Tuesday, April 7, 2026
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भट्टी फटने से झुलसे हरपालपुर निवासी अमरेश की इलाज के दौरान मौत, परिवार में मातम

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हरदोई/नई दिल्ली — हरपालपुर ब्लॉक के ग्राम शेखपुरा निवासी अमरेश की दिल्ली के बालगढ़ स्थित एक कंपनी में काम के दौरान भट्टी फटने से गंभीर रूप से झुलस जाने के बाद कल देर शाम विनायक अस्पताल में मौत हो गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमरेश बालगढ़ स्थित एक फैक्ट्री में मजदूरी का काम कर रहे थे, जहां अचानक भट्टी में विस्फोट हो गया। हादसे में उनका शरीर बुरी तरह जल गया था। परिजनों ने उन्हें गंभीर हालत में दिल्ली के विनायक हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, जहां सेक्टर नंबर 2 से लेकर 20 तक इलाज चला, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और शनिवार रात लगभग 8:00 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।

घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया है। अमरेश की असमय मृत्यु से गांव में शोक की लहर है। स्थानीय लोग प्रशासन से पीड़ित परिवार को मुआवजा व न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

भट्टी फटने से झुलसे अमरेश की इलाज के दौरान मौत, हरपालपुर के शेखपुरा गांव में पसरा मातम
पीड़ित परिवार ने की मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग

दिल्ली के बालगढ़ स्थित एक फैक्ट्री में काम करते समय भट्टी फटने से झुलसे हरपालपुर ब्लॉक के ग्राम शेखपुरा निवासी अमरेश की शनिवार रात विनायक हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद से मृतक के गांव में मातम पसरा हुआ है और परिवार गहरे सदमे में है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमरेश दिल्ली के बालगढ़ क्षेत्र में एक निजी कंपनी में मजदूरी का कार्य करते थे। कार्यस्थल पर अचानक भट्टी में जोरदार धमाका हुआ, जिससे उनका शरीर बुरी तरह जल गया। उन्हें गंभीर अवस्था में विनायक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां सेक्टर नंबर 2 से 20 तक इलाज चला, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और शनिवार रात लगभग 8 बजे उनका निधन हो गया।

घटना की जानकारी मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक की पत्नी पार्वती देवी ने मीडिया के माध्यम से सरकार और जिला प्रशासन से अपील की है कि—

“मेरे पति अमरेश की जान गई है, हम पूरी तरह टूट गए हैं। जिस फैक्ट्री में वह काम करते थे, वह कंपनी हमें मुआवजा दे और सरकार हमारे परिवार को एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।”

स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता देने और फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

बिहार: दो बच्चों को छोड़कर लापता हुई मां, मुंबई में काम करने वाले पति ने लगाई पत्नी की तलाश की गुहार

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गया/बेलागंज, 4 अगस्त 
बिहार के गया जिले के बेलागंज थाना क्षेत्र अंतर्गत कुरिसाराये गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां वर्षा चौहान नामक महिला अपने दो मासूम बच्चों को घर में अकेला छोड़कर संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई। महिला के पति मुकेश चौहान ने मीडिया के माध्यम से शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

मुकेश चौहान, जो वर्तमान में मुंबई के दहिसर कटकीपाड़ा क्षेत्र में काम करते हैं, ने बताया कि वह 23 जुलाई को काम के सिलसिले में बाहर गए थे। उनकी पत्नी वर्षा चौहान 24 जुलाई की सुबह करीब 11 बजे बच्चों को दवा दिलाने के बहाने घर से निकली, लेकिन फिर लौटकर नहीं आई।

पीड़ित पति ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं, जिनमें एक की उम्र 3 साल और दूसरे की 5 साल है। वर्षा के अचानक गायब हो जाने से दोनों बच्चे बेहद परेशान हैं। मुकेश ने बताया कि कुछ समय बाद पत्नी वर्षा ने उन्हें फोन कर घर लौटने की बात कही थी, लेकिन आज तक वह वापस नहीं आई।

