Sunday, July 12, 2026
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शादी की खुशियां मातम में बदलीं, मंडप से बुलाकर युवक पर जानलेवा हमला

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मुजफ्फरपुर।
गायघाट थाना क्षेत्र के बखरी केसो गांव में एक शादी समारोह के दौरान गंभीर हिंसक घटना सामने आई है। पीड़ित उपेन्द्र भगत ने थानाध्यक्ष को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनके बेटा मनोज कुमार को शादी मंडप से बाहर बुलाकर बेरहमी से पीटा गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
आवेदन के अनुसार, दीपक कुमार की शादी 1 दिसंबर 2025 को रानी कुमारी के साथ तय थी। बारात और सभी रस्मों की व्यवस्था परिजनों ने की थी। रात करीब 11 बजे दरवाजा लगने के बाद परिवार मंडप पर मौजूद था। इसी दौरान मनोज कुमार मंडप पर नहीं मिले। खोजबीन करने पर पता चला कि उन्हें मंडप से करीब 150 फुट दूर बुलाकर सोनू कुमार (पिता गणेश महतो) और राजू कुमार राय (पिता दिनेश राय) सहित अन्य अज्ञात लोगों ने सिर पर वार कर बुरी तरह पीटा।
घायल मनोज कुमार को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए निजी आशा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार सिर में गंभीर चोटें आई हैं और इलाज जारी है।
पीड़ित पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की अपील की है। पुलिस ने आवेदन के आधार पर संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

उपेंद्र भगत मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी अन्य गलत गतिविधियों में शामिल है और शराब और अन्य नशीले पदार्थों का धंधा करता है और और आरोपियों पर सबसे सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पीड़ित परिवार ने यह भी कहा कि भविष्य में मुझे या मेरे परिवार को कुछ होता है तो इसके जिम्मेवारी यही आरोपी लोग होंगे इन पर सख्त कार्रवाई हो।

शादी की खुशियां मातम में बदलीं, मंडप से बुलाकर युवक पर जानलेवा हमला
मुजफ्फरपुर।
गायघाट थाना क्षेत्र के बखरी केसो गांव में एक शादी समारोह के दौरान गंभीर हिंसक घटना सामने आई है। पीड़ित उपेन्द्र भगत ने थानाध्यक्ष को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनके भतीजे मनोज कुमार को शादी मंडप से बाहर बुलाकर बेरहमी से पीटा गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
आवेदन के अनुसार, दीपक कुमार की शादी 1 दिसंबर 2025 को रानी कुमारी के साथ तय थी। बारात और सभी रस्मों की व्यवस्था परिजनों ने की थी। रात करीब 11 बजे दरवाजा लगने के बाद परिवार मंडप पर मौजूद था। इसी दौरान मनोज कुमार मंडप पर नहीं मिले। खोजबीन करने पर पता चला कि उन्हें मंडप से करीब 150 फुट दूर बुलाकर सोनू कुमार (पिता गणेश महतो) और राजू कुमार राय (पिता दिनेश राय) सहित अन्य अज्ञात लोगों ने सिर पर वार कर बुरी तरह पीटा।
घायल मनोज कुमार को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए निजी आशा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार सिर में गंभीर चोटें आई हैं और इलाज जारी है।
पीड़ित पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की अपील की है। पुलिस ने आवेदन के आधार पर संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सरकारी रास्ते पर कब्जे का आरोप, जातीय एक्ट की धमकी—लखीमपुर खीरी में शिवानी का परिवार घर में कैद होने को मजबूर

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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के थाना भीरा क्षेत्र अंतर्गत रामनगर खुर्द गांव से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सरकारी रास्ते को लेकर चल रहा विवाद अब खुली धमकियों, उत्पीड़न और जातीय दबाव में बदल गया है। पीड़िता शिवानी, पत्नी दीपू, का आरोप है कि बीते चार-पांच वर्षों से वह और उनका परिवार अपने ही घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मामला रामनगर खुर्द गांव का है, जहां पूर्व में दोनों पक्षों के बीच रास्ते को लेकर विवाद हुआ था। इस विवाद को लेकर गांव स्तर पर सुलह-समझौता भी कराया गया था। सुलहनामे में स्पष्ट रूप से तय किया गया था कि सार्वजनिक रास्ता सभी के लिए खुला रहेगा और किसी भी पक्ष द्वारा उसमें बाधा नहीं डाली जाएगी। सुलहनामा दोनों पक्षों की सहमति से, बिना किसी दबाव के लिखा-पढ़ा गया और मान्य किया गया था।
इसके बावजूद शिवानी का आरोप है कि आरोपी सालिक राम, और जयपाल सुलहनामे और कानून दोनों को ठेंगा दिखा रहे हैं। वे सरकारी रास्ते पर न तो आने-जाने देते हैं और न ही वहां कोई सामान रखने देते हैं। शिवानी का कहना है कि यदि वह रास्ते में कुछ भी रख देती हैं, तो आरोपी उस पर कुत्तों की गंदगी फेंक देते हैं या जानबूझकर अपमानजनक हरकतें करते हैं।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी खुलेआम धमकी देते हैं कि वे “हरिजन एक्ट” लगा देंगे और कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। शिवानी के अनुसार, आरोपी यह तक कहते हैं कि वे सरकारी रास्ते पर दीवार खड़ी कर देंगे और प्रशासन भी उनका कुछ नहीं कर पाएगा। इन धमकियों के कारण पूरा परिवार मानसिक तनाव में जी रहा है।
शिवानी का कहना है कि वह इस मामले को लेकर कई बार शिकायत और आवेदन दे चुकी हैं, लेकिन न तो स्थानीय प्रधान ने कोई मदद की और न ही प्रशासन स्तर पर सुनवाई हुई। उनका आरोप है कि दबंगई और जातीय धमकियों के चलते उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

