Thursday, July 2, 2026
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‘संविधान हत्या दिवस’ पर पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी ने किया ट्वीट, इमरजेंसी को बताया काला इतिहास

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पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और यूपी के सीएम योगी समेत बीजेपी के कई मुख्यमंत्रियों और नेताओं ने इमरजेंसी की 51वीं बरसी पर कांग्रेस पर निशाना साधा है और आपातकाल को संविधान की हत्या करार दिया।
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत बीजेपी के सभी बड़े नेताओं ने इमरजेंसी की 51वीं बरसी पर बयान दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इमरजेंसी को भारत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बताया। एक्स हैंडल पर पीएम मोदी ने लिखा, ‘संविधान हत्या दिवस आज हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था। यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने को प्रेरित करता है। आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को सादर नमन। स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्। स्वातन्त्र्यान्निर्वृत्तिं गच्छेत् स्वातन्त्र्यात् परमं पदम्’। पीएम मोदी ने कहा कि इमरजेंसी हमारे संविधान पर सीधा हमला थी, जिसमें नागरिकों की आज़ादी छीन ली गई, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक लगाई गई, राजनीतिक लोगों और पत्रकारों को गिरफ़्तार किया गया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला किया गया।

अमित शाह ने भी इमरजेंसी को काला इतिहास बताया

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक्स हैंडल पर पोस्ट कर इमरजेंसी को काला इतिहास बताया। अमित शाह ने एक्स पर लिखा, ”25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी के सत्ता के अहंकार और लालच ने संविधान की आत्मा, प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार को कुचलने का प्रयास किया था। संविधान हत्या दिवस के अवसर पर लोकतंत्र के उन सभी सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं, जिन्होंने आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष कर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की। मोदी सरकार द्वारा 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का उद्देश्य इस काले अध्याय को राष्ट्र की स्मृति में जीवित रखना तथा यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र और संविधान पर ऐसा आघात कभी दोबारा न कर सके”।
सीएम योगी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साल 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक काला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश की संवैधानिक आत्मा को कुचलने के लिए “सत्ता के अहंकार” में यह आपातकाल लगाया था। सीएम योगी ने एक्स पोस्ट में कहा, ”25 जून, 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब ‘आपातकाल’ थोप कर देश की संवैधानिक आत्मा को कुचलने का प्रयास किया गया। सत्ता के अहंकार में कांग्रेस द्वारा थोपे गए ‘आपातकाल’ के अंधकार ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व नागरिक अधिकारों को गहरी चोट पहुंचाई। उस कठिन दौर में कठोर यातनाएं सहकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी महान लोकतंत्र सेनानियों को कोटिश: नमन”।
राजनाथ सिंह समेत बीजेपी के कई नेताओं ने भी कांग्रेस पर साधा निशाना

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत बीजेपी शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों ने भी आपातकाल को याद कर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। राजनाथ ने एक्स पर लिखा, 1975 में इसी दिन भारत में आपातकाल लगाया गया था। आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। उस दौरान बोलने और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक लगाई गई, न्यायपालिका को नियंत्रित और कमज़ोर करने की कोशिशें हुईं और लाखों नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन किया गया। आपातकाल हमें याद दिलाता है कि जब सत्ता में बैठे लोग तानाशाही रवैया अपनाते हैं, तो नागरिकों का जीवन, लोकतांत्रिक संस्थाएं और संवैधानिक मूल्य गंभीर ख़तरे में पड़ जाते हैं।

गोवा में समुद्र की लहरों के साथ खिलवाड़ कर रहा था पर्यटक, देखते ही देखते चली गई जान-VIDEO

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कर्नाटक से गोवा घूमने आया पर्यटक समुद्र तट के एकदम नजदीक बैठा हुआ था। समुद्र में तेज लहरें उठ रहीं थी। तभी वह समुद्र में जा गिरा। दोस्त इस घटना का वीडियो बना रहे थे।
गोवा के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बागा बीच पर एक दर्दनाक हादसे में कर्नाटक के बीजापुर से आए 33 वर्षीय पर्यटक की समुद्र में डूबने से मौत हो गई। इस घटना के बाद बीच पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई, जबकि प्रशासन ने एक बार फिर मानसून के दौरान समुद्र तटों पर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

