Sunday, July 12, 2026
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बड़वानी में 13 साल की नाबालिग से दरिंदगी का आरोप, 17 दिन बाद भी FIR नहीं; पीड़ित परिवार से पुलिस की मारपीट, पढ़ाई कर रहे बच्चों पर टूटा कहर

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बड़वानी (मध्य प्रदेश)।
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। तहसील पानसेमल के छोटा मलगांव निवासी 13 वर्षीय नाबालिग लड़की अनीता के साथ 13 दिसंबर 2025 की रात करीब 10:30 बजे कथित रूप से मारपीट, जबरन शारीरिक शोषण और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि इस जघन्य वारदात के बाद आरोपी लड़की को जबरदस्ती महाराष्ट्र ले गया, जिससे उसकी जान और भविष्य दोनों खतरे में पड़ गए।

शिकायतकर्ता शेवता रजान पाटी द्वारा जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक बड़वानी को सौंपे गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, आरोपी लिल्या मेंनटा भोसले, निवासी बारी फोल्या पाटी पोस्ट बकराटा, तहसील पाड़ी और उसका साथी कुंवर सिंह, निवासी सुनाभाटी, ने मिलकर इस अपराध को अंजाम दिया। आरोप है कि घटना कुंवर सिंह के घर पर रात 10:30 बजे हुई। पीड़िता चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन डर के कारण कोई आगे नहीं आया। बाद में उसे धमकी दी गई कि अगर किसी को बताया तो जंगल में मारकर फेंक दिया जाएगा।

परिवार का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद वे खेतिया थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार कर दिया। कभी “शाम को आना” तो कभी “सोमवार को आना” कहकर टाल दिया गया। अब घटना को 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो FIR दर्ज हुई और न ही किसी आरोपी से पूछताछ हुई।

पीड़ित परिवार का दावा है कि आरोपी लिल्या मेनटा भोसले ने पुलिस को रिश्वत देकर पूरे मामले को दबा दिया। जब परिवार ने लगातार न्याय की मांग की, तो उल्टा पुलिस ने पीड़ितों पर ही कार्रवाई शुरू कर दी। आरोप है कि कुछ दिन पहले पुलिस ने शेवता रजान पाडवी की मां फूगी बाई, भाई और तीन अन्य परिजनों के साथ थाने में बेरहमी से मारपीट की।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि दिलीप रजान पाडवी को पुलिस थाने ले जाकर लोहे की रॉड से पीटा गया, जिससे उसके सिर में आठ टांके लगाने पड़े। इसके अलावा चार अन्य लोगों को भी थाने ले जाकर बुरी तरह पीटा गया। परिवार का कहना है कि पुलिसिया अत्याचार के कारण बच्चों की पढ़ाई और भविष्य तबाह हो गया है।

पीड़ित परिवार के सदस्य शिक्षित हैं—किसी ने MSC, B.Ed, LLB, तो किसी ने BA, SYBA तक पढ़ाई की है। दिलीप पाडवी 12वीं साइंस का छात्र है, लेकिन पुलिस की मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के चलते उसकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। परिवार का कहना है कि अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और न्याय मांगने वालों को ही सजा दी जा रही है।

शिकायत में नाबालिग अनीता की जन्म तिथि और पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज है, जिससे साफ है कि वह कानूनन पूरी तरह संरक्षित श्रेणी में आती है। इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी और देरी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। परिवार का कहना है कि हर गुजरते दिन के साथ सबूत मिटाए जा रहे हैं और लड़की की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है।

अब पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और राज्य सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो उन्हें कभी न्याय नहीं मिलेगा। यह मामला न सिर्फ पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि “बेटी बचाओ” जैसे नारों की सच्चाई भी उजागर करता है।

