साई पल्लवी, जुनैद खान के साथ ‘एक दिन’ से हिंदी सिनेमा में डेब्यू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह फिल्म 18 साल बाद आमिर खान और मंसूर खान की प्रोड्यूसर के तौर पर धांसू वापसी होने वाली है।आमिर खान एक साथ कई फिल्में प्रोड्यूस कर रहे हैं, जहां उनकी लेटेस्ट प्रोडक्शन ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ 16 जनवरी, 2026 को रिलीज होने वाली है। वहीं उन्होंने अब अपने अपकमिंग प्रोडक्शन वेंचर ‘एक दिन’ की घोषणा कर दी है। यह रोमांटिक फिल्म 1 मई, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म में साई पल्लवी और जुनैद खान के साथ नजर आने वाली हैं। साउथ की मशहूर एक्ट्रेस साई पहले से ही अपनी मोस्ट अवेडेट फिल्म ‘रामायण’ में सीता का किरदार निभाने के लिए चर्चा में बनी हुई है और अब अपनी पहली बॉलीवुड मूवी को लेकर सुर्खियों में आ गई हैं।
साई पल्लवी और जुनैद खान की ‘एक दिन’ की रिलीज डेट
साई पल्लवी और जुनैद खान की आने वाली फिल्म का टाइटल आखिरकार सामने आ चुका है। 15 जनवरी, 2025 को आमिर खान प्रोडक्शंस ने घोषणा की है कि फिल्म का नाम ‘एक दिन’ होगा। आने वाली इस बॉलीवुड रोमांटिक फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए, प्रोडक्शन हाउस ने बताया कि यह 1 मई, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। कैप्शन में मेकर्स ने लिखा, ‘जिंदगी की भागदौड़ में प्यार तुम्हें ढूंढ ही लेगा… एक दिन।’ मेकर्स ने यह भी बताया कि फिल्म का टीजर कल, 16 जनवरी 2026 को रिलीज होगा।साई पल्लवी-जुनैद खान का स्क्रीन पर छाएगा जादू
आने वाली फिल्म के पोस्टर में साई और जुनैद एक लविंग कपल के रोल में दिख रहे हैं। उन्होंने सर्दियों के कपड़े पहने हैं और आइसक्रीम का मजा उठाते नजर आ रहे हैं, जबकि दोनों चारों ओर बर्फ से घिरे हुए दिखाई दे रहे हैं। उनके कपड़ों को देखकर लगता है कि एक्टर्स फिल्म में कॉलेज जाने वाले यंगस्टर्स का रोल कर रहे हैं। सुनील पांडे द्वारा डायरेक्ट की गई इस फिल्म को स्नेहा देसाई और स्पंदन मिश्रा ने लिखा है। यह फिल्म 18 साल बाद आमिर खान और मंसूर खान की प्रोड्यूसर के तौर पर वापसी भी है। उन्होंने इससे पहले 2008 में आई फिल्म ‘जाने तू…या जाने ना’ में प्रोड्यूसर के तौर पर साथ काम किया था, जिसमें इमरान खान और एक्ट्रेस जेनेलिया डिसूजा थे।
आमिर खान के बेटे का हिट डेब्यू
जुनैद खान की फिल्मों की बात करें तो एक्टर ने हिस्टोरिकल ड्रामा फिल्म ‘महाराज’ से एक्टिंग डेब्यू किया था। इस फिल्म से आमिर खान के बेटे ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था और कई लोगों ने उनकी एक्टिंग स्किल्स की तारीफ भी की। इसके बाद वह अद्वैत चंदन के रोमांटिक ड्रामा ‘लवयापा’ में खुशी कपूर के साथ नजर आए।
साई पल्लवी की दो अपकमिंग बॉलीवुड फिल्में
साई पल्लवी की बात करें तो यह पहली बार है, जब यह साउथ एक्ट्रेस किसी हिंदी फिल्म में काम करेंगी। इसके बाद वह नितेश तिवारी के एपिक ड्रामा ‘रामायण’ में रणबीर कपूर और यश के साथ नजर आएंगी।
‘एक दिन’ से बॉलीवुड डेब्यू करेंगी साई पल्लवी, आमिर खान के बेटे संग पहला लुक आया सामने, इस दिन रिलीज होगी फिल्म
सुप्रीम कोर्ट में IPAC रेड मामले पर जोरदार बहस, ED ने लगाए गंभीर आरोप, ममता सरकार ने दी सफाई
सुप्रीम कोर्ट में IPAC रेड मामले पर ED और ममता सरकार के बीच तीखी बहस हुई। ED ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया। वहीं बंगाल सरकार ने आरोपों को गलत बताया।नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में IPAC पर हुई रेड के मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जोरदार बहस हुई। ED का दावा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस ने IPAC पर हुई रेड के दौरान जांच में बाधा डाली। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि यह बहुत ही चौंकाने वाली घटना है। मुख्यमंत्री खुद छापे वाली जगह पहुंच गईं और जांच में रुकावट डाली। राज्य पुलिस ने राजनीतिक तरीके से काम किया। मेहता ने आगे कहा कि ईडी पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की धारा 17 के तहत कार्रवाई कर रही थी, लेकिन इसे जानबूझकर प्रभावित किया गया।
‘अगर ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त किया गया तो…’
