Wednesday, July 8, 2026
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8 फरवरी की तय शादी टूटी, 21 वर्षीय युवक सदमे में; परिवार की सहमति से तय रिश्ता अंतिम समय पर रद्द

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हाजीपुर/मुजफ्फरपुर। परिवार की सहमति से तय हुई शादी अंतिम समय पर टूटने का मामला सामने आया है। हाजीपुर क्षेत्र के 21 वर्षीय युवक बिट्टू कुमार, पिता गजेंद्र राय, ने आरोप लगाया है कि मुजफ्फरपुर जिले के तुर्की क्षेत्र की रहने वाली 19 वर्षीय युवती मनीषा कुमारी, पिता सुरेश राय, के साथ उनका विवाह 8 फरवरी को होना तय हुआ था। लेकिन शादी से ठीक पहले फोन कर लड़की पक्ष की ओर से इनकार कर दिया गया।

परिजनों के अनुसार, दोनों की जान-पहचान करीब एक महीने पहले हुई थी। बातचीत का सिलसिला बढ़ा और यह संबंध आपसी सहमति से विवाह के निर्णय तक पहुंचा। दोनों परिवारों के बीच बातचीत के बाद रिश्ते को औपचारिक रूप दिया गया। तय तारीख के अनुसार 8 फरवरी को शादी संपन्न होनी थी।

युवक पक्ष का कहना है कि शादी की पूरी तैयारी कर ली गई थी। घर में आयोजन की व्यवस्थाएं पूरी हो चुकी थीं। निमंत्रण पत्र छपवाकर रिश्तेदारों और परिचितों को भेज दिए गए थे। परिवार का दावा है कि सामाजिक स्तर पर कार्यक्रम की घोषणा भी कर दी गई थी। ऐसे में अंतिम समय पर रिश्ता टूटने से उन्हें आर्थिक और सामाजिक दोनों प्रकार की क्षति हुई है।

बिट्टू कुमार का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने लड़की पक्ष को भड़काया, जिसके बाद अचानक शादी से इनकार कर दिया गया। उनका कहना है कि जब दोनों परिवारों की सहमति से विवाह तय हुआ था, तो ऐन मौके पर निर्णय बदलना समझ से परे है।

रिश्ता टूटने के बाद युवक गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहा है। परिजनों का कहना है कि वह सामाजिक बदनामी और भावनात्मक आघात के कारण काफी परेशान है। परिवार ने इस घटना को लेकर न्याय की मांग की है और आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहा है।

वहीं, इस मामले में अब तक किसी थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि लिखित आवेदन मिलने पर मामले की जांच की जाएगी।

स्थानीय लोगों का मानना है कि विवाह जैसे संवेदनशील विषय में अंतिम समय पर लिया गया फैसला दोनों परिवारों को गहरे संकट में डाल देता है। सामाजिक प्रतिष्ठा, आर्थिक व्यय और भावनात्मक जुड़ाव — इन सभी पहलुओं पर इसका व्यापक असर पड़ता है। फिलहाल मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

ईरान पर हमले से भारत में हिंसा भड़कने का डर, गृह मंत्रालय ने राज्यों को पत्र लिखकर आगाह किया

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अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद कई देशों में हिंसक प्रदर्शन जारी है। इस बीच भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने राज्यों को पत्र लिखकर आगाह किया है। आइए जानते हैं पूरा मामला।ईरान पर अमेरिका और इजरायल की नॉनस्टॉप स्ट्राइक जारी है। तेहरान समेत ईरान के बड़े शहरों पर लगातार बम बरस रहे हैं। तेहरान में सबसे ज्यादा तबाही देखने को मिल रही है। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की भी मौत हो गई है जिसके बाद ईरान बदले की आग में जल रहा है। ईरान ने इजरायल समेत 9 देशों को निशाना बनाया है और मिसाइल व ड्रोन से हमले किए हैं। ईरान के अलावा कई अन्य देशों में अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने राज्यों को पत्र लिखकर आगाह किया है।

