Saturday, July 11, 2026
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15 साल की गुरु-सेवा, फिर भी आश्रम से बेदखल: दिव्यांग शिष्य संतोष गिरी को ‘खंडित’ बताकर निकाला, आस्था और मानवता पर सवाल

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जोधपुर/सामराउ (राजस्थान)।
भारतीय सनातन परंपरा में गुरु की तन-मन से सेवा करने वाले शिष्य को जीवन भर संरक्षण और सम्मान का अधिकारी माना जाता है, लेकिन जोधपुर जिले के सामराऊ स्थित लाल गिरी जी के चोला आश्रम से सामने आया मामला इस मान्यता को झकझोर देने वाला है। दृष्टिहीन और हाथ-पैर से दिव्यांग संतोष गिरी के साथ कथित रूप से ऐसा अन्याय हुआ, जिसे लेकर साधु-संत समाज से लेकर ग्रामीणों में भी आक्रोश है।

प्रार्थी संतोष गिरी, गुरु श्री दिगंबर भैरव गिरी जी महाराज (श्री पंचधासनाम जूना अखाड़ा) के शिष्य हैं। संतोष गिरी वर्ष 2012 में गुरु स्थान लाल गुरु जी के चोला, सामराऊ आए थे। आंखों से अंधे और शारीरिक रूप से विकलांग होने के बावजूद उन्होंने 15 वर्षों तक अपने गुरु की निस्वार्थ सेवा की। आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए चाय बनाना, भोजन तैयार करना, रोटियां बनाना और दिन-रात गुरु की सेवा करना ही उनका जीवन बन गया था।

वर्ष 2016 के उज्जैन सिंहस्थ कुंभ में गुरु परंपरा के अनुसार संतोष गिरी का संस्कार हुआ। परंपरा के तहत उनके चाचा गुरु महंत श्री दौलत गिरी को सखी बनाया गया और गुरु महाराज ने संतोष गिरी को उनकी जिम्मेदारी में सौंपा, क्योंकि संतोष को दिखाने-समझाने का कार्य आवश्यक था। इसके बाद भी संतोष गिरी ने गुरु सेवा में कोई कमी नहीं आने दी।

साल 2025 के प्रयागराज महाकुंभ में गुरु श्री दिगंबर भैरव गिरी जी महाराज का शरीर पूर्ण हो गया। संतोष गिरी गुरु के पार्थिव शरीर के साथ प्रयागराज से उमराव पहुंचे। आरोप है कि उस दौरान दादा गुरु महंत अर्जुन गिरी, चाचा गुरु दौलत गिरी और साली गिरी सहित कई गुरु मूर्तियों के समक्ष यह कहा गया कि संतोष गिरी यहीं रहेगा, क्योंकि इसने सेवा की है और विकलांग होने के कारण इसकी जिम्मेदारी आश्रम की है।

इतना ही नहीं, वर्ष 2020 में बृहस्पति गिरी के हरिद्वार में हुए संस्कार के बाद स्वामी समाज के 42 गांवों में भी यह कहा गया कि संतोष गिरी को लाल गुरु जी के चोला में ही रहना है। तय हुआ कि बृहस्पति गिरी लाल गुरु जी की धोनी संभालेंगे और संतोष गिरी दोनों गुरु भाइयों के साथ रहेगा। लेकिन आरोप है कि बाद में गेवर जाखड़, लक्ष्मण जाखड़, लक्ष्मण साइन और तारपुरी स्वामी सहित उमराव गांव के कुछ तथाकथित लोगों ने आपसी सलाह कर संतोष गिरी को ‘खंडित’ बताकर आश्रम से बाहर कर दिया।

संतोष गिरी का कहना है कि वह 15 वर्षों तक उसी आश्रम में रहा, तब किसी को उसका विकलांग होना खंडित नहीं लगा। गुरु महाराज के शरीर पूर्ण होते ही उसे खंडित कहकर बाहर निकाल दिया गया। यह न सिर्फ गुरु परंपरा का अपमान है, बल्कि एक दिव्यांग के अधिकारों का खुला हनन भी है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु-सेवा करने वाले शिष्य का हक मारना गंभीर पाप माना जाता है। दिव्यांग व्यक्ति के साथ भेदभाव करना न केवल अमानवीय है, बल्कि समाज और धर्म—दोनों के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सवाल यह है कि क्या साधु-संतों की धरती पर सेवा, समर्पण और मानवता से बड़ा कोई स्वार्थ हो सकता है? और क्या संतोष गिरी जैसे दिव्यांग सेवक को न्याय मिलेगा, या उसकी आस्था की कीमत उसे दर-दर की ठोकरों से चुकानी पड़ेगी?

 

‘फिर से हिंदु बन जाओ…’, विवादों के बीच भजन सिंगर ने दे डाली एआर रहमान को सलाह, अब वायरल हुआ वीडियो

