Friday, July 10, 2026
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चंडीगढ़ को मिला नया मेयर, त्रिकोणीय मुकाबले में बीजेपी के सौरव जोशी ने मारी बाजी

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केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को नया मेयर मिल गया है। बीजेपी के सौरव जोशी नए मेयर बने हैं, जिन्हें 18 वोट पड़े हैं। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को आज अपना नया मेयर मिल गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सौरव जोशी चंडीगढ़ के नए मेयर निर्वाचित हुए हैं। आज आयोजित मेयर चुनाव की प्रक्रिया के तहत नगर निगम के सभी पार्षद सदन में पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ।गुरुवार को 11 बजे मेयर चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हुई। इस चुनाव में बीजेपी ने बाजी मार ली। अभी सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर के लिए वोटिंग होगी।

AAP को 11 और कांग्रेस को 7 वोट मिले
बीजेपी के सौरभ जोशी चंडीगढ़ के नए मेयर बन गए हैं। उन्हें 18 वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी को 11 और कांग्रेस के खाते में 7 वोट आए। सबसे पहले कांग्रेस के पार्षदों ने वोट डाले। कांग्रेस प्रत्याशी गुरप्रीत गब्बी के समर्थन में 7 वोट मिले, जिनमें 6 पार्षदों के वोट शामिल रहे, जबकि सातवां वोट सांसद मनीष तिवारी का बताया गया।

वहीं, बीजेपी की ओर से मेयर पद के उम्मीदवार सौरव जोशी को कुल 18 वोट पड़े। बहुमत हासिल करने के साथ ही सौरव जोशी ने मेयर पद पर जीत दर्ज ली।

कौन-कौन थे प्रत्याशी?
मेयर पद के लिए बीजेपी से सौरभ जोशी, आम आदमी पार्टी से योगेश ढींगरा और कांग्रेस से गुरप्रीत गाबी।

वहीं, सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए बीजेपी से जसमनप्रीत, आम आदमी पार्टी से मुनव्वर और कांग्रेस से सचिन गालव, जबकि डिप्टी मेयर के लिए रामचंद्र यादव निर्दलीय खड़े हैं।

डिप्टी मेयर के लिए बीजेपी से सुमन, आम आदमी पार्टी से जसविंदर और कांग्रेस से निर्मला देवी उम्मीदवार हैं।

इंदौर: दूषित पानी के मामले में 29वीं मौत का दावा, 62 साल के बुजुर्ग ने तोड़ा दम

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इंदौर में दूषित पानी पीने के मामले में एक और मौत हो गई है। उल्टी-दस्त से परेशान 62 साल के खूबचंद बंधैया को अपनी जान गंवानी पड़ी है।इंदौर: मध्य प्रदेश में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में 62 साल के एक शख्स की मौत हो गई है। उनके परिजनों ने बताया कि उन्हें दूषित पीने के पानी से उल्टी-दस्त हुआ और इसी वजह से उन्हें जान गंवानी पड़ी। ताजा मामले को मिलाकर लोकल लोगों ने महीने भर पहले फैले इस प्रकोप में अब तक 29 लोगों की मौत हो जाने का दावा किया है। हालांकि, एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में 27 जनवरी को मध्य प्रदेश सरकार की पेश ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट में संभावना जताई गई कि भागीरथपुरा में 16 लोगों की मौत हुई। इसका कनेक्शन इस इलाके में दूषित पेयजल की वजह से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप के कारण हो सकता है।

15-20 दिन से उल्टी और दस्त से थे परेशान
परिजनों के अनुसार, भागीरथपुरा के निवासी खूबचंद बंधैया ने उल्टी-दस्त के इलाज के दौरान मंगलवार को अंतिम सांस ली। बंधैया के बेटे रोहित ने बताया,‘दूषित पानी पीने की वजह से मेरे पिता को पिछले 15-20 दिन से उल्टी-दस्त था। हम उनको भागीरथपुरा के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इलाज के लिए ले गए थे, जहां उन्हें दवाइयां दी गई थीं। लेकिन बाद में हमारे घर में जारी इलाज के दौरान उनकी मंगलवार को मौत हो गई।’बेटे ने अफसरों पर लगाया लापरवाही का आरोप
रोहित का दावा है कि उन्होंने शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अफसरों से कहा था कि उनके पिता को हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाए, लेकिन उनके घर पर एम्बुलेंस नहीं भेजी गई।

