Tuesday, April 7, 2026
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सैमसंग गैलेक्सी Z फोल्‍ड7 का OLED पैनल 500,000 फोल्ड्स के टेस्‍ट में सफल रहा

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गुरुग्राम, जुलाई, 2025 – सैमसंग डिस्प्ले ने आज बताया कि इसका नया फोल्डेबल OLED पैनल 5 लाख-फोल्‍ड ड्यूरैबिलिटी टेस्ट के बाद भी पूरी तरह काम करता रहा। इसने एक बार फिर अपनी फोल्डेबल OLED टेक्‍नोलॉजी की शानदार मजबूती को प्रदर्शित किया है।

पैनल का परीक्षण और सत्यापन वैश्विक परीक्षण, निरीक्षण और प्रमाणन कंपनी ब्यूरो वेरिटास द्वारा किया गया। सैमसंग डिस्प्ले ने अपने आंतरिक ड्यूरैबिलिटी टेस्टिंग स्‍टैण्‍डर्ड को 200,000 से बढ़ाकर 500,000 फोल्ड्स कर दिया, जोकि इसके पिछले मानक से 2.5 गुना अधिक है। यह पैनल की लंबे समय तक बरकरार रहने वाली मजबूती में इसके आत्मविश्वास को दर्शाता है। इस पैनल का इस्‍तेमाल हाल ही में लॉन्च किए गए सैमसंग गैलेक्सी Z फोल्‍ड7 में किया गया है।

ब्यूरो वेरिटास के मुताबिक, यह टेस्‍ट 13 दिनों तक 25°C (77°F) पर किया गया, और पैनल 500,000 फोल्ड्स के बाद भी पूरी तरह कार्यात्मक रहा। 500,000 फोल्ड्स का कुल योग औसत यूजर्स के लिए 10 वर्षों से अधिक के उपयोग के बराबर है, जो अपने डिवाइस को प्रतिदिन लगभग 100 बार फोल्ड करते हैं, और हैवी यूजर्स के लिए यह 6 वर्षों से अधिक है, जो प्रतिदिन 200 बार से अधिक फोल्ड करते हैं, यह साबित करता है कि ड्यूरैबिलिटी अब फोल्डेबल स्मार्टफोन्स की आयु में एक सीमित कारक नहीं है।

सैमसंग डिस्प्ले की नई शॉक-रेजिस्‍टेंस संरचना की बदौलत इस ड्यूरैबिलिटी को हासिल किया गया है। यह संरचना बुलेटप्रूफ ग्लास के डिज़ाइन सिद्धांतों से प्रेरित है।

पारंपरिक बुलेटप्रूफ ग्लास में कई परतों वाले मजबूत ग्लास और प्लास्टिक फिल्में होती हैं, जिन्‍हें इम्‍पैक्‍ट पर एनर्जी को अवशोषित और फैलाने के लिए बनाया जाता है। जब एक गोली सतह से टकराती है, तो बाहरी ग्लास परत का लचीलापन अधिकांश इम्‍पैक्‍ट एनर्जी को अवशोषित कर लेता है, जिससे प्रवेश रुक जाता है। सैमसंग डिस्प्ले ने इस अवधारणा को लागू करते हुए अपने सबसे बाहरी यूटीजी (अल्ट्रा थिन ग्लास) की मोटाई को 50% तक बढ़ाया और एक नया हाई-इलास्टिक एड्हेसिव पेश किया, जिसे इसके OLED पैनल के प्रत्येक परत पर लागू किया गया है। यह पिछली सामग्री की तुलना में चार गुना बेहतर रिकवरी प्रदर्शन प्रदान करता है। इन सभी सुधारों से पैनल की बाहरी प्रभाव को अवशोषित करने की क्षमता काफी हद तक बढ़ गई है।

इसके अलावा, एक नई समतल संरचना का उपयोग किया गया है ताकि शॉक को पैनल पर समान रूप से वितरित किया जा सके, और डिस्प्ले को समर्थन देने के लिए एक टाइटेनियम प्लेट भी लगाई गई है। टाइटेनियम प्लेट उच्च मजबूती प्रदान करती है, साथ ही यह पारंपरिक सामग्रियों की तुलना में हल्की और पतली है जिससे अधिक सुरक्षा के साथ एक पतला फॉर्म फैक्टर मिलता है।

सैमसंग डिस्प्ले की मोबाइल डिस्प्ले प्रोडक्‍ट प्‍लानिंग टीम के हेड और एक्‍जीक्‍यूटिव वाइस प्रेसिडेंट होजंग ली ने कहा, “फोल्डेबल OLED तकनीक अपने व्‍यावसायीकरण के सातवें साल में पहुंच रही है, और हमने ड्यूरैबिलिटी एवं डिज़ाइन में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह नया पैनल न केवल फोल्डेबल OLED की ड्यूरैबिलिटी पर उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाता है, बल्कि उस तकनीकी खासियत को भी दिखाता है जो सैमसंग डिस्प्ले को उद्योग में सबसे अलग बनाती है।