पति का कहना है कि उन्हें यह भी नहीं मालूम कि उनकी पत्नी किसके साथ और कहां गई है। ऐसे में उन्होंने मीडिया के जरिए जिला प्रशासन व पुलिस से अपील की है कि उनकी पत्नी को जल्द से जल्द खोजा जाए और परिवार को सौंपा जाए, ताकि बच्चों की देखभाल सही तरीके से हो सके।

मुंबई में महिला लापता: पति की गैरमौजूदगी में घर से गायब हुई वर्षा चौहान, परिवार परेशान

गया जिले के मूल निवासी मुकेश शंभू चौहान की पत्नी वर्षा चौहान 24 जुलाई को अचानक लापता हो गईं। घटना के वक्त मुकेश काम पर गए हुए थे। उन्होंने बताया कि उनके दो छोटे बच्चे हैं – एक की उम्र 3 साल है और दूसरे की 5 साल। 24 जुलाई की सुबह करीब 11 बजे वर्षा दोनों बच्चों को पड़ोसी के पास छोड़कर कहीं चली गईं और वापस नहीं लौटीं।

परिजनों और पड़ोसियों ने आसपास काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इस संबंध में संबंधित थाना क्षेत्र में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी गई है। पति मुकेश चौहान ने मीडिया और प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी पत्नी की जल्द से जल्द तलाश की जाए, ताकि बच्चों को मां का प्यार और परिवार को राहत मिल सके।

लापता महिला का पता इस प्रकार है:

नाम: वर्षा मुकेश चौहान
पता: सिद्धिविनायक चाल, कटकीपाड़ा,
वीटीसी: दहिसर (पूर्व),
पोस्ट ऑफिस: दहिसर,
जिला: मुंबई,
राज्य: महाराष्ट्र

अगर किसी को भी वर्षा चौहान के बारे में कोई जानकारी हो तो कृपया इन मोबाइल नंबरों पर संपर्क करें: 8871022710

आयुष्मान कार्ड के नाम पर धोखाधड़ी, 15 हजार रुपये लेकर इलाज अधूरा छोड़ भागे अस्पताल कर्मचारी”

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सिवनी मालवा क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मरीज से आयुष्मान कार्ड के नाम पर 15 हजार रुपये वसूलने और इलाज अधूरा छोड़ देने का आरोप लगा है।

ग्रामीण कालू केवट, पिता लखनलाल केवट, निवासी ग्राम अर्चना गांव (सिवनी मालवा) ने थाना शिवपुर में लिखित शिकायत दी है। कालू के अनुसार, 28 जुलाई 2025 को इंडेक्स कॉलेज हॉस्पिटल इंदौर की एक प्रचार गाड़ी गांव में आई थी, जिसमें आयुष्मान कार्ड से निशुल्क इलाज का दावा किया गया।

कालू केवट ने बताया कि प्रचार गाड़ी के कर्मचारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनके फोड़े का निशुल्क इलाज किया जाएगा। अगले दिन यानी 29 जुलाई को गांव से करीब 20 ग्रामीणों को एक बस से इंदौर अस्पताल ले जाया गया। वहां अस्पताल कर्मचारी शुभम पटेल (मोबाइल नंबर 9304678959) ने भर्ती प्रक्रिया पूरी कराई।

शिकायत के अनुसार, भर्ती के बाद शुभम पटेल ने पहले 9,000 रुपये जमा करने की मांग की। कालू ने मजबूरी में राशि दे दी। अगले दिन 7,000 रुपये और मांगे गए, लेकिन रसीद देने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद एक और बार 10,000 रुपये की मांग हुई। जब कालू ने इसका विरोध किया, तो शुभम पटेल और अस्पताल के स्टाफ ने धमकी दी कि इलाज रोक दिया जाएगा। नर्स ने कथित रूप से यहां तक कहा कि “पैसे नहीं दोगे तो मर जाओगे, गलत इलाज कर बाहर कर देंगे।”