पीड़िता ने बताया कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि घर के बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चों और महिलाओं में भय का माहौल है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि रास्ते को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई हो और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।

यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि जब लिखित सुलहनामा और सरकारी रास्ते का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है, तो फिर पीड़ित परिवार वर्षों से न्याय के लिए क्यों भटक रहा है। शिवानी का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी दबाव के बीच पोलैंड ने किया भारत का समर्थन, कहा- ‘हम संतुष्ट हैं’

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अमेरिका भारत पर रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर लगातार दबाव बना रहा है। लेकिन, इस बीच पोलैंड ने भारत का समर्थन किया है। पोलैंड के विदेश मंत्री ने कहा है कि वो इस बात से संतुष्ट हैं कि भारत ने रूसी तेल आयात में कटौती शुरू कर दी है। रूस से कच्चे तेल की लगातार खरीद को लेकर अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच पोलैंड ने भारत को समर्थन दिया है, जबकि वॉशिंगटन ने नई दिल्ली के खिलाफ टैरिफ की धमकी और तेज कर दी है, जिसमें 500 प्रतिशत तक की लेवी लगाने की संभावना भी शामिल है। बुधवार को वीमर ट्रायंगल ग्रुपिंग के साथ भारत की पहली बातचीत के बाद पेरिस में बोलते हुए, पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि भारत ने रूसी तेल आयात में कटौती करना शुरू कर दिया है। क्या बोले पोलैंड के विदेश मंत्री?
सिकोरस्की ने विदेश मंत्री एस जयशंकर और दूसरे यूरोपीय नेताओं के साथ खड़े होकर कहा, “मैंने इस बात पर संतोष जताया है कि भारत ने रूसी तेल का इंपोर्ट कम कर दिया है, क्योंकि यह पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा दे रहा है।” सिकोरस्की का यह बयान नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच बढ़ते तनावपूर्ण संबंधों के बैकग्राउंड में आया है।
क्या बोले जयशंकर?
इस बीच यूरोप में मौजूद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत के साथ रिश्तों को गहरा करने के महत्व पर जोर दिया। जयशंकर ने वीमर ट्रायंगल फॉर्मेट में भारत की पहली भागीदारी में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट, जर्मन प्रतिनिधियों और पोलैंड के विदेश मंत्री सिकोरस्की के साथ चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा यूरोप वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है और इसे भारत के संबंधों को मजबूत करने की जरूरत है।” जयशंकर ने कहा, ”मुझे लगता है कि हम अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक राजनीति दोनों में अधिक स्थिरता ला सकते हैं और इसीलिए मैं यहां हूं।”
‘यूक्रेन जंग पर भी हुई चर्चा’जयशंकर ने कहा कि हमारे के बीच खुलकर बात हुई है। बातचीत में भारत-ईयू संबंधों, इंडो-पैसिफिक और यूक्रेन जंग पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि यूरोपियन यूनियन और उसके सदस्य देशों के साथ संबंध भारत की क्षमता को दिखाते हैं। आने वाले हफ्तों में, भारत जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और EU के सीनियर नेताओं की मेजबानी करेगा, जो बढ़ती अनिश्चितता और वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव के बीच वैश्विक पार्टनरशिप को संतुलित करने के लिए नई दिल्ली की कोशिशों को दिखाता है।
क्या है वीमर ट्रायंगल?
वीमर ट्रायंगल एक क्षेत्रीय राजनीतिक समूह है जिसे 1991 में फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड ने यूरोपीय एकीकरण, राजनीतिक संवाद, सुरक्षा सहयोग और आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए बनाया था। इसका नाम उस जर्मन शहर के नाम पर रखा गया है जहां तीनों पहली बार मिले थे।
भारत एनर्जी स्ट्रैटेजी को कर रहा है एडजस्टभारत एनर्जी स्ट्रैटेजी को कर रहा है एडजस्ट
गौरतलब है कि, यह डिप्लोमैटिक कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी एनर्जी स्ट्रैटेजी को फिर से एडजस्ट कर रहा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के अनुसार, 2025 तक भारत का रूसी कच्चे तेल का मासिक आयात ज्यादा रहा, जिसमें नवंबर तक रूस की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से लेकर लगभग 39 प्रतिशत तक रही। नवंबर में आयात 7.7 मिलियन टन के शिखर पर पहुंच गया, जो भारत के कच्चे तेल की कुल खपत का 34 प्रतिशत था। हालांकि, तब से रूस की हिस्सेदारी घटकर 25 प्रतिशत से कम हो गई है और इस महीने इसमें और गिरावट आ सकती है।
तेल खरीद में आई गिरावट
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के डेटा से पता चलता है कि जनवरी की शुरुआत में गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं से रूसी तेल की दैनिक खरीद लगभग 72.9 मिलियन यूरो तक गिर गई, जो नवंबर के आखिर में 130.5 मिलियन यूरो और जुलाई 2023 में 189 मिलियन यूरो से कम है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, HPCL और MRPL सहित कई रिफाइनरियों ने नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रूसी तेल का इंपोर्ट रोक दिया है, जबकि अन्य गैर-प्रतिबंधित सप्लायर से खरीद जारी है।
ट्रंप ने बाइपार्टी बिल को दी मंजूरी
इस बीच यहां यह भी बता दें कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ना सिर्फ पहले भारतीय इंपोर्ट पर 50 परसेंट टैरिफ लगाया, बल्कि एक बाइपार्टी बिल को भी हरी झंडी दी है, जो अमेरिका को उन देशों पर 500 परसेंट तक टैरिफ लगाने की इजाजत दे सकता है जो जानबूझकर रूसी तेल या यूरेनियम खरीदते हैं। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक मीटिंग के बाद इस कानून को मंजूरी दी है और अगले सप्ताह की शुरुआत में इसपर वोटिंग हो सकती है

