Sunday, July 12, 2026
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मुजफ्फरपुर से 15 वर्षीय किशोर रहस्यमय ढंग से लापता, दसवीं की परीक्षा के लिए रूम देखने गया था, घर नहीं लौटा

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत गांव गौरा से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता संजय यादव, पिता योगेंद्र यादव का 15 वर्षीय बेटा मुनचुन कुमार 11 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 2 बजे घर से मुजफ्फरपुर निकला था। फरवरी में होने वाली दसवीं की परीक्षा को देखते हुए उसका परीक्षा केंद्र मुजफ्फरपुर में पड़ा था, इसलिए वह रहने के लिए रूम देखने गया था, लेकिन उसके बाद वह घर वापस नहीं लौटा।
परिजनों के अनुसार जिस समय मुनचुन घर से निकला था, उसने काले रंग की जींस, जैकेट और गले में लाल रंग का गमछा पहन रखा था। परिवार ने बताया कि मुनचुन मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ था और घर में किसी भी प्रकार का कोई विवाद या तनाव नहीं था। ऐसे में उसका अचानक इस तरह गायब हो जाना पूरे परिवार के लिए गहरे सदमे का कारण बन गया है।

संजय यादव ने बताया कि बीते कई दिनों से वे अपने बेटे की लगातार तलाश कर रहे हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, अस्पताल और आसपास के जिलों तक खोजबीन की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। मुनचुन का मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है, जिससे उससे संपर्क करना संभव नहीं हो पा रहा है।
अब मजबूर होकर परिवार ने मीडिया के माध्यम से आम जनता से मदद की अपील की है। संजय यादव ने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति को मुनचुन कहीं भी दिखे या उसके बारे में कोई भी जानकारी मिले तो तुरंत मोबाइल नंबर *+91 9773765780* पर या नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें। परिवार की बस यही उम्मीद है कि उनका बेटा सुरक्षित वापस घर लौट आए।

यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है कि एक लापता किशोर को सुरक्षित उसके घर तक पहुंचाने में सहयोग किया जाए। परिजनों ने पुलिस और प्रशासन से भी तेज और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है ताकि मुनचुन कुमार जल्द से जल्द अपने परिवार से मिल सके।

 

 

कौन सिंगर तलविंदर, कभी नहीं दिखाता चेहरा, दिशा पाटनी संग आशिकी के चर्चे में पहली बार दिखा फेस

