Friday, July 10, 2026
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महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि, CM योगी ने यूं किया याद

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महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम ने स्वदेशी को विकसित भारत की नींव बताया, जबकि योगी ने गांधी के सत्य, अहिंसा और मानवता के आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया।नई दिल्ली: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि आज शुक्रवार को शहीद दिवस के रूप में मनाई जा रही है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों नेताओं ने महात्मा गांधी के आदर्शों को याद करते हुए विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के स्वदेशी के आह्वान को विकसित भारत का मूलभूत सिद्धांत बताया, जबकि योगी ने बापू के आदर्शों को आत्मसात कर विकसित भारत के निर्माण की बात कही। बता दें कि महात्मा गांधी की 1948 में आज ही के दिन नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।PM मोदी ने राष्ट्रपिता को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर मेरा शत-शत नमन। पूज्य बापू का हमेशा स्वदेशी पर बल रहा, जो विकसित और आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का भी आधारस्तंभ है। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व देशवासियों को कर्तव्य पथ पर चलने के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।’ उन्होंने महात्मा गांधी के स्वदेशी के आह्वान को विकसित भारत का मूलभूत सिद्धांत बताया। उन्होंने कहा कि बापू ने हमेशा स्वदेशी पर विशेष जोर दिया, जो आज की सरकार के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का एक मूलभूत स्तंभ भी है।

CM योगी ने X पर गांधी को दी श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, ‘राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन। श्रद्धेय ‘बापू’ का सत्यनिष्ठ आचरण, अहिंसा की उनकी अडिग साधना और मानवता के प्रति अनन्य करुणा संपूर्ण विश्व को सदैव आलोकित करती रहेंगी। आइए, ‘बापू’ के आदर्शों को आत्मसात कर समृद्ध, न्यायपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।’ बता दें कि भारत हर साल 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में मनाता है। इस दिन गांधी स्वतंत्रता के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि दी जाती है।आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा हैं गांधी
महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। वह 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में पैदा हुए थे। बचपन से ही वे सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलते थे। उन्होंने लंदन से वकालत की पढ़ाई की और दक्षिण अफ्रीका में रहकर अंग्रेजों के अन्याय के खिलाफ सत्याग्रह शुरू किया। भारत लौटकर उन्होंने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे बड़े आंदोलन चलाए। गांधी ने अहिंसा को हथियार बनाकर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। वे हमेशा गरीबों, किसानों और हर कमजोर वर्ग के साथ खड़े रहे। आज भी उनका अहिंसा का संदेश पूरी दुनिया को प्रेरित करता है।

रात के अंधेरे में अगवा कर बच्ची से दरिंदगी, राज खुलने के डर से रिश्तेदार ने नहर में फेंका; मासूम की मौत

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मध्य प्रदेश के बड़वानी में एक सात साल की बच्ची से रेप और हत्या का मामला सामने आया है। मामले में बच्ची के एक नाबालिग रिश्तेदार को हिरासत में लिया गया है।मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से एक रूह कपा देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक सात साल की बच्ची के साथ कथित तौर पर बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में बच्ची के ही एक 17 वर्षीय नाबालिग रिश्तेदार को हिरासत में लिया है।
बच्ची को अगवा कर ले गया
पुलिस के अनुसार, यह घटना राजपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की है। 25 जनवरी की रात जब बच्ची का परिवार सो रहा था, तब आरोपी उसे घर से अगवा कर पास की इंदिरा सागर नहर पर ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। जब बच्ची ने शोर मचाना शुरू किया, तो आरोपी ने पकड़े जाने के डर से उसे नहर में फेंक दिया। डूबने के कारण बच्ची की मौत हो गई।
नहर से बच्ची का शव किया गया बरामद
बड़वानी के पुलिस अधीक्षक जगदीश डावर ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय निवासियों की सूचना पर 26 जनवरी को नहर से बच्ची का शव बरामद किया गया था। रिपोर्ट में बच्ची के निजी अंगों पर गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है और मौत का कारण डूबना बताया गया है।
आरोपी ने अपना जुर्म कबूल किया
संदेह के आधार पर जब 17 वर्षीय रिश्तेदार से पूछताछ की गई, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। गिरफ्तार नाबालिग आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ने आगे बताया कि बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।

जलवायु परिवर्तन की वजह से खतरनाक बन रही हैं मौसमी घटनाएं, यहां हैं भयावह हालात; 100 से अधिक की मौत