धमकी और धोखाधड़ी से परेशान होकर कालू 1 अगस्त की रात अस्पताल से भागकर अपने घर लौट आया। उसने आरोप लगाया कि अस्पताल ने उसका कोई इलाज नहीं किया और कुल 15 हजार रुपये हड़प लिए।

कालू केवट ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत थाना प्रभारी शिवपुर को दी है और अस्पताल प्रबंधन व संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लेकिन पुलिस प्रशासन इनकी कोई मदद नहीं कर रही है न ही कोई कार्यवाही हो रही हैं

18 वर्षीय युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका – कार्रवाई की मांग

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नगला बरी/बरहन (आगरा)
थाना बरहन क्षेत्र के नगला बरी गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां 18 वर्षीय युवती रजनी पुत्री मान सिंह की लाश गांव के पास एक पेड़ पर संदिग्ध अवस्था में लटकी हुई मिली। परिजनों ने इसे हत्या कर आत्महत्या का रूप देने की साजिश बताते हुए गांव के ही विकास और सोनू पुत्र अतर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

घटना 14 अप्रैल की रात की है, जब रजनी मोहल्ले में महेन्द्र की बेटी की शादी से लौटकर अपनी बहन खुशबू के साथ कमरे में सोई थी। रात करीब 11 बजे खुशबू की नींद खुली तो रजनी गायब थी। परिजनों ने रातभर खोजबीन की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
सुबह मोहल्ले के एक व्यक्ति ने सूचना दी कि रजनी की लाश गांव से करीब 300 मीटर दूर एक पेड़ से लटकी हुई है। तत्काल डायल 112 पर सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पेड़ से नीचे उतारा।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि रजनी की हत्या कर शव को पेड़ पर लटकाया गया, जिससे मामला आत्महत्या जैसा लगे। मृतका के पैर घुटनों से जमीन को छू रहे थे, जिससे यह बात सामने आती है कि वह फांसी पर लटक नहीं सकती थी। पेड़ पर फंदा लगाने हेतु कोई साधन भी मौके से नहीं मिला।

परिजनों का दावा है कि हत्या के पीछे गांव के ही विकास और सोनू का हाथ है, जिन्होंने 8 दिन पूर्व परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी।
मृतका रजनी का मोबाइल फोन जो कि घटना के समय गायब था, वह 15 अप्रैल की सुबह पोस्टमार्टम से पहले ही अचानक उसके शव से मिला, जबकि पुलिस की पूर्व तलाशी में वह नहीं मिला था। पुलिस ने उक्त मोबाइल को जब्त कर सर्विलांस पर लगाने की बात कही, लेकिन अब तक कोई रिपोर्ट या कार्रवाई नहीं हुई है।

मृतका के भाई अरविन्द पुत्र मान सिंह ने पुलिस आयुक्त आगरा को ज्ञापन सौंपकर धारा 61 व 103 बीएनएस तथा आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अब तक एफआईआर तक दर्ज नहीं की है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण दम घुटना बताया गया है और मौत का समय भी रात का ही अनुमानित है।

परिजनों ने फोटो, पंचायतनामा और जीडी की प्रतियां संलग्न कर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सोची-समझी हत्या की साजिश है।

अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं

पुलिस की चुप्पी पर परिजनों में रोष

न्याय की मांग को लेकर पीड़िता के गांव में माहौल गमगीन

फतेहपुर जिले के किशनपूर गांव नरैनी में सड़क और बिजली दोनों गायब, 25 साल से विकास के इंतजार में बैठे ग्रामीण

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फतेहपुर जिले के किशनपूर गांव नरैनी में बुनियादी सुविधाओं का टोटा है। ग्रामीण न सड़क के हकदार बने हैं, न बिजली के। स्थिति यह है कि गांव से मुख्य सड़क तक जाने का कोई भी पक्का या कच्चा रास्ता उपलब्ध नहीं है। लोग वर्षों से खेतों के बीच से होकर अपने जरूरी कार्यों के लिए बाहर निकलते थे, लेकिन अब खेतों में फसल बो दी गई है, जिससे रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है।

