Sunday, July 12, 2026
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जिया शंकर संग सगाई की अफवाहों पर भड़के अभिषेक मल्हन, बिग बॉस में हुई थी मुलाकात, बोले- वह चैप्टर खत्म…

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अभिषेक मल्हन और जिया शंकर की सगाई की खबरें सोशल मीडिया पर पिछले दिनों से खूब चर्चा में है, लेकिन बिग बॉस कंटेस्टेंट फुकरा इंसान ने इसे अफवाह कहा है।यूट्यूबर अभिषेक मल्हान, जिन्हें फुकरा इंसान के नाम से जाना जाता है। उन्होंने एक्ट्रेस और बिग बॉस ओटीटी 2 की एक्स को-कंटेस्टेंट जिया शंकर के साथ अपनी सगाई की खबरों पर रिएक्ट किया है। उन्होंने इन दावों को बेबुनियाद बताया और लोगों से अपील की कि वे उनका नाम बिना किसी आधार के इस मामले में घसीटना बंद कर दें। उनका पिछले दिनों जिया शंकर के साथ नाम जोड़ा गया था, जब एक्ट्रेस ने अपनी एक मिस्ट्री मैन के साथ एक तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर की थी। इस तस्वीर ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी थी।
जिया शंकर और अभिषेक मल्हन की सगाई हो गई?
फुकरा इंसान ने इस मामले में सफाई कुछ दिनों बाद दी, जब यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसमें दावा किया गया था कि अभिषेक और जिया की सगाई होने वाली है। पोस्ट में कहा गया था कि दोनों ने अपने रिश्ते को ऑफिशियल कर दिया है और लाइफ पार्टनर बनने की तैयारी कर रहे हैं। इसके तुरंत बाद, X ​​पर भी इसी तरह के दावे फैलने लगे, कुछ यूजर्स ने तो यह भी कह दिया कि बिग बॉस से निकालने के बाद ही दोनों ने सगाई कर ली थी।जिया शंकर संग सगाई पर भड़के अभिषेक मल्हन
जिया शंकर संग अपनी सगाई की अटकलों पर बात रिएक्ट करते हुए, अभिषेक ने 1 जनवरी को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर सच बताया। उन्होंने लिखा, ‘मैं एक बात साफ करना चाहता हूं- कृपया मेरा नाम किसी से भी जोड़ना बंद कर दें। मैं तीन साल पहले एक शो का हिस्सा था और वह चैप्टर वहीं खत्म हो गया था। मेरे फैसले और मेरा रुख तब बहुत साफ थे और तब से कुछ भी नहीं बदला है।’ अपना गुस्सा जाहिर करते हुए, अभिषेक ने कहा कि ऐसी अफवाहें बिना किसी आधार के बार-बार सामने आती रहती हैं। उन्होंने कहा, ‘हैरान करने वाली बात यह है कि यह एक पैटर्न बन गया है। लगभग हर साल अचानक से वही बातें बिना किसी वजह के चर्चा में आ जाती है। यह मैं भी देख सकता हूं और मुझे लगता है कि दर्शक भी इस पैटर्न को समझने के लिए काफी स्मार्ट हैं।’जिया शंकर की इस तस्वीर ने मचाई थी हलचल
एक्ट्रेस जिया ने कुछ दिन पहले एक रोमांटिक फोटो शेयर की थी, जिसमें उन्होंने हिंट दी थी कि वह अभिषेक संग रिश्ते में नहीं है। इस फोटो में जिया एक मिस्ट्री मैन के साथ पोज देती दिख रही थीं, जो उन्हें माथे पर किस कर रहा था। हालांकि, उन्होंने उस आदमी का चेहरा नहीं दिखाया था, लेकिन पोस्ट से यह साफ हो गया था कि अभिषेक मल्हन उनके साथ रिलेशनशिप में नहीं हैं। फोटो पर जिया ने कैप्शन लिखा, ‘चलो झूठी अफवाहों को 2025 में ही छोड़ देते हैं’

अभिषेक मल्हन संग जिया शंकर की बॉन्ड
जिया और अभिषेक के बीच डेटिंग की अटकलें सबसे पहले बिग बॉस ओटीटी 2 के दौरान शुरू हुई थीं और फिर शो से बाहर आने के बाद एक म्यूजिक वीडियो में साथ दिखाई दिए, जिसके बाद उनकी डेटिंग की अफवाहों को हवा मिली। हालांकि, जिया पहले ही बता चुकी है कि वह सिर्फ दोस्त है

‘भारत न देता तो हमें वैक्सीन सूंघने को भी न मिलती’, जयशंकर ने बताया ऐसा क्यों कहते हैं कई देश