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दुनिया के तमाम देशों में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव साफ देखने को मिल रहा है। दक्षिणी अफ्रीका भी एक ऐसा ही क्षेत्र है जहां मौसम से संबंधित घटनाएं चिंता का विषय बन गई है। यह बात शोध में सामने आई है।जोहान्सबर्ग: दुनिया भर में मौसम से संबंधित घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं। कहीं तूफान, कहीं बर्फबारी, कहीं भारी बारिश और कहीं प्रचंड गर्मी जैसी मौसमी घटनाओं ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। मौसम में हो रहे बदलावों के पीछे सबसे बड़ी वजहें इंसानों से जुड़ी हुई हैं। इसी को लेकर शोधकर्ताओं ने बताया है कि इंसानों की वजह से हुए जलवायु परिवर्तन ने दक्षिणी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में बारिश और बाढ़ को और अधिक विनाशकारी बना दिया है। इस आपदा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और 3 लाख से ज्यादा लोग अपना घर-बार छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

10 दिनों में हो गई पूरे साल की बारिश
वर्ल्ड वेदर एट्रीब्यूशन (WWA) के एक अध्ययन में दक्षिण अफ्रीका, मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे और इस्वातिनी के प्रभावित इलाकों में हुई अत्यधिक भारी वर्षा का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार, इस क्षेत्र में मात्र 10 दिनों में एक पूरे साल जितनी बारिश हुई है। इसके चलते बड़े पैमाने पर घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसकी आर्थिक क्षति लाखों डॉलर में आंकी जा रही है।

मोजाम्बिक में कई इलाके पूरी तरह पानी में डूब गए, जबकि दक्षिण अफ्रीका के लिम्पोपो और म्पुमलंगा प्रांतों तथा जिम्बाब्वे के कुछ हिस्सों में सड़कें और पुल बह गए हैं।
दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने तैयार किया अध्ययन
यह अध्ययन दुनिया भर के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें पीयर-रिव्यूड विधियों का उपयोग कर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आकलन किया गया। अध्ययन में स्पष्ट रूप से पाया गया कि चरम वर्षा की तीव्रता में लगभग 40 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो पूर्व-औद्योगिक काल की तुलना में मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण है। यह स्थिति वर्तमान कमजोर ला नीना मौसम पैटर्न से भी बढ़ी, जो स्वाभाविक रूप से दक्षिणी अफ्रीका में अधिक नमी लाता है, लेकिन अब गर्म होते वायुमंडल में यह और घातक साबित हो रहा है।
बारिश की तीव्रता बढ़ रही है
रॉयल नीदरलैंड्स मौसम विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ जलवायु शोधकर्ता और अध्ययन के सह-लेखक इजिडीन पिंटो ने कहा, “हमारा विश्लेषण साफ दिखाता है कि जीवाश्म ईंधन के निरंतर जलने से ना सिर्फ चरम बारिश की तीव्रता बढ़ रही है, बल्कि ऐसी घटनाएं जो पहले भी होती थीं, अब कहीं अधिक गंभीर हो गई हैं।” पिंटो ने आगे बताया कि बारिश की तीव्रता में 40 प्रतिशत वृद्धि को मानव-जनित जलवायु परिवर्तन का प्रभाव है। उन्होंने कहा, “जो पहले भारी बारिश की एक सामान्य अवधि होती, वह अब भयानक बाढ़ में बदल गई है।”

उम्मीद से कहीं ज्यादा भयावह हुआ मौसम
दक्षिणी अफ्रीका के ये इलाके भारी बारिश और बाढ़ से अपरिचित नहीं हैं, लेकिन हाल की घटना ने वैज्ञानिकों को भी चिंतित कर दिया है। मोजाम्बिक मौसम सेवा के शोधकर्ता बर्नाडिनो न्हांटुम्बो ने कहा, “यह घटना हमारे लिए आश्चर्यजनक थी, क्योंकि हमने ऐसी बाढ़ 25 साल पहले देखी थी। कुछ जगहों पर 2 से 3 दिनों में इतनी बारिश हुई जितनी पूरे मानसून सीजन में होने की उम्मीद होती है, इसलिए इससे संभालना बेहद मुश्किल था।”

