Thursday, July 9, 2026
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विधवा का रास्ता रोक सरकारी बांध पर कब्जा, दबंग परिवार जबरन बना रहा घर—न्याय के लिए भटक रही रेखा देवी

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बेगूसराय/भगवानपुर (विशेष संवाददाता)।
भगवानपुर थाना क्षेत्र के खखना जोकिया गांव में जमीन और रास्ते को लेकर चल रहा विवाद अब मानवीय संकट में बदल चुका है। विधवा महिला रेखा देवी ने आरोप लगाया है कि दबंग परिवार सरकारी वाटरवेज (बांध) की जमीन पर जबरन घर बना रहा है और उनके घर का इकलौता रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पति के निधन के दो साल बाद चार बच्चों के साथ जीवन बसर कर रही रेखा देवी न्याय के लिए पंचायत, कचहरी और विभागीय दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही।

पीड़िता के मुताबिक, 18 जनवरी 2026 को उन्होंने कचहरी में आवेदन देकर शिकायत की थी कि रामलाल सहनी (पिता स्व. सीताराम सहनी, ग्राम खखना जोकिया) ने उनके घर के सामने की वाटरवेज जमीन पर कब्जा कर रास्ता अवरुद्ध कर दिया है। पंचायत में दोनों पक्षों को बुलाया गया, लेकिन समझौता नहीं हो सका। रेखा देवी का आरोप है कि रामलाल सहनी साफ कह रहे हैं कि “रास्ता नहीं देंगे और घर बनाकर ही रहेंगे।”

रेखा देवी का घर खाता नं. 675, खेसरा नं. 733-734, थाना नं. 409 पर स्थित है, जबकि जिस जगह पर निर्माण किया जा रहा है वह सरकारी वाटरवेज बांध की जमीन बताई जा रही है। शिकायत के अनुसार, विरोध करने पर रामलाल सहनी, उनकी पत्नी भगवती देवी और परिवार के लोग गाली-गलौज, धमकी और डराने-धमकाने पर उतर आते हैं। कई बार रास्ते से निकलने पर बदसलूकी की गई है।

पीड़िता ने जल संसाधन विभाग, दलसिंहसराय के कार्यपालक अभियंता को भी लिखित आवेदन देकर अवैध निर्माण रोकने और रास्ता खुलवाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह निर्माण पूरा हो गया तो उनके खेत तक जाने का कोई रास्ता नहीं बचेगा और उनका परिवार पूरी तरह बेघर जैसा हो जाएगा।

गंभीर आरोप यह भी है कि आरोपी परिवार “दरभंगा प्रवृत्ति” का है और पैसों के दम पर हर जगह मामला दबाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर प्रभाव के कारण कहीं भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। चार बच्चों की मां रेखा देवी के पास न तो मजबूत कानूनी सहायता है और न ही आर्थिक साधन, फिर भी वह अपने अधिकार के लिए लड़ रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला सिर्फ रास्ते का नहीं, बल्कि सरकारी जमीन पर कब्जे और विधवा महिला के उत्पीड़न का है। यदि प्रशासन ने तत्काल संज्ञान नहीं लिया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

रेखा देवी ने जिला प्रशासन से तत्काल स्थल निरीक्षण, अवैध निर्माण रोकने, रास्ता बहाल करने और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। यह मामला ग्रामीण क्षेत्र में जमीन विवाद, दबंगई और न्याय व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है।

 

एपस्टीन फाइल्स से दुनिया की राजनीति में भूचाल, अमेरिका से नॉर्वे तक हो रहे ताबड़तोड़ इस्तीफे