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एआर रहमान के इंटरव्यू के बाद मचे बवाल के बीच बॉलीवुड के भजन सिंगर ने भी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही वीडियो जारी कर एआर रहमान को फिर से हिंदु बन जाने की सलाह भी दी है।बॉलीवुड के सुपरस्टार म्यूजिक कंपोजर और सिंगर एआर रहमान बीते दिनों से अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि मुस्लिम होने की वजह से उन्हें कम्यूनल डिस्क्रिमिनेशन झेलना पड़ा है और उनके पास काम की कमी है। इस बयान पर खूब बवाल मचा और फिल्मी कलाकारों ने इसको लेकर प्रतिक्रिया भी दी है। अब भजन सिंगर अनूप जलोटा ने भी इसको लेकर प्रतिक्रिया दी है। अनूप जलोटा ने एक वीडियो शेयर किया है और एआर रहमान को सलाह देते हुए कहा कि फिर से हिंदु बन जाओ।
क्या बोले अनूप जलोटा?
एआर रहमान की मुस्लिम कॉन्ट्रोवर्सी को लेकर अनूप जलोटा ने एक वीडियो शेयर किया है जो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अनूप जलोटा ने कहा, ‘म्यूजिक डायरेक्टर एआर रहमान पहले हिंदू थे। उसके बाद उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया और बहुत काम किया, बहुत नाम कमाया, लोगों के दिलों में बहुत अच्छी जगह बनाई। लेकिन अगर उन्हें इस बात का विश्वास है कि हमारे देश में मुस्लिम होने की वजह से उनको फिल्म नहीं मिल रही है संगीत देने के लिए, तो फिर वो दोबारा हिंदू हो जाएंगे। तो उनको ये विश्वास होना चाहिए कि हिंदू होने के बाद, धर्म परिवर्तन हो जाने के बाद, उनको फिर से फिल्में मिलनी शुरू हो जाएंगी। यही तो उनका मतलब है। तो मेरी सलाह है कि वो हिंदू हो जाएं और फिर कोशिश करें कि उनको दोबारा फिल्में मिलती हैं या नहीं।’ अब अनूप जलोटा का ये वीडियो भी वायरल हो रहा है और लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
क्या बोले थे एआर रहमान?
एआर रहमान ने बीते दिनों बीबीसी एसियन नेटवर्क को इंटरव्यू दिया था। जिसमें उनसे सवाल पूछा गया था कि क्या आपको एक तमिल म्यूजिक कंपोजर होने के नाते आपको बॉलीवुड में कभी भेदभाव झेलना पड़ा। इसके जवाब में एआर रहमान ने कहा था, ‘शायद मुझे इसके बारे में कभी पता ही नहीं चला, शायद भगवान ने इसे छुपा रखा था, लेकिन मुझे इसका जरा भी एहसास नहीं हुआ। पिछले आठ सालों में शायद सत्ता परिवर्तन हुआ है और अब सत्ता उन लोगों के हाथ में है जो रचनात्मक नहीं हैं। यह सांप्रदायिक मुद्दा भी हो सकता है। लेकिन यह मेरे सामने जाहिर नहीं है।’ इस बयान के बाद एआर रहमान को काफी ट्रोल किया गया था और इसके बाद उन्होंने माफी भी मांगी थी। एआर रहमान ने कहा था, ‘संगीत हमेशा से हमारी संस्कृति से जुड़ने, उसका जश्न मनाने और उसका सम्मान करने का मेरा जरिया रहा है। भारत मेरी प्रेरणा, मेरा गुरु और मेरा घर है। मैं समझता हूं कि कभी-कभी इरादों को गलत समझा जा सकता है। लेकिन मेरा उद्देश्य हमेशा संगीत के माध्यम से उत्थान, सम्मान और सेवा करना रहा है। मैंने कभी किसी को ठेस पहुंचाने की इच्छा नहीं रखी, और मुझे उम्मीद है कि मेरी ईमानदारी महसूस की जाएगी।’

राहुल गांधी को मिला खास गिफ्ट, रायबरेली में एक परिवार ने दिया दादा फिरोज गांधी का ड्राइविंग लाइसेंस,

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रायबरेली की यात्रा पर पहुंचे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को खास गिफ्ट मिला। रायबरेली में एक परिवार ने राहुल गांधी को उनके दादा फिरोज गांधी का ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा है।कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी अपने लोकसभा क्षेत्र रायबरेली के दौरे पर हैं। यहां उन्होंने कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। राहुल गांधी को जिले में एक खास गिफ्ट भी मिला है जिसे देखकर वह भावुक हो गए। एक कार्यक्रम के दौरान रायबरेली पहुंचे राहुल गांधी को यहां के एक परिवार ने उनके दादा फिरोज गांधी का ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा। बताया जा रहा है कि यह परिवार इस नायाब निशानी को सहेज कर रखे था और आज जब उन्होंने इसे राहुल गांधी को सौंपा तो वह भी भावुक हो गए। राहुल ने तुरंत उसकी फोटो खींचकर मां सोनिया गांधी को व्हाट्सऐप के जरिये भेज दिया।
भावुक नजर आये राहुल गांधी
दरअसल राहुल गांधी भुएमऊ गेस्ट हाउस से यहाँ आईटीआई के पास स्थित राजीव गाँधी स्टेडियम में रायबरेली प्रीमिअर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करने पहुंचे थे। उसी दौरान एक परिवार ने मंच पर पहुंच कर उनके खानादान की यह विरासत उन्हें सौंपी। इस दौरान राहुल गांधी काफी भावुक नजर आये और काफ़ी देर तक लाइसेंस को उलट पलट कर देखते रहे। इस दौरान राहुल गांधी के साथ मंच साझा कर रहे अमेठी सांसद किशोरी लाल शर्मा ने इस बात की पुष्टि की हैराहुल गांधी ने किया क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन
राहुल गांधी ने जिले में राजीव गांधी स्टेडियम में यूथ स्पोर्ट्स एकेडमी द्वारा आयोजित रायबरेली प्रीमियर लीग टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन किया। इस दौरान राहुल गांधी जी ने क्रिकेट टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली टीमों और उनके खिलाड़ियों से भी मुलाक़ात की।
मनरेगा चौपाल में जनसभा
इसके अलावा राहुल गांधी ने जिले में ‘मनरेगा चौपाल’ में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं- गरीब मजदूरों का स्वाभिमान है, उनके रोजगार का अधिकार है। हम इसे किसी भी कीमत पर तबाह नहीं होने देंगे।

कानपुर नगर में जमीन विवाद का हाईकोर्ट तक सफर, एफआईआर रद्द करने से इनकार, पुलिस जांच में निकला राजस्व विवाद