शिकायतकर्ता अवधेश (उम्र 20 वर्ष), पिता स्व. महकू, जो गांव के ही निवासी हैं, बताते हैं कि यह समस्या 20-25 साल पुरानी है। अब हालात यह हो गए हैं कि गांव के 25 से 30 परिवार पूरी तरह से मुख्य मार्ग से कट गए हैं और आवाजाही के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है।

गांव से सड़क तक पहुंचना हुआ नामुमकिन

गांव के लोग बताते हैं कि पहले तक खेतों के मेड़ों से होते हुए लोग जैसे-तैसे में रोड (मुख्य सड़क) तक पहुंच जाते थे, लेकिन अब किसानों ने वहां पूरी तरह से बुवाई कर दी है। इस कारण से लोगों को घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है।

“अब तो ऐसा लग रहा है जैसे हम गांव में नहीं, किसी कैदखाने में रह रहे हैं। खेतों से भी रास्ता खत्म हो गया, अब तो बाहर निकलना भी बंद है।”

 अवधेश, शिकायतकर्ता

गांव में बिजली भी नहीं, सिर्फ खंभे लगे हैं

गांव में बिजली व्यवस्था की हालत भी बेहद बदतर है। खंभे वर्षों पहले लगाए गए थे, लेकिन आज तक उनमें बिजली की आपूर्ति शुरू नहीं हुई। खंभे तो हैं, लेकिन केवल सजावटी ढांचे की तरह खड़े हैं। ना कोई ट्रांसफॉर्मर है, ना कोई लाइन चालू की गई है।

ग्रामीणों के अनुसार, कई बार बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन से शिकायतें की गईं, लेकिन या तो जवाब नहीं मिला या फिर आश्वासन के अलावा कुछ नहीं हुआ।

“खंभे खड़े हैं लेकिन लाइट नहीं आती। रात में अंधेरा रहता है। बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते, महिलाएं डर के माहौल में घर के बाहर निकलती हैं।”
एक ग्रामीण महिला

गांव के सरपंच और सचिव की बेरुखी

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्याएं कई बार गांव के सरपंच और ग्राम सचिव को बताईं, लेकिन हर बार उन्हें टालने वाला ही जवाब मिला।

“सरपंच कहते हैं – अभी सड़क नहीं निकलेगी, और बिजली के बारे में बोलते हैं – ऊपर से फाइल अटकी है। लेकिन कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते।”

सरकार की योजनाओं पर सवाल

केंद्र और राज्य सरकारें गांवों में सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने के लिए अरबों रुपये खर्च कर रही हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सौभाग्य योजना, हर घर बिजली योजना जैसी परियोजनाएं चलाई गई हैं। लेकिन किशनपूर गांव जैसे सैकड़ों गांव इन योजनाओं से अब भी अछूते हैं।

ग्रामीणों की मांग: सड़क और बिजली हमारी बुनियादी जरूरत है

गांव के निवासी तत्काल एक सार्वजनिक रास्ते की पहचान कर उसके निर्माण की मांग कर रहे हैं। साथ ही बिजली आपूर्ति को बहाल करने के लिए ट्रांसफॉर्मर और कनेक्शन लगाने की मांग भी कर रहे हैं। “हम कोई महल नहीं मांग रहे, सिर्फ एक रास्ता और रौशनी चाहते हैं। क्या ये भी मांगना गलत है?”