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने IIT मद्रास में कहा कि कोविड काल में भारत ने वैक्सीन देकर वैश्विक एकजुटता दिखाई। कई देशों ने माना कि भारत के बिना उन्हें वैक्सीन भी नहीं मिलती। उन्होंने पड़ोसी नीति, लोकतंत्र और भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर दिया।चेन्नई: विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने शुक्रवार को IIT मद्रास में छात्रों को कई मुद्दों पर संबोधित किया। उन्होंने भारत की प्राचीन सभ्यता, लोकतंत्र, विदेश नीति, वैक्सीन पॉलिसी और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों पर खुलकर चर्चा की। कोविड महामारी और वैक्सीन पर बात करते हुए जयशंकर ने बताया, ‘मेरे पूरे करियर में मैंने कभी वैक्सीन देने से ज्यादा भावुक प्रभाव दुनिया पर नहीं देखा। लोग वैक्सीन की पहली खेप याद करके रो पड़ते हैं। कोविड एक बुरा दौर था, लेकिन हमने उसे पीछे छोड़ दिया। उस समय विकसित पश्चिमी देशों ने अपनी आबादी से 8 गुना ज्यादा वैक्सीन स्टॉक कर ली थीं, लेकिन छोटे देशों को 10 हजार डोज भी नहीं दे रहे थे।’
अगर भारत न देता तो हमें वैक्सीन सूंघने को भी न मिलती’
जयशंकर ने कहा, ‘हम 1.4 अरब लोगों की जिम्मेदारी उठाते हुए भी छोटे देशों को 1-2 लाख डोज देकर एकजुटता दिखाई। आज लैटिन अमेरिका, कैरेबियन, पैसिफिक के छोटे द्वीप देशों के लोग कहते हैं कि अगर भारत न देता तो हमें वैक्सीन सूंघने को भी न मिलती। हम दुनिया के सबसे कुशल वैक्सीन उत्पादक थे। लोगों को पता नहीं कि वैश्विक जुड़ाव और जिम्मेदारी कितनी जरूरी थी, क्योंकि दुनिया ने भी हमारी मदद की। हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि सप्लाई चेन भारत के बाहर से आई। मुख्य बात यह है कि घर और विदेश को अलग न सोचें। घर में समस्या होने पर भी दुनिया की मदद इसलिए करनी चाहिए क्योंकि ये दोनों साथ चलते हैं।”ज्यादातर पड़ोसियों को पहली वैक्सीन खेप भारत से मिली’
बांग्लादेश की अशांति और भारत की पड़ोसी नीति पर सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं 2 दिन पहले बांग्लादेश गया था। भारत की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ। हमारे पास तरह-तरह के पड़ोसी हैं। अगर कोई पड़ोसी अच्छा है या कम से कम हानि नहीं पहुंचाता, तो हमारा स्वभाव उसे मदद करना है। हमारे पड़ोस में जहां भी बढ़िया पड़ोसी होने की भावना है, भारत निवेश करता है, मदद करता है, साझा करता है। कोविड में ज्यादातर पड़ोसियों को पहली वैक्सीन खेप भारत से मिली।’पड़ोसी जानते हैं कि भारत की तरक्की एक उठती लहर है’
जयशंकर ने आगे कहा, ‘कुछ पड़ोसी बहुत मुश्किल दौर से गुजरे, जैसे श्रीलंका, जहां हमने 4 अरब डॉलर का पैकेज दिया, जबकि उनका IMF से समझौता बहुत धीमा चल रहा था। ज्यादातर पड़ोसी जानते हैं कि भारत की तरक्की एक उठती लहर है। अगर भारत बढ़ेगा, तो सब बढ़ेंगे। यही संदेश मैं बांग्लादेश ले गया।’ जयशंकर ने कहा कि भारत दुनिया की उन गिनी-चुनी प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो आज बड़े आधुनिक राष्ट्र के रूप में बनी हुई हैं।उन्होंने कहा, ‘दुनिया में बहुत कम प्राचीन सभ्यताएं हैं जो आज बड़े आधुनिक देश बनकर बची हैं, और हम उनमें से एक हैं। हमें अपने इतिहास पर गर्व है, और ऐसा इतिहास बहुत कम देशों का रहा है।’

‘…तो लोकतंत्र सिर्फ कुछ इलाकों तक सीमित रह जाता’विदेश मंत्री ने कहा, ‘हमने लोकतंत्र चुनकर दुनिया में लोकतंत्र को सार्वभौमिक विचार बना दिया। अगर हम लोकतंत्र न अपनाते, तो यह विचार सिर्फ कुछ इलाकों तक सीमित रह जाता। हमें अपनी सोच, मूल्य, संस्कृति और इतिहास को दुनिया के सामने रखने का कर्तव्य है। लेकिन यह सब दोस्ताना साझेदारी के साथ किया जा सकता है, क्योंकि पश्चिमी देशों के साथ साझेदारी महत्वपूर्ण है। यही तरीका है कि हम दुनिया को कैसे बेहतर बनाएं। हम ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ शब्द का अक्सर इस्तेमाल करते हैं लेकिन इसका मतलब क्या है? इसका संदेश यह है कि हमने कभी दुनिया को दुश्मन या खतरे के रूप में नहीं देखा, जहां से खुद को बचाना पड़े।’

सबसे पहले इस राज्य में गठित होगा 8th स्टेट Pay कमीशन, मुख्यमंत्री ने खुद किया ऐलान

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पूर्वोत्तर के एक राज्य के मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि उनकी सरकार में सबसे पहले 8th स्टेट पे कमीशन गठित गया है। उनका प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।दिसपुर: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने असम के सरकारी कर्मचारियों के पक्ष में एक बड़ा और ऐतिहासिक ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि देश का पहला ऐसा राज्य असम बनेगा, जो 8वें राज्य वेतन आयोग का गठन करेगा। उन्होंने इसे कर्मचारी कल्याण की खातिर एक अहम कदम बताते हुए असम की संवेदनशील और प्रगतिशील शासन प्रणाली का प्रतीक बताया।
CM सरमा ने की कर्मचारियों के हित की बात
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि असम सरकार अपने कर्मचारियों की इकोनॉमिक सिक्योरिटी, सम्मान और जीवन स्तर को अच्छा बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 8वें राज्य वेतन आयोग के गठन की बात करना इसी सोच का नतीजा है। उन्होंने साफ किया कि आयोग का मकसद महज वेतन बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी कर्मचारियों के भत्तों, पेंशन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सिफारिशें देना भी होगा।
मुख्यमंत्री सरमा का बड़ा ऐलान
असम CM ने अपने आधिकारिक हैंडल से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, ‘असम देश का पहला राज्य होगा जो 8वें राज्य वेतन आयोग का गठन करेगा, जो कर्मचारी कल्याण और प्रगतिशील शासन की दिशा में एक अहम कदम है।’
समय से लागू होंगी राज्य वेतन आयोग की सिफारिशें
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम सरकार मानती है कि किसी भी राज्य की प्रोग्रेस उसके कर्मचारियों के समर्पण से जुड़ी होती है। जब कर्मचारी प्रेरित और सुरक्षित होते हैं, तो शासन व्यवस्था और ज्यादा प्रभावी और जवाबदेह बन जाती है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि राज्य वेतन आयोग की सिफारिशों को समय से लागू किया जाएगा, ताकि इसका वास्तविक लाभ कर्मचारियों को मिल पाए।
स्टेट पे कमीशन में कौन से कर्मचारी आते हैं?
बता दें कि राज्य सरकार स्टेट पे कमीशन गठित करती है। यह राज्य के सरकारी कर्मचारियों पर लागू होता है। इसमें सरकारी विभाग, राज्य की पुलिस, राज्य सरकारों द्वारा संचालित स्टाफ और राज्य सरकार के पेंशनधारी शामिल होते हैं। कमीशन, राज्य के सरकारी कर्मचारियों का पे स्केल, भत्ते और पेंशन तय करता है।