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दिशा पाटनी और उनके रूमर्ड बॉयफ्रेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग जानना चाहते हैं कि आखिर वो शख्स कौन है, जिसकी बाहें थामें एक्ट्रेस मुस्कुरा रही हैं, दरअसल ये कोई और नहीं बल्कि एक फेमस सिंगर है।पिछले वीकेंड बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन की बहन नुपुर सेनन ने सिंगर स्टेबिन बेन के साथ सात फेरे लिए। लंबे समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे इस कपल ने उदयपुर में एक बेहद खूबसूरत डेस्टिनेशन वेडिंग के साथ अपने रिश्ते को नया नाम दिया। इस शादी में सुर्खियां सिर्फ नए शादीशुदा जोड़े ने ही नहीं बटोरीं। इंटरनेट पर दो और स्टार जोड़ियों की चर्चा जोरों पर रही। पहली जोड़ी थी कृति सेनन और उनके कथित बॉयफ्रेंड कबीर बहिया की, जिनकी मौजूदगी ने पहले ही लोगों का ध्यान खींच लिया था, लेकिन दूसरी जोड़ी ने सोशल मीडिया पर असली हलचल मचा दी। ये जोड़ी थी बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पटानी और पंजाबी सिंगर तलविंदर की, जो अब इंटरनेट की नई सेंसेशन बन चुके हैं।
तलविंदर संग दिशा का वीडियो वायरल
दरअसल नुपुर और स्टेबिन की ग्रैंड डेस्टिनेशन वेडिंग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिशा पटानी बाकी मेहमानों के साथ हंसती-मुस्कुराती नजर आ रही हैं। लेकिन जिस बात ने सभी का ध्यान खींचा, वह था दिशा के बगल में खड़े एक शख्स का हाथ पकड़ना। यही पल इंटरनेट पर चर्चाओं का कारण बन गया। लोगों का मानना है कि दिशा का हाथ थामे यह शख्स कोई और नहीं बल्कि पंजाबी सिंगर तलविंदर हैं। खास बात यह है कि इस वीडियो में तलविंदर का चेहरा साफ नजर आ रहा है। इससे पहले तक वह पब्लिक अपीयरेंस में अपने चेहरे को पेंट या मास्क से ढके रखते थे। तलविंदर अक्सर यह कह चुके हैं कि वह चाहते हैं कि लोग उनके चेहरे से ज्यादा उनके म्यूजिक और गानों के पीछे की भावनाओं पर कौन हैं तलविंदर?
अगर आप तलविंदर का संगीत सुनते हैं, तो एक सवाल ज़रूर आपके मन में आया होगा, वह हमेशा कंकाल वाला मास्क क्यों पहनते हैं? पहली नज़र में यह सिर्फ एक अनोखा स्टाइल स्टेटमेंट या रहस्य बनाए रखने की कोशिश लग सकती है, लेकिन इसकी सच्चाई कहीं ज़्यादा गहरी, भावनात्मक और विचारशील है। हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक यूज़र ने इस मास्क के पीछे छिपी सोच को शब्दों में बयान किया, और हैरानी की बात यह रही कि तलविंदर ने खुद उस व्याख्या से सहमति जताई। इसके बाद फैंस की जिज्ञासा और बढ़ गई, क्योंकि यह कहानी ग्लैमर या फेम की नहीं, बल्कि आत्मा और एहसास की है। 23 नवंबर 1997 को जन्मे तलविंदर सिंह सिद्धू एक भारतीय सिंगर, सॉन्गराइटर और म्यूज़िक प्रोड्यूसर हैं, जिन्होंने बहुत कम समय में पंजाबी म्यूज़िक इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना ली है। उनका संगीत किसी एक जॉनर तक सीमित नहीं है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक, हिप-हॉप, ट्रैप, लो-फाई, बूम बैप, ड्रिल और सिंथ-पॉप का अनोखा फ्यूज़न सुनने को मिलता है। यही विविधता उनके गानों को भीड़ से अलग बनाती है और युवाओं से गहरा कनेक्शन स्थापित करती है।

मास्क, जो छुपाता नहीं बल्कि दिखाता है
पंजाब और सैन फ्रांसिस्को के बीच पले-बढ़े तलविंदर की कला में उनकी पंजाबी जड़ों और वेस्टर्न साउंड्स का खूबसूरत मेल साफ झलकता है। लेकिन उनकी सबसे खास पहचान उनका कंकाल वाला मास्क है। एक इंस्टाग्राम यूज़र के अनुसार, तलविंदर नहीं चाहते कि लोग उनके चेहरे, हाव-भाव या लुक में उलझें। उनका मकसद है कि सुनने वाला सीधे उनके गानों की भावनाओं, दर्द और दें, लेकिन नुपुर और स्टेबिन की शादी के इस वायरल वीडियो ने पहली बार उन्हें बिना फेस पेंट के सबके सामने ला दिया, जिससे फैंस और भी ज्यादा एक्साइटेड हो गए।सच्चाई से जुड़े। यह मास्क उनकी फिजिकल पहचान को पीछे रख देता है, ताकि सामने सिर्फ संगीत और एहसास रह जाए। तलविंदर मानते हैं कि जब चेहरा सामने होता है, तो लोग कलाकार को जज करने लगते हैं, उसकी शक्ल, उसकी पर्सनैलिटी, उसकी इमेज के आधार पर। मास्क पहनकर वह इन सब सीमाओं को तोड़ देते हैं और श्रोता को सिर्फ संगीत पर ध्यान केंद्रित करने का मौका देते हैं। इस मास्क के पीछे एक गहरा प्रतीक भी छिपा है। तलविंदर का मानना है कि अंदर से हर इंसान एक जैसा होता है। चेहरा, नाम, शोहरत, पहचान और अहंकार, ये सब अस्थायी हैं। आखिरकार, इंसान वही है जो वह अंदर से महसूस करता है। कंकाल का मास्क इसी सच्चाई की याद दिलाता है कि हमारी असली पहचान हमारे विचार, भावनाएं और संवेदनशीलता हैं, न कि वह चेहरा जिसे हम दुनिया के सामने पेश करते हैं।

भारतीय टीम से बाहर चल रहे खिलाड़ी को अचानक मिली कप्तानी, ऋषभ पंत चोटिल और आयुष बदोनी की टीम इंडिया में एंट्री