शादी का झूठा वादा, शारीरिक शोषण और जातिसूचक अपमान का आरोप, नोएडा की युवती बोली– ‘इंसाफ चाहिए, समझौता नहीं’

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नोएडा (गौतमबुद्धनगर)।
थाना सेक्टर-113 क्षेत्र से सामने आया यह मामला न सिर्फ रिश्तों में विश्वासघात की कहानी बयां करता है, बल्कि समाज में जातिगत मानसिकता और महिलाओं के शोषण की कड़वी सच्चाई भी उजागर करता है। सेक्टर-122 पर्थला खंजरपुर में किराये पर रहने वाली रंजना जाटव ने अपने ही पड़ोसी युवक पर झूठे प्रेम, शादी के फर्जी वादे, शारीरिक शोषण, जातिसूचक गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

पीड़िता रंजना जाटव पुत्री राधेश्याम मूल रूप से उन्नाव जनपद की रहने वाली है। वह नोएडा में अपनी बहन के साथ रहकर एक खिलौने की दुकान में प्राइवेट नौकरी कर जीवन यापन कर रही थी। रंजना के अनुसार वर्ष 2020 के दौरान उसके घर के सामने रहने वाले बादल यादव से बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे दोस्ती और फिर प्रेम संबंध में बदल गई। आरोपी ने बार-बार शादी का भरोसा दिलाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और खुद को भविष्य का पति बताता रहा।

पीड़िता का कहना है कि आरोपी‌ बादल यादव उसे अपने परिवार वालों से भी मिलवाता था और बात भी करवाता था। और बादल यादव रंजना से बोला था कि परिवार के न मानने पर कोर्ट मैरिज कर लेंगे‌।

रंजना का आरोप है कि उसकी सैलरी करीब बड़ी मुश्किल से ₹10000 थी जिसमें रंजना को स्वयं का खर्चा और रूम किराया देने पढ़ते थे उसके बावजूद वह आरोपी रंजना को बेहला फुसलाकर खर्च करवाता था, रिचार्ज से लेकर खाने-पीने तक का पैसा देती रही और पति-पत्नी की तरह जीवन जीता रहा ।

मामला तब बिगड़ा जब 20 अगस्त 2025 की रात करीब ढाई बजे रंजना ने आरोपी बादल यादव से शादी की बात दोहराई। आरोप है कि इस पर बादल यादव ने न सिर्फ शादी से इंकार कर दिया, बल्कि जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि वह शादी के लिए नहीं, सिर्फ “मजा लेने” के लिए थी। पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने यह भी धमकी दी कि अगर उसने थाने में शिकायत की तो जान से मार देगा, यह कहते हुए कि वह लोकल है और पीड़िता बाहरी।

इसके बाद 24 अगस्त 2025 को आरोपी ने पीड़िता को हर जगह से ब्लॉक कर दिया और संपर्क पूरी तरह तोड़ लिया। अकेली और मानसिक रूप से टूट चुकी रंजना ने 3 अक्टूबर 2025 को थाना सेक्टर-113 में तहरीर देकर मामला दर्ज कराया। पीड़िता का आरोप है कि बाद में आरोपी पक्ष की ओर से ढाई लाख रुपये देकर समझौता करने का दबाव भी बनाया गया, लेकिन उसने इसे ठुकरा दिया।
मीडिया से बातचीत में रंजना जाटव ने कहा कि उसने आरोपी के साथ पूरी ईमानदारी से रिश्ता निभाया, लेकिन अंत में उसे जाति और झूठे वादों के नाम पर ठुकरा दिया गया। पीड़िता का कहना है कि वह सिर्फ न्याय चाहती है, ताकि किसी और लड़की के साथ ऐसा न हो। फिलहाल मामला पुलिस जांच में है और पीड़िता निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रही है।

 

‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका से 60 बार गिड़गिड़ाया था पाकिस्तान’, अमित मालवीय ने दिए सबूत

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ऑपरेशन सिंदूर पर झूठ बोलने को लेकर पाकिस्तान और उसके समर्थकों को पोल खुल गई है। FARA के दस्तावेज शेयर करते हुए अमित मालवीय ने ऐसा दावा किया है।नई दिल्ली: पहलगाम हमले के बाद भारत की तरफ से किए ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान इतना डर गया था कि उसने अमेरिका से करीब 60 बार गुहार लगाई थी कि सीजफायर करवा दिया जाए। इतना नहीं नहीं, पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए अलग-अलग 6 कंपनियों को लगभग 45 करोड़ रुपये दिए थे। ये दावा कि BJP के नेशनल इन्फॉर्मेशन & टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रभारी अमित मालवीय ने किया है।
पाकिस्तान के गिड़गिड़ाने का कैसे हुआ खुलासा?
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, ‘यह पाकिस्तान के सपोटर्स के लिए बुरी खबर है। अमेरिका के Foreign यानी FARA के तहत रिलीज किए गए दस्तावेजों से मालूम चलता है कि पिछले साल, भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को हिला दिया था।’
अमेरिका के आगे 60 बार गिड़गिड़ाया था पाकिस्तान
अपने पोस्ट में मालवीय ने आगे लिखा, ‘पाकिस्तान ने जंग को रोकने के लिए अमेरिका में अपने राजनयिकों के जरिए आक्रामक तौर पर पैरवी की थी। उसने सांसदों, शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, पेंटागन और विदेश विभाग के अधिकारियों से लगभग 60 बार कॉन्टैक्ट किया था।’
सीजफायर के लिए पाकिस्तान ने की थी बात
FARA के तहत यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में दायर किए गए दस्तावेजों से मालूम होता है कि पाकिस्तानी डिप्लोमैट्स ने अप्रैल के आखिर से लेकर 4 दिन के ऑपरेशन सिंदूर के बाद तक ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने की बैठकों के जरिए सीजफायर के लिए बातचीत की थी।
लॉबिंग में पाकिस्तान ने खर्च किए इतने करोड़
ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की कोशिश में पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन तक तुरंत पहुंच हासिल करने के लिए 6 लॉबिंग फर्मों पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए थे। अब भारत में उन सभी लोगों की पहचान करिए जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों और प्रधानमंत्री मोदी पर शक किया। इनको एक बार फिर बेनकाब करना होगा।

