Thursday, July 9, 2026
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T20 World Cup 2026 में भारत की सलामी जोड़ी लॉक, 14 साल बाद दोहराया जाएगा ICC टूर्नामेंट में इतिहास

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T20 World Cup 2026 में टीम इंडिया अपना पहला मुकाबला 7 फरवरी को खेलेगी। इस बीच करीब 14 साल बाद इतिहास दोहराये जाने की संभावना है। अब तक आईसीसी टूर्नामेंट में भारत ने दो ही बार ये काम किया है।T20 World Cup 2026 का आगाज 7 फरवरी से होना है। पहले मुकाबले में अब कुछ ही घंटे बाकी हैं। इस बीच टीम इंडिया ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। टीम को एक वार्मअप मैच मिला था, जिसे खेलकर अपनी तैयारियों और भी पुख्ता कर लिया है। इस बीच वार्मअप मैच से इस बात का अंदाजा मिल गया है कि भारत की सलामी जोड़ी क्या होगी। अगर ऐसा होता है कि करीब 14 साल पुराना इतिहास दोहराया जाएगा। जो अपने आप में एक कमाल ही है।

अभिषेक शर्मा और ईशान किशन कर सकते हैं टीम इंडिया के लिए पारी का आगाज
अभी हाल ही में जब भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 सीरीज खेली जा रही थी, तब टीम इंडिया की ओपनिंग की जिम्मेदारी अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन को दी गई थी। अभिषेक शर्मा ने तो अपने आक्रामक अंदाज में शानदार खेल दिखाते हुए खूब रन बटोरे, लेकिन संजू सैमसन बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुए। उन्हें उस सीरीज के सभी पांच मैचों में ओपनिंग की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन वे एक भी बार रन बनाने में कामयाब नहीं हो पाए। इस बीच तिलक वर्मा की गैरहाजिरी में तीसरे नंबर पर ईशान किशन खेलते हुए दिखाई दिए। जिन्होंने खूब रन ठोके। सीरीज के आखिरी और पांचवें मैच में तो उन्होंने सेंचुरी भी लगा दी। इसके बाद ही ये तय हो गया था कि टी20 विश्व कप के मैच जब शुरू होंगे तो ईशान किशन तो कम से कम बाहर नहीं ही बैठेंगे। अब तिलक वर्मा की भी वापसी हो चुकी है। उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ वार्मअप मैच भी खेला और रन भी बनाए।

तिलक वर्मा की वापसी से संजू सैमसन की हो सकती है छुट्टी
ऐसे में अब ईशान किशन और संजू सैमसन में से एक को ही मौका मिलेगा, ये भी तय हो गया है। अभी तक ऐसा लगता है कि संजू का ही पत्ता कटेगा। साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेल गए मैच में अभिषेक के साथ ईशान ने ही पारी का आगाज किया और अच्छी साझेदारी भी की। इस मैच में ईशान किशन ने केवल 20 बॉल पर 53 रन ठोक दिए और बाकी बल्लेबाजों की भी बारी आए, इसलिए रिटायर आउट होकर चले गए। जब ईशान किशन ने मैदान छोड़ा तब तक टीम इंडिया ने छठे ओवर में ही 80 रन पूरे कर लिए थे। ​अभिषेक शर्मा ने केवल 18 बॉल पर 24 रन बनाए और वे भी रिटायर आउट हो गए। यानी 7 फरवरी को जब टीम इंडिया उतरेगी तो ईशान और अभिषेक ही ओपनिंग करेंगे।

साल 2014 के बाद पहली बार आईसीसी इवेंट में दो बाएं हाथ के बल्लेबाज करेंगे ओपनिंग
इस बीच आईसीसी टूर्नामेंट के इतिहास में अब तक केवल दो ही बार ऐसा हुआ, जब टीम इंडिया के लिए सलामी जोड़ी के तौर पर दो बाएं हाथ के बल्लेबाज उतरे हों। साल 1999 के वनडे विश्व कप में ऐसा नजारा पहली बार दिखा था, तब सौरव गांगुली और सदगोपन रमेश ने पारी का आगाज किया था, दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हुआ करते थे। इसके बाद साल 2012 के टी20 विश्व कप में भी ऐसा ही दिखा था। तब गौतम गंभीर और इरफान पठान ने भारत के लिए पारी का आगाज किया था। उसके बाद अब ऐसा होने की संभावना है। जब 7 फरवरी को भारत और यूएसए के बीच मुकाबला खेला जाएगा तब अगर अभिषेक और ईशान की जोड़ी पारी का आगाज करती है तो करीब 14 साल बाद ऐसा होगा कि किसी आईसीसी टूर्नामेंट में भारत के लिए दो बाएं हाथ के बल्लेबाज नजर आएंगे।

सुपरस्टार का बेटा, कर्ज चुकाने के लिए छोड़ी पढ़ाई, सेट पर बनाई चाय, अब 6 ब्रैंड का है मालिक, कहलाता है विश्व सुंदरी का पति

