Wednesday, July 8, 2026
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सीतामढ़ी में गाने के बोल बदलने पर युवक को जान से मारने की धमकी, 15 साल से वीडियो बना रहे पंकज प्रेमी दहशत में

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सीतामढ़ी जिले के रहने वाले पंकज प्रेमी उम्र लगभग 30 वर्ष पिछले 14–15 वर्षों से सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों के लिए वीडियो बनाते आ रहे हैं। क्षेत्र में उनकी पहचान एक क्रिएटिव वीडियो मेकर के रूप में रही है। परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार इतने वर्षों में उनके खिलाफ कभी किसी तरह की शिकायत या विवाद सामने नहीं आया।

मामला तब गरमाया जब हाल ही में पंकज प्रेमी ने एक गाने के कुछ बोलों में हल्का सा बदलाव कर उसे गाकर वीडियो के रूप में जारी किया। बताया जा रहा है कि बोल में मामूली परिवर्तन को लेकर कुछ अज्ञात लोग नाराज हो गए। इसके बाद से पंकज के मोबाइल पर अनजान नंबरों से लगातार कॉल आ रहे हैं और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जा रही है।

पंकज का कहना है कि उन्हें बार-बार फोन कर गाली-गलौज की जा रही है और जान से मारने तक की धमकी दी जा रही है। कॉल करने वाले अपनी पहचान नहीं बता रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद से वह और उनका परिवार काफी दहशत में है।

परिजनों का आरोप है कि पंकज ने किसी की भावना आहत करने की मंशा से कुछ नहीं किया। उनका कहना है कि अगर किसी को आपत्ति थी तो सीधे बात कर समाधान निकाला जा सकता था, लेकिन इस तरह धमकियां देना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पंकज लंबे समय से वीडियो बनाते आ रहे हैं और सामाजिक व सांस्कृतिक विषयों पर भी काम करते रहे हैं। ऐसे में अचानक इस तरह की धमकियों ने इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है।

सूत्रों के मुताबिक पंकज प्रेमी इस मामले में पुलिस से संपर्क करने की तैयारी में हैं। अगर शिकायत दर्ज होती है तो पुलिस अज्ञात नंबरों की कॉल डिटेल खंगालकर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश करेगी। साइबर सेल की मदद भी ली जा सकती है।

फिलहाल पंकज प्रेमी और उनका परिवार सुरक्षा को लेकर चिंतित है।

समस्तीपुर की चांदनी की दास्तान: बेंगलुरु से गुजरात और फिर हैदराबाद तक भटकती रही जिंदगी

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बिहार के समस्तीपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के कमाल गांव की रहने वाली 22 वर्षीय चांदनी कुमारी की जिंदगी पिछले चार वर्षों में किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। चार साल पहले उनकी शादी साजन कुमार से हुई थी। शादी के बाद चांदनी ससुराल में रह रही थीं। करीब आठ महीने पहले साजन उन्हें अपने साथ बेंगलुरु ले गए, जहां वह काम करते थे—और यहीं से उनके वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल शुरू हो गई।

बेंगलुरु में बदली जिंदगी

चांदनी का आरोप है कि बेंगलुरु पहुंचने के बाद साजन कुमार का संबंध समस्तीपुर की ही रहने वाली नेहा कुमारी नामक महिला से हो गया। बताया जाता है कि नेहा की शादी पहले से हो चुकी है और उसके तीन बच्चे भी हैं, लेकिन वह अपने पति को छोड़कर दिल्ली में रह रही थी। इसी दौरान साजन और नेहा के बीच नजदीकियां बढ़ीं।

चांदनी का कहना है कि इस संबंध के कारण साजन अक्सर उनके साथ मारपीट करते थे और कई-कई दिनों तक उन्हें अकेला छोड़ देते थे। उस समय चांदनी गर्भवती थीं और मानसिक व शारीरिक रूप से बेहद कमजोर महसूस कर रही थीं।

रुस्तम अली की एंट्री और नया विवाद

अकेलेपन और प्रताड़ना के बीच बेंगलुरु में ही चांदनी की पहचान असम के रहने वाले रुस्तम अली से हुई, जो वहीं काम करता था। चांदनी के अनुसार, रुस्तम ने उन्हें सहारा दिया और साथ रखने की बात कही। हालांकि यह सब तब हुआ जब वह गर्भवती थीं।

डिलीवरी के लिए चांदनी को गांव भेज दिया गया। गांव पहुंचते ही ससुराल वालों को रुस्तम अली के बारे में जानकारी मिल गई। इसके बाद, उनके मुताबिक, उन पर अत्याचार और बढ़ गया। मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगे। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद वह वहां से निकल सकीं।

गुजरात से हैदराबाद तक

इसके बाद चांदनी गुजरात चली गईं, लेकिन साजन वहां भी पहुंच गए। उन्होंने साथ चलने का दबाव बनाया और कहा कि बेंगलुरु चलो, वहां तलाक देकर आजाद कर देंगे। भरोसा कर चांदनी उनके साथ फिर बेंगलुरु चली गईं, लेकिन वहां पहुंचते ही दोबारा मारपीट शुरू हो गई।