गृह मंत्रालय ने क्या कहा?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को पत्र लिखकर ईरान पर इजरायल-अमेरिका के हमलों के मद्देनजर भारत में संभावित हिंसा के प्रति आगाह किया है। यह पत्र 28 फरवरी को प्रसारित किया गया था, जिसमें राज्यों से “भड़काऊ उपदेश देने वाले ईरान समर्थक कट्टरपंथी उपदेशकों” की पहचान करने को कहा गया था। जानकारी के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखा है। पत्र में मध्य पूर्व एशिया में चल रहे युद्ध के बाद भारत में कई स्थानों पर हो रहे प्रदर्शनों को लेकर आगाह किया है। प्रदर्शनों के हालात में कानून व्यवस्था पर नजर बनाए रखने की जरूरत की बात कही गई है।

ईरान पर अब तक का सबसे घातक हमला
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अब तक का सबसे घातक हमला किया है। अमेरिका का दावा है कि उसने खामेनेई समेत ईरान के 40 से ज्यादा नेता और कमांडरों को मार दिया है। ईरान पर हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को नई धमकी दी है। एक वीडियो मैसेज जारी कर ट्रंप ने ईरान को बड़ी धमकी दी है। ट्रंप ने कहा कि जब तक अमेरिका के सारे मकसद पूरे नहीं हो जाएंगे तब तक ईरान पर हमले जारी रहेंगे।

ईरान ने भी किए जवाबी हमले
दूसरी ओर ईरान ने एक बार फिर मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ईरान ने इजरायल, कुवैत, यूएई, कतर, बहरीन समेत कई देशों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला बोला है। अब तक अमेरिका ने अपने 3 सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि भी कर दी है।

उत्तरप्रदेश के कौशाम्बी में दबंगों का तांडव: दुकान तालाब में फेंकी, घर में घुसकर हमला; पुलिस पर भी गंभीर आरोप

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सिराथू/कौशांबी। जिले में मारपीट, तोड़फोड़ और घर में घुसकर हमले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि दबंगों ने पहले दुकान पर हमला किया, फिर घर में घुसकर जानलेवा वार किए और बाद में झूठे मुकदमे में फंसाने की कोशिश की।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, चंद्रेश मिश्रा की दुकान पर मामूली विवाद के बाद शिवम बनिया, संजय बनिया, विजय बनिया, मुकुल मिश्रा, बच्चा मिश्रा, योगेश मिश्रा, सुदामा मिश्रा, मंगलम मिश्रा और मनीष मिश्रा सहित कई लोगों ने मिलकर बेरहमी से पिटाई की। आरोप है कि हमलावरों ने दुकान उखाड़कर तालाब में फेंक दी।
घर में घुसकर हमला, बुजुर्ग पिता भी नहीं बख्शे
पीड़ित सुनील तिवारी ने बताया कि जब उन्होंने बीच-बचाव किया तो उन्हें भी लाठी, सरिया, फरसा और गरज से पीटा गया। इसके बाद दबंगों ने घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसकर सुनील तिवारी, ललई तिवारी, विकास तिवारी और परिवार के अन्य सदस्यों पर हमला कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि बुजुर्ग पिता कन्हैया तिवारी, जो पहले से बीमार हैं, उन्हें भी नहीं छोड़ा गया और पत्थरों से वार किया गया। घर की महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की की गई।
रास्ते में घेरकर फिर हमला
बताया गया कि कोर्ट से लौटते समय रास्ते में भी सुनील तिवारी, अनिल तिवारी और विकास तिवारी को रोककर पीटा गया। दुर्गेश मिश्रा सहित अन्य लोग भी मौजूद थे। किसी तरह जान बचाकर वे घर पहुंचे, लेकिन वहां भी हमलावरों ने पीछा नहीं छोड़ा।
पुलिस पर पक्षपात और जबरन कार्रवाई के आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि डायल 100 पर सूचना देने के बावजूद पुलिस ने उल्टा उन्हें ही हिरासत में ले लिया। बाद में जमानत करानी पड़ी। आरोप है कि हमलावरों ने सुनील तिवारी के खिलाफ धारा 307 (हत्या के प्रयास) में मुकदमा दर्ज करा दिया और उन्हें “गुंडा” बताकर जिला बदर की कार्रवाई कराई।
परिवार का कहना है कि पुलिस बिना नोटिस और कागज दिखाए घर पहुंची, दरवाजा तोड़कर घुस गई और महिलाओं को धक्का देकर सुनील तिवारी को जबरन घसीटते हुए ले गई।
निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच, झूठे मुकदमे की समीक्षा और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