शादी के नाम पर यातना! श्रयुराल में महिला से मारपीट, भूखा रखने और जान से मारने की धमकी

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पहले से शादीशुदा पति का सनसनीखेज खुलासा, 3 साल की बच्ची के साथ दिल्ली में मजदूरी को मजबूर पीड़िता

सीवान/जामो बाजार।
श्रयुराल में एक विवाहिता के साथ अमानवीय व्यवहार और लगातार मारपीट का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पीड़िता ने अपने पति सहित पूरे ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए जामो बाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पीड़िता का कहना है कि उसकी जान को लगातार खतरा बना हुआ है और वह किसी भी समय बड़ी अनहोनी का शिकार हो सकती है।

पीड़िता लाडली देवी (35 वर्ष), निवासी हरियाली नगर, जामो बाजार, ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि उसकी शादी प्रमोद गिरी से कराई गई थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ ही समय बाद ससुराल वालों का असली चेहरा सामने आने लगा।

पीड़िता के अनुसार, पति प्रमोद गिरी, ससुर हरेंद्र गिरी (80 वर्ष) और सास बिन देवी (50 वर्ष) मिलकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। उसे कई-कई दिनों तक भूखा रखा गया, गाली-गलौज की गई और छोटी-छोटी बातों पर बेरहमी से पीटा गया।

पहले से शादीशुदा होने का बड़ा खुलासा

पीड़िता ने खुलासा किया कि शादी के बाद उसे पता चला कि प्रमोद गिरी पहले से शादीशुदा है। उसकी पहली पत्नी का नाम सरिता देवी है, जिनसे उसके बेटे-बहू और उनके बच्चे भी हैं। सरिता देवी अभी भी बिहार में रह रही हैं और प्रमोद गिरी अब लाडली को छोड़कर अपनी पहली पत्नी के साथ ही रह रहा है।

घर से निकाला, जान से मारने की धमकी

पीड़िता ने बताया कि 12 जून की रात करीब 8 बजे विवाद इतना बढ़ गया कि ससुराल वालों ने उसे घर से बाहर निकाल दिया। जाते-जाते उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई। भय और असुरक्षा के माहौल में वह किसी तरह मायके पहुंची।

इस शादी से लाडली की 3 साल की एक बच्ची है, लेकिन इसके बावजूद उसे न तो सम्मान मिला और न ही सुरक्षा। पीड़िता का आरोप है कि हर महीने खर्च को लेकर उससे पैसे मांगे जाते थे और मांग पूरी न होने पर हिंसा की जाती थी।

दिल्ली में मजदूरी कर गुजर-बसर

फिलहाल पीड़िता अपनी 3 साल की बच्ची के साथ दिल्ली में किराए के मकान में रह रही है। वह मजदूरी करके किसी तरह अपनी और अपनी बच्ची की जिंदगी चला रही है। पीड़िता का कहना है कि वह इंसाफ चाहती है ताकि उसकी बच्ची का भविष्य सुरक्षित हो सके।

पुलिस कार्रवाई

मामले को लेकर जामो बाजार थाना क्षेत्र में
कांड संख्या 242/2025, दिनांक 13/06/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच एसआई विवेक ठाकुर कर रहे हैं और सभी आरोपों की गहनता से जांच की जा रही है।

पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उसे न्याय मिले और भविष्य में किसी और महिला को ऐसी यातना न झेलनी पड़े।

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IPL 2026 से पहले पंजाब किंग्स की बढ़ गई टेंशन, इस खिलाड़ी की फिटनेस बन सकती है बड़ा सिरदर्द