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यह सुविधा किस तारीख़ से लागू होगी, इसे लेकर एयरलाइंस और ट्रैवल इंडस्ट्री अब भी आधिकारिक अधिसूचना का इंतज़ार कर रही हैं। इस फैसले के लागू होते ही भारतीय यात्री लुफ्थांसा की उड़ानों के ज़रिये जर्मनी होकर भारत और यूके के बीच बिना किसी शेंगेन ट्रांजिट वीज़ा के यात्रा कर सकेंगे।भारतीय यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों को ट्रांजिट के दौरान वीज़ा-फ्री यात्रा की अनुमति देने की घोषणा कर दी है। यह घोषणा जर्मनी के चांसलर फ़्रेडरिक मर्ज़ की आधिकारिक भारत यात्रा के दौरान की गई। हालांकि, यह सुविधा किस तारीख़ से लागू होगी, इसे लेकर एयरलाइंस और ट्रैवल इंडस्ट्री अब भी आधिकारिक अधिसूचना का इंतज़ार कर रही हैं। इस फैसले के लागू होते ही भारतीय यात्री लुफ्थांसा की उड़ानों के ज़रिये जर्मनी होकर भारत और यूके के बीच यात्रा कर सकेंगे, बिना किसी शेंगेन ट्रांजिट वीज़ा के। इससे न सिर्फ़ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि एयर इंडिया को भी लुफ्थांसा के साथ यूके रूट पर कोड-शेयरिंग का मौका मिलेगा, जिससे जर्मनी जाने वाली उसकी उड़ानों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
वीजा फ्री ट्रांजिट का मतलब
वीज़ा-फ्री ट्रांजिट का मतलब यह है कि किसी देश से होकर केवल कनेक्टिंग फ्लाइट लेने के लिए यात्रियों को उस देश का ट्रांजिट वीज़ा लेने की आवश्यकता नहीं होती। इस दौरान यात्री एयरपोर्ट के ट्रांजिट एरिया तक ही सीमित रहते हैं और इमिग्रेशन काउंटर से बाहर नहीं जा सकते। उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति नहीं होती, बल्कि वे केवल अगली उड़ान पकड़ने के उद्देश्य से एयरपोर्ट पर ठहरते हैं। इसके अलावा, शेंगेन ट्रांजिट वीज़ा का मतलब है कि किसी ऐसे यात्री को दिया जाने वाला परमिट, जो शेंगेन क्षेत्र के किसी देश के एयरपोर्ट से केवल ट्रांजिट (कनेक्टिंग फ्लाइट) करना चाहता है।

यात्रियों पर पड़े प्रभाव होंगे कम
timesofindia की खबर के मुताबिक, सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जर्मनी के ज़रिये ट्रांजिट को वीज़ा-फ्री बनाने का निर्णय लिया गया है, जो चांसलर की भारत यात्रा के 27 अहम नतीजों में शामिल है। यह कदम ब्रेक्ज़िट के बाद भारतीय और अन्य विदेशी यात्रियों पर पड़े प्रभाव को आंशिक रूप से कम करेगा। ब्रेक्ज़िट के बाद यूके और यूरोपीय संघ ने एक-दूसरे के ज़रिये यात्रा करने पर ट्रांजिट वीज़ा अनिवार्य कर दिया था। इसका नतीजा यह हुआ था कि दिल्ली से फ्रैंकफर्ट होते हुए लंदन जाने वाले भारतीय यात्रियों को शेंगेन ट्रांजिट वीजा लेना पड़ता था, जबकि मुंबई से लंदन के रास्ते म्यूनिख जाने के लिए यूके ट्रांजिट वीजा जरूरी था।
यात्रियों को सावधानीपूर्वक टिकट बुक करने की सलाह
यूके, लुफ्थांसा और एयर इंडिया-दोनों के लिए एक अहम बाजार है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद लुफ्थांसा अपने जर्मन हब्स के ज़रिये भारत से यूके जाने वाले यात्रियों को फिर से बड़े पैमाने पर सेवा दे सकेगी, जिनमें एयर इंडिया के कोड-शेयर यात्री भी शामिल होंगे। साथ ही जर्मनी के रास्ते भारतीय यात्रियों के लिए कुछ अन्य वीज़ा-फ्री गंतव्य, जैसे कैरिबियन देश, भी अधिक सुलभ हो जाएंगे। हालांकि, यात्रियों को टिकट बुक करते समय ट्रांजिट वीज़ा से जुड़े नियमों की सावधानीपूर्वक जांच करने की सलाह दी गई है।