अब मकान नीचे नहीं, ऊपर उठेगा – AZHARI HOUSE BUILDING LIFTING & SHIFTING कंपनी दे रही है 100% गारंटी के साथ समाधान”

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जिला लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश, 28 जुलाई:
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी सहित देशभर में कई लोग इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं कि उनके मकान सड़क के स्तर से नीचे हैं। नतीजतन, बरसात के दिनों में बारिश का पानी घरों में भर जाता है। कई मकानों में नालियों का गंदा पानी भी पाइपों के रास्ते घर में घुस आता है, जिससे न सिर्फ गंदगी फैलती है बल्कि मकान की नींव भी कमजोर होती है। इन्हीं समस्याओं का स्थायी और सुरक्षित समाधान लेकर आई है – AZHARI HOUSE BUILDING LIFTING & SHIFTING कंपनी।

अब मकान की ऊंचाई बढ़ाइए, बिना तोड़े-फोड़े

AZHARI कंपनी विशेष आधुनिक तकनीक का उपयोग करके बिल्डिंग को DPC (डैम्प प्रूफ कोर्स) लेवल से उठाने का कार्य करती है। इसमें न तो दीवारें टूटती हैं और न ही मकान को कोई नुकसान होता है। एक मंजिल से लेकर पांच मंजिल तक की बिल्डिंग को दीवारों सहित सुरक्षित रूप से उठाया और स्थानांतरित किया जा सकता है।

कंपनी का दावा है कि उनका काम पूरी तरह से 0% रिस्क और 100% गारंटी के साथ होता है। खास बात यह है कि ग्राहकों को कोर्ट एग्रीमेंट के साथ कार्य का आश्वासन भी दिया जाता है, जिससे विश्वास और पारदर्शिता बनी रहती है।

कंपनी की खासियतें

बिना दरार, बिना नुकसान के मकान को उठाना

सड़क से नीचे बने मकानों को रोड लेवल से ऊपर लाना

जलभराव, सीवेज और गंदे पानी की समस्या का स्थायी हल

मकान की सुंदरता और मूल्य में वृद्धि

पूरे भारत में सेवा उपलब्ध, चाहे आप किसी भी राज्य में हों

स्पेशलिस्ट : लेंटर बिल्डिंग लिफ्टिंग एण्ड शिफ्टिंग

0% रिस्क 100% गारण्टी कोर्ट एग्रीमेन्ट के साथ । मकान, दुकान व कोई भी बिल्डिंग एक मंजिल से पाँच मंजिल तक । D.P.C. Level से दीवारों सहित उठवाने के लिए सम्पर्क करें ।

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कंपनी ने अब तक सैकड़ों घरों को सफलतापूर्वक ऊपर उठाया है, जिससे न केवल उनका जलभराव दूर हुआ बल्कि मकानों की मजबूती और बाजार मूल्य में भी बढ़ोतरी हुई है।

जिला लखीमपुर खीरी समेत पूरे उत्तर प्रदेश में सेवा चालू

यदि आप भी अपने मकान को ऊपर उठवाकर बार-बार की जलभराव और गंदे पानी की समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो अब देरी मत कीजिए। तुरंत संपर्क करें और 100% कोर्ट गारंटी के साथ सुरक्षित सेवा का लाभ उठाएं।

नूरपुर पिनोनी में सड़क निर्माण के साथ नाले की मांग, प्रधान के इनकार से ग्रामीणों में रोष

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बदायूं/इस्लामनगर:
थाना इस्लामनगर के अंतर्गत आने वाले गांव नूरपुर पिनोनी अजीतपुर मड़िया में इन दिनों सड़क निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि सड़क के साथ नाले का निर्माण नहीं किया जा रहा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बार-बार मांग के बावजूद गांव के प्रधान राधेश्याम गिरी नाला निर्माण को लेकर आनाकानी कर रहे हैं।

गांव निवासी नरेंद्र पुत्र द्वारका ने वीडियो बयान के माध्यम से बताया कि सड़क के किनारे सरकारी जमीन मौजूद है, जहां आसानी से नाला बनाया जा सकता है, लेकिन कुछ स्थानीय रेवाड़ी लोग उस जमीन को नाले के लिए देने से मना कर रहे हैं, और प्रधान भी इस मामले में कोई ठोस पहल नहीं कर रहे हैं। इससे गंदा पानी सड़क पर बह रहा है और मल-मूत्र गांव में फैल रहा है।

निकासी न होने से गांव बना जलजमाव का केंद्र:
नाले की अनुपस्थिति के कारण गांव से पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है। खासकर रात के समय घरों में पानी भरने का खतरा बढ़ जाता है। मवेशियों के मल-मूत्र और गंदे पानी के कारण गांव में भारी गंदगी फैल रही है जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।

प्रशासन से लगाई गुहार:
ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि गांव की गंभीर समस्या को देखते हुए नाले का निर्माण शीघ्र कराया जाए। नरेंद्र ने कहा कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो यह समस्या पूरे गांव को बीमारियों की ओर धकेल देगी।