रिटायर्ड जज की निगरानी में हो रही जांच
जान लें कि एमपी हाईकोर्ट ने भागीरथपुरा की पेयजल त्रासदी की जुडिशियल जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई में एक मेंबर की कमेटी गठित की है। हाईकोर्ट ने इस कमेटी को न्यायिक जांच की कार्यवाही शुरू होने की तारीख से 4हफ्ते के भीतर अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

हालांकि, अफसरों ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त के मामले आना दिसंबर के अंतिम में शुरू हुए थे। भागीरथपुरा में 51 नलकूपों में दूषित पानी मिला। यहां पानी की जांच के दौरान रिपोर्ट में ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया के बारे में जानकारी मिली। इस बैक्टीरिया की वजह से भागीरथपुरा में बड़े पैमाने पर लोग संक्रमित हो गए। भागीरथपुरा में नगर निगम की पेयजल पाइपलाइन में रिसाव की वजह से इसमें एक टॉयलेट के सीवर का पानी मिल गया था।

डॉ. किरण कुमारी सिन्हा की सराहना में

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श्री साईं नर्सिंग होम
दिनांक: 29/01/2026

विषय: डॉ. किरण कुमारी सिन्हा की सराहना में

यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि डॉ. किरण कुमारी सिन्हा, जो बेला (बिहार) लेला थाना क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं, जनकल्याण की भावना से प्रेरित होकर एक निजी अस्पताल “श्री साईं नर्सिंग होम” का संचालन भी कर रही हैं।

उक्त नर्सिंग होम में प्रसव (डिलीवरी) की उत्तम व्यवस्था उपलब्ध है। विशेष रूप से गरीब एवं जरूरतमंद लोगों का इलाज केवल लागत शुल्क पर किया जाता है, जो समाज सेवा का एक सराहनीय उदाहरण है।

डॉ. किरण कुमारी सिन्हा का यह प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अत्यंत प्रशंसनीय है और जनहित में उनका योगदान उल्लेखनीय है।

हस्ताक्षर
(मेजोरिंग)
अभिषेक कुमार

नेपाल के जनकपुर अत्रा से आस्था, संकल्प और भक्ति की एक असाधारण यात्रा ने सबका ध्यान खींच लिया है

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कावर पैदल
दिनांक 01 जनवरी

नेपाल के जनकपुर अत्रा से आस्था, संकल्प और भक्ति की एक असाधारण यात्रा ने सबका ध्यान खींच लिया है। नितेश कुमार यादव नामक युवक ने 01 जनवरी को कावर पैदल यात्रा का शुभारंभ किया, जो सीधे प्रयागराज महाकुंभ और उसके बाद वृन्दावन तक जाएगी। यह यात्रा केवल दूरी तय करने का नाम नहीं, बल्कि आस्था की वह मिसाल है जिसने रास्ते भर लोगों को भावुक कर दिया है।

कठोर ठंड, अनजान रास्ते, लगातार पैदल चलने की चुनौती और सीमाओं को पार करने के बावजूद नितेश कुमार यादव के हौसले में कोई कमी नहीं दिखी। नेपाल से भारत की इस लंबी यात्रा के दौरान उन्होंने कावर के साथ पैदल चलते हुए शिव भक्ति और सनातन आस्था का संदेश दिया। हर कदम के साथ उनका संकल्प और मजबूत होता गया।

प्रयागराज महाकुंभ पहुंचने की उनकी मंशा केवल स्नान तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इसे आत्मशुद्धि और लोककल्याण से जोड़कर देख रहे हैं। इसके बाद वृन्दावन पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में दर्शन और साधना का संकल्प भी इस यात्रा का अहम हिस्सा है।

रास्ते में जहां-जहां से नितेश कुमार यादव गुजरे, वहां लोगों ने उनकी भक्ति और साहस को सलाम किया। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने जलपान और विश्राम की व्यवस्था कर उनका उत्साह बढ़ाया। ग्रामीण इलाकों से लेकर कस्बों तक, उनकी यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है।

यह कावर पैदल यात्रा न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि युवाओं के लिए एक प्रेरणा भी है कि सच्चे विश्वास और दृढ़ निश्चय के साथ असंभव लगने वाली राहें भी आसान हो जाती हैं। नेपाल से प्रयागराज और वृन्दावन तक की यह यात्रा आने वाले दिनों में भक्ति, तपस्या और संकल्प की एक मिसाल के रूप में याद की जाएगी।

घर, बच्चे और कैमरा—मोबाइल से सपनों की शूटिंग कर रही है शहनाज निशा यूपी से नागपुर तक संघर्ष की कहानी, सोशल मीडिया से पहचान बनाने की जद्दोजहद