गांव में लावारिस पशुओं के कारण हो रहे हादसों से परेशान दुकानदार ने गौशाला निर्माण की मांग की

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मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के मगवानी थाना अंतर्गत रहने वाले देवी प्रसाद पटेल (उम्र 45 वर्ष), जो पेशे से चाय-नाश्ते की दुकान चलाते हैं, ने गांवों में लगातार बढ़ती लावारिस गायों की समस्या पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि गांव छोड़कर जा चुके लोगों की गायें सड़कों और गलियों में बेसहारा हालत में घूम रही हैं, जिससे हर दिन कोई न कोई दुर्घटना घट रही है।

देवी प्रसाद पटेल ने बताया कि इन गायों की देखरेख के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। सड़क पर लावारिस हालत में घूमती ये गायें न केवल खुद के लिए खतरा हैं, बल्कि राहगीरों के लिए भी जानलेवा बन रही हैं। “अक्सर सड़क पर अचानक गाय आ जाती है और वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं,” उन्होंने कहा।

उनका कहना है कि कई बार मर चुकी गायें सड़कों किनारे पड़ी रहती हैं, जिन्हें कुत्ते-बिल्लियाँ नोचते रहते हैं। यह न केवल अमानवीय दृश्य है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिहाज़ से भी खतरनाक है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि “गौशालाओं का निर्माण होना चाहिए, जहां इन बेसहारा गायों की देखभाल की जाए। वहां नियमित रूप से बंदों की नियुक्ति हो जो उन्हें चारा-पानी दें और निगरानी रखें।”

देवी प्रसाद का मानना है कि यदि प्रशासन इस दिशा में गंभीर कदम उठाए और प्रत्येक पंचायत स्तर पर प्रॉपर गौशाला की व्यवस्था हो, तो इन हादसों को रोका जा सकता है और गायों को भी सम्मानपूर्वक जीवन मिल सकता है।

उन्होंने सरकार और स्थानीय प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द गांवों में स्थायी गौशालाएं बनाई जाएं, ताकि न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी आए, बल्कि बेसहारा गायों को भी सुरक्षित स्थान मिल सके।

ग्रामीणों ने भी देवी प्रसाद की इस पहल की सराहना की है और मांग की है कि प्रशासन इस विषय पर जल्द कार्यवाही करे। यह मुद्दा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि मानवता और सार्वजनिक सुरक्षा का भी सवाल है।

गरीब परिवार पर पड़ोसियों का अत्याचार: पूर्णिमा मंडल को जबरन घर छोड़ने पर किया जा रहा मजबूर स्थान:

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पश्चिम बंगाल की रहने वाली पूर्णिमा मंडल (उम्र 24 वर्ष) एक गरीब और मेहनतकश महिला हैं, जो अपने तीन साल की बेटी और माता-पिता को लेकर जीवन-यापन के लिए संघर्ष कर रही हैं। लेकिन हाल के दिनों में उनके लिए यह संघर्ष और भी कठिन होता जा रहा है, क्योंकि उनके ही पड़ोसी परिवार द्वारा उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और घर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

पूर्णिमा मंडल का परिवार पीढ़ियों से उसी स्थान पर निवास करता आ रहा है। उनके पिता दुख मंडल समोसे की ठेला लगाकर जैसे-तैसे परिवार का पेट पालते हैं। माँ प्रतिमा मंडल भी घरेलू कामों में सहयोग करती हैं। बेहद गरीबी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद यह परिवार अपनी मेहनत से जीवन चला रहा है। लेकिन, कमल मंडल (पति विजय मंडल), पुत्र अनुज मंडल और पत्नी झूमि मंडल
निखिल मंडल शोभ मंडल मानती मंडल छोटन मंडल नामक पड़ोसी परिवार द्वारा उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा है।

पूर्णिमा का कहना है कि उनके पड़ोसी, जिनके पास खुद का घर, मकान और सभी सुविधाएं हैं, फिर भी उन्हें जगह खाली करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उनकी तीन साल की मासूम बच्ची जब बाहर खेलने जाती है तो उसे भी अन्य बच्चों के साथ खेलने नहीं दिया जाता। बच्ची को भी तंग किया जाता है।

पूर्णिमा ने बताया कि प्रतिमा मंडल, जो उनकी माँ हैं, को एक-दो बार तो धक्का देकर गिराने की कोशिश भी की गई, जिससे उन्हें चोटें भी आई हैं। यह केवल जमीन या मकान की लड़ाई नहीं है, बल्कि एक गरीब परिवार की अस्मिता और अधिकारों पर सीधा हमला है।