ग्रामीणों की मुख्य मांगें:

सड़क के साथ तत्काल नाला निर्माण किया जाए

सरकारी जमीन पर रेवाड़ी समुदाय द्वारा रोक को हटाया जाए

गांव की सफाई व्यवस्था नियमित रूप से कराई जाए

प्रधान राधेश्याम गिरी से जवाबदेही तय की जाए

10 साल साथ निभाया, अब रिश्ते से इनकार — महिला ने पति मनोज सिंह पर भावनात्मक शोषण, आर्थिक दोहन और डराने-धमकाने का लगाया आरोप”

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दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे सोडा बॉर्डर प्लॉट नंबर 57 में रहने वाली 32 वर्षीय सोनी ने अपने पति मनोज सिंह पर भावनात्मक शोषण, धोखा, आर्थिक दोहन और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मामला सिर्फ एक वैवाहिक झगड़ा नहीं, बल्कि एक महिला की अस्मिता, संघर्ष और उपेक्षा की गवाही है।

बचपन से ही संघर्षों में घिरी जिंदगी

शिकायतकर्ता सोनी ने बताया कि उसकी शादी बचपन में ही उसके जीजा से कर दी गई थी, लेकिन जब वह 22 साल की हुई, तो उसने वह रिश्ता स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मनोज सिंह से उसकी मुलाकात हुई और दोनों ने थाने की जानकारी में विवाह किया।

मनोज सिंह की पहली पत्नी भी उस वक्त थाने में मौजूद थी, यानी सब कुछ पारदर्शी और स्पष्ट रूप से हुआ था।

10 साल का साथ और विश्वासघात

सोनी ने मनोज के साथ 10 वर्षों तक वैवाहिक जीवन व्यतीत किया। वह बताती है कि:

“मैंने अपने पति को सब कुछ माना, उसे पत्नी की तरह अपनाया, साथ निभाया। जब वह कुछ नहीं कर रहा था, तब मैं दिल्ली में मजदूरी करके उसे चलाती रही। मैंने उसे मोबाइल फोन दिए, खर्चे उठाए, खाना बनाया और हमेशा उसके साथ रही।”

लेकिन अब वही मनोज सिंह कहता है:

“मैं अब अपनी पहली पत्नी और बच्चों के साथ रहूंगा, तेरे साथ नहीं।”

एकतरफा समझदारी और टूटा रिश्ता

सोनी कहती है कि उसने मनोज को सिर्फ एक पति ही नहीं, बल्कि अपने जीवन का सहारा माना। उसने अपनी मेहनत से न केवल रिश्ता निभाया बल्कि घर का हर खर्च उठाया।

“अब जब वो मुझे छोड़कर जा रहा है, तो मैं कहाँ जाऊं? मेरा क्या कसूर है?” — पीड़िता की आंखें भर आईं।

धमकियों से दबी आवाज़

मनोज सिंह केवल इनकार करके नहीं रुका, बल्कि उसने सोनी को धमकी दी कि:

“अगर मेरी पहली पत्नी थाने में मुकदमा कर देगी तो तुझे कौन बचाएगा? तेरा तो कोई नहीं है, मुझे तो कोई छुड़ा ही देगा।”

यह साफ तौर पर एक महिला को डराने, मानसिक रूप से तोड़ने और सामाजिक रूप से अलग-थलग करने की साजिश मानी जा सकती है।

सोनी की भावनात्मक अपील:

पीड़िता ने कहा:

“मैं अब भी यही चाहती हूँ कि मनोज सिंह मेरे साथ रहे। मैं नहीं चाहती कि उसे कोई सजा या नुकसान हो, लेकिन मैं अकेली नहीं जी सकती। मैंने अपना जीवन उसे सौंप दिया, अब वह मुंह मोड़ रहा है।”

सोनी की मांगें:

1. मनोज सिंह को उसके साथ वैवाहिक रूप से रहने के लिए कानूनी रूप से बाध्य किया जाए।

2. उसे पुलिस सुरक्षा, महिला आयोग की सहायता और सामाजिक सहयोग प्रदान किया जाए।

3. उसके द्वारा दिए गए आर्थिक सहयोग (जैसे मोबाइल, पैसे) की जांच हो और जवाबदेही तय की जाए।

4. प्रशासन और समाज मिलकर समझौते और सम्मानजनक समाधान का रास्ता निकालें।

 

पांच साल तक शादी का झांसा देकर बनाए संबंध, गर्भवती होने के बाद युवक ने किया इनकार — पीड़िता निशा तिवारी ने पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार”