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कानपुर नगर।
जमीन के एक पुराने विवाद ने कानपुर नगर में ऐसा तूल पकड़ा कि मामला थाने से निकलकर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया। अलग–अलग याचिकाओं, एफआईआर, आईजीआरएस शिकायत और पुलिस जांच के बाद पूरा मामला एक बार फिर राजस्व न्यायालय के पाले में जाता दिखाई दे रहा है। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि गंभीर आरोपों वाली एफआईआर को शुरुआती स्तर पर रद्द नहीं किया जा सकता, जबकि स्थानीय पुलिस जांच में इसे दीवानी/राजस्व विवाद मानते हुए आपराधिक कार्रवाई की जरूरत से इनकार किया गया है।

एफआईआर रद्द करने की मांग पर हाईकोर्ट की सख्ती

इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा शामिल थे, ने क्रिमिनल मिस. रिट पिटीशन संख्या 6198/2022 में दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में 12 अक्टूबर 2021 को दर्ज एफआईआर (केस क्राइम संख्या 0333/2021) को रद्द करने की मांग की गई थी।
एफआईआर में आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 504 और 506 जैसे गंभीर आरोप दर्ज थे। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि वे खुद धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं और किसी ने जमीन के असली मालिक का रूप धारण कर फर्जी तरीके से एग्रीमेंट टू सेल कराया।

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की दलीलें उनका बचाव हैं, जिनकी सत्यता जांच के दौरान तय होगी। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एफआईआर में संज्ञेय अपराध बनते हैं और इस स्तर पर जांच रोकना या एफआईआर रद्द करना पूरी तरह गलत होगा। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को जमानत या अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने की छूट जरूर दी।

अनुच्छेद 227 की याचिका, नोटिस जारी

इसी सिलसिले में एक अन्य मामला मैटर्स अंडर आर्टिकल 227 संख्या 10199/2022 के रूप में सामने आया, जिसमें सुधीर सिंह ने राज्य सरकार सहित अन्य के खिलाफ याचिका दायर की। न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह विपक्षी पक्षों को नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया पूरी करे। मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी 2023 को तय की गई।

आईजीआरएस शिकायत और पुलिस जांच का बड़ा खुलासा

इस पूरे विवाद का एक और अहम पहलू आईजीआरएस शिकायत के जरिए सामने आया। सुधीर सिंह निवासी ग्राम कुल्हौली, थाना बिधनू, कानपुर नगर ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। जांच उपनिरीक्षक सौरभ कुमार ने 13 दिसंबर को मौके पर जाकर जांच की।

पुलिस रिपोर्ट में चौंकाने वाला निष्कर्ष सामने आया। जांच में पाया गया कि शिकायतकर्ता और उसके पड़ोसी राजेंद्र पुत्र जगवंत सिंह के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। खुद शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उसके वकील के अनुसार यह मामला राजस्व विभाग या न्यायालय से जुड़ा है और इसका निस्तारण वहीं से होना चाहिए।

सबसे अहम बात यह रही कि शिकायतकर्ता ने लिखित रूप में पुलिस कार्रवाई न चाहने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा कि किसी भी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती।

कानूनी पेच में उलझा जमीन विवाद

एक तरफ हाईकोर्ट ने गंभीर धाराओं वाली एफआईआर को जांच योग्य मानते हुए रद्द करने से इनकार कर दिया, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पुलिस जांच में इसे शुद्ध रूप से राजस्व विवाद मान लिया गया। ऐसे में यह मामला कानून के कई मोर्चों पर उलझता नजर आ रहा है।

जानकारों की मानें तो जमीन विवादों में आपराधिक धाराएं जोड़ने और फिर राजस्व विवाद बताकर पीछे हटने का यह चलन लगातार बढ़ रहा है। इससे न सिर्फ न्याय व्यवस्था पर दबाव पड़ता है, बल्कि असली पीड़ित को भी वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

अब आगे क्या?

फिलहाल यह मामला राजस्व न्यायालय और आपराधिक जांच के बीच झूलता हुआ दिख रहा है। हाईकोर्ट के रुख के बाद एफआईआर पर जांच जारी रह सकती है, जबकि पुलिस की रिपोर्ट दीवानी विवाद की ओर इशारा कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच एजेंसियां और अदालतें इस पेचीदा जमीन विवाद को किस दिशा में ले जाती हैं।

समस्तीपुर की काजल अग्रवाल सोशल मीडिया से नई पहचान बनाने की जिद, मेहनत से छूना चाहती हैं नई ऊंचाइयां