भारतीय यात्रियों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा कहीं अधिक आसान होगी
कई मामलों में केवल कम किराए के आधार पर की गई बुकिंग बाद में वीज़ा न होने के कारण रद्द करनी पड़ती है। उदाहरण के तौर पर, भारत से अमेरिका की यात्रा अगर केवल ट्रांजिट के लिए भी अमेरिका से होकर हो, तो अमेरिकी वीज़ा अनिवार्य है। इसी तरह, भारत से अमेरिका कनाडा के रास्ते जाने पर कनाडा का ट्रांजिट वीज़ा जरूरी होता है। जल्द ही जर्मनी भारत–यूके यात्रा के लिए एक अहम अपवाद के तौर पर उभरेगा, जिससे भारतीय यात्रियों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा कहीं अधिक आसान और सुगम हो जाएगी।

जर्मनी भारतीय पासपोर्ट धारकों को ट्रांजिट के दौरान वीज़ा-फ्री यात्रा की देगा परमिशन, ऐसे मिलेगा फायदा

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यह सुविधा किस तारीख़ से लागू होगी, इसे लेकर एयरलाइंस और ट्रैवल इंडस्ट्री अब भी आधिकारिक अधिसूचना का इंतज़ार कर रही हैं। इस फैसले के लागू होते ही भारतीय यात्री लुफ्थांसा की उड़ानों के ज़रिये जर्मनी होकर भारत और यूके के बीच बिना किसी शेंगेन ट्रांजिट वीज़ा के यात्रा कर सकेंगे।भारतीय यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों को ट्रांजिट के दौरान वीज़ा-फ्री यात्रा की अनुमति देने की घोषणा कर दी है। यह घोषणा जर्मनी के चांसलर फ़्रेडरिक मर्ज़ की आधिकारिक भारत यात्रा के दौरान की गई। हालांकि, यह सुविधा किस तारीख़ से लागू होगी, इसे लेकर एयरलाइंस और ट्रैवल इंडस्ट्री अब भी आधिकारिक अधिसूचना का इंतज़ार कर रही हैं। इस फैसले के लागू होते ही भारतीय यात्री लुफ्थांसा की उड़ानों के ज़रिये जर्मनी होकर भारत और यूके के बीच यात्रा कर सकेंगे, बिना किसी शेंगेन ट्रांजिट वीज़ा के। इससे न सिर्फ़ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि एयर इंडिया को भी लुफ्थांसा के साथ यूके रूट पर कोड-शेयरिंग का मौका मिलेगा, जिससे जर्मनी जाने वाली उसकी उड़ानों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना हैवीजा फ्री ट्रांजिट का मतलब
वीज़ा-फ्री ट्रांजिट का मतलब यह है कि किसी देश से होकर केवल कनेक्टिंग फ्लाइट लेने के लिए यात्रियों को उस देश का ट्रांजिट वीज़ा लेने की आवश्यकता नहीं होती। इस दौरान यात्री एयरपोर्ट के ट्रांजिट एरिया तक ही सीमित रहते हैं और इमिग्रेशन काउंटर से बाहर नहीं जा सकते। उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति नहीं होती, बल्कि वे केवल अगली उड़ान पकड़ने के उद्देश्य से एयरपोर्ट पर ठहरते हैं। इसके अलावा, शेंगेन ट्रांजिट वीज़ा का मतलब है कि किसी ऐसे यात्री को दिया जाने वाला परमिट, जो शेंगेन क्षेत्र के किसी देश के एयरपोर्ट से केवल ट्रांजिट (कनेक्टिंग फ्लाइट) करना चाहता है।
यात्रियों पर पड़े प्रभाव होंगे कम
timesofindia की खबर के मुताबिक, सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जर्मनी के ज़रिये ट्रांजिट को वीज़ा-फ्री बनाने का निर्णय लिया गया है, जो चांसलर की भारत यात्रा के 27 अहम नतीजों में शामिल है। यह कदम ब्रेक्ज़िट के बाद भारतीय और अन्य विदेशी यात्रियों पर पड़े प्रभाव को आंशिक रूप से कम करेगा। ब्रेक्ज़िट के बाद यूके और यूरोपीय संघ ने एक-दूसरे के ज़रिये यात्रा करने पर ट्रांजिट वीज़ा अनिवार्य कर दिया था। इसका नतीजा यह हुआ था कि दिल्ली से फ्रैंकफर्ट होते हुए लंदन जाने वाले भारतीय यात्रियों को शेंगेन ट्रांजिट वीजा लेना पड़ता था, जबकि मुंबई से लंदन के रास्ते म्यूनिख जाने के लिए यूके ट्रांजिट वीजा जरूरी था। यात्रियों को सावधानीपूर्वक टिकट बुक करने की सलाह
यूके, लुफ्थांसा और एयर इंडिया-दोनों के लिए एक अहम बाजार है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद लुफ्थांसा अपने जर्मन हब्स के ज़रिये भारत से यूके जाने वाले यात्रियों को फिर से बड़े पैमाने पर सेवा दे सकेगी, जिनमें एयर इंडिया के कोड-शेयर यात्री भी शामिल होंगे। साथ ही जर्मनी के रास्ते भारतीय यात्रियों के लिए कुछ अन्य वीज़ा-फ्री गंतव्य, जैसे कैरिबियन देश, भी अधिक सुलभ हो जाएंगे। हालांकि, यात्रियों को टिकट बुक करते समय ट्रांजिट वीज़ा से जुड़े नियमों की सावधानीपूर्वक जांच करने की सलाह दी गई है।