मेहता ने जोर देकर कहा कि अगर ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त किया गया तो इससे ऐसे कृत्यों को बढ़ावा मिलेगा और केंद्रीय बलों का मनोबल टूटेगा। राज्य सरकार को यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि वे जबरन घुसकर चोरी करें और फिर धरने पर बैठ जाएं। एक मिसाल कायम की जानी चाहिए और जो अधिकारी मौके पर थे, उन्हें निलंबित किया जाना चाहिए। जस्टिस मिश्रा ने पूछा कि क्या हम इन अधिकारियों को सस्पेंड कर दें? इस पर मेहता ने कहा कि कोर्ट खुद सस्पेंड न करे, लेकिन सक्षम अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दे। कोर्ट इस पूरे मामले को गंभीरता से ले। उन्होंने पीएमएलए की धारा 54 का जिक्र किया, जिसके तहत जांच में दखल देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
‘TMC कार्यकर्ताओं ने कोर्ट को जंतर मंतर में बदला’
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने कोर्ट को जंतर मंतर में बदल दिया था। उन्होंने कहा, ‘यह हंगामा अचानक नहीं हुआ था, बल्कि टीएमसी की लीगल सेल ने इसे प्लान किया था। उन्होंने मैसेज भेजकर लोगों को आने के लिए कहा था।’ कोर्ट ने टिप्पणी की कि क्या कोर्ट को जंतर मंतर में बदल दिया गया? मेहता ने हां में जवाब दिया। ईडी का आरोप है कि उनके वकील एएसजी को हाईकोर्ट में ठीक से बहस नहीं करने दी गई और उनका माइक बार-बार म्यूट किया गया। मेंटेनबिलिटी पर मेहता ने कहा कि ईडी के अधिकारियों ने भारत के नागरिक के तौर पर याचिका दाखिल की, जो इससे प्रभावित हुए। इससे पहले सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर के घर का घेराव और तोड़फोड़ हुई थी।’DCP के साथ ममता बनर्जी गैरकानूनी तरीके से घुसीं’
मेहता ने कहा, ‘ईडी ने एक निजी कंपनी और उससे जुड़े व्यक्ति के घर छापा मारा, लेकिन वहां डीजीपी, कमिश्नर और डीसीपी के साथ ममता बनर्जी गैरकानूनी तरीके से घुसीं, दस्तावेज लेकर चली गईं, ईडी अधिकारियों के फोन ले लिए। हम मांग करते हैं कि राज्य अधिकारियों को लगे कि वे नेताओं के साथ धरना नहीं दे सकते। इससे केंद्रीय एजेंसियों का नैतिक बल प्रभावित होता है और जांच बाधित होती है। हम कोर्ट से चाहते हैं कि एमएचए और डीओपीटी को इन अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दे।’ मेहता ने टीएमसी के वॉट्सऐप ग्रुप पर चल रहे मैसेज को कोर्ट में पढ़ा, जो कोर्ट की कार्रवाई में बाधा डालने को लेकर था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है और हम राज्य सरकार को नोटिस जारी कर रहे हैं।
मेहता ने कहा कि ऐसा क्या छिपाने जैसा था कि मुख्यमंत्री को पुलिस कमिश्नर के साथ जबरदस्ती अंदर घुसना पड़ा? मुख्यमंत्री परिसर में घुसीं और कानून-व्यवस्था का उल्लंघन करते हुए सभी डिजिटल डिवाइस और तीन आपत्तिजनक दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए और दोपहर 12:15 बजे चली गईं। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी पेश हुए। सिब्बल ने कहा कि यहां जानकारी की कलरिंग की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम बहुत व्यथित हैं कि हाईकोर्ट को सुनवाई नहीं करने दी गई। सिब्बल ने कहा कि कल सुनवाई हुई है। कोर्ट ने कहा नहीं, पहले दिन। सिब्बल ने कहा कि सही जानकारी नहीं दी गई। ऐसा दोबारा नहीं होगा।
‘प्रतीक जैन के लैपटॉप में चुनावी जानकारी थी’
सिब्बल ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सभी उपकरण जब्त करने का आरोप झूठा है। उन्होंने कहा, ‘यह पूर्वाग्रह पैदा करने के लिए है। 12:05 तक कोई जब्ती नहीं हुई। प्रतीक जैन के लैपटॉप में चुनावी जानकारी थी। उन्होंने लैपटॉप और आईफोन लिया। बस इतना। कोई बाधा नहीं। ईडी के हस्ताक्षर हैं। याचिका में कही बातें पंचनामा के विपरीत हैं। IPAC के पास पार्टी सामग्री थी, इसलिए ईडी गई। अधिक सामग्री एकत्र करने का दुर्भावनापूर्ण कृत्य है।’ सिब्बल ने कहा कि मुख्यमंत्री पर आरोप गलत है कि वे सारे डिवाइस ले गईं। उन्होंने कहा, ‘ममता केवल अपना लैपटॉप और आईफोन ले गईं।’
हरदोई में भू-माफिया बनाम आम नागरिक: मंदिर की जमीन पर कब्जे का आरोप, पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के गंभीर सवाल
हरदोई।