9 नदियों के निचले हिस्से में स्थित है मोजाम्बिक
न्हांटुम्बो के अनुसार, मोजाम्बिक 9 प्रमुख नदियों के निचले हिस्से में स्थित है, इसलिए भारी बारिश के साथ नदियों में उफान आने से नुकसान कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा, “हमारे पास अच्छे पूर्वानुमान मॉडल हैं, लेकिन ऐसी चरम घटनाओं में अच्छी भविष्यवाणी के बावजूद नुकसान को पूरी तरह रोकना संभव नहीं होता।” मोजाम्बिक के मध्य और दक्षिणी हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहां गाजा प्रांत की राजधानी जाई-जाई और चोकवे शहर बड़े पैमाने पर डूब गए। शोधकर्ताओं ने इस बात पर दिया जोर
शोधकर्ताओं ने जोर दिया कि अफ्रीका में स्थानीय जलवायु मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि महाद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सके। लंदन के इंपीरियल कॉलेज में सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल पॉलिसी की जलवायु विज्ञान प्रोफेसर फ्रीडेरिक ओटो ने कहा कि उपलब्ध अधिकांश जलवायु मॉडल अमेरिका, यूरोप और कुछ एशियाई केंद्रों में विकसित किए गए हैं, अफ्रीका में कोई नहीं। इस वजह से ये मॉडल उन क्षेत्रों के लिए बेहतर काम करते हैं जहां वो बने हैं, और अफ्रीका के लिए उनकी सटीकता कम हो जाती है। यही कारण है कि हाल की बाढ़ में जलवायु परिवर्तन की भूमिका को ठीक-ठीक मापना मुश्किल रहा। यह अध्ययन दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन अब चरम मौसमी घटनाओं को और खतरनाक बना रहा है, खासकर कमजोर और विकासशील क्षेत्रों में जहां तैयारी और संसाधन सीमित हैं।

दबंगों ने रोका महिला का मकान निर्माण, जान से मारने की धमकी 18 साल पुराना बैनामा होने के बावजूद जमीन पर कब्जे का आरोप एसडीएम जांच में साफ मिली भूमि, फिर भी नहीं मिल रहा न्याय

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मुरादाबाद।
मुरादाबाद जिले के सदर तहसील क्षेत्र से प्रशासनिक लापरवाही और दबंगई का गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम मिलक खैरखाता की रहने वाली महिला किसानदेई ने आरोप लगाया है कि वैध बैनामा और पूर्व में हुई प्रशासनिक जांच के बावजूद दबंग लोग उनके मकान निर्माण में बाधा डाल रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। पीड़िता का कहना है कि वह पिछले कई महीनों से अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही।

18 साल पहले खरीदी थी जमीन

पीड़िता श्रीमती किसानदेई पत्नी स्वर्गीय रामऔतार के अनुसार उन्होंने लगभग 18 वर्ष पहले ग्राम सरवड़ा, तहसील व जिला मुरादाबाद स्थित आराजी संख्या 707, रकबा 0.1780 हेक्टेयर में से 2 बीघा 2 बिस्वा भूमि मौजा नूर उर्फ भूरा से विधिवत बैनामा द्वारा खरीदी थी। यह भूमि उनके खेत से सटी हुई है।

पड़ोसियों पर झूठा बालियान बताने का आरोप

किसानदेई का आरोप है कि पास की आराजी संख्या 703 बालियान बताकर हजारी, नौबत, जागन और ओमप्रकाश पुत्र लालमन, जो ग्राम सरवड़ा के निवासी हैं, वर्षों से उस पर कब्जा जमाए हुए हैं और जोत-बो रहे हैं। जब उन्होंने अपनी जमीन पर मकान निर्माण शुरू किया तो उक्त लोगों ने उनकी भूमि को बालियान बताकर निर्माण कार्य रुकवा दिया।

कई बार हुई पैमाइश, आरोप गलत साबित

पीड़िता का दावा है कि उनके खेत की कई बार पैमाइश हो चुकी है, लेकिन कभी भी उनकी भूमि में बालियान नहीं पाया गया। करीब पांच वर्ष पूर्व स्वयं तत्कालीन एसडीएम ने मौके पर जांच की थी, जिसमें उनकी भूमि पूरी तरह साफ पाई गई थी। जांच के बाद दबंगों की भूमि को बालियान घोषित कर सीमेन्ट के पिलर गाड़कर तारबंदी कराई गई थी।

आंगनबाड़ी केंद्र और बोर्ड आज भी मौजूद

किसानदेई के अनुसार जिस भूमि को बालियान घोषित किया गया था, उसी पर आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण भी किया गया है और सरकारी साइन बोर्ड आज भी मौके पर लगा हुआ है। इसके बावजूद दबंग लोग उसी पुराने विवाद को उठाकर उनके वैध निर्माण कार्य को रुकवा रहे हैं।