PM मोदी ने मकर संक्रांति, माघ बिहू और पोंगल पर दी शुभकामनाएं; जानें अपने संदेश में क्या कहा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मकर संक्रांति, माघ बिहू और पोंगल पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने किसानों की मेहनत को नमन करते हुए इन फसल उत्सवों को उम्मीद, समृद्धि, प्रकृति और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया।नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देश भर के लोगों को मकर संक्रांति, माघ बिहू और पोंगल की ढेर सारी शुभकामनाएं दीं। ये तीनों त्योहार अलग-अलग राज्यों में फसल कटाई के मौसम को खुशी से मनाने के लिए मनाए जाते हैं। प्रधानमंत्री ने अलग-अलग पत्र लिखकर लोगों को ये शुभकामनाएं भेजीं। उन्होंने कहा कि ये त्योहार उम्मीद और सकारात्मकता का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों और तरीकों से मनाई जाती है, लेकिन उत्साह और भावना एक ही रहती है।
किसानों का खासतौर पर शुक्रिया अदा किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों का खास तौर पर शुक्रिया अदा किया, क्योंकि ये त्योहार किसानों की मेहनत से जुड़ा है, जो पूरे देश को अनाज देते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि संक्रांति हमें भविष्य की ओर आत्मविश्वास और खुशी के साथ देखने की प्रेरणा देती है। उन्होंने सभी को समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की।
‘असम की संस्कृति को दर्शाता है माघ बिहू’
माघ बिहू पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह असम की संस्कृति को दर्शाता है। यह खुशी, गर्मजोशी और भाईचारे का त्योहार है। माघ बिहू फसल कटाई के पूरा होने का जश्न है और यह कृतज्ञता तथा संतोष की भावना सिखाता है। प्रधानमंत्री ने फिर से किसानों के योगदान को याद किया और सभी के लिए शांति, अच्छा स्वास्थ्य और सफलता की कामना की।
पोंगल के मौके पर PM ने दी शुभकामनाएं
पोंगल के मौके पर प्रधानमंत्री ने ‘वनक्कम’ कहकर तमिल लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पोंगल इंसान और प्रकृति के बीच गहरे रिश्ते को दिखाता है। यह त्योहार कृषि, ग्रामीण जीवन और मेहनत की इज्जत को सेलिब्रेट करता है। पोंगल परिवारों को एक साथ लाता है और सामाजिक रिश्तों को मजबूत बनाता है। प्रधानमंत्री ने इसे तमिल परंपराओं की समृद्धि का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत को गर्व है कि तमिल भाषा दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है। उन्होंने तमिलनाडु, भारत के अन्य हिस्सों और दुनिया भर में रहने वाले तमिल समुदाय को गर्मजोशी से पोंगल की शुभकामनाएं दीं।
पोंगल समारोह में शामिल होंगे पीएम मोदी
बता दें कि माघ बिहू असम का प्रमुख फसल उत्सव है, जो माघ महीने में फसल कटाई के खत्म होने पर मनाया जाता है और सामुदायिक भोज के साथ मनाया जाता है। लोहड़ी, पोंगल, संक्रांति और उत्तरायण के साथ यह भारत में फसल उत्सव मनाने के अलग-अलग तरीकों को दर्शाता है। उत्तर भारत में लोहड़ी अलाव जलाकर, पारंपरिक खाने और लोक गीतों के साथ मनाई जाती है।

मकर संक्रांति पर कब से कब तक रहेगा स्नान का शुभ मुहूर्त? जानें इस दिन स्नान की सही विधि क्या है

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मकर संक्रांति हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन स्नान-दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को होती है। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि मकर संक्रांति पर स्नान का शुभ मुहूर्त कब रहेगा और मकर संक्रांति का महत्व क्या है मकर संक्रांति के त्योहार को लेकर और स्नान के समय को लेकर लोगों के मन में दुविधा बनी हुई है। स्नान और दान करना 14 जनवरी को सही रहेगा या 15 जनवरी को इसको लेकर अलग-अलग ज्योतिषाचार्यों की राय भी अलग है। साल 2026 में मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर जाएंगे। ऐसे में स्नान के लिए समय कब-कब शुभ रहेगा इसके बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।
मकर संक्रांति स्नान का शुभ मुहूर्त
ज्योतिष मान्यता के अनुसार अगर संक्रांति का समय यानि सूर्य के मकर राशि में गोचर का समय सूर्यास्त से पहले आता है तो संक्रांति उसी दिन मनाई जाती है। ऐसे में 14 जनवरी के दिन ही मकर संक्रांति मनाना शुभ रहेगा। वहीं कुछ विद्वान मानते हैं कि जिस दिन सुबह के समय सूर्य मकर राशि में रहते हैं उस दिन मकर संक्रांति मनानी चाहिए। ऐसे में साल 2026 में 14 और 15 जनवरी दोनों ही दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा सकता है और स्नान के लिए भी यह दोनों दिन ही शुभ रहेंगे। हालांकि स्नान के लिए कौन सा समय दोनों दिन में सबसे शुभ होगा आइए इसके बारे में जानते हैं।