जनपद हरदोई के मल्लावां थाना क्षेत्र के भगवंतनगर गांव से एक बार फिर भू-माफियाओं की दबंगई और प्रशासनिक निष्क्रियता का गंभीर मामला सामने आया है। गाटा संख्या 241 की जमीन के स्वामी राजेन्द्र प्रसाद सिंह और उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि बीते कई महीनों से भू-माफिया खुलेआम जेसीबी और डंपरों के जरिए उनकी जमीन और मंदिर की सार्वजनिक भूमि पर जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि 9 दिसंबर 2025 को अजीत उर्फ डगरू, रणवीर सिंह और मानसिंह यादव जेसीबी लेकर गाटा संख्या 241 पर कब्जा करने पहुंचे। विरोध करने पर गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और सत्ता पक्ष का भय दिखाया गया। पीड़ित ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया, लेकिन थाना स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

मामला यहीं नहीं रुका। 8 और 9 जनवरी 2026 को मानसिंह यादव पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में मारपीट और धमकी देने के आरोप लगे। पीड़ित का दावा है कि मंदिर की जमीन, जो अभिलेखों में दर्ज है, उस पर भी टीनशेड और मिट्टी डालकर अवैध कब्जा किया गया। विरोध करने पर उल्टा पीड़ित और उसकी पत्नी के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर लिया गया, जबकि आरोपितों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह विवाद न्यायालय में विचाराधीन है और प्रशासन द्वारा यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद रात के अंधेरे में डंपरों से मिट्टी डलवाकर कब्जा करने के प्रयास जारी हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि भू-माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन निष्क्रिय बने हुए हैं।
राजेन्द्र प्रसाद सिंह और उनके पुत्र राजेश कुमार ने मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक तक गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था, पुलिस की निष्पक्षता और आम नागरिक की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर प्रकरण को कितनी गंभीरता से लेता है और भू-माफियाओं पर कब शिकंजा कसता है।
मध्य प्रदेश: भोपाल में बवाल, ट्रक में 26 टन गोमांस होने के दावे पर छिड़ा संग्राम, मुस्लिम समाज कर रहा प्रदर्शन
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले 27 दिन से एक मामले को लेकर बवाल मचा हुआ है। नगर निगम के सहयोग से चल रहे स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने से जबरदस्त संग्राम छिड़ा है। इस मामले में मुस्लिम संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं। मुस्लिम संगठनों की मांग है कि इस मामले में सीबीआई जांच की जाए और असलम चमड़े के अलावा तमाम आरोपियों की गिरफ्तारी हो। मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रदर्शन के दौरान गोहत्या बंद करो के नारे भी लगाए।
क्या है पूरा मामला?
17 दिसंबर को पुलिस हेडक्वॉर्टर के पास एक ट्रक पकड़ा गया था, जिसके बाद से बवाल मचा हुआ है। ट्रक में 26 टन गोमांस लदे होने का शक़ था। सैंपल को जांच के लिए हैदराबाद और मुंबई भेजा गया था। सबसे हैरानी की बात ये थी कि जिस स्लॉटर हाउस से ये ट्रक निकला था, वो नगर निगम का है और PPP मोड में चल रहा है।
17 दिसंबर 2025 को हिंदू संगठनों ने एक ट्रक पकड़ा । इस ट्रक में 26 टन गोमांस होने का दावा किया गया। स्लॉटर हाउस का संचालक असलम चमड़ी निकला, जिसे अरेस्ट कर लिया गया। बाद में नगर निगम भी सवालों के घेरे में आया। इस मामले को लेकर सरकार पर भी सवाल खड़े हुए।
गोमांस मामले में कांग्रेस ने हमलावर रुख अपनाया और BJP पर गंभीर आरोप लगाए। अब इस मामले में अलग-अलग संगठन सड़कों पर हैं। हिंदू संगठन इस मामले को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी जता रहे हैं।
गौरतलब है कि भारत में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है और हिंदू धर्म में गाय पूजनीय है। ये माना जाता है कि गाय में सभी देवताओं का निवास है। इसके बावजूद गाय को बड़े पैमाने पर काटने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, जिसके लेकर समय-समय पर हिंदूवादी संगठन के लोग प्रदर्शन करते रहे हैं।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता पर फर्नीचर कारीगर का गंभीर आरोप, 7.83 लाख बकाया न देने और धमकी देने का दावा