राजस्थान के राजसमन्द जिले में चारागाह भूमि पर कथित पट्टा घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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राजस्थान के राजसमन्द जिले में चारागाह भूमि पर कथित पट्टा घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। रेलमगरा उपखण्ड की ग्राम पंचायत पनोतिया में आराजी नम्बर 315, जो राजस्व अभिलेखों में चारागाह और खेल मैदान के रूप में दर्ज है, उस पर वर्ष 2014 से 2024 के बीच आवासीय पट्टे जारी किए जाने का मामला अब जिला मुख्यालय तक पहुंच गया है। शिकायत के बाद कलेक्ट्रेट स्तर पर सतर्कता जांच के आदेश जारी होने से हड़कंप मच गया है।

मामला तब गरमाया जब जगपुरा निवासी मुन्ना शाह ने जिला प्रशासन को परिवाद सौंपकर आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत पनोतिया ने चारागाह भूमि को आबादी भूमि दर्शाकर लगभग 40 आवासीय पट्टे जारी कर दिए। आरोप है कि कई पट्टे पुश्तैनी आधार पर दिए गए, जबकि कुछ मामलों में गरीब और कम आय वर्ग के नाम पर निःशुल्क पट्टे दिखाकर सार्वजनिक भूमि का आवंटन किया गया। शिकायत में इसे सरकारी भूमि के दुरुपयोग और राजस्व हानि का मामला बताया गया है।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए कलेक्ट्रेट राजसमन्द के सतर्कता अनुभाग ने 6 नवंबर 2025 को उपखण्ड अधिकारी रेलमगरा को सात दिवस में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि यदि चारागाह भूमि पर नियम विरुद्ध पट्टे जारी पाए जाते हैं तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिन पट्टों की बात की जा रही है, उन पर स्थायी निर्माण भी हो चुका है। ग्रामीणों के अनुसार कई पट्टाधारकों ने पक्के मकान बनाकर निवास शुरू कर दिया है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि ग्राम की सामुदायिक संपत्ति पर स्थायी अतिक्रमण का गंभीर मामला बनेगा। इससे भविष्य में पशुपालन और खेलकूद गतिविधियों के लिए भूमि का अभाव उत्पन्न होने की आशंका है।

शिकायतकर्ता मुन्ना शाह ने पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पंचायत समिति रेलमगरा के विकास अधिकारी मामराज मीणा, द्वितीय विकास अधिकारी गिरिराज खंगाल और जिला परिषद राजसमन्द के सीईओ बृज मोहन बेरवा की भूमिका संदिग्ध है तथा ग्राम पंचायत पनोतिया की सरपंच रेखा देवी और सचिव को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

गांव में इस मुद्दे को लेकर दो धड़े बन गए हैं। एक पक्ष इसे सामुदायिक भूमि बचाने की लड़ाई बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि उन्हें पंचायत द्वारा विधिवत दस्तावेज देकर बसाया गया और वे वर्षों से वहां रह रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने कानूनी और मानवीय दोनों पहलुओं को संतुलित करने की चुनौती है।