चांदनी का आरोप है कि साजन ने ढाई महीने के मासूम बच्चे को उनसे छीन लिया और उन्हें घर में बंद कर दिया। किसी तरह जान बचाकर वह वहां से भाग निकलीं और फिलहाल हैदराबाद में रह रही हैं।

मां का साथ भी नहीं

इस पूरे मामले में एक और भावनात्मक मोड़ तब आया जब चांदनी ने बताया कि उनकी मां ने उनका साथ देने से इनकार कर दिया। चांदनी के अनुसार, उनकी मां ने कहा—

“अगर लड़का हिंदू होता तो हम सपोर्ट करते। लड़का मुस्लिम है, इसलिए हम सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। बाकी तुम्हारी जिंदगी है, तुम समझो—हम तुम्हारा साथ नहीं दे पाएंगे।”

चांदनी का कहना है कि उनका पूरा ससुराल पक्ष भी उनके पति साजन कुमार का ही साथ दे रहा है। ऐसे में वह खुद को पूरी तरह अकेला महसूस कर रही हैं।

बच्चे की कस्टडी पर संग्राम

चांदनी का आरोप है कि साजन कुमार उनका बच्चा वापस नहीं दे रहे हैं। दूसरी ओर, रुस्तम अली आज भी उन्हें अपने साथ रखने को तैयार है, लेकिन चांदनी अपने बच्चे को छोड़कर नई जिंदगी शुरू नहीं करना चाहतीं।

इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास की कमी

विवाहेतर संबंधों का जाल

घरेलू हिंसा की भयावहता

धर्म के आधार पर पारिवारिक समर्थन का बंटवारा

और एक मासूम की जिंदगी पर मंडराता संकट

न्याय की आस

फिलहाल चांदनी अपने बच्चे की वापसी और सुरक्षित जीवन की मांग कर रही हैं। अब देखना यह है कि उन्हें न्याय कब और कैसे मिलता है।

 

धनुष, तीर और बंदूकें, जंगल में रातभर चली छापेमारी, AI की मदद से पकड़े गए 39 शिकारी

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गिरफ्तार किए गए शिकारियों के पास से हथियारों का जखीरा मिला है। इसमें देसी बंदूकें, तीर और धनुष शामिल हैं। ये लोग जंगल में अवैध तरीके से जानवरों का शिकार करते थे।ओडिशा वन विभाग ने वन्यजीव अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मयूरभंज जिले के सिमिलिपाल वन्यजीव अभयारण्य से 39 शिकारियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरी कार्रवाई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस निगरानी कैमरों की मदद से संभव हो सकी।

AI कैमरों में कैद हुईं शिकारियों की गतिविधियां
जानकारी के अनुसार, सिमिलिपाल अभयारण्य के दक्षिण डिवीजन के भीतर इन शिकारियों की गतिविधियां एआई कैमरों में कैद हुईं। जंगल में लगाए गए ये अत्याधुनिक कैमरे 24 घंटे रियल टाइम मॉनिटरिंग करते हैं। जैसे ही कैमरों ने संदिग्ध गतिविधि दर्ज की, सिस्टम ने उनकी सटीक लोकेशन और समय की जानकारी वन अधिकारियों को तुरंत उपलब्ध करा दी।

जंगल की घेरेबंदी कर 39 शिकारी गिरफ्तार
एआई सिस्टम से मिले अलर्ट के बाद स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स और वन विभाग की टीम ने तुरंत ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया। जंगल के अंदर घेराबंदी कर छापेमारी की गई, जिसमें कुल 39 लोगों को पकड़ा गया।

भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद
छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। जब्त सामान में नौ देसी बंदूकें, 20 धनुष, बड़ी संख्या में धारदार हथियार, पर्याप्त मात्रा में विस्फोटक और शिकार में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण शामिल हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि जंगल में बड़े पैमाने पर शिकार की तैयारी की जा रही थी।

AI ने निभाया बड़ा रोल
बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी अभयारण्य के पास उदला थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। एआई आधारित निगरानी प्रणाली से मिली सटीक जानकारी ने इस बड़े शिकार अभियान को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई।वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की आगे की जांच जारी है। इस कार्रवाई को वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, जहां आधुनिक तकनीक और सतर्क प्रशासन की मदद से समय रहते बड़ी घटना को टाल दिया गया।

तुल्लापुर रेहटि में जमीन पर कब्जे का आरोप: दबंगों की धमकी से दहशत में परिवार, प्रशासन से लगाई गुहार

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जौनपुर।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र के तुल्लापुर रेहटि गांव में जमीन विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। गांव की निवासी कांति देवी पत्नी बखेडु पाल ने पड़ोसियों पर उनकी आबादी और बंजर जमीन पर जबरन कब्जा करने तथा परिवार को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िता के अनुसार वर्ष 2012 से यह विवाद चला आ रहा है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में मामला और अधिक उग्र हो गया है।