अलीगढ़/लखनऊ। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें लखनऊ निवासी एक कारीगर ने विश्वविद्यालय के प्रवक्ता व ठेकेदारी कार्य करने वाले व्यक्ति पर बकाया भुगतान न देने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने इस संबंध में थाना AMU मेडिकल रोड, अलीगढ़ सहित उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित राम संजीवन पुत्र श्याम लाल, निवासी फैजुल्लागंज, लखनऊ के अनुसार उन्होंने डॉ. रेहान (निवासी ग्राम-सबरहता, चौकी-इमकरानगंज, थाना-शाहगंज, जनपद-जौनपुर) के लिए फर्नीचर और लकड़ी का कार्य किया था। शिकायत में बताया गया है कि डॉ. रेहान का वर्तमान पता अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी मेडिकल रोड क्षेत्र बताया गया है।
फर्नीचर कार्य के बदले 7.83 लाख बकाया होने का दावा
शिकायत के मुताबिक पीड़ित ने डॉ. रेहान के यहां 22 पल्ला खिड़की, 6 जाली डोर, 2 जाली डोर गेलाई, 12 पाया रेलिंग, जीना रेलिंग, लकड़ी का काम, डाइनिंग टेबल-कुर्सी और पॉलिश सहित कई कार्य किए।
पीड़ित का कहना है कि इन सभी कार्यों की कुल राशि 5,53,600 रुपये बताई गई, जिसमें से 1,20,000 रुपये का भुगतान मिला, जबकि कुल बकाया 7,83,600 रुपये बताया गया है। पीड़ित ने यह भी दावा किया कि इस बकाया में 3,50,000 रुपये RAS Infractech नामक संस्था से जुड़ा भुगतान भी शामिल है।
टालमटोल और कॉल न उठाने का आरोप
राम संजीवन का आरोप है कि काम के दौरान उन्हें लगातार यह कहा जाता रहा कि पूरा भुगतान बाद में कर दिया जाएगा, लेकिन काम पूरा होने के बाद जब उन्होंने पैसा मांगा तो दो महीने से टालमटोल किया जा रहा है। पीड़ित के अनुसार फोन करने पर कॉल नहीं उठाई जाती और जब बात होती है तो कथित तौर पर धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है।
“जो करना हो कर लो… जान से मार देंगे” जैसी धमकी का दावा
शिकायत में पीड़ित ने आरोप लगाया है कि डॉ. रेहान ने उन्हें कथित तौर पर कहा—
“जो करना हो कर लो, तुम मेरा कुछ नहीं कर पाओगे… मेरी पहुंच ऊपर तक है… ज्यादा करोगे तो जान से मारकर फेंक देंगे, तुम्हारे परिवार को भी पता नहीं चलेगा।”
पीड़ित ने बताया कि इस धमकी के बाद वह और उनका परिवार डर के माहौल में है।
पहले भी दी गई शिकायत, कार्रवाई नहीं होने का आरोप
पीड़ित के मुताबिक उन्होंने इस मामले को लेकर थाना शाहगंज, जौनपुर में भी शिकायती पत्र दिया था और कई बार व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया, लेकिन केवल आश्वासन मिला, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस से बकाया दिलाने की मांग
पीड़ित राम संजीवन ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि डॉ. रेहान से 7,83,600 रुपये का भुगतान दिलाया जाए और धमकी देने के आरोपों की भी जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
नोट: यह खबर पीड़ित द्वारा दिए गए शिकायती पत्र/आवेदन में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
बड़वानी में 13 साल की नाबालिग से दरिंदगी का आरोप, 17 दिन बाद भी FIR नहीं; पीड़ित परिवार से पुलिस की मारपीट, पढ़ाई कर रहे बच्चों पर टूटा कहर
बड़वानी (मध्य प्रदेश)।
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। तहसील पानसेमल के छोटा मलगांव निवासी 13 वर्षीय नाबालिग लड़की अनीता के साथ 13 दिसंबर 2025 की रात करीब 10:30 बजे कथित रूप से मारपीट, जबरन शारीरिक शोषण और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि इस जघन्य वारदात के बाद आरोपी लड़की को जबरदस्ती महाराष्ट्र ले गया, जिससे उसकी जान और भविष्य दोनों खतरे में पड़ गए।
शिकायतकर्ता शेवता रजान पाटी द्वारा जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक बड़वानी को सौंपे गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, आरोपी लिल्या मेंनटा भोसले, निवासी बारी फोल्या पाटी पोस्ट बकराटा, तहसील पाड़ी और उसका साथी कुंवर सिंह, निवासी सुनाभाटी, ने मिलकर इस अपराध को अंजाम दिया। आरोप है कि घटना कुंवर सिंह के घर पर रात 10:30 बजे हुई। पीड़िता चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन डर के कारण कोई आगे नहीं आया। बाद में उसे धमकी दी गई कि अगर किसी को बताया तो जंगल में मारकर फेंक दिया जाएगा।
परिवार का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद वे खेतिया थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार कर दिया। कभी “शाम को आना” तो कभी “सोमवार को आना” कहकर टाल दिया गया। अब घटना को 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो FIR दर्ज हुई और न ही किसी आरोपी से पूछताछ हुई।