इमरान हाशमी को इमिग्रेशन चेक में क्यों होती थी मुश्किल, किया खुलासा, बोले- मैं किसी ऐसे व्यक्ति…

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इमरान हाशमी अपनी वेब सीरीज ‘तस्करी- द स्मगलर्स वेब’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में कई मजेदार खुलासे, जहां उन्होंने अपना एक पर्सनल अनुभव बताया। बॉलीवुड एक्टर इमरान ने खुलासा किया कि एक वक्त था, जब उन्हें इमिग्रेशन चेक पर रोक दिया जाता था।इमरान हाशमी इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज ‘तस्करी- द स्मगलर्स वेब’ को लेकर जबरदस्त चर्चा में बने हुए हैं, जो 14 जनवरी को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने को पूरी तरह से तैयार है। अब हाल ही में इस सीरीज के ट्रेलर लॉन्च के दौरान बॉलीवुड एक्टर ने बताया है कि उन्हें अक्सर इमिग्रेशन चेक पर रोका जाता था और उन्हें शक है कि उनके ईयररिंग्स इसकी वजह हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अक्सर साइड में ले जाया जाता था और उन्होंने कहा जाता था कि शायद वह ‘किसी ऐसे इंसान जैसे दिखते हैं।’ इस बारे में बात करते हुए, उन्होंने मजेदार खुलासा कियमनोरंजनबॉलीवुडइमरान हाशमी को इमिग्रेशन चेक में क्यों होती थी मुश्किल, किया खुलासा, बोले- मैं किसी ऐसे व्यक्ति…
इमरान हाशमी को इमिग्रेशन चेक में क्यों होती थी मुश्किल, किया खुलासा, बोले- मैं किसी ऐसे व्यक्ति…
इमरान हाशमी अपनी वेब सीरीज ‘तस्करी- द स्मगलर्स वेब’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में कई मजेदार खुलासे, जहां उन्होंने अपना एक पर्सनल अनुभव बताया। बॉलीवुड एक्टर इमरान ने खुलासा किया कि एक वक्त था, जब उन्हें इमिग्रेशन चेक पर रोक दिया जात
इमरान हाशमी
इमरान हाशमी इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज ‘तस्करी- द स्मगलर्स वेब’ को लेकर जबरदस्त चर्चा में बने हुए हैं, जो 14 जनवरी को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने को पूरी तरह से तैयार है। अब हाल ही में इस सीरीज के ट्रेलर लॉन्च के दौरान बॉलीवुड एक्टर ने बताया है कि उन्हें अक्सर इमिग्रेशन चेक पर रोका जाता था और उन्हें शक है कि उनके ईयररिंग्स इसकी वजह हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अक्सर साइड में ले जाया जाता था और उन्होंने कहा जाता था कि शायद वह ‘किसी ऐसे इंसान जैसे दिखते हैं।’ इस बारे में बात करते हुए, उन्होंने मजेदार खुलासा किया।
एक्टर ने कस्टम अधिकारियों संग अपने अनुभव को किया शेयर
इमरान मुंबई में अपनी आने वाली वेब सीरीज ‘तस्करी- द स्मगलर्स वेब’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में शामिल हुए। इस इवेंट के दौरान इमरान, जो सीरीज में एक कस्टम्स ऑफिसर का रोल निभा रहे हैं। फिल्मीगौतम ने एक्टर का वीडियो अपने X पर पोस्ट किया है, जिसमें उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कभी एयरपोर्ट पर कस्टम्स अधिकारियों ने रोका या पूछताछ की है। एक्टर ने पीछे मुड़कर देखा और अपना एक पर्सनल अनुभव बताया। जब पूछा गया कि क्या उन्हें कभी ग्रीन चैनल पर रोका गया है तो इमरान ने कहा, ‘नहीं मुझे लगता है कि वे मेरे साथ बहुत अच्छे रहे हैं, जब भी मैंने यात्रा की है, वे बहुत अच्छे से बातचीत करते थे, लेकिन यह एक बहुत ज्यादा डर वाली भावना है, यह लॉजिकल नहीं है।’
इमरान हाशमी अचानक से क्यों हो जाते थे परेशान
एक्टर ने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि यह ऐसा है जैसे जब आप गाड़ी चलाना सीखते हैं, लेकिन जब आप सड़क पर किसी RTO ऑफिसर को देखते हैं तो आप अचानक परेशान हो जाते हैं तो ऐसा ही होता है, जब मैं अकेले यात्रा कर रहा होता हूं, भले ही मैंने सिर्फ कपड़े पैक किए हों फिर भी ग्रीन चैनल से गुजरते समय ऐसा लगता है कि आप अपने बैग में 100 किलो का गैर-कानूनी सामान लेकर जा रहे हैं।’
इमरान हाशमी को इमिग्रेशन चेक पर क्यों रोका जाता थाएक्टर ने आगे कहा, ‘लेकिन यह बिल्कुल भी लॉजिकल नहीं है। मुझे इमिग्रेशन चेक पर बहुत पहले ही रोक लिया गया था, शायद ईयररिंग्स या ऐसी ही किसी चीज की वजह से, जब मैं अकेले यात्रा करता था, लेकिन अब, जब वे मुझे मेरे प्यारे परिवार के साथ देखते हैं तो वे मुझ पर शक नहीं करते। पहले, 2000 के दशक की शुरुआत में मुझे कई बार साइड में ले जाया जाता था। इसे प्रोफाइलिंग कहते हैं। मैं किसी ऐसे व्यक्ति जैसा दिखता था, लेकिन मुझे नहीं पता कि वह व्यक्ति कौन था।’
कस्टम ऑफिसर बन छाए इमरान
इमरान आखिरी बार सुपन वर्मा के कोर्टरूम ड्रामा ‘हक’ में दिखे थे, जिसमें यामी गौतम भी थीं। यह फिल्म शाह बानो बेगम की जिंदगी और कानूनी लड़ाई से प्रेरित है, जिनके 1985 के ऐतिहासिक मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता का अधिकार दिया था। अब वह वेब सीरीज ‘तस्करी- द स्मगलर्स वेब’ में नजर आएंगे। इस सीरीज में शरद केलकर, ज़ोया अफरोज और नंदीश सिंह संधू भी हैं।