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आईपीएल 2026 का सीजन शुरू होने में अभी समय है लेकिन उससे पहले कुछ आईपीएल फ्रेंचाइजियों के प्रमुख खिलाड़ियों की फिटनेस उनकी टीमों के लिए एक बड़ा सिरदर्द जरूर बनते जा रहे हैं। इसी में एक नाम अब पंजाब किंग्स का भी जुड़ गया है।न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्युसन पिछले काफी समय से फिटनेस की समस्या से जूझते हुए नजर आए हैं। कीवी तेज गेंदबाज की फिटनेस अब आईपीएल फ्रेंचाइजी लॉकी फर्ग्युसन के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बन गई है। लॉकी फर्ग्युसन को ऑस्ट्रेलिया में चल रही फ्रेंचाइजी आधारित टी20 लीग बिग बैश में सिडनी थंडर टीम के लिए खेलना था, लेकिन वह पूरी तरह से फिट नहीं होने की वजह से पूरे सीजन से बाहर हो गए हैं। ऐसे में लॉकी की फिटनेस पर अब सबसे ज्यादा नजरें न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के अलावा पंजाब किंग्स की भी टिकी हुई हैं।
फर्ग्युसन को तीन जनवरी से सिडनी की स्क्वाड का बनना था हिस्सा
लॉकी फर्ग्युसन अभी काल्फ इंजरी से जूझ रहे हैं, जिसमें चोटिल होने से पहले वह आईएल टी20 में डेजर्ट वाइपर्स की टीम से खेल रहे थे, जहां उनका फॉर्म काफी शानदार देखने को मिला था। फर्ग्युसन ने एक मुकाबले में 5 विकेट हॉल भी हासिल किया था। हालांकि अब अनफिट होने के बाद से उनके लिए टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भी खेलना काफी मुश्किल लग रहा है जिसकी शुरुआत 7 फरवरी से होगी। कीवी टीम को वर्ल्ड कप से पहले भारत का दौरा करना है, जिसके लिए घोषित की गई टी20 और वनडे दोनों सीरीज की किसी भी एक स्क्वाड का हिस्सा लॉकी फर्ग्युसन नहीं हैं। ऐसे में उनकी फिटनेस को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पंजाब किंग्स ने आईपीएल 2026 के लिए लॉकी फर्ग्युसन को रिटेन करने का फैसला लिया था।सिडनी थंडर ने फर्ग्युसन के रिप्लेसमेंट का किया ऐलान
बिग बैश लीग के 2025-26 सीजन के लिए सिडनी थंडर ने लॉकी फर्ग्युसन के बाहर होने की जानकारी अपनी तरफ से जारी किए गए एक आधिकारिक बयान के जरिए दी जिसमें उनके जनरल मैनेजर ट्रेंट कोपलैंड ने दिए बयान में कहा कि हमें ये बताते हुए काफी निराशा हो रही है कि लॉकी इस बार बीबीएल में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। हम वर्ल्ड कप से पहले लॉकी फर्ग्युसन के जल्द ठीक होने की कामना करते हैं। ताकि वह जल्द ही मैदान पर फिर से खेलते हुए दिखाई दें। बता दें कि सिडनी थंडर ने इसी के साथ लॉकी फर्ग्युसन की जगह पर रिप्लेसमेंट प्लेयर के नाम का भी ऐलान कर दिया है, जिसमें उन्होंने इंग्लैंड टीम के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज डेविड विली को अपनी स्क्वाड का हिस्सा सीजन के बाकी बचे मुकाबलों में बनाने का फैसला लिया है।

पाकिस्तान में तक्षशिला के पास से मिले दुर्लभ सिक्के और सजावटी पत्थर, पुरातत्वविदों ने बताया अहम खोज

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पाकिस्तान में तक्षशिला के पास से खुदाई के दौरान दुर्लभ सजावटी पत्थर और सिक्के मिले हैं। पुरातत्वविदों ने इस खोज को एक दशक में सबसे अहम खोज बताया है। सिक्कों पर सम्राट वासुदेव की छवि है।इस्लामाबाद: पाकिस्तानी पुरातत्वविदों को ऐतिहासिक शहर तक्षशिला के पास यूनेस्को-सूचीबद्ध स्थल की खुदाई के दौरान दुर्लभ सजावटी पत्थर और सिक्के मिले हैं। सिक्के और अन्य वस्तुओं के मिलने से प्राचीन सभ्यता की शहरी बस्ती के प्रमाण मिले हैं। ये खोजें प्राचीन भीर टीले पर की गई हैं। यहां से विशेषज्ञों को छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सजावटी पत्थर और दूसरी शताब्दी ईस्वी के सिक्के मिले हैं।
एक दशक की सबसे अहम खोज
डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने इसे एक दशक में साइट पर सबसे महत्वपूर्ण खोज बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेषज्ञों ने
के रूप में पहचाने गए सजावटी पत्थर के टुकड़े, कुषाण वंश के दुर्लभ कांस्य सिक्कों के साथ खोजे हैं। पंजाब पुरातत्व विभाग के उप निदेशक आसिम डोगर, जो खुदाई टीम के प्रमुख हैं, ने कलाकृतियों के प्रारंभिक विश्लेषण की पुष्टि की है। डोगर ने कहा, “सजावटी पत हैं, जो एक कीमती पत्थर है, जबकि सिक्के कुषाण काल ​​के हैं।”
सिक्कों पर सम्राट वासुदेव की छवि
खुदाई टीम ने धातु की कलाकृतियों की तारीख तय करने के लिए फोरेंसिक जांच की सहायता ली है। डोगर ने बताया कि पेशावर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा किए गए विस्तृत विश्लेषण ने पुष्टि की है कि सिक्कों पर सम्राट वासुदेव की छवि है। इतिहासकार वासुदेव को इस क्षेत्र पर शासन करने वाले महान कुषाण शासकों में से अंतिम मानते हैं। डोगर के अनुसार, बरामद सिक्कों के एक तरफ वासुदेव को दर्शाया गया है, जबकि दूसरी तरफ एक देवी की छवि है। उन्होंने इस विशिष्ट इमेजरी को कुषाण युग के धार्मिक बहुलवाद की एक विशिष्ट पहचान बताया।

तक्षशिला के बारे में मिल रही अहम जानकारी
कलाकृतियां पुरातात्विक अवशेषों के उत्तरी तरफ, विशेष रूप से B-2 खाई के भीतर पाई गईं – जो साइट पर वर्तमान में खोदी जा रही 16 अलग-अलग खाइयों में से एक है। डोगर ने कहा कि आसपास के पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि ये विशिष्ट अवशेष एक आवासीय क्षेत्र थे। ये नवीनतम खोजें इस बात की पुष्टि करती हैं कि कुषाण शासन के तहत, विशेष रूप से पहली और तीसरी शताब्दी ईस्वी के बीच, तक्षशिला अपने राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभाव के चरम पर पहुंच गया था।
गांधार कला का मुख्य केंद्र था तक्षशिला
डोगर ने कहा, “कनिष्क जैसे महान सम्राटों की वजह से तक्षशिला एक प्रमुख प्रशासनिक, वाणिज्यिक और बौद्धिक केंद्र के रूप में उभरा।” उन्होंने कहा कि इस युग के दौरान बौद्ध धर्म को कुषाणों का संरक्षण मिला जिससे स्तूपों, मठों और विशाल धार्मिक परिसरों का निर्माण हुआ। इस दौर में गांधार कला का भी उदय हुआ, जो ग्रीक, रोमन, फारसी और भारतीय परंपराओं का एक खास मेल था, और तक्षशिला इसका मुख्य केंद्र था।