दोस्तों के साथ आया था गोवा घूमने
जानकारी के अनुसार, मृतक पर्यटक अपने कुछ दोस्तों के साथ गोवा घूमने आया था। बताया जा रहा है कि वह बागा बीच पर समुद्र किनारे स्थित एक चट्टान पर बैठकर समुद्र का नजारा देख रहा था। इसी दौरान मानसून के कारण समुद्र में ऊंची और तेज लहरें उठ रही थीं। अचानक एक बड़ी लहर आई और उसे चट्टान से सीधे समुद्र में बहा ले गई।

समुद्र की तेज लहरों के बीच खुद को संभाल नहीं सका
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, समुद्र में गिरने के बाद पर्यटक ने खुद को बचाने की काफी कोशिश की। वह कुछ देर तक उफनती लहरों और तेज धाराओं के बीच वह बचने की कोशिश करता रहा, लेकिन समुद्र का बहाव इतना तेज था कि वह खुद को संभाल नहीं सका। देखते ही देखते वह गहरे पानी में चला गया और लोगों की नजरों से ओझल हो गया।

कई घंटों की मशक्कत के बाद शव बरामद
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, लाइफगार्ड्स और बचाव दल मौके पर पहुंचे। बचावकर्मियों ने तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू किया और समुद्र में उसकी तलाश की गई। काफी देर तक चले अभियान के बाद पर्यटक का शव समुद्र से बरामद किया गया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिस ने आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही मृतक के परिजनों को भी घटना की जानकारी दे दी गई है।
प्रशासन ने लोगों से की खास अपील
अधिकारियों का कहना है कि मानसून के मौसम में गोवा के समुद्र तटों पर लहरें सामान्य दिनों की तुलना में अधिक खतरनाक हो जाती हैं। इस हादसे के बाद प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि मानसून के दौरान समुद्र तटों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतें, चेतावनी संकेतों का पालन करें और ऊंची लहरों, चट्टानों तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों से दूर रहें।

गाजीपुर में आंधी-तूफान ने छीनी गरीब किसान की छत, घर गिरने के बाद खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर पांच सदस्यीय परिवार

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गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में आए तेज आंधी-तूफान ने एक गरीब किसान और मजदूर परिवार की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। वर्षों की मेहनत से बनाया गया कच्चा आशियाना कुछ ही मिनटों में मलबे में तब्दील हो गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घर पूरी तरह ढह जाने के बावजूद पीड़ित परिवार अब तक सरकारी आवास योजना के लाभ से वंचित है, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि गांव में कई ऐसे लोगों को आवास मिल चुका है जिनके घर पहले से सुरक्षित हैं।

मामला गाजीपुर जिले की तहसील कासिमाबाद के अंतर्गत थाना मोहम्मदाबाद क्षेत्र के ग्राम वासुदेवपुर का है। यहां रहने वाले सुरेंद्र राम पुत्र परीखान राम खेती और मजदूरी करके अपने पांच सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने टपरेनुमा कच्चा घर बनाकर किसी तरह परिवार के रहने की व्यवस्था कर रखी थी। यही घर उनके परिवार का एकमात्र सहारा था।

बुधवार को अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। तेज हवाओं का दबाव इतना अधिक था कि देखते ही देखते घर की दीवारें और छत भरभराकर गिर गईं। परिवार के सदस्य किसी तरह समय रहते बाहर निकल आए, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि घर में रखा सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया और परिवार का सब कुछ लगभग बर्बाद हो गया।

घर गिरने के बाद सुरेंद्र राम का परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। बरसात के मौसम में बच्चों और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि मजदूरी से होने वाली मामूली आय से दोबारा घर बनवाना उनके लिए संभव नहीं है।