हैदराबाद में जब्त हुआ 1,000 लीटर भेड़-बकरी का खून, जिंदा जानवरों से निकाला जा रहा था

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हैदराबाद के काचेगुड़ा स्थित एक फर्म पर छापेमारी कर लगभग 1,000 लीटर भेड़ और बकरी का रक्त जब्त किया गया। फर्म का मालिक फरार है।तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में बेजुबान जानवरों के खून के अवैध व्यापार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ड्रग कंट्रोल और हैदराबाद सिटी पुलिस ने भारी मात्रा में भेड़ और बकरियों का खून जब्त किया है। इस कार्रवाई के बाद से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।
काचेगुड़ा में चल रहा था ‘ब्लड गेम’
सूचना मिली थी कि काचेगुड़ा स्थित ‘CNK इम्पोर्ट एंड एक्सपोर्ट’ नाम के फर्म में अवैध रूप से जानवरों का खून इकट्ठा किया जा रहा था। जब पुलिस ने वहां दबिश दी, तो नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। वहां बड़ी मात्रा में संरक्षित खून के कंटेनर रखे हुए थे, जो बाहर भेजे जाने के लिए तैयार थे। छापेमारी में मौके से लगभग 1,000 लीटर भेड़ और बकरी का खून बरामद हुआ।
कैसे होता था खेल?
आरोप है कि जीवित जानवरों से रक्त एकत्र कर हरियाणा स्थित एक फर्म को भेजा जा रहा था। जांच में यह खुलासा हुआ कि खून किसी वधशाला से नहीं, बल्कि जीवित जानवरों से निकाला जा रहा था। पशु कल्याण कानूनों के तहत यह एक गंभीर अपराध और बेहद क्रूर कृत्य है। अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में पशु शोषण और अवैध बायोमेडिकल सप्लाई चेन का यह सबसे बड़ा मामला है।क्लीनिकल ट्रायल का शक
जांचकर्ताओं ने पाया कि इस खून को हरियाणा की एक फर्म में भेजा जा रहा था। हालांकि, इस खून का अंतिम उपयोग क्या था, इस पर अभी रहस्य बना हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि इसका उपयोग अवैध क्लीनिकल ट्रायल में किया जा रहा था। अनाधिकृत चिकित्सा अनुसंधान में इसे एक सस्ते विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
मालिक फरार, पुलिस ने शुरू की तलाश
छापेमारी के बाद से ‘CNK इम्पोर्ट एंड एक्सपोर्ट’ का मालिक निकेश फरार है। पुलिस ने उसके खिलाफ पशु क्रूरता, अवैध व्यापार और बायोमेडिकल नियमों के उल्लंघन की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जब्त किए गए खून के नमूनों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

एशेज सीरीज में इस साल बन गया वर्ल्ड रिकॉर्ड, इससे पहले कभी नहीं हुआ था ऐसा कारनामा