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समस्तीपुर:
नमस्कार दोस्तों, ई खबर में आपका स्वागत है। आज हम आपको समस्तीपुर जिले के परवाना गाँव की रहने वाली 18 वर्षीय काजल अग्रवाल की प्रेरणादायक कहानी बताने जा रहे हैं, जो सोशल मीडिया के जरिए अपनी मेहनत और हुनर के दम पर आगे बढ़ने का सपना देख रही हैं।
साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली काजल अग्रवाल ने कठिन हालातों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। आज वह सोशल मीडिया पर तेजी से पहचान बना रही हैं और लोग उन्हें प्यार से “सोशल मीडिया क्वीन” कहकर भी पुकारने लगे हैं।
2024 में शुरू हुआ सफर, अब बन रही हैं उभरता चेहरा
काजल अग्रवाल बताती हैं कि उनके सपने हमेशा बड़े रहे हैं, लेकिन परिस्थितियां कई बार रास्ता रोकती रहीं। इसी बीच उन्होंने 2024 में इंस्टाग्राम पर कदम रखा। शुरुआत में यह केवल एक शौक था, लेकिन लगातार मेहनत, नए-नए कंटेंट और दर्शकों के प्यार ने उन्हें एक नई पहचान दिलानी शुरू कर दी।
आज काजल का नाम सोशल मीडिया की दुनिया में तेजी से उभर रहा है और वह लगातार अपनी कला व क्रिएटिविटी के जरिए लोगों का दिल जीत रही हैं।
प्रोफाइल डिटेल से बढ़ रही लोकप्रियता
काजल अग्रवाल के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर लोगों का प्यार साफ नजर आता है।
काजल अग्रवाल (प्रोफाइल डिटेल)
16 पोस्ट
1,326 फॉलोअर्स
14 फॉलोइंग
उनके कंटेंट को लगातार लोग पसंद कर रहे हैं और उन्हें सहयोग भी मिल रहा है।
काजल का संदेश: “सपने देखो और उन्हें पूरा करो”
काजल अग्रवाल का कहना है कि सोशल मीडिया उनके लिए सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव और आत्मनिर्भर बनने का माध्यम है।
वह चाहती हैं कि लोग उनके वीडियो को ज्यादा से ज्यादा देखें और शेयर करें, ताकि वह अपने परिवार को आर्थिक मजबूती दे सकें।
काजल का कहना है—
“अगर सपने देखने की हिम्मत हो और मेहनत करने का जज्बा, तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।”
परिवार के लिए संघर्ष
काजल अग्रवाल बताती हैं कि उनके टिंकू मंडल और माता मीना देवी ने हर कदम पर उनका साथ दिया। वह अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं।
कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद काजल हार मानने वालों में से नहीं हैं। वह चाहती हैं कि लोग उनके कंटेंट को देखकर उनका हौसला बढ़ाएं और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दें।
गरीबों के लिए मिसाल बनना चाहती हैं काजल
काजल अग्रवाल का सपना है कि वह अपनी सफलता के जरिए उन लोगों को प्रेरित करें, जो गरीबी और कठिनाइयों के कारण अपने सपनों को दबा देते हैं। उनका मानना है कि सही दिशा में मेहनत की जाए तो कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी बदल सकता है।
समाज के लिए बन रही हैं प्रेरणा
काजल अग्रवाल की कहानी यह साबित करती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता उन्हीं को मिलती है जो मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं। आज काजल न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बनती जा रही हैं।
दोस्तों, यह थी समस्तीपुर की काजल अग्रवाल की प्रेरणादायक कहानी। हमें उम्मीद है कि उनकी यह यात्रा आपको भी अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा देगी।
अगर आपको यह खबर पसंद आई हो तो इसे शेयर करें और काजल अग्रवाल के इंस्टाग्राम को फॉलो करें!

BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन का पहला भाषण, जानें क्या कहा

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बीजेपी के नव निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पीएम मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हम जैसे साधारण कार्यकर्ताओं ने हमेशा दूर से देखा है कि आप राष्ट्र सेवा के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद नितिन नबीन ने अपने पहले भाषण में कहा कि आज सबसे पहले मैं आप सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। आपने मुझ जैसे एक साधारण कार्यकर्ता को पार्टी के इस सर्वोच्च पद तक पहुंचने का अवसर दिया है, और इसके लिए मैं आप सभी को नमन करता हूं। प्रधानमंत्री जी, मैं आपका भी हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं, क्योंकि हम जैसे साधारण कार्यकर्ताओं ने हमेशा दूर से देखा है कि आप राष्ट्र सेवा के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
सद्भावना मिशन कार्यक्रम को किया याद
उन्होंने कहा, “मुझे याद है जब मैंने पहली बार गुजरात के आनंद में आपके साथ एक कार्यक्रम में भाग लिया था। उस समय मैं राष्ट्रीय महासचिव था और मैंने सद्भावना मिशन कार्यक्रम के दौरान आपको प्रत्येक व्यक्ति की बात ध्यान से सुनते हुए देखा था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद, जब आपने अपने ग्रीन रूम में हमसे बात की, तो आपने बड़ी भावुकता से समझाया कि गुजरात से इतने सारे लोग क्यों आए थे… उस दिन मुझे समझ आया कि एक व्यक्ति तभी महान बनता है जब वह जनता की भावनाओं से जुड़ता है।”
उन्होंने कहा, “आज का क्षण मेरे लिए संकल्प का क्षण है। आज मैं केवल पदभार ग्रहण नहीं कर रहा हूं। मैं इस पार्टी की विचारधारा, परंपराओं और राष्ट्रवादी आंदोलन की जिम्मेदारी को स्वीकार कर रहा हूं, और इस अवसर पर मैं अपने सभी वरिष्ठ सहयोगियों को भी नमन करता हूं…आज 14 करोड़ भारतीय एक विकसित भारत के सपने से जुड़ रहे हैं और देश को आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।”विपक्षी दलों पर बोला तीखा हमला
नितिन नबीन ने कहा, “हाल ही में हमने देखा कि कैसे विपक्षी दलों ने तमिलनाडु की एक पहाड़ी पर पवित्र कार्तिकई दीपम उत्सव को रोकने की कोशिश की। यह इकलौती घटना नहीं है; विपक्ष ने अन्य चीजों को रोकने के लिए भी साजिशें रची हैं। हमने हाल ही में देखा कि कैसे एक न्यायाधीश पर महाभियोग चलाने का प्रयास किया गया। आज जब हम सोमनाथ की बात करते हैं और इस गौरवशाली उत्सव को मनाने की कोशिश करते हैं, तो विपक्षी दलों के लोग असहज महसूस करते हैं। हमारा मानना ​​है कि ऐसी परंपराओं को रोकने की कोशिश करने वाली ताकतों का सामना करना आवश्यक है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि राम सेतु के अस्तित्व को नकारने वाले और कार्तिकई दीपम उत्सव का विरोध करने वालों का भारतीय राजनीति में कोई स्थान न हो।”
बीजेपी के नए चुने गए नेशनल प्रेसिडेंट नितिन नवीन ने कहा, “अगले कुछ महीनों में तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी में चुनाव होने वाले हैं, और इन राज्यों की आबादी पर काफी चर्चा हो रही है। बदलती आबादी वहां की स्थिति को बदल रही है, और यह हमारे लिए एक चुनौती है। हालांकि, हमें पूरा भरोसा है कि बीजेपी कार्यकर्ता अपनी मेहनत और संघर्ष से बीजेपी को इन पांचों राज्यों में सफलता दिलाएंगे।”

