ST एक्ट सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।

अभी तक पुलिस ने कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है जिसकी वजह से परिवार चाहता है कि प्रशासन संज्ञान ले और कार्रवाई हो

घटिया सामग्री से नाली निर्माण का आरोप, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

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पंचायत कार्य की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल, बरसात से पहले टूटने की आशंका

भोपाल जिले की बैरसिया तहसील अंतर्गत गांव डीलर दिल्लोड में जिला पंचायत द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। गांव में चल रहे इस निर्माण कार्य पर घटिया सामग्री के उपयोग और मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाली निर्माण कार्य को टुकड़ों में कराया जा रहा है, जिससे इसकी मजबूती और टिकाऊपन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार नाली निर्माण में जिस सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, वह तय मानकों के अनुरूप नहीं है। सीमेंट, गिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री में मिलावट होने का आरोप लगाया जा रहा है। ग्रामीणों और बाहर रह रहे प्रवासियों ने आशंका जताई है कि यदि इसी प्रकार घटिया सामग्री से नाली का निर्माण किया गया तो यह बरसात के शुरुआती दिनों में ही क्षतिग्रस्त हो जाएगी, जिससे गांव में जलभराव, गंदगी और बदबू जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
गांव निवासी हरीश (उम्र 28 वर्ष), पिता – देवी चरण ने बताया कि निर्माण कार्य में न तो गुणवत्ता की जांच की जा रही है और न ही एकरूपता से काम हो रहा है। नाली के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरह की सामग्री डाली जा रही है, जिससे पूरा ढांचा कमजोर बन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा गांववासियों को लंबे समय तक भुगतना पड़ सकता है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उन्होंने कई बार पंचायत और संबंधित विभाग के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण नहीं किया। लोगों में यह नाराजगी है कि विकास कार्यों के नाम पर यदि भ्रष्टाचार किया गया तो इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्थानीय प्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई और मानक के अनुसार कार्य नहीं कराया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कार्रवाई हो तथा नाली का निर्माण दोबारा गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया जाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि हर सरकारी कार्य में जनता के पैसों का सही उपयोग होना चाहिए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला पंचायत और संबंधित विभाग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और ग्रामीणों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

नरसिंहपुर में इंसानियत शर्मसार: विधुर मजदूर और नाबालिग बेटी पर अपने ही परिवार का कहर पुलिस की समझाइश बेअसर, रोजाना मारपीट से त्रस्त पिता-बेटी न्याय को तरस रहे

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गाडरवारा।
नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक विधुर मजदूर और उसकी नाबालिग बेटी को अपने ही परिवार के लोगों द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। पुलिस में शिकायत और समझाइश के बाद भी हालात नहीं बदले, जिससे पीड़ित पिता-बेटी भय और असुरक्षा में जीवन जीने को मजबूर हैं।

विधुर पिता, बिन मां की बच्ची और अपनों का अत्याचार
40 वर्षीय भूरा जाटव, पिता रामप्रसाद जाटव, थाना गाडरवारा क्षेत्र के निवासी हैं। करीब छह साल पहले उनकी पत्नी यशोदा जाटव की गर्भ में बच्चे के नुकसान के बाद मृत्यु हो गई थी। पत्नी की मौत के बाद शासन से मुआवजे के रूप में मिले करीब दो लाख रुपए से उन्होंने घर चलाने और भविष्य सुरक्षित करने के उद्देश्य से कुछ राशि ब्याज पर दे दी थी। इसी दौरान उन्होंने अपने भाइयों को भी लगभग 50 हजार रुपए दिए, लेकिन अब वही पैसा विवाद की जड़ बन गया है।

पैसे मांगना पड़ा भारी, भाई-भाभी और मां पर गंभीर आरोप
भूरा जाटव का आरोप है कि उनका छोटा भाई दौलत जाटव, उसकी पत्नी सुखवाती, बड़ा भाई धर्मेंद्र जाटव, उसकी पत्नी गीता और उनकी मां नीना जाटव आए दिन उनसे और उनकी 12 वर्षीय बेटी नेहा जाटव से झगड़ा करते हैं। आरोप है कि गाली-गलौज से बात शुरू होकर मारपीट तक पहुंच जाती है। यह सब कुछ मोहल्ले में कई बार लोगों के सामने भी हो चुका है।

नाबालिग बच्ची भी नहीं सुरक्षित
सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह है कि इस पारिवारिक विवाद में नाबालिग बच्ची भी प्रताड़ना का शिकार हो रही है। बिन मां की बच्ची को पिता जैसे-तैसे पाल रहा है, लेकिन परिवार के अन्य सदस्य उन्हें घर में चैन से रहने तक नहीं दे रहे। पीड़ित का कहना है कि बच्ची मानसिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

थाने की समझाइश, लेकिन जमीनी हकीकत अलग
भूरा जाटव ने गाडरवारा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले को असंज्ञेय अपराध मानते हुए दोनों पक्षों को बुलाकर समझाइश दी और छोड़ दिया। लेकिन आरोप है कि इसके बाद उत्पीड़न और बढ़ गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