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जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों से जिस तरह के खुलासे हुए हैं उससे कई देशों में सियासी हड़कंप मच गया है। बड़े पदों पर बैठे तमाम लोग जांच के घेरे में आ गए हैं और इस्तीफों की झड़ी लग गई है।pstein Files: एपस्टीन फाइल्स ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा रखा है। कुख्यात अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलें सामने आने के बाद पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है। इसका प्रभाव राजनीतिक हलकों तक में देखने को मिल रहा है। जेफरी एपस्टीन कुख्यात सेक्स ट्रैफिकिंग स्कैंडल के केंद्र में था जिसकी मौत हो चुकी है। एपस्टीन की मौत के बाद जारी हुए दस्तावेजों में कई हाई-प्रोफाइल नामों का खुलासा हुआ है। इन नामों के सामने आने से अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और नॉर्वे जैसे देशों में सियासी भूचाल आ गया है और इस्तीफों की झड़ी लग गई है।
ब्रिटेन में सियासी हलचल
एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद सबसे पहले ब्रिटेन में हलचल मची। पूर्व ब्रिटिश राजदूत पीटर मेंडेलसन ने लेबर पार्टी से इस्तीफा दे दिया। दस्तावेजों से पता चला कि एपस्टीन ने उनके जुड़े खातों में तीन बार 25,000 डॉलर का भुगतान किया था। मेंडेलसन, जो हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य भी थे, ने इस्तीफा देते हुए कहा कि वो पार्टी को और शर्मिंदगी से बचाना चाहते हैं। मेंडेलसन के अलावा पीएम स्टार्मर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को भी इस्तीफा देना पड़ा है। मैकस्वीनी ने ही मेंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाने की सलाह दी थी। मैकस्वीनी ने माना कि यह सलाह गलत थी और इसकी जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ दिया। स्टार्मर ने एंड्र्यू (पूर्व प्रिंस) से अमेरिकी कांग्रेस के सामने गवाही देने की मांग की है। मेंडेलसन के अलावा, ब्रिटेन में अन्य राजनीतिक हस्तियां भी जांच के घेरे में हैं।

फ्रांस में पूर्व संस्कृति मंत्री ने छोड़ा पद
फ्रांस में भी एपस्टीन फाइल्स ने हड़कंप मचा दिया है। पूर्व संस्कृति मंत्री जैक लैंग ने अरब वर्ल्ड इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। फाइलों में उनका नाम 673 बार आया है, जिसमें एपस्टीन के साथ 2012 से 2019 तक की ईमेल और संपर्कों का जिक्र है। लैंग ने आरोपों को निराधार बताते हुए इस्तीफा दिया है। भले ही लैंग ने आरोपों को निराधार बताया हो लेकिन फ्रांस में उनके खिलाफ वित्तीय जांच शुरू हो चुकी है। उनकी बेटी कैरोलाइन लैंग, जो फिल्म प्रोड्यूसर्स ग्रुप की प्रमुख थीं ने भी पद छोड़ दिया है।

नॉर्वे में मचा हड़कंप
नॉर्वे में एपस्टीन फाइल्स का ऐसा असर हुआ है कि पूर्व प्रधानमंत्री थोर्बजोर्न जैगलैंड पर गंभीर भ्रष्टाचार के संदेह में पुलिस जांच शुरू हो गई है। फाइलों में उनके और एपस्टीन के बीच कई ईमेल एक्सचेंज मिले हैं। जैगलैंड, जो नोबेल शांति पुरस्कार समिति के पूर्व अध्यक्ष भी थे, ने आरोपों से इनकार किया है। जैगलैंड के इनकार से इतर जांच जारी है। नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेट्टे-मैरिट ने एपस्टीन से संपर्क पर गहरा अफसोस जताया और इसे शर्मनाक बताया है। उनकी डिप्लोमैट मोना जुल को निलंबित कर दिया गया है, जबकि जॉर्डन में नॉर्वे के राजदूत ने पद छोड़ दिया है।

इस्तीफों की लगी है झड़ी
अमेरिका में भी एपस्टीन फाइल्स की वजह से इस्तीफों की झड़ी लगी है। वॉल स्ट्रीट लॉ फर्म पॉल, वीस के चेयरमैन ब्रैड कार्प ने पद छोड़ दिया है। फाइलों से एपस्टीन के साथ उनके डिनर और ईमेल का खुलासा हुआ है। पूर्व बार्कलेज सीईओ जेस स्टाले ने पहले ही इस्तीफा दिया था। इसके अलावा स्लोवाकिया में पूर्व विदेश मंत्री मिरोस्लाव लाजकाक ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया। स्वीडन में स्वीडिश UNHCR की अध्यक्ष जोआना रुबिनस्टीन ने भी पद छोड़ा है।

तीस हजारी कोर्ट में कोर्ट रूम के अंदर जज के सामने मारपीट, CJI ने जताई नाराजगी, बोले- यह न्याय तंत्र के लिए खतरे की घंटी