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नागपुर

सपनों की कोई उम्र, कोई सीमा और कोई बड़ा प्लेटफार्म नहीं होता—बस हौसला चाहिए। उत्तर प्रदेश की रहने वाली शहनाज निशा, जो वर्तमान में महाराष्ट्र के नागपुर में रह रही हैं, इसकी मिसाल बनकर सामने आई हैं। दो बच्चों की मां होने के बावजूद शहनाज निशा भोजपुरी और हिंदी गानों पर लगातार वीडियो बना रही हैं, ताकि अपनी एक अलग पहचान बना सकें।

शहनाज निशा ने सितंबर 2025 से सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना शुरू किया। न उनके पास कोई स्टूडियो है, न म्यूजिक कंपनी और न ही कोई बड़ा प्लेटफार्म। वह अपने साधारण मोबाइल फोन से ही वीडियो शूट करती हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड करती हैं। इंस्टाग्राम पर वह “Sahnaj Nisa” नाम की आईडी से सक्रिय हैं।

पति का साथ, परिवार की जिम्मेदारी

शहनाज निशा के पति सद्दाम अंसारी एक कंपनी में काम करते हैं। शहनाज बताती हैं कि पति उनका पूरा मानसिक और भावनात्मक सहयोग करते हैं। घर की जिम्मेदारी, बच्चों की देखभाल और रसोई के काम निपटाने के बाद जो थोड़ा समय मिलता है, उसी समय वह अपने वीडियो रिकॉर्ड करती हैं।

उनका कहना है,
“जब बच्चे सो जाते हैं या घर का काम खत्म हो जाता है, तब मैं कैमरा ऑन करती हूं।”

फोन ही स्टूडियो, दीवार ही सेट

शहनाज निशा का हर वीडियो उनके संघर्ष की कहानी बयां करता है। न लाइटिंग, न मेकअप टीम, न एडिटिंग स्टूडियो—बस एक मोबाइल फोन और सीखने की जिद। उनका मानना है कि टैलेंट दिखाने के लिए बड़े साधनों से ज्यादा बड़ी सोच जरूरी होती है।

कम व्यूज़ से टूटता हौसला, फिर भी नहीं मानी हार

शहनाज निशा मानती हैं कि कई बार कम व्यूज़ और कम फॉलोअर्स देखकर मन टूट जाता है। उन्हें लगता है कि इतनी बड़ी दुनिया में शायद उनका वीडियो कभी वायरल न हो। लेकिन हर बार वह खुद को समझाती हैं कि
“अगर आज नहीं, तो कल लोग जरूर सुनेंगे और देखेंगे।”

सोशल मीडिया से पहचान बनाने की उम्मीद

शहनाज निशा चाहती हैं कि उनके वीडियो सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचें। वह लोगों से अपील करती हैं कि
“आपका एक लाइक, एक सब्सक्राइब और एक फॉलो किसी के लिए सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि जिंदगी बदलने वाला मौका हो सकता है।”

उनका सपना है कि कभी कोई बड़ा प्लेटफार्म या स्टूडियो उनके काम को पहचाने और वह अपने हुनर को एक नई ऊंचाई तक ले जा सकें।

 

शास्त्री पार्क में मामूली विरोध पर युवक पर चाकू से जानलेवा हमला, FIR न होने से पीड़ित परिवार दहशत में

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दिल्ली।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। गाली-गलौज का विरोध करना एक युवक को भारी पड़ गया। आरोप है कि दबंग किस्म के व्यक्ति ने चाकू से जानलेवा हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया, लेकिन घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है। इससे पीड़ित परिवार दहशत में है और हमलावर के हौसले बुलंद बताए जा रहे हैं।

पीड़ित मुन्तजिल अहमद पुत्र तंजील अहमद, निवासी बुलन्द मस्जिद, शास्त्री पार्क के अनुसार, 22 जनवरी 2026 की शाम करीब 6:30 बजे वह अपने घर के सामने बच्चों के साथ आग ताप रहे थे। उसी दौरान मोहल्ले का ही अनीस नामक युवक ऊंची आवाज में अश्लील गालियां देने लगा। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने बेहद शालीनता से सिर्फ इतना कहा कि आसपास महिलाएं और बच्चे हैं, इसलिए इस तरह की भाषा का प्रयोग न किया जाए।