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एशेज सीरीज में इस साल वो कीर्तिमान बन गया है, जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था। पहली बार ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने मिलकर इतिहास रचा है।एशेज सीरीज का आखिरकार समापन हो गया है। पांच टेस्ट मैचों की इस सीरीज के चार मुकाबले जीतकर इसे ऑस्ट्रेलिया ने अपने नाम कर लिया है। केवल एक ही मैच इंग्लैंड की टीम जीत पाई। खास बात ये रही कि जो इस बार ​की एशेज सीरीज में हुआ, वो इससे पहले कभी नहीं हुआ था। जो रिकॉर्ड इस सीरीज के दौरान बना है, उसके बारे में आपको जानना चाहिए, क्योंकि ये अपने आप में अनोखी बात है।
पहली बार चार या उससे अधिक टेस्ट मैचों की सीरीज में बने चार के अधिक रनरेट से रन
इस एशेज सीरीज के दौरान दोनों टीमों ने मिलकर 4 से भी अधिक के रन रेट से रन बनाने का काम किया है। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था कि किसी टेस्ट सीरीज के दौरान इतनी तेज गति से रन बने हों। इसमें शर्त केवल इतनी है कि सीरीज में चार या उससे अधिक मुकाबले होने चाहिए। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच तो पांच मैचों की सीरीज होती ही है, साथ ही भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया के अलावा भारत बनाम इंग्लैंड सीरीज भी चार से पांच मैचों की होती है। केवल तीन या उससे कम मैचों की गिनती इस रिकॉर्ड में नहीं की गई है।
धरे के धरे रह गए टेस्ट के सारे कीर्तिमान
इससे पहले की बात की जाए तो साल 2023 में जब इंग्लैंड में एशेज सीरीज का आयोजन किया गया था, तब ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने सीरीज के दौरान 3.93 की गति से रन बनाए ​थे। अब ये रिकॉर्ड टूट गया है। जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि पहली बार किसी चार या उससे अधिक मैचों की सीरीज में चार के रन रेट से रन बने हैं। इससे पहले जब साल 2025 में भारत और इंग्लैंड के बीच एंडरसन तेंदुलकर ट्रॉफी हुई थी, तब दोनों टीमों ने 3.86 के रन रेट से रन बनाने का काम किया था।
सीरीज से पहले ही मजबूत दिख रही थी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम
जब इस साल की एशेज सीरीज का आगाज हुआ था, तभी ये समझ में आ रहा था कि ऑस्ट्रेलिया का यहां पर अपरहैंड होगा, लेकिन इंग्लैंड की टीम चार मैच हार जाएगी, ये शायद ज्यादा नहीं सोचा गया था। केवल एक ही मैच जीतकर इंग्लैंड ने अपनी इज्जत जरूर बचा ली है, ​बाकी इंग्लैंड की टीम को कुछ भी हाथ नहीं लगा। अब इस सीरीज के साथ ही लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट पर विराम लग गया है।

‘नेहरू नहीं चाहते थे कि सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हो’, भाजपा सांसद का बड़ा आरोप, जारी किए फैक्ट्स