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सिनेमा की दुनिया हर किसी पर मेहरबान नहीं रहती, फिर चाहे वो सुपरस्टार के ही बच्चे क्यों न हों। एक स्टारकिड ऐसा था जो अपने पिता की छवि से निकलने के प्रयास में सालों तक जूझता रहा। काफी मुश्किल दौर भी झेले, लेकिन आज 6 ब्रांड्स का मालि है।बॉलीवुड की दुनिया में अगर किसी नाम ने दशकों तक सबसे गहरी छाप छोड़ी है, तो वह हैं अमिताभ बच्चन। परदे पर एंग्री यंग मैन से लेकर सदी के महानायक बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। सुपरहिट फिल्मों, दमदार डायलॉग्स और बेमिसाल स्क्रीन प्रेजेंस के साथ-साथ उनकी निजी जिंदगी भी हमेशा सुर्खियों में रही, कभी सफलता के कारण तो कभी रेखा के साथ जुड़े किस्सों की वजह से। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक ऐसा दौर भी था, जिसे खुद अमिताभ बच्चन ने अपने जीवन का सबसे अंधकारमय समय बताया है। आज यह सोचना भी मुश्किल लगता है कि जिस शख्स को करोड़ों लोग भगवान की तरह पूजते हैं, वह कभी कर्ज़, अपमान और असहायता के भंवर में फंसा था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि उस संकट से उबरने के लिए उनके बेटे अभिषेक बच्चन को अपनी पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी।संघर्ष से स्टारडम तक
अमिताभ बच्चन का शुरुआती करियर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। एक के बाद एक फ्लॉप फिल्मों ने उन्हें हतोत्साहित कर दिया था और ऐसा लगने लगा था कि शायद किस्मत उनका साथ नहीं दे रही। फिर आया साल 1973 और साथ आई फिल्म ‘जंजीर’। इस एक फिल्म ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। अमिताभ रातोंरात स्टार बन गए और इंडस्ट्री में उनका सिक्का चलने लगा। पैसा, शोहरत और पहचान, सब कुछ उनके कदमों में था, लेकिन सफलता का यह दौर स्थायी नहीं रहा। अपने करियर के शिखर पर रहते हुए अमिताभ ने एक बड़ा सपना देखा, अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ABCL)। यह सिर्फ एक बिजनेस नहीं था, बल्कि उनका विजन था, जिसके जरिए वह फिल्म और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को नई दिशा देना चाहते थे। मगर यह सपना जल्द ही एक भयावह हकीकत में बदल गया।जब घर की देहलीज तक पहुंचा कर्ज
ABCL बुरी तरह असफल रही और देखते ही देखते हालात हाथ से निकल गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमिताभ बच्चन करीब 90 करोड़ रुपये के कर्ज में डूब गए। इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने इस दौर को याद करते हुए कहा था, ‘मेरे 44 साल के करियर का यह सबसे काला समय था।’ उन्होंने बताया कि लेनदार उनके घर तक पहुंच जाते थे, धमकियां, गालियां और रोज का मानसिक दबाव। हालात इतने खराब हो चुके थे कि घर की कुड़की तक की नौबत आ गई थी। जिस सुपरस्टार को देश सिर आंखों पर बैठाता था, वह भीतर ही भीतर पूरी तरह टूट चुका था।