अहम व्यापारिक केंद्र था तक्षशिला
डोगर ने बताया कि पत्थर को हजारों सालों से प्राचीन सभ्यताओं में महत्व दिया गया है। डोगर ने कहा, “तक्षशिला में इसकी उपस्थिति लंबी दूरी के व्यापार संबंधों की ओर इशारा करती है, खासकर आज के अफगानिस्तान में बदख्शां के साथ, जो का एक ऐतिहासिक स्रोत है।”
क्या बोले जाने-माने सिक्का विशेषज्ञ?
जाने-माने सिक्का विशेषज्ञ मलिक ताहिर सुलेमान ने डॉन को बताया कि कुषाण सिक्के प्राचीन दक्षिण और मध्य एशिया को समझने के लिए कुछ सबसे जरूरी ऐतिहासिक स्रोत हैं। सुलेमान ने कहा, “पहली और चौथी शताब्दी ईस्वी के बीच जारी किए गए कुषाण सिक्के इंडो-ग्रीक नकल से एक परिष्कृत शाही मुद्रा प्रणाली में विकसित हुए।” “मुख्य रूप से सोने, तांबे और कांसे में ढाले गए, वो साम्राज्य की आर्थिक ताकत और विशाल व्यापार नेटवर्क को दर्शाते हैं, जिसमें रोमन बाजारों के साथ संबंध भी शामिल हैं।” सुलेमान ने कहा कि कुषाण सिक्कों की पहचान उनकी समृद्ध चित्रकला और बहुभाषी शिलालेखों से होती है।

हिमाचल, जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी, तो दिल्ली-NCR में शीतलहर और घने कोहरे का अलर्ट; जानें 2 जनवरी का वेदर

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नए साल की शुरुआत के साथ ही पहाड़ी राज्यों में जमकर बर्फबारी हो रही है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर में आज घने कोहरे को देखते हुए भारत मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। जानें 2026 के दूसरे दिन यानी 2 जनवरी को कहां कैसा मौसम है।नए साल की शुरुआत कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी के साथ हुई है। आज भी पहाड़ी राज्यों में जमकर बर्फबारी होने की संभावना है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक पहाड़ों से मैदान तक शीतलहर का प्रकोप रहेगा हिमाचल, उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी की चेतावनी है तो जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर इलाकों में बर्फबारी का अनुमान है। यानी तापमान में गिरावट की वजह से प्रचंड ठंड रहेगी है। हालांकि बर्फबारी होने से सैलानियों की मौज आ गई है वो इस बर्फबारी का पूरा मजा ले रहे हैं। वहीं, दिल्ली-NCR में शीतलहर और घने कोहरे का अलर्ट जारी है। साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।
दिल्ली में आज कैसा रहेगा मौसम की मानें तो 2 जनवरी को दिल्ली में ऑरेंज अलर्ट रहेग। आज ठंडी हवाएं चल सकती हैं और बादल छाए रहेंगे। 2 जनवरी को धूप न निकलने का भी पूर्वानुमान है. अभी सिर्फ 2 जनवरी के लिए ही ऑरेंज अलर्ट की चेतावनी भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी की गई है। आईएमडी ने 7 जनवरी तक के मौसम का भी पूर्वानुमान जारी कर दिया है, जिसमें अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक गिरता हुआ नजर आ रहा हैहिमाचल, जम्मू-कश्मीर में आज भी बर्फबारी का अलर्ट
नए साल की शुरुआत के साथ ही पहाड़ी राज्यों में जमकर बर्फबारी हो रही है। जम्मू से लेकर उत्तराखंड और हिमाचल की वादियां बर्फ से ढक गईं हैं। चंबा, मनाली, भद्रवाह और गुलमर्ग तक इलाके सफेद चादर से ढके नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक पहाड़ी राज्यों में आज भी जमकर बर्फबारी देखने को मिलेगी। हालांकि कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है।

पंजाब से लेकर ओडिशा तक कोहरे की मार
पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, यूपी, बिहार और ओडिशा में अगले 5 से 7 दिनों तक सुबह और रात के समय बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। यूपी के 25 से ज्यादा जिलों में आज शीतलहर और कोहरे का डबल अटैक रहेगा। कई जगहों पर विजिबिलिटी बेहद कम रह सकती है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है।

वहीं, राजस्थान के कुछ हिस्सों में कोल्ड वेव यानी शीतलहर चलने की चेतावनी जारी की गई है। खासकर सुबह और रात के समय ठंड ज्यादा परेशान कर सकती है।उत्तराखंड का मौसम
उत्तराखंड में अगले 2 दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती हैं। इससे पहाड़ी इलाकों में तापमान और गिर सकता है और सफर करने वालों को सतर्क रहने की जरूरत है।

‘इक्कीस’ का बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन कैसा रहा हाल, अगस्त्य नंदा-सिमर भाटिया की डेब्यू फिल्म ने कमाए करोड़