भारतीय यात्रियों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा कहीं अधिक आसान होगी
कई मामलों में केवल कम किराए के आधार पर की गई बुकिंग बाद में वीज़ा न होने के कारण रद्द करनी पड़ती है। उदाहरण के तौर पर, भारत से अमेरिका की यात्रा अगर केवल ट्रांजिट के लिए भी अमेरिका से होकर हो, तो अमेरिकी वीज़ा अनिवार्य है। इसी तरह, भारत से अमेरिका कनाडा के रास्ते जाने पर कनाडा का ट्रांजिट वीज़ा जरूरी होता है। जल्द ही जर्मनी भारत–यूके यात्रा के लिए एक अहम अपवाद के तौर पर उभरेगा, जिससे भारतीय यात्रियों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा कहीं अधिक आसान और सुगम हो जाएगी।

डिजिटल अरेस्ट को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट, हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी बनी

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केंद्र सरकार की ओर से डिजिटल अरेस्ट के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट की गई है। सरकार ने बताया है कि उनकी ओर से एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया गया है।डिजिटल अरेस्ट मामलों में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया है कि इस मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है।CBI ने अब इस मामले में नई FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।सरकार ने कोर्ट से कहा है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों से निपटने के लिए एक ठोस और असरदार योजना बनाने में थोड़ा समय लगेगा। इसी वजह से केंद्र ने अदालत से एक महीने का समय मांगा है।
हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन
केंद्र सरकार ने यह भी जानकारी दी कि गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्ट की समस्या से निपटने के लिए एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी बनाई है। यह कमेटी अलग-अलग विभागों के साथ मिलकर काम कर रही है और लोगों से मिले सुझावों पर भी विचार कर रही है।
कमेटी में क्या होगा खास?
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है और बताया है कि गृह मंत्रालय ने देश में डिजिटल अरेस्ट के मुद्दे के सभी पहलुओं की पूरी तरह से जांच करने के लिए एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) कर रहे हैं, जो इसके चेयरपर्सन हैं। सदस्यों में MeitY, DoT, MEA, वित्तीय सेवा विभाग, कानून और न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय, RBI के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी, CBI, NIA, दिल्ली पुलिस के IG रैंक के अधिकारी और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के सदस्य सचिव शामिल हैं।
योजना तैयार करने के लिए समय जरूरी- सरकार
सरकार का कहना है कि सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत योजना तैयार करने के लिए समय जरूरी है, ताकि आगे चलकर लोगों को ऐसे ऑनलाइन धोखाधड़ी और डराने वाले मामलों से बचाया जा सके। इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। बता दें कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच सीबीआई से करवाने के आदेश दिए थे।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहा अत्याचार, एक और युवक समीर दास का बेरहमी से किया गया कत्ल

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बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोगों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का सिलसिला जारी है। यहां से एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। दागनभुइयां में 28 साल हिंदू युवक समीर कुमार दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। समीर कुमार दास रामानंदपुर गांव (मातुभुइया संघ) का निवासी था और बैटरी चालित ऑटो-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का गुजारा करता था।