मकर संक्रांति स्नान का शुभ मुहूर्त 14 जनवरी- दोपहर 03:13 बजे से शाम 05:45 बजे तक
मकर संक्रांति स्नान का शुभ मुहूर्त 15 जनवरी- सुबह 05:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक
मकर संक्रांति पर स्नान की विधि
मकर संक्रांति के दिन चाहे आप नदियों में स्नान करें या घर में इस दिन आपको सूर्य देव को अर्घ्य अवश्य देना चाहिए। नदी में डुबकी लगाने के बाद आप अर्घ्य दे सकते हैं वहीं घर पर नहाने के बाद तांबे के लोटे में पुष्प, रोली, अक्षत, काले तिल मिलाकर आप अर्घ्य दे सकते हैं। इस दिन स्नान के दौरान सूर्य गायत्री मंत्र का जप और सूर्य ग्रह के बीज मंत्र का जप करने से आपको लाभ की प्राप्ति होती है।

मकरसंक्रांति का महत्वसंक्रांति का त्योहार हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं उस दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है। पूरे भारत वर्ष में मकर संक्रांति के दिन को अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। लोहड़ी, पोंगल, उत्तरायण, माघ बिहु भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति के ही नाम हैं। इस दिन सूर्य देव की उपासना की जाती है और सूर्य देव इस दिन से उत्तरायण हो जाते हैं जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इस दिन मेले और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इसके साथ ही दान, नदियों में स्नान करने से भक्तों के पापों का नाश होता है। इसलिए पवित्र नदियों के तटों पर भारी संख्या में श्रद्धालु इस दिन देखे जा सकते हैं।

लखनऊ में शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप, दो साल तक साथ रहा युवक अब मुकरा; 50 हजार और मोबाइल लेकर फरार, भाई दे रहा गोली से मरवाने की धमकी

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लखनऊ में शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप, दो साल तक साथ रहा युवक अब मुकरा; 50 हजार और मोबाइल लेकर फरार, भाई दे रहा गोली से मरवाने की धमकी

लखनऊ (ठाकुरगंज/दुबग्गा)।
राजधानी लखनऊ में एक महिला के साथ शादी का झांसा देकर लंबे समय तक शारीरिक शोषण, आर्थिक ठगी और अब जान से मारने की धमकियों का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़िता शमशुन निशा पुत्र शराफत, निवासी अनवार सिटी बालागंज, थाना ठाकुरगंज, ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर इंसाफ की गुहार लगाई है। मामला न्यायालय श्रीमान एसीजेएम पंचम, लखनऊ के समक्ष विचाराधीन बताया गया है।

पीड़िता के अनुसार, उसके पति करीब तीन-चार वर्ष पूर्व लापता हो गए थे, जिसके बाद वह अपने तीन छोटे बच्चों के साथ पूरी तरह बेसहारा हो गई। जीवन-यापन के लिए वह लहसुन-सफाई और झाड़ू-पोंछा जैसे छोटे-मोटे काम करके बच्चों का पेट पाल रही थी। इसी दौरान करीब दो वर्ष पूर्व उसके संपर्क में महमूद पुत्र मुखिया आया, जो मूल निवासी ग्राम व पोस्ट खबदा, थाना व तहसील अटपटगंज, जिला खदैरिया (बिहार) का रहने वाला है और वर्तमान में दुबग्गा मंडी, थाना दुबग्गा, लखनऊ में रह रहा था।

पीड़िता का आरोप है कि महमूद ने उससे प्रेम का इज़हार कर शादी का भरोसा दिलाया और कहा कि वह उसके और उसके बच्चों की पूरी जिम्मेदारी उठाएगा। इसी विश्वास के आधार पर उसने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। आरोप है कि शादी का झांसा देकर महमूद करीब डेढ़ साल तक उसके साथ रहा और बार-बार आर्थिक जरूरतों का हवाला देकर उससे पैसे भी लेता रहा।

पीड़िता के अनुसार, बाद में महमूद अचानक उसे छोड़कर चला गया और शादी से साफ इनकार कर दिया। जाते समय वह करीब 50 हजार रुपये और एक मोबाइल फोन भी लेकर फरार हो गया। यही नहीं, पीड़िता का आरोप है कि महमूद और उसके परिजनों के दबाव में उसका काम भी छुड़वा दिया गया, जिससे उसके सामने बच्चों के पालन-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया।