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‘इक्कीस’ 01 जनवरी, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होते ही चर्चा में आ गई है। अब इसके पहले दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन भी सामने आ चुका है। यहां धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म का पहले दिन का कलेक्शन और ऑक्यूपेंसी दी गई है।अमिताभ बच्चन के पोते अगस्त्य नंदा ने साल 2026 की पहली फिल्म ‘इक्कीस’ से बड़े पर्दे पर डेब्यू किया। फिल्म अनाउंसमेंट के बाद से ही चर्चा में थी और सभी की नजरें इस स्टारकिड की परफॉर्मेंस पर थीं। इसी बीच, दिवंगत दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र का निधन हो गया। इस तरह यह वॉर ड्रामा उनकी आखिरी स्क्रीन अपीयरेंस बन गई। ‘इक्कीस’ ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर सिंगल-डिजिट नंबर से शुरुआत की है। फिल्म के पहले दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और ऑक्यूपेंसी सामने आ गई है।
इक्कीस ने पहले दिन कमाए इतने करोड़
अगस्त्य नंदा स्टारर यह वॉर फिल्म सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के जीवन पर आधारित है। सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, ‘इक्कीस’ ने ओपनिंग डे पर बॉक्स ऑफिस पर 7 करोड़ रुपये कमाए हैं। यह एक अच्छा नंबर है क्योंकि अगस्त्य और सिमर भाटिया ने इस फिल्म से बड़े पर्दे पर डेब्यू किया है। वहीं, हाई एक्सपेक्टेशन और जाने-माने सितारों वाली रोम-कॉम ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ ने अपनी रिलीज के पहले दिन 7.75 करोड़ रुपये कमाए थे। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बायोपिक आने वाले दिनों में कितना कमाएगी।

इक्कीस की पहले दिन की ऑक्यूपेंसी
सैकनिल्क के अनुसार, धर्मेंद्र की आखिरी स्क्रीन अपीयरेंस ने गुरुवार, 01 जनवरी, 2026 को कुल 31.94% हिंदी ऑक्यूपेंसी दर्ज की।इक्कीस डे 1 हिंदी (2D) सिनेमाघरों में ऑक्यूपेंसी

सुबह शो: 12.09%
दोपहर शो: 35.29%
शाम शो: 46.77%
रात शो: 33.62%
इक्कीस की दिल छू लेने वाली कहानीश्रीराम राघवन द्वारा निर्देशित यह फिल्म अरुण खेत्रपाल की बायोपिक है, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान देश के लिए शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। अगस्त्य नंदा और धर्मेंद्र के अलावा फिल्म में जयदीप अहलावत, सिमर भाटिया, सिकंदर खेर, श्री बिश्नोई और एकावली खन्ना भी हैं। वहीं, दर्शकों के लिए धर्मेंद्र को बड़े पर्दे पर आखिरी बार देखना थोड़ा भावुक कर सकता है। फिल्म ‘इक्कीस’ को इंडिया टीवी ने 5 में से 3.5 रेटिंग दी है।

2026 में इन 5 राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव, जानें किस सूबे में अभी किसकी है सरकार

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भारत की सियासत में 2026 एक बहुत महत्वपूर्ण साल होने जा रहा है क्योंकि अगले कुछ ही महीनों में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होंगे। इन चुनावों को बीजेपी के विस्तार और विपक्ष की एकजुटता की परीक्षा माना जा रहा है। भारतीय राजनीति के लिए 2026 का साल बेहद अहम रहने वाला है। अगले कुछ ही महीनों में देश के 5 राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ये चुनाव भले ही विधानसभा के लिए हो रहे हों, पर राष्ट्रीय राजनीति को भी बहुत मजबूती से प्रभावित करेंगे। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी अपनी सत्ता को कई नए राज्यों में स्थापित करने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ विपक्ष, खासकर कांग्रेस और क्षेत्रीय दल, देश की सबसे बड़ी पार्टी को कोई मौका नहीं देना चाहते हैं। ये विधानसभा चुनाव काफी हद तक ये भी बताने में कामयाब होंगे कि मोदी सरकार की नीतियां कितनी असरदार हैं और विपक्ष कितना एकजुट है। आइए, एक-एक करके इन राज्यों की मौजूदा सरकार, सियासी हालात और चुनावों की अहमियत पर नजर डालते हैं।
1: पश्चिम बंगाल में ममता के सामने बड़ी चुनौती
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की सरकार है, जिसने 2021 के विधानसभा चुनावों में 213 सीटें जीतीं और 48% वोट शेयर हासिल किया। ममता की लोकप्रियता और कल्याण योजनाएं उनकी ताकत हैं, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और गवर्नेंस के विवाद उनकी सरकार पर भारी पड़ सकते हैं। बीजेपी 2021 में 77 सीटों तक पहुंची थी और अब बिहार में बड़ी जीत के बाद काफी आक्रामक है। कांग्रेस यहां कमजोर हो चुकी है और नेतृत्व के अभाव से जूझ रही है। अगर बीजेपी बंगाल में कुछ अच्छा कर जाती है तो यह उसकी राजनीति के लिए एक बहुत बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है। वहीं, TMC की हार उसे उन क्षेत्रीय पार्टियों की लिस्ट में डाल सकती है जो एक समय किसी राज्य में बहुत ताकतवर थीं लेकिन धीरे-धीरे कमजोर होती चली गईं।
2: असम में बीजेपी ने बनाई है मजबूत पकड़
असम में फिलहाल हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है। 2021 के चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने 75 सीटें जीतीं और अब लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी कर रहा है। शर्मा ने पिछले कुछ सालों में बीजेपी के फायरब्रांड नेता के साथ-साथ एक ऐसे लीडर की छवि बनाई है जो विकास, सुरक्षा और पहचान की राजनीति पर जोर देता है। वहीं, विपक्ष में कांग्रेस गौरव गोगोई के नेतृत्व में अपनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। मुस्लिम वोटों के दम पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने वाली AIUDF जैसी पार्टियां भी आने वाले विधानसभा चुनावों में काफी कुछ तय करेंगी। ये चुनाव बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका है, तो वहीं अगर कांग्रेस यहां अच्छा करती है तो विपक्ष के लिए बड़ा बूस्ट होगभारतराजनीति2026 में इन 5 राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव, जानें किस सूबे में अभी किसकी है सरकार
2026 में इन 5 राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव, जानें किस सूबे में अभी किसकी है सरका| भारत की सियासत में 2026 एक बहुत महत्वपूर्ण साल होने जा रहा है क्योंकि अगले कुछ ही महीनों में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होंगे। इन चुनावों को बीजेपी के विस्तार और विपक्ष की एकजुटता की परीक्षा माना जा रहा है।
5 राज्यों की जनता इस साल विधानसभा चुनावों के लिए वोटिंग करेगी।
| भारतीय राजनीति के लिए 2026 का साल बेहद अहम रहने वाला है। अगले कुछ ही महीनों में देश के 5 राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ये चुनाव भले ही विधानसभा के लिए हो रहे हों, पर राष्ट्रीय राजनीति को भी बहुत मजबूती से प्रभावित करेंगे। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी अपनी सत्ता को कई नए राज्यों में स्थापित करने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ विपक्ष, खासकर कांग्रेस और क्षेत्रीय दल, देश की सबसे बड़ी पार्टी को कोई मौका नहीं देना चाहते हैं। ये विधानसभा चुनाव काफी हद तक ये भी बताने में कामयाब होंगे कि मोदी सरकार की नीतियां कितनी असरदार हैं और विपक्ष कितना एकजुट है। आइए, एक-एक करके इन राज्यों की मौजूदा सरकार, सियासी हालात और चुनावों की अहमियत पर नजर डालते हैं।