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गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग को लेकर भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि पूर्व पीएम नेहरू नहीं चाहते थे कि सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हो।सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग पर हमले के 1000 साल पूरे हो गए हैं। आपको बता दें कि सन् 1026 में सोमनाथ मंदिर पर पहली बार हमला किया गया था। इसके बाद कई बार सोमनाथ मंदिर को लूटा गया और इसे नष्ट करने की कोशिश की गई। हालांकि, ये मंदिर आज भी अडिग खड़ा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 11 जनवरी को गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर जाने वाले हैं। पीएम यहां सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल भी होंगे। इससे पहले भाजपा ने सोमनाथ मंदिर को लेकर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा है। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इसे लेकर कई बड़े दावे किए हैं।
‘सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत पंडित नेहरू को थी’
भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने X पोस्ट में कहा- “अतीत में सोमनाथ को मोहम्मद गजनी और खिलजी ने लूटा लेकिन आजाद भारत में भगवान् सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत पंडित नेहरू को थी। इसकी सबसे बड़ी बानगी देखिये कि पंडित नेहरू ने 21 अप्रैल 1951 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को “प्रिय नवाबजादा” कहकर संबोधित करते हुए पत्र लिखा और उसमें सोमनाथ के दरवाजों की कहानी को “पूरी तरह से झूठा” बताया। पंडित नेहरू ने लियाकत अली खान के आगे एक तरह से सरेंडर करते हुए लिखा कि सोमनाथ मंदिर के निर्माण जैसा कुछ नहीं हो रहा।आखिर पंडित नेहरू को लियाकत अली खान से ऐसा क्या डर था जो वे उसे सोमनाथ मंदिर के बारे में पत्र लिख रहे थे। पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का सामना करने या भारत की सभ्यतागत स्मृति का बचाव करने के बजाय, पंडित नेहरू ने हिंदू ऐतिहासिक प्रतीकों को कम करके पाकिस्तान को खुश करना चुना और आंतरिक आत्मविश्वास के बजाय बाहरी तुष्टीकरण को प्राथमिकता दी। यह अंधी तुष्टिकरण की राजनीति और मुग़ल आक्रांताओं का महिमामंडन नहीं था तो और क्या था?”
‘नेहरू सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं चाहते थे’
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा- “पंडित जवाहरलाल नेहरू चाहते ही नहीं थे कि सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हो। ये तो सब जानते हैं कि पंडित नेहरू ने न केवल कैबिनेट मंत्रियों बल्कि राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद और उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन तक को पत्र लिख कर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की ज़रूरत पर सवाल उठाया था और उन्हें उद्घाटन समारोह में शामिल होने से मना किया। लेकिन ये भी सच है कि पंडित नेहरू ने सभी भारतीय मुख्यमंत्रियों को दो-दो बार पत्र लिख कर सोमनाथ मंदिर के निर्माण पर शिकायत करते हुए लिखा कि इससे विदेशों में भारत की छवि खराब हुई है।इतना ही नहीं, पंडित नेहरू ने भारत के सूचना और प्रसारण मंत्री आर.आर. दिवाकर को पत्र लिख कर सोमनाथ मंदिर के अभिषेक समारोह की कवरेज को कम करने के लिए कहा, इस समारोह को दिखावटी बताया और यहाँ तक कहा कि यह समारोह दुनिया में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। यह भी लिखा कि वह राष्ट्रपति के समारोह में शामिल होने से खुश नहीं हैं। आखिर क्यों?”
‘पंडित नेहरू ने भारतीय दूतावासों को पत्र लिख’
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा- “पंडित नेहरू ने भारतीय दूतावासों को पत्र लिख कर सोमनाथ ट्रस्ट को किसी भी तरह की सहायता देने से साफ मना किया, जिसमें अभिषेक समारोह के लिए नदी से पानी के अनुरोध भी शामिल थे। चीन में भारत के राजदूत के एम पनिक्कर को लिखे पत्र में पंडित नेहरू ने खुले तौर पर माना कि उन्होंने राष्ट्रपति के सोमनाथ मंदिर दौरे के असर को “कम करने की कोशिश की थी”, जिससे साफ पता चलता है कि उन्होंने सिर्फ न्यूट्रल रहने के बजाय मंदिर के उद्घाटन की अहमियत और चर्चा को कम करने के लिए जानबूझकर कोशिश की थी।
पाकिस्तान में भारत के राजदूत को लिखे पत्र में पंडित नेहरू ने कहा कि सोमनाथ मंदिर में अभिषेक के लिए सिंधु नदी के पानी के इस्तेमाल को औपचारिक रूप से नामंजूर कर दिया, विदेश सचिव के ज़रिए यह बताया कि इस अनुरोध को उनकी मंज़ूरी नहीं है, और आदेश दिया कि भविष्य में ऐसे किसी भी अनुरोध को पहले से मंज़ूर किया जाए, जिससे भारतीय सरकार खुद को इस समारोह से दूर रख सके और इसके प्रतीकात्मक महत्व को कम कर सके।भारतराजनीति’नेहरू नहीं चाहते थे कि सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हो’, भाजपा सांसद का बड़ा आरोप, जारी किए फैक्ट्स
‘नेहरू नहीं चाहते थे कि सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हो’, भाजपा सांसद का बड़ा आरोप, जारी किए फैक्ट्स
गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग को लेकर भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि पूर्व पीएम नेहरू नहीं चाहते थे कि सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार ह
भाजपा ने सोमनाथ मंदिर को लेकर किया बड़ा दावा। (फाइल फोटो)
सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग पर हमले के 1000 साल पूरे हो गए हैं। आपको बता दें कि सन् 1026 में सोमनाथ मंदिर पर पहली बार हमला किया गया था। इसके बाद कई बार सोमनाथ मंदिर को लूटा गया और इसे नष्ट करने की कोशिश की गई। हालांकि, ये मंदिर आज भी अडिग खड़ा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 11 जनवरी को गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर जाने वाले हैं। पीएम यहां सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल भी होंगे। इससे पहले भाजपा ने सोमनाथ मंदिर को लेकर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा है। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इसे लेकर कई बड़े दावे किए हैं।
‘सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत पंडित नेहरू को थी’
भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने X पोस्ट में कहा- “अतीत में सोमनाथ को मोहम्मद गजनी और खिलजी ने लूटा लेकिन आजाद भारत में भगवान् सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत पंडित नेहरू को थी। इसकी सबसे बड़ी बानगी देखिये कि पंडित नेहरू ने 21 अप्रैल 1951 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को “प्रिय नवाबजादा” कहकर संबोधित करते हुए पत्र लिखा और उसमें सोमनाथ के दरवाजों की कहानी को “पूरी तरह से झूठा” बताया। पंडित नेहरू ने लियाकत अली खान के आगे एक तरह से सरेंडर करते हुए लिखा कि सोमनाथ मंदिर के निर्माण जैसा कुछ नहीं हो रहा।
आखिर पंडित नेहरू को लियाकत अली खान से ऐसा क्या डर था जो वे उसे सोमनाथ मंदिर के बारे में पत्र लिख रहे थे। पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का सामना करने या भारत की सभ्यतागत स्मृति का बचाव करने के बजाय, पंडित नेहरू ने हिंदू ऐतिहासिक प्रतीकों को कम करके पाकिस्तान को खुश करना चुना और आंतरिक आत्मविश्वास के बजाय बाहरी तुष्टीकरण को प्राथमिकता दी। यह अंधी तुष्टिकरण की राजनीति और मुग़ल आक्रांताओं का महिमामंडन नहीं था तो और क्या था?”
‘नेहरू सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं चाहते थे’
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा- “पंडित जवाहरलाल नेहरू चाहते ही नहीं थे कि सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हो। ये तो सब जानते हैं कि पंडित नेहरू ने न केवल कैबिनेट मंत्रियों बल्कि राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद और उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन तक को पत्र लिख कर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की ज़रूरत पर सवाल उठाया था और उन्हें उद्घाटन समारोह में शामिल होने से मना किया। लेकिन ये भी सच है कि पंडित नेहरू ने सभी भारतीय मुख्यमंत्रियों को दो-दो बार पत्र लिख कर सोमनाथ मंदिर के निर्माण पर शिकायत करते हुए लिखा कि इससे विदेशों में भारत की छवि खराब हुई है।
इतना ही नहीं, पंडित नेहरू ने भारत के सूचना और प्रसारण मंत्री आर.आर. दिवाकर को पत्र लिख कर सोमनाथ मंदिर के अभिषेक समारोह की कवरेज को कम करने के लिए कहा, इस समारोह को दिखावटी बताया और यहाँ तक कहा कि यह समारोह दुनिया में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। यह भी लिखा कि वह राष्ट्रपति के समारोह में शामिल होने से खुश नहीं हैं। आखिर क्यों?”
‘पंडित नेहरू ने भारतीय दूतावासों को पत्र लिख’
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा- “पंडित नेहरू ने भारतीय दूतावासों को पत्र लिख कर सोमनाथ ट्रस्ट को किसी भी तरह की सहायता देने से साफ मना किया, जिसमें अभिषेक समारोह के लिए नदी से पानी के अनुरोध भी शामिल थे। चीन में भारत के राजदूत के एम पनिक्कर को लिखे पत्र में पंडित नेहरू ने खुले तौर पर माना कि उन्होंने राष्ट्रपति के सोमनाथ मंदिर दौरे के असर को “कम करने की कोशिश की थी”, जिससे साफ पता चलता है कि उन्होंने सिर्फ न्यूट्रल रहने के बजाय मंदिर के उद्घाटन की अहमियत और चर्चा को कम करने के लिए जानबूझकर कोशिश की थी।
पाकिस्तान में भारत के राजदूत को लिखे पत्र में पंडित नेहरू ने कहा कि सोमनाथ मंदिर में अभिषेक के लिए सिंधु नदी के पानी के इस्तेमाल को औपचारिक रूप से नामंजूर कर दिया, विदेश सचिव के ज़रिए यह बताया कि इस अनुरोध को उनकी मंज़ूरी नहीं है, और आदेश दिया कि भविष्य में ऐसे किसी भी अनुरोध को पहले से मंज़ूर किया जाए, जिससे भारतीय सरकार खुद को इस समारोह से दूर रख सके और इसके प्रतीकात्मक महत्व को कम कर सके।”
‘नेहरू ने राष्ट्रपति की भागीदारी का खुलकर विरोध किया’
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा- “सेक्रेटरी-जनरल और विदेश मंत्रालय के विदेश सचिव को भी पंडित नेहरू ने पत्र लिखा और निर्देश दिया कि दूतावासों को सोमनाथ ट्रस्ट से पवित्र नदी के पानी के लिए आने वाले अनुरोधों पर बिल्कुल भी ध्यान न देने का निर्देश दिया जाए, जो हिंदू धार्मिक गतिविधियों के प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियों से भी उनकी स्पष्ट बेचैनी को दर्शाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने पहले ही राष्ट्रपति और के. एम. मुंशी दोनों को अपनी नाराज़गी बता दी थी।
पंडित नेहरू ने तत्कालीन गृह मंत्री सी राजगोपालाचारी जी को दो-दो बार पत्र लिख कर सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में राष्ट्रपति की भागीदारी का खुलकर विरोध किया और कहा कि उन्हें “पसंद होता” अगर राष्ट्रपति इससे न जुड़ते, जो यह दिखाता है कि वे राष्ट्राध्यक्ष को एक बड़े हिंदू सभ्यतागत कार्यक्रम से दूर रखने की सक्रिय कोशिश कर रहे थे, जिसे वे राजनीतिक रूप से असुविधाजनक मानते थे।”