सरकारी जमीन पर बड़ा कब्जा! इटवा तहसील के मधुबेनिया गांव में 10 बीघा भूमि पर अवैध निर्माण, प्रशासन मौन

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सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील अंतर्गत ग्राम मधुबेनिया में सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में करीब 10 बीघा सरकारी भूमि पर मंदिर और मदरसा बनाए जाने के साथ-साथ कई लोगों द्वारा मकान खड़े कर लेने का आरोप है। बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल पूर्व प्रधान के संरक्षण और सहयोग से किया गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार गांव के पुराने पोखरे के बगल में और काली जी के स्थान से सटी सरकारी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। आरोप है कि इस भूमि पर बिना किसी वैध अनुमति के धार्मिक ढांचे और आवासीय निर्माण कर लिए गए हैं। जिन लोगों पर सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया है, उनमें लवकुश, शिवदत्त, शल्लू, साधु, सलीम, साधु चांद अली, रमजान और कल्लू चमार के नाम सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी ने पूर्व प्रधान के सहयोग से सरकारी भूमि पर अवैध रूप से घर बना लिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ग्रामीणों द्वारा अक्टूबर 2025 में जिला अधिकारी सिद्धार्थनगर को लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया था। प्रार्थना पत्र में पूरे मामले की जानकारी देते हुए अवैध कब्जा हटवाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके बावजूद अब तक न तो किसी प्रकार की जांच हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई देखने को मिली है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की चुप्पी के कारण अवैध कब्जाधारियों के हौसले और बढ़ गए हैं। सरकारी जमीन पर खुलेआम निर्माण जारी है और गांव की सार्वजनिक संपत्ति धीरे-धीरे निजी कब्जे में जाती जा रही है। इससे गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और भविष्य में किसी बड़े विवाद की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकारी जमीनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है। यदि समय रहते प्रशासन सख्त कदम नहीं उठाता तो सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे का यह चलन और भी तेजी से बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध कब्जे तत्काल हटवाए जाएं और दोषी व्यक्तियों व संरक्षण देने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

नितिन नबीन को पीएम मोदी ने बताया अपना बॉस, जानिए कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने क्या-क्या कहा