अमित शाह और पीएम मोदी-
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1: पश्चिम बंगाल में ममता के सामने बड़ी चुनौती
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की सरकार है, जिसने 2021 के विधानसभा चुनावों में 213 सीटें जीतीं और 48% वोट शेयर हासिल किया। ममता की लोकप्रियता और कल्याण योजनाएं उनकी ताकत हैं, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और गवर्नेंस के विवाद उनकी सरकार पर भारी पड़ सकते हैं। बीजेपी 2021 में 77 सीटों तक पहुंची थी और अब बिहार में बड़ी जीत के बाद काफी आक्रामक है। कांग्रेस यहां कमजोर हो चुकी है और नेतृत्व के अभाव से जूझ रही है। अगर बीजेपी बंगाल में कुछ अच्छा कर जाती है तो यह उसकी राजनीति के लिए एक बहुत बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है। वहीं, TMC की हार उसे उन क्षेत्रीय पार्टियों की लिस्ट में डाल सकती है जो एक समय किसी राज्य में बहुत ताकतवर थीं लेकिन धीरे-धीरे कमजोर होती चली गईं।

2: असम में बीजेपी ने बनाई है मजबूत पकड़
असम में फिलहाल हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है। 2021 के चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने 75 सीटें जीतीं और अब लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी कर रहा है। शर्मा ने पिछले कुछ सालों में बीजेपी के फायरब्रांड नेता के साथ-साथ एक ऐसे लीडर की छवि बनाई है जो विकास, सुरक्षा और पहचान की राजनीति पर जोर देता है। वहीं, विपक्ष में कांग्रेस गौरव गोगोई के नेतृत्व में अपनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। मुस्लिम वोटों के दम पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने वाली AIUDF जैसी पार्टियां भी आने वाले विधानसभा चुनावों में काफी कुछ तय करेंगी। ये चुनाव बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका है, तो वहीं अगर कांग्रेस यहां अच्छा करती है तो विपक्ष के लिए बड़ा बूस्ट होगा।

3: तमिलनाडु में नए चेहरों से होगी DMK की जंग
तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी कि DMK सरकार है, जिसने 2021 में 234 में से 133 सीटें जीतीं थीं। इस सूबे में चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से 1.86 करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं और पार्टी करीब 2.5 करोड़ वोटों का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि बेरोजगारी जैसे मुद्दे पार्टी पर भारी पड़ सकते हैं और एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर तो है ही। वहीं, दूसरी तरफ AIADMK-बीजेपी गठबंधन भी अपना पूरा दम लगाए हुए है, जबकि विजय की TVK नई पार्टी के रूप में युवाओं को आकर्षित कर रही है। तमिलनाडु में जीत बीजेपी के लिए ऑर्गेनिक ग्रोथ का बड़ा मौका हो सकती है, जहां हिंदुत्व की सीमाएं हैं। वहीं, विपक्ष के लिए DMK की हार INDIA ब्लॉक को कमजोर करेगी।

4: केरल में फिर से जाग गई है कांग्रेस की उम्मीदकेरला में पिनाराई विजयन की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी कि LDF की सरकार है, जिसने 2021 में 99 सीटें जीतीं। यह गठबंधन एक बार फिर सत्ता में वापसी चाहता है लेकिन पिछले कुछ महीने इसके लिए अच्छे नहीं रहे हैं। विजयन सरकार का सामाजिक कल्याण और विकास पर जोर है, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और मुख्यमंत्री की ऑटोक्रेटिक स्टाइल एक बड़ा माइनस पॉइंट है। 2025 स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस-UDF ने अच्छा प्रदर्शन किया, जो LDF के लिए चिंता की बात है। वहीं, बीजेपी ने भी इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है और वह अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश में है। कुल मिलाकर इन चुनावों में लेफ्ट, कांग्रेस और बीजेपी, तीनों का बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है।