कांति देवी का कहना है कि वर्ष 2020 के बाद से विपक्षी पक्ष ने दबंगई दिखाते हुए जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिशें तेज कर दीं। उन्होंने आरोप लगाया कि तीसरी पार्टी प्रमोद यादव पुत्र श्यामलाल यादव और विशाल यादव पुत्र संजय यादव कथित रूप से प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन अपने नाम कराने की साजिश रच रहे हैं। पीड़िता का दावा है कि आरोपियों का उठना-बैठना कथित तौर पर दबंग प्रवृत्ति के लोगों के साथ है, जिससे वे किसी से डरते नहीं हैं।

पीड़िता ने बताया कि 19 फरवरी 2026 को आरोपियों ने उनके साथ गाली-गलौज की और खुलेआम जमीन को अपनी बताते हुए परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। उनका आरोप है कि पैसे और रसूख के बल पर झूठी शिकायतें दर्ज कराकर उन्हें कानूनी रूप से भी परेशान किया जा रहा है।

कांति देवी ने यह भी कहा कि उनकी जमीन के बीच से वर्षों पुराना आने-जाने का रास्ता निकला है, जिसे अब अवरुद्ध किया जा रहा है और परिवार को आने-जाने नहीं दिया जा रहा। इतना ही नहीं, परिवार को पानी भरने से भी रोका जा रहा है। उनका आरोप है कि घर के पास लगे नल से भी पानी लेने नहीं दिया जा रहा, जिससे उनका परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करने को मजबूर है। मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह गुजर-बसर करने वाले इस गरीब परिवार का कहना है कि उन्हें हर स्तर पर प्रताड़ित किया जा रहा है।

पीड़िता का कहना है कि वे लगातार थाना और उच्च अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि विपक्षी पक्ष प्रभावशाली होने के कारण प्रशासनिक स्तर पर भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। परिवार ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो गांव में कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।

फिलहाल गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच, अवैध कब्जे पर तत्काल रोक और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और उनकी जमीन सुरक्षित रह सके।

 

मथुरा में हिस्ट्रीशीटरों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप: तीन मुकदमे दर्ज, फिर भी गिरफ्तारी नहीं; पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार

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मथुरा।
उत्तर प्रदेश के Mathura जिले के बैंक कॉलोनी, कृष्णा नगर निवासी कुंदन शर्मा ने स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके द्वारा दर्ज कराए गए तीन अलग-अलग मुकदमों—768/2023, 465/2024 और 837/2025—में अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़ित के अनुसार, संबंधित मामलों में आरोपी कथित तौर पर हिस्ट्रीशीटर और प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जिनकी थाना हाईवे क्षेत्र में हिस्ट्रीशीट भी खुली हुई है, बावजूद इसके गिरफ्तारी और चार्जशीट दाखिल नहीं की गई।

कुंदन शर्मा के मुताबिक, पहला मामला वर्ष 2023 में दर्ज हुआ, जब उनकी पत्नी और पुत्र के साथ कथित रूप से मारपीट और अभद्रता की गई। इस संबंध में थाना कोतवाली में धारा 323, 354, 504 और 506 आईपीसी के तहत मुकदमा पंजीकृत हुआ। इसके बाद वर्ष 2024 में उनके साथ कथित रूप से मारपीट और रुपये छीनने की घटना हुई, जिसका मुकदमा संख्या 465/2024 दर्ज हुआ।

पीड़ित का आरोप है कि 15 सितंबर 2024 की रात वह अपने स्कूटर से घर लौट रहे थे, तभी बीरी सिंह पेट्रोल पंप के पास एक कार ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। उनका दावा है कि यह हमला जान से मारने की नीयत से किया गया। दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हुए और जिला अस्पताल में उनका मेडिकल परीक्षण हुआ, लेकिन इस घटना में अभी तक कोई कार्यवाही या गिरफ्तारी नहीं हुई है नहीं किया गया।
बल्कि ऐसे मामलों में तत्काल गिरफ्तारी होती है
उनका कहना लेकिन उनके मामले में लगातार देरी हो रही है, जिससे उन्हें न्याय मिलने में बाधा आ रही है।

कुंदन शर्मा का कहना है कि 16 सितंबर 2024 को उन्हें आगरा फोर्ट से लखनऊ जाने के लिए आरक्षण था, लेकिन दुर्घटना के कारण वह यात्रा नहीं कर सके और उन्हें टिकट रद्द कराना पड़ा। उनका आरोप है कि विपक्षी पक्ष प्रभावशाली है और अधिकारियों के साथ करीबी संबंध होने के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह कप्तान कार्यालय में शिकायत लेकर पहुंचे तो उल्टा उन्हें ही हिरासत में ले लिया गया और बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत पर रिहा होना पड़ा। उनका कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को जान-माल का खतरा बना हुआ है, लेकिन पुलिस स्तर पर कोई ठोस सुरक्षा या कार्रवाई नहीं की जा रही।

कुंदन शर्मा ने प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि दर्ज मुकदमों में निष्पक्ष जांच कर शीघ्र गिरफ्तारी और चार्जशीट दाखिल की जाए।

फिलहाल, मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।

पीढ़ी कुंदन शर्मा का प्रशासन से अनुरोध है कि उनकी कार्यवाही में प्रशासन मदद करें ताकि समय रहते उन्हें इंसाफ मिल सके