सुरेंद्र राम ने बताया कि गांव में इस समय प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 25 से 30 आवास स्वीकृत हुए हैं, लेकिन उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया। उनका आरोप है कि जिन लोगों के पास पहले से रहने योग्य मकान हैं, उन्हें भी योजना का लाभ मिला है, जबकि उनका घर पूरी तरह ढह चुका है और फिर भी उन्हें आवास नहीं दिया गया।

ग्रामीणों का भी कहना है कि सुरेंद्र राम का परिवार लंबे समय से आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। प्राकृतिक आपदा के बाद उनकी स्थिति और दयनीय हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मौके का निरीक्षण कराया जाए, पीड़ित परिवार को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए और सरकारी आवास योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर उन्हें आवास स्वीकृत किया जाए।

बताया जा रहा है कि वर्तमान में ग्राम प्रधान धर्मेंद्र सिंह हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने पंचायत और जिला प्रशासन से भी सवाल उठाए हैं कि आखिर पूरी तरह बेघर हो चुके परिवार को अब तक योजना का लाभ क्यों नहीं मिला।

फिलहाल सुरेंद्र राम, उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं। अब पीड़ित परिवार की निगाहें जिला प्रशासन और सरकार की ओर टिकी हैं कि कब उन्हें राहत मिलेगी और कब उनके सिर पर फिर से एक सुरक्षित छत नसीब होगी।

पीड़ित का विवरण

नाम – सुरेंद्र राम पुत्र परीखान राम
ग्राम – वासुदेवपुर
पोस्ट – वासुदेवपुर
थाना – मोहम्मदाबाद
तहसील – कासिमाबाद
ब्लॉक – कासिमाबाद
जिला – गाजीपुर, उत्तर प्रदेश – 233222

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब गांव में आवास योजना के तहत दर्जनों लाभार्थियों का चयन हो चुका है, तब पूरी तरह बेघर हो चुके इस गरीब किसान परिवार को आखिर किस आधार पर योजना से बाहर रखा गया। यह सवाल गांव से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

सीतामढ़ी में विवाहिता पूजा कुमारी ने ससुराल पक्ष पर लगाया गंभीर उत्पीड़न का आरोप, कमरे में बंद कर बेरहमी से मारपीट करने का दावा

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सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले से एक विवाहिता के साथ कथित घरेलू उत्पीड़न का मामला सामने आया है। पीड़िता पूजा कुमारी और उसकी मां ने आरोप लगाया है कि ससुराल पक्ष द्वारा लंबे समय से उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। परिवार का कहना है कि हाल ही में पूजा के साथ कमरे में बंद कर गंभीर मारपीट की गई, जिसके बाद से पूरा परिवार भय और चिंता के माहौल में जी रहा है।

मामला जिले के बेलसंड थाना क्षेत्र के बसौल गांव का बताया जा रहा है। पीड़िता पूजा कुमारी की शादी मुकेश कुमार से हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे विभिन्न बातों को लेकर परेशान किया जाता रहा और कई बार उसके साथ मारपीट की घटनाएं भी हुईं।

जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पहले महिला थाना सीतामढ़ी में विवाद पहुंचा था, जहां आपसी सहमति से एक समझौता-पत्र तैयार किया गया था। समझौते में मुकेश कुमार ने भविष्य में पत्नी के साथ मारपीट नहीं करने, उसका भरण-पोषण करने तथा परिवार के अन्य सदस्यों को भी प्रताड़ना से रोकने का आश्वासन दिया था। वहीं पूजा कुमारी ने भी परिवार के साथ सामंजस्य बनाकर रहने और अपने दायित्व निभाने की बात कही थी।

लेकिन पीड़िता और उसके मायके पक्ष का आरोप है कि समझौते के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि ससुराल वालों ने फिर से पूजा को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और हाल ही में उसे कमरे में बंद कर बुरी तरह पीटा गया। घटना के बाद पूजा की मां लगातार प्रशासन से अपनी बेटी की सुरक्षा की गुहार लगा रही हैं।

पूजा की मां का कहना है कि उनकी बेटी की जान को खतरा है और यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो कोई बड़ी घटना हो सकती है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए अपनी बेटी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की अपील की है।