5: NDA के लिए आसान नहीं होगी पुडुचेरी में वापसी
पुडुचेरी में एन. रंगासामी के नेतृत्व में ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस यानी कि AINRC और बीजेपी का गठबंधन सत्ता में है। 2021 में 30 सीटों वाली विधानसभा में AINRC ने 10 और बीजेपी ने 6 सीटें जीती थीं, लेकिन फिलहाल गठबंधन में सब कुछ अच्छा होता नहीं दिख रहा। विपक्ष में DMK और कांग्रेस जैसी पार्टियां इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश की सत्ता पर अपना दावा मजबूती से पेश करती दिख रही हैं। लोकल गवर्नेंस और विकास के मुद्दे प्रमुख हैं, ऐसे में ये चुनाव बीजेपी के लिए दक्षिण में गठबंधन बचाने का टेस्ट है, जहां एंटी-इनकंबेंसी है। वहीं, अगर कांग्रेस और DMK की फिर से हार होती है तो उनके लिए पुडुचेरी में अपना संगठन बचाना मुश्किल हो सकता है।

बीजेपी के लिए सुनहरा मौका हैं ये विधानसभा चुनाव
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इन 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए दक्षिण और पूर्व में विस्तार का सुनहरा मौका हैं, जहां वह हिंदुत्व और मोदी ब्रांड पर दांव लगा रही है। 2025 में दिल्ली और बिहार में जीत से उसका मनोबल ऊंचा है। विपक्ष के लिए ये बाउंस बैक का टेस्ट हैं, और लेफ्ट की हार से INDIA ब्लॉक कमजोर हो सकता है, जबकि कांग्रेस की जीत उसे नई ऊर्जा देगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि 2026 के नतीजे 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

2025 में दुनिया भर में मारे गए 128 पत्रकार, सबसे ज्यादा 56 मौतें फिलीस्तीन में, जानें भारत का आंकड़ा

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2025 में दुनिया भर में 128 पत्रकारों की मौत हुई, जिनमें सबसे ज्यादा 56 मौतें गाजा युद्ध के दौरान फिलीस्तीन में हुईं। IFJ रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों को विभिन्न देशों में निशाना बनाया गया है। चीन में सबसे ज्यादा 143 पत्रकार जेल में हैं।नई दिल्ली: दुनिया भर में 2025 में कुल 128 पत्रकारों और मीडिया कार्यकर्ताओं की मौत हुई। अंतरराष्ट्रीय पत्रकार महासंघ यानी कि IFJ की अंतिम रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा पत्रकारों की मौत मध्य पूर्व और अरब दुनिया में हुई। IFJ की रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व और अरब दुनिया में 74 पत्रकारों की मौत हुई जो कि कुल मौतों का करीब 58 फीसदी है। इनमें से भी सबसे ज्यादा 56 मौतें अकेले गाजा युद्ध के दौरान रिपोर्टिंग करते हुए फिलीस्तीन में हुई हैं।
फिलीस्तीन में कुल 56 पत्रकारों की मौत
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘मध्य पूर्व और अरब दुनिया में 2025 में पत्रकारों की मौतों का एक भयानक रिकॉर्ड है, जहां 74 मौतें हुईं। फिलिस्तीनी पत्रकारों ने सबसे ज्यादा कीमत चुकाई है, क्योंकि गाजा युद्ध में IFJ ने 56 मौतें दर्ज कीं। सबसे चर्चित मामला 10 अगस्त का था, जब अल जजीरा के रिपोर्टर अनास अल-शरीफ को निशाना बनाकर हमला किया गया। वह गाजा शहर के अल शिफा अस्पताल के बाहर पत्रकारों के टेंट में थे, जहां उनके साथ 5 अन्य पत्रकारों और मीडिया कार्यकर्ताओं की भी मौत हो गई।’

भारत में 2025 में 4 पत्रकारों की मौत हुई
IFJ ने रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि कुल 128 मौतों में 9 मौतें दुर्घटना से हुईं और मरने वालों में 10 महिलाएं भी शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी पुष्टि की गई कि 10 दिसंबर के बाद 17 अतिरिक्त मामले सामने आए, जिससे पहले की अस्थायी संख्या 111 से बढ़कर 128 हो गई। वहीं, यमन में 13 पत्रकारों की मौत हुई, यूक्रेन में 8, और सूडान में 6 पत्रकार मारे गए। भारत और पेरू में 4-4 मौतें दर्ज की गईं। इसके अलावा, कई अन्य देशों जैसे पाकिस्तान, मैक्सिको, फिलीपींस और पेरू में 3-3 पत्रकार मारे गए।

चीन में 143 पत्रकारों को जेल में डाला गयारिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में 15 पत्रकारों की मौत हुई। यह क्षेत्र दुनिया में पत्रकारों को जेल में डालने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र बना हुआ है, जहां कुल 277 मीडिया कार्यकर्ता जेल में हैं। इनमें हांगकांग समेत चीन में कुल 143 पत्रकार जेल में हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसके बाद म्यांमार में 49 और वियतनाम में 37 पत्रकार जेल में हैं। वहीं, यूरोप में 2025 में 10 पत्रकारों की मौत हुई, जिनमें से 8 मौतें यूक्रेन में हुईं। अफ्रीका में कुल 9 पत्रकार मारे गए जिनमें सूडान में हुईं 6 मौतें शामिल हैं। अमेरिका महाद्वीप में 11 मौतें दर्ज की गईं, जहां पेरू में सबसे ज्यादा 4 मौतें हुईं।

‘पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है’
1990 में अपनी वार्षिक मौत सूची शुरू करने के बाद से, IFJ ने दुनिया भर में कुल 3173 पत्रकारों की मौतें दर्ज की हैं। IFJ के महासचिव एंथनी बेलेंजर ने कहा कि ये आंकड़े एक वैश्विक संकट को दिखाते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकारों से तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने कहा, ‘यह एक वैश्विक संकट है। ये मौतें याद दिलाती हैं कि पत्रकारों को उनके काम के लिए निशाना बनाया जा रहा है। सरकारों को अब पत्रकारों की रक्षा करने, हत्यारों को न्याय के कटघरे में लाने और प्रेस की आजादी को बनाए रखने के लिए कदम उठाने चाहिए। दुनिया अब और इंतजार नहीं कर सकती।’