अब सबकी निगाहें उपखण्ड अधिकारी रेलमगरा की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो सरपंच, सचिव और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई, पट्टों के निरस्तीकरण और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यह प्रकरण तय करेगा कि राजसमन्द में सामुदायिक भूमि की सुरक्षा को लेकर प्रशासन कितना सख्त रुख अपनाता है और क्या दस वर्षों से चली आ रही फाइलों की परतें पूरी तरह खुल पाएंगी।

कुशीनगर में विदेश नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी

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डुमरी गांव की महिला से जालसाजों ने ऐंठी रकम, भारत सरकार से जुड़ा विभाग बताकर दिया झांसा

कुशीनगर। जिले के कसया विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत डुमरी में विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक महिला से ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़िता संध्या देवी ने समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली, उत्तर प्रदेश के माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की है। मामला हाटा तहसील क्षेत्र का है, जहां जालसाजों ने खुद को भारत सरकार से संबंधित विभाग से जुड़ा बताकर भरोसा जीत लिया और फिर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया।

ग्राम डुमरी निवासी संध्या देवी पत्नी सोनू शर्मा के अनुसार, कुछ लोगों ने उनसे संपर्क कर विदेश में नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया। आरोप है कि आरोपियों ने सरकारी प्रक्रिया, वीजा, मेडिकल और अन्य औपचारिकताओं का हवाला देते हुए चरणबद्ध तरीके से रकम जमा करवाई। शुरुआत में विश्वास पैदा करने के लिए कथित दस्तावेज और फर्जी आश्वासन भी दिए गए। पीड़िता का कहना है कि रकम लेने के बाद आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया।

29 अक्टूबर 2025 को दर्ज कराई गई शिकायत में पीड़िता ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर संगठित तरीके से ठगी की गई है। परिवार का कहना है कि मेहनत की कमाई इस उम्मीद में दी गई थी कि विदेश में नौकरी लगने से आर्थिक स्थिति सुधरेगी, लेकिन अब परिवार सदमे में है।

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस तरह के गिरोह ग्रामीण क्षेत्रों को निशाना बनाकर बेरोजगारी का फायदा उठा रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, शिकायत को भारत सरकार से संबंधित विभाग के समक्ष अग्रसारित किया गया है। मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे गिरोहों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह की ठगी का शिकार न होना पड़े। वहीं पुलिस और प्रशासन से अपील की गई है कि विदेश नौकरी दिलाने के नाम पर सक्रिय दलालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए।

 

सुल्तानपुर में चरागाह व श्मशान भूमि पर नामांतरण खारिज, डेढ़ साल से कब्जे का आरोप

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जनपद सुल्तानपुर की तहसील सदर अंतर्गत ग्राम कोड 169747 में चरागाह व श्मशान भूमि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले लगभग डेढ़ साल से सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर कब्जा कर चुके है, और उसे जमीन को इस्तेमाल कर रहे हैं गेट भी लगवा लिया, जबकि राजस्व अभिलेखों में यह भूमि ग्राम समाज के नाम दर्ज है।
फसली वर्ष 1430–1435 (01 जुलाई 2022 से 30 जून 2028) की खतौनी के अनुसार गाटा संख्या 2175 बारागाह (स्थाई पशुचर भूमि) के रूप में दर्ज है। यह भूमि श्रेणी 5-3-ग/कृषि योग्य बंजर स्थाई पशुचर भूमि में आती है। कुल क्षेत्रफल 0.6320 हेक्टेयर दर्ज है तथा भू-राजस्व शून्य दशम दर्शाया गया है।
इसके अलावा खतौनी में गाटा संख्या 2167, क्षेत्रफल 0.7590 हेक्टेयर, “मरघट (श्मशान)” के रूप में अंकित है। नामांतरण/खातेदार श्रेणी परिवर्तन से संबंधित प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत हुआ था, जिसे खारिज कर दिया गया।
प्रधान व पति पर आरोप
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान अजरा बेगम तथा उनके पति असलम बेग (उर्फ सब्बू) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कथित रूप से कब्जे का विरोध करने वालों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस में शिकायत करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि पुलिस पर भी पक्षपात का संदेह है, हालांकि इस संबंध में प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बताया जा रहा है कि संबंधित पक्ष का पता पोस्ट सैफुल्लागंज, जनपद सुल्तानपुर (पिन कोड 228119) है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल स्थलीय जांच कराकर चरागाह और श्मशान जैसी सामुदायिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराए तथा यदि धमकी के आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।