झूठी शिकायत और धमकी का आरोप

पीड़िता का कहना है कि निर्माण कार्य रुकवाने के लिए उनके खिलाफ प्रधान और अन्य लोगों द्वारा झूठी शिकायतें कराई गईं। अब स्थिति यह है कि दबंग खुलेआम उन्हें मारने की धमकी दे रहे हैं, जिससे वह और उनका परिवार भय के साए में जीने को मजबूर हैं।

प्रशासन से इंसाफ की गुहार

किसानदेई ने उप जिलाधिकारी सदर सहित कई अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।

पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि उनके निर्माण कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें दोबारा मकान निर्माण की अनुमति दी जाए, ताकि वह सुरक्षित जीवन जी सकें।

 

महंगाई कंट्रोल से लेकर रुपये की चाल तक, जानें इकोनॉमिक सर्वे की 5 बड़ी बातें

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में रखे गए इस दस्तावेज में साफ किया गया है कि भारत अब केवल ‘स्वदेशी’ सोच तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था को एक रणनीतिक अनिवार्यता के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। आइए जानें इकोनॉमिक सर्वे 2026 की 5 बड़ी बातें। यूनियन बजट से ठीक पहले देश की आर्थिक सेहत का रोडमैप माने जाने वाला इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 आज संसद में पेश कर दिया गया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में रखे गए इस डॉक्यूमेंट ने साफ कर दिया है कि भारत अब केवल स्वदेशी सोच तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक हालात में अर्थव्यवस्था को एक रणनीतिक अनिवार्यता के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। महंगाई, राजकोषीय घाटा, रुपये की चाल से लेकर कृषि उत्पादन तक इकोनॉमिक सर्वे ने कई अहम संकेत दिए हैं, जो आने वाले बजट और नीति फैसलों की दिशा तय कर सकते हैं।1. राजकोषीय अनुशासन पर सरकार का फोकस
आर्थिक सर्वे के मुताबिक, सरकार ने राजकोषीय घाटे को काबू में रखने में सफलता हासिल की है। वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.8 प्रतिशत रहा, जो बजट अनुमान 4.9 प्रतिशत से बेहतर है। वहीं, FY26 में इसे घटाकर 4.4 प्रतिशत तक लाने का टारगेट तय किया गया है। यह संकेत देता है कि सरकार विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।

2. महंगाई पर बड़ी राहत
महंगाई के मोर्चे पर सर्वे ने राहत की खबर दी है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान हेडलाइन CPI महंगाई घटकर 1.7 प्रतिशत पर आ गई। सब्जियों और दालों की कीमतों में गिरावट इसका प्रमुख कारण रही। कोर महंगाई भी कंट्रोल में बताई गई है, हालांकि कीमती धातुओं की कीमतों का हल्का असर अब भी बना हुआ है।

3. 2026 के लिए तीन ग्लोबल सिनेरियो
इकोनॉमिक सर्वे ने आने वाले समय के लिए तीन संभावित ग्लोबल हालात पेश किए हैं- कहीं हालात नियंत्रित रहते हुए भी अस्थिरता बनी रह सकती है, कहीं बड़े देशों के बीच टकराव से वैश्विक व्यवस्था बिखर सकती है और कहीं लगातार एक के बाद एक बड़े आर्थिक झटके लग सकते हैं। ऐसे में सर्वे का कहना है कि भारत को इन अनिश्चित हालात से सुरक्षित रहने के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना होगा, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का असर देश पर कम पड़े।

4. रुपये की चाल पर चिंता
सर्वे में माना गया है कि 2025 में भारतीय रुपया उम्मीद से कमजोर रहा और अपनी क्षमता से नीचे कारोबार करता दिखा। हालांकि, कमजोर रुपया अमेरिकी टैरिफ जैसे बाहरी दबावों के असर को कुछ हद तक कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

5. कृषि क्षेत्र से मिले सकारात्मक संकेत
कृषि क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2024-25 में अनाज उत्पादन रिकॉर्ड 3,320 लाख टन तक पहुंच गया। रबी की बुवाई में 3.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आय के लिहाज से अच्छे संकेत है।

UGC रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को लेकर किस नेता ने दिया कैसा रिएक्शन, जानें