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तीस हजारी कोर्ट के कोर्ट रूम में वकील के साथ मारपीट की CJI ने कड़ी आलोचना की है। CJI ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब कोर्ट रूम के अंदर ही वकील सुरक्षित नहीं हैं तो यह पूरे न्याय तंत्र के लिए खतरे की घंटी है।दिल्ली की तीस हजारी जिला अदालत में कोर्ट रूम के भीतर मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। यहां जज के सामने कोर्ट में वकील को तब पीट दिया गया, जब वह एक आरोपी का पक्ष पेश कर रहे थे। पीड़ित वकील के इस केस की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। उन्होंने CJI के सामने बताया कि जब वह एक आरोपी की ओर से पेश हो रहे थे, तब दूसरे पक्ष के वकील कुछ लोगों के साथ जबरन अदालत कक्ष में घुस आए। उस वक्त जज कोर्ट में बैठे थे, लेकिन फिर भी वकील पर हमला किया गया। वकील ने कहा कि पुलिस ने कोई मदद नहीं की।
कोर्ट में गुंडागर्दी पर CJI की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की मेंशनिंग के दौरान CJI सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह का ‘गुंडाराज’ बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह कानून के राज की सीधी नाकामी है। दोषियों पर सख्त एक्शन होगा।
CJI ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
CJI सूर्यकांत ने वकील को सलाह दी कि वह पहले दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखित शिकायत दें। साथ ही, उस शिकायत की एक प्रति उन्हें भी भेजें। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने भरोसा दिलाया कि मामला प्रशासनिक स्तर पर देखा जाएगा और जरूरी कार्रवाई होगी।
यह पूरे न्याय तंत्र के लिए खतरे की घंटी- CJI
वकील ने बताया कि यह घटना बीते 7 फरवरी की है और उस वक्त अदालत में जज समेत तमाम ज्यूडिशियल अधिकारी मौजूद थे। CJI ने साफ कहा कि अदालत परिसर में हिंसा होना बेहद गंभीर बात है। अगर कोर्ट के अंदर ही वकील सुरक्षित नहीं हैं, तो यह पूरे न्याय तंत्र के लिए खतरे की घंटी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं पर सख्त कदम उठाना जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत न करे।

सोना-चांदी ने बदला रंग! 2200 महंगा हुआ गोल्ड, चांदी के दाम में भी आई बड़ी उछाल; जानें आज का भाव

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भारतीय सर्राफा बाजार में हफ्ते की शुरुआत में ही सोना और चांदी के भाव में तेजी का रुझान देखने को मिला है, जिससे निवेशकों और जेवरात खरीदारों दोनों की नजरें बाजार पर टिकी हुई हैं। MCX पर 24 कैरेट सोने का भाव 2200 रुपये प्रति 10 ग्राम तक बढ़ गया। जानें आज क्या है चांदी का भाव।Gold Silver Price today: भारतीय सर्राफा बाजार में आज एक बार फिर सोने और चांदी की कीमतों ने छलांग लगा दी। शादियों के सीजन के बीच आई तेजी ने जहां आम खरीदारों के बजट को बिगाड़ दिया है, वहीं निवेशकों के चेहरे पर चमक ला दी है। सोमवार को बाजार खुलते ही सोने की कीमतों में 2200 रुपये प्रति 10 ग्राम की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमतों में 12,000 रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार को सुबह 9:05 बजे चांदी 12,605 रुपये की तेजी के साथ 2,62,497 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई। गोल्ड की बात की जाए तो बीते ट्रेडिंग सेशन से करीब 2200 रुपय चढ़कर सोना 1,57,655 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है। वहीं, 22 कैरेट सोने की कीमत 1,44,037 रुपये और 18 कैरेट की कीमत 1,17,848 रुपये पहुंच गई है।

क्यों बढ़ी कीमतों में आग?
वैश्विक और घरेलू दोनों ही स्तरों पर कुछ ऐसे फैक्टर्स एक्टिव हुए हैं जिन्होंने पीली धातु को ‘रॉकेट’ बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक अब शेयर बाजार के बजाय सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी को प्रायोरिटी दे रहे हैं। इसके अलावा, भारत में शादियों का सीजन अपने चरम पर है, जिससे जेवरों की मांग में अचानक भारी वृद्धि हुई है। मांग और आपूर्ति के इसी असंतुलन ने घरेलू बाजार में कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है।