आरोप है कि इतनी सी बात पर अनीस बौखला गया और गालियां देता हुआ वहां से चला गया। महज दो-तीन मिनट बाद वह हाथ में चाकू लेकर वापस लौटा और जान से मारने की नीयत से मुन्तजिल के सीने पर पूरी ताकत से वार कर दिया। पीड़ित ने किसी तरह खुद को बचाने की कोशिश की, जिससे चाकू सीने की बजाय उनकी बाजू में गहराई तक धंस गया। इसके बाद भी हमलावर ने दो बार और चाकू से हमला किया।

शोर-शराबा सुनकर जब आसपास के लोग इकट्ठा हुए तो आरोपी मौके से फरार हो गया, जाते-जाते जान से मारने की धमकी भी देता गया। घटना की सूचना किसी स्थानीय व्यक्ति ने 112 नंबर पर दी। मौके पर पहुंची पुलिस घायल को जय प्रकाश अस्पताल, शास्त्री पार्क ले गई, जहां से हालत गंभीर होने पर जीटीबी अस्पताल रेफर किया गया। पीड़ित का एमएलसी नंबर भी दर्ज है, जो घटना की गंभीरता को साफ दर्शाता है।

पीड़ित का आरोप है कि उसने थाना शास्त्री पार्क के विवेचनाधिकारी को पूरी घटना की जानकारी दी, मेडिकल रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई, लेकिन अब तक न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई हुई। इससे हमलावर और उसके सहयोगियों के हौसले और बढ़ गए हैं। पीड़ित का कहना है कि आरोपी पहले भी गंभीर आपराधिक मामलों में जेल जा चुका है और लगातार उसे व उसके परिवार को धमकियां मिल रही हैं।

पीड़ित परिवार को आशंका है कि यदि समय रहते पुलिस ने सख्त कार्रवाई नहीं की तो कोई बड़ी वारदात हो सकती है। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच, तत्काल एफआईआर दर्ज करने और परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि इस तरह की घटनाएं यदि यूं ही दबती रहीं तो आम नागरिकों का कानून से भरोसा उठ जाएगा।

नेपाल में मजदूरी, दिल में सुर—खूनवा बॉर्डर का गुड्डू गानों से रच रहा अपनी पहचान

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गुड्डू संघर्ष से सफलता तक की कहानी सोशल मीडिया के सहारे सपनों को दे रहे हैं आवाज नमस्कार, ई खबर मीडिया में आपका हार्दिक स्वागत है। आज हम आपके सामने उत्तर प्रदेश के खूनवा बॉर्डर क्षेत्र के रहने वाले गुड्डू यादव की एक संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक कहानी लेकर आए हैं, जो वर्तमान में नेपाल में काम करते हुए अपने गायन के हुनर से पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल में मेहनत, दिल में संगीत गुड्डू रोज़गार के सिलसिले में नेपाल में कार्यरत हैं, लेकिन काम के साथ-साथ उनका असली जुनून गाना गाना है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को मरने नहीं दिया और संगीत को ही अपनी आवाज़ बना लिया। सोशल मीडिया बना मंच गुड्डू यादव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने गानों और वीडियो को लोगों तक पहुंचा रहे हैं। मोबाइल और साधारण साधनों से रिकॉर्ड किए गए उनके गीतों को लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है। उनकी आवाज़ में दर्द, संघर्ष और उम्मीद साफ झलकती है, जिससे श्रोता खुद को उनसे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। पहचान बनाने की जद्दोजहद गुड्डू का सपना है कि वह अपने गानों के जरिए न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करें, बल्कि उत्तर प्रदेश का नाम भी रोशन करें। नेपाल में रहकर भी वह लगातार नए गाने और वीडियो तैयार कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर सक्रिय बने हुए हैं। संघर्ष से हार नहीं मानी गुड्डू का कहना है कि हालात चाहे जैसे भी हों, उन्होंने कभी हार मानने का नहीं सोचा। उनका मानना है कि अगर हुनर सच्चा हो और मेहनत लगातार हो, तो एक दिन पहचान जरूर मिलती है। मीडिया और टीवी चैनलों से अपील गुड्डू ने मीडिया के माध्यम से यह भी कहा है कि वह लाइव टीवी चैनल पर आकर अपना इंटरव्यू देना चाहते हैं, ताकि उनकी आवाज़ और संघर्ष की कहानी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। यदि कोई भी टीवी चैनल या मीडिया संस्थान उनसे संपर्क करना चाहता है, तो नीचे दिए गए नंबर पर बात कर सकता है। संपर्क नंबर 8920024883, नेपाल whatsapp नंबर 9826449280 गुड्डू यादव की पत्नी का नाम मीरा यादव है। सपनों की उड़ान जारी आज गुड्डू उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो रोज़गार की तलाश में बाहर रहकर भी अपने सपनों को ज़िंदा रखते हैं। नेपाल की ज़मीन पर मेहनत और संगीत की दुनिया में पहचान गुड्डू की यह यात्रा अभी जारी है।