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नितिन नबीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया है। पीएम मोदी ने उन्हें बधाई भी दी। पीएम मोदी अब मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने नितिन नबीन को अपना बॉस कहा।नई दिल्ली: नितिन नबीन को भाजपा का 12वां राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। आज बीजेपी के मुख्यालय में उनके नाम का आधिकारिक ऐलान किया गया। नितिन नबीन बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जिनकी उम्र 45 साल है। इस अवसर पर पीएम मोदी सहित बीजेपी के कई नेता मंच पर मौजूद रहे। पीएम मोदी ने नितिन नबीन को बधाई भी दी। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि नितिन नबीन जी को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल का अध्यक्ष चुने जाने पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। कई महीनों से संगठन पर्व यानि पार्टी का छोटी सी इकाई से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने तक की प्रक्रिया लोकतांत्रित तरीके से भाजपा के संविधान के तरीकों और उसमें बताई गई हर बात ध्यान में रखकर लगातार चल रही थी। आज उसका विधिपूर्वक समापन हुआ। मैं देशभर के कार्यकर्ताओं को इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए अभिनंदन करता हूं।
‘BJP के सभी पूर्व अध्यक्षों को अभिनंदन’
पीएम मोदी ने कहा, “बीते एक डेढ़ वर्षों में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती, अटल जी की 100वीं जन्म जयंती, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 वर्ष, ऐसे महापर्व हम मनाते रहे हैं। ये वे प्रेरणाएं हैं, जो देश के लिए जीने के हमारे संकल्प को और मजबूत करती हैं। हमारा नेतृत्व परंपरा से चलता है, अनुभव से समृद्ध होता है और जनसेवा-राष्ट्रसेवा के भाव से संगठन को आगे बढ़ाता है। केंद्र में लगातार तीसरी बार भाजपा-एनडीए की सरकार बनी। मैं भाजपा के सभी पूर्व अध्यक्षों का बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। आप जानते हैं आज भाजपा का जितना फोकस संगठन के विस्तार पर है, उतनी ही बड़ी प्राथमिकता कार्यकर्ता के निर्माण की भी है।”
‘शून्य से लेकर शिखर तक का सफर देखा’
पीएम मोदी ने आगे कहा, “अटल जी, आडवाणी जी और मुरली मनोहर जोशी जी के नेतृत्व में भाजपा ने शून्य से लेकर शिखर तक का सफर देखा है। इस सफर में वेंकैया नायडू जी और नितिन गडकरी जी सहित हमारे कई वरिष्ठ साथियों ने संगठन को विस्तार दिया। राजनाथ जी के नेतृत्व में पहली बार भाजपा ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया। फिर अमित भाई के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में भाजपा की सरकारें बनीं और लगातार दूसरी बार केंद्र में भाजपा की सरकार बनी। फिर जेपी नड्डा जी के नेतृत्व में भाजपा पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक और सशक्त हुई और लगातार तीसरी बार केंद्र में भाजपा की सरकार बनी। मैं भाजपा के पूर्व के सभी अध्यक्षों का बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।”
नितिन नबीन मेरे बॉस’
पीएम मोदी ने कहा, “लोगों को लगता होगा, नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, 50 साल की छोटी आयु में मुख्यमंत्री बन गए। 25 साल ये लगातार Head of the Government रहे हैं। ये सब अपनी जगह है, लेकिन इन सबसे भी बड़ी चीज मेरे जीवन में है, मैं भाजपा का कार्यकर्ता हूं। ये सबसे बड़ा गर्व है। नितिन नबीन जी, मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं और वह मेरे बॉस हैं। नितिन नबीन जी हम सभी के अध्यक्ष हैं। उनका दायित्व सिर्फ भाजपा को संभालना नहीं है, उन्हें एनडीए के साथियों के साथ भी सामंजस्य बनाना है। नितिन जी ने जब जो जिम्मेदारी मिली, तब उन्होंने अपने आप को साबित किया। इस साल जनसंघ की स्थापना के 75 साल पूरे हो रहे हैं। जनसंघ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने जो भी बलिदान दिए है, उनको मैं नमन करता हूं।”
‘अगले 25 साल महत्वपूर्ण’
पीएम मोदी ने कहा, “अगले 25 साल बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह वह समय है जब एक विकसित भारत का निर्माण होना है, और यह होकर रहेगा। इस महत्वपूर्ण दौर की शुरुआत में, हमारे नितिन नवीन जी बीजेपी की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। आज के युवाओं की भाषा में कहें तो नितिन जी खुद एक तरह से मिलेनियल हैं। वह उस पीढ़ी के हैं जिसने भारत में बड़े आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी बदलाव देखे हैं। वह उस पीढ़ी के हैं जिसने बचपन में रेडियो से जानकारी हासिल की और अब AI के एक्टिव यूजर हैं। नितिन जी में युवा जोश और संगठन के काम का लंबा अनुभव दोनों हैं। यह हमारी पार्टी के हर कार्यकर्ता के लिए बहुत फायदेमंद होगा।”
‘बीजेपी एक संस्कृति है’
उन्होंने कहा, “बीजेपी एक संस्कृति है। बीजेपी एक परिवार है। यहां हमारे रिश्ते सिर्फ़ मेंबरशिप से कहीं ज़्यादा हैं। बीजेपी एक परंपरा है जो प्रोसेस से चलती है, पद से नहीं। हमारे अध्यक्ष बदलते हैं, लेकिन हमारे आदर्श नहीं बदलते। लीडरशिप बदलती है, लेकिन दिशा वही रहती है। बीजेपी की भावना राष्ट्रीय है, क्योंकि हमारा जुड़ाव लोकल है। हमारी जड़ें ज़मीन में गहरी हैं। इसीलिए बीजेपी क्षेत्रीय आकांक्षाओं के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म देती है। यह उन्हें राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं की नींव बनाती है, और इसीलिए आज देश के हर कोने से लोग बीजेपी के साथ हैं, बीजेपी में शामिल हो रहे हैं, और सिर्फ़ इतना ही नहीं, जो भी अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करना चाहता है, उसे बीजेपी में एंट्री पॉइंट सबसे अच्छा और सुरक्षित ऑप्शन लगता है।”
‘अपने सामर्थ्य से बनाई सरकार’
कई बार हमने देखा है कि लंबे समय के बाद सरकार का सत्ता में बने रहना मुश्किल हो जाता है। लेकिन भाजपा ने इस चलन को तोड़ दिया है। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश या बिहार, कई राज्यों में भाजपा ने भारी बहुमत से चुनाव जीते हैं। चुनावों में भाजपा की जीत का रिकॉर्ड अभूतपूर्व है। अगर बीते 11 वर्षों की ही बात करें तो भाजपा की यात्रा जनविश्वास अर्जित करने की अद्भुत यात्रा रही है। बीते 11 वर्षों में भाजपा ने हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा में पहली बार अपने सामर्थ्य से सरकार बनाई। पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में भाजपा जनता की एक बड़ी आवाज बनकर उभरी है।जनता का भरोसा हुआ मजबूत’
पीएम मोदी ने कहा कि लोगों की सेवा हमेशा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है। हमने सत्ता को मौज-मस्ती का ज़रिया नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बनाया है, और इसलिए बीते डेढ़-दो वर्षों में भाजपा पर जनता का भरोसा और मजबूत हुआ है। विधानसभा हो या स्थानीय निकाय, भाजपा की स्ट्राइक रेट अभूतपूर्व रही है। इस दौरान देश में 6 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, इनमें से 4 चुनाव भाजपा-एनडीए ने जीते हैं। आज भाजपा सिर्फ संसद और विधानसभा की ही नहीं, बल्कि नगरपालिकाओं और नगर निगमों में भी पहली पसंद है। इसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र है। भाजपा, महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों में नंबर वन पार्टी बनी है। कुल 29 में से 25 बड़े शहरों की जनता ने भाजपा-एनडीए को चुना है। कुल जितने पार्षद जीते हैं, उनमें से 50 प्रतिशत भाजपा के हैं। ऐसे ही केरल में भाजपा के करीब 100 पार्षद हैं। ऐसे ही तिरुवनंतपुरम की जनता ने मेयर चुनाव में 45 साल बाद लेफ्ट से सत्ता छीनी और भाजपा पर भरोसा किया।