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जौनपुर जिले के मछलीशहर क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां निशा तिवारी, उम्र 22 वर्ष, निवासी ग्राम कुंवरपुर, ने रोहित यादव पुत्र कृपाशंकर यादव, निवासी सोंगरा बीरबलपुर, पर शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने, जातिगत भेदभाव, गर्भवती करने, और पुलिस की मिलीभगत से बयान बदलवाने का गंभीर आरोप लगाया है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़िता निशा तिवारी ने पुलिस अधीक्षक जौनपुर को सौंपे प्रार्थना पत्र में बताया कि उसकी जान-पहचान रोहित यादव की बहन के ज़रिए हुई थी। कॉलेज के काम के दौरान रोहित की बहन अक्सर निशा को अपने भाई के फोन से कॉल करती थी। इसी माध्यम से रोहित यादव और निशा के बीच बातचीत शुरू हुई, जो बाद में प्यार में बदल गई।

रोहित ने निशा को शादी का वादा कर लंबे समय तक उसके साथ संबंध बनाए। इस रिश्ते को 5 वर्ष से अधिक हो गए, जिसमें रोहित लगातार शादी का झूठा भरोसा देता रहा। जब पीड़िता ने शादी की बात ज़ोर देकर दोहराई, तो रोहित और उसके परिवार ने जाति का बहाना बना कर शादी से इनकार कर दिया।

पीड़िता के अनुसार, रोहित के घरवालों — उसके पिता कृपाशंकर यादव, बड़े पिताजी लाल बहादुर, और छोटे चाचा राहुल — ने न सिर्फ शादी से इनकार किया बल्कि गाली-गलौज, धमकी और जातिगत अपमान भी किया। उन्होंने यह तक कहा, “जाओ जो करना है कर लो, पैसे देकर सब शांत करवा लेंगे।”

पुलिस कार्यशैली पर गंभीर आरोप

पीड़िता का आरोप है कि उसने 17 जुलाई 2025 को थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां भी उसे डराया गया और रोहित यादव व उसके परिवार की उपस्थिति में उसका बयान दबाव में बदलवा दिया गया। आरोप है कि रोहित के पिता और रिश्तेदारों ने कहा, “बयान बदल दो, हम शादी करवा देंगे।”

बयान बदलने के बाद भी जब शादी की बात आई, तो उन्होंने साफ कहा कि “अब शादी नहीं करेंगे, जो करना हो कर लो।”

गर्भवती होने का दावा

निशा तिवारी ने खुलासा किया है कि वह इस समय लगभग डेढ़ महीने की गर्भवती है। उसने प्रशासन से निवेदन किया है कि रोहित यादव से उसकी विवाह कराई जाए, ताकि उसके बच्चे को पिता का नाम और उसे समाज में सम्मान मिल सके।

दोबारा आवेदन देने पर पुलिस का रवैया

पीड़िता ने बताया कि 24 जुलाई को दोबारा आवेदन देने पर थाना पुलिस ने कहा कि “एक बार रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है, अब दोबारा नहीं हो सकती।” वहीं, निशा ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उसके सामने ही बार-बार बयान बदलवाने का दबाव बना रही है, जिससे न्याय मिलना और कठिन होता जा रहा है।

 

बीमार बेटे के इलाज के दौरान पति लापता, गोरखपुर की रितु देवी की पीड़ा: 2 साल से अनजान है इंद्रेश का कोई सुराग”

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले की रहने वाली रितु देवी, पति इंद्रेश चौहान की पिछले लगभग दो वर्षों से लापता होने की शिकायत लेकर दर-दर भटक रही हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि एक मां, एक पत्नी और एक जुझारू जीवन संगिनी की है, जो कैंसर पीड़ित बेटे के इलाज के बीच अपने पति को खो चुकी है।

बेटा ब्लड कैंसर से पीड़ित, पति अचानक गायब

रितु देवी बताती हैं:

“मेरा बेटा शिव, उम्र 8 साल, ब्लड कैंसर से पीड़ित है।
हम दोनों पति-पत्नी बेटे के इलाज के लिए लखनऊ मेडिकल कॉलेज आए थे।
लेकिन 12 अक्टूबर 2023 की सुबह, मेरे पति इंद्रेश हमें अस्पताल में छोड़कर कहीं चले गए, और तब से अब तक उनका कोई पता नहीं चला।”

FIR दर्ज, फिर भी सुराग नहीं

रितु देवी ने लखनऊ के नज़दीकी थाने में गुमशुदगी की FIR दर्ज करवाई, लेकिन

अब तक पुलिस या किसी एजेंसी से कोई ठोस मदद नहीं मिली

उन्होंने परिवार और रिश्तेदारों में भी पूरी खोजबीन की, लेकिन कोई जानकारी सामने नहीं आई

“दो साल से हर सुबह इस उम्मीद में उठती हूँ कि शायद आज उनके बारे में कोई खबर आए, लेकिन कुछ भी नहीं।”

चार छोटे बच्चों की ज़िम्मेदारी अकेले निभा रहीं रितु

रितु देवी के चार बच्चे हैं, जिनमें सबसे छोटा बेटा शिव कैंसर से जूझ रहा है

पति के लापता होने के बाद से घर की सारी ज़िम्मेदारी रितु के कंधों पर आ गई है

इलाज का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन – सब कुछ अकेले उठा रही हैं

“सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं, रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ लिया। अब कहां जाऊँ, किससे कहूँ?” — रितु देवी

अपील: लापता पति को खोजने और कानूनी कार्रवाई की मांग

रितु देवी की मांग है कि:

1. उनके पति इंद्रेश यादव की तलाश के लिए विशेष पुलिस टीम गठित की जाए

2. सभी रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, अस्पतालों और आश्रय स्थलों में उनकी फोटो प्रसारित की जाए

3. यदि कोई आपराधिक कारण या दबाव हो, तो उसकी निष्पक्ष जांच हो

4. सरकारी सहायता और बच्चों की चिकित्सा मदद भी उन्हें दी जाए

शिकायतकर्ता का विवरण

नाम: रितु देवी

उम्र: 35 वर्ष

पति: इंद्रेश चौहान (लापता)

पुत्र: शिव (8 वर्ष, कैंसर पीड़ित)

पता: ग्राम मानी राम मोयवपुर, थाना – मानीराम, जिला – गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

संवाददाता 8871022710

हम सबकी जिम्मेदारी है: एक माँ, एक पत्नी को न्याय दिलाना

रितु देवी जैसी महिलाओं की आवाज़ तब तक दबाई जाती है, जब तक समाज या प्रशासन उसे सुनने और समर्थन देने का निर्णय नहीं करता। यह सिर्फ एक गुमशुदगी का मामला नहीं, बल्कि एक परिवार के टूटते हुए हौसले और उम्मीदों की लड़ाई है।

यदि आपने इंद्रेश चौहान को देखा हो, या उनसे जुड़ी कोई जानकारी हो, तो कृपया निकटतम पुलिस स्टेशन या दिए गए नंबर पर संपर्क करें।

मनमानी कार्रवाई या प्रशासनिक अन्याय? भाजपा अल्पसंख्यक कार्यकर्ता अब्दुल वहीद के घर पर बुलडोज़र, न्यायिक आदेश की अवहेलना का आरोप

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बिना आदेश बुलडोज़र चला, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के कार्यकर्ता अब्दुल वहीद का मकान ध्वस्त

उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले के धौरापार अव्वल गांव में एक गंभीर मामला सामने आया है जहाँ नगर पंचायत मेहदावल पर न्यायिक आदेश की अवहेलना और राजनीतिक भेदभाव के आरोप लगे हैं। पीड़ित अब्दुल वहीद, जो भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं, ने आरोप लगाया है कि उनका पुश्तैनी मकान 25 जुलाई 2025 को बिना किसी वैध प्रशासनिक या न्यायिक आदेश के तोड़ दिया गया।

“यह सिर्फ मकान नहीं टूटा, हमारा विश्वास टूटा है” — अब्दुल वहीद

अब्दुल वहीद के अनुसार, उनका मकान उस भूमि पर बना था, जिसे वर्ष 2021 में उपजिलाधिकारी मंदावल द्वारा ‘आबादी घोषित’ किया जा चुका था। बावजूद इसके, नगर पंचायत मेहदावल ने अतिक्रमण बताकर नोटिस संख्या 15370/07111 जारी किया।

हालांकि, इस नोटिस के विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिका (PIL No. 10380/2005) दाखिल की गई, जिसमें 27 दिसंबर 2023 को न्यायालय द्वारा स्पष्ट ‘स्थगन आदेश’ (Stay Order) पारित किया गया। इसके अनुसार, जब तक न्यायालय से कोई अगला आदेश न हो, तब तक कोई भी निर्माण हटाया नहीं जा सकता।

इसके बावजूद, अब्दुल वहीद के अनुसार, 25 जुलाई को नगर पंचायत अधिकारी बिना नोटिस और बिना न्यायालय के किसी आदेश के, पुलिस बल के साथ आए और मकान का हिस्सा गिरा दिया।

“महिलाओं ने कोर्ट आदेश दिखाया, फिर भी बुलडोज़र नहीं रुका”

पीड़ित परिवार का आरोप है कि घर में मौजूद महिलाओं ने स्थगन आदेश की प्रतिलिपि दिखाकर विरोध किया, लेकिन न अधिकारियों ने कोई सुनवाई की, न पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई रोकी। इस घटना में घर का कीमती सामान टूट गया, और परिवार को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से गहरा नुकसान हुआ।

राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप

अब्दुल वहीद ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा: “मैं भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता हूँ, अल्पसंख्यक मोर्चा में जिम्मेदार भूमिका निभाता रहा हूँ। शायद यही मेरी सबसे बड़ी गलती बन गई। अधिकारीगण लगातार पूर्वग्रह से ग्रसित होकर मेरे घर को निशाना बना रहे हैं।”

उन्होंने दावा किया कि नगर पंचायत के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से उनके मकान को टारगेट किया गया, जबकि अन्य पक्ष – पिता दशरथ पुत्र संतोष और पिता हदीस पुत्र अजीज – जिनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें छेड़ा तक नहीं गया।

मकान पर दीवानी वाद लंबित, फिर भी कार्रवाई क्यों?

शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि ज़मीन को लेकर दीवानी न्यायालय में मुकदमा अभी भी लंबित है। ऐसे में नगर पंचायत द्वारा किसी प्रकार की एकतरफा तोड़फोड़ की कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।

यह भी सवाल उठता है कि जब मामला अदालत में है और स्टे ऑर्डर मौजूद है, तब क्या स्थानीय निकाय को ऐसा हस्तक्षेप करने का अधिकार है?

अब्दुल वहीद की प्रशासन से 5 मुख्य माँगें

1. नगर पंचायत मेहदावल के दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई हो

2. बिना आदेश बल प्रयोग करने वाले पुलिस कर्मियों की जांच हो

3. आर्थिक नुकसान की क्षतिपूर्ति दी जाए

4. न्यायालय के आदेश की अवहेलना की निष्पक्ष जांच कराई जाए

5. राजनीतिक और धार्मिक कारणों से उत्पीड़न न किया जाए

कानून और संविधान की खुली अवहेलना?

इस घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

क्या किसी स्थानीय निकाय को बिना कोर्ट आदेश नागरिक की संपत्ति तोड़ने का अधिकार है?

क्या राजनीतिक और धार्मिक पहचान किसी नागरिक को निशाना बनाए जाने का आधार बन सकती है?

क्या न्यायिक आदेश की खुलेआम अवहेलना “राज्य के कानून के राज” पर प्रश्नचिह्न नहीं है?

ध्रुव नारायण सिंह : रॉयल विरासत से जनसेवा तक का सफर, 66वां जन्मदिवस : रॉयल अंदाज में मना रहे उत्सव

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भोपाल, 26 जुलाई।
मध्य विधानसभा के पूर्व विधायक और भोपाल की राजनीति में रॉयल व्यक्तित्व के धनी ध्रुव नारायण सिंह का 66वां जन्मदिवस शनिवार को राजधानी में धूमधाम से मनाया गया। अरेरा कॉलोनी स्थित उनके निवास और विट्ठल मार्केट के 10 नंबर स्थित कार्यालय में सुबह से ही शुभकामनाओं का सिलसिला शुरू हो गया। कार्यकर्ता, वरिष्ठ नेता, पत्रकार, समाजसेवी और रिश्तेदार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। राजधानी समाचार के प्रधान संपादक नीरज विश्वकर्मा सहित कई पत्रकारों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई दी। ईखबर मीडिया टीम और अन्य समर्थक भी इस अवसर पर मौजूद थे। समारोह में बैंड-बाजे के साथ ‘डबल सिक्स’ का उल्लास देखा गया — जैसे क्रिकेट में सिक्स लगने पर खुशी होती है, वैसे ही जीवन के 66वें वर्ष का स्वागत हुआ।

राजनीतिक वंश और बाल्यकाल

ध्रुव नारायण सिंह का जन्म 26 जुलाई 1959 को मध्य प्रदेश के सतना जिले के रामपुर बघेलान में हुआ। वे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह के पुत्र और विंध्य प्रदेश के पहले प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री अवधेश प्रताप सिंह के पौत्र हैं। यह राजपूताना विरासत केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि जनसेवा और सामाजिक बदलाव की गहरी परंपरा से जुड़ी रही है।

शिक्षा और प्रारंभिक जीवन:
उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा एक अभिजात्य वातावरण में प्राप्त की। भले ही उनके शैक्षणिक विवरण सीमित सार्वजनिक रहे हों, परंतु बचपन से ही राजनीति, खेल और समाजसेवा में रुचि स्पष्ट रही। राजनीति में कदम रखने से पहले वे शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे।

राजनीति में पदार्पण और चुनावी जीत:
ध्रुव नारायण सिंह की राजनीति का पहला बड़ा पड़ाव 2008 का मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव था। उन्होंने भोपाल मध्य सीट से कांग्रेस नेता नासिर इस्लाम को हराकर जीत हासिल की। विधायक रहते हुए उन्होंने क्षेत्र में विकास, स्वच्छता, सड़क निर्माण और प्रशासनिक पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया।

व्यक्तित्व और रॉयल छवि:
ध्रुव नारायण सिंह का व्यक्तित्व उनकी शाही विरासत से प्रेरित है। सार्वजनिक मंचों पर उनका करिश्माई अंदाज, सुसंस्कृत वाणी और सहज आत्मविश्वास उन्हें भीड़ से अलग करता है। वे भोपाल डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, जो उनके खेल प्रेम और युवाओं को प्रोत्साहित करने की सोच को दर्शाता है।

उनके वक्तव्य हमेशा चर्चा में रहे

“सर्वमान्य नेता तो गांधीजी भी नहीं थे।”
यह बयान बताता है कि वे भीड़ के पीछे नहीं चलते, बल्कि स्वतंत्र विचारधारा के नेता हैं।