 

ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने पेट में छोड़ दी थी कैंची, पांच साल दर्द से परेशान रही महिला, सीटी स्कैन में पता चली बात

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पांच साल पहले हुए ऑपरेशन के बाद लगातार पेट दर्द की शिकायत से महिला परेशान थी। जब पेट का सीटी स्कैन कराया गया तो पता चला डॉक्टर ने ऑपरेशन के दौरान कैंची पेट में ही छोड़ दी थी।केरल के आल्लपुझा से एक चौंकाने देने वाली खबर सामने आई है, पिछले पांच सालों से रह रहकर पेट में दर्द की शिकायत कर रही महिला ने जब दर्द से तंग आकर चैक करवाया तो पता चला कि सर्जरी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कैंची उसके पेट के अंदर ही पड़ी थी। महािला को शक है कि एक सरकारी अस्पताल में पांच साल पहले हुई उसकी पेट की सर्जरी के दौरान डॉक्टर से ऑपरेशन करने वाली कैंची मरीज के पेट में ही छूट गई होगी। इस मामले का खुलासा होने के बाद राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने मामले को गम्भीर लापरवही बताया है और इसकी पूरी सख्ती से जांच का आदेश देते हुए मेडिकल अधिकारियों की एक टीम को वन्दनम सरकारी मेडिकल कॉलेज भेजा है, जहां पर ये लापरवाही बरती गई थी।
पेट में थी कैंची, परिवार मांग रहा न्याय
आल्लपुझा के पुन्नपरा की रहने वाली पीड़िता ऊषा जोसेफ ने बताया कि वे लगातार पांच साल से पेट दर्द से परेशान थीं। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। उनके पेट की सर्जरी पांच साल पहले अलपुझा के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में की गई थी। ऑपरेशन के बाद से ही उन्हें पेट में रह रह कर बहुत तेज़ दर्द होता था। हालांकि उन्होंने कई हॉस्पिटल में इस दर्द का इलाज करवाया, लेकिन वजह का पता नहीं चल सका। आखिर में, उन्होंने जब MRI कराई तो इसके स्कैन में पेट में कैंची होने का का पता चला। हालांकि, वंदनम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में जांच के दौरान भी, शुरू में कैंची का पता नहीं चला था। किडनी स्टोन होने की बात कहकर उन्हें हॉस्पिटल से वापस भेज दिया गया था। बाद में उन्हें सर्जरी के लिए अमृता हॉस्पिटल कोच्चि ले जाया गया जहां MRI में पेट के अंदर छूटी हुई कैंची का पता चला। उषा जोसफ और उनका परिवार न्याय की मांग कर रहा है।

शौच के लिए निकले युवक पर लाठी-लोहे की रॉड से वार, सिर में 13 टांके, जेब से 10 हजार से अधिक की लूट

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Gaya में पुरानी रंजिश में खूनी हमला

गया जिले के मोहनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत सुखदेवचक गांव में पुरानी रंजिश को लेकर एक युवक पर जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना 1 मई 2025 की सुबह करीब 6:30 बजे की बताई जा रही है।

घायल मनोज कुमार (35 वर्ष), पिता जिबू यादव, ग्राम–सुखदेवचक, पंचायत–देशवार, थाना–मोहनपुर, जिला–गया के निवासी हैं। उन्होंने थाने में दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि गांव के ही कई लोगों ने घात लगाकर उन पर हमला किया।

शौच के लिए निकले थे, पहले से घात लगाए बैठे थे हमलावर

पीड़ित के अनुसार, वह सुबह शौच के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान पुरानी दुश्मनी को लेकर पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने लाठी और लोहे की रॉड से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

हमले में नामजद आरोपी इस प्रकार हैं:

रामभान यादव (55 वर्ष)

सुवांशु कुमार (25 वर्ष), पिता–रामलखन यादव

सुनिल भादव (32 वर्ष)

रामलखन यादव उर्फ भाख (50 वर्ष), पिता–नाथ यादव

वसंत भादव (60 वर्ष), पिता–नाथ यादव

बालेश्वर भादव (61 वर्ष), पिता–नाग यादव

प्रवीन कुमार (22 वर्ष)

पवन कुमार (20 वर्ष), पिता–वालेश्वर भादव

अर्जुन भादव (25 वर्ष)

रूबी देवी (21 वर्ष)

सहित अन्य अज्ञात लोग

सभी आरोपी ग्राम सुखदेवचक के निवासी बताए गए हैं।

सिर पर लगातार वार, कुल 13 टांके लगे

आरोप है कि हमलावरों ने सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से वार किए। मनोज कुमार के सिर में पहले 8 टांके लगे थे, लेकिन दोबारा सिर पर वार किए जाने से 5 और टांके लगाने पड़े। दाहिनी कनपटी सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।

घटना के दौरान बचाव करने पहुंची उनकी भतीजी खुशबू कुमारी के साथ भी मारपीट की गई। उसके पैर में लाठी से गंभीर चोट आई है।