पूर्णिमा का कहना है कि, “हम इतने गरीब हैं, हम कहां जाएंगे? हमारे पूर्वजों का घर है ये। लेकिन हमें डराया-धमकाया जा रहा है, ताकि हम खुद ही यहां से भाग जाएं।”

इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने प्रशासन और मीडिया से गुहार लगाई है कि उनकी समस्या को गंभीरता से सुना जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

स्थानीय प्रशासन और समाजसेवियों से यह उम्मीद की जा रही है कि वे इस अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएं और एक निर्दोष, मेहनतकश और गरीब परिवार को न्याय दिलाने में सहायता करें।

सरबहदा में बालू माफिया का आतंक, चौकीदार पर 50 हजार लेकर ड्राइवर को भगाने का आरोप

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गया (बिहार), 3 अगस्त — गया जिले के सरबहदा थाना क्षेत्र अंतर्गत सिमरीका टोला लालगंज गांव में बालू माफिया का आतंक ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। गांव की एक पीड़िता ने सरबहदा थाना दर्ज में नामजद बालू माफिया की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।

पीड़िता का आरोप है कि अवैध बालू खनन में लिप्त नामजद अभियुक्त लगातार उन्हें धमकाता है। अभियुक्त खुलेआम कहता है, “अभी तो बहुत कुछ बाकी है, केस कर देने से क्या बिगाड़ लोगे?” — जिससे पीड़िता एवं उसके परिवार को हर वक्त जान का खतरा बना हुआ है।

कैमरा लगाने पर तोड़ने की धमकी

ग्रामीणों ने बताया कि जब गांव में बालू खनन की गतिविधियों के सबूत कैमरे में कैद करने की कोशिश की गई, तो अभियुक्त ने साफ कहा, “कैमरा लगाकर कुछ नहीं कर सकते, तोड़ देंगे।” यह घटना ग्रामीणों में भय का माहौल पैदा कर रही है।

चौकीदार पर गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि गांव के चौकीदार सुनील कुमार ने बालू लदे ट्रक के ड्राइवर से ₹50,000 घूस लेकर उसे भगा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि चौकीदार माफिया से पैसे लेकर पुलिस तक पहुंचाता है और उनकी गिरफ्तारी से पहले ही उन्हें सूचना दे दी जाती है। इससे माफिया का हौसला लगातार बढ़ता जा रहा है।

प्रशासन से न्याय की मांग

ग्रामीणों और पीड़िता ने अनुमंडल पदाधिकारी, नीमचक बथानी से अपील की है कि इस कांड के नामजद अभियुक्त को अविलंब गिरफ्तार किया जाए। साथ ही बालू माफिया को संरक्षण देने वाले सभी स्थानीय सहयोगियों के खिलाफ जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो गांव में कोई अप्रिय घटना घट सकती है।

आदिवासी महिला कर्मचारी को आश्रम से निकाला, बच्चों की पढ़ाई पर संकट — विनीता मालवी की प्रशासन से भावुक अपील

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छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश | 2 अगस्त 2025
हरदुआमाल स्थित आदिवासी बालक आश्रम में वर्षों से सेवा दे रही विनीता मालवी, जो आश्रम में बिस्तर धुलाई, सफाई और रसोई का कार्य करती थीं, हाल ही में आश्रम से निकाले जाने के बाद गहरे संकट में हैं। विनीता मालवी ने जिले के कलेक्टर व सहायक आयुक्त, पुक्त जनजातीय कार्य विभाग को एक भावुक प्रार्थना पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने अपनी और अपने बच्चों की दुर्दशा का विस्तार से उल्लेख किया है।