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UGC ने नए रेगुलेशन के भारी विरोध के बीच, सुप्रीम कोर्ट में आज (गुरुवार को) सुनवाई के दौरान उसपर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नई गाइडलाइन की भाषा स्पष्ट नहीं है।नई दिल्ली: UGC ने नए रेगुलेशन के भारी विरोध के बीच, सुप्रीम कोर्ट में आज (गुरुवार को) सुनवाई के दौरान उसपर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नई गाइडलाइन की भाषा स्पष्ट नहीं है। इसकी अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर राजनीतिक पार्टियों ने अलग-अलग तरह के रिएक्शन दिए हैं। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने जहां इसका स्वागत किया है तो वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी सरकार पर भी आरोप मढ़े। पढ़ें UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रिएक्शन।
UGC रेगुलेशन पर नेताओं का रिएक्शन
ममता बनर्जी की पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने बिल्कुल ठीक किया है। UGC की गाइडलाइन असंवैधानिक थी।’ वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, ‘सरकार का काम शांति बनाए रखना है, लेकिन वे धर्म और जाति के नाम पर हिंसा भड़काते हैं ताकि लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटके। मैं इस ऑर्डर के लिए सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद देता हूं।’
कांग्रेस सांसद ने की फिर से चर्चा की मांग
वहीं, कांग्रेस की MP रंजीत रंजन ने कहा, ‘इस संवेदनशील मुद्दे पर फिर से चर्चा होनी चाहिए, जिससे कि किसी भी स्टूडेंट को जाति के आधार पर भेदभाव का सामना न करना पड़े। यह सुनिश्चित करना चाहिए।’
MP बेनीवाल ने की आरक्षण बढ़ाने की मांग
RLP सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा, ‘अब सरकार को सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों समेत किसी भी छात्र के साथ छेड़छाड़ या अपमान करने वालों को दंडित किया जाना चाहिए। अब सरकार को तय करना पड़ेगा कि वह क्या करेगी। हम सामान्य वर्ग के खिलाफ नहीं हैं। जनगणना के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए रिजर्वेशन बढ़ाया जाना चाहिए।’

यूनुस सरकार ने छीना लाखों लोगों का मताधिकार, हसीना ने बांग्लादेश में चुनाव से पहले ही उठा दिए सवाल

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बांग्लादेश की अपदस्थ नेता शेख हसीना ने देश में होने वाले चुनावों की आलोचना की है। हसीना ने कहा कि बांग्लादेश में लाखों लोगों के मताधिकार के अधिकार को अंतरिम सरकार ने छीन लिया है। बांग्लादेश में चुनाव से पहले बवाल बढ़ता नजर आ रहा है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनावों में भाग लेने से रोक दिया है। इसी क्रम में अब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में होने वाले चुनावों को लेकर अंतरिम सरकार को निशाने पर लिया। हसीना ने यूनुस सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है देश में लाखों लोगों के मताधिकारों को छीन लिया गया है।
बांग्लादेश में रहेगी अस्थिरता
शेख हसीना ने पिछले हफ्ते एसोसिएटेड प्रेस (AP) को भेजे एक ईमेल में चेतावनी देते हुए कहा था कि बिना समावेशी, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के बांग्लादेश लंबे समय तक अस्थिरता का शिकार रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया था कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने जानबूझकर उनकी पार्टी को चुनाव से बाहर करके लाखों समर्थकों के मताधिकार को छीन लिया है।
हसीना ने अंतरिम सरकार पर उठाए सवाल
हसीना ने लिखा, “जब भी आबादी के एक बड़े हिस्से को राजनीतिक भागीदारी से वंचित किया जाता है, तो इससे असंतोष गहराता है, संस्थानों की वैधता खत्म होती है और भविष्य में अस्थिरता की स्थितियां पैदा होती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “बहिष्कार से बनी सरकार एक विभाजित राष्ट्र को एकजुट नहीं कर सकती।”
बांग्लादेश में 12 फरवरी होगा चुनाव
बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनाव में 127 मिलियन से अधिक मतदाता वोट डालने के योग्य हैं। यह चुनाव दशकों में सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह 2024 के बड़े पैमाने पर विद्रोह के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव है, जिसमें हसीना को सत्ता से हटा दिया गया था। यूनुस की अंतरिम सरकार इस प्रक्रिया की निगरानी कर रही है, जिसमें मतदाता व्यापक राजनीतिक सुधारों पर संवैधानिक जनमत संग्रह पर भी मत रखेंगे।
यूनुस ने संभाली बांग्लादेश की कमान
यूनुस अगस्त 2024 में बांग्लादेश लौटे थे और हसीना के भारत भागने के 3 दिन बाद सत्ता संभाली थी। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का वादा किया है, लेकिन आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद क्या यह प्रक्रिया वास्तव में समावेशी और लोकतांत्रिक होगी। सुरक्षा व्यवस्था और संवैधानिक बदलावों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
यूनुस के कार्यालय ने क्या कहा?
यूनुस के कार्यालय ने AP को दिए बयान में कहा कि सुरक्षा बल व्यवस्थित और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करेंगे, किसी को भी हिंसा या जबरदस्ती से परिणाम प्रभावित नहीं करने दिया जाएगा। बयान में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और मानवाधिकार संगठनों को निमंत्रण देने की बात कही गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, यूरोपीय संघ और कॉमनवेल्थ सहित करीब 500 विदेशी पर्यवेक्षक 12 फरवरी को चुनाव देखेंगे।