पीड़ित परिवार का दावा है कि आरोपी लिल्या मेनटा भोसले ने पुलिस को रिश्वत देकर पूरे मामले को दबा दिया। जब परिवार ने लगातार न्याय की मांग की, तो उल्टा पुलिस ने पीड़ितों पर ही कार्रवाई शुरू कर दी। आरोप है कि कुछ दिन पहले पुलिस ने शेवता रजान पाडवी की मां फूगी बाई, भाई और तीन अन्य परिजनों के साथ थाने में बेरहमी से मारपीट की।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि दिलीप रजान पाडवी को पुलिस थाने ले जाकर लोहे की रॉड से पीटा गया, जिससे उसके सिर में आठ टांके लगाने पड़े। इसके अलावा चार अन्य लोगों को भी थाने ले जाकर बुरी तरह पीटा गया। परिवार का कहना है कि पुलिसिया अत्याचार के कारण बच्चों की पढ़ाई और भविष्य तबाह हो गया है।
पीड़ित परिवार के सदस्य शिक्षित हैं—किसी ने MSC, B.Ed, LLB, तो किसी ने BA, SYBA तक पढ़ाई की है। दिलीप पाडवी 12वीं साइंस का छात्र है, लेकिन पुलिस की मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के चलते उसकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। परिवार का कहना है कि अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और न्याय मांगने वालों को ही सजा दी जा रही है।
शिकायत में नाबालिग अनीता की जन्म तिथि और पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज है, जिससे साफ है कि वह कानूनन पूरी तरह संरक्षित श्रेणी में आती है। इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी और देरी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। परिवार का कहना है कि हर गुजरते दिन के साथ सबूत मिटाए जा रहे हैं और लड़की की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है।
अब पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और राज्य सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो उन्हें कभी न्याय नहीं मिलेगा। यह मामला न सिर्फ पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि “बेटी बचाओ” जैसे नारों की सच्चाई भी उजागर करता है।
बांद्रा फैमिली कोर्ट में हुई लव मैरिज, फिर रिश्तों में दरार—पति ने लगाए धोखा, चोरी और साजिश के गंभीर आरोप
मुंबई।
गौरव कश्यप ने मीडिया के माध्यम से अपनी पत्नी मानसी शेलार और उनके कथित सहयोगी अविनाश मोहिते पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गौरव के अनुसार उनकी शादी 29 सितंबर 2014 को बांद्रा फैमिली कोर्ट में लव मैरिज के तौर पर हुई थी। शादी में उनके परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था, केवल दोस्त शामिल थे। शादी के दिन ही दोनों ने चारकोप पुलिस स्टेशन में जाकर अपनी मर्जी से विवाह करने की जानकारी भी दी थी।
गौरव का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में सब ठीक था, लेकिन कुछ समय बाद घर में पैसों की चोरी होने लगी। पहले उन्हें किसी पर शक नहीं हुआ, लेकिन बाद में यह सिलसिला बढ़ता गया। उन्होंने दावा किया कि जब पैसा पत्नी के पास रखा जाता तो चोरी होती थी, और जब पैसा खुद अपने पास रखने लगे तो चोरी बंद हो गई।
पीड़ित पति के अनुसार उनकी पत्नी अक्सर घर से बाहर रहने लगीं और कई बार झूठ बोलकर अलग-अलग जगह जाने की बात कहती थीं। गौरव ने आरोप लगाया कि मानसी का मोबाइल हमेशा साइलेंट रहता था और वह फोन पर छिपकर किसी से बातचीत करती थीं।
गौरव ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2016 के आसपास एक पारिवारिक शादी में अविनाश मोहिते की नजर उनकी पत्नी पर पड़ी और बाद में मानसी का उनसे संपर्क बढ़ गया। आरोप है कि इसके बाद मानसी का व्यवहार बदलता गया, घर की जिम्मेदारियों से दूरी बनी और आर्थिक लेन-देन भी संदिग्ध हो गया।
गौरव के मुताबिक 2023 में मानसी अचानक घर छोड़कर चली गईं, जिसके बाद उन्होंने चारकोप पुलिस स्टेशन में मिसिंग शिकायत दर्ज कराई। वहीं, बाद में उन्हें जानकारी मिली कि मानसी किसी एनजीओ में नहीं बल्कि सायन इलाके में थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में अल्पा शेलार और अविनाश मोहिते की भूमिका संदिग्ध रही और परिवार को गुमराह किया गया।
गौरव ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पत्नी के मोबाइल में कई आपत्तिजनक और खतरनाक प्रकार की “गूगल सर्च हिस्ट्री” और संदिग्ध वीडियो मिले, जिससे उन्हें जान का खतरा महसूस हुआ। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की गई और धमकियां भी मिलीं।