‘भाजपा सुशासन की पार्टी’
पीएम ने आगे कहा, “कभी भाजपा ने एक अलग तरह की पार्टी के रूप में अपनी यात्रा शुरु की थी। आज भाजपा सुशासन की पार्टी भी है। देश ने आजादी के बाद शासन के अलग-अलग मॉडल देखे हैं, कांग्रेस के परिवारवाद का मॉडल, लेफ्ट का मॉडल, क्षेत्रीय दलों का मॉडल, अस्थिर सरकारों का दौर, लेकिन आज देश, स्थिरता, सुशासन और संवेदनशीलता वाला भाजपा का विकास मॉडल देख रहा है। बीते वर्षों में जनविश्वास की जो पूंजी हमने अर्जित की है, उस भरोसे को कायम रखना बहुत बड़ी जरूरत है। देश की जनता 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए संकल्पित है। इसलिए बीते 11 वर्षों में हमने जो रिफॉर्म की यात्रा शुरू की है, वह रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुकी है।”‘सामाजिक न्याय को जमीन पर उतारा’
पीएम मोदी ने कहा कि ये भाजपा ही है जिसने सामाजिक न्याय के नारे को सच्चे स्वरूप में जमीन पर उतारा है। हमने गरीब कल्याण की योजनाओं को सरकारी फाइलों से निकालकर गरीब के घर तक पहुंचाया है। आजादी के 70 वर्ष बाद सिर्फ तीन करोड़ ग्रामीण परिवारों तक ही पाइप से पानी पहुंच पाया था। माताओं बहनों की पीड़ा, पानी के लिए उनके संघर्ष की सुध लेने वाला कोई नहीं था। वो दर्द मैंने देखा है। मैं धरती की सच्चाई से जुड़ा था। माताओं-बहनों की पीड़ा, अपनी आंखों के सामने देखी थी और तब हम ‘जल जीवन मिशन’ लेकर आए हैं। सिर्फ 5-6 साल में 12 करोड़ से ज्यादा परिवारों को नल से जल की सुविधा से जोड़ा गया है। ये हमारी सरकार है, जिसने धुएं से बीमार होती बहनों की पीड़ा समझी वरना पहले तो LPG गैस को भी अमीरों का सौभाग्य मान लिया गया था। भाजपा ने पूरी संवेदनशीलता से साथ हर घर को LPG से जोड़ने का अभियान चलाया। ऐसे ही गांव की बहनों को लखपति दीदी बनाने का अभियान है। ये भी इसलिए संभव हो पाया क्योंकि भाजपा बहनों-बेटियों के सपनों के प्रति संवेदनशील है। दशकों तक आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक से जोड़कर देखा गया, लेकिन संवेदनशील भाजपा ने, भाजपा के हमारे संस्कारों ने, समाज के प्रति समान भाव के हमारी परंपरा के कारण हमने आदिवासियों में भी सबसे पिछड़ी जनजातियों की पीड़ा को समझा और उनके विकास के लिए PM-जनमन योजना बनाईखुद से बड़ा दल और दल से बड़ा देश’
उन्होंने कहा, “हम वो लोग हैं, हमारा वो चरित्र है, हमारे वो संस्कार हैं… खुद से बड़ा दल और दल से बड़ा देश। ये भाजपा के हर कार्यकर्ता का संस्कार है, भाजपा के हर कार्यकर्ता का जीवनमंत्र है। इसी भाव के साथ बीते 11 वर्षों में हमने अनेक चुनौतियों पर विजय पाई है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की दीवार गिराना हो या तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाना हो, इनको कभी असंभव माना जाता था, आज ये हकीकत बन चुके हैं। आगे भी हमें हर चुनौती का पूरे सामर्थ्य से सामना करना है। आज देश के सामने बहुत बड़ी चुनौती घुसपैठियों की है। दुनिया के समर्थ देश भी अपने देश में घुसपैठियों की जांच पड़ताल कर रहे हैं और उनको पकड़-पकड़ कर निकाल रहे हैं। दुनिया में कोई अपने देश में घुसपैठियों को स्वीकार नहीं करता, भारत भी घुसपैठियों को अपने गरीबों, युवाओं के हक लूटने नहीं दे सकता। घुसपैठिए देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है, उनकी पहचान करके उन्हें वापस उनके देश भेजना बहुत आवश्यक है। इसके अलावा ऐसे राजनीतिक दल जो वोट बैंक की राजनीति में घुसपैठियों को बचा रहे हैं, उन्हें हमें पूरी शक्ति से जनता के सामने बेनकाब करना होगा।”
अपने पतन की समीक्षा नहीं करती कांग्रेस’
पीएम मोदी ने कहा, “आज देश को याद भी नहीं होगा कि 1984 में कांग्रेस को 400 से अधिक सीटें मिली थीं और देश ने कांग्रेस को करीब-करीब 50 प्रतिशत वोट दिया था, लेकिन आज कांग्रेस 100 सीटों के लिए तरस गई है। कांग्रेस अपने इस घनघोर पतन की कभी समीक्षा नहीं करती, क्योंकि अगर समीक्षा करेंगे और पतन के कारणों पर जाएंगे तो उसी परिवार पर सवाल उठेंगे, जिस परिवार ने कांग्रेस पर कब्जा कर रखा है। और इसलिए बहाने ढूंढते रहते हैं। पतन का सही कारण ढूंढने की हिम्मत तक खो चुके हैं।”

लंदन में 8 साल के हिंदू लड़के के साथ धार्मिक भेदभाव, तिलक लगाने के कारण छोड़ना पड़ा स्कूल