खरीदारों और ज्वेलर्स की राय
सर्राफा विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में आई 10 हजार रुपये की तेजी पिछले कई महीनों में सबसे बड़ी एकदिनी तेजी है। दिल्ली के कई बड़े जौहरी का कहना है कि हमें उम्मीद थी कि भाव बढ़ेंगे, लेकिन इतनी बड़ी तेजी ने ग्राहकों को चौंका दिया है। कई लोग जो आज बुकिंग करने वाले थे, वे अब भाव गिरने का इंतजार कर रहे हैं।

9 फरवरी: आज ही के दिन शुरू हुई थी आजाद भारत की पहली जनगणना, तब कितनी थी आबादी, आज कितनी है? जानिए

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9 फरवरी की तारीख को भारत की जनगणना के लिहाज से काफी अहम दिन माना जाता है। आजाद भारत की पहली जनगणना आज ही के दिन 1951 में शुरू की गई थी।भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश बन चुका है। अनुमान के मुताबिक, भारत की आबादी 147 करोड़ से भी ज्यादा है। ऐसे में इतनी बड़ी आबादी की गिनती यानी जनगणना भी एक महत्वपूर्ण काम है। इस प्रक्रिया को भारत के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्यों में से एक माना जाता है। ऐसे में 9 फरवरी का इतिहास इसी जनगणना से जुड़ा है। आपको बता दें कि 9 फरवरी 1951 को ही आजाद भारत की पहली जनगणना शुरू की गई थी। आइए जानते हैं कि तब कितनी थी हमारे देश की आबादी।

कब से कब तक चली थी पहली जनगणना?
आजाद भारत की पहली जनगणना साल 1951 में आयोजित की गई थी। इस जनगणना की अवधि 9 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक थी। इसके बाद 1 मार्च से 3 मार्च तक पुनरीक्षण का कार्य किया गया। इस जनगणना में लोगों से उनके नाम, संबंध, जन्म स्थान, लिंग, आयु, आर्थिक स्थिति, आजीविका के मुख्य और सहायक साधन, धर्म, मातृभाषा और साक्षरता जैसी जानकारी ली गई। आपको बता दें कि भारत के बंटवारे की वजह से देश की सीमाएं बदलने, बड़ी संख्या में लोगों के पलायन और धार्मिक तौर पर जनसंख्या का अनुपात बदलने के कारण ये 1951 की जनगणना काफी अहम थी।

1951 में कितनी थी भारत को जनसंख्या?
1951 में आयोजित की गई आजाद भारत की पहली जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 36,10,88,090 दर्ज की गई थी। आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान भारत की आबादी का केवल 18 प्रतिशत हिस्सा ही साक्षर था और भारत की औसत जीवन प्रत्याशा सिर्फ 32 वर्ष थी। भारत में प्रति 1000 पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का लिंगानुपात 946 का था। भारत की आबादी में 84.1 प्रतिशत हिन्दू, 9.8 प्रतिशत मुस्लिम, 2.3 प्रतिशत ईसाई, 1.9 प्रतिशत सिख और इसके अलावा कुछ अन्य धर्मों की संख्या भी थी।

वर्तमान में कितनी है भारत की आबादी?
भारत वर्तमान समय में चीन को पीछे छोड़ कर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन चुका है। PIB के मुताबिक, भारत की जनसंख्या में प्रतिवर्ष 1.5 करोड़ लोगों की वृद्धि होती है, जो विश्व में सबसे अधिक है। विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा भारत में रहता है। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की वर्तमान आबादी 1 अरब 47 करोड़ को पार कर चुकी है। भारत की साक्षरता दर वर्तमान में 80 प्रतिशत से भी ज्यादा है। धार्मिक तौर पर आबादी की बात करें तो भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार हिंदू आबादी 79.8 प्रतिशत, मुस्लिम आबादी 14.2 प्रतिशत, ईसाई आबादी 2.38 फीसदी, सिख आबादी 1.7 फीसदी है।