पीड़ित पति का कहना है कि अविनाश मोहिते ने उनकी पत्नी को सामने रखकर 1 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फ्रॉड को अंजाम दिया है और यह मामला एक बड़े रैकेट से जुड़ा हो सकता है। गौरव ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार सबूत देने के बावजूद उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और केवल एनसी दर्ज कर औपचारिकता निभाई गई।
गौरव कश्यप ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच, सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सही जांच होती तो मामला इतना गंभीर नहीं बनता।
2014 की लव मैरिज के बाद टूटा रिश्ता
पति ने पत्नी, रिश्तेदारों और कथित साजिशकर्ताओं पर लगाए गंभीर आरोप, न्याय की लगाई गुहार
मुंबई/बांद्रा। वर्ष 2014 में बांद्रा फैमिली कोर्ट में आपसी सहमति से हुई एक लव मैरिज आज गंभीर विवाद, मानसिक उत्पीड़न और आपराधिक आरोपों के घेरे में आ गई है। पीड़ित पति ने मीडिया के माध्यम से अपनी आपबीती साझा करते हुए आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी और कुछ रिश्तेदारों द्वारा उसके खिलाफ सुनियोजित साजिश रची गई, जिससे उसकी जिंदगी बीते 7–8 वर्षों से लगातार तनाव, भय और अवसाद में गुजर रही है।
शादी के बाद शुरू हुआ विवाद
पीड़ित के अनुसार शादी से पहले उसने पत्नी के माता-पिता से मिलने और बात करने की इच्छा जताई थी, लेकिन पत्नी के कहने पर बिना पारिवारिक सहमति के ही कोर्ट मैरिज करनी पड़ी। शादी के बाद इसकी सूचना चारकोप पुलिस स्टेशन में दी गई। शुरुआती दिनों में दोनों परिवारों के बीच औपचारिक मेल-मुलाकात भी हुई, लेकिन कुछ समय बाद पति-पत्नी के संबंधों में लगातार तनाव बढ़ने लगा।
स्वास्थ्य, संतान और व्यवहार को लेकर तनाव
पति का आरोप है कि पत्नी का व्यवहार असामान्य होता गया। वैवाहिक संबंधों से दूरी, इलाज के बावजूद संतान न होना, आर्थिक मामलों में पारदर्शिता न रखना और बार-बार मायके या रिश्तेदारों के यहां चले जाना विवाद का कारण बना। पीड़ित का कहना है कि ससुराल पक्ष इलाज करवा रहा था, लेकिन पत्नी दवाइयों और परहेज को लेकर गंभीर नहीं थी।
घर में पैसों की चोरी के आरोप
पति ने दावा किया कि जिस घर में वे रहते थे, वहां उसके मित्र और बाद में स्वयं उसके पैसे रहस्यमय तरीके से गायब होने लगे। शुरुआत में संदेह नहीं किया गया, लेकिन बार-बार बड़ी रकम गायब होने पर शक गहराया। पीड़ित का दावा है कि कुल मिलाकर उसे और उसके मित्र को लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
2023 में मामला हुआ गंभीर
जुलाई 2023 में पत्नी अचानक घर छोड़कर चली गई। 30 जुलाई 2023 को एक पत्र छोड़कर लापता होने पर पति ने चारकोप पुलिस स्टेशन में मिसिंग कंप्लेंट दर्ज कराई। कुछ दिन बाद पुलिस से जानकारी मिली कि पत्नी अपनी मर्जी से रह रही है।
पीड़ित का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम में अविनाश मोहिते और उसकी बहन अल्पा शेलार की भूमिका संदिग्ध है, जिन्होंने उसकी पत्नी को भड़काकर उसके और उसके माता-पिता के खिलाफ खड़ा किया।
आत्महत्या प्रयास और आरोप
पति का यह भी आरोप है कि पूछताछ के दौरान पत्नी ने दवाइयों का अधिक सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया।
पति पर ही मानसिक दबाव बनाया गया।
काले जादू और धमकियों के आरोप
पीड़ित ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि पत्नी और कथित साजिशकर्ताओं द्वारा उस पर काला जादू जैसे कृत्य किए गए और उसे जान से मारने की साजिश रची गई। हालांकि यह आरोप उसकी व्यक्तिगत शिकायत पर आधारित हैं और जांच का विषय हैं। पीड़ित का कहना है कि “और भी कई राज हैं, जो समय आने पर सामने आएंगे।”
पुलिस कार्रवाई पर सवाल
पीड़ित का कहना है कि उसने दादर वेस्ट पुलिस स्टेशन, कस्तूरबा पुलिस स्टेशन सहित कई थानों के चक्कर काटे, लेकिन हर बार इसे “फैमिली मैटर” कहकर टाल दिया गया। उसका आरोप है कि यदि समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई होती, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते।
मीडिया और प्रशासन से गुहार
पीड़ित ने मीडिया, पुलिस प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उसका कहना है कि उसे और उसके ससुराल पक्ष को जान का खतरा है। साथ ही उसने कानून के दुरुपयोग, झूठे मामलों की धमकी और आर्थिक शोषण जैसे मुद्दों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