कानून गो और लेखपाल यह पुष्टि कर चुके हैं की चरागाह जमीन है और इस पर कब्जा किया गया है।

दोस्ती में दरार: साझा Instagram ID पर विवाद, वीडियो डिलीट करने और ब्लॉक करने का आरोप; दरभंगा के युवक ने लगाई न्याय की गुहार

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दरभंगा। सोशल मीडिया पर साथ मिलकर वीडियो बनाने वाले दो दोस्तों के बीच अब गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। कमतौल थाना क्षेत्र निवासी रंजीत साहनी ने आरोप लगाया है कि उनके दोस्त इंडिया विक्रम निषाद ने साझा इंस्टाग्राम आईडी का दुरुपयोग करते हुए उनके वीडियो डिलीट कर दिए, उन्हें ब्लॉक कर दिया और अब किसी अन्य युवती के साथ कंटेंट बना रहे हैं।

रंजीत साहनी के अनुसार, वह और महेशसता निवासी विक्रम निषाद पिछले करीब दो वर्षों से साथ मिलकर वीडियो बनाते थे। दोनों एक ही इंस्टाग्राम आईडी “PK 123” नाम से संचालित करते थे और संयुक्त रूप से वीडियो अपलोड करते थे। रंजीत का दावा है कि इस आईडी को बढ़ाने में उन्होंने काफी मेहनत की और नियमित रूप से कंटेंट तैयार किया।

पीड़ित का आरोप है कि कुछ समय पहले उन्होंने नया मोबाइल फोन खरीदा था, जिसे विक्रम ने मांग लिया। रंजीत के अनुसार, उन्होंने दोस्ती में भरोसा करते हुए नया फोन दे दिया और पुराना फोन अपने पास रख लिया। उस समय यह तय हुआ था कि इंस्टाग्राम आईडी दोनों की साझा रहेगी और जरूरत पड़ने पर एक्सेस वापस कर दिया जाएगा। लेकिन अब स्थिति बदल गई है।

रंजीत का कहना है कि वह जब भी कोई नया वीडियो अपलोड करते हैं, विक्रम निषाद उसे डिलीट कर देते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें आईडी से पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है। आरोप है कि विक्रम अब मुजफ्फरपुर के हथौड़ी क्षेत्र की रहने वाली श्वेता कुमारी के साथ वीडियो बना रहे हैं और रंजीत को पूरी तरह अलग कर दिया गया है। फोन कॉल करने पर भी जवाब नहीं दिया जा रहा।

इस पूरे विवाद से आहत रंजीत साहनी ने अपील की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और संबंधित लोग इस मामले को गंभीरता से लें। उनका कहना है कि उन्होंने मेहनत से जो पहचान बनाई थी, वह अब खतरे में है। वे चाहते हैं कि उनकी अनुमति के बिना बनाई जा रही वीडियो पर रोक लगे और भविष्य में उस आईडी से होने वाली किसी भी आय या लाभ में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

सोशल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि साझा अकाउंट चलाने के मामलों में लिखित समझौता और स्पष्ट पासवर्ड सुरक्षा जरूरी होती है, अन्यथा इस तरह के विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। फिलहाल मामला आपसी भरोसे और डिजिटल अधिकारों के टकराव का बन गया है। अब देखना होगा कि संबंधित पक्ष आपसी समझौते से समाधान निकालते हैं या कानूनी रास्ता अपनाया जाता है।