जेब से 10,106 रुपये छीने, दी जान से मारने की धमकी

पीड़ित ने आरोप लगाया है कि हमलावरों ने जेब में रखे 10,106 रुपये भी छीन लिए। जाते-जाते आरोपियों ने धमकी दी कि “इस बार बच गया, अगली बार जान से खत्म कर देंगे।”

मगध मेडिकल कॉलेज में कराया गया इलाज

घायल मनोज कुमार को इलाज के लिए Magadh Medical College and Hospital में भर्ती कराया गया, जहां उनके सिर में कुल 13 टांके लगाए गए। उपचार से संबंधित कागजात भी पुलिस को सौंपे गए हैं।

मामला दर्ज, जांच शुरू

इस संबंध में मोहनपुर थाना कांड संख्या 154/2025 दिनांक 01/05/2025 दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 190/126(2)/115(2)/117(2)/109/351(3) एवं 191(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अनुसंधान की जिम्मेदारी एसआई मुकेश कुमार को सौंपी गई है। थानाध्यक्ष ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है तथा आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की तैयारी की जा रही है।

गांव में तनाव, पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में बताई

घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। हालांकि पुलिस का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है। पीड़ित ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।

 

 

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने को लेकर आया अपडेट, जानें कब से भर सकेंगे फर्राटा?

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यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत में कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देगा और दिल्ली से देहरादून की यात्रा को पहले से कहीं अधिक आसान और तेज बना देगा।दिल्ली-देहरादून के बीच बन चुके एक्सप्रेसवे को लेकर लोगों का इंतजार अब और बढ़ गया है। यात्रा समय को काफी कम करने वाले 212 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अब अगले महीने तक टाल दिया गया है। खबर के मुताबिक, जो एक्सप्रेसवे पहले फरवरी 2026 में शुरू होने की उम्मीद थी, अब उसके मार्च में उद्घाटन की संभावना है। परियोजना के कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य अभी अधूरा है। बताया गया है कि मार्च के शुरुआती दिनों तक काम पूरा हो जाएगा और महीने के दूसरे सप्ताह में इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

कैसे घटेगा यात्रा समय?
6-लेन वाला यह एक्सप्रेसवे दिल्ली से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून तक की यात्रा को मौजूदा करीब 6.5 घंटे से घटाकर सिर्फ 2.5 से 3 घंटे कर देगा। कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना को चार सेक्शन में विकसित किया गया है। यह मार्ग दिल्ली में अक्षरधाम के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से शुरू होकर शास्त्री पार्क, खजूरी खास, मंडोला (खेकरा) स्थित ईपीई इंटरचेंज, बागपत, शामली और सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाएगा।

खबर के मुताबिक, पहले अधिकारियों ने जानकारी देते हुए कहा था कि सहारनपुर खंड के 80 किलोमीटर हिस्से का काम पूरा हो चुका है, जिसमें उत्तराखंड के जड़ौदा पांडा से दात काली मंदिर तक 12 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड शामिल है। इस एलिवेटेड हिस्से पर यातायात शुरू हो चुका है। वहीं लखनौर से गणेशपुर तक 41 किलोमीटर का हिस्सा भी चालू कर दिया गया है।

एक्सप्रेसवे की खास बातें
एक्सप्रेसवे पर दातकाली में 340 मीटर लंबी सुरंग, 16 एंट्री-एग्जिट प्वाइंट, 113 अंडरपास और पांच रेलवे ओवरब्रिज शामिल हैं। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को वर्ष 2020 में मंजूरी दी गई थी। इसके बाद दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इसकी आधारशिला रखी थी। शुरुआत में इसे 2024 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन निर्माण में देरी के चलते अब इसकी समयसीमा मार्च 2026 तक बढ़ गई है। इस एक्सप्रेसवे में एशिया का सबसे लंबा 12 किलोमीटर का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी शामिल है। इसके एक तरफ राजाजी नेशनल पार्क स्थित है, जबकि दूसरी तरफ रिस्पना और बिंदल नदियां बहती हैं। करीब 1,200 करोड़ रुपये की लागत से बना यह एलिवेटेड कॉरिडोर नदी के बीचों-बीच 575 खंभों पर खड़ा किया गया है।

क्या AI से भारत बदलेगा, कैसे बदलेगा?