मामले ने और खतरनाक मोड़ तब ले लिया जब आरोपी का भाई अब्दुल लगातार पीड़िता का पीछा करने लगा। पीड़िता का कहना है कि अब्दुल आए दिन खुलेआम धमकी देता है—
“हम तुझे गोली से मरवा देंगे, रातों-रात खत्म कर देंगे और किसी को पता भी नहीं चलेगा। दो साल में तू हमारे भाई का कुछ नहीं कर पाई, अब हमारा क्या कर लेगी।”

लगातार मिल रही इन धमकियों से पीड़िता और उसके तीनों बच्चे गहरे डर और दहशत में जीने को मजबूर हैं। पीड़िता का कहना है कि उसने थाने में कई बार शिकायत दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंततः उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जहां भी मामले को दबाने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया गया है।

पीड़िता ने प्रशासन और न्यायालय से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी महमूद और उसके भाई के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए तथा उसे और उसके बच्चों को सुरक्षा प्रदान की जाए। यह मामला एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा, शादी के झूठे वादों और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

भारत के न्यूक्लियर एनर्जी बिल में US को दिलचस्पी, जानें अमेरिकी विदेश मंत्री-जयशंकर की बात से चीन को क्यों लगेगी मिर्च?

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भारत की संसद में पास हुए न्यूक्लियर एनर्जी बिल, 2025 में अमेरिका को इंटरेस्ट आ गया है, इसको लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और एस. जयशंकर की बातचीत हुई। साथ ही, हिंद-प्रशांत को लेकर भी चर्चा हुई जो चीन की बेचैनी बढ़ा सकती है।नई दिल्ली: भारत की संसद में हाल में पास हुए न्यूक्लियर एनर्जी बिल में अमेरिका को इंटरेस्ट आ गया है। इसको लेकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच लंबी बातचीत हुई है। इसमें Civil Nuclear Cooperation को मजबूत करने पर चर्चा हुई। साथ ही इंडो-पैसिफिक के क्षेत्र पर भी दोनों के बीच वार्ता हुई, जिससे चीन को मिर्च लगना तय है। इस आर्टिकल में जानिए रूबियों को एस. जयशंकर के बीच में क्या-क्या बात हुई?
न्यूक्लियर एनर्जी बिल में अमेरिका को आई रुचि
प्रधान उप प्रवक्ता टॉमी पिगोट के बयान के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात की और नए साल की शुभकामनाएं दीं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Bill, 2025 पास करने पर बधाई दी। उन्होंने अमेरिका-भारत के Civil Nuclear Cooperation को मजबूत करने, अमेरिकी कंपनियों के लिए मौकों का विस्तार करने, साझा ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और क्रिटिकल मिनिरल सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए इंटरेस्ट जताया।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर क्या बात हुई?
इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो और एस. जयशंकर ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने में रुचि पर चर्चा की। साथ ही, क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी उन्होंने अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर अमेरिका और भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि भी की।
न्यूक्लियर एनर्जी बिल क्या है?
जान लें कि न्यूक्लियर एनर्जी बिल को ‘शांति बिल’ के नाम से भी जाना जाता है। भारत के न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में बड़ा सुधार लाने वाला कानून है, जो 2025 में पारित हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर एनर्जी प्रोडक्शन में शामिल करना है। भारत के क्लीन एनर्जी गोल्स को पूरा करने के लिए प्राइवेट और विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से बड़ी खबर, घी बिक्री की आड़ में लाखों रुपए के गबन का आरोप, HC ने जांच के आदेश दिए

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तिरुवनन्तपुरम: केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में सोने की लूट के बाद अब घी को लेकर गड़बड़झाले की बात सामने आई है। घी को लेकर हुए कथित घोटाले में लाखों रुपए के गबन के आरोप हैं। इस मामले में केरल हाई कोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

आरोप हैं कि सिर्फ दो महीने की अवधि में मंदिर में घी की बिक्री की आड़ में तकरीबन 35 लाख रुपये का गबन कर लिया गया। इस गड़बड़ी की भनक सबसे पहले मंदिर के विजिलेंस अधिकारी को लगी, इंटरनल ऑडिट हुआ तो घोटाले की चौंका देने वाली जानकारी सामने आई और इस सिलसिले में त्रावणकोर देवसस्वोम बोर्ड के काउंटर इंचार्ज सुनील पोट्टी को सस्पेंड भी कर दिया गया।

अब हाईकोर्ट ने मंदिर के विजिलेंस कमिश्नर की इस घोटाले के सिलसिले में दायर रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन विभाग को इस पूरे मामले की तह तक जाने और एक महीने के अंदर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिये हैं।

क्या है घी का गणित?