परिजनों ने शुरू की तलाश
रविवार रात (11 जनवरी 2026) को जब समीर घर नहीं लौटा तो परिजनों ने शहर के विभिन्न इलाकों में तलाश शुरू की। जब कोई सुराग नहीं मिला, तो पुलिस को सूचना दी गई। रात करीब 2 बजे स्थानीय लोगों ने दक्षिण करीमपुर मुहुरी बाड़ी के पास उनका लहूलुहान शव देखा। सूचना मिलते ही दागनभुइयां पुलिस मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया।
पुलिस अधिकारी ने क्या बताया
पुलिस के अनुसार, घटनास्थल में हालात देखकर यह एक सुनियोजित हत्या प्रतीत होती है। दागनभुइयां थाने के पुलिस अधिकारी फैयाजुल अजीम नोमान ने बताया कि समीर पर देशी हथियारों से हमला किया गया था और उन्हें पीट-पीटकर मारा गया था। हत्या के बाद अपराधियों ने उनका ऑटो-रिक्शा भी लूट लिया और फरार हो गए। परिजनों ने मामला दर्ज करवाया है।
भड़के स्थानीय लोग
पुलिस ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। इस जघन्य घटना के बाद स्थानीय निवासियों और अन्य ऑटो चालकों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों को जल्द पकड़कर सख्त सजा दी जाए, ताकि इलाके में सुरक्षा की स्थिति बहाल हो सके। यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा की एक और मिसाल है, जिस पर गंभीर चिंता जताई जा रही है।
चंद्र दास की लिंचिंग का मुख्य आरोपी गिरफ्तार
इस बीच यहां यह भी बता दें कि, बांग्लादेश पुलिस ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की लिंचिंग के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने आरोपी की पहचान यासीन अराफात के रूप में की है जो एक पूर्व शिक्षक है। माना जाता है कि उसने हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने दोनों में मुख्य भूमिका निभाई थी। 27 साल के दीपू की 18 दिसंबर को मैमनसिंह जिले में हत्या कर दी गई थी। भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला था और उसके शव को एक पेड़ से लटकाकर आग लगा दी थी।

भारत के इस राज्य में लगे भूकंप के झटके, जानें रिक्टर स्केल पर कितनी रही तीव्रता

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भारत के पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मंगलवार को भूकंप के कारण धरती हिल उठी है। आइए जानते हैं कि रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता कितनी रही है। भारत समेत दुनियाभर के विभिन्न देशों में बीते कुछ समय से भूकंप के तेज झटके महसूस किए जा रहे हैं। म्यांमार, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों में आए भूकंप में तो हजारों लोगों ने अपनी जान भी गंवाई है। इस कारण अक्सर भूकंप को लेकर लोगों के मन में डर बैठा होता है। इस बीच अब मंगलवार को भारत के उत्तराखंड राज्य में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में सुबह-सुबह ही भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

कितनी रही भूकंप की तीव्रता?
नेशनल सेंटर फोर सिस्मॉलॉजी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में मंगलवार की सुबह आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 मापी गई है। ये भूकंप मंगलवार 13 जनवरी को सुबह 7 बजकर 25 मिनट पर आया। भूकंप का केंद्र बागेश्वर जिले में धरती से 10 किलोमीटर भीतर था। अब तक इस भूकंप के कारण जान-माल के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है।पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी भूकंप
आपको बता दें कि इससे पहले सोमवार को भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी भूकंप आया था। ये भूकंप शाम 6 बजकर 25 मिनट पर आया था और इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4 मापी गई थी। भूकंप का केंद्र धरती से 90 किलोमीटर की गहराई पर था। इसके अलावा सोमवार को सुबह 8 बजकर 48 मिनट पर अफगानिस्तान में भी 4.2 की तीव्रता का भूकंप आया। इस भूकंप के केंद्र धरती से 10 किलोमीटर की गहराई में था।

क्यों आते हैं भूकंप?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, हमारी धरती के नीचे कुल 7 टेक्टोनिक प्लेटें होती हैं। जानकारी के मुताबिक, ये सभी 7 टेक्टोनिक प्लेट्स अपने-अपने क्षेत्र में घूमते रहते हैं। हालांकि, घूमने के दौरान ये टेक्टोनिक प्लेटें कई बार एक फॉल्ट लाइन पर टकराती हैं। अब इनके टकराने के कारण घर्षण पैदा होता जिससे ऊर्जा निकलती है। ये ऊर्जा बाहर निकलने का रास्ता खोजती हैं। इसी कारण धरती पर भूकंप की घटनाएं देखने को मिलती रहती हैं।