फिलहाल इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा का माहौल है। पीड़ित परिवार प्रशासन से न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ घरेलू हिंसा और अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

वर्ल्ड कप विजेता संदीप पाटिल मुंबई की टीम से जुड़े, संभालेंगे मेंटॉर की भूमिका

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वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य रहे पूर्व भारतीय क्रिकेटर को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें मुंबई की टीम में मेंटर की भूमिका संभालने का जिम्मा दिया गया है।
भारत ने साल 1983 में पहली बार ODI वर्ल्ड कप जीतकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। संदीप पाटिल वर्ल्ड कप जीतने वाली इस भारतीय टीम के अहम सदस्य थे, जिनकी लंबे समय बाद मुंबई क्रिकेट में वापसी हो गई है। संदीप पाटिल लगभग एक दशक बाद मुंबई क्रिकेट में फिर से नजर आएंगे। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन यानी MCA ने 1983 वर्ल्ड कप विजेता पाटिल को आने वाले घरेलू सीजन के लिए सीनियर और एज-ग्रुप मेन्स टीमों का टीम मेंटर नियुक्त किया है। MCA के प्रेसिडेंट अजिंक्य नाइक ने 23 जून को पाटिल की नियुक्ति की पुष्टि की। उन्हें मुंबई के सबसे कामयाब क्रिकेटरों में से एक होने के नाते घरेलू सीजन की तैयारी और अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है
पाटिल के लिए यह एक तरह से घर वापसी जैसा है। मुंबई के पूर्व कप्तान संदीप पाटिल क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेशन में आखिरी बार साल 2016 में एक्टिव भूमिका में थे, जब उन्होंने भारतीय टीम के चीफ सिलेक्टर के तौर पर चार साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सिलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था। पाटिल ने अक्टूबर 2022 में एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पद का चुनाव लड़ा था, लेकिन वे कड़े मुकाबले में दिवंगत अमोल काले से हार गए थे। इस हार ने उन्हें मुंबई क्रिकेट से दूर कर दिया था।

1983 वर्ल्ड कप जिताने में दिया अहम योगदान
पाटिल की पहचान सिर्फ उनके आक्रामक खेल तक ही सीमित नहीं है, जिसने 1983 में भारत की वर्ल्ड कप जीत में अहम भूमिका निभाई थी। 1986 में इंटरनेशनल क्रिकेट से जल्दी संन्यास लेने के बाद उन्होंने कोच और एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर शानदार काम किया। उन्होंने 1996 में कुछ समय के लिए भारत के हेड कोच के तौर पर काम किया और इंडिया ए के ​​कोच के तौर पर भी काफी सफल रहे। उन्होंने क्रिकेटरों की एक ऐसी पीढ़ी को तैयार करने में मदद की जिसमें युवा महेंद्र सिंह धोनी भी शामिल थे।

बतौर कोच दिखा चुके हैं जलवा
इंटरनेशनल लेवल पर पाटिल ने केन्या को 2003 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल तक पहुंचाकर खूब तारीफें बटोरीं थी। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु में नेशनल क्रिकेट एकेडमी की कमान संभाली और फिर 2012 से 2016 तक नेशनल सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन रहे। मेंटर की भूमिका में पाटिल मुंबई की सीनियर और अलग-अलग उम्र की टीमों के साथ काम करेंगे। वे घरेलू क्रिकेट की इस दिग्गज टीम के साथ अपना भरपूर अनुभव साझा करेंगे, जो 2025-26 सीजन में कोई ट्रॉफी न जीत पाने के बाद फिर से खिताब जीतने वाली लय हासिल करने की कोशि

मामा का तोहफा: हर नवजात शिशु को सोने की अंगूठी, योजना को लागू करने के लिए बनाई जाएगी एक अलग टीम