भगवान अय्यप्पा के दर्शन के लिए सबरीमाला जाने वाले सभी भक्त भगवान को नारियल और घी चढ़ाते हैं। भगवान को चढ़ाए गए इस घी को दोबारा भक्तों को प्रसाद के रूप में बेचा जाता है, जिसे “आथिया सिष्टम” प्रसाद कहा जाता है, TDB के लिए राजस्व का ये एक बहुत बड़ा माध्यम है।

TDB की ओर से घी को 100 ml के पैकेट में पैक करके उसे काउंटर तक पहुंचाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है, इस प्रक्रिया में सारी सामग्री TDB की ही होती है, कॉन्ट्रेक्टर को हर एक पैकेट बनाने के लिए 20 पैसे मिलते हैं, TDB ने 100 ml घी की कीमत 100 रुपये निर्धारित की है।

कैसे किया गया गबन?

जांच में पता चला कि 17 नवंबर, 2025 से 26 दिसंबर, 2025 के बीच ठेकेदार ने 100 ml के 3,52,050 पैकेट पैक किए थे, और वे पैकेट बिक्री के लिए मंदिर के स्पेशल ऑफिसर को सौंपे गए थे। 3,52,050 पैकेट में से, अलग-अलग दिनों में मरामाथ बिल्डिंग में काउंटर से लगभग 89,300 पैकेट बेचे गए।

89,300 पैकेट में से 143 पैकेट खराब पाए गए, और 27 दिसंबर, 2025 तक काउंटर में बचे हुए पैकेट की कुल संख्या सिर्फ़ 28 थी। खराब पैकेट और काउंटर में बचे हुए पैकेट को घटाने के बाद, 89,129 पैकेट की बिक्री से मिली रकम  बोर्ड को जमा की जानी चाहिए थी। हालांकि, काउंटर के इंचार्ज कर्मचारियों ने सिर्फ़ 75,450 पैकेट के पैसे ही जमा किए।

इस तरह रिकॉर्ड से पता चलता है कि 13,679 पैकेट की कीमत, जो 13,67,900 रुपये है, जमा नहीं की गई है। कोर्ट ने कहा कि इतने कम समय में इतने कम पैसे जमा करने की का मकसद चिंताजनक है और इसे सिर्फ़ अकाउंटिंग की गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसीलिए कोर्ट ने अब इसकी विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं।

चोलापुर में बुजुर्ग को घेरने की कथित साजिश, जमीन विवाद में जातिगत उत्पीड़न और पेड़ कटवाने का गंभीर आरोप

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वाराणसी | चोलापुर

चोलापुर थाना क्षेत्र के धरसौना गांव में जमीन विवाद को लेकर 65 वर्षीय बुजुर्ग उदय नारायण तिवारी के साथ लंबे समय से कथित उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित ने गांव के दलित बस्ती लोगों के साथ-साथ थाना प्रभारी और लेखपाल पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि सरकारी नाले और उनकी निजी जमीन को लेकर चल रहे विवाद की आड़ में उन्हें जातिगत रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

पीड़ित उदय नारायण तिवारी पुत्र स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद तिवारी के अनुसार, कई वर्ष पूर्व जिलाधिकारी के आदेश पर सरकारी भूमि और उनकी निजी जमीन के बीच नाला निकलवाया गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी जमीन की सीमा स्पष्ट करने के लिए कंटीले तार से बाउंड्री करवाई। आरोप है कि इसी के बाद से गांव के कुछ लोग उनसे रंजिश रखने लगे और जातिवादी मानसिकता के तहत उन्हें परेशान करने लगे।