बेटे ने छोड़ी पढ़ाई, निभाई जिम्मेदारी
इसी दौरान अमिताभ के बेटे अभिषेक बच्चन अमेरिका में बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। दूरी के बावजूद पिता की परेशानी उनसे छुपी नहीं रही। एक पॉडकास्ट में अभिषेक ने उस फैसले के बारे में खुलकर बात की, जिसने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी, लिबरल आर्ट्स और परफॉर्मिंग आर्ट्स की डिग्री अधूरी रह गई क्योंकि उनके पिता बेहद कठिन आर्थिक हालात से गुजर रहे थे। स्टार किड होने के बावजूद, अभिषेक ने आराम और सुरक्षा को पीछे छोड़ दिया। फिल्मों में मौका पाने के लिए उन्होंने प्रोडक्शन बॉय तक का काम किया। सेट पर चाय बनाना, छोटे-छोटे काम करना और हर मौके को सीखने के रूप में लेना, अभिषेक ने सब कुछ किया, ताकि परिवार इस मुश्किल दौर से बाहर निकल सके।
गिरकर फिर उठने की मिसाल
बच्चन परिवार ने हार मानने से इनकार कर दिया। अमिताभ ने दोबारा काम करना शुरू किया, एक-एक प्रोजेक्ट लिया और धीरे-धीरे सारा कर्ज़ चुका दिया। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ ने उनके करियर को नई ऊंचाइयाँ दीं और वह पहले से भी ज्यादा मजबूती के साथ लौटे। आज अमिताभ बच्चन इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित और प्रभावशाली सितारों में गिने जाते हैं। वहीं अभिषेक बच्चन ने भी अभिनय के साथ-साथ बिजनेस की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। उनकी नेट वर्थ करीब 280 करोड़ रुपये बताई जाती है। इस सफर में उनकी पत्नी विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय उनके साथ खड़ी नजर आईं।
बिजनेस की दुनिया में अभिषेक की मजबूत पकड़
अभिषेक बच्चन ने 2014 में स्पोर्ट्स एंटरप्रेन्योरशिप में कदम रखा, जब उन्होंने प्रो कबड्डी लीग की टीम जयपुर पिंक पैंथर्स खरीदी। खास बात यह रही कि इसी टीम ने उसी साल पहला PKL टाइटल जीत लिया। राज शमानी के साथ बातचीत में अभिषेक ने बताया कि इस निवेश से उन्हें 100 गुना से ज्यादा का प्रॉफिट हुआ है। इसी साल वह एमएस धोनी और वीटा दानी के साथ इंडियन सुपर लीग की फुटबॉल टीम चेन्नईयिन FC के को-ओनर भी बने। इस टीम ने 2015 और 2018 में ISL का खिताब जीता। अभिषेक अपने पिता के प्रोडक्शन हाउस AB Corp में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ‘पा’, ‘शमिताभ’ और ‘घूमर’ जैसी फिल्मों में वह एक सफल प्रोड्यूसर के तौर पर अपनी छाप छोड़ चुके हैं।
रियल एस्टेट और स्टार्टअप्स में निवेश
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार अमिताभ और अभिषेक बच्चन ने मिलकर देशभर में करीब 220 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी खरीदी है। इसके अलावा, मुंबई के मुलुंड वेस्ट में ओबेरॉय रियल्टी के एटरनिया प्रोजेक्ट में 24.95 करोड़ रुपये के 10 अपार्टमेंट भी उनके पोर्टफोलियो में शामिल हैं। 2022 में अभिषेक ने फूड ब्रांड नागिन में करीब 8 करोड़ रुपये का निवेश कर फूड एंटरप्रेन्योरशिप में कदम रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय ब्रांड्स को बढ़ावा देना उनके परिवार की फिलॉसफी का हिस्सा है। इसके अलावा 2015 में बच्चन परिवार ने सिंगापुर की क्लाउड स्टोरेज कंपनी Ziddu में निवेश किया, जिससे बाद में उन्हें करोड़ों का मुनाफा हुआ।

भारत बना वैश्विक AI-Impact Summit का लीडर, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस ने की इन शब्दों में तारीफ

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भारत आगामी 19 से 20 फरवरी तक वैश्विक एआई-इंपैक्ट समिट का नेतृत्व करने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मानवता और धरती की भलाई है। यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस ने इसके लिए भारत की सराहना की है।संयुक्त राष्ट्र: भारत आगामी 19 से 20 फरवरी तक चलने वाले वैश्विक एआई समिट का नेतृत्व कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) समिट के लिए भारत के नेतृत्व की सराहना की है। उन्होंने कहा कि एआई अंतरराष्ट्रीय संबंधों में “पूर्णतः महत्वपूर्ण मुद्दा” है और वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। गुटेरेस ने कहा कि वह 19-20 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाले इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 में भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं।पीएम मोदी ने किया था वैश्विक एआई समिट का ऐलान
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में एआई एक्शन समिट में इसका ऐलान किया था। भारत में हो रहा एआई-इंपैक्ट सम्मेलन ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाली पहली वैश्विक एआई समिट होगी। यह ‘पीपल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस’ के सिद्धांतों पर केंद्रित होगी। बुधवार को गुटेरेस ने कहा, “मैं वहां रहूंगा। मुझे इस बैठक में भाग लेने का मौका मिलने से बहुत खुशी है। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि आज एआई अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक बिल्कुल महत्वपूर्ण मुद्दा है और हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसलिए बहुत जरूरी है कि देश एक साथ आएं और इस पर चर्चा करें, सिविल सोसाइटी के साथ भी, सभी परिस्थितियों में।””और मैं भारत की इस समिट के संबंध में नेतृत्व संभालने की सराहना करता हूं।”
मानवता के विकास और धरती की रक्षा के लिए जरूरी
गुटेरेस ने कहा कि समिट में उनका संदेश ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट के निष्कर्षों से सीधे जुड़ा होगा। वे विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों और संस्थाओं को बताएंगे कि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की भूमिका क्या होगी, संवादों से क्या उम्मीद है, और विकासशील देशों में क्षमता निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कैसे बेहतर तरीके से जुटाया जा सकता है।…और मुझे लगता है कि भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जहां पहले से ही उल्लेखनीय क्षमता मौजूद है, यह उद्देश्य इस समिट का केंद्रीय लक्ष्य है। इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 ‘पीपल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस’ के सिद्धांतों पर आधारित है। यह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां, एआई मानवता को आगे बढ़ाए, समावेशी विकास को बढ़ावा दे और हमारी साझा धरती की रक्षा करे।