मुख्यमंत्री की सुरक्षा में हो गई बड़ी चूक, मच गई अफरा-तफरी, देखें घटना का Video

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ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की सुरक्षा में बड़ी चूक का मामला सामने आया है। भुवनेश्वर में एक युवक मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के करीब तक पहुंच गया। पुलिस ने युवक को हिरासत में लिया है।ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मौजूदगी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी चूक सामने आई। यह घटना उत्कल विश्वविद्यालय परिसर में हुई, जहां मुख्यमंत्री राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान अचानक एक युवक हाथ में कागज लेकर मुख्यमंत्री की ओर बढ़ने लगा।
सुरक्षाकर्मियों ने दिखाई सतर्कता
मुख्यमंत्री की तरफ एक युवक को बढ़ते देखकर कुछ पल के लिए कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। हालांकि, मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए युवक को बीच में ही रोक लिया और उसे अलग ले जाया गया। इस अप्रत्याशित घटना से मुख्यमंत्री भी कुछ समय के लिए चौंक गए, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता से स्थिति तुरंत नियंत्रण में आ गई। इसके बाद कार्यक्रम सामान्य रूप से संपन्न हुआ।
युवक ने ऐसा क्यों किया?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिरासत में लिए गए युवक की पहचान 36 साल के भद्रक निवासी बिजय कुमार मल्लिक के रूप में हुई है। आरोपी वर्ष 2024 में भद्रक जिले के भंडारीपोखरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुका है। उसे ओडिशा जनता पार्टी से विधायकी का टिकट मिला था। आरोपी सुरक्षा के बाहरी सर्किल में दाखिल होने की कोशिश कर रहा था। उसके हाथ में जो कागज था, उसमें एसएसबी परीक्षा को फिर से लागू करने की मांग लिखी हुई थी। कागज पर उसने “एसएसबी परीक्षा हमारी मांग” लिखा था। कथित तौर पर आरोपी का कहना है कि एसएसबी की परीक्षा काफी लंबे समय से नहीं हुई है और इसी मुद्दे को लेकर वह मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाना चाहता था।
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि वह यूनिवर्सिटी के कैंटीन में खाना खाने आया था। इसी दौरान उसे जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री कार्यक्रम में आने वाले हैं। इसके बाद उसने तुरंत एक कागज पर अपनी मांग लिखी और मुख्यमंत्री को सौंपने के लिए कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ गया। आरोपी ने पुलिस को यह भी बताया कि उसने करीब 10 साल पहले इसी उत्कल विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में पीजी की पढ़ाई की थी। साथ ही, वह खुद भी कई बार एसएसबी की परीक्षा दे चुका है।
फिलहाल पुलिस इस घटना के बाद आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश के पीछे उसकी मंशा क्या थी। युवक अभी हिरासत में है और मामले की जांच जारी है।

‘बच्चों ने चीनी मांझे से उड़ाई पतंग तो इसके जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं अभिभावक’, हाई कोर्ट का सख्त निर्देश