चुनौतियों से जूझ रहा है बांग्लादेश
हसीना के हटाए जाने के बाद बांग्लादेश कई राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समूहों ने अंतरिम सरकार पर नागरिकों की रक्षा में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। अवामी लीग ने अपने सदस्यों की मनमानी गिरफ्तारियों और हिरासत में मौतों का दावा किया है, जिन्हें सरकार ने खारिज कर दिया है। आलोचकों ने इस्लामी समूहों के बढ़ते प्रभाव और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमलों को लेकर चिंता जताई है। यूनुस सरकार के तहत प्रेस स्वतंत्रता पर भी सवाल उठ रहे हैं, जहां कई पत्रकारों पर आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं और 2 प्रमुख दैनिक अखबारों के दफ्तरों पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया है।

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी है मुख्य दावेदार
इस बीच, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी तारिक रहमान के नेतृत्व में मुख्य दावेदार बनकर उभरी है। रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं और 17 साल से अधिक निर्वासन में रहने के बाद दिसंबर में स्वदेश लौटे थे। उन्होंने 170 मिलियन की आबादी वाले इस देश की स्थिरता के लिए काम करने का वादा किया है। BNP के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन उभरा है।

₹5 लाख की ठगी से लेकर 26 साल की शादी टूटने तक, महिला बोली—बस मेरी जायज जमीन लौटा दो

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धौलपुर।
जिले के सैंपऊ थाना क्षेत्र से महिला उत्पीड़न और आर्थिक शोषण का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पीड़िता संगीता पत्नी रूपेश, निवासी चेतन, जिला धौलपुर ने आरोप लगाया है कि एक ओर जहां उससे शादी के नाम पर ₹5 लाख की रकम हड़प ली गई, वहीं दूसरी ओर 26 साल के वैवाहिक जीवन के बाद उसे पति और ससुराल वालों ने मारपीट कर घर से निकाल दिया।

पीड़िता के अनुसार वर्ष 2010 के दौरान उसकी जान-पहचान राजेन्द्र मीणा नामक व्यक्ति से हुई थी, जिसने अपनी बहन की शादी का हवाला देकर 26 जून 2025 को उससे ₹5 लाख रुपये उधार लिए। आरोपी ने शादी के बाद पूरी राशि लौटाने का आश्वासन दिया था, लेकिन शादी संपन्न होने के बाद जब पीड़िता ने अपने पैसे मांगे तो उसने साफ इनकार कर दिया और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए अपमानित किया।

संगीता ने बताया कि वह पिछले 26 वर्षों से विवाहित है और उसके चार बच्चे हैं। उसकी एक बेटी की शादी भी हो चुकी है। आरोप है कि लंबे समय से पति, ससुराल पक्ष और अन्य परिजन उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। करीब एक साल पहले मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया गया।

पीड़िता का कहना है कि ससुराल वालों ने उसकी जमीन, नकदी और अन्य जायज संपत्ति अपने कब्जे में ले ली, जिससे वह पूरी तरह बेसहारा हो गई। वर्तमान में वह किराए के कमरे में रह रही है और मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह अपना भरण-पोषण कर रही है।

संगीता ने भावुक होते हुए कहा, “मुझे किसी से कुछ नहीं चाहिए। बस मेरी  जमीन और मेरा हक लौटा दिया जाए, ताकि मैं सम्मान और शांति के साथ अपना जीवन जी सकूं।”

पीड़िता ने जिला पुलिस अधीक्षक और प्रशासन से मांग की है कि दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए तथा उसे आर्थिक और संपत्ति संबंधी न्याय दिलाया जाए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है और तथ्यों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला समाज में महिलाओं के खिलाफ हो रहे आर्थिक शोषण, घरेलू हिंसा और भरोसे के नाम पर ठगी जैसी गंभीर सच्चाइयों को उजागर करता है।

 