भारत में जनगणना का इतिहास
भारत में जनगणना हर 10 साल के बाद आयोजित की जाती रही है। साल 2011 में आखिरी जनगणना का आयोजन किया गया था लेकिन कोरोना महामारी ओर अन्य कारणों की वजह से 2021 की जनगणना में देरी हुई। भारत में नियमित तौर पर जनगणना का ताजा इतिहास ब्रिटिशकाल में माना जाता रहा है। अंग्रेज वायसराय लॉर्ड मेयो ने 1872 में पहली बार जनगणना कराई। हालांकि, नियमित तौर पर जनगणना का आयोजन 1981 से शुरू हुआ। इसके बाद से हर 10 साल के अंतराल में भारत में जनगणना शुरू की गई। इसका मकसद जनसंख्या, साक्षरता, व्यवसाय और धर्म का डेटा एकत्र करना था। हालांकि, अगर इतिहास में जाएं तो प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद, कौटिल्य के अर्थशास्त्र, मुगल बादशाह अकबर की ‘आईन-ए-अकबरी’ आदि में भी भारत की जनगणना का उल्लेख मिलता है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुटा विपक्ष-सूत्र

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विपक्षी दल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए विपक्षी दल लामबंद हो रहे हैं और जल्द ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है।नई दिल्ली: विपक्ष अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है। सूत्रों के मुताबिक विपक्षी दल इस तैयारी में जुट गए हैं। दरअसल, बजट सत्र की शुरुआत ही काफी हंगामेदार रही है। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के बाद हर रोज सदन की कार्यवाही में बाधा आई और स्पीकर को लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। वहीं विपक्ष की ओर से भी स्पीकर पर भेदभाव का आरोप लगाया जाता रहा है। अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक अब विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। आज भी लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले तमाम विपक्षी नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पहुंचे थे जहां उनकी एक मीटिंग हुई।

पक्ष और विपक्ष में रार
बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार इतनी बढ़ गई कि प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब तक नहीं दे पाए। विपक्ष खासतौर से कांग्रेस की महिला सांसदों ने उनकी सीट घेर रखी जिसके कारण उन्हें अपना भाषण स्थगित करना पड़ा।
लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपने की तैयारी
बजट सत्र के दौरान विपक्ष के तेवर को देखते हुए स्पीकर ने बार-बार उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन विपक्ष के सांसद हंगामे पर उतारू रहे और सदन के काम काज में बाधा आती रही। विपक्ष के 8 सांसदों को सदन के कामकाज में बाधा पहुंचाने के चलते निलंबित भी कर दिया गया था। वहीं विपक्ष की ओर से बार-बार स्पीकर पर यह आरोप लगाया जाता रहा कि वे सत्ता पक्ष को बोलने का अवसर देते हैं लेकिन विपक्ष को नहीं। सूत्रों के मुताबिक लगभग सभी विपक्षी दल स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर सहमत हैं और जल्द ही लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपने की तैयारी है।
सूत्रों के मुताबिक विपक्ष की ओर से राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने देने की मांग की जा रही है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने पूर्व सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के कुछ अंश को पढ़ा और चीन के लद्दाख में हुए गतिरोध का मुद्दा उठाया था। वहीं चेयर की ओर से यह कहा गया कि अप्रकाशित किताब के अंश को पढ़ना उचित नहीं है। इस पर खूब हंगामा हुआ। विपक्ष की ओर राहुल गांधी को बोलने देने की मांग की जाती रही। वहीं विपक्ष 8 सांसदों का निलंबन वापस लेने की मांग भी कर रहा है। संसद में हंगामे के चलते विपक्ष के 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था।

भागलपुर का युवा किसान रचेगा राष्ट्रीय कृषि क्रांति, पूरे भारत में आधुनिक फार्मिंग नेटवर्क का ऐलान

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भागलपुर, बिहार (विशेष संवाददाता)।
सरकंडा के सवैया गांव पंचायत राजगांवराजी प्रखंड प्रीपेती के रहने वाले युवा किसान और कृषि उद्यमी सुमित यादव ने भारत की खेती-किसानी की तस्वीर बदलने का बड़ा संकल्प लिया है। आत्मज चंद्रदेव यादव, निवासी सवैया, सरकंडा, भागलपुर (813209) ने घोषणा की है कि वे पूरे देश में आधुनिक कृषि व्यवसाय का राष्ट्रीय स्तर का मॉडल खड़ा करेंगे। उनका कहना है कि अब खेती सिर्फ जीवन-यापन का साधन नहीं, बल्कि संगठित और तकनीकी बिजनेस बनेगी।

सुमित यादव का लक्ष्य पारंपरिक खेती को डिजिटल, वैज्ञानिक और बाजार आधारित व्यवस्था में बदलना है। वे देशभर में ऑल इंडिया फार्मिंग नेटवर्क बनाकर किसानों को एक मंच पर जोड़ना चाहते हैं, ताकि छोटे किसान भी बड़े बाजार से सीधे जुड़ सकें। उनका मानना है कि अगर किसानों को सही बाजार मिले और आधुनिक तकनीक अपनाई जाए, तो भारत कृषि महाशक्ति बन सकता है।

युवा कृषि उद्यमी ने बताया कि उनका मिशन केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय स्थिर और सुरक्षित बनाना है। इसके लिए वे कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग मॉडल, डिजिटल किसान डेटा प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय स्तर पर कृषि उत्पादों की सप्लाई चेन विकसित करने की योजना बना रहे हैं। इस प्लेटफॉर्म पर देश, राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव स्तर तक किसानों का सुरक्षित डेटा रहेगा और उन्हें सीधे खरीदारों व कंपनियों से जोड़ा जाएगा।

सुमित का कहना है कि आज भी लाखों किसान सही दाम न मिलने के कारण नुकसान झेलते हैं। उनका मॉडल किसानों को बिचौलियों से मुक्त करेगा और उन्हें सीधे मार्केट एक्सेस देगा। आधुनिक मशीनरी, वैज्ञानिक खेती, डिजिटल ट्रैकिंग और संगठित विपणन से खेती को राष्ट्रीय उद्योग में बदला जाएगा।

उन्होंने मीडिया से अपील की है कि इस विज़न को देशभर में पहुंचाया जाए ताकि अधिक से अधिक किसान, स्टार्टअप और निवेशक इस मिशन से जुड़ सकें। सुमित का दावा है कि अगर उनका मॉडल सफल हुआ तो यह भारत के कृषि इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह का राष्ट्रीय फार्मिंग नेटवर्क जमीनी स्तर पर लागू हुआ, तो इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि ग्रामीण रोजगार, खाद्य सुरक्षा और कृषि निर्यात को भी बड़ा बल मिलेगा।

फिलहाल, भागलपुर का यह युवा किसान पूरे देश में कृषि क्रांति की नींव रखने की तैयारी में है और आने वाले वर्षों में इसे भारत का सबसे बड़ा कृषि बिजनेस नेटवर्क बनाने का दावा कर रहा है।

 

IND vs PAK मैच का बहिष्कार सिर्फ एक ड्रामा? ICC के साथ मीटिंग में पाकिस्तान ने रखी ये 3 बड़ी डिमांड!

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ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबले को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि अगले 24 से 48 घंटे में बड़ा अपडेट सामने आ सकता है।IND vs PAK, T20 World Cup 2026: भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले T20 वर्ल्ड कप मुकाबले को लेकर जारी विवाद पर अब समाधान की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में 8 फरवरी को देर शाम लाहौर में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के वरिष्ठ अधिकारियों की एक अहम मीटिंग हुई। PCB के निमंत्रण पर बांग्लादेश ने भी इस मीटिंग में हिस्सा लिया। इस मीटिंग में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम अपने देश का प्रतिनिधित्व किया, जबकि ICC के डिप्टी चेयरमैन इमरान ख्वाजा लाहौर पहुंचे। मीटिंग में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर बने गतिरोध पर काफी देर तक चर्चा हुई।PCB ने रखी 3 मांग
क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, PCB ने इस बातचीत में ICC से रेवेन्यू में ज्यादा हिस्सा, भारत के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट की बहाली, और मैच के बाद हैंडशेक प्रोटोकॉल के पालन जैसी मांगें रखी गई। वहीं, वर्ल्ड कप से बाहर किए गए बांग्लादेश की ओर से भी किसी तरह के मुआवजे की मांग रखी जा सकती है। इससे साफ है कि पाकिस्तान की टीम भारत से मैच तो खेलना चाहती है, लेकिन अपनी शर्तों पर। वैसे द्विपक्षीय सीरीज ICC के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं और हैंडशेक जैसी परंपराएं अनिवार्य नहीं होतीं।

विवाद की असली जड़ बांग्लादेश
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी, जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में अपने T20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से इनकार किया था और वेन्यू बदलने की मांग की थी। ICC ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया, जिसके बाद बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया।इसके बाद पाकिस्तान ने बांग्लादेश के समर्थन में भारत के खिलाफ मुकाबला खेलने से इनकार करते हुए कोलंबो में होने वाले मैच का बहिष्कार करने का रुख अपनाया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।

श्रीलंका ने जताई नाराजगी
इस संभावित बहिष्कार को लेकर श्रीलंका ने भी कड़ा रुख अपनाया है। श्रीलंका ने साफ कहा है कि भारत-पाकिस्तान मैच रद्द होने से देश के पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसके अलावा श्रीलंका ने पाकिस्तान को वह दौर भी याद दिलाया जब उसे खुद इंटरनेशनल क्रिकेट के बहिष्कार का सामना करना पड़ा था और श्रीलंका क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान में क्रिकेट की वापसी में अहम भूमिका निभाई थी।

दीपिका पादुकोण के बाद सीनियर एक्टर ने छोड़ी ‘स्पिरिट’, बीच सीन डायरेक्टर से छिड़ी बहस, गुस्से में फिल्म से ली एग्जिट?

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संदीप रेड्डी वांगा की मच-एवेटेड फिल्म ‘स्पिरिट’ को लेकर अब एक नई खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि दीपिका पादुकोण के बाद एक और एक्टर ने इस फिल्म से एग्जिट ले ली है, जिसकी वजह डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा से अनबन बताई जा रही है।संदीप रेड्डी वांगा लगातार अपनी अपकमिंग फिल्म ‘स्पिरिट’ को लेकर सुर्खियों में हैं, जिसमें तेलुगु सुपरस्टार प्रभास नजर आएंगे। पिछले दिनों ही फिल्म का जबरदस्त पोस्टर जारी किया गया था, जिसने फैंस के बीच हलचल पैदा कर दी थी। इससे पहले ये फिल्म दीपिका पादुकोण के चलते भी चर्चा में रही, जिन्होंने बीच में ही इस फिल्म को अलविदा कह दिया। अब फिल्म से एक और एक्टर के अलग होने की खबर है। बताया जा रहा है कि दीपिका पादुकोण के बाद दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज ने बीच में ही संदीप रेड्डी वांगा की ‘स्पिरिट’ छोड़ दी है, जिसके चलते अब मेकर्स के लिए एक और बड़ा सिरदर्द पैदा हो गया है।

प्रकाश राज ने छोड़ी स्पिरिट?
ओटीटी प्ले की रिपोर्ट के अनुसार, प्रकाश राज ने संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म छोड़ दी है और वो भी शूटिंग के बीच ही। प्रभास स्टारर इस मेगा बजट फिल्म की शूटिंग हैदराबाद में चल रही थी। इसी दौरान किसी सीन को लेकर शूटिंग के बीच ही प्रकाश राज और संदीप रेड्डी वांगा में बहस हो गई। बहस की वजह इसकी स्क्रिप्ट और एक खास सीन थी, जिसके चलते दोनों में खिटपिट हुई। पहले तो ये बात सिर्फ एक्टर और डायरेक्टर के बीच क्रिएटिव डिफरेंस थी, लेकिन बात बढ़ती गई और सेट पर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई, तनाव इतना बढ़ गया कि एक्टर ने बीच में ही फिल्म छोड़ दी।
प्रकाश राज और संदीप रेड्डी वांगा में तनातनी
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि प्रकाश राज और संदीप रेड्डी वांगा के बीच क्रिएटिव डिफरेंस के साथ ही शुरुआत से ही व्यवहार संबंधी परेशानियां थीं और ये बात प्रोडक्शन टीम को जरा भी पसंद नहीं आईं और इन्हीं डिफरेंसेस के चलते आखिरकार प्रकाश राज ने खुद को इस प्रोजेक्ट से अलग कर लिया। हालांकि, अब तक मेकर्स की ओर से या फिर प्रकाश राज की तरफ से इस पर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

फैंस को है फिल्म की रिलीज का इंतजार?
एक तरफ जहां फैंस बेसब्री से फिल्म की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं तो वहीं प्रकाश राज के बीच में ही फिल्म से अलग होने पर ये चर्चा शुरू हो चुकी है कि अब फिल्म में उनकी जगह कौन लेगा? बता दें, न्यू ईयर के मौके पर संदीप रेड्डी वांगा ने ‘स्पिरिट’ का पहला पोस्टर जारी किया था, जिसमें प्रभास और तृप्ति डिमरी साथ नजर आए थे। पोस्टर में जहां शर्टलेस प्रभास के मुंह में सिगरेट दिखाई दी तो वहीं तृप्ति इसे जलाती नजर आईं, जिन्होंने फिल्म में दीपिका पादुकोण को रिप्लेस किया है। फिल्म में प्रभास और तृप्ति डिमरी के साथ विवेक ओबेरॉय भी अहम रोल में नजर आएंगे और ये 5 भाषाओं में 5 मार्च 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

एलन मस्क का बदला प्लान, अब मंगल से पहले चंद्रमा पर शहर बसाने की है तैयारी; बताई डेडलाइन

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दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने कहा है कि अब उनका फोकस मंगल ग्रह से पहले चंद्रमा पर शहर बसाने का है। उन्होंने इसे लेकर डेडलाइन भी बताई है। दिग्गज कारोबारी एलन मस्क ने बड़ा ऐलान कर दिया है। मस्क ने कहा है कि स्पेसएक्स अब मंगल ग्रह पर शहर बसाने से पहले चंद्रमा पर एक आत्मनिर्भर शहर स्थापित करने पर फोकस कर रहा है। कंपनी के फाउंडर और सीईओ एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि चंद्रमा पर ‘सेल्फ-ग्रोइंग’ या खुद से विकसित होने वाला शहर बनाने का लक्ष्य 10 साल से भी कम समय में हासिल किया जा सकता है, जबकि मंगल पर ऐसा करने में 20 साल से ज्यादा लग सकते हैं।मंगल पर भी बसेगा शहर
मस्क ने इस दौरान यह भी साफ कर दिया कि स्पेसएक्स मंगल पर भी शहर बनाने की कोशिश जारी रखेगा, लेकिन इसकी शुरुआत लगभग 5 से 7 साल बाद होगी। फिलहाल, कंपनी की प्राथमिकता चंद्रमा पर मानव बस्ती बसाना है। यह घोषणा हाल के दिनों में आई है, जब स्पेसएक्स ने अपने संसाधनों को मंगल मिशन से हटाकर चंद्रमा की ओर मोड़ दिया है।

2027 तक चंद्रमा पर अनक्रूड लैंडिंग
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अब मार्च 2027 तक चंद्रमा पर एक अनक्रूड (बिना इंसान वाली) लैंडिंग का लक्ष्य रख रही है। इससे पहले मस्क ने 2026 के अंत तक मंगल पर अनक्रूड मिशन भेजने की बात कही थी, लेकिन अब टाइमलाइन में बदलाव आया है। यह बदलाव स्पेसएक्स के स्टारशिप रॉकेट के विकास से जुड़ा है। स्टारशिप दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली रीयूजेबल रॉकेट है, जो चंद्रमा और मंगल दोनों के लिए डिजाइन किया गया है। नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत स्पेसएक्स को चंद्रमा पर एस्ट्रोनॉट्स उतारने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। स्टारशिप को लूनर लैंडर के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

‘चंद्रमा पर आसान होगा बेस बनाना’
मस्क का मानना है कि चंद्रमा पर पहले बेस बनाना आसान और तेज होगा, क्योंकि पृथ्वी से दूरी कम है (करीब 3 दिन का सफर), जबकि मंगल तक पहुंचने में 6-9 महीने लगते हैं। चंद्रमा पर बर्फ मिलने की संभावना है, जिसे ईंधन (ऑक्सीजन और हाइड्रोजन) में बदला जा सकता है। साथ ही, साउथ पोल के पास शैकलटन क्रेटर जैसे इलाकों में लगभग लगातार सूरज की रोशनी मिलती है, जो सोलर पावर के लिए फायदेमंद है।

खुद की जरूरतें पूरी करेगा शहर
मस्क की योजना में स्टारशिप को ही शुरुआती हैबिटेट या बेस के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। कार्गो मिशन्स से सामग्री पहुंचाई जाएगी, फिर 3डी प्रिंटिंग और रोबोट्स से बेस को बढ़ाया जाएगा। यह शहर सेल्फ-सस्टेनिंग होगा, यानी खुद की जरूरतें पूरी करने वाला। मंगल की तुलना में चंद्रमा पर रेडिएशन, डस्ट स्टॉर्म्स और कम ग्रैविटी जैसी चुनौतियां कम हैं। मस्क का लक्ष्य है कि चंद्रमा पर बेस बनाकर इंसान मल्टी-प्लैनेटरी स्पीशीज बने, जो मानवता को लंबे समय तक बचाए रखने में मदद करेगा।