अंतरराष्ट्रीय एआई-वैज्ञानिक पैनल बनाने पर फोकस
इससे पहले 2024 के फ्यूचर समिट में अपनाए गए ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट ने खुले, सुरक्षित और समावेशी डिजिटल भविष्य की साझा दृष्टि निर्धारित की। इसमें एआई पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल बनाने की प्रतिबद्धता शामिल है, जो वैज्ञानिक समझ को आगे बढ़ाएगा और अंतरराष्ट्रीय विचार-विमर्श को सर्वोत्तम उपलब्ध साक्ष्यों से सूचित करेगा। इसके तहत गुटेरेस ने दुनिया के हर क्षेत्र से 40 प्रतिष्ठित व्यक्तियों की सिफारिश की है, जिनमें आईआईटी मद्रास के डेटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग के प्रमुख बलरामन रविंद्रन शामिल हैं। पैनल फ्यूचर पैक्ट में सदस्य देशों के जनादेश का सीधा जवाब है, जो उभरती तकनीकों के लिए बहुपक्षीय समाधान मजबूत करने का लक्ष्य रखता है। यह एआई ज्ञान अंतर को कम करने और अर्थव्यवस्थाओं तथा समाजों पर एआई के वास्तविक प्रभावों का आकलन करने वाला पहला वैश्विक, पूर्णतः स्वतंत्र वैज्ञानिक निकाय होगा।

मोबाइल की लत ने ले ली जान, भोपाल में 8वीं कक्षा के छात्र ने घर में फांसी लगाकर की आत्महत्या

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कथित तौर पर मोबाइल की लत ने एक छात्र की जान ले ली। 8वीं कक्षा के छात्र ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। आइए जानते हैं इस पूरी घटना के बारे में।मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र से सामने आई यह घटना दिल को झकझोर देने वाली है। भोपाल के श्रीराम कॉलोनी, छत्रसाल नगर निवासी आठवीं कक्षा के छात्र 14 साल के अंश साहू ने सोमवार दोपहर अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अंश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। पुलिस ने इस घटना को लेकर जांच शुरू कर दी है। आइए जानते हैं पूरा मामला।

क्या है पूरा मामला?
पड़ोसियों के मुताबिक, हाल ही में अंश के नाना का निधन हुआ था। सोमवार को उनकी तेरहवीं का कार्यक्रम था, जिसमें शामिल होने के लिए परिवार के सभी सदस्य ननिहाल गए थे। अंश घर पर ही रुक गया। दोपहर में जब परिजन उसे लेने वापस लौटे, तो घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी देर तक आवाज देने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया। पड़ोसियों और रिश्तेदारों की मदद से दरवाजा खोला गया, तो अंदर का दृश्य देखकर सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई। अंश पंखे से फंदे पर लटका हुआ था। परिजन तुरंत उसे नीचे उतारकर निजी अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घर में कुछ घंटों पहले तक मौजूद बच्चे की हंसी अचानक मातम में बदल गई।
ऑनलाइन गेम खेलने की लत लग गई थी
सूत्रों के मुताबिक अंश को ऑनलाइन गेम खेलने की लत लग गई थी। वह खतरनाक चैलेंज आधारित गेम खेलता था। इसी लत के चलते उसने अपनी मां के खाते से करीब 28 हजार रुपये ऑनलाइन गेम में ट्रांसफर कर दिए थे। पढ़ाई प्रभावित होने और व्यवहार में बदलाव के बाद करीब डेढ़ महीने पहले परिवार ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया था।
पंखे से लटका मिला शव
सोमवार को अंश ने मां के पर्स से मोबाइल निकालकर फिर से गेम खेलने की कोशिश की। मां ने उसे पकड़ लिया और डांट दिया। पुलिस की मानें तो इसी के बाद अंश बेहद चुप और परेशान रहने लगा। मंगलवार को जब माता-पिता किसी काम से बाहर गए, उसी दौरान अंश ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वापस लौटने पर परिजनों ने बेटे का शव पंखे से लटका देखा। सूचना मिलते ही पिपलानी पुलिस मौके पर पहुंची। पंचनामा बनाकर मर्ग कायम किया गया है। पुलिस ने अंश का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है और पूरे मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।

Train Accident: जाजपुर में चेन्नई सेंट्रल एक्सप्रेस ट्रेन हुई डिरेल, तीन कोच पटरी से उतरे, मचा हड़कंप