संजू सैमसन खुद बैकफुट पर, दो साल बाद किया ऐसा फैसला, जो हैरान कर देगा

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संजू सैमसन फिर नाकाम रहे। उनके पास मौका था कि शुरुआती झटकों के बाद टीम इंडिया को मजबूत करें और जीत तक पहुंचाएं, लेकिन वे लगता है कि खुद भी जबरदस्त प्रेशर में हैं।संजू सैमसन को अब लगातार मौके दिए जा रहे हैं, लेकिन उनके बल्ले से रन बनाने के लिए तैयार ही नहीं हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी सीरीज के पहले तीन मैचों में वे तो बुरी तरह से नाकाम रहे, लेकिन चौथे मैच में ऐसा लगा कि वे कुछ टच में हैं और रन बना सकते हैं, तभी एक शानदार बॉल ने उनके स्टंप बिखरे दिए। इस बीच ऐसा लगता है कि खुद संजू सैमसन भी बैकफुट पर हैं और प्रेशर महसूस कर रहे हैं। जो काम उन्होंने पिछले दिनों नहीं किया, वो न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे मैच में नजर आया। जो अपने आप में हैरान करने वाला था।
भारत बनाम न्यूजीलैंड चौथे टी20 में अभिषेक शर्मा ने खेली पहली बॉल
भारत बनाम न्यूजीलैंड सीरीज के पहले तीन मैचों के बाद जब चौथे मैच में भारत की सलामी जोड़ी उतरी तो सभी चौंक गए। ओपनिंग के लिए अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन आए, लेकिन पहली बॉल पर स्ट्राइक अभिषेक शर्मा ने संभाली, जबकि सीरीज के पहले तीन मैचों ये काम संजू सैमसन कर रहे थे। पहले तीन मैच में स्ट्राइक संजू ने संभाली और वे आउट होने वाले पहले बल्लेबाज रहे। चौथे मैच में जब स्ट्राइक अ​भिषेक ने संभाली तो वे भी पहली ही बॉल पर आउट होकर पवेलियन चले गए।

अब तक संजू ने 21 बार की है ओपनिंग और 18 दफा संभाली है स्ट्राइक
संजू सैमसन रन ना पाने से कितने प्रेशर में हैं, ये बात मैच शुरू होने से पहले उनके चेहरे पर साफ तौर पर देखी जा सकती थी। लेकिन संजू के मन में भी डर ​बैठा हुआ है, ये बात तब पता चली जब मैच शुरू होने वाला था। संजू सैमसन ने अब तक टीम इंडिया के लिए 21 बार ओपनिंग की जिम्मेदारी टी20 इंटरनेशनल में संभाली है। इसमें से 18 दफा ऐसा हुआ है कि पहली बॉल का सामना संजू सैमसन ने किया है। लेकिन विशाखापट्टम ने वे नॉन स्ट्राइकिंग छोर पर नजर आए।

पावरप्ले के बाद ​मिचेल सेंटनर की शानदार बॉल पर हुए आउट
संजू को लग रहा होगा कि वे पहले बल्लेबाजी कर रहे हैं, इसलिए आउट हो रहे हैं, इसलिए बाद में आएंगे। इस टोटके ने इतना काम किया कि वे पहले आउट नहीं हुए और पावरप्ले तक नाबाद रहे, लेकिन सातवें ही ओवर में मिचेल सेंटनर की शानदार बॉल पर संजू बोल्ड हो गए। इससे पहले संजू सैमसन जुलाई 2024 में ओपनिंग के लिए आए और दूसरे छोर पर रहे, उसके बाद अब ऐसा दिखाई दिया है।

इशान किशन ने तीन मैचों में बना लिया है माहौल
जब टी20 विश्व कप 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया गया था, तब ओपनिंग और विकेटकीपिंग के लिए टीम के पहली च्वाइस के खिलाड़ी संजू सैमसन ही थे, लेकिन अब चार मैचों के बाद लगता है कि स्थितियां बदल गई हैं। इशान किशन ने जिस तरह की आक्रामक बल्लेबाजी का मुजायरा पेश किया है, उसके बाद लगने लगा है कि संजू पीछे हो गए हैं और इशान बाजी मारते हुए दिखाई दे रहे हैं।

तिलक वर्मा के आते ही एक कीपर को जाना होगा बाहर
अभी टीम इंडिया में तिलक वर्मा नहीं हैं, इसलिए पहले तीन मैचों में संजू और इशान दोनों खेले, लेकिन जैसे ही तिलक की वापसी होगी, इसमें से एक को बाहर बैठना पड़ेगा। चौथे मैच में इशान को निगल थी, इसलिए वे इस मैच में नहीं खेल पाए, लेकिन जब सीरीज का पांचवां और आखिरी मैच होगा तो फिर हो सकता है कि संजू और इशान साथ साथ खेलते हुए नजर आएं।