चुनौतियाँ और संघर्ष:
उनकी राजनीति में उतार‑चढ़ाव भी आए। 2011 में शहला मसूद हत्याकांड में उनका नाम आया, परंतु CBI की जांच में उन्हें क्लीन चिट मिली। इस दौर के कारण 2013 और 2018 में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, परंतु उन्होंने हार नहीं मानी।

2023 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पुनः भोपाल मध्य से उम्मीदवार बनाया। यह उनके संघर्ष, पार्टी में पुनः विश्वास और समर्थकों के मजबूत आधार का प्रमाण था।

सामाजिक सेवा और वर्तमान सक्रियता:
ध्रुव नारायण सिंह केवल चुनावी नेता नहीं हैं। वे खेल, शिक्षा, सामाजिक कार्य और पत्रकारिता संवाद में लगातार सक्रिय रहते हैं। उनके निवास और कार्यालय में हमेशा जनता का आना‑जाना लगा रहता है। हाल ही में उन्होंने अपने पिता गोविंद नारायण सिंह की जयंती पर भावुक शब्दों में श्रद्धांजलि दी, जिससे उनकी पारिवारिक आदर्शों के प्रति निष्ठा स्पष्ट होती है।

आज भी प्रासंगिक क्यों?
66 वर्ष की आयु में ध्रुव नारायण सिंह आज भी भोपाल की राजनीति में रॉयल चेहरा हैं। उनकी पारिवारिक विरासत, सादगीपूर्ण जीवनशैली, संघर्षों से उबरने की क्षमता और जनता से जुड़ाव उन्हें अलग पहचान देती है। चाहे वे विधायक पद पर हों या न हों, उनकी जनसंपर्क क्षमता, संवाद कौशल और विकास दृष्टि आज भी उन्हें प्रासंगिक बनाए हुए है।

ध्रुव नारायण सिंह का जीवन राजशाही परंपरा और जनसेवा का अद्भुत संगम है। उनके 66वें जन्मदिवस पर भोपाल और रीवा के लोगों ने जिस प्रकार से प्रेम और सम्मान प्रकट किया, वह उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है। आने वाले वर्षों में उनसे समाज और राजनीति के लिए और बड़े योगदान की अपेक्षा की जा रही है।

लेखक : दामोदर सिंह राजावत, वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक – ईखबर मीडिया

ध्रुव नारायण सिंह: भोपाल की रॉयल राजनीति की शान

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भोपाल (ईखबर संवाददाता): 26 जुलाई 1959 को सतना जिले के रामपुर बघेलान में जन्मे ध्रुव नारायण सिंह आज 66 वर्षीय हो गए हैं। उनकी जन्म‑भूमि ही उस राजपूताना विरासत की गूंज है जहाँ उनके पूर्वजों ने राजनीति और सामाजिक बदलाव में सशक्त योगदान दिया। उनके पिता गोविंद नारायण सिंह, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, और दादा अवधेश प्रताप सिंह, विंध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री, जैसे राजनैतिक स्तम्भ थे ।

ध्रुव सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अभिजात्य वातावरण में ली और राजनीति में कदम रखने से पहले शिक्षा के क्षेत्र में गहरी रुचि दिखाई। हालांकि शैक्षणिक विवरण सीमित उपलब्ध है, उनका रुख हमेशा जनसेवा‑उन्मुख रहा।

उनकी राजनीति की पहली बड़ी उपलब्धि 2008 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली। भोपाल मध्य सीट से उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी नासिर इस्लाम को हार कर जीत दर्ज की । इस कार्य‑काल में उन्होंने विकास, स्वच्छता और स्थानीय प्रशासन पर विशेष ध्यान दिया, जिससे क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता बनी।

व्यक्तित्व और राजशाही अंदाज की छवि

ध्रुव नारायण सिंह का व्यक्तित्व शाही और करिश्माई है। उनके सार्वजनिक उपस्थिति में सहज आत्मविश्वास, भव्यता और शिष्टाचार स्पष्ट दिखाई देता है। वे भोपाल डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, जो उनके समाजिक‑क्रिकेट प्रेम को दर्शाता है ।

राजनीतिक मंचों पर उनकी वाणी सुलझी और प्रभावी होती है। हाल ही में उन्होंने कहा था:

“सर्वमान्य नेता तो गांधीजी भी नहीं थे” — यह बयान यह दिखाता है कि वे अन्य नेताओं की तरह ओहदे का मोहताज नहीं, बल्कि अपने दम पर पहचान बनाने में विश्वास रखते हैं ।

ऐसे वक्तव्यों ने उन्हें विवादास्पद बनाने के साथ-साथ समर्थकों में चर्चा का विषय भी बनाया।

उन्होंने मीडिया से कहा था कि चुनाव प्रत्याशियों को काम करने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए, यही कारण रहा कि BJP ने 2023 विधानसभा के लिए उम्मीदवारों की घोषणा पहले कर दी थी ।