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नवजात शिशु को सीएम की तरफ से तोहफा दिया जाएगा। इसका ऐलान खुद सीएम ने चुनाव से पहले किया था। वहीं, अब योजना को लागू करने के लिए एक अलग टीम बनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व में तमिलनाडु सरकार हर रोज नए फैसले ले रही है। तमिलनाडु सरकार अब हर नवजात शिशु को सोने की अंगूठी देने जा रही है। इसको लेकर सीएम विजय ने खास टीम बना रही है। 15 सितंबर को शुरू की जाने वाली योजना ‘थाइमामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ (नवजात शिशुओं के लिए एक ग्राम सोने की अंगूठी) के क्रियान्वयन, निगरानी और प्रबंधन के लिए सरकार ‘राज्य परियोजना/ कार्यक्रम प्रबंधन इकाई’ बनाएगी।
अंगूठी की कीमत है 13 हजार से अधिक
राज्य के सरकारी अस्पतालों में पैदा होने वाले हर नवजात शिशु को सोने की अंगूठी मिलेगी। इसकी कीमत आज की दर से 13,600 रुपये होगी। यह अंगूठी परिवार में बच्चे के आने की खुशी में ‘थाईमामन सीर’ (मामा की तरफ से मिलने वाला तोहफा) नामक सांस्कृतिक परंपरा के तहत नवजात का स्वागत करने और परिवार को आशीर्वाद देने के लिए दी जाएगी। सरकार के एक आदेश में कहा गया है, ‘इस योजना के जरिए सरकार अपने संस्थानों में पैदा होने वाले हर बच्चे के लिए ‘मामा’ की भूमिका निभायेगी और स्वागत के तौर पर सोने की अंगूठी भेंट करेगी।’

मामा के तौर पर सोने की अंगूठी का तोहफा
सीएम विजय ने 23 अप्रैल के विधानसभा चुनाव से पहले वादा किया था कि वह राज्य में पैदा होने वाले हर बच्चे को मामा के तौर पर सोने की अंगूठी तोहफे में देंगे। 23 जून को जारी सरकारी आदेश में कहा गया है, ‘सरकारी चिकित्सा संस्थानों में पैदा होने वाले बच्चों के लिए एक ग्राम सोने की अंगूठी, ‘थाइमामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ योजना के तहत बच्चे के जन्म की खुशी और मातृत्व के महत्व का जश्न मनाने के साथ-साथ, सराहना और याद का प्रतीक है।’

सरकार ने कहा कि विजय इस योजना को आधिकारिक तौर पर 15 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन.अन्नादुरई की जयंती के मौके पर शुरू करेंगे, लेकिन यह योजना 22 जून (विजय के जन्मदिन) से ही लागू मानी जाएगी।

हर साल लगभग 755.83 करोड़ रुपये का खर्च
बता दें कि विजय ने दो साल पहले ‘तमिलगा वेत्री कषगम (TVK)’ नामक पार्टी बनाई थी। उनकी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी पार्टी राज्य की एकमात्र ऐसी राजनीतिक पार्टी बनी जिसने 107 सीट जीतीं तथा कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल तथा वामदलों के समर्थन से उसने गठबंधन सरकार बनाई। इस नई पहल (बच्चे के जन्म पर सोने की अंगूठी) के लिए हर साल लगभग 755.83

लापता हुई पांच बच्चों की मां का अब तक नहीं लगा सुराग, बाजार जाने के बाद रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हुई महिला

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मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां पांच बच्चों की मां बाजार जाने के लिए घर से निकली और फिर रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई। कई दिन बीत जाने के बाद भी महिला का कोई सुराग नहीं लग पाया है। परिजन लगातार उसकी तलाश में जुटे हुए हैं और लोगों से मदद की अपील कर रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार लापता महिला का नाम राधा बाई मरावी है, जिनकी उम्र लगभग 32 वर्ष बताई जा रही है। वह ग्राम चितोरा चौकी, उदयपुर डोभी क्षेत्र, जिला मंडला, मध्य प्रदेश की निवासी हैं। उनके पति का नाम शिवलाल मरावी है। परिवार के अनुसार दोनों का विवाह वर्ष 2011 के आसपास हुआ था और उनके पांच बच्चे हैं।