6 महीने का मासूम जिंदगी और मौत से जूझ रहा, इलाज के लिए सरकार से मदद की गुहार

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मुजफ्फरपुर जिले के तारु थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां की रहने वाली रूबी देवी अपने 6 महीने के मासूम बेटे गणेश को बचाने के लिए दर-दर भटक रही हैं। मासूम गणेश गंभीर बीमारी से पीड़ित है और उसकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। आर्थिक तंगी के कारण परिवार बच्चे का समुचित इलाज कराने में असमर्थ है।

रूबी देवी के पति दीनानाथ कुमार मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन इलाज का खर्च उनकी पहुंच से बाहर हो चुका है। परिजनों के अनुसार बच्चे को लगातार इलाज की जरूरत है, लेकिन पैसे के अभाव में इलाज बीच में ही रुकने की कगार पर है। मां की आंखों में आंसू और चेहरे पर बेबसी साफ झलकती है।

परिवार का कहना है कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर कई जगह मदद की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस सहायता नहीं मिल सकी है। ऐसे में रूबी देवी और दीनानाथ कुमार ने सरकार और प्रशासन से भावुक अपील की है कि उनके मासूम बेटे के इलाज में मदद की जाए, ताकि उसकी जान बचाई जा सके।

यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि सरकारी योजनाएं और स्वास्थ्य सुविधाएं जरूरतमंदों तक आखिर कब पहुंचेंगी। अगर समय रहते मदद नहीं मिली, तो एक मासूम की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सहायता उपलब्ध कराएं।

 

 

 

खेत-खलिहान से मोबाइल तक, सुरों में पहचान बना रही है पुष्पा सिंह बिना स्टूडियो, बिना प्लेटफॉर्म—इंस्टाग्राम से दुनिया तक पहुंचने का सपना

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सिवान

सपने अगर सच्चे हों, तो साधन कभी रास्ता नहीं रोकते। बिहार के जिला सिवान के ग्राम खुरदरा की रहने वाली पुष्पा सिंह इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। साधारण किसान परिवार में जन्मी पुष्पा ने बचपन से ही संगीत को अपना साथी बना लिया था। स्कूल के दिनों में जब भी मंच मिलता, वह भोजपुरी और हिंदी दोनों भाषाओं में गाना गाती थीं, और उनकी आवाज़ पर तालियों की गूंज सुनाई देती थी।

स्कूल में शिक्षकों से लेकर साथी छात्र तक, सभी उनकी आवाज़ की खूब तारीफ करते थे। धीरे-धीरे गायन उनके लिए सिर्फ शौक नहीं, बल्कि पहचान का सपना बन गया।

किसान पिता की बेटी, संगीत से बड़ा रिश्ता

पुष्पा के पिता खेती-किसानी करते हैं। परिवार में तीन बहनें और एक भाई हैं, जिनमें पुष्पा दूसरे नंबर की बहन हैं। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपने सपने को मरने नहीं दिया।

आज पुष्पा जबलपुर में रहकर पोस्ट ऑफिस में नौकरी करती हैं। नौकरी के साथ-साथ जो थोड़ा-बहुत समय मिलता है, उसी में वह मोबाइल फोन से ही गाना रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डालती हैं। न कोई स्टूडियो, न कोई म्यूजिक कंपनी और न ही कोई बड़ा मंच—फिर भी उनका हौसला कमजोर नहीं पड़ा।

इंस्टाग्राम पर पहचान, यूट्यूब से निराशा

पुष्पा इंस्टाग्राम पर “पुष्पा सिंह राजपूत” नाम से सक्रिय हैं, जहां वह अपने गाने साझा करती हैं। यूट्यूब पर भी उन्होंने चैनल शुरू किया था, लेकिन वहां अपेक्षित व्यूज़ और रिस्पॉन्स नहीं मिलने से निराश होकर उन्होंने अपनी यूट्यूब आईडी डिलीट कर दी।

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनका मानना है कि
“अगर आवाज़ सच्ची है, तो एक दिन जरूर सुनी जाएगी।”