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ओडिशा के जाजपुर में चेन्नई सेंट्रल एक्सप्रेस ट्रेन डिरेल हो गई, ट्रेन के तीन कोच पटरी से उतर गए, जिसके बाद हड़कंप मचा है। रेलवे ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। जानें कैसे हुआ हादसा?ओडिशा के जाजपुर जिला में गुरुवार सुबह एक रेल घटना सामने आई। जखपुरा स्टेशन के पास चेन्नई सेंट्रल एक्सप्रेस ट्रेन के तीन कोच पटरी से उतर गए। यह घटना सुबह करीब 08:51 बजे हुई। जानकारी के अनुसार, ट्रेन यार्ड क्षेत्र से गुजर रही थी और उस समय उसकी रफ्तार काफी धीमी थी। डिरेल हुए कोचों में एक एसी कोच और दो जनरल कोच शामिल हैं। घटना के बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत राहत कार्य शुरू किया गया।रेलवे ने इस मामले में एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी करते हुए कहा,“ ट्रेन संख्या 22611 चेन्नई–न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस का जाजपुर यार्ड में सुबह 08:51 बजे मामूली डिरेलमेंट हुआ। इस दौरान एक एसी कोच और दो जनरल कोच पटरी से उतरे। घटना के समय ट्रेन बहुत धीमी गति से चल रही थी। इस हादसे में किसी भी यात्री की जान नहीं गई है और न ही कोई घायल हुआ है।”
रेलवे ने आगे अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया,“यात्री ट्रेन संचालन पूरी तरह सामान्य है। प्रभावित यात्रियों को उचित रूप से समायोजित किया जा रहा है। डिरेल हुए कोचों को अलग किया जा रहा है और यात्रियों की सुविधा के लिए जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कोच लगाए जाएंगे।”

रेलवे के मुताबिक, सूचना मिलते ही भुवनेश्वर और खुर्दा रोड से एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन और खुर्दा रोड से एक्सीडेंट रिलीफ मेडिकल इक्विपमेंट को सुबह 08:53 बजे घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया। इसके साथ ही भद्रक से भी एक रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजा गया है। रेलवे ने यह भी कहा,“वरिष्ठ रेलवे अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और बहाली एवं सुरक्षा से जुड़े सभी कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। डिरेलमेंट के कारणों की जांच की जा रही है और आगे की जानकारी समय पर साझा की जाएगी।” फिलहाल इस घटना में किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। डिरेलमेंट की सटीक वजह का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

औरैया में नवविवाहिता रहस्यमय ढंग से लापता, मानसिक रूप से कमजोर बहन की तलाश में भाई दर-दर भटका

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औरैया (उत्तर प्रदेश)।
थाना अजीतमल क्षेत्र के गांव अस्तु में एक नवविवाहिता महिला के अचानक लापता होने से पूरा परिवार सदमे में है। 25 वर्षीय सीमा देवी 4 जनवरी की सुबह घर से निकलीं और फिर वापस नहीं लौटीं। परिजनों का कहना है कि वह मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं थीं, जिसके कारण उनके रास्ता भटकने की आशंका जताई जा रही है। शिकायत के बावजूद अब तक पुलिस या प्रशासन उनकी कोई जानकारी नहीं जुटा सका है।

सुबह घर से निकलीं, फिर नहीं लौटीं
पीड़ित परिवार के अनुसार सीमा देवी पत्नी कन्हैयालाल 4 जनवरी को करीब सुबह 7 बजे सूट-सलवार और कोटी पहनकर अपने घर से बाहर निकली थीं। परिवार ने समझा कि वह शौच के लिए बाहर गई हैं, लेकिन काफी देर बाद भी जब वह नहीं लौटीं तो परिजनों में घबराहट फैल गई। आस-पड़ोस में खोजबीन की गई, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।

नवविवाहिता थी सीमा, दिमागी हालत ठीक नहीं
परिवार ने बताया कि सीमा देवी की शादी को महज ढाई से तीन महीने ही हुए थे। उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिसके कारण वह कई बार रास्ता भूल जाती थीं। इसी वजह से परिजनों को उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है। उनके भाई वीरेंद्र का कहना है कि वह लगातार बहन की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली।

थाने में सूचना, फिर भी कोई सुराग नहीं
लापता होने के तुरंत बाद परिवार ने थाना अजीतमल में लिखित सूचना दी थी। इसके बावजूद पुलिस अब तक न तो सीमा देवी को ढूंढ पाई है और न ही कोई ठोस जानकारी दे सकी है। इस देरी से परिवार बेहद परेशान और निराश है। स्थानीय लोग भी इस मामले में पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं।

भाई की भावुक अपील
सीमा के छोटे भाई वीरेंद्र ने रोते हुए कहा कि उनका परिवार टूटने की कगार पर है। उन्होंने जनता से अपील की है कि यदि किसी ने भी सीमा देवी को कहीं देखा हो तो तुरंत नजदीकी थाने में सूचना दें या मोबाइल नंबर 9696540336
पर संपर्क करें, ताकि एक बिखरते परिवार को सहारा मिल सके और एक भाई अपनी बहन से मिल सके।