सोना-चांदी फिर खा गए झटके, दाम में भारी गिरावट, एमसीएक्स पर है इतना भाव, जानें महानगरों में हाल

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जानकारों का मानना है कि डॉलर में कमजोरी और US ट्रेजरी यील्ड में नरमी के कारण स्पॉट गोल्ड में पॉजिटिव रुझान के साथ ट्रेड होने और $4500 के लेवल तक बढ़ने की संभावना है।वायदा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमत में फिर गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स में सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर फरवरी डिलीवरी अनुबंध के लिए सोने का दाम बीते सत्र के मुकाबले 0.56 प्रतिशत टूटकर 1,37,238 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर आ गया। इसी समय, मार्च डिलीवरी अनुंबध के लिए चांदी की कीमत में बीते सत्र के मुकाबले 0.84 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 2,48,491 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। वैश्विक उथल-पुथल का सोने के दाम पर भी असर देखा जा रहा है।
महानगरों में सोने का हाजिर दाम आज
के मुताबिक, दिल्ली में 8 जनवरी को सोने का भाव 24 कैरेट सोने के लिए ₹13,815 प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोने के लिए ₹12,665 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोने के लिए ₹10,365 प्रति ग्राम है।
मुंबई में आज सोने का भाव 24 कैरेट सोने के लिए ₹13,800 प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोने के लिए ₹12,650 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोने के लिए ₹10,350 प्रति gram है।
कोलकाता में आज सोने का भाव 24 कैरेट सोने के लिए ₹13,800 प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोने के लिए ₹12,650 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोने के लिए ₹10,350 प्रति ग्राम है।
चेन्नई में आज सोने का भाव 24 कैरेट सोने के लिए ₹13,909 प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोने के लिए ₹12,750 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोने के लिए ₹10,640 प्रति ग्राम है।
आज बैंगलोर में सोने का भाव 24 कैरेट सोने के लिए ₹13,800 प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोने के लिए ₹12,650 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोने के लिए ₹10,350 प्रति ग्राम है।
ग्लोबल मार्केट में सोने का रुझान के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गुरुवार को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 4,440 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया। यह गिरावट पिछले सत्र में हुए नुकसान के बाद देखने को मिली, क्योंकि निवेशक अमेरिका के मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों का आकलन कर रहे हैं, जबकि भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की नजर में बने हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में जॉब ओपनिंग्स अनुमान से ज्यादा घटीं, जो श्रम बाजार में मांग के कमजोर होने का संकेत देती हैं। वहीं दिसंबर में प्राइवेट पेरोल्स में बढ़ोतरी भी उम्मीद से कम रही। हालांकि, आईएसएम के आंकड़ों में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ अनुमान से बेहतर दर्ज की गई।

अब निवेशकों की नजर शुक्रवार को जारी होने वाली नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं। बाजार इस साल दो बार ब्याज दरों में कटौती की संभावना को पहले ही कीमतों में शामिल कर चुका है।