गांव से आगे, जिले से दुनिया तक पहुंचने की चाह

पुष्पा चाहती हैं कि उनका गाना सिर्फ उनके गांव तक सीमित न रहे, बल्कि जिले, प्रदेश और देश के लोगों तक पहुंचे। वह अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहती हैं—एक ऐसी पहचान, जो मेहनत, लगन और सुरों की ताकत से बने।

उनका कहना है,
“मैं बड़े मंच की मांग नहीं करती, बस इतना चाहती हूं कि लोग मेरा गाना सुनें। एक लाइक, एक शेयर भी मुझे आगे बढ़ने का भरोसा देता है।”

एक लाइक, एक हौसला

पुष्पा सिंह उन हजारों युवाओं की आवाज़ हैं, जो छोटे शहरों और गांवों से निकलकर मोबाइल के सहारे अपने सपनों को उड़ान देने की कोशिश कर रहे हैं। आज उन्हें जरूरत है सिर्फ सुनने वालों की, सराहने वालों की।

कभी-कभी एक छोटा सा प्रोत्साहन, किसी की पूरी जिंदगी की दिशा बदल देता है।

दुबई एयरपोर्ट पर पूर्णिया का युवक 7 महीने से हिरासत में, एजेंट पर 30 हजार हड़पने और धमकी देने का आरोप

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पूर्णिया।
जिला पूर्णिया के चम्पानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत सौराहा वार्ड नंबर-12 निवासी कुमुद पासवान का 26 वर्षीय पुत्र मिथुन पासवान बीते सात महीनों से दुबई एयरपोर्ट की पुलिस हिरासत में बंद है। परिजन लगातार दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अब तक न तो युवक की रिहाई हो सकी है और न ही किसी स्तर पर ठोस कार्रवाई सामने आई है। यह मामला अब मानव तस्करी और फर्जी एजेंटों के नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है।

परिजनों के अनुसार, मिथुन पासवान करीब डेढ़ साल पहले रोजगार की तलाश में दुबई गया था। उसे गोकुलपुर निवासी एजेंट राजेश कुमार मेहता के माध्यम से वीजा बनवाकर विदेश भेजा गया था। शुरूआती दिनों में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में मिथुन की पहचान पत्र (आईडी) गुम हो गई। इसी दौरान दुबई एयरपोर्ट पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया। परिजनों का कहना है कि मिथुन पर कोई आपराधिक आरोप नहीं है, इसके बावजूद उसे सात महीने से बंद कर रखा गया है।

पिता कुमुद पासवान का कहना है कि बेटे की रिहाई के लिए जब उन्होंने एजेंट राजेश कुमार मेहता से संपर्क किया, तो उसने भरोसा दिलाया कि 30 हजार 500 रुपये देने पर वह दुबई जाकर मिथुन को छुड़वा लाएगा। परिवार ने किसी तरह पैसे जुटाकर एजेंट को दे दिए, लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी न तो मिथुन भारत लौटा और न ही उसकी स्थिति की कोई ठोस जानकारी दी गई। उल्टे एजेंट द्वारा यह कहकर डराया जाने लगा कि कहीं शिकायत की तो तुम भी फंस जाओगे और कहीं कोई सुनवाई नहीं होगी।

परिजनों का आरोप है कि अब उन्हें इस बात की भी आशंका है कि कहीं उनके बेटे के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हो गई। बेटे की कोई प्रत्यक्ष सूचना नहीं मिलने से पूरा परिवार गहरे मानसिक तनाव में है। कुमुद पासवान ने स्थानीय थाना, जिला प्रशासन, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित आवेदन दिया है, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर ठोस पहल नहीं हो सकी है।

मामले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि विदेश मंत्रालय की योजनाओं और प्रशिक्षण में भाग लेने वाला युवक दुबई में कैसे फंस गया और इतने लंबे समय तक हिरासत में रहने के बावजूद भारत सरकार की ओर से कोई ठोस हस्तक्षेप क्यों नहीं किया गया। यह घटना उन सैकड़ों युवाओं की सच्चाई को उजागर करती है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाते हैं और फर्जी एजेंटों के जाल में फंसकर कानून के मकड़जाल में उलझ जाते हैं।

परिजनों ने प्रशासन और केंद्र सरकार से मांग की है कि मिथुन पासवान की तत्काल रिहाई के लिए कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप किया जाए तथा एजेंट राजेश कुमार मेहता के खिलाफ ठगी, धमकी और मानव तस्करी के आरोप में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।
एजेंट राजेश कुमार मेहता का कांटेक्ट नंबर 8877 299 301