 

रातोंरात टूटा दरवाजा, दो लाख का सामान गायब… घर पर कब्जे का आरोप; पीड़िता बोली– 5 साल पहले खरीदा था मकान, अब परिवार संग बेघर

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गोरखपुर।

रामगढ़ताल थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसके खरीदे हुए मकान का दरवाजा तोड़कर न केवल कीमती सामान चोरी कर लिया गया, बल्कि घर पर जबरन कब्जा भी कर लिया गया। पीड़िता कुसुम देवी पत्नी मनोज, निवासी ग्राम मझरिया, थाना रामगढ़ताल, जिला गोरखपुर ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।

पीड़िता के अनुसार उन्होंने करीब पांच वर्ष पहले महेश मौर्या से मकान खरीदा था। मकान के बगल में खाली जमीन भी थी। आरोप है कि विक्रेता पक्ष ने बाद में साजिश के तहत गणेश निषाद नामक व्यक्ति को आगे कर दिया और फिर कथित रूप से मकान कृष्णा देवी को बेच दिया।

कुसुम देवी का कहना है कि 18 फरवरी की रात लगभग 11 बजे मीना देवी पत्नी मनोज निषाद समेत अन्य लोगों ने मिलकर उनके मकान का दरवाजा तोड़ दिया। आरोप है कि घर में रखा लगभग दो लाख रुपये का कीमती सामान, विद्युत मीटर और अन्य घरेलू वस्तुएं जबरन निकाल ली गईं। इतना ही नहीं, दरवाजा उखाड़कर अपनी ओर से नया दरवाजा लगा दिया गया और मकान पर कब्जा कर लिया गया।
पीड़िता ने बताया कि घटना के समय उनका परिवार अस्पताल में था। दामाद का पैर टूटने के कारण पूरा परिवार इलाज के लिए बाहर गया हुआ था। इसी दौरान इस वारदात को अंजाम दिया गया। जब 19 फरवरी की सुबह उन्हें जानकारी मिली तो वे तत्काल थाने पहुंचे, लेकिन आरोप है कि उनकी शिकायत पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कुसुम देवी का कहना है कि मकान, बिजली कनेक्शन और पानी का कनेक्शन उनके नाम पर है। इसके बावजूद उन्हें घर से बेदखल कर दिया गया है। अब स्थिति यह है कि परिवार के पास रहने के लिए छत नहीं बची और वे दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि मामले में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे मामलों में दबंगई और बढ़ सकती है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।

 

लुधियाना जिले के रायकोट तहसील के गांव फेरूराईं के रहने वाले बलजीत सिंह ने अपनी बहू और उसके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं

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उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बेटे इंद्रजीत सिंह की शादी बड़े अरमानों के साथ 12 सितंबर 2019 को गगनदीप कौर निवासी बाजाखाना, जिला फरीदकोट के साथ गुरुद्वारा रामसर साहिब पातशाही छठी, बाजाखाना में पूरी गुरमर्यादा के अनुसार करवाई थी।

बलजीत सिंह का कहना है कि बहू ने आईएल्ट्स की परीक्षा पास की हुई थी और इसी उम्मीद में उन्होंने करीब 25 लाख रुपये खर्च कर अपने बेटे और बहू को कनाडा भेजा। इसके लिए उन्होंने कर्ज लिया और अपनी जमीन तक बेच दी। उनका आरोप है कि कनाडा पहुंचने के बाद बहू गगनदीप कौर ने उनके बेटे से साफ कह दिया कि अब दोनों के रास्ते अलग हैं और उसका मकसद केवल कनाडा आना था। इसके बाद से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं।