“हम कहां जाएं?”—पीड़ित की गुहार
मजदूरी कर पेट पालने वाले भूरा जाटव का कहना है कि वे और उनकी बेटी अपने ही घर में डरे हुए हैं। उन्होंने प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

 

कौन हैं अविवा बेग के मां-बाप, अब बनेंगे रेहान वाड्रा के सास-ससुर, प्रियंका गांधी से है पुराना नाता

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राहुल गांधी के भांजे और प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा ने सगाई कर ली है। उन्होंने अपवी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड अविवा बेग को शादी के लिए प्रपोज किया है। अविवा के साथ ही लोग उनके परिवार के बारे में भी जानने के लिए इच्छुक हैं। चलिए आपको उनके बैकग्रांड और फैमिली के बारे में बताते हैं।कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा ने अपनी निजी जिंदगी में एक अहम कदम बढ़ाया है। सूत्रों ने पुष्टि की है कि रेहान की सगाई उनकी लंबे समय से साथी रहीं अविवा बेग से हो गई है। गौर करने वाली बात यह कि कपल बीते करीब सात सालों से एक-दूसरे के साथ है और अब दोनों परिवारों की सहमति से इस रिश्ते को औपचारिक रूप दे दिया गया है। बताया जा रहा है कि अविवा का परिवार दिल्ली में रहता है और दोनों परिवारों के बीच पहले से ही काफी करीबी रिश्ते रहे हैं। अविवा किस परिवार से आती हैं, अविवा के मां-बाप कौन हैं, क्या प्रियंका गांधी संग उनके पुराने संबंध हैं, ये सब आपको यही पता चलने वाला है।

अविवा सोशल मीडिया पर हैं एक्टिव
हाल ही में अवीवा बेग ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर रेहान वाड्रा के साथ एक तस्वीर शेयर की थी। इस तस्वीर को उन्होंने तीन हार्ट इमोजी के साथ अपनी प्रोफाइल के ‘हाइलाइट्स’ सेक्शन में भी जोड़ा है, जिसे सगाई की ओर इशारा माना जा रहा है। हालांकि कपल की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन यह सोशल मीडिया अपडेट लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अविवा सोशल मीडिया पर काफी अक्टिव हैं और अपनी वेकेशन, पार्टी और लाइफ के अन्य हिस्सों की झलकियां भी साझा करती रहती हैं। उन्होंने कुछ दिनों रहले ही अपने माता-पिता के साथ भी एक तस्वीर साझा की थी।कौन है अविवा के माता-पिता?
अवीवा बेग का पारिवारिक बैकग्राउंड भी काफी दिलचस्प है। वो दिल्ली की एक नामी बिजनेस फैमिली से आती हैं। उनके पिता इमरान बेग एक बिजनेसमैन हैं, जबकि उनकी मां नंदिता बेग एक जानी-मानी इंटीरियर डिजाइनर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिकॉ प्रियंका गांधी वाड्रा और नंदिता बेग पुरानी दोस्त हैं। यह भी बताया जाता है कि नंदिता बेग ने कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन के इंटीरियर डिजाइन पर काम किया है, जिससे दोनों परिवारों के संबंध और गहरे माने जाते हैं। सालों से दोनों परिवारों के बीत रिश्ता होने के चलते अब ये और गहरा होने वाला है और इसे रिश्तेदारी का नाम मिलने वाला है। इमरान और नंदिता अब प्रियंका गांधी के समधी और समधन बनने जा रहे हैं।

क्या करती हैं अविवा?
पेशेवर तौर पर अविवा बेग दिल्ली में रहने वाली एक फोटोग्राफर और प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा प्रतिष्ठित मॉडर्न स्कूल से पूरी की और इसके बाद ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी से मीडिया कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में पढ़ाई की। अवीवा ने आर्ट और फोटोग्राफी की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनका काम कई प्रमुख प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया जा चुका है, जिनमें इंडिया आर्ट फेयर 2023 में ‘यू कैन नॉट मिस दिस’ और 2019 में ‘द इल्यूज़री वर्ल्ड’ शामिल हैं। इसके अलावा, वह क्रिएटिव प्रोडक्शन यूनिट एटेलियर 11 की को-फाउंडर भी हैं। एक और दिलचस्प बात यह है कि अवीवा एक समय राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं।रेहान वाड्रा के बारे में
रेहान वाड्रा का जन्म 29 अगस्त 2000 को हुआ था। इतने प्रसिद्ध राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद, उन्होंने हमेशा खुद को राजनीतिक सुर्खियों से दूर रखा है। रेहान ने देहरादून के द दून स्कूल से पढ़ाई की और आगे की शिक्षा के लिए लंदन चले गए, जहां उन्होंने स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS) से राजनीति में उच्च शिक्षा हासिल की। कला और फोटोग्राफी में गहरी रुचि रखने वाले रेहान एक लो-प्रोफाइल जीवन जीना पसंद करते हैं और अपने रचनात्मक कामों पर फोकस करते हैं।