प्रशिक्षण, शिक्षण एवं जनस्वास्थ्य‑सेवा

ध्रुव सिंह का राजनीतिक सफर केवल चुनाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने शिक्षा, खेल और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाया। क्रिकेट प्रशासन में उनकी सक्रियता और Bhopal Division Cricket Association की अध्यक्षता यह स्पष्ट करती है कि वे युवा‑प्रोत्साहन और खेल संस्कृति को मजबूत करने के इच्छुक हैं ।

सामाजिक क्षेत्रों में, उन्होंने मीडिया और पत्रकारों से संवाद से यह संकेत भी दिया कि वे केवल निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक जनसंवाद व विकास चाहने वाले राजनेता हैं। उनके कार्यालय और निवास पर प्राप्त ताजा तस्वीरों से पता चलता है कि वे लगातार जनता के संपर्क में हैं ।

उनकी राजशाही विरासत उन्हें एक आदर्शवादी नेता बनाती है जो परंपरा से जुड़ा है, लेकिन आधुनिक राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेते है।

राजनीतिक सक्रियता और वर्तमान स्थिति

2008‑2013 तक विधायक रहने के बाद, ध्रुव सिंह को 2013 और 2018 में BJP ने टिकट नहीं दिया। पीछे वजह थी 2011 में शहला मसूद हत्याकांड में उनका नाम आए। जांच CBI को सौंप दी गई थी और प्रारंभिक जांच में प्रेम‑त्रिकोण की कहानी सामने आई, लेकिन बाद में CBI ने ध्रुव सिंह का नाम चार्जशीट में नहीं लिया यानी उन्हें कानूनी दृष्टि से क्लीन चिट मिली ।

इन कठिन वर्षों के बाद BJP ने 2023 के विधानसभा चुनाव में फिर से उन्हें भोपाल मध्य से उम्मीदवार बनाया, जिससे उनका राजनीतिक सितारा पुनः चमका ।

वर्तमान में वे BJP में सक्रिय हैं, एक्टिव लीडर, सोशल मीडिया एवं क्षेत्रीय गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने पूज्य पिता गोविंद नारायण सिंह की जयंती पर एक भावुक ट्वीट भी किया, जिसमें पिताजी की लोकसेवा और आदर्श जीवन की स्मृति ताजा की ।

66 वर्ष की आयु में ध्रुव नारायण सिंह एक प्रतिष्ठित, रॉयल परंपरा में पले‑बढ़े नेता के रूप में उभरकर आए हैं। राजनीति में संघर्ष और पुनरागमन की कहानी, उनका व्यक्तित्व, पारिवारिक विरासत और सक्रिय सामाजिक भूमिका मिलकर उन्हें भोपाल की राजनीति में एक विशिष्ट पहचान देते हैं। चाहे वे कभी विधायकी में न रहें, परंतु अभी भी पार्टी में उनकी सक्रियता, संवाद क्षमता और जनसेवा प्रेम उन्हें प्रासंगिक बनाए रखते हैं।

भोपाल मध्य के पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह का 66वां जन्मदिवस धूमधाम से मनाया गया

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भोपाल। मध्य विधानसभा के पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह का 66वां जन्मदिवस शनिवार को राजधानी में रॉयल अंदाज में मनाया गया। अरेरा कॉलोनी स्थित उनके निवास और विट्ठल मार्केट स्थित 10 नंबर कार्यालय में सुबह से ही बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। जन्मदिवस के मौके पर कार्यकर्ता, वरिष्ठ नेता, मित्र, रिश्तेदार, समाजसेवी और पत्रकार बड़ी संख्या में पहुंचकर शुभकामनाएं देते रहे।

ध्रुव नारायण सिंह का जन्म 26 जुलाई 1959 को सतना जिले के रामपुर बघेलान में हुआ था। वे पूर्व मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह के पुत्र और विंध्य प्रदेश के पहले प्रधानमंत्री अवधेश प्रताप सिंह के पौत्र हैं। ध्रुव नारायण सिंह भोपाल मध्य विधानसभा से विधायक रह चुके हैं और 2008 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस नेता नासिर इस्लाम को हराया था।

जन्मदिवस पर राजधानी और रीवा क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में लोग शुभकामनाएं देने पहुंचे। समारोह में सभी ने उन्हें दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।

राजधानी समाचार के प्रधान संपादक नीरज विश्वकर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई दी। वहीं, ईखबर मीडिया टीम और वरिष्ठ पत्रकार दामोदर सिंह राजावत ने भी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। समारोह के दौरान ध्रुव नारायण सिंह ने सभी से आत्मीय वार्तालाप कर आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में बैंड-बाजे के साथ उनका जन्मदिवस मनाया गया। जैसे क्रिकेट में सिक्स लगने पर विशेष खुशी होती है, वैसे ही उनके जीवन के 66वें वर्ष को ‘डबल सिक्स’ के रूप में उल्लासपूर्वक मनाया गया।