आशंका और डर का माहौल
सीमा के लापता होने के बाद से गांव में दहशत का माहौल है। लोग आशंका जता रहे हैं कि कहीं वह भटककर दूर न चली गई हों या किसी अनजान व्यक्ति के झांसे में न आ गई हों। परिवार ने प्रशासन से तत्काल खोज अभियान चलाने की मांग की है।

यह मामला सिर्फ एक गुमशुदगी का नहीं, बल्कि एक संवेदनशील पारिवारिक संकट का है। अब देखना होगा कि पुलिस कब तक सक्रिय होती है और सीमा देवी को सुरक्षित वापस लाने में सफल होती है या नहीं।

 

गोण्डा में जमीन विवाद बना खूनी संघर्ष, दबंगों पर पूरे परिवार को उजाड़ने की कोशिश का आरोप

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गोण्डा।
इटियाथोक थाना क्षेत्र के रमवापुर गोविन्दा गांव में आबादी की जमीन को लेकर चला आ रहा विवाद अब हिंसक टकराव में बदल चुका है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गांव के दबंग सदाशिव पाण्डेय और उनके पुत्रों ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर न सिर्फ जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की, बल्कि महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों तक को नहीं बख्शा।

दिनदहाड़े हमला, लाठी‑डंडा और कुल्हाड़ी से मारपीट

पीड़ित सूर्य नारायण पाण्डेय, सुधीर कुमार, पवन कुमार और दिनेश कुमार के अनुसार 5 अक्टूबर 2025 को दोपहर करीब 12:30 बजे विपक्षीगण अवैध असलहा, सरिया, लाठी और कुल्हाड़ी लेकर घर के सामने स्थित आबादी की जमीन पर कब्जा करने पहुंचे। मना करने पर आरोपियों ने घर में घुसकर पूरे परिवार पर हमला कर दिया।

हमले में सूर्य नारायण, सुधीर कुमार, पवन कुमार और दिनेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। हालत गंभीर होने पर सूर्य नारायण को जिला अस्पताल से किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ रेफर किया गया, जहां सीटी स्कैन कराया गया।

महिलाओं और बच्चों के साथ अभद्रता

पीड़ितों का कहना है कि आरोपियों ने घर में मौजूद महिलाओं के साथ गाली‑गलौज और अभद्र व्यवहार किया। छोटे बच्चों पर भी ईंट‑पत्थर फेंके गए। परिवार में गर्भवती महिला और 8 वर्ष से कम उम्र के बच्चे मौजूद थे, जिससे पूरे गांव में दहशत फैल गई।

बीमार भाइयों को बनाया निशाना, दिल्ली में रहता है एक भाई

परिवार ने बताया कि सुधीर कुमार दिल्ली में काम करते हैं और वहीं रहते हैं। गांव में उनके दो बड़े भाई पवन कुमार और दिनेश कुमार गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर विपक्षी आए दिन मारपीट, धमकी और उत्पीड़न करते हैं। सुधीर की पत्नी संजू पाण्डेय अपने 6 बच्चों के साथ गांव में रहती हैं, जिन्हें लगातार डराया‑धमकाया जा रहा है।

गवाहों के शपथ‑पत्र, पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप

घटना के प्रत्यक्षदर्शी तिलक चन्द्र सहित कई ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक को शपथ‑पत्र देकर बताया कि सदाशिव और उनके पुत्रों ने खुलेआम जान से मारने और पूरे परिवार को गांव से उजाड़ देने की धमकी दी।

पीड़ितों का आरोप है कि थाना स्तर पर कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक और उच्च अधिकारियों को शपथ‑पत्र सहित प्रार्थना पत्र भेजना पड़ा।

दीवानी अदालत में भी चल रहा मामला

पीड़ित पक्ष के अनुसार आबादी की इसी जमीन को लेकर दीवानी न्यायालय में वाद विचाराधीन है, जिसकी अगली तारीख 12 दिसंबर 2025 नियत है। इसके बावजूद विपक्षी कानून को हाथ में लेकर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।

गांव में तनाव, प्रशासन से सुरक्षा की मांग

लगातार हो रही घटनाओं से गांव में तनाव का माहौल है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, अवैध कब्जा रुकवाने और जान‑माल की सुरक्षा की मांग की ।

ऑस्ट्रेलिया में 13 साल के लड़के से हारा समुद्र का सैलाब, उफनती लहरों में 4 घंटे तैर कर बचाई मां और छोटे भाई-बहन की जान