‘डिजास्टर होगी हेरा फेरी 3’, अक्षय कुमार संग विवाद के बाद ये क्या बोल गए परेश रावल, 25 करोड़ के केस को बताया कछुआ छाप अगरबत्ती

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‘हेरा फेरी 3’ को लेकर जब भी कोई अपडेट सामने आता है तो फैंस उत्साहित हो जाते हैं और जैसे ही विवाद की बात सामने आती है, फैंस को निराशा होची है। हाल ही में परेश रावल ने फिल्म को लेकर बात की और इससे जुड़े विवाद पर भी अपनी राय रखी।बॉलीवुड की सबसे आइकॉनिक कॉमेडी फ्रेंचाइजी में शुमार ‘हेरा फेरी’ का तीसरा पार्ट दर्शकों के लिए किसी सपने से कम नहीं है। हेरा फेरी 3 की अनाउंसमेंट को अब लगभग तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि फिल्म की शूटिंग अब तक शुरू नहीं हो सकी है। जितनी बेसब्री से फैंस इस फिल्म का इंतजार कर रहे हैं, उतनी ही तेजी से इससे जुड़े विवाद भी सुर्खियों में बने हुए हैं। कभी खबर आई कि बाबूराव यानी परेश रावल फिल्म छोड़ चुके हैं तो कभी यह दावा किया गया कि अक्षय कुमार ने उन्हें 25 करोड़ रुपये का लीगल नोटिस भेज दिया है। इन तमाम अटकलों और अफवाहों के बीच अब खुद परेश रावल ने चुप्पी तोड़ते हुए हेरा फेरी 3 से जुड़े विवादों पर खुलकर बात की है।
क्यों लटकी हुई है हेरा फेरी 3?
हेरा फेरी 3 को बॉलीवुड की सबसे मोस्ट अवेटेड फिल्मों में गिना जाता है। साल 2024 में उस वक्त फैंस को बड़ा झटका लगा, जब परेश रावल ने यह खुलासा किया कि वह फिल्म से अलग हो रहे हैं। बाबूराव के बिना हेरा फेरी की कल्पना करना भी दर्शकों के लिए मुश्किल था, इसलिए यह खबर तेजी से वायरल हो गई। हालांकि कुछ समय बाद परेश रावल ने सफाई दी और कहा कि वह दोबारा फिल्म से जुड़ चुके हैं। इसी दौरान एक और सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि अक्षय कुमार ने परेश रावल को 25 करोड़ रुपये का लीगल नोटिस भेजा है। इस खबर ने विवाद को और हवा दे दी और फैंस के मन में सवाल उठने लगा कि आखिर फिल्म के साथ चल क्या रहा है।
अक्षय कुमार संग विवाद पर क्या बोले परेश रावल?
हाल ही में ‘लवारी शो’ में बातचीत के दौरान परेश रावल ने इन सभी चर्चाओं पर प्रतिक्रिया दी। अक्षय कुमार के साथ विवाद की खबरों पर उन्होंने बेबाक अंदाज में कहा, ‘ये जो बीच में बातें आईं कि अक्षय कुमार ने मुझ पर 25 करोड़ का केस किया है, वो सब ठीक है यार। ये कछुआ छाप अगरबत्ती जैसा है।’ उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि वह इन अफवाहों को ज्यादा तवज्जो नहीं देते। परेश रावल के मुताबिक, फिल्म में देरी की असली वजह किसी तरह का निजी विवाद नहीं, बल्कि अक्षय कुमार और मेकर्स के बीच चल रहे कुछ टेक्निकल इश्यू हैं। जब तक ये मसले सुलझते नहीं हैं, तब तक फिल्म आगे नहीं बढ़ पा रही है।

क्या वाकई डिजास्टर साबित हो सकती है हेरा फेरी 3?
परेश रावल ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने अभी तक आधिकारिक तौर पर हेरा फेरी 3 साइन नहीं की है। उनका कहना है कि जैसे ही अक्षय कुमार और मेकर्स के बीच का मामला सुलझ जाएगा, वह फिल्म साइन कर लेंगे। इसके साथ ही अभिनेता ने बेहद साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर मेकर्स बाबूराव के बिना हेरा फेरी 3 बनाने की सोच रहे हैं, तो यह फैसला भारी पड़ सकता है। परेश रावल ने कहा, ‘थोड़ी बेझिझक होकर कह रहा हूं कि अगर वे बाबूराव के बिना हेरा फेरी बनाने का आइडिया लेकर आगे बढ़ते हैं, तो यह फिल्म डिजास्टर होगी।’