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भारत AI में भय नहीं, भाग्य देखता है, हमारे युवा नए नए टूल्स डेवलप कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया AI दुनिया में बड़ा बदलाव लाएगा। मोदी की बातों का AI की दुनिया के बड़े बड़े लीडरों ने समर्थन किया।दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत का AI विज़न बताया। उन्होंने कहा, भारत AI में भय नहीं, भाग्य देखता है, हमारे युवा नए नए टूल्स डेवलप कर रहे हैं, लेकिन दुनिया के दूसरे देशों को AI के मामले में सोच बदलनी होगी, गोपनीयता छोड़नी होगी. AI को लोकतांत्रिक नज़रिए से देखना होगा, कोडिंग ज़ाहिर करनी होगी, तभी इसे मानवता के भले के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। मोदी की बातों का AI की दुनिया के बड़े बड़े लीडरों ने समर्थन किया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा, 10 साल पहले मुंबई में एक रेहड़ी वाला बैंक में खाता नहीं खुलवा सकता था, आज वही रेहड़ी वाला पलक झपकते ही अपने फ़ोन पर पेमेंट ले रहा है। मैक्रों ने कहा, ये सिर्फ़ तकनीकी तरक़्क़ी की कहानी नहीं, ये एक सभ्यता की कहानी है, भारत ने दुनिया में वो कर दिखाया, जो कोई अन्य देश नहीं कर सका, भारत ने एक अरब 40 करोड़ लोगों की डिजिटल पहचान बनाई, भारत ने ऐसा पेमेंट सिस्टम बनाया, जिसमें हर महीने 20 अरब लेनदेन की प्रॉसेसिंग होती है।गूगल-अल्फाबेट के CEO सुंदर पिचाई ने कहा उनके पिता रघुनाथ पिचाई ने उन्हें AI का एक बड़ा चैलेंज दिया है। कहा, जब वो अपने माता-पिता को गूगल की स्वचालित कार waymo में बिठाकर घुमाने ले गए, तो उनके पिता ने कहा, ये सब तो अच्छा है, तुम ऐसी कार भारत की भीड़-भाड़ भरी सड़कों पर चलाकर दिखाओ तो जानें। सुंदर पिचाई ने कहा कि वह अपने पिता का ये सपना पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। पिचाई ने कहा, एक वो ज़माना था जब वो खुद कोरोमंडल एक्सप्रेस में सवार होकर चेन्नई से IIT खडगपुर जाया करते थे, विशाखापत्तनम के रास्ते. आज उसी विशाखापत्तनम में गूगल एक फुल स्टैक AI हब 15 अरब डालर के निवेश के साथ स्थापित कर रहा है, तैयार होने के बाद इस हब में गीगावाट स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता होगी, ये समुद्र के भीतर एक केबल से जुड़ा होगा, जिसके ज़रिए पूरे भारत में लोगों को रोज़गार और कारोबार के अवसर मिलेंगे।

OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने कहा कि आने वाले दिनों में भारत AI का सबसे बड़ा बाजार बनेगा। ऑल्टमैन ने कहा कि ये सही है कि AI के आने से नौकरियों पर फर्क पड़ेगा, लेकिन इस चुनौती का हल भी AI से ही निकलेगा। AI समिट में मोदी 7 देशों के राष्ट्रपतियों, 9 देशों के प्रधानमंत्रियों, 50 से ज़्यादा देशों के मंत्रियों और दुनिया की बड़ी IT कंपनियों के प्रमुखों को संबोधित कर रहे थे। रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने बताया कैसे जियो इंटेलिजेंस ने AI का देसी मॉडल डेवेलप करने के लिए फ़ेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा से tie-up किया है। अंबानी ने कहा, जिस तरह जियो ने सस्ता डेटा और वाई-फाई पूरे देश में उपलब्ध कराया है, उसी तरह अब जियो AI को भी बेहद कम दाम में घर-घर पहुंचाएगा। इसके लिए रिलायंस ग्रुप अगले 7 साल में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगा। रिलायंस के चैयरमैन ने कहा, मैं एक साहसिक भविष्यवाणी करना चाहता हूं, 21वीं सदी में भारत AI के सेक्टर में दुनिया की बड़ी ताक़तों में से एक बनकर उभरेगा, आने वाले समय में दुनिया का कोई भी देश, डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी, डेवेलपमेंट, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, डेटा जेनरेशन और AI के इस्तेमाल के मामले में भारत का मुक़ाबला नहीं कर सकेगा। जियो ने भारत को इंटरनेट के दौर से जोड़ा। अब हम भारत को इंटेलिजेंस के युग से जोड़ेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कम शब्दों में कई बड़ी बातें कहीं। भारत AI में विश्व का अग्रणी बनना चाहता है, हमारे देश के पास दिमाग़ भी है, युवा शक्ति भी है और सरकार का समर्थन भी है। मोदी AI के ख़तरों के बारे में भी सावधान हैं, AI बच्चों के लिए ख़तरनाक हो सकता है, AI के कारण युवाओं की नौकरियां जा सकती हैं, AI लोगों को DeepFake के ज़रिए गुमराह कर सकता है। इस तरह के सारे ख़तरों का ज़िक्र आज हुआ। AI हमारे सामने है. इसे रोका नहीं जा सकता। अब ये हम पर है कि इसका इस्तेमाल कैसे करें, इंसानों की भलाई के लिए या समाज को नष्ट करने के लिए। AI जिस रफ्तार से आगे बढ रहा है, उस पर नियंत्रण भी उतनी ही रफ़्तार से करना होगा। यहां pause लेने, रुकने और सोचने का न समय है, न अवसर।

इंस्टाग्राम फिल्टर वाले दौर में रिश्तों की अधूरी कहानी, इम्परफेक्ट प्यार में फिट हैं सिद्धांत और मृणाल