पीड़ित पिता का कहना है कि जब उन्हें इस बारे में पता चला तो उन्होंने बहू से फोन पर बात की, लेकिन उसने साथ रहने से इनकार कर दिया। जब खर्च किए गए पैसों की बात उठाई गई तो उसने कोई जवाब नहीं दिया और उनका नंबर ब्लॉक कर दिया। उन्होंने बताया कि उनका बेटा अभी तक कनाडा में स्थायी निवासी भी नहीं बन पाया है और मानसिक तनाव में जी रहा है।

बलजीत सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बहू अपने मामा के बेटे के साथ रह रही है और उसके साथ उसके अवैध संबंध हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में जब उन्होंने बहू के पिता गुरसेवक सिंह से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने न तो मुलाकात की और न ही फोन उठाया।

पीड़ित का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उनका परिवार पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक तंगी और तनाव के कारण उनका एक बेटा, जिसे वे मकान नहीं दिला सके, मानसिक दबाव में आकर दम तोड़ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि बहू द्वारा विदेश से भेजे गए पैसों से उसके पिता ने अपनी संपत्ति बढ़ा ली, प्लॉट खरीदे और मेडिकल स्टोर तक खोल लिया, जबकि वे खुद कर्ज और गिरवी रखे सोने के बोझ तले दबे हुए हैं।

बलजीत सिंह का कहना है कि उन्होंने केवल इस भरोसे पर शादी की थी कि बहू आईएल्ट्स पास है और उनके बेटे को विदेश ले जाकर दोनों मेहनत करेंगे और परिवार का सहारा बनेंगे। लेकिन अब वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और पूरे मामले की जांच की मांग की है।

प्यार के नाम पर धोखा, शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण, मानसिक उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप

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कथित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर महिला ने लगाए गंभीर आरोप
जयपुर, राजस्थान।
राजस्थान से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने कथित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर प्यार के नाम पर धोखा, शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण, मानसिक उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए मजबूर करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

पीड़िता किरणजीत कौर (यादव) ने मुख्यमंत्री राजस्थान को भेजे अपने शिकायती पत्र में बताया कि आरोपी अधिकारी ने सोशल मीडिया और मोबाइल चैट के जरिए पहले उससे संपर्क किया और विश्वास जीतकर भावनात्मक रूप से अपने जाल में फंसा लिया। बातचीत धीरे-धीरे निजी होती गई और आरोपी ने उससे प्यार का इजहार करते हुए शादी और लिव-इन रिलेशन का प्रस्ताव रखा।

पीड़िता का आरोप है कि शादी का भरोसा देकर आरोपी ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन बाद में अपने वादों से मुकर गया। महिला का कहना है कि आरोपी ने उसे भावनात्मक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि वह गहरे मानसिक तनाव में चली गई।

शिकायत के अनुसार आरोपी अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार चैट और वीडियो कॉल करता रहा, जिससे महिला का भरोसा और गहरा होता गया। लेकिन जब महिला ने रिश्ते को स्पष्ट करने और शादी की बात की, तो आरोपी ने दूरी बनानी शुरू कर दी और उसे टालने लगा। पीड़िता का आरोप है कि उसे ऐसे जवाब दिए गए, जिससे उसकी मानसिक स्थिति बेहद खराब हो गई और वह खुद को असहाय महसूस करने लगी।

महिला ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि आरोपी की प्रताड़ना और धोखे के कारण वह मानसिक रूप से इतनी कमजोर हो गई कि उसे आत्महत्या जैसे विचार आने लगे। उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि उसे न्याय नहीं मिला, तो उसकी स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी आरोपी अधिकारी की होगी।

पीड़िता ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कॉल डिटेल और चैट रिकॉर्ड की जांच करने तथा आरोपी अधिकारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

यह मामला न केवल एक महिला के विश्वास के साथ कथित धोखे और शारीरिक-मानसिक शोषण का है, बल्कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी के आचरण और सत्ता के दुरुपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजर प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी है।