बताया जा रहा है कि शनिवार को राधा बाई घर से सोनिया बाजार से लापता है पूनिया बाजार जाने की बात कहकर निकली थीं। उसी समय उनके पति शिवलाल मरावी धान साफ करने के कार्य से बाहर गए हुए थे। शाम तक जब राधा बाई वापस घर नहीं लौटीं तो परिवार के लोगों की चिंता बढ़ गई। इसके बाद रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के गांवों में उनकी तलाश शुरू की गई, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिल पाई है।

परिजनों का कहना है कि राधा बाई पहले कभी इस तरह बिना बताए घर से नहीं गई थीं। उनके मायके पक्ष से भी अधिक संपर्क नहीं होने के कारण परिवार को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि वह वहां गई हैं या नहीं। ऐसे में महिला के अचानक गायब होने से परिवार के बीच चिंता और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।

महिला के लापता होने के बाद सबसे अधिक परेशानी उनके पांच छोटे बच्चों को हो रही है। मां के अचानक गायब हो जाने से बच्चे लगातार रो रहे हैं और परिवार के अन्य सदस्य भी गहरे सदमे में हैं। गांव में भी इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और लोग महिला के सकुशल लौटने की प्रार्थना कर रहे हैं।

पति शिवलाल मरावी ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को राधा बाई के संबंध में कोई भी जानकारी मिले तो तुरंत उनसे संपर्क कर परिवार की मदद करें। परिजन हर संभव स्तर पर महिला की तलाश में जुटे हुए हैं।

पति का पता

शिवलाल मरावी पुत्र टीकाराम मरावी
ग्राम सालेपानी
ग्राम पंचायत पोनिया
पोस्ट बम्हनी
तहसील निवास
जिला मंडला
मध्य प्रदेश – 481885

मोबाइल नंबर : 8817533989

लापता महिला का विवरण

नाम : राधा बाई मरावी
उम्र : लगभग 32 वर्ष
पति : शिवलाल मरावी
निवास : ग्राम चितोरा चौकी, उदयपुर डोभी, जिला मंडला, मध्य प्रदेश

यदि किसी व्यक्ति को राधा बाई मरावी के बारे में कोई भी जानकारी मिले तो कृपया मोबाइल नंबर 8817533989 पर संपर्क कर परिवार की सहायता करें।

रेलवे का मेगा प्लान! दिल्ली के चारों तरफ बनेंगे 3 नए रेल कॉरिडोर, हरियाणा, यूपी और राजस्थान के प्रमुख शहर होंगे सीधे कनेक्ट

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दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। आने वाले वर्षों में क्षेत्र की ट्रैफिक और परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के लिए दिल्ली के चारों तरफ तीन नए ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। आने वाले वर्षों में क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के लिए दिल्ली के चारों तरफ तीन नए ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इन कॉरिडोरों का उद्देश्य हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रमुख शहरों को सीधे जोड़ना है, ताकि यात्रियों और मालगाड़ियों को दिल्ली के भीड़भाड़ वाले नेटवर्क से होकर न गुजरना पड़े। इससे ट्रैफिक जाम कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और प्रदूषण पर भी कंट्रोल मिलेगा।
एनसीआर मास्टर प्लान-2041 के तहत प्रस्तावित इस परियोजना को क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में माना जा रहा है। यह नेटवर्क दिल्ली को बायपास करते हुए अलग-अलग राज्यों के औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इससे माल परिवहन भी तेज और सस्ता हो सकेगा।

हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर पर तेजी से काम
इस योजना की पहली कड़ी हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) है, जिस पर तेजी से निर्माण कार्य चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना का करीब 30 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यह नेटवर्क कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (KGP) एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को सोनीपत से जोड़ने में मदद करेगा।

पहला प्रस्तावित रेल कॉरिडोर
पहले ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर के तहत पलवल, खुर्जा, मेरठ, बागपत और सोनीपत को जोड़ने की योजना है। यह रूट पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।

दूसरा कॉरिडोर जोड़ेगा कई बड़े शहर
दूसरे रेल कॉरिडोर में सोनीपत, शामली, मेरठ, जेवर, नूंह, भिवाड़ी, रेवाड़ी, झज्जर, रोहतक और पानीपत को शामिल किया गया है। यह कॉरिडोर औद्योगिक क्षेत्रों और उभरते शहरी केंद्रों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।