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चाइनीज मांझे की खरीद पर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। आरोपियों को कड़ी सजा दिए जाने का भी ऐलान किया है। सरकार ने ये भी कहा है कि चाइनीज मांझा की रोक को लेकर टीवी और अखबारों पर विज्ञापन दिए जाएंगे।मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को चीनी मांझे (नायलॉन का तीखा धागा) पर जारी प्रतिबंध को सख्ती से लागू कराए जाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अगर कोई बच्चा इस घातक डोर से पतंग उड़ाता पाया जाता है, तो उसके अभिभावक को कानूनन जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने आम लोगों के बीच इस बात के प्रचार का निर्देश भी दिया कि चीनी मांझे की बिक्री या उपयोग पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) (लापरवाहीपूर्ण कृत्य के कारण होने वाली मृत्यु) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
चीनी मांझे के कारण लोगों की मौत
हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने चीनी मांझे के कारण लोगों की मौत और दुर्घटनाओं का पिछले साल 11 दिसंबर को जनहित याचिका के तौर पर खुद संज्ञान लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि चीनी मांझे की बिक्री रोकने के लिए पहले ही कदम उठाए गए हैं और पतंग की इस डोर से जुड़े हादसों से लोगों को बचाने के लिए कई एहतियाती उपाय भी किए जा रहे हैं।
प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर चलेगा प्रचार
प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि चीनी मांझे की बिक्री और इस्तेमाल रोकने के लिए प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रचार अभियान चलाया जाएगा। इस पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार को विशिष्ट निर्देश दिया कि इस अभियान के तहत प्रकाशित किया जाए कि यदि कोई व्यक्ति चीनी मांझे की बिक्री या उपयोग करता पाया जाता है, तो उस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) (लापरवाहीपूर्ण कृत्य के कारण होने वाली मृत्यु) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
अभिभावक को ठहराया जा सकता है जिम्मेदार
युगल पीठ ने कहा, ‘इस विषय पर भी ध्यान दिया जाए कि यदि कोई नाबालिग बच्चा चीनी मांझे का उपयोग करता पाया जाता है, तो उसके अभिभावक को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।’ सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के सामने हाजिर इंदौर के जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने कोर्ट को बताया कि उसके इन निर्देशों का पालन करते हुए प्रशासन जल्द से जल्द आवश्यक आदेश जारी करेगा जिसे सभी पड़ोसी जिलों में भी तत्काल प्रसारित किया जाएगा।
‘चीनी मांझे’ पर है प्रतिबंध, इसके बाद भी होता है इस्तेमाल
अधिकारियों ने कहा कि इंदौर में पिछले डेढ़ महीने के भीतर कथित तौर पर चीनी मांझे से गला कटने के कारण अलग-अलग घटनाओं में 16 वर्षीय लड़के और 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो चुकी है। नायलॉन से बना मांझा इतना तीखा होता है कि इससे जानलेवा घाव हो सकता है। जनमानस में ‘चीनी मांझे’ के नाम से मशहूर इस धागे पर प्रशासन ने प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद पतंगबाजी के शौकीन अपने प्रतिद्वंद्वियों की पतंग काटने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।

रात दो बजे घर पर हमला, पति को लहूलुहान किया, महिला से छेड़छाड़ और 50 हजार की लूट, लालबाग में दहशत

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दिल्ली (लालबाग)। राजधानी दिल्ली के लालबाग थाना क्षेत्र अंतर्गत इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप राम सिंह भाटिया के पास से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़िता मीना देवी, जो दिव्यांग हैं और जिनके दो छोटे बच्चे हैं (12 साल की बेटी और 2 साल का बेटा), ने आरोप लगाया है कि 11 जनवरी 2025 की रात करीब 2 बजे तीन युवक बॉबी, अभिषेक और रवि जबरन उनके घर में घुस आए।

आरोप है कि आरोपियों ने पहले दरवाजे को लात मारकर तोड़ा और फिर अंदर घुसते ही मीना देवी के पति विनोद मंडल पर हमला कर दिया। तीनों ने मिलकर उन्हें इतनी बेरहमी से पीटा कि उनके मुंह से खून निकलने लगा। जब मीना देवी अपने पति को बचाने पहुंचीं तो आरोपियों ने उनके साथ छेड़छाड़ की और घर में रखे करीब 50 हजार रुपये नकद लूटकर फरार हो गए।

पीड़िता का कहना है कि उनका पति मेहनत-मजदूरी करके परिवार चलाता है, लेकिन इलाके के कुछ दबंग आए दिन उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट करते रहते हैं। मीना देवी के अनुसार आरोपी पहले भी कई बार धमकी दे चुके थे, लेकिन इस बार उन्होंने सारी हदें पार कर दीं।

घटना के बाद जब वह न्याय की आस लेकर थाने पहुंचीं, तो वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय उनके पति विनोद मंडल को ही हिरासत में ले लिया। पीड़िता का दावा है कि आरोपियों के रसूख के चलते मामला जानबूझकर दूसरे जिले दरभंगा से जोड़कर दिखाया जा रहा है ताकि असली गुनहगारों को बचाया जा सके।

मीना देवी ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। उनका कहना है कि वह और उनके बच्चे लगातार डर के साए में जी रहे हैं और किसी भी वक्त कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।

घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर एक दिव्यांग महिला के घर में घुसकर ऐसी वारदात हो सकती है, तो आम नागरिक की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है।