उदय नारायण तिवारी का कहना है कि नाले के इस पार उनका घर अकेला स्थित है, जबकि दूसरी ओर लगभग 500 लोगों की आबादी रहती है। इस कारण वे सभी एकजुट होकर उन्हें डराने, दबाव बनाने और जमीन छोड़ने के लिए मजबूर करने का प्रयास कर रहे हैं। पीड़ित के अनुसार, उन्हें आए दिन गाली-गलौज, पत्थरबाजी और घर गिराने की धमकियां दी जाती हैं।

पीड़ित ने आरोप लगाया कि 12 जनवरी की सुबह लगभग 10 से 11 बजे के बीच उनकी निजी जमीन पर लगे करीब 50 वर्ष पुराने हरे-भरे बबूल के पेड़ों को जबरन काट दिया गया। इस मामले में शीतला प्रसाद पुत्र फूलचंद को पेड़ कटवाने वाला मुख्य आरोपी बताया गया है। पीड़ित के अनुसार, घटना के समय दिनेश (पिता छोटेलाल), शीतला प्रसाद(पुत्र फूलचंद), सूरज सहित कई अन्य लोग मौके पर मौजूद थे। वहीं रामदुलारे (पिता बैजनाथ) और पवारू (पिता बैजनाथ) पर भी घटना में संलिप्त होने का आरोप लगाया गया है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि पीड़ित ने थाना प्रभारी दीपक कुमार और लेखपाल सतीश चंद्र राम पर भी साजिश में शामिल होने का दावा किया है। पीड़ित का कहना है कि आरोपियों ने कथित रूप से पैसे देकर पेड़ कटवाए और शिकायत के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उल्टा जब उन्होंने विरोध दर्ज कराया तो उन्हें ही डराने और चुप रहने का दबाव बनाया गया।

उदय नारायण तिवारी का कहना है कि वे लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला। उन्होंने पूरे मामले को जातिगत उत्पीड़न बताते हुए कहा कि एक अकेले बुजुर्ग को सामाजिक दबाव और प्रशासनिक चुप्पी के सहारे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

पीड़ित ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा उन्हें और उनकी संपत्ति को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। समाचार लिखे जाने तक इस मामले में पुलिस या प्रशासन का कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका था।

दिल्ली में बुजुर्ग को 5 साल से नहीं मिला बिजली कनेक्शन, वैध पावर ऑफ अटॉर्नी और हलफनामे के बाद भी बीएसईएस की अनदेखी

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दिल्ली के खजान बस्ती, नांगल राय इलाके से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 60 वर्षीय बुजुर्ग नागरिक पिछले पांच वर्षों से बिजली कनेक्शन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। खसरा नंबर 12 और 13, प्लॉट नंबर WZ-161/13-C, नया नंबर C-82, खजाना बस्ती, नई दिल्ली स्थित संपत्ति के लिए अजीत सिंह द्वारा वर्ष 2025 में बीएसईएस राजधनी पावर लिमिटेड को सभी वैध दस्तावेज और शपथ पत्र देने के बावजूद आज तक बिजली मीटर नहीं लगाया गया।

दस्तावेजों के अनुसार, अजीत सिंह के पास वर्ष 1981 से जारी ब्लड रिलेशन पावर ऑफ अटॉर्नी मौजूद है, जिसके तहत उन्हें खजाना बस्ती स्थित लगभग 160 वर्ग गज की भूमि का वैध जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी धारक बनाया गया है। इस जमीन की सीमाएं और खसरा विवरण भी आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज हैं। इसी आधार पर अजीत सिंह ने दिसंबर 2025 में बीएसईएस को शपथ पत्र देकर पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल के लिए बिजली कनेक्शन की मांग की थी।

शपथ पत्र में उन्होंने साफ लिखा है कि यही उनका एकमात्र प्लॉट है और भविष्य में किसी अन्य स्थान पर बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि यदि कोई जानकारी गलत पाई जाती है तो बीएसईएस कानूनी कार्रवाई कर सकता है। इसके बावजूद बिजली विभाग द्वारा बार-बार नए-नए बहाने बनाकर आवेदन लटकाया जा रहा है।

पीड़ित बुजुर्ग का कहना है कि पहले उनसे एमसीडी की बुक लाने को कहा गया, जिसे उन्होंने उपलब्ध करा दिया। इसके बाद विभाग ने कहा कि इमारत में हर कमरे में सिंक और किचन नहीं है, इसलिए मीटर नहीं लगाया जा सकता। मजबूरी में उन्होंने अपनी जेब से पैसे खर्च कर सिंक और किचन भी बनवाए, लेकिन फिर भी बिजली कनेक्शन नहीं दिया गया।