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लंदन के एक प्राइमरी स्कूल में 8 साल के हिंदू बच्चे को तिलक लगाने के कारण धार्मिक भेदभाव का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उसे स्कूल छोड़ना तक छोड़ना पड़ गया। INSIGHT UK ने स्कूल प्रशासन पर समानता कानून 2010 के उल्लंघन और हिंदू धार्मिक प्रथाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।लंदन: ब्रिटेन की राजधानी लंदन के एक प्राइमरी स्कूल में 8 साल के हिंदू बच्चे के साथ धार्मिक भेदभाव का मामला सामने आया है। ब्रिटिश हिंदुओं और भारतीय समुदाय की पैरवी करने वाली संस्था INSIGHT UK की एक रिपोर्ट के मुातबिक, बच्चे को माथे पर तिलक-चंदलो लगाने के कारण स्कूल छोड़ना पड़ा। बताया जा रहा है कि विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल (Vicar’s Green Primary School) के स्टाफ ने बच्चे से उसके धार्मिक प्रतीक तिलक-चंदलो के बारे में पूछताछ की और उसे इसके पीछे का कारण समझाने को कहा। INSIGHT UK ने इसे एक नाबालिग बच्चे के साथ ‘पूरी तरह अनुचित’ व्यवहार बताया है।स्कूल प्रशासन के व्यवहार से डर गया बच्चा’
स्कूल के हेड टीचर पर आरोप है कि उन्होंने ब्रेक टाइम में बच्चे पर नजर रखी, जिससे बच्चा डर गया और खेलकूद छोड़कर अकेला रहने लगा। स्कूल प्रशासन के ऊपर यह भी आरोप है कि लड़के को स्कूल में दी गई जिम्मेदारियों से भी सिर्फ इसलिए हटा दिया गया क्योंकि वह तिलक लगाता था। INSIGHT UK के मुताबिक, अगर ये आरोप सही साबित हुए तो यह समानता कानून 2010 के तहत ये सीधे तौर पर धार्मिक भेदभाव का मामला बनता है। INSIGHT UK के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘किसी भी बच्चे को अपनी आस्था के कारण न तो निगरानी में रखना चाहिए, और न ही उसे अलग-थलग किया जाना चाहिए। ऐसे अनुभव बच्चे पर लंबे समय तक भावनात्मक असर डाल सकते हैं।’
‘हिंदू धार्मिक प्रथाओं पर सवाल उठाए गए’
बताया जा रहा है कि बच्चे के माता-पिता और अन्य हिंदू अभिभावकों ने कई बार स्कूल के हेड टीचर और प्रशासकों से संपर्क किया। उन्होंने उन्हें हिंदू धर्म में तिलक-चंदलो के महत्व के बारे में समझाने की कोशिश की, लेकिन स्कूल प्रशासन ने इन प्रयासों को नजरअंदाज कर दिया और संतोषजनक जवाब नहीं दिए। INSIGHT UK के प्रवक्ता ने कहा, ‘बातचीत के दौरान उनका इरादा कुछ अच्छा नहीं था। स्कूल में हिंदू धार्मिक प्रथाओं पर सवाल उठाए गए और उन्हें कमतर दिखाया गया।’ संस्था ने बताया कि विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल में धार्मिक भेदभाव के कारण कम से कम 4 बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। INSIGHT UK ने इसकी शिकायत स्थानीय शिक्षा प्राधिकरण से भी की है।

वाराणसी के रोहनिया में बड़ा हादसा: फ्रिज का कंप्रेसर फटने से घर में भीषण आग, लाखों का सामान जलकर राख, पूरा परिवार बेघर

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वाराणसी।
रोहनिया थाना क्षेत्र के बुनकर कॉलोनी करसड़ा इलाके में सोमवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। घर में रखे फ्रिज का कंप्रेसर अचानक फटने से भीषण आग लग गई, जिसने कुछ ही मिनटों में पूरे कमरे को अपनी चपेट में ले लिया। इस आग में फ्रिज, कूलर, एलईडी टीवी, पंखे, बेड, अलमारी, सिलाई मशीन, इनवर्टर, वाशिंग मशीन सहित अन्य घरेलू सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया। हादसे में करीब तीन से चार लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

पीड़ित अहमद अली उर्फ समीर खान पुत्र स्व. जमालुद्दीन, निवासी बुनकर कॉलोनी करसड़ा 19/8 थाना रोहनिया ने पुलिस को दी जानकारी में बताया कि 19 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 1 बजे उनकी पत्नी कनिज फातिमा घर का कमरा बाहर से बंद कर पास के मोहल्ले में किसी काम से गई थीं। इसी दौरान कमरे में रखे फ्रिज का कंप्रेसर अचानक फट गया, जिससे आग लग गई और देखते ही देखते पूरा कमरा धुएं और लपटों से भर गया।

धुआं उठता देख आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही परिवार और पड़ोसी मौके पर पहुंचे और फायर ब्रिगेड को बुलाया लेकिन करीब देर से 2 घंटे लेट मौके पर पहुंची जिस वजह से आज तेज गति से बढ़ती गई और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि तब तक घर में रखा लगभग सारा सामान जल चुका था। आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि मकान की दीवारें भी क्षतिग्रस्त हो गईं और घर रहने लायक नहीं बचा।

अगर फायर ब्रिगेड समय से पहुंच जाती तो शायद ज्यादा नुकसान नहीं होता

पीड़ित अहमद अली ऑटो चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके परिवार में पत्नी के अलावा तीन छोटे बच्चे हैं—उजैर अली (11 वर्ष), सुजान अली (6 वर्ष) और अरस अली (5 वर्ष)। इस हादसे के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी और रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित का कहना है कि आग में घर का सारा जमा-पूंजी खत्म हो गई और अब बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।

घटना की सूचना पर रोहनिया थाने में जनरल डायरी संख्या 053, दिनांक 19 जनवरी 2026, समय 17:30 बजे इत्तेफाकिया सूचना के रूप में दर्ज की गई। थाना प्रभारी के आदेश पर मामले की जांच उपनिरीक्षक श्याम बाबू को सौंप दी गई है। पुलिस द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी मदद नहीं मिली तो परिवार के लिए दो वक्त की रोटी और बच्चों की पढ़ाई तक मुश्किल हो जाएगी। स्थानीय लोगों ने भी जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को राहत राशि, आवासीय सहायता और पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग की है।

इस हादसे ने एक बार फिर घरेलू बिजली उपकरणों की सुरक्षा और गरीब परिवारों के लिए आपदा राहत की जरूरत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन पीड़ित परिवार की मदद के लिए कितनी जल्दी और क्या कदम उठाता है।