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ऑस्ट्रेलिया में 13 साल के एक लड़के अपनी जान पर खेलकर मां समेत पूरे परिवार की खतरनाक समुद्री लहरों से जान बचाई। मां और छोटे-भाई बहन को बचाने के लिए उसे समुद्री लहरों को 4 घंटे तैरकर पार करना पड़ा।मेलबर्न: पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तट पर उफनते समुद्र में 13 वर्षीय लड़के के एक हौसले ने उफनते समुद्री की खतरनाक लहरों को भी मात दे दी है। इस लड़के ने समुद्र में डूब रहे अपने छोटे भाई-बहन और मां को 4 घंटे तैरकर जान बचाई। इसके बाद वह अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हीरो बन गया है। उसका परिवार समुद्र में डूब रहा था। अधिकारियों को सूचना देने के लिए उसे 4 घंटे तैरकर खतरनाक समुद्री लहरों को पार कर तट पर पहुंचना पड़ा। उसने तट पर पहुंचकर अधिकारियों को सूचना दी, जिससे परिवार को बचाया जा सका। लड़के ने बताई आप बीती तो हर कोई रह गया हैरान
लड़के ने जब पूरी घटना की आपबीती बताई तो हर कोई हैरान रह गया। पर्थ से आए इस परिवार ने शुक्रवार सुबह होटल से किराए पर ली गई कयाक और पैडलबोर्ड्स पर सैर की थी। दोपहर से पहले शुरू हुई यह सैर तेज हवाओं और उफनते लहरों के कारण खतरनाक हो गई, और वे समुद्र में बहने लगे। इसके बाद 13 साल का ऑस्टिन एपलबी ने लगभग 4 किलोमीटर (2.5 मील) तैरकर तट पर पहुंचकर अलार्म बजाया। इससे पुलिस राहत और बचाव दल के साथ सक्रिय हो गई। ऑस्टिन ने मंगलवार को कहा, “लहरें बहुत बड़ी और खतरनाक थीं। मेरे पास लाइफ जैकेट नहीं था… मैं बस सोचता रहा ‘बस तैरते रहो, बस तैरते रहो’।” आखिरकार तट पर पहुंचकर वह बीच पर गिर पड़ा। उसने बताया कि शुरू में वह इन्फ्लेटेबल कयाक और लाइफ जैकेट लेकर निकला था, लेकिन कयाक में पानी भरने लगा तो उसे छोड़ दिया।

बिना लाइफ जैकेट पार की समुद्री की उफनती लहरें
ऑस्टिन ने बताया कि लाइफ जैकेट तैराकी में रुकावट बन रहा था, इसलिए उसे भी उतार दिया। उसने सकारात्मक विचारों पर फोकस किया। परिवार ने दोपहर से पहले सैर शुरू की थी। ऑस्टिन ने शाम 6 बजे अलार्म बजाया। शाम 8:30 बजे हेलीकॉप्टर ने उनकी मां जोआन एपलबी (47), भाई ब्यू (12) और बहन ग्रेस (8) को देखा। वे क्विंडालुप (पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया) से लगभग 14 किलोमीटर दूर बह गए थे और करीब 10 घंटे पानी में रहे। पुलिस इंस्पेक्टर जेम्स ब्रैडली ने कहा, “13 वर्षीय लड़के की कार्रवाई की जितनी प्रशंसा की जाए, कम है। उसकी दृढ़ता और साहस ने अंततः उसकी मां और भाई-बहनों की जान बचाई। “मां जोआन ने रिपोर्टर्स से कहा कि उन्होंने सबसे बड़े बच्चे को मदद के लिए भेजा क्योंकि वे सभी बच्चों को अकेला नहीं छोड़ सकती थीं।”

ऑस्टिन ने कहा-मेरे जीवन का कठिन फैसला
ऑस्टिन ने कहा- कि यह मेरे जीवन के सबसे कठिन फैसलों में से एक। जब उसकी मां ने कहा-‘तट पर पहुंचो और मदद लाओ। यह बहुत गंभीर हो सकता था।’हालांकि शुरू में उन्हें विश्वास था कि वह पहुंच जाएगा, लेकिन सूरज ढलने पर संदेह होने लगा। “हम सकारात्मक रहे, गाने गाते रहे, मजाक करते रहे… इसे खेल समझते रहे, लेकिन सूरज ढलने पर लहरें बहुत बड़ी हो गईं।” बचाव के समय तीनों कांप रहे थे और ब्यू के पैरों में ठंड से सुन्नता आ गई थी। जोआन ने कहा, “मेरे तीन बच्चे हैं। तीनों बच गए। बस यही मायने रखता था।”चारों परिवार के सदस्यों की मेडिकल जांच हुई, लेकिन किसी को अस्पताल में भर्ती नहीं करना पड़ा।

: राहुल गांधी ने रवनीत सिंह बिट्टू को “गद्दार” बोला, संसद परिसर में नेता प्रतिपक्ष और केंद्रीय मंत्री के बीच तीखी बहस