तीसरा कॉरिडोर बनेगा सबसे लंबा नेटवर्क
तीसरे प्रस्तावित कॉरिडोर में करनाल, जींद, भिवानी, महेंद्रगढ़, नारनौल, बहरोड़, अलवर, डिबाई, गढ़मुक्तेश्वर, हस्तिनापुर, मुजफ्फरनगर और करनाल को जोड़ने का प्रस्ताव है। यह रेल नेटवर्क हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच क्षेत्रीय संपर्क को नई ऊंचाई देगा।

यात्रियों और उद्योगों को होगा बड़ा फायदा
इन रेल कॉरिडोरों के शुरू होने के बाद दिल्ली पर परिवहन का दबाव काफी कम होगा। साथ ही उद्योगों को बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधा मिलेगी और एनसीआर में आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। रेलवे की यह योजना भविष्य के स्मार्ट और कनेक्टेड एनसीआर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पद्म पुरस्कार के बाद अलका याग्निक ने बयां किया दर्द, सेहत पर दिया बड़ा अपडेट, बोलीं- मुश्किल दौर से गुजर रही हूं

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पद्म भूषण मिलने के बाद अलका याग्निक ने एक भावुक पोस्ट में अपनी सेहत को लेकर लोगों की चिंताओं पर बात की। सिंगर ने बताया कि सेहत से जुड़ी दिक्कतों के कारण वह दो साल तक लोगों के सामने नहीं आईं।
हिंदी सिनेमा की मशहूर प्लेबैक सिंगर अलका याग्निक, जिन्हें ‘सुरों की मलिका’ के नाम से भी जाना-जाता है। उन्होंने चार दशकों से भी अधिक समय तक बॉलीवुड की प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में अपना दबदबा कायम रखा। उन्हें भारतीय संगीत में उनके अहम योगदान के लिए मंगलवार, 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। समारोह में उनकी मौजूदगी ने उनकी सेहत को लेकर फैंस की चिंता बढ़ा दी है, जिस पर सिंगर ने एक इमोशनल पोस्ट शेयर कर अपनी हेल्थ अपडेट दी है।

पद्म भूषण मिलने के बाद अलका याग्निक का इमोशनल पोस्ट
सोशल मीडिया पर अलका याग्निक ने एक इमोशनल नोट शेयर किया, जिसमें उन्होंने अपना दर्द बयां किया। साथ ही इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए आभार जताया और अपनी हालिया सेहत की मुश्किलों और ठीक होने के सफर के बारे में भी खुलकर बताया। उन्होंने लिखा:

‘पिछले दो सालों से मैं लाइमलाइट, लोगों के सामने आने और अपने सफर के बारे में ज्यादा कुछ शेयर करने से दूर रही हूं। आप में से कई लोग जानते थे कि मैं सेहत से जुड़ी कई मुश्किलों से गुजर रही हूं और इस पूरे समय में आपके प्यार, दुआओं, मैसेज और अटूट समर्थन ने हर कदम पर मेरा साथ दिया है। आज, जब मैं देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक – प्रतिष्ठित पद्म भूषण को लेने के लिए बाहर निकली तो मेरा दिल आभार से भरा हुआ था।’
अलका याग्निक ने पद्म भूषण मिलने पर जताई खुशी
इसके अलावा, सिंगर अलका याग्निक ने इस सम्मान को बहुत विनम्र करने वाला बताया और कहा कि भले ही उनका नाम अवॉर्ड पर हो, लेकिन यह हर उस सुनने वाले का है, जिसने उनकी आवाज को अपनी जिंदगी में अपनाया, उनके गानों को पीढ़ियों तक पहुंचाया, सुख और मुश्किल वक्त दोनों में उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने कहा कि यह पल खास तौर पर मायने रखता है, क्योंकि यह न सिर्फ उनके काम की पहचान दिखाता है, बल्कि प्यार, उम्मीद और हिम्मत से मिलने वाली ताकत की याद भी दिलाता है। उन्होंने इसी इमोशनल नोट में आग लिखा:

‘मैं धीरे-धीरे अपना रास्ता वापस पा रही हूं और मैं आज यहां होना चाहती थी। न सिर्फ अपने लिए, बल्कि आप में से हर एक के लिए जो इस सफर का हिस्सा रहे हैं। मैं इस सम्मान के लिए राष्ट्रपति मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्रालय और भारत सरकार का भी दिल से शुक्रिया अदा करती हूं।’

गंभीर बीमारी से जूझ रहीं अलका याग्निक
2024 में अल्का ने फैंस को यह बताकर चौंका दिया था कि वह ‘सेंसरी नर्व हियरिंग लॉस’ जैसी एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही हैं, जो एक वायरल संक्रमण के कारण हुआ था। इस वजह से उन्हें लाइमलाइट से दूर होना पड़ा। अल्का की आवाज आखिरी बार इम्तियाज अली की फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ में सुनाई दी थी।

भारत ने UNSC की बैठक में पाकिस्तान को लताड़ा, कश्मीर का जिक्र किया तो दिखाया आईना

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनैनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ‘एरिया-फॉर्मूला’ बैठक का राजनीतिकरण करने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की।
न्यूयॉर्क: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में कश्मीर का जिक्र करने पर पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ‘एरिया-फॉर्मूला’ की बैठक में पाकिस्तान ने कश्मीर का जिक्र किया तो संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने करारा जवाब दिया। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान ‘एरिया-फॉर्मूला’ बैठक का राजनीतिकरण कर रहा है और वह अनावश्यक टिप्पणी कर रहा है।

भारत ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाब

बैठक में पर्वथनेनी ने चर्चा के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि और सह-अध्यक्ष की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “मैं पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा की गई अनावश्यक टिप्पणियों का भी ज़िक्र करना चाहता हूं। यह हैरानी की बात है कि एक सह-अध्यक्ष, जिससे अपने आचरण में संतुलित और निष्पक्ष रहने की उम्मीद की जाती है, उसने इस मंच का राजनीतिकरण करने का फ़ैसला किया। समय की कमी को देखते हुए मैं बस इतना ही ज़ोर देकर कहना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगे।

हरीश का यह बयान संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत आसिम इफ़्तिखार अहमद द्वारा बैठक में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने के बाद आईं। यह बैठक संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और चीन के स्थायी मिशनों द्वारा आयोजित की गई थी। पाकिस्तान अभी UN सुरक्षा परिषद (UNSC) के गैर-स्थायी सदस्य के तौर पर 2025 और 2026 के लिए चुने गए दो साल के कार्यकाल में सेवा दे रहा है।

क्या होती है ‘एरिया-फॉर्मूला’ बैठकें

बता दें कि ‘एरिया-फॉर्मूला’ बैठकें अनौपचारिक और गोपनीय होती हैं, जिनमें सुरक्षा परिषद के सदस्य और आमंत्रित प्रतिभागी लचीले माहौल में अपने विचार साझा कर सकते हैं। चर्चा के मुख्य विषय पर विस्तार से बात करते हुए, हरीश ने कहा कि UN सुरक्षा परिषद की ज़िम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है और UN चार्टर में चैप्टर VI और VII के तहत विवादों को सुलझाने के लिए अलग-अलग तरीके बताए गए हैं। उन्होंने बताया कि ये दोनों चैप्टर स्वभाव में अलग हैं और इनका इस्तेमाल अलग-अलग स्थितियों में होता है।

हरीश ने कहा कि चैप्टर VII के उपायों का मकसद शांति के लिए खतरा, शांति भंग होने और आक्रामकता जैसी स्थितियों में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना या उसे बहाल करना है और अगर इन्हें लागू नहीं किया गया तो गंभीर नतीजे हो सकते हैं। राजदूत ने कहा कि चैप्टर VI “बुनियादी तौर पर अलग” है और इसमें कई तरह के विकल्प दिए गए हैं ताकि ऐसी स्थितियों से निपटा जा सके जिनके जारी रहने से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा हो सकता है।