करीब छह बार आवेदन देने के बावजूद आज तक कोई समाधान नहीं निकला। 60 वर्ष की उम्र में लगातार कार्यालयों के चक्कर काटना, फाइलें जमा करना और हर बार नई शर्तें पूरी करना पीड़ित के लिए मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से भारी पड़ रहा है। उनका कहना है कि बिना बिजली के रहना आज के दौर में किसी सजा से कम नहीं है।

यह मामला बिजली वितरण कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वैध दस्तावेज, शपथ पत्र और सभी औपचारिकताओं के बाद भी यदि किसी नागरिक को वर्षों तक बिजली से वंचित रखा जाए, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और उत्पीड़न की ओर इशारा करता है। अब पीड़ित ने मांग की है कि उन्हें तुरंत बिजली कनेक्शन दिया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

QR कोड टिकट और 1 करोड़ के ड्रॉ का दावा: सुरेश यादव ने लोगों से की अपील 10 मिलियन एंट्री पूरी होने पर दूसरे वीडियो के साथ निकाला जाएगा ड्रॉ

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गिरिडीह।
नमस्कार, ई खबर मीडिया में आपका स्वागत है। आज हम आपको झारखंड के गिरिडीह जिले के चिरुवाँ कपिलो गांव के 37 वर्षीय सुरेश यादव से जुड़ी एक खास जानकारी साझा कर रहे हैं, जो सोशल मीडिया के जरिए अपनी पहचान बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
सुरेश यादव ने बताया कि उन्होंने अपने कंटेंट के माध्यम से लोगों के लिए एक QR कोड उपलब्ध कराया है, जिसका शुल्क मात्र ₹3 होगा, जिस पर स्कैन करके लोग ऑनलाइन मोबाइल पर टिकट प्राप्त कर सकते हैं। उनके अनुसार, जैसे ही इस अभियान में 10 मिलियन (1 करोड़) एंट्री पूरी हो जाएगी, उसके बाद जब वह दूसरा वीडियो अपलोड करेंगे, उसी समय ड्रॉ निकाला जाएगा।
1 करोड़ के इनाम का दावा
सुरेश यादव का कहना है कि इस ड्रॉ में 1 करोड़ रुपये का इनाम रखा गया है, जिसमें से 20 प्रतिशत कटौती के बाद शेष राशि जीतने वाले प्रतिभागी को दी जाएगी।
सोशल मीडिया के जरिए बढ़ा रहे कदम
सुरेश यादव की माता का नाम पियारसी देवी और पिता का नाम परसादी यादव है। गरीबी और संघर्षों के बीच आगे बढ़ते हुए उन्होंने ठान लिया है कि वे सोशल मीडिया की ताकत के सहारे न सिर्फ आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी बनाएंगे।
हाल ही में उन्होंने यूट्यूब पर अपने सफर की शुरुआत की है और उनके वीडियो व रील्स को दर्शकों का धीरे-धीरे अच्छा रिस्पॉन्स भी मिलने लगा है।
YouTube चैनल:
SURESH ERTIGA
@SureshErtiga
12 subscribers | 1 वीडियो
लोगों से अपील
सुरेश यादव ने लोगों से अपील की है कि वे उनके अकाउंट को फॉलो करें, वीडियो को शेयर करें और इस अभियान में भाग लेकर उनका साथ दें।
नाम: सुरेश यादव
YouTube: SURESH ERTIGA
@SureshErtiga
संपर्क नंबर: 8976187218, 9608108962

गर्भवती पत्नी को छोड़ पति फरार, दूसरी सगाई के बाद बंद किया फोन; ससुराल से जान से मारने की धमकी

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नोएडा/आगरा।
आगरा जिले के थाना टेढ़ी बागिया क्षेत्र से जुड़ा एक मामला इन दिनों महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। 23 वर्षीय नेहा, जो इस समय तीन माह की गर्भवती हैं, अपने ही पति और ससुराल पक्ष से जान का खतरा महसूस कर रही हैं। नेहा का आरोप है कि उसके पति रोहित गोला ने उसे गर्भावस्था की हालत में छोड़ दिया, दूसरी लड़की से सगाई कर ली और अब पूरी तरह संपर्क तोड़ लिया है।