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संसद परिसर में बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी बहस हो गई। इसका वीडियो भी सामने आया है।नई दिल्ली: संसद परिसर में बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी बहस हो गई। राहुल गांधी ने बिट्टू पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “गद्दार” कहा, जिससे बीजेपी नेता ने तुरंत पलटवार किया। कड़ा जवाब देते हुए रवनीत बिट्टू ने कहा कि उनका “देश के दुश्मनों” से कोई लेना-देना नहीं है।
राहुल गांधी बोले- मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, कांग्रेस में फिर आओगे
जानकारी के अनुसार, जब केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू मकर द्वार पर विरोध कर रहे कांग्रेस सांसदों के पास से गुज़रे तो लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा “देखो, एक गद्दार यहीं से गुज़र रहा है। इसका चेहरा देखो…”। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिट्टू से हाथ मिलाने की पेशकश करते हुए कहा, “नमस्ते भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम वापस (कांग्रेस में) आ जाओगे। बता दें कि बिट्टू पहले कांग्रेस में थे और पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेताओं में उनकी गिनती होती थी। बाद में वह कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए और केंद्र सरकार में मंत्री बने।
बिट्टू ने राहुल गांधी पर किया पलटवार
वहीं, केंद्रीय मंत्री बिट्टू ने राहुल गांधी को “देश के दुश्मन…” कहकर संबोधित किया। कांग्रेस नेता पर पलटवार करते हुए बिट्टू ने उनसे हाथ मिलाने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों से कोई संबंध नहीं रखते जिन्हें वह देश का दुश्मन मानते हैं। इसके बाद दोनों नेताओं को एक-दूसरे से गरमागरम बहस करते देखा गया, फिर वे आगे बढ़ गए।
कांग्रेस सांसदों ने संसद की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया
‘PM समझौता कर चुके हैं’ का पोस्टर लिए कांग्रेस सांसदों को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर संसद की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन करते देखा गया। मंगलवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मीडिया से बात करते हुए यही आरोप लगाया था। मंगलवार को, कांग्रेस के सात और CPI-M के एक सहित आठ विपक्षी सदस्यों को अनुशासनहीन व्यवहार के लिए बजट सत्र के बाकी बचे समय के लिए निलंबित कर दिया गया।
निलंबित लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, बी. मणिक्कम टैगोर, डॉ. प्रशांत यादवराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।

मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: 620 करोड़ की 2 सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी, सरदार सरोवर विस्थापितों की रजिस्ट्री मुफ्त होगी

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मध्य प्रदेश कैबिनेट ने सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आवंटित आवासीय भूखंडो का पंजीयन फ्री कराये जाने का फैसला लिया है। साथ ही मंत्रि-परिषद द्वारा मैहर एवं कटनी जिले में 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 620 करोड़ 65 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा नर्मदा घाटी की सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आवंटित किए गए आवासीय भूखंडो का पंजीयन नि:शुल्क कराये जाने का निर्णय लिया गया। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अनुसार देय पंजीयन शुल्क एवं स्टॉम्य ड्यूटी की प्रतिपूर्ति नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा की जाएगी। इससे 25,600 से अधिक परिवारों को लाभ होगा। इस निर्णय से राज्य शासन पर 600 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा।मैहर एवं कटनी जिले की 2 सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी
मंत्रि-परिषद द्वारा मैहर एवं कटनी जिले में 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 620 करोड़ 65 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृति अनुसार मैहर एवं कटनी की धनवाही सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना लागत 53 करोड़ 73 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे 3500 हेक्टयर में सिंचाई की सुविधा प्राप्त होंगी और मैहर एवं कटनी जिले के 9 ग्राम के 2810 किसान लाभान्वित होंगे।

कटनी जिले की बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना लागत 566 करोड 92 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे, कटनी जिले की बरही एवं विजयराघवगढ़ तहसील के 27 ग्राम के 11,500 किसान लाभान्वित होंगे और 20 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होंगी।
इन 10 योजनाओं की निरंतरता को स्वीकृति
मंत्रि-परिषद द्वारा 6 विभागों की 10 योजनाओं की वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक निरंतरता के लिए 15,009 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृति अनुसार वित्त विभाग की लोक वित्त पोषित 500 करोड़ से कम की 8 योजनाओं के लिए 115 करोड़ 6 लाख रुपये, श्रम विभाग की मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना के लिए 5 हजार करोड़ रुपये, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की विधानसभा क्षेत्र निर्वाचन योजना और स्थापना एवं कार्यालयीन योजनाओं के लिए 3 हजार 376 करोड़ 66 लाख रुपये, पशु पालन एवं डेयरी विभाग की डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना, पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर ब्लॉकग्रांट योजना एवं पशुपालन, पशु विकास और गौ संवर्धन योजना के लिए 6 हजार 472 करोड़ 18 लाख रुपये, महिला एवं बाल विकास की किशोर कल्याण निधि योजना और घरेलू हिंसा पीड़िता के लिए सहायता योजना के लिए 24 करोड़ 70 लाख रूपये और पिछड़ा वर्ग एवं अन्य कल्याण की अल्पसंख्यक स्वरोजगार/उद्यम योजना के लिए 21 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
अन्य फैसले
मंत्रि-परिषद द्वारा मध्य प्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग कर कर्मचारियों का संविलयन महिला बाल विकास विभाग में करने की स्वीकृति प्रदान की गई।