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आज सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। फिल्म में सिद्धांत चतुर्वेदी और मृणाल ठाकुर फिल्म में लीड रोल निभा रहे हैं। फिल्म मेट्रो सिटी के इम्परफेक्ट लव को पेश करती है।महानगर की भागदौड़, ऊंची इमारतें और चमक-धमक वाली लाइफस्टाइल के पीछे अक्सर कुछ ऐसी कहानियां दबी रह जाती हैं, जो साधारण तो हैं पर दिल के करीब होती हैं। आज सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली फिल्म इसी साधारणपन को सेलिब्रेट करने की एक कोशिश है। सिद्धांत चतुर्वेदी और मृणाल ठाकुर की मुख्य भूमिकाओं वाली यह फिल्म आज के इंस्टाग्राम फिल्टर वाले दौर में बिना किसी बनावट के रिश्तों की सच्चाई तलाशने का प्रयास करती है। हालांकि अपनी तमाम खूबियों और संवेदनशील प्रदर्शन के बावजूद फिल्म कहीं-कहीं अपनी पकड़ खोती नजर आती है।

कहानी- दिखावे के दौर में दो ‘अधूरे’ लोगों का सफर
फिल्म की कहानी मुंबई जैसे व्यस्त महानगर में रहने वाले दो युवाओं रोशनी श्रीवास्तव (मृणाल ठाकुर) और शशांक शर्मा (सिद्धांत चतुर्वेदी) के इर्द-गिर्द बुनी गई है। यह एक ऐसी मिलेनियल लव स्टोरी है, जो प्यार के किसी भव्य सपने को नहीं दिखाती, बल्कि उन असुरक्षाओं की बात करती है, जिनसे आज का हर दूसरा युवा जूझ रहा है। शशांक एक सफल कॉरपोरेट कंपनी में काम करता है, लेकिन उसके व्यक्तित्व में एक गहरी हिचकिचाहट है। उसे “श” और “स” जैसे वर्णों के उच्चारण में परेशानी होती है। सुनने में यह एक छोटी सी समस्या लग सकती है, लेकिन एक प्रतिस्पर्धी कॉर्पोरेट जगत में, जहां संवाद ही सब कुछ है, यह कमी उसके आत्मविश्वास को भीतर से खोखला कर देती है। दूसरी ओर रोशनी है, जो एक नामी मीडिया एजेंसी में काम करती है। वह आधुनिक है, स्वतंत्र है, लेकिन अपने ‘लुक्स’ को लेकर एक गहरे कॉम्प्लेक्स की शिकार है। वह खुद को दुनिया की नजरों से छिपाकर रखने की कोशिश करती है, इस डर में कि कहीं लोग उसे उसकी कमियों के साथ स्वीकार न करें।दोनों के परिवार उन पर शादी का दबाव बना रहे हैं, लेकिन शशांक और रोशनी इस फैसले को टालते रहते हैं। उनका डर पार्टनर से ज्यादा खुद से है। उन्हें लगता है कि जब वे खुद को ही पसंद नहीं करते, तो कोई दूसरा उन्हें कैसे प्यार कर सकेगा? फिल्म का मुख्य आधार यही है कि कैसे ये दो इम्परफेक्ट लोग एक-दूसरे से मिलते हैं और धीरे-धीरे यह समझते हैं कि असली कनेक्शन तभी बनता है जब आप खुद को वैसा ही स्वीकार करते हैं जैसे आप हैं।

कैसा है अभिनय?
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसके लीड एक्टर्स की परफॉर्मेंस है। सिद्धांत चतुर्वेदी ने शशांक के किरदार में एक अलग तरह की परिपक्वता दिखाई है। उन्होंने शशांक की बोलने की समस्या को कैरीकेचर या मजाक नहीं बनने दिया, बल्कि इसे एक ऐसी कमजोरी के रूप में पेश किया जिससे दर्शक सहानुभूति महसूस करते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज में दिखने वाली हिचकिचाहट और अपनी बात कहने से पहले का वह छोटा सा ठहराव, उनके अभिनय की गहराई को दर्शाता है। सिद्धांत ने साबित किया है कि वे केवल एक्शन या एग्रेसिव रोल ही नहीं, बल्कि एक दबे हुए और संवेदनशील युवक का किरदार भी बखूबी निभा सकते हैं।

मृणाल ठाकुर ने एक बार फिर अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है। रोशनी के किरदार में उन्होंने एक वर्किंग वुमन के बाहरी आत्मविश्वास और अंदरूनी संघर्ष के बीच के बारीक अंतर को बहुत खूबसूरती से पकड़ा है। मृणाल की खासियत उनकी आंखें हैं, कई गंभीर दृश्यों में जहां संवाद कम हैं, उनकी आंखें रोशनी के दर्द और उसकी असुरक्षा को बखूबी बयां कर देती हैं। सिद्धांत और मृणाल की स्क्रीन केमिस्ट्री बहुत ही ऑर्गेनिक लगती है। उनके बीच का रोमांस अचानक नहीं होता, बल्कि वह धीमी आंच पर पकने वाले उस एहसास की तरह है, जहां दो अजनबी धीरे-धीरे एक-दूसरे के कम्फर्ट जोन बन जाते हैं।