नेहा ने बताया कि उसकी और रोहित की लव मैरिज साल 2022 में हुई थी। दोनों पिछले करीब सात वर्षों से एक-दूसरे को जानते थे। शादी के बाद दोनों नोएडा में रहकर नौकरी कर रहे थे। शादी को चार साल पूरे हो चुके हैं और फिलहाल नेहा गर्भवती है।

सगाई के बहाने गांव गया, दूसरी लड़की से कर ली सगाई

23 नवंबर को रोहित ने नेहा से कहा कि गांव में उसकी चाची की बेटी की सगाई है और वह वहां जा रहा है। भरोसे में लेकर वह नेहा की करीब तीन ग्राम की सोने की चेन भी साथ ले गया। कुछ दिन बाद जब रोहित लौटा तो उसका व्यवहार बदला हुआ था।

नेहा को सच्चाई तब पता चली जब उसने इंस्टाग्राम पर रोहित और किसी दूसरी लड़की की सगाई की तस्वीरें देखीं। जब उसने रोहित से सवाल किया तो जवाब मिला कि “घरवालों के दबाव में सगाई करनी पड़ी।”

दहेज के लालच में दूसरी शादी का आरोप

नेहा का आरोप है कि रोहित और उसका परिवार दहेज के लालच में दूसरी शादी कराना चाहते थे। जब उसने इसका विरोध किया तो उसे नजरअंदाज किया गया। 2 दिसंबर को नेहा ने थाना टेढ़ी बागिया में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के साथ वह रोहित के घर पहुंची, जहां लड़की पक्ष को भी बुलाया गया। पुलिस की मौजूदगी में दूसरी सगाई टूट गई और दोनों पक्षों को समझाइश दी गई।

इसके बावजूद रोहित न तो नेहा के पास लौटा और न ही कोई जिम्मेदारी निभाई।

पति ने बंद किया फोन, पूरा परिवार ब्लॉक पर

नेहा का कहना है कि रोहित ने अपना मोबाइल फोन पूरी तरह बंद कर लिया है, जिससे उसका कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। ससुराल पक्ष के अन्य सदस्य—पिता पप्पू, बड़ा भाई राहुल गोला, छोटा भाई विष्णु और बहन पूजा—ने भी नेहा का नंबर अपने फोन में ब्लॉक कर दिया है।

नेहा के अनुसार, सिर्फ ससुर पप्पू का एक मोबाइल नंबर (96277-39* ) ही चालू है**। इसी नंबर पर संपर्क होने पर नेहा को लगातार धमकियां दी जा रही हैं। कहा जा रहा है कि अगर उसने दोबारा थाने जाने या ससुराल आने की कोशिश की तो उसे जान से मार दिया जाएगा। नेहा ने बताया कि पूरा नंबर पुलिस को लिखित रूप में दे दिया गया है।

पहले भी कराया गया था जबरन गर्भपात

नेहा ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उसका कहना है कि करीब एक साल पहले ससुराल वालों ने उसका जबरन गर्भपात कराया था। अस्पताल में नर्स को पैसे देकर कहा गया कि बच्चा मर गया है। जब नेहा ने अल्ट्रासाउंड कराने की जिद की तो अस्पताल ने उसे टाल दिया। अब दोबारा गर्भवती होने पर ही उसे छोड़ दिया गया।

“अब डर के साए में जी रही हूं”

नेहा भावुक होकर कहती है,
“अगर मैं अकेली होती तो कहीं भी जाकर काम कर लेती, लेकिन अब इस हालत में बच्चे के साथ कहां जाऊं? पति ने छोड़ दिया, ससुराल वाले धमका रहे हैं और पुलिस से भी मदद नहीं मिल रही।”

नेहा का आरोप है कि वह पिछले दो महीनों से थाने के चक्कर लगा रही है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। उसका कहना है कि ससुराल पक्ष प्रभाव और पैसों के दम पर बचने की कोशिश कर रहा है।

सिस्टम पर उठे सवाल

एक गर्भवती महिला को छोड़कर पति का फरार होना, दूसरी शादी की तैयारी और ससुराल से जान से मारने की धमकियां—यह मामला केवल घरेलू विवाद नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा और कानून की संवेदनशीलता की बड़ी परीक्षा बन गया है।

अब सवाल यह है कि क्या नेहा और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को समय रहते सुरक्षा और न्याय मिल पाएगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?