विनीता मालवी, जो ग्राम हरदुआमाल की निवासी हैं, का कहना है कि वे पिछले 8–9 वर्षों से आश्रम में ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य कर रही थीं। इस दौरान उनके कार्य के संबंध में किसी भी प्रकार की कोई शिकायत नहीं रही। परंतु हाल ही में नियुक्त एक नई अधीक्षिका, जिनकी नौकरी को अभी तीन वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं, ने उन्हें बिना किसी ठोस कारण के आश्रम से निकाल दिया।

विनीता का कहना है कि उनका एक बेटा मिडिल स्कूल में और एक बेटी हाई स्कूल में पढ़ाई कर रही है। आश्रम से निकाले जाने के कारण उनके परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और जीवनयापन पर गहरा असर पड़ा है। विनीता का यह भी कहना है कि इस मानसिक तनाव और चिंता के कारण वे आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाने की स्थिति में पहुँच गई हैं।

अपने आवेदन में उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है —

“मुझे आश्रम से निकालने के कारण मैं और मेरे बच्चे मानसिक असंतुलन का शिकार हो गये हैं। उनका पालन पोषण एवं पढ़ाई मैं कैसे करू इसी चिंता के कारण मैं आत्महत्या करने पर मजबूर हो गई हूँ।”

विनीता ने कलेक्टर महोदय व सहायक आयुक्त से अपील की है कि वे उनकी पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें पुनः आश्रम में कार्य करने की अनुमति प्रदान करें ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई और उनका जीवन फिर से सामान्य हो सके।

स्थानीय लोगों के अनुसार, विनीता मालवी एक मेहनती और समर्पित महिला हैं, जिन्होंने वर्षों तक बिना किसी शिकायत के आश्रम में सेवा दी। अब जब उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया है, तो प्रशासन को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए हस्तक्षेप करना चाहिए।

यह मामला केवल एक महिला की नौकरी का नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

संपर्क: विनीता मालवी
ग्राम: हरदुआमाल, जिला छिंदवाड़ा (म.प्र.)
मोब.: 6264509651

अररिया की रूबी देवी ने भोजपुरी गानों से मचाया धमाल, सोशल मीडिया पर बन रहीं नई मिसाल

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अररिया।
बिहार के अररिया जिले के शिवनी गांव की 26 वर्षीय रूबी देवी इन दिनों सोशल मीडिया पर धूम मचा रही हैं। दस साल पहले मिंटू शर्मा से शादी करने वाली रूबी देवी आज तीन बेटियों की मां हैं, लेकिन अपनी जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने ऐसा काम कर दिखाया है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है।

गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली रूबी देवी फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर भोजपुरी गानों पर वीडियो बनाती हैं। उनकी आवाज और अंदाज लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। कुछ ही महीनों में उन्होंने हजारों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

रूबी देवी बताती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, लेकिन पति मिंटू शर्मा और घर के बाकी सदस्य उनका पूरा साथ दे रहे हैं। यही वजह है कि वे खुले मन से वीडियो शूट करती हैं और सोशल मीडिया पर डालती हैं। रूबी कहती हैं, “गरीबी के कारण कई बार लोगों का ताना सहना पड़ता है, लेकिन जब लोग मेरे वीडियो देखकर तारीफ करते हैं, तो सारी तकलीफें भूल जाती हूं।”

गांव में भी रूबी देवी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उनके वीडियो देखने के बाद उनसे मिलने आते हैं। कई लोग तो उनके साथ वीडियो बनाने की भी इच्छा जताते हैं।

अब रूबी देवी का सपना है कि वे सोशल मीडिया पर बड़ा नाम बनाएं और भोजपुरी गानों के जरिए न सिर्फ अपनी पहचान बनाएं बल्कि अपनी बेटियों का भविष्य भी संवारें। उनका कहना है, “मैं चाहती हूं कि मेरी बेटियां पढ़ें-लिखें और मुझ पर गर्व करें। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे नाम से पहचानें, न कि गरीबी से।”

ग्रामीण इलाकों से निकलकर सोशल मीडिया पर पहचान बनाने का रूबी देवी का यह सफर कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। इनकी I’d का नाम है @mintumintushmara