पीड़ित ने भावुक अपील करते हुए कहा कि वह आत्महत्या जैसी बातें धमकी के रूप में नहीं, बल्कि अपनी मजबूरी के तौर पर कह रहा है, क्योंकि उसे कहीं से भी न्याय मिलता नहीं दिख रहा।
नोट: यह खबर पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। सभी आरोप जांच के अधीन हैं। संबंधित पक्षों का पक्ष आना शेष है।
पटना में टेंट व्यवसायी कर्ज के जाल में फंसा, 30–40 लाख के लेन-देन के बीच धमकियों से दहशत; सरकारी मदद की गुहार
पटना (बिहार)।
राजधानी पटना थाना मनेर गांव सुखचक से एक बेहद चिंताजनक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां टेंट–पंडाल व्यवसाय से जुड़े एक व्यक्ति पर कर्ज, धमकी और सामाजिक दबाव का ऐसा बोझ पड़ गया है कि उसका पूरा परिवार संकट में आ गया है। शिकायतकर्ता बबलू कुमार पंडित, निवासी राजधानी पटना थाना मनेर गांव सुखचक पिछले करीब 10 वर्षों से टेंट–पंडाल का काम कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि मेहनत और भरोसे के बल पर उन्होंने अपना कारोबार खड़ा किया, लेकिन आज वही भरोसा उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है।
बबलू कुमार का कहना है कि दोस्ती-यारी और कामकाज के सिलसिले में उन्होंने अलग-अलग लोगों के पास करीब 30 से 40 लाख रुपये का लेन-देन कर रखा है। कई लोग उनके पैसे लौटाने को तैयार नहीं हैं। आरोप है कि जब वह अपना बकाया मांगने जाते हैं तो कुछ लोग रास्ते में गाड़ी रुकवा लेते हैं, पैसे मांगने पर उल्टा धमकाते हैं और जान से मारने की धमकी तक दे देते हैं। पीड़ित का कहना है कि डर और दबाव के कारण वह कई बार चुप रह जाने को मजबूर हो जाते हैं।
पीड़ित ने बताया कि टेंट–पंडाल के काम में उन्होंने छोटे-छोटे अमाउंट भी उधार पर दिए थे—कहीं 22 हजार, कहीं 25 हजार, कहीं 20 हजार, 18 हजार या 16 हजार रुपये। लेकिन बड़ी संख्या में लोग पैसे नहीं लौटा रहे हैं। कुछ मामलों में जातिगत विवाद भी सामने आया है, जहां केवल जाति के आधार पर पैसे देने से इनकार कर दिया गया। इन सब कारणों से वह धीरे-धीरे कर्ज के दलदल में फंसते चले गए।
बबलू कुमार पंडित ने कहा कि लगातार आर्थिक दबाव और धमकियों के चलते उनका मानसिक संतुलन भी बिगड़ने लगा है। उनके परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं, जिनकी पढ़ाई, पालन-पोषण और भविष्य को लेकर वह हर दिन चिंता में रहते हैं। उन्होंने बताया कि कर्ज बढ़ने की वजह से अब उनका टेंट–पंडाल का काम भी लगभग ठप हो गया है और नए काम लेने की स्थिति में नहीं हैं।
पीड़ित ने प्रशासन और सरकार से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनकी आवाज योगी और मोदी सरकार तक पहुंचे। वह चाहते हैं कि सरकार या प्रशासन की ओर से उन्हें किसी तरह का लोन, सब्सिडी या आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वह पुराने कर्ज को चुका सकें और दोबारा अपना काम शुरू कर सकें। उनका कहना है कि अगर समय रहते मदद नहीं मिली, तो उनका परिवार पूरी तरह बर्बाद हो सकता है।
यह मामला न सिर्फ एक छोटे व्यवसायी की आर्थिक बदहाली की कहानी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोग लेन-देन, सामाजिक दबाव और धमकियों के बीच पिस जाते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पीड़ा को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या एक कर्ज में डूबे परिवार को राहत मिल पाती है या नहीं।
बाराबंकी में युवक की पत्नी को बहला-फुसलाकर भगाने का सनसनीखेज मामला, सीसीटीवी में कैद हुई वारदात
बाराबंकी जिले में महिला को जबरन बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित पति ने आरोप लगाया है कि उसके परिचित युवक ने उसकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर उसकी पत्नी को जबरन भगा लिया। मामले में सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के ग्राम कुटी मजरे बस्ती निवासी पप्पू पुत्र राम आधार ने पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। पप्पू का कहना है कि वह पेशे से वाहन चालक है और 4 अक्टूबर 2025 को सुबह करीब 6 बजे अपने मालिक को लेकर निजी कार्य से इलाहाबाद गया हुआ था। इसी दौरान गांव चिलहटा, थाना जहांगीराबाद निवासी सुरेन्द्र कुमार पुत्र रामखेलावन ने मौका पाकर उसकी पत्नी सुधा को बहला-फुसलाकर सुबह करीब 7:30 बजे घर से भगा लिया।
पीड़ित के अनुसार, जब वह बाहर गया हुआ था, तभी आरोपी ने उसकी पत्नी को जबरन उसकी इच्छा के विरुद्ध घर से ले गया। घटना के बाद जब पप्पू को जानकारी हुई तो उसने अपनी पत्नी की काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में ग्राम पपनामऊ, थाना चिनहट, लखनऊ में स्थित एक दुकान पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज सामने आई, जिसमें साफ तौर पर देखा गया कि सुरेन्द्र कुमार मोटरसाइकिल से महिला को लेकर जाता हुआ दिखाई दे रहा है।
पीड़ित ने बताया कि आरोपी को उसकी पत्नी को ले जाते समय कई लोगों ने देखा भी था। जब पप्पू आरोपी के घर ग्राम चिलहटा पहुंचा, तो वहां मौजूद लोगों ने बताया कि सुरेन्द्र किसी महिला को लेकर फरार हो गया है। इससे पीड़ित का शक और गहरा हो गया कि उसकी पत्नी को जबरन अगवा किया गया है।
पीड़ित ने पुलिस को यह भी बताया कि सुरेन्द्र कुमार का उसके गांव में आना-जाना था और वह पहले से ही परिचित था, इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने इस वारदात को अंजाम दिया। पीड़ित ने आशंका जताई है कि उसकी पत्नी के साथ कोई अनहोनी भी हो सकती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत को संज्ञान में ले लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश की जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार करने का दावा किया जा रहा है। वहीं पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई कर महिला को सुरक्षित बरामद करने की मांग की है।
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यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और ग्रामीणों में भी भय और आक्रोश का माहौल है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी।
रास्ता बंद कर जान से मारने की धमकी, पीड़ित ने पीएम-सीएम से लगाई न्याय की गुहार
नाबरंगपुर (उड़ीसा)। जिला नाबरंगपुर के गांव पदर निवासी सदा अरिहंत के पुत्र घासया ने आरोप लगाया है कि गांव के ही कुछ दबंग विपक्षी लगातार उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि आरोपियों में मूलचंद और उसका पुत्र शामिल हैं, जिन्होंने उनके घर के बाहर निकलने वाले मुख्य रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया है।
पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने साफ शब्दों में कहा है कि “अगर इस रास्ते से निकले तो जान से मार देंगे”, जिससे अब परिवार का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि यह रास्ता वे पिछले कई वर्षों से उपयोग करते आ रहे हैं, लेकिन अब अचानक इसे जबरन बंद किया जा रहा है।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षियों ने रास्ते के बीच में बड़ा गड्ढा कर दिया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। पीड़ित का कहना है कि इस सड़क से सिर्फ उनका ही नहीं, बल्कि कई ग्रामीणों का आना-जाना रहता है, ऐसे में पूरे इलाके के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
पीड़ित ने बताया कि वे पुलिस थानों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन राहत नहीं मिली। अब उनका मामला अदालत में विचाराधीन है, इसके बावजूद आरोपी लगातार दबाव बना रहे हैं और धमकी दे रहे हैं कि “प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के पास भी चले जाओ, तुम्हें रास्ता नहीं मिलेगा।”
पीड़ित परिवार ने उड़ीसा के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा है कि उन्हें सुरक्षा दी जाए, रास्ता खुलवाया जाए और आरोपियों पर सबसे सख्त कार्रवाई की जाए ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
घासया ने मीडिया को जानकारी देते हुए यह भी बताया कि पहले सड़क कंक्रीट की थी उसे कंक्रीट की सड़क को तोड़कर मूलचंद उसे पर गड्ढा कर दिया है और हमारा रास्ता बंद कर दिया है।
वहीं, नाबरंगपुर की JMFC कोर्ट द्वारा संबंधित मामले में गवाह को समन भी जारी किया गया है। अदालत ने केस नंबर 2-1164/17 के तहत सदा हरिजन (पिता- जितरु हरिजन), निवासी मालिपाड़ा गांव, कोसागुमुड़ा को 10 अक्टूबर 2022 सुबह 6:30 बजे कोर्ट में पेश होकर गवाही देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि गवाह बिना कारण उपस्थित नहीं हुआ तो वारंट जारी किया जा सकता है।