संदीपा धर का रोल छोटा है, लेकिन वे अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से प्रभावित करती हैं। वहीं, अनुभवी इला अरुण ने अपनी सहज अदाकारी से कहानी में एक ऐसी गर्माहट जोड़ी है, जो अक्सर शहरी कहानियों में गायब रहती है। उनके हिस्से के दृश्य फिल्म को एक पारिवारिक गहराई देते हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष
निर्देशक ने मुंबई को सिर्फ एक बैकग्राउंड के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया है, बल्कि इसे एक पात्र की तरह कहानी में पिरोया है। फिल्म मुंबई की उन लोकल ट्रेनों, ट्रैफिक और छोटी गलियों के शोर से शुरू होती है जहां हर कोई किसी न किसी रेस में दौड़ रहा है। निर्देशक का विजन यहां स्पष्ट है, वे दिखाना चाहते हैं कि कैसे यह शहर लोगों को अपनी पहचान बदलने या उसे छिपाने पर मजबूर कर देता है। फिल्म का डायरेक्शन काफी हद तक रियलिस्टिक है। निर्देशक ने क्लासिक रोमांटिक फिल्मों की सॉफ्ट फीलिंग और आज के दौर की कड़वी हकीकत के बीच एक संतुलन बनाने की सफल कोशिश की है। संवाद बहुत ही नैचुरल हैं और ऐसे लिखे गए हैं कि आज की युवा पीढ़ी उनसे तुरंत जुड़ सके। फिल्म के दृश्य जब मुंबई की अफरा-तफरी से निकलकर पहाड़ों की शांति की ओर बढ़ते हैं तो वह न केवल एक विजुअल बदलाव है, बल्कि किरदारों की आंतरिक यात्रा का भी प्रतीक है। सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के मूड को सपोर्ट करते हैं और इसे एक ‘फील गुड’ अनुभव बनाते हैं। ये फिल्म आज के दौर के लोगों और मेट्रो सिटी के लोगों के लिए है। वो ही इससे रिलेट कर पाएंगे। हां, छोटे शहरों के लोगों के लिए ये भागदौड़ भरी जिंदगी को समझना मुश्किल होगा, लेकिन दूर-दराज के इलाकों से मुंबई-दिल्ली में आकर बसे लोगों के लिए ये फिल्म एक फीस्ट हो सकती है।

कमी कहां रह गई?
इतनी संवेदनशीलता और अच्छे प्रदर्शन के बावजूद फिल्म में कुछ ऐसी कमियां हैं जो इसे एक मास्टरपीस बनने से रोकती हैं। फिल्म की पेसिंग कई जगहों पर बहुत सुस्त हो जाती है। विशेष रूप से सेकेंड हाल्फ की कहानी में, फिल्म एक ही जगह घूमती नजर आती है। भावनाओं को गहराई देने के चक्कर में निर्देशक ने कुछ दृश्यों को जरूरत से ज्यादा खींच दिया है, जिससे औसत दर्शक का ध्यान भटक सकता है। हालांकि यह एक स्लाइस-ऑफ-लाइफ फिल्म है, लेकिन इसकी कहानी बहुत हद तक प्रेडिक्टेबल है। दर्शक पहले से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि अंत में क्या होने वाला है। कहानी में किसी बड़े ट्विस्ट या सरप्राइज की कमी खलती है। कुछ किरदारों का अधूरापन दिखता है। मुख्य किरदारों पर इतना ध्यान दिया गया है कि कुछ सहायक पात्रों जैसे शशांक के ऑफिस के साथी या रोशनी के दोस्त को बहुत ही सतही तरीके से दिखाया गया है। यदि उनके नजरिए को भी थोड़ा और विस्तार दिया जाता तो महानगरीय अकेलेपन की तस्वीर और भी साफ होती।

फाइनल वर्डिक्ट
यह फिल्म हमें एक बहुत ही महत्वपूर्ण सबक सिखाती है, खुद से प्यार करना और किसी और से प्यार करने से ज्यादा जरूरी है और किसी और प्यार में पड़ने के लिए पहले खुद से प्यार करना जरूरी है। यह फिल्म उन सभी लोगों के लिए है जो खुद को दूसरों से कम आंकते हैं या जिन्हें लगता है कि उनकी कमियां उन्हें प्यार के काबिल नहीं बनातीं। यह दिखाती है कि सच्चा प्यार वह नहीं है जो आपको परफेक्ट बनाने की कोशिश करे, बल्कि वह है जो आपकी खामियों के साथ आपको गले लगा ले। रोशनी और शशांक की यह कहानी मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक ठंडी फुहार की तरह है। भले ही इसमें कुछ तकनीकी खामियां और सुस्त रफ्तार हो, लेकिन इसकी नीयत और संदेश पूरी तरह से ईमानदार हैं। यदि आप मार-धाड़ और शोर-शराबे वाली फिल्मों से अलग एक शांत, इमोशनल और अपनी सी लगने वाली कहानी देखना चाहते हैं तो यह फिल्म आपके लिए है। सिद्धांत और मृणाल की बेहतरीन अदाकारी के लिए इसे एक बार थिएटर में